हिन्दुस्तान की आजादी के बाद का सफर बताएगी वरिष्ठ पत्रकार राजेश बादल की ये नई किताब

जब यह देश आजाद हुआ तो किस हाल में था। बंटवारे की छुरी कलेजे पर चली थी। अंग्रेजों ने जी भरकर लूटा था।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 13 October, 2021
Last Modified:
Wednesday, 13 October, 2021
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जब यह देश आजाद हुआ तो किस हाल में था। बंटवारे की छुरी कलेजे पर चली थी। अंग्रेजों ने जी भरकर लूटा था। न पेट भर अनाज था, न तन ढकने को कपड़े और न बच्चों के लिए दूध। पढ़ने के लिए स्कूल, कॉलेज, इंजीनियरिंग, मेडिकल कॉलेज नाम मात्र के थे। उद्योग धंधे नहीं थे। हर हाथ को काम नहीं था। सब कुछ छिन्न-भिन्न था। इस हाल में भारत ने अपने आप को समेटा और तिनका-तिनका कर अपना मजबूत लोकतांत्रिक घोंसला बनाया। अफसोस हमारी नई पीढ़ी संघर्ष के उस दौर से परिचित नहीं है।

मैनें इन नौजवानों के लिए एक छोटी सी पुस्तिका लिखी है- ‘हिन्दुस्तान का सफ़र’। दरअसल इससे पहले मैनें इसी विषय पर एक फिल्म बनाई थी। उसे जाने माने गांधीवादी और गांधी जी के साथ वर्षों काम कर चुके प्रेमनारायण नागर ने देखा। नागर जी 96 बरस के हैं और सदी के सुबूत की तरह हमारे सामने हैं। उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए भोपाल के गौरव फाउंडेशन ने यह पुस्तिका प्रकाशित की है।

गौरव फाउंडेशन के प्रेरणा पुरुष और माधव राव सप्रे स्मृति राष्ट्रीय संग्रहालय के संस्थापक पद्मश्री विजयदत्त श्रीधर की देख रेख में यह पुस्तिका उपयोगी बन पड़ी है। इसका लोकार्पण उज्जैन विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के वाग्देवी भवन में हुआ। इसमें श्रीधरजी के अलावा स्वयं प्रेमनारायण नागर जी, विवि के कुलपति अखिलेश पांडे, पूर्व कुलपति डॉक्टर रामराजेश मिश्र, विभागाध्यक्ष डॉक्टर प्रोफेसर शैलेन्द्र शर्मा, जानी-मानी लेखिका डॉक्टर मंगला अनुजा, नेहरू युवा केंद्र के संभागीय निदेशक श्री अरविन्द श्रीधर समेत अनेक विद्वान, पत्रकार, लेखक और छात्र-छात्राएं मौजूद थे।

ज़ाहिर है इस कार्यक्रम में नागरजी को सुनने से बेहतर और कोई अनुभव नहीं हो सकता था। आज भी उन्हें अस्सी पचासी साल पुराने भारत की कहानी याद है। सन 1924 में जन्में श्री नागर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के निर्देश पर हजारों कार्यकर्ताओं के साथ गांवों को मजबूत बनाने के मिशन पर निकल पड़े थे। गांधीजी ने 8 अक्टूबर, 1946 को खादी ग्रामोद्योग से जुड़े अपने कार्यकर्ताओं को बुलाया और उनसे कहा, ‘असल तस्वीर देखनी है तो शहरों में नहीं गांवों में जाओ। ग्रामीण क्षेत्रों के काम-धंधों को बचाना ही पर्याप्त नहीं है। उनमें सुधार लाकर गांव के लोगों को रोजगार भी देना होगा। श्री नागर कहते हैं, ‘बापू के निर्देश पर मैं और मेरे साथी ग्वालियर तहसील में भांडेर से पंद्रह किलोमीटर दूर गांव उड़ीना पहुंचे। उन दिनों वहां जाने के लिए कोई सड़क नहीं थी और न कोई अन्य बुनियादी ढांचा। बरसात के दिनों में तो दो नदियों को तैरकर पार करना पड़ता था। मैं उस क्षेत्र में एक साल तक काम करता रहा।

उन्हीं दिनों पास के गांव भिटारी भरका में आपसी संघर्ष में एक दलित श्रमिक को मार डाला गया। पास के पड़ोखर थाने से पुलिस आई। भांडेर से तहसीलदार जांच के लिए उस श्रमिक के घर पहुंचा। उस परिवार की गरीबी को देखकर वह द्रवित हो गया। उसने अंतिम संस्कार और कुछ समय तक पेट भरने के लिए कुछ आर्थिक सहायता देनी चाही। झोपड़ी के द्वार पर श्रमिक का शव रखा था। देहरी पर उसकी बेटी बैठी आंसू बहा रही थी। गांव के चौकीदार ने उससे कहा कि अपनी मां को बाहर लेकर आ। साहब कुछ मदद देना चाहते हैं। रोती हुई बेटी ने कहा कि अम्मा बाहर नहीं आएगी। उससे बार-बार कहा गया, लेकिन हर बार उसने मना कर दिया। जब बहुत देर तक उसने मां को नहीं बुलाया तो चौकीदार ने कहा कि मैं अंदर जाकर मिल लेता हूं। तब उस बिलखती बेटी ने बेबसी से कहा, ‘अम्मा बाहर नई आ सकत। वा नंगी बैठी है। उसके पास एकई धोती (साड़ी) हती। वा दद्दा (पिता) पै डार दई तो कैसें बाहर आहै"।

(इसी पुस्तिका- हिन्दुस्तान का सफ़र का एक अंश )

 

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दुनिया को अलविदा कह गए वरिष्ठ पत्रकार सतीश जुगरान

वरिष्ठ पत्रकार व न्यूज एजेंसी ‘भाषा’ के पूर्व विशेष संवाददाता सतीश जुगरान का शुक्रवार तड़के निधन हो गया।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 16 October, 2021
Last Modified:
Saturday, 16 October, 2021
SatishJugran4545

वरिष्ठ पत्रकार व न्यूज एजेंसी ‘भाषा’ के पूर्व विशेष संवाददाता सतीश जुगरान का शुक्रवार तड़के निधन हो गया। वह 80 वर्ष के थे।

परिवार के सूत्रों ने बताया कि उनका निधन गुरुग्राम में उनके छोटे पुत्र के निवास पर हुआ। उनका बड़ा पुत्र स्वीडन में रह रहा है और उसके यहां आने पर जुगरान का अंतिम संस्कार 16 अक्टूबर को किया जाएगा। उनके परिवार में पत्नी, दो पुत्र एवं एक पुत्री है।

जुगरान 'भाषा' के विशेष संवाददाता के रूप में सेवानिवृत्त हुए थे। उन्होंने न्यूज एजेंसी के लिए गृह एवं रेलवे सहित विभिन्न मंत्रालयों को कवर किया। इससे पहले वह समाचार भारती और समाचार संवाद एजेंसियों में भी काम कर चके थे।

सेवानिवृत्त होने के बाद भी जुगरान काफी सक्रिय थे और रेडियो के लिए संसद समीक्षा व विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं के लिए स्वतंत्र लेखन करते थे। हंसमुख स्वभाव के जुगरान का मित्रता दायरा काफी विस्तृत था।

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श्रीनगर पहुंची प्रेस काउंसिल की टीम, करेगी पत्रकारों पर शोषण के आरोपों की जांच

प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) की फैक्ट फाइंडिंग कमेटी (तथ्यान्वेषी समिति) बुधवार को अपने तीन दिवसीय दौरे पर श्रीनगर पहुंची।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 14 October, 2021
Last Modified:
Thursday, 14 October, 2021
PCI

प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) की फैक्ट फाइंडिंग कमेटी (तथ्यान्वेषी समिति) बुधवार को अपने तीन दिवसीय दौरे पर श्रीनगर पहुंची। जम्मू-कश्मीर में पत्रकारों के उत्पीड़न की शिकायतों की जांच के लिए वह यहां आयी है। एक आधिकारिक प्रवक्ता ने यह जानकारी दी।

प्रवक्ता ने बताया कि यह कमेटी कश्मीर के मीडिया वर्ग के लोगों से मुलाकात करेगी। तीन सदस्यीय इस कमेटी में ‘दैनिक भास्कर’ के ग्रुप एडिटर प्रकाश दुबे, ‘द न्यू इंडियन एक्सप्रेस’ के गुरबीर सिंह और ‘जन मोर्चा’ के एडिटर डॉ. सुमन गुप्ता शामिल हैं।

‘पीडीपी’ अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती द्वारा घाटी में पत्रकारों के शोषण का आरोप लगाए जाने के बाद प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए यह कमेटी गठित की है।

गौरतलब है कि महबूबा मुफ्ती ने 27 सितंबर को ‘प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया’ और ‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ (Editors Guild of India) को एक पत्र लिखकर केंद्र शासित प्रदेश में पत्रकारों को धमकी, जासूसी और उत्पीड़न के आरोप लगाए थे और तथ्यों की जांच के लिए दोनों निकायों से क्षेत्र में एक टीम भेजने का आग्रह किया था।

उन्होंने कहा था कि पुलिस ने कई पत्रकारों पर छापे मारे और उनके व्यक्तिगत सामान जब्त किए। महबूबा मुफ्ती ने पीसीआई के अध्यक्ष को लिखे पत्र में कहा था कि उन्हें यकीन है कि वह जानते हैं कि पुलिस ने इस महीने की शुरुआत में कश्मीर में कई पत्रकारों के घरों पर छापेमारी की थी। उन्होंने कहा था कि यह सब 5 अगस्त, 2019 के बाद से देखने को मिल रहा है।

 

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बाइक सवार पत्रकार की पेड़ गिरने से मौत

केरल के पतनमतिट्टा जिले के अडूर में एक पत्रकार की रविवार को पेड़ गिरने से मौत हो गयी।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 12 October, 2021
Last Modified:
Tuesday, 12 October, 2021
journalist

केरल के पतनमतिट्टा जिले के अडूर में एक पत्रकार की रविवार को पेड़ गिरने से मौत हो गयी। बता दें कि पत्रकार का नाम पीटी राधाकृष्ण कुरुप था।

हादसा तब हुआ जब रविवार रात करीब रात 8 बजे वह अपना काम खत्म करके बाइक पर अडूर से घर जा रहे थे। वे चेन्नमपल्ली जंक्शन के पश्चिम में एक लकड़ी मिल के पास पहुंचे थे कि तभी सड़क किनारे खड़ा एक पेड़ उनकी बाइक पर गिर गया, जिसके चलते उनका हेलमेट भी निकल गया। वे बाइक से गिर गए।

बताया जा रहा है कि घटना के वक्त इलाके में तेज बारिश हो रही थी। राधाकृष्णन को अडूर जनरल अस्पताल और बाद में तिरुवल्ला के एक निजी मेडिकल कॉलेज में ले जाया गया, लेकिन उनकी जान नहीं बचायी जा सकी।

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शांति पुरस्कार मेरे अखबार के लिए है, मेरे लिए नहीं: रूसी नोबेल विजेता मुरातोव

‘नोवाया गजेटा' अखबार के संपादक दमित्री मुरातोव का कहना है कि उन्हें पता था कि उनका अखबार नोबेल शांति पुरस्कार की दौड़ में अग्रणी दावेदार है

Last Modified:
Monday, 11 October, 2021
DmitryMuratov575

‘नोवाया गजेटा' अखबार के संपादक दमित्री मुरातोव का कहना है कि उन्हें पता था कि उनका अखबार नोबेल शांति पुरस्कार की दौड़ में अग्रणी दावेदार है, क्योंकि उसने लगतार सत्ता, सरकार में भ्रष्टाचार और रूस में मानवाधिकार उल्लंघनों की आलोचना की।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुरातोव को जब सह-विजेता घोषित किया गया, तब प्रतिष्ठित पुरस्कार मिलने की बात उनके दिमाग में नहीं थी। शुक्रवार के दिन पुरस्कार की घोषणा के वक्त मुरातोव एक रिपोर्टर एलेना मिलाशिना के साथ फोन पर किसी खबर के बारे में चर्चा कर रहे थे।

मुरातोव ने ‘एखो मोस्कवी रेडियो’ से कहा, अचानक ओस्लो से एक ही बार कई फोन आए, लेकिन मिलाशिना से कोई लापरवाह आदमी ही कहेगा रुको, मैं ओस्लो से बात करूंगा और फिर तुम और मैं चर्चा करते रहेंगे। आखिरकार मुरातोव के अखबार के प्रवक्ता ने उन्हें बताया कि उन्होंने फिलीपीन की पत्रकार मारिया रसा के साथ, 2021 का नोबेल शांति पुरस्कार जीता है।

नोबेल शांति पुरस्कार विजेता ने इस बारे में चिंता जताई कि 'नोवाया गजेटा' को रूसी कानून के तहत 'विदेशी एजेंट' के रूप में नामित किया जा सकता है। यह शब्द उन संगठनों और व्यक्तियों पर लागू होता है, जो विदेशी धन प्राप्त करते हैं और अनिर्दिष्ट राजनीतिक गतिविधि में लगे हुए हैं।

‘नोवाया वर्मेया’ समाचार पत्रिका के संपादक येवगेनिया अलबाट्स ने कहा, ‘मुझे उम्मीद है कि मुरतोव को पुरस्कार मिलने से ‘नोवाया गजट’ को विदेशी एजेंट करार देने से परहेज किया जाएगा और एक तरह से रूसी पत्रकारों को भी सुरक्षा मिलेगी, जिन्हें अक्सर विदेशी एजेंट करार दिया जाता है। मुझे उम्मीद है कि इससे रूसी पत्रकारिता को इन कठिन परिस्थितियों में जीवित रहने में मदद मिलेगी।’

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पत्रकार पर ग्रेनेड से हमला, गई जान

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रान्त के हब इलाके में रविवार रात एक पत्रकार पर हुए हमले से उसकी जान चली गयी।

Last Modified:
Monday, 11 October, 2021
Attack Journalist

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रान्त के हब इलाके में रविवार रात एक पत्रकार पर हुए हमले से उसकी जान चली गई। बताया जा रहा है कि हमला ग्रेनेड से किया गया था, जो उनकी कार के पास ब्लास्ट हो गया। स्थानीय मीडिया ने एक पुलिस अधिकारी के हवाले से यह खबर दी है।

मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक, डॉन न्यूज पोर्टल ने बताया कि मरने वाले पत्रकार का नाम शाहिद ज़हरी है, जोकि टेलीविजन रिपोर्टर थे और ‘मेट्रो 1 न्यूज’ चैनल से जुड़े थे। 35 वर्षीय ज़हरी पर कथित तौर पर ग्रेनेड से तब हमला हुआ, जब वे अपनी कार से कहीं जा रहे थे।

गंभीर रूप से घायल ज़हरी और एक अन्य घायल साथी को पहले हब सिविल अस्पताल ले जाया गया और बाद में डॉ. रूथ पफौ सिविल अस्पताल कराची लाया गया, जहां ज़हरी को मृत घोषित कर दिया गया।

डॉन ने घटना के सीसीटीवी फुटेज का हवाला देते हुए बताया कि ज़हरी अपनी कार में थे और सड़क पर यू-टर्न लेते समय यह ब्लास्ट हुआ।

बताया जा रहा है कि प्रतिबंधित बलूच लिबरेशन आर्मी ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है।

फरवरी में, काउंसिल ऑफ पाकिस्तान न्यूजपेपर्स एडिटर्स (CPNE) की मीडिया फ्रीडम रिपोर्ट 2020 में खुलासा किया गया था कि साल 2020 में पेशेवर जिम्मेदारियों का निर्वहन करने वाले कम से कम 10 पत्रकारों की हत्या कर दी गई और कई अन्य लोगों को धमकाया गया, अपहरण किया गया, प्रताड़ित किया गया और झूठे आरोपों में गिरफ्तार किया गया।  

 

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समय की मांग है समाधानपरक पत्रकारिता: प्रो. संजय द्विवेदी

'जब पत्रकार तनाव में रहते है, तब वे जनता को तनावपूर्ण खबरें देने का माध्यम बनते हैं। जो हम दूसरों को देंगे, वही हमें मिलेगा, चाहे वो खुशी हो या तनाव। यही कुदरत का नियम है

Last Modified:
Monday, 11 October, 2021
sanjaydwivedi5477

'जब पत्रकार तनाव में रहते है, तब वे जनता को तनावपूर्ण खबरें देने का माध्यम बनते हैं। जो हम दूसरों को देंगे, वही हमें मिलेगा, चाहे वो खुशी हो या तनाव। यही कुदरत का नियम है। तनाव मुक्त जीवन के लिए आध्यात्म और राजयोग मैडिटेशन को जीवन में अपनाना बेहद आवश्यक है।' यह विचार भारतीय जन संचार संस्थान के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा पत्रकारों के लिए आयोजित तनाव प्रबंधन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में अपनी बात रखते हुए प्रो. द्विवेदी ने कहा कि जीवन में दोहरा आचरण तनाव का बड़ा कारण है। सादगीपूर्ण और सरल जीवन हमें तनाव मुक्त रखता है। उन्होंने कहा कि समाधानपरक पत्रकारिता समय की मांग है। पत्रकार सिर्फ समस्याओं और सवालों को ही जनता के सामने प्रस्तुत न करें, बल्कि समाधान और सुझाव भी जनता के सामने रखें।

इस अवसर पर राष्ट्रीय पत्रकार संघ के अध्यक्ष मनोज मिश्रा ने कहा कि रोजगार में स्थायित्व न होने और अनिश्चितता के परिवेश में पत्रकारों के तनाव में वृद्धि हुई है। ब्रह्माकुमारी संस्था को पत्रकारों की तनाव मुक्ति के लिए ऐसे ही सेमिनार और मैडिटेशन कार्यक्रम आयोजित करते चाहिए।

पत्रकारों के तनाव प्रबंधन में राजयोग मैडिटेशन की भूमिका पर अपने विचार रखते हुए ब्रह्माकुमारी संस्था की वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका बी.के. पूनम ने कहा कि दिव्यता और पवित्रता की ताकत सबसे बड़ी है। जहां ये शक्तियां है, वहां तनाव, काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार जैसे विकार दूर हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि जो हम सोचते हैं, उसका प्रभाव हमारे जीवन पर पड़ता है। इसलिए हमें अपनी सोच में, अपने कार्यस्थल और कार्य के प्रति श्रद्धा और सम्मान का भाव रखना चाहिए।

दिल्ली पत्रकार संघ के अध्यक्ष उमेश चतुर्वेदी ने कहा कि पत्रकारों को तनाव के कारण कई बीमारियां सौगात में मिल रहीं हैं। संघ के महासचिव अमलेश राजू ने कहा कि तनाव से दूर रहने के लिए कार्य में व्यस्त रहना एक अच्छा उपाय है।

कार्यक्रम की आयोजक एवं ब्रह्माकुमारी मीडिया प्रभाग की दिल्ली जोनल संयोजक राजयोगिनी बी.के. सुनीता ने कहा पत्रकारों के सशक्तिकरण के लिए ऐसे कार्यक्रम हम भविष्य में भी करते रहेंगे, क्योकि मीडिया सशक्त होगा तो जनता और देश भी शक्तिशाली होंगे।

कार्यक्रम में इंडियन जर्नलिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव निशाना ने भी अपने विचार साझा किए। धन्यवाद ज्ञापन वरिष्ठ पत्रकार व दिल्ली पत्रकार संघ के पूर्व अध्यक्ष मनोहर सिंह ने किया।

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इस बार दो पत्रकारों ने जीता नोबेल पुरस्कार

दुनिया का सबसे बड़ा प्रतिष्ठित सम्मान नोबेल पुरस्कार इस बार पत्रकारिता के क्षेत्र में दिया गया है। 

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 09 October, 2021
Last Modified:
Saturday, 09 October, 2021
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शांति के क्षेत्र में काम करने के लिए दिया जाने वाला दुनिया का सबसे प्रतिष्ठित सम्मान नोबेल पुरस्कार का ऐलान कर दिया गया है। नोबेल कमेटी ने इस बार इस सम्मान के लिए दो पत्रकारों को चुना है। इनमें एक पत्रकार रैप्लर मीडिया ग्रुप की संस्थापक अमेरिकी पत्रकार मारिया रेसा हैं और दूसरे रूस के पत्रकार दिमित्री मुरातोव हैं।

इन पत्रकारों को यह पुरस्कार उन देशों में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के वास्ते संघर्ष करने के लिए दिया गया है, जहां पत्रकारों को लगातार हमले और प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है जिसमें उनकी हत्या तक कर दी जाती है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नॉर्वे स्थित नोबेल समिति के अध्यक्ष बेरिट रीस-एंडर्सन ने कहा, ‘स्वतंत्र और तथ्य-आधारित पत्रकारिता सत्ता के दुरुपयोग, झूठ और युद्ध के दुष्प्रचार से बचाने का काम करती है।’

उन्होंने कहा, ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और प्रेस की स्वतंत्रता के बिना, राष्ट्रों के बीच भाईचारे को सफलतापूर्वक बढ़ावा देना, निरस्त्रीकरण और सफल होने के लिए एक बेहतर विश्व व्यवस्था को बढ़ावा देना मुश्किल होगा।’

बता दें कि फिलीपींस से नाता रखने वाली अमेरिकी पत्रकार मारिया रेसा न्यूज साइट रैप्लर (Rappler) की सह-संस्थापक हैं। उन्हें फिलीपींस में सत्ता की ताकत के गलत इस्तेमाल, हिंसा और तानाशाही के बढ़ते खतरे पर खुलासों के लिए पहले भी सम्मानित किया जा चुका है। नोबेल कमेटी ने अभिव्यक्ति की आजादी में उनकी भूमिका की प्रशंसा करते हुए उन्हें इस सम्मान का हकदार बताया।

नोबेल समिति ने कहा कि 2012 में रेसा द्वारा सह-संस्थापित समाचार वेबसाइट ‘रैपलर’ ने (राष्ट्रपति रोड्रिगो) दुतेर्ते शासन के विवादास्पद, जानलेवा नशीली दवाओं के विरुद्ध अभियान पर आलोचनात्मक दृष्टि से ध्यान केंद्रित किया है।’

उन्होंने और रैपर ने ‘यह भी साबित किया है कि कैसे फर्जी समाचारों के प्रचार, विरोधियों को परेशान करने और सार्वजनिक संवादों में हेरफेर करने के लिए सोशल मीडिया का उपयोग किया जा रहा है।’

रिपोर्ट्स के मुताबिक, नोबेल पुरस्कार मिलने की खबर पर प्रतिक्रिया देते हुए रेसा ने नॉर्वे टीवी2 चैनल से कहा कि, ‘सरकार (फिलीपीन की) निश्चित तौर पर खुश नहीं होगी।’

उन्होंने कहा, ‘मैं थोड़ी हैरान हूं। यह वास्तव में भावुक करने वाला है। लेकिन मैं अपनी टीम की ओर से खुश हूं और हम जो कुछ कर रहे हैं उसे मान्यता देने के लिए नोबेल समिति को धन्यवाद देना चाहती हूं।’

रेसा शांति का नोबेल पुरस्कार जीतने वाली फिलीपीन की पहली नागरिक और इस साल सम्मानित की जाने वाली पहली महिला हैं।

इसके अलावा रूस के दिमित्री मुरातोव को भी नोबेल शांति पुरस्कार देने का ऐलान किया गया। वे रूस के स्वतंत्र अखबार नोवाजा गजेटा के सह-संस्थापक हैं और पिछले 24 साल से पेपर के मुख्य संपादक रहे हैं। रूस में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के तानाशाही राज के बावजूद मुरातोव को अपने अखबार के जरिए सरकार की योजनाओं की आलोचना के लिए जाना जाता रहा है। नोबेल कमेटी ने कहा कि मुरातोव कई दशकों से रूस में अभिव्यक्ति की आजादी की रक्षा कर रहे हैं। 

नोबेल समिति ने कहा, ‘सत्ता के प्रति मौलिक रूप से आलोचनात्मक रवैये के साथ, नोवाया गजेटा आज रूस में सबसे स्वतंत्र समाचार पत्र है।’ समिति ने कहा, ‘समाचार पत्र की तथ्य-आधारित पत्रकारिता और पेशेवर सत्यनिष्ठा ने इसे रूसी समाज के निंदात्मक पहलुओं पर जानकारी का एक महत्वपूर्ण स्रोत बना दिया है जिसका उल्लेख शायद ही कभी अन्य मीडिया द्वारा किया जाता है।’

क्रेमलिन के प्रवक्ता दमित्री पेसकोव ने मुरातोव को पुरस्कार जीतने पर बधाई दी और ‘प्रतिभाशाली और बहादुर’ व्यक्ति के रूप में उनकी सराहना की।

मुरातोव ने कहा कि वह अपने पुरस्कार का इस्तेमाल उन स्वतंत्र पत्रकारों की मदद के लिए करेंगे जिन्होंने अधिकारियों की ओर से अत्यंत दबाव का सामना किया है।

रीस-एंडर्सन ने बताया कि शांति पुरस्कार अतीत में भी पत्रकारों को दिया गया है, जिसमें इटली के अर्नेस्टो तेओडोरो मोनेटा भी शामिल हैं, जिन्हें 1907 में "प्रेस और शांति बैठकों में उनके काम के लिए" यह पुरस्कार दिया गया था।

वर्ष 1935 में, कार्ल वॉन ओस्सिएट्ज़की को "विचार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के प्रति उनके ज्वलंत प्रेम के लिए" नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उन्होंने खुलासा किया था कि जर्मनी प्रथम विश्व युद्ध के बाद गुप्त रूप से फिर से सशस्त्र हो रहा है।

रीस-एंडर्सन ने फर्जी समाचारों के प्रसार के कारण आज की दुनिया में स्वतंत्र अभिव्यक्ति के जोखिमों पर भी ध्यान दिया और कहा कि सार्वजनिक बहस में हेरफेर करने में फेसबुक की भूमिका के लिए रसा का रुख आलोचनात्मक रहा है।

प्रतिष्ठित पुरस्कार के साथ एक स्वर्ण पदक और एक करोड़ स्वीडिश क्रोनर (11.4 लाख डॉलर से अधिक) प्रदान किए जाते हैं। पुरस्कार राशि, पुरस्कार के संस्थापक, स्वीडिश आविष्कारक अल्फ्रेड नोबेल द्वारा छोड़ी गई वसीयत से आती है, जिनकी मृत्यु 1895 में हुई थी।

मीडिया अधिकार समूह ‘रिपोर्टर्स विदआउट बॉर्डर्स’ ने पत्रकारों को नोबेल शांति पुरस्कार दिए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त की है।

सोमवार को, नोबेल समिति ने अमेरिकियों-डेविड जूलियस और आर्डम पातापूशियन को उनकी इन खोजों कि मानव शरीर तापमान और स्पर्श को कैसे समझता है, शरीर विज्ञान या चिकित्सा क्षेत्र का नोबेल पुरस्कार देने की घोषणा की थी।

मंगलवार को भौतिकी का नोबेल पुरस्कार तीन वैज्ञानिकों को देने की घोषणा की गई, जिनके काम ने प्रकृति की जटिल शक्तियों को समझाने और भविष्यवाणी करने में मदद की, जिसमें जलवायु परिवर्तन की समझ का विस्तार करना शामिल है।

बेंजामिन लिस्ट और डेविड डब्ल्यू.सी. मैकमिलन को बुधवार को रसायन विज्ञान के नोबेल पुरस्कार के विजेताओं के रूप में नामित किया गया था जिन्होंने अणुओं के निर्माण के लिए एक आसान और पर्यावरण की दृष्टि से स्वच्छ तरीका खोजने की दिशा में काम किया, जिसका उपयोग दवाओं और कीटनाशकों सहित यौगिकों को बनाने के लिए किया जा सकता है।

साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार बृहस्पतिवार को ब्रिटेन में रह रहे तंजानियाई लेखक अब्दुल रजाक गुरनाह को देने की घोषणा की गई थी, जिन्हें "उपनिवेशवाद के प्रभावों और शरणार्थियों की स्थिति" संबंधी रचना कार्य के लिए इस पुरस्कार के वास्ते नामित किया गया।

अगले सोमवार को अर्थशास्त्र के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए पुरस्कार की घोषणा किए जाने की संभावना है।

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जब ये चारों 'C' मिलते हैं, तब पूरा होता है डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन: प्रो. द्विवेदी

'भारतीय जनसंचार संस्थान' (आईआईएमसी) के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने नवागत विद्यार्थियों से संवाद कर उन्हें करियर में आगे बढ़ने के टिप्स दिए।

Last Modified:
Friday, 08 October, 2021
IIMC

भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने नवागत विद्यार्थियों से संवाद कर उन्हें करियर में आगे बढ़ने के टिप्स दिए। इस दौरान प्रो. द्विवेदी का कहना था, ‘समय के साथ मीडिया की भूमिका बदली है। आज पारंपरिक मीडिया स्वयं को डिजिटल मीडिया में परिवर्तित कर रहा है। इस 'डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन' को अगर कोई चला रहा है, तो वो चार 'C' हैं। इन चार 'C' का मतलब है, Content (कंटेंट), Communication (कम्युनिकेशन), Commerce (कॉमर्स) और Context (कॉन्टेक्स्ट)। जब ये चारों 'C' मिलते हैं, तब ये 'डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन' पूरा होता है।’

प्रो. द्विवेदी ने कहा कि हमें भारत को सिर्फ बीपीओ और आउटसोर्सिंग के जरिये तकनीकी विश्व शक्ति नहीं बनाना है, बल्कि उसे एक ज्ञान समाज में तब्दील करना है। तकनीक भारत में सामाजिक परिवर्तनों तथा आर्थिक विकास का निरंतर चलने वाला जरिया बन सकती है और भारतीय भाषाओं की इसमें बड़ी भूमिका होने वाली है।

उन्होंने कहा कि भाषाई मीडिया को हम भारत की आत्मा कह सकते हैं। आज लोग अपनी भाषा के मीडिया की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। इसलिए भाषाई मीडिया का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है। इंटरनेट के द्वारा जहां सूचना तंत्र मजबूत हुआ है, वहीं भाषाई मीडिया के लिए संभावनाओं के नए द्वार खुले हैं।  

प्रो. द्विवेदी के अनुसार, ’विद्यार्थियों की सफलता ही किसी संस्थान, उसके शिक्षकों और प्रबंधकों की सफलता है। सिर्फ पत्रकार तैयार करना हमारा लक्ष्य नहीं है। हम चाहते हैं कि हम ग्लोबल लीडर्स पैदा करें, जो आने वाले दस वर्षों में पत्रकारिता और जनसंचार की दुनिया में सबसे बड़े और वैश्विक स्तर के नाम बनें।’

कार्यक्रम का संचालन डीन छात्र कल्याण प्रो. (डॉ.) प्रमोद कुमार ने एवं धन्यवाद ज्ञापन विज्ञापन एवं जनसंपर्क विभाग की पाठ्यक्रम निदेशक प्रो. (डॉ.) अनुभूति यादव ने किया। कार्यक्रम में ’आईआईएमसी ’ के सभी केंद्रों के विद्यार्थियों एवं प्राध्यापकों ने हिस्सा लिया।

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लखीमपुर हिंसा में मारे गए पत्रकार को लेकर प्रेस परिषद ने यूपी सरकार से मांगा जवाब

भारतीय प्रेस परिषद (पीसीआई) ने लखीमपुर खीरी में हुई हिंसक घटना में एक निजी टीवी चैनल के पत्रकार रमन कश्यप की मौत पर गहरी चिंता जताई है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 07 October, 2021
Last Modified:
Thursday, 07 October, 2021
journalistraman4554

भारतीय प्रेस परिषद (पीसीआई) ने लखीमपुर खीरी में हुई हिंसक घटना में एक निजी टीवी चैनल के पत्रकार रमन कश्यप की मौत पर गहरी चिंता जताई है और स्वत: संज्ञान लिया। प्रेस परिषद ने उत्तरप्रदेश सरकार से इस पर जवाब तलब किया है।

प्रेस परिषद के अध्यक्ष जस्टिस चंद्रमौली प्रसाद ने 3 अक्टूबर की इस घटना का स्वत: संज्ञान लेते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक के माध्यम से प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि वह पत्रकार रमन कश्यप की मौत से संबंधित घटना की विस्तृत रिपोर्ट जल्द-से-जल्द सौंपे।

बता दें कि लखीमपुर खीरी में दो दिन पहले किसानों और भाजपा कार्यकर्त्ताओं के बीच हुई भिड़ंत में एक पत्रकार सहित आठ लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। हिंसा में मारे गए 30 वर्षीय स्थानीय पत्रकार रमन कश्यप साधना टीवी के लिए काम करते थे। बताया जाता है कि रमन कश्यप 3 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा के दौरान बुरी तरह जख्मी हो गए थे, जिसके बाद 4 अक्टूबर को उनकी मौत हो गई थी।

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इस बड़े उद्देश्य के लिए शैक्षिक संचार संघ और MCU के बीच हुआ करार

माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता और संचार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. के.जी. सुरेश और सीईसी के निदेशक प्रो. जेबी नड्डा ने एमओयू पर किए हस्ताक्षर

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 07 October, 2021
Last Modified:
Thursday, 07 October, 2021
MOU

एशिया के पहले मीडिया विश्वविद्यालय ‘माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता और संचार विश्वविद्यालय’ (MCU), भोपाल ने उच्च शिक्षा स्तर पर शिक्षण और सीखने की प्रथाओं को सुविधाजनक बनाने और मल्टीमीडिया शैक्षिक सामग्री विकसित करने के लिए बुधवार को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अंतर विश्वविद्यालय संगठन ‘शैक्षिक संचार संघ’ (सीईसी) के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए।

समझौता ज्ञापन पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. के.जी. सुरेश और निदेशक, सीईसी प्रो जेबी नड्डा ने हस्ताक्षर किए। इससे विश्वविद्यालय सीईसी का संबद्ध सदस्य बन जाएगा। एमओयू के तहत, विश्वविद्यालय अपने शिक्षाविदों/शिक्षकों को एमओओसीएस, सीईसी प्लेटफॉर्म के लिए डिजिटल सामग्री विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करेगा।

शैक्षिक संस्थानों को दी जाने वाली डिजिटल सामग्री के अलावा, समझौता ज्ञापन में मल्टीमीडिया सामग्री विकास के लिए कार्यशाला और प्रशिक्षण कार्यक्रम, क्षमता निर्माण की भी परिकल्पना की गई है। विशिष्ट ज्ञान क्षेत्रों में डिप्लोमा पाठ्यक्रम प्रदान करने और प्रमाणित करने के लिए संयुक्त रूप से समूहीकृत एमओओसी पाठ्यक्रम प्रदान करने के लिए भी कार्य करेगा

इस अवसर पर प्रो. नड्डा ने कहा कि दो संस्थानों के बीच तालमेल व्यापक शैक्षणिक समुदाय के लिए फायदेमंद साबित होगा। वहीं, प्रो. सुरेश ने इस एमओयू को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन के लिए मील का पत्थर बताया।

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