यह इस फोरम का आठवां संस्करण है और पहली बार इसका आयोजन भारत में हो रहा है। तीन दिवसीय यह कार्यक्रम 13 से 15 अक्टूबर तक नई दिल्ली में आयोजित किया जा रहा है।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार, 13 अक्टूबर को नई दिल्ली में आयोजित ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम (Bloomberg New Economy Forum) 2026 को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने वैश्विक अर्थव्यवस्था, तकनीक, ऊर्जा, व्यापार और बदलते अंतरराष्ट्रीय हालात पर अपनी बात रखी। यह इस फोरम का आठवां संस्करण है और पहली बार इसका आयोजन भारत में किया जा रहा है। तीन दिवसीय इस कार्यक्रम में दुनिया के 500 से अधिक सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के प्रमुख नेताओं के शामिल होने की योजना है।
इस फोरम की स्थापना ब्लूमबर्ग के संस्थापक माइकल आर. ब्लूमबर्ग (Michael R. Bloomberg) ने 2018 में की थी। वह Bloomberg L.P. और Bloomberg Philanthropies के संस्थापक हैं। इस बार फोरम की थीम ‘A World in Play: Defining the New Levers of Power’ रखी गई है। इसका उद्देश्य वैश्विक अर्थव्यवस्था के सामने मौजूद चुनौतियों पर चर्चा करना और भविष्य की आर्थिक तरक्की के लिए मिलकर काम करने के रास्ते तलाशना है।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने माइकल ब्लूमबर्ग के साथ अपने संबंधों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि ब्लूमबर्ग ने अपनी 30 साल की यात्रा का उल्लेख करते हुए उन्हें अपना मित्र बताया था। मोदी ने भारत के प्रति ब्लूमबर्ग के लगाव की सराहना की और फोरम का पहली बार भारत में आयोजन करने के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह मंच अर्थव्यवस्था, तकनीक, ऊर्जा और अंतरराष्ट्रीय मामलों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर दुनिया के प्रमुख लोगों को एक साथ लाता है।
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में ‘Power to Empower’ यानी दूसरों को सशक्त बनाने की सोच पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में तकनीक, डेटा, ज्ञान और नवाचार ताकत के बड़े स्रोत बन गए हैं। हालांकि, महत्वपूर्ण यह है कि इस ताकत का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या तकनीक का लाभ कुछ लोगों तक सीमित रहना चाहिए या इससे लाखों लोगों के लिए नए अवसर पैदा होने चाहिए। मोदी ने कहा कि नियंत्रण करने की ताकत से आगे बढ़कर दूसरों को सक्षम बनाने, प्रतिस्पर्धा के बजाय सहयोग करने और अपनी सफलता के साथ दूसरों को भी सफल बनाने पर ध्यान देना चाहिए।
The greatest power is the power to empower! https://t.co/zG16Kh6G4b
— Narendra Modi (@narendramodi) October 13, 2026
भारत की डिजिटल व्यवस्था और ऊर्जा क्षेत्र में हुई प्रगति का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में करीब 80,000 प्रकाशन और 1,000 से अधिक टेलीविजन चैनल हैं। उन्होंने YouTube और Instagram पर भारत के करीब 50 करोड़ उपयोगकर्ताओं का भी जिक्र किया। ऊर्जा के क्षेत्र में मोदी ने बताया कि 2014 में भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता करीब 75 गीगावाट थी, जो अब बढ़कर लगभग 300 गीगावाट हो गई है। उन्होंने प्रधानमंत्री सूर्य घर और पीएम-कुसुम जैसी योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इनके जरिए सौर ऊर्जा को घरों और किसानों तक पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
वैश्विक हालात पर बात करते हुए मोदी ने कहा कि दुनिया महामारी, क्षेत्रीय युद्धों और सप्लाई चेन में बाधाओं जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। उन्होंने चिंता जताई कि सप्लाई चेन, ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, तकनीक और भुगतान प्रणालियों का इस्तेमाल कई बार दबाव बनाने के साधन के रूप में किया जा रहा है। ऐसे माहौल में देशों के बीच भरोसा और सहयोग पहले से अधिक जरूरी हो गया है। उन्होंने कहा कि दुनिया में इस्तेमाल होने वाली हर पांच में से एक जेनेरिक दवा भारत में बनती है और देश में 2,000 से अधिक ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर काम कर रहे हैं। प्रधानमंत्री के मुताबिक, भारत की प्रगति दूसरे देशों के साथ मिलकर आगे बढ़ने और साझा अवसर पैदा करने में है।
प्रधानमंत्री ने भारत में हुए आर्थिक और कारोबारी सुधारों का भी जिक्र किया। उन्होंने वस्तु एवं सेवा कर (GST) के जरिए देश में एक साझा बाजार बनाने, दिवाला कानून लागू करने, 29 श्रम कानूनों को चार श्रम संहिताओं में समेटने और कारोबार से जुड़े सैकड़ों छोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने जैसे कदमों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत में सुधार केवल मजबूरी में नहीं किए जाते, बल्कि यह सरकार का दृढ़ विश्वास है। उन्होंने भारतीय बैंकिंग व्यवस्था की मजबूत स्थिति का भी उल्लेख किया और कहा कि अनिश्चितताओं से भरी दुनिया में भारत भरोसे और स्थिरता का विकल्प पेश करता है।
इस फोरम की आधिकारिक घोषणा के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी और माइकल ब्लूमबर्ग के अलावा कई अंतरराष्ट्रीय कारोबारी, आर्थिक और राजनीतिक हस्तियां भी इसमें शामिल हैं। इनमें इटली के पूर्व प्रधानमंत्री और यूरोपीय सेंट्रल बैंक के पूर्व अध्यक्ष मारियो द्राघी (Mario Draghi), ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक (Rishi Sunak), अमेरिका की पूर्व वाणिज्य मंत्री जीना रायमोंडो (Gina Raimondo), Cisco Systems के चेयरमैन एवं CEO चक रॉबिंस (Chuck Robbins) और Blackstone के प्रेसिडेंट एवं COO जोनाथन ग्रे (Jonathan Gray) शामिल हैं। भारतीय उद्योग जगत से टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन, आदित्य बिड़ला समूह के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला, महिंद्रा समूह के चेयरमैन आनंद महिंद्रा और Biocon की संस्थापक एवं कार्यकारी चेयरपर्सन किरण मजूमदार-शॉ भी घोषित प्रतिभागियों में हैं। फोरम में वैश्विक अर्थव्यवस्था, भू-राजनीतिक बदलाव, तकनीकी विकास, ऊर्जा परिवर्तन और सप्लाई चेन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जा रही है।
अमन मेहरा ने बीएनपी पारिबा में डायरेक्टर और हेड, ट्रांजैक्शन बैंकिंग सेल्स के रूप में ज्वाइन किया है। वह नॉर्थ और ईस्ट इंडिया में सेल्स ऑपरेशंस की जिम्मेदारी संभालेंगे।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
अमन मेहरा (Aman Mehra) ने बीएनपी पारिबा (BNP Paribas) में डायरेक्टर और हेड, ट्रांजैक्शन बैंकिंग सेल्स - नॉर्थ और ईस्ट इंडिया के रूप में नई जिम्मेदारी संभाली है।
मेहरा इससे पहले डीबीएस बैंक (DBS Bank) के साथ करीब 18 वर्षों तक जुड़े रहे हैं। उनके पास बैंकिंग क्षेत्र में लगभग 25 वर्षों का अनुभव है, जिसमें करीब दो दशक ट्रांजैक्शन बैंकिंग में रहे हैं। उनके अनुभव में कैश मैनेजमेंट, ट्रेड और सप्लाई चेन फाइनेंस के साथ बिजनेस लीडरशिप, क्लाइंट एंगेजमेंट और टीम डेवलपमेंट शामिल हैं।
अपने करियर की शुरुआत में मेहरा ने स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक (Standard Chartered Bank) और सिटीग्रुप (Citigroup) में भी काम किया है।
प्रदर्शन कवर करने के दौरान पत्रकारों को हिरासत में लिए जाने पर पत्रकार वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष जितेन्द्र बच्चन ने दिल्ली पुलिस की आलोचना की और प्रेस की स्वतंत्रता का मुद्दा उठाया।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ और अन्य प्रदर्शनों को कवर करने के दौरान कई पत्रकारों को पुलिस ने हिरासत में लिया। बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया। इस मामले में पत्रकार वेलफेयर एसोसिएशन (PWA) के अध्यक्ष जितेन्द्र बच्चन (Jitendra Bachchan) ने दिल्ली पुलिस की तीखी आलोचना की है।
उन्होंने कहा कि भारत का संविधान अनुच्छेद 19(1)(ए) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की गारंटी देता है और प्रेस की स्वतंत्रता को भी इसी अनुच्छेद का हिस्सा माना गया है। उनके मुताबिक, यह कानून पत्रकारों के रिपोर्टिंग करने, सत्ता में बैठे लोगों से सवाल पूछने और जनहित के मुद्दों को सामने लाने के अधिकार की रक्षा करता है।
बच्चन ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि प्रदर्शनों के दौरान मीडियाकर्मियों और वकीलों को उनके पेशेवर दायित्व निभाने से नहीं रोका जाना चाहिए। इसके बावजूद शनिवार और रविवार को प्रदर्शनों के दौरान कई पत्रकारों को हिरासत में लिया गया।
उन्होंने कहा कि कई पत्रकारों के साथ बदसलूकी की खबरें आईं। कुछ के साथ धक्का-मुक्की की गई, जबकि कुछ को अलग-अलग जगहों पर प्रोटेस्ट कवर करने के दौरान हिरासत में लिया गया। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए अच्छी स्थिति नहीं बताया और कहा कि पुलिस की प्रेस के साथ यह ज्यादती है।
जिन प्रमुख पत्रकारों को हिरासत में लिया गया था, उनमें न्यूज़लॉन्ड्री (Newslaundry) के अश्विनी कुमार सिंह (Ashwini Kumar Singh), आस्था सव्यसाची (Aastha Savyasachi) के अनमोल प्रीतम (Anmol Pritam), स्क्रॉल (Scroll) के आयुष तिवारी (Ayush Tiwari) और शोएब दानियाल (Shoaib Daniyal), नवभारत टाइम्स (Navbharat Times) के परंजॉय गुहा ठाकुरता (Paranjoy Guha Thakurta), यूट्यूबर (YouTuber) श्याम मीरा सिंह (Shyam Meera Singh), ध्रुव राठी (Dhruv Rathee), ऑल्ट न्यूज़ (Alt News) की किंजल (Kinjal), स्वतंत्र पत्रकार निधि सुरेश (Nidhi Suresh) और एम. राजशेखर (M. Rajshekhar) समेत कई अन्य पत्रकारों के नाम शामिल हैं।
प्रदर्शन और विरोध-प्रदर्शनों की कवरेज करने वाले पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर फ्री स्पीच कलेक्टिव (Free Speech Collective) ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
प्रदर्शन और विरोध-प्रदर्शनों की कवरेज करने वाले पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर फ्री स्पीच कलेक्टिव (Free Speech Collective) ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। संगठन ने पुलिस की ओर से पत्रकारों को कथित तौर पर हिरासत में लेने, उनके साथ मारपीट करने, डराने और रिपोर्टिंग में बाधा डालने की घटनाओं को रोकने के लिए अदालत से बाध्यकारी दिशा-निर्देश बनाने की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से पत्रकारों समेत अन्य पेशेवरों के काम में बाधा नहीं डालने का निर्देश दिए जाने के बाद भी ऐसी घटनाएं सामने आई हैं।
याचिका के मुताबिक, प्रदर्शन की रिपोर्टिंग कर रहे पत्रकारों को कथित तौर पर घसीटा गया, उनके साथ धक्का-मुक्की की गई और उन्हें पुलिस वाहनों में बैठाकर ले जाया गया। कुछ पत्रकारों ने प्रेस कार्ड दिखाया या अपनी पहचान बताई, इसके बावजूद उनके साथ कथित तौर पर बल प्रयोग किया गया। याचिका में रिपोर्टिंग के दौरान एक मीडियाकर्मी के घायल होने का भी जिक्र है।
संगठन का कहना है कि भीड़ को नियंत्रित करने के नाम पर पत्रकारों के खिलाफ बल प्रयोग को सामान्य कार्रवाई नहीं माना जा सकता। इससे जनता तक जानकारी पहुंचाने की प्रक्रिया प्रभावित होती है और सरकारी कार्रवाई की स्वतंत्र रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों में डर पैदा होता है।
मौलिक अधिकारों की रक्षा की मांग
फ्री स्पीच कलेक्टिव ने संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(a), 19(1)(d) और 21 के तहत मिले मौलिक अधिकारों को लागू कराने की मांग की है। ये अनुच्छेद कानून के सामने समानता, बोलने और अभिव्यक्ति की आजादी, देश में स्वतंत्र रूप से आने-जाने के अधिकार और जीवन व व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सुरक्षा से जुड़े हैं।
याचिका में कथित घटनाओं की स्वतंत्र और तय समय-सीमा के भीतर जांच कराने, जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों की पहचान करने और हिरासत व बल प्रयोग की परिस्थितियों का पता लगाने के लिए पुलिस के रिकॉर्ड और वीडियो सुरक्षित रखने की मांग भी की गई है।
11 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने दिया था निर्देश
यह याचिका सुप्रीम कोर्ट के 11 अक्टूबर के उस निर्देश के बाद दाखिल की गई है, जिसमें अदालत ने कहा था कि वकीलों, पत्रकारों और अन्य पेशेवरों को अपने पेशेवर कर्तव्यों का पालन करने से किसी भी तरह नहीं रोका जाना चाहिए।
यह निर्देश मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध में हुए प्रदर्शनों के दौरान हिरासत में लिए जाने से जुड़े मामलों पर सुनवाई के बाद दिया गया था।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि अदालत के निर्देश के बाद भी पत्रकारों से जुड़ी कुछ और घटनाएं सामने आईं। संगठन का कहना है कि इससे साफ होता है कि प्रदर्शन और भीड़ नियंत्रण के दौरान पत्रकारों के साथ पुलिस के व्यवहार के लिए अलग और स्पष्ट सुरक्षा व्यवस्था जरूरी है।
10 और 11 अक्टूबर की घटनाओं का जिक्र
याचिका में 10 और 11 अक्टूबर को दिल्ली में प्रदर्शन की रिपोर्टिंग कर रहे पत्रकारों को कथित तौर पर हिरासत में लेने, घसीटने, उनके साथ धक्का-मुक्की करने और रिपोर्टिंग की जगह से दूर ले जाने की घटनाओं का जिक्र किया गया है। इसमें ऐसे मामले भी शामिल हैं, जिनमें पत्रकारों को पुलिस की कार्रवाई रिकॉर्ड करने से रोकने और एक कैमरापर्सन के घायल होने की बात कही गई है।
याचिका के अनुसार, प्रभावित पत्रकारों में Scroll, Newslaundry, Reuters, Business Standard, BOOMLive, India Today, The News Minute, Maktoob Media, The Indian Express, PTI और The Quint समेत कई मीडिया संस्थानों से जुड़े पत्रकार शामिल हैं।
प्रेस कार्ड दिखाने के बाद भी हिरासत में लेने का आरोप
याचिका में Scroll के पत्रकार आयुष तिवारी को एचकेएस सुरजीत भवन के बाहर हिरासत में लिए जाने की घटना का उल्लेख है। आरोप है कि उनके पास प्रेस पास होने के बावजूद उन्हें हिरासत में लिया गया।
इसी तरह, याचिका में Peek TV के पत्रकार वेदांता अग्रवाल और सारा खान को कनॉट प्लेस में कथित तौर पर घसीटकर हिरासत में लेने का जिक्र है। याचिका के अनुसार, दोनों ने अपने प्रेस कार्ड भी दिखाए थे।
इसके अलावा, The News Minute की पत्रकार निधि सुरेश और एक अन्य महिला पत्रकार को कई घंटे तक हिरासत में रखने का आरोप लगाया गया है। याचिका में यह भी कहा गया है कि The Hindu से जुड़ी एक महिला पत्रकार को उनकी पेशेवर पहचान स्वीकार किए जाने के बाद ही छोड़ा गया।
पत्रकारों को प्रदर्शनकारी समझने पर उठाए सवाल
याचिका में आरोप लगाया गया है कि पुलिस ने कुछ पत्रकारों को स्वतंत्र रूप से रिपोर्टिंग करने वाले लोगों के बजाय प्रदर्शन में शामिल लोगों की तरह देखा। संगठन का कहना है कि प्रदर्शनकारियों के पास मौजूद होने या मौके पर भ्रम की स्थिति के कारण पत्रकारों के खिलाफ कार्रवाई की गई।
याचिका में कहा गया है कि किसी प्रदर्शन के पास खड़े होने का मतलब यह नहीं है कि कोई पत्रकार उसमें शामिल है। खबर जुटाने के लिए पत्रकारों को कई बार प्रदर्शनकारियों के करीब खड़े होकर घटनाओं को देखना, सुनना और रिकॉर्ड करना पड़ता है।
संगठन के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों के पास मौजूद होने, कैमरा या रिकॉर्डिंग उपकरण रखने, सवाल पूछने या हिरासत की घटना रिकॉर्ड करने को बल प्रयोग या हिरासत का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए। ऐसा करने से पुलिस की कार्रवाई की निगरानी मुश्किल होती है और प्रदर्शन की रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों में डर पैदा हो सकता है।
सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेशों का भी दिया हवाला
याचिका में सुप्रीम कोर्ट के 18 अगस्त के आदेश का भी हवाला दिया गया है। उस आदेश के तहत छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की गई थी।
इस समिति को पुलिस कार्रवाई की जरूरत और उसके अनुपात, जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान, महिलाओं के खिलाफ कथित हिंसा और पुलिस की जवाबदेही जैसे मुद्दों की जांच करनी थी।
याचिका में 9 अक्टूबर को सार्वजनिक परिवहन पर लगी पाबंदियों के संबंध में हुई सुनवाई का भी उल्लेख है। उस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जरूरी सार्वजनिक परिवहन पर पूरी तरह रोक लगाना जरूरत से ज्यादा कदम लग रहा है। अदालत ने 10 अक्टूबर के प्रदर्शनों के मद्देनजर मेट्रो सेवाओं और जनता के लिए जारी की जाने वाली सूचनाओं को लेकर निर्देश दिए थे।
दिल्ली में पाबंदियों का भी जिक्र
याचिका में प्रदर्शनों के दौरान लगाई गई कई पाबंदियों का उल्लेख किया गया है। इनमें मेट्रो स्टेशन बंद करना, मध्य दिल्ली के कुछ हिस्सों में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं रोकना, बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात करना और जंतर-मंतर तक पहुंच सीमित करना शामिल है।
संगठन का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट में पहले हुई सुनवाई में पुलिस कार्रवाई और लोगों की आवाजाही पर लगी पाबंदियों जैसे मुद्दों पर विचार किया गया था, लेकिन प्रदर्शन स्थलों तक पत्रकारों की पहुंच और पुलिस कार्रवाई की रिपोर्टिंग करते समय उनके साथ कैसा व्यवहार किया जाना चाहिए, इस बारे में व्यापक व्यवस्था नहीं बनाई गई।
याचिका के अनुसार, 11 अक्टूबर के निर्देश के साथ कोई स्पष्ट कार्यप्रणाली, निगरानी की जिम्मेदारी या शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई करने की व्यवस्था नहीं होने के कारण कथित घटनाओं को रोकने में पर्याप्त मदद नहीं मिली।
पुलिस के रिकॉर्ड और वीडियो सुरक्षित रखने की मांग
फ्री स्पीच कलेक्टिव ने सुप्रीम कोर्ट से 10 अक्टूबर से पत्रकारों से जुड़ी घटनाओं के सभी जरूरी रिकॉर्ड तत्काल सुरक्षित रखने और उन्हें अदालत के सामने पेश करने का निर्देश देने की मांग की है।
इन रिकॉर्ड में शामिल हैं:
याचिका में यह जानकारी भी मांगी गई है कि अलग-अलग जगहों पर किन पत्रकारों और मीडियाकर्मियों को हिरासत में लिया गया, वहां से हटाया गया, दूसरी जगह ले जाया गया, चोट लगी या रिपोर्टिंग करने से रोका गया। साथ ही, उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए बताए गए कानूनी आधार, संबंधित अधिकारियों के नाम, हिरासत की जगह और अवधि तथा उन्हें दी गई चिकित्सा सहायता का ब्योरा भी मांगा गया है।
स्वतंत्र जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
याचिका में पत्रकारों को कथित तौर पर हिरासत में लेने, शारीरिक हिंसा करने, चोट पहुंचाने, जबरन हटाने और रिपोर्टिंग में बाधा डालने के आरोपों की जांच के लिए स्वतंत्र और समयबद्ध व्यवस्था बनाने की मांग की गई है।
इस व्यवस्था के तहत सीधे जिम्मेदार अधिकारियों के साथ-साथ निगरानी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका तय करने की मांग भी की गई है। संगठन ने कानून के अनुसार अनुशासनात्मक या दूसरी कार्रवाई करने, उचित मुआवजा देने और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने का अनुरोध किया है।
पुलिस और पत्रकारों के बीच व्यवहार के लिए दिशा-निर्देश बनाने की मांग
फ्री स्पीच कलेक्टिव ने सुप्रीम कोर्ट से प्रदर्शन और सार्वजनिक सभाओं के दौरान पुलिस और पत्रकारों के बीच व्यवहार को लेकर बाध्यकारी दिशा-निर्देश बनाने की मांग की है।
प्रस्तावित सुरक्षा उपायों में ये बातें शामिल हैं:
याचिका में सुप्रीम कोर्ट से यह घोषित करने की भी मांग की गई है कि पेशेवर काम कर रहे पत्रकारों को मनमाने तरीके से हिरासत में लेना, जबरन हटाना, डराना, उन पर हमला करना या उनके खिलाफ दूसरे तरह का बल प्रयोग करना संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(a), 19(1)(d) और 21 के तहत मिले अधिकारों का उल्लंघन है। याचिका में कहा गया है कि ऐसी कार्रवाई जनता के जानने के अधिकार पर भी अनुचित रोक लगाती है।
महिला पत्रकारों की सुरक्षा के लिए अलग याचिका
पत्रकारों के संगठन नेटवर्क ऑफ वुमेन इन मीडिया, इंडिया (NWMI) ने भी प्रदर्शन की रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों की सुरक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट में अलग याचिका दाखिल की है। इस याचिका में महिला पत्रकारों की गरिमा और सुरक्षा पर खास जोर दिया गया है।
NWMI का कहना है कि पुलिस की कथित ज्यादतियों की जांच के लिए पहले से चल रही प्रक्रिया में प्रदर्शन स्थलों तक पत्रकारों की पहुंच, उन्हें हिरासत में लेने या जबरन हटाने और खबर जुटाने के दौरान जरूरी सुरक्षा उपायों पर विशेष ध्यान नहीं दिया गया है।
संगठन ने केंद्र सरकार को यह सुनिश्चित करने का निर्देश देने की मांग की है कि सही तरीके से खबर जुटाने या रिपोर्टिंग करने वाली महिला पत्रकारों को केवल प्रदर्शन, सार्वजनिक सभा, भीड़ नियंत्रण की कार्रवाई या किसी अन्य महत्वपूर्ण सार्वजनिक घटना के पास मौजूद होने के कारण शारीरिक रूप से परेशान न किया जाए, डराया न जाए, मनमाने तरीके से हिरासत में न लिया जाए और जबरन वहां से न हटाया जाए।
ये दोनों ही याचिकाएं अधिवक्ता-ऑन-रिकॉर्ड आरती राजन के माध्यम से दाखिल की गई हैं।
दिल्ली में 10 और 11 अक्टूबर को SIR के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों के दौरान महिला पत्रकारों के साथ कथित मारपीट, बदसलूकी व मनमाने तरीके से हिरासत में लिए जाने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
दिल्ली में 10 और 11 अक्टूबर को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों की रिपोर्टिंग के दौरान महिला पत्रकारों के साथ कथित मारपीट, बदसलूकी और मनमाने तरीके से हिरासत में लिए जाने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। नेटवर्क ऑफ वुमेन इन मीडिया, इंडिया (NWMI) ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर पत्रकारों की सुरक्षा के लिए ऐसे नियम बनाने की मांग की है, जिनका पालन करना अनिवार्य हो।
NWMI ने अपनी याचिका में दिल्ली पुलिस पर आरोप लगाया है कि राष्ट्रीय राजधानी में विरोध-प्रदर्शनों की रिपोर्टिंग कर रहीं कई महिला पत्रकारों के साथ कथित तौर पर मारपीट और बदसलूकी की गई। उन्हें अपना काम करने से रोका गया और मनमाने तरीके से हिरासत में लिया गया। संगठन के मुताबिक, इन पत्रकारों ने खुद को प्रेस का सदस्य बताया था और अपने वैध प्रेस पहचान पत्र भी दिखाए थे।
प्रेस की आजादी पर असर पड़ने की आशंका
NWMI का कहना है कि पुलिस की कथित कार्रवाई संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत मिली प्रेस की आजादी पर सीधा हमला है। संगठन ने आशंका जताई है कि इस तरह की घटनाओं से पत्रकारों में डर पैदा हो सकता है और वे अपना काम करने से हिचक सकते हैं। इसका असर खास तौर पर उन महिला पत्रकारों पर पड़ सकता है, जो घटनास्थल पर जाकर रिपोर्टिंग करती हैं।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस और मीडिया के बीच बातचीत के लिए नियम बनाने की मांग
याचिका में सुप्रीम कोर्ट से मांग की गई है कि वह विरोध-प्रदर्शनों, धरनों और सार्वजनिक सभाओं के दौरान पुलिस और मीडिया के बीच बातचीत और व्यवहार को लेकर स्पष्ट नियम और मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तय करे। इन नियमों का मकसद रिपोर्टिंग कर रहे पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
संगठन ने अदालत से दिल्ली पुलिस को निर्देश देने की भी मांग की है कि वह अपने पेशेवर काम में लगे पत्रकारों को न तो रोके, न उनके साथ मारपीट करे और न ही उन्हें हिरासत में ले। याचिका में यह भी कहा गया है कि रिपोर्टिंग के दौरान महिला पत्रकारों को शारीरिक उत्पीड़न या मनमाने तरीके से हिरासत में लिए जाने से बचाया जाए।
10 और 11 अक्टूबर की घटनाओं की स्वतंत्र जांच की मांग
NWMI ने 10 और 11 अक्टूबर को हुई घटनाओं की स्वतंत्र जांच कराने और कथित मारपीट व हिरासत के लिए जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करने की भी मांग की है।
SIR के खिलाफ दिल्ली में हो रहे हैं प्रदर्शन
यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब SIR प्रक्रिया, मतदाता सूची से कथित तौर पर नाम हटाए जाने और चुनावी अनियमितताओं के आरोपों को लेकर दिल्ली में विपक्षी गठबंधन INDIA के दलों, युवा संगठनों और नागरिक समाज के समूहों की ओर से बड़े स्तर पर प्रदर्शन किए जा रहे हैं। इन प्रदर्शनों के दौरान पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत प्रतिबंध लगाए थे। इसके अलावा कुछ मेट्रो स्टेशनों को बंद किया गया और इंटरनेट सेवाओं पर भी पाबंदियां लगाई गईं।
सुप्रीम कोर्ट ने रविवार को इन प्रतिबंधों पर ध्यान दिया था और सामान्य सेवाएं बहाल करने का आदेश दिया था। NWMI की याचिका का मंगलवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने उल्लेख किए जाने की संभावना है।
दिल्ली व दूसरे शहरों में प्रदर्शनों की कवरेज के दौरान महिला पत्रकारों के साथ कथित मारपीट और गैरकानूनी तरीके से हिरासत में लिए जाने के विरोध में हैदराबाद में महिला पत्रकारों ने प्रदर्शन किया।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
दिल्ली और दूसरे शहरों में प्रदर्शनों की कवरेज के दौरान महिला पत्रकारों के साथ कथित मारपीट, यौन उत्पीड़न और गैरकानूनी तरीके से हिरासत में लिए जाने के विरोध में सोमवार शाम हैदराबाद में महिला पत्रकारों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी टैंक बंड स्थित अंबेडकर की प्रतिमा के पास जुटीं। उन्होंने हिरासत में लिए गए पत्रकारों को रिहा करने, उनके खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने और पुलिस के व्यवहार की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान महिला पत्रकारों ने ऐसे पोस्टर भी दिखाए, जिन पर लिखा था, “मीडिया की आजादी दबाना बंद करो” और “डर हमें चुप नहीं करा पाएगा।”
पत्रकार होने की जानकारी देने के बाद भी हमले का आरोप
प्रदर्शनकारी महिलाओं ने एक बयान में आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों और सादे कपड़ों में मौजूद पुरुषों ने पत्रकारों के प्रेस का सदस्य होने की जानकारी देने के बावजूद उन पर हमला किया। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग से जुड़े विरोध-प्रदर्शनों की रिपोर्टिंग कर रहे पत्रकारों को डराया गया और उनका काम रोकने की कोशिश की गई।
बयान में तीन महिला पत्रकारों के साथ पुलिस की ओर से कथित यौन उत्पीड़न किए जाने के आरोपों का भी जिक्र किया गया।
NHRC ने दिल्ली पुलिस से मांगी रिपोर्ट
मामले पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने दिल्ली पुलिस आयुक्त से दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। प्रदर्शनकारियों ने 11 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट की ओर से गैरकानूनी हिरासत के संबंध में दिए गए निर्देशों का भी उल्लेख किया। उनका कहना था कि अदालत को यह भरोसा दिलाए जाने के बावजूद कि पत्रकारों और दूसरे पेशेवर लोगों को अपना काम करने से नहीं रोका जाएगा, इस तरह की घटनाएं जारी हैं।
प्रेस की आजादी और महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा उठाया
महिला पत्रकारों ने कहा कि पत्रकारों पर इस तरह के कथित हमले प्रेस की आजादी के साथ-साथ महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा का भी उल्लंघन हैं। उन्होंने प्रदर्शनों में शामिल होने आई महिलाओं पर कथित हमलों की भी निंदा की।
प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि पत्रकारों को बिना किसी धमकी या हिरासत के डर के सार्वजनिक कार्यक्रमों और प्रदर्शनों की रिपोर्टिंग करने दी जाए। साथ ही, इन घटनाओं के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
Keywords:
क्रिस्टन मस्करेनहास ने पब्लिसिस ग्रुप की स्टारकॉम में ग्रुप हेड के रूप में नई जिम्मेदारी संभाली है। इससे पहले वह डब्ल्यूपीपी में एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट क्लाइंट सर्विसेज पद पर थीं।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
क्रिस्टन मस्करेनहास (Kristen Mascarenhas) ने पब्लिसिस ग्रुप (Publicis Groupe) की स्टारकॉम (Starcom) में ग्रुप हेड (Group Head) के रूप में नई जिम्मेदारी संभाली है। यह मीडिया और एडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री में उनकी नई पारी है।
स्टारकॉम से जुड़ने से पहले मस्करेनहास डब्ल्यूपीपी (WPP) में एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट - क्लाइंट सर्विसेज (Associate Vice President – Client Services) के पद पर थीं। उन्होंने अगस्त 2026 में यह भूमिका संभाली थी।
इससे पहले उन्होंने माइंडशेयर (Mindshare) में तीन साल से अधिक समय तक काम किया। जनवरी से अगस्त 2023 के बीच वह मर्कल सोक्राटी (Merkle Sokrati) में मैनेजर - बिजनेस स्ट्रैटेजी (Manager – Business Strategy) के पद पर भी रहीं। मस्करेनहास ने लिंक्डइन (LinkedIn) पर अपनी नई भूमिका की जानकारी साझा करते हुए इसे अपने करियर का नया अध्याय बताया।
आरपी-संजीव गोयनका ग्रुप ने हर्षद जैन को अपने एफएमसीजी बिजनेस का मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त किया है। जैन 35 वर्षों से अधिक नेतृत्व अनुभव के साथ 12 अक्टूबर 2026 से जिम्मेदारी संभालेंगे।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
आरपी-संजीव गोयनका ग्रुप (RP-Sanjiv Goenka Group) ने हर्षद जैन (Harshad Jain) को अपने एफएमसीजी बिजनेस (FMCG Business) का मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया है। वह 12 अक्टूबर 2026 से नई जिम्मेदारी संभालेंगे।
जैन के पास एविएशन, मीडिया और एंटरटेनमेंट, कंज्यूमर बिजनेस और टेलीकम्युनिकेशन जैसे क्षेत्रों में 35 वर्षों से अधिक का लीडरशिप अनुभव है। उनकी विशेषज्ञता पीएंडएल मैनेजमेंट (P&L Management), सेल्स और मार्केटिंग, बिजनेस ट्रांसफॉर्मेशन, मर्जर एंड एक्विजिशन (M&A), जॉइंट वेंचर मैनेजमेंट और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन में है।
हाल ही में जैन कई कंपनियों के बोर्ड के साथ एडवाइजरी भूमिकाओं में जुड़े थे, जहां उन्होंने स्ट्रैटेजिक ग्रोथ, ट्रांसफॉर्मेशन और बिजनेस एक्सपेंशन में सहयोग किया। इससे पहले वह अडानी एयरपोर्ट होल्डिंग्स (Adani Airport Holdings Ltd.) में सीईओ - नॉन एयरो (CEO – Non Aero) के पद पर कार्यरत थे।
जैन इससे पहले एचटी मीडिया (HT Media Ltd), भारती एयरटेल (Bharti Airtel Ltd), वर्ल्ड स्पेस इंडिया (World Space India) और पेप्सिको इंडिया (PepsiCo India) में भी लीडरशिप भूमिकाएं निभा चुके हैं। वह आरपीएसजी हाउस (RPSG House) से काम करेंगे और ग्रुप के वाइस चेयरमैन को रिपोर्ट करेंगे।
विक्रम धालीवाल ने सिग्निफाई में ग्लोबल हेड ऑफ स्ट्रैटेजी एंड कमर्शियल एक्सीलेंस की जिम्मेदारी संभाली है। नई भूमिका में वह कंज्यूमर बिजनेस की कमर्शियल प्रभावशीलता और प्रदर्शन सुधार की देखरेख करेंगे।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
विक्रम धालीवाल (Vikram Dhaliwal) ने सिग्निफाई (Signify) में ग्लोबल हेड ऑफ स्ट्रैटेजी एंड कमर्शियल एक्सीलेंस - कंज्यूमर की जिम्मेदारी संभाली है। नई भूमिका में उनकी जिम्मेदारियां बढ़ गई हैं और अब कंज्यूमर बिजनेस की समग्र कमर्शियल इफेक्टिवनेस भी उनके दायरे में होगी।
धालीवाल ग्लोबल कंज्यूमर बिजनेस के कमर्शियल इफेक्टिवनेस फ्रेमवर्क की देखरेख करेंगे। इसमें कमर्शियल वॉटरफॉल तय करना, कस्टमर सेगमेंटेशन और ग्रॉस-टू-नेट परफॉर्मेंस को बेहतर बनाने से जुड़े प्रयास शामिल होंगे।
इससे पहले वह सिग्निफाई में ग्लोबल हेड ऑफ स्ट्रैटेजी - कंज्यूमर के पद पर कार्यरत थे। धालीवाल के पास दो महाद्वीपों में काम करने का 22 वर्षों का अनुभव है।
उन्होंने ओलिवर वायमन (Oliver Wyman), स्ट्रैटेजी& (Strategy&) और डब्ल्यूपीपी ग्रुप (WPP Group) की कंपनियों में नेतृत्वकारी भूमिकाएं निभाई हैं। उनका अनुभव कंज्यूमर, रिटेल और टेक्नोलॉजी क्षेत्रों में है। उन्होंने यूरोप, एशिया और अमेरिका में काम किया है।
इन संगठनों ने हिरासत में लिए गए सभी पत्रकारों की तत्काल और बिना शर्त रिहाई, जब्त फोन और उपकरण लौटाने तथा दिल्ली पुलिस से सार्वजनिक माफी की मांग की है।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
दिल्ली में 10 अक्टूबर को विरोध प्रदर्शन की कवरेज कर रहे पत्रकारों को हिरासत में लेने, उन्हें परेशान करने और उनके उपकरण जब्त करने के मामले में प्रेस क्लब ऑफ इंडिया समेत पत्रकार संगठनों ने कड़ा विरोध जताया है। इन संगठनों ने हिरासत में लिए गए सभी पत्रकारों की तत्काल और बिना शर्त रिहाई, जब्त फोन और उपकरण लौटाने तथा दिल्ली पुलिस से सार्वजनिक माफी की मांग की है।
10 अक्टूबर को शनिवार के दिन मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे सैकड़ों लोगों को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया था। पत्रकार संगठनों के संयुक्त बयान के मुताबिक, इस कार्रवाई के दौरान अपनी पेशेवर जिम्मेदारी निभा रहे पत्रकारों को भी पुलिस बसों में भरकर हिरासत केंद्रों में ले जाया गया। इनमें छत्रसाल स्टेडियम और चाणक्यपुरी पुलिस स्टेशन शामिल हैं।
बयान में कहा गया है कि हिरासत में लिए गए पत्रकारों में परंजॉय गुहा ठाकुरता के अलावा द क्विंट, द वायर, स्क्रॉल, रिपोर्टर टीवी, नवभारत टाइम्स और न्यूजलॉन्ड्री के पत्रकार शामिल थे। पत्रकारों ने बताया कि वे हिरासत की कार्रवाई की वीडियो रिकॉर्डिंग कर रहे थे, तभी उन्हें हिरासत में ले लिया गया, जबकि उनके पास प्रेस कार्ड भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे थे। बयान के अनुसार, पुलिसकर्मियों ने इस दौरान कथित तौर पर कहा, ‘आजकल हर कोई खुद को पत्रकार बताता है।’ हिरासत में लिए गए पत्रकारों के आधिकारिक रिपोर्टिंग फोन छीनने और जब्त करने की शिकायतें भी सामने आई हैं।
PIB मान्यता को लेकर भी उठाए सवाल: पत्रकार संगठनों ने पत्रकारों की हिरासत को प्रेस की स्वतंत्रता पर सीधा हमला बताया है। बयान में कहा गया है कि दिल्ली पुलिस ने पहले कहा था कि केवल पत्र सूचना कार्यालय (PIB) से मान्यता प्राप्त पत्रकारों को ही रिपोर्टिंग करने की अनुमति दी जाएगी।
संगठनों ने इस शर्त पर आपत्ति जताते हुए कहा कि भारत में प्रेस की स्वतंत्रता को PIB मान्यता से जोड़कर नहीं देखा जा सकता। डिजिटल और स्वतंत्र मीडिया का एक बड़ा हिस्सा PIB कार्ड नहीं रखता, लेकिन इसके बावजूद उसे कानून के तहत प्रेस के रूप में मान्यता प्राप्त है।
बयान के मुताबिक, पत्रकार संगठनों ने इसी सप्ताह की शुरुआत में दिल्ली पुलिस आयुक्त को एक संयुक्त ज्ञापन सौंपकर इन मुद्दों को उठाया था। हालांकि, संगठनों का आरोप है कि पुलिस ने ज्ञापन में दिए गए सुझावों के विपरीत कार्रवाई की।
पत्रकार संगठनों ने रखीं चार मांगें: संयुक्त बयान में पत्रकार संगठनों ने दिल्ली पुलिस के सामने चार प्रमुख मांगें रखी हैं।
राजधानी में पुलिस व्यवस्था पर भी उठाए सवाल: प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के साथ-साथ इंडियन विमेंस प्रेस कॉर्प्स, दिल्ली यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स और केरल यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (दिल्ली यूनिट) की ओर से जारी संयुक्त बयान में कहा गया है कि पत्रकारों को काम करने से रोकना, बिना कारण हिरासत में लेना और शांतिपूर्ण तरीके से संस्थानों से सवाल पूछने की कोशिश को रोकने के लिए राजधानी में किले जैसी व्यवस्था बनाना चिंताजनक है।
मान लीजिए आपने गूगल पर सवाल सर्च किया और AI बॉक्स में तुरंत जवाब मिल गया, बिना किसी लिंक पर जाए आपने पढ़ा और पेज बंद कर दिया—यही बदलाव अब पब्लिशर्स के लिए बड़ी चुनौती है।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
गूगल ने मई 2024 में अमेरिका में AI Overview (AIO) लॉन्च किया था। मई 2025 तक यह फीचर 200 से ज्यादा देशों और 40 भाषाओं तक पहुंच गया। इसमें भारत की हिंदी, तमिल और तेलुगू जैसी भाषाएं भी शामिल हैं। नतीजा? मीडिया इंडस्ट्री के लिए बड़ा झटका।
प्यू रिसर्च सेंटर (Pew Research Center) ने मार्च 2025 में अमेरिका के 900 लोगों की इंटरनेट इस्तेमाल करने की आदतों को ट्रैक किया और गूगल पर की गई 68 हजार से ज्यादा सर्च का विश्लेषण किया। रिपोर्ट में सामने आया कि जब AI Overview दिखाई देता है, तो लोग सिर्फ 8 फीसदी मामलों में ही किसी लिंक पर क्लिक करते हैं। जबकि बिना AI Overview के यह आंकड़ा 15 फीसदी था। यानी क्लिक में करीब 47 फीसदी की गिरावट आई। सबसे बड़ी बात यह कि AI Overview में दिए गए स्रोतों पर सिर्फ 1 फीसदी लोगों ने क्लिक किया।
Similarweb के आंकड़ों के मुताबिक, मई 2024 से मई 2025 के बीच खबरों से जुड़ी सर्च में “जीरो-क्लिक” सर्च का हिस्सा 56 फीसदी से बढ़कर 69 फीसदी हो गया। आसान शब्दों में कहें तो खबरों से जुड़ी 10 में से करीब 7 सर्च ऐसी रहीं, जिनमें लोग किसी भी वेबसाइट पर नहीं पहुंचे।
वहीं, रॉयटर्स इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ जर्नलिज्म (Reuters Institute for the Study of Journalism) की जनवरी 2026 की रिपोर्ट और ज्यादा चिंता बढ़ाने वाली है। दुनिया के 51 देशों के 280 मीडिया लीडर्स का सर्वे किया गया, जिनमें 64 एडिटर-इन-चीफ और 64 चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर्स (CEO) शामिल थे। उनका मानना है कि अगले तीन साल में सर्च इंजन से आने वाला ट्रैफिक औसतन 43 फीसदी तक गिर सकता है।
चार्टबीट ने 2,500 से ज्यादा न्यूज वेबसाइट्स के आंकड़ों का अध्ययन किया। इसमें पाया गया कि नवंबर 2024 से नवंबर 2025 के बीच गूगल सर्च से आने वाले विजिटर्स में 33 फीसदी की गिरावट आई। वहीं, गूगल डिस्कवर से आने वाला ट्रैफिक 21 फीसदी घट गया। अमेरिका में यह गिरावट और ज्यादा, यानी 38 फीसदी रही।
छोटे पब्लिशर्स का हाल सबसे बुरा
इस नुकसान का असर सभी पर एक जैसा नहीं पड़ा। बड़े पब्लिशर्स- जैसे The New York Times, जिसके 2025 के आखिर तक 1.278 करोड़ सब्सक्राइबर्स थे, अभी भी किसी तरह टिके हुए हैं। लेकिन छोटे पब्लिशर्स को सबसे बड़ा झटका लगा। 2025 में छोटे पब्लिशर्स का गूगल रेफरल ट्रैफिक करीब 60 फीसदी तक गिर गया, जबकि बड़े पब्लिशर्स में यह गिरावट 22 फीसदी रही।
Business Insider का ऑर्गेनिक सर्च ट्रैफिक अप्रैल 2022 से अप्रैल 2025 के बीच 55 फीसदी तक गिर गया। हालत ऐसी हुई कि कंपनी को मई 2025 में अपने 21 फीसदी एम्प्लॉयीज की छंटनी करनी पड़ी।
वहीं HuffPost की डेस्कटॉप और मोबाइल साइट्स पर सर्च से आने वाले विजिटर्स की संख्या आधी रह गई। यहां तक कि The New York Times का सर्च ट्रैफिक शेयर भी 2022 के 44 फीसदी से घटकर 2025 में 37 फीसदी पर आ गया।
DMG Media , जो MailOnline और Metro जैसे बड़े ब्रिटिश प्रकाशन चलाती है, ने सितंबर 2025 में बताया कि कुछ खास सर्च में क्लिक-थ्रू रेट 89 फीसदी तक गिर गई।
शिक्षा प्लेटफॉर्म Chegg को तो और बड़ा नुकसान हुआ। जनवरी 2024 से जनवरी 2025 के बीच कंपनी का गैर-सब्सक्राइबर ट्रैफिक 49 फीसदी तक गिर गया। इसके बाद कंपनी ने गूगल के खिलाफ प्रतिस्पर्धा विरोधी कानून (एंटीट्रस्ट) का मुकदमा भी दायर कर दिया।
Google की AI और SEO का बदलता मॉडल
कभी SEO यानी सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन का सीधा मतलब होता था- सही कीवर्ड ढूंढो, अच्छा कंटेंट लिखो, गूगल पर ऊपर जगह बनाओ, ट्रैफिक आएगा और विज्ञापनों से कमाई होगी। यह मॉडल कई सालों तक चलता रहा। लेकिन 2026 तक आते-आते यह मॉडल बुरी तरह बदल चुका है।
Seer Interactive ने जून 2024 से सितंबर 2025 के बीच 42 संस्थाओं की 3,119 जानकारी आधारित सर्च को ट्रैक किया। रिपोर्ट में पाया गया कि जिन सर्च में AI Overview दिखाई देता था, वहां ऑर्गेनिक क्लिक-थ्रू रेट 1.76 फीसदी से गिरकर सिर्फ 0.61 फीसदी रह गई। यानी करीब 61 फीसदी की गिरावट। वहीं पेड क्लिक-थ्रू रेट 19.7 फीसदी से टूटकर 6.34 फीसदी पर आ गई, यानी 68 फीसदी की भारी गिरावट।
Semrush के आंकड़ों के मुताबिक, 2025 की तीसरी तिमाही तक गूगल की करीब 20 से 25 फीसदी सर्च में AI Overview दिखने लगा था। वहीं Gartner का अनुमान है कि 2026 के आखिर तक ऑर्गेनिक सर्च ट्रैफिक का 25 फीसदी हिस्सा AI चैटबॉट्स और वॉइस असिस्टेंट्स की तरफ चला जाएगा।
भारत में भी तेजी से बदलाव दिख रहा है। AI सर्च इंजन Perplexity ने 2024-25 के दौरान 640 फीसदी की बढ़त दर्ज की, खासकर Airtel के साथ साझेदारी के बाद। वहीं ChatGPT अब भारत में प्रोफेशनल्स के बीच दूसरा सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला प्लेटफॉर्म बन चुका है।
टियर-2 और टियर-3 शहरों में 58 फीसदी सर्च अब आवाज के जरिए हो रही हैं। लोग हिंदी, तमिल, तेलुगू और बंगाली जैसी भाषाओं में सवाल पूछ रहे हैं।
इस बदलाव ने SEO इंडस्ट्री की दिशा ही बदल दी है। पहले कीवर्ड रैंकिंग सबसे ज्यादा मायने रखती थी, लेकिन अब “जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन” यानी GEO का दौर शुरू हो गया है। इसका मतलब है कि AI के जवाबों में आपके ब्रैंड या कंटेंट का जिक्र हो, चाहे यूजर आपकी वेबसाइट पर आए या नहीं।
अहरेफ्स की दिसंबर 2025 की स्टडी के मुताबिक, जिन कीवर्ड्स पर AI Overview दिखती है, वहां पहले नंबर पर आने वाली वेबसाइट की क्लिक-थ्रू रेट में 34.5 फीसदी तक गिरावट दर्ज की गई।
Ad Revenue की तस्वीर: पब्लिशर्स का दर्द
पब्लिशर्स भी चुप नहीं बैठे हैं। वे इस संकट से निपटने के लिए कई मोर्चों पर लड़ाई लड़ रहे हैं।
बड़े पब्लिशर्स अब AI कंपनियों के साथ समझौते कर रहे हैं। मतलब- AI कंपनियां उनका कंटेंट इस्तेमाल करें और बदले में उन्हें पैसा दें।
News Corp ने OpenAI के साथ 5 साल की 25 करोड़ डॉलर से ज्यादा की डील की है। वहीं The New York Times को Amazon की एलेक्सा और रूफस शॉपिंग असिस्टेंट सेवाओं से हर साल करीब 2 से 2.5 करोड़ डॉलर मिल रहे हैं।
इसके अलावा Associated Press, Time, Fortune, CNN, The Washington Post और Condé Nast जैसी कई बड़ी मीडिया कंपनियां किसी न किसी AI कंपनी के साथ समझौते कर चुकी हैं।
लेकिन यह मॉडल फिलहाल सिर्फ बड़े खिलाड़ियों के लिए फायदेमंद दिख रहा है। मिड-साइज पब्लिशर्स को 10 लाख से 50 लाख डॉलर तक की डील मिल सकती है, जो उनके ट्रैफिक नुकसान की भरपाई के लिए काफी नहीं है। वहीं छोटे पब्लिशर्स और स्वतंत्र कंटेंट क्रिएटर्स के लिए अभी ऐसे समझौतों के दरवाजे लगभग बंद हैं।
इसी बीच Cloudflare ने “पे पर क्रॉल” नाम का एक मार्केटप्लेस शुरू किया है। इसमें पब्लिशर्स तय कर सकते हैं कि AI कंपनियां उनके कंटेंट को स्कैन करने के बदले कितना पैसा देंगी।
जून 2025 में Cloudflare के आंकड़ों ने एक चौंकाने वाली तस्वीर दिखाई। गूगल हर 9 से 14 पेज स्कैन करने पर एक विजिटर वेबसाइट को भेजता है। लेकिन OpenAI करीब 1,700 पेज स्कैन करने के बाद सिर्फ एक विजिटर भेजता है। वहीं Anthropic का अनुपात तो 73,000 पेज पर सिर्फ एक विजिटर का रहा।
यही वजह है कि दुनिया की 79 फीसदी बड़ी न्यूज वेबसाइट्स ने कम से कम एक AI ट्रेनिंग बॉट को ब्लॉक कर दिया है।
जो पब्लिशर्स AI की मार से बचे हैं, उनका एक कॉमन सिक्रेट है- उन्होंने गूगल पर निर्भरता कम की।
The New Yorker ने 2025 में रिकॉर्ड कमाई, रिकॉर्ड मुनाफा और रिकॉर्ड सब्सक्राइबर्स हासिल किए। वहीं The New York Times के 2025 के आखिर तक 1.278 करोड़ सब्सक्राइबर्स हो चुके थे। कंपनी का लक्ष्य 2027 तक इसे बढ़ाकर 1.5 करोड़ तक पहुंचाने का है।
Time मैगजीन का अनुमान है कि 2026 में उसकी कुल कमाई का 50 फीसदी हिस्सा इवेंट्स से आएगा, जबकि 2023 में यह हिस्सा 28 फीसदी था। वहीं Bloomberg Media के ग्लोबल फोरम्स से 2025 में स्पॉन्सरशिप कमाई में 30 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई।
रॉयटर्स इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के मुताबिक, 76 फीसदी मीडिया लीडर्स का कहना है कि अब वे चाहते हैं कि उनके कर्मचारी “क्रिएटर्स” की तरह काम करें। यानी सिर्फ खबर लिखना नहीं, बल्कि ऑडियंस के साथ सीधा जुड़ाव बनाना भी जरूरी हो गया है।
इसके अलावा 50 फीसदी पब्लिशर्स अब क्रिएटर पार्टनरशिप्स पर काम कर रहे हैं, ताकि नए दर्शकों तक पहुंच बनाई जा सके।
ChatGPT से Traffic: उम्मीद कम, हकीकत और कम
कुछ लोगों को लगता है कि अगर गूगल से ट्रैफिक कम हो रहा है, तो उसकी भरपाई ChatGPT जैसे AI प्लेटफॉर्म्स से हो जाएगी।
सितंबर से नवंबर 2025 के बीच ChatGPT ने पब्लिशर्स को करीब 1.2 अरब आउटगोइंग रेफरल्स भेजे, जो पिछले साल के मुकाबले 52 फीसदी ज्यादा थे। सुनने में यह आंकड़ा अच्छा लगता है, लेकिन असली तस्वीर अलग है।
कंडक्टर की रिसर्च के मुताबिक, सभी AI प्लेटफॉर्म्स मिलकर भी पब्लिशर्स के कुल ट्रैफिक का सिर्फ 1 फीसदी हिस्सा ही भेज पा रहे हैं।
वहीं रॉयटर्स इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट बताती है कि अकेला गूगल, ChatGPT के मुकाबले 500 गुना ज्यादा रेफरल्स भेजता है। अगर गूगल सर्च और गूगल डिस्कवर को साथ जोड़ दें, तो यह अंतर 1,300 गुना तक पहुंच जाता है।
यानी AI सर्च अभी नया ट्रैफिक स्रोत नहीं बन पाया है। उल्टा, उसने पब्लिशर्स का पुराना ट्रैफिक कम कर दिया है।
भारत के पब्लिशर्स के लिए क्या मायने रखता है?
भारत में internet users की संख्या 2025 के अंत तक 1.03 billion यानी एक अरब तीन करोड़ पार कर गई। यहाँ digital news market 2026 के अंत तक $1 billion revenue generate करने का अनुमान है।
लेकिन AI का असर भारत पर भी उतना ही गहरा है। Perplexity अब India में US से भी बड़ा market बन गया है। ChatGPT फरवरी 2026 तक 900 मिलियन वीकली एक्टिव यूजर्स तक पहुंच गया और भारत में भी 10 करोड़ weekly users। Google AI Overviews 40 भाषाओं में हैं जिनमें हिंदी भी शामिल है।
भारत के हिंदी न्यूज़ पोर्टल्स, regional language sites और छोटे digital पब्लिशर्स — जो Google Search से अपना ज़्यादातर traffic पाते थे — अब एक बड़े transition के मुहाने पर खड़े हैं।
असली सवाल: कंटेंट बनाने वाले को पैसा कौन देगा?
यह सिर्फ बिजनेस मॉडल का मामला नहीं है, बल्कि पत्रकारिता के अस्तित्व का सवाल बन चुका है।
अगर पब्लिशर्स कमाई नहीं कर पाएंगे, तो वे रिपोर्टर्स नहीं रख पाएंगे। रिपोर्टर्स नहीं होंगे, तो ग्राउंड रिपोर्टिंग कम हो जाएगी। और जब ग्राउंड रिपोर्टिंग ही नहीं होगी, तो एआई के पास इस्तेमाल करने के लिए ओरिजिनल कंटेंट भी नहीं बचेगा। बिना ओरिजिनल कंटेंट के एआई सिस्टम भी ज्यादा समय तक टिक नहीं पाएंगे।
यानी यह एक खतरनाक चक्र बनता जा रहा है, जो पूरे कंटेंट इकोसिस्टम को नुकसान पहुंचा सकता है।
Cloudflare के मुख्य कार्यकारी अधिकारी Matthew Prince ने जुलाई 2025 में पब्लिशर्स को ऐसे टूल्स दिए, जिनकी मदद से वे एआई बॉट्स को ब्लॉक कर सकते हैं। नए Cloudflare ग्राहकों के लिए यह सुविधा डिफॉल्ट रूप से शुरू की गई।
इसका मतलब है कि अब पब्लिशर्स अपने कंटेंट को एआई कंपनियों के लिए मुफ्त में उपलब्ध नहीं कराना चाहते। वे अपने कंटेंट की अहमियत और कमी दोनों बनाए रखना चाहते हैं। लेकिन गूगल को पूरी तरह ब्लॉक करना आसान नहीं है, क्योंकि सर्च बाजार में उसकी हिस्सेदारी 90 फीसदी से ज्यादा है। अगर कोई पब्लिशर गूगल को ब्लॉक कर दे, तो उसकी वेबसाइट इंटरनेट पर लगभग गायब जैसी हो सकती है।
आगे का रास्ता
एक युग का अंत, एक नई शुरुआत
जिस क्लिक इकॉनमी पर पिछले 20 साल की डिजिटल पत्रकारिता टिकी हुई थी, वह अब तेजी से बदल रही है। AI ने सामान्य कंटेंट को लगभग एक जैसी चीज बना दिया है। अब साधारण सवालों के जवाब AI खुद देने लगा है।
ऐसे में वही पत्रकारिता टिक पाएगी, जिसमें ओरिजिनल रिपोर्टिंग हो, एक्सक्लूसिव आंकड़े हों, विशेषज्ञों का विश्लेषण हो और ऐसा कंटेंट हो जिसे AI आसानी से कॉपी न कर सके।
2026 की मीडिया दुनिया की सबसे बड़ी चिंता यही है — “इनविजिबल पब्लिशर”। यानी वह पब्लिशर जो कंटेंट तो बना रहा है, जवाब भी उसी के कंटेंट से तैयार हो रहे हैं, लेकिन लोग उसकी वेबसाइट तक पहुंच ही नहीं रहे।
हालांकि इतिहास बताता है कि हर बड़ी तकनीकी क्रांति के समय मीडिया इंडस्ट्री ने खुद को बदला है। जब रेडियो आया तो अखबारों को डर लगा। टीवी आया तो रेडियो को खतरा महसूस हुआ। इंटरनेट आया तो टीवी इंडस्ट्री चिंतित हो गई। लेकिन हर दौर में मीडिया ने खुद को नए तरीके से ढाला।
अब AI सर्च के दौर में भी पब्लिशर्स को खुद को बदलना होगा। सिर्फ गूगल के हिसाब से नहीं, बल्कि अपने पाठकों और दर्शकों की जरूरतों के हिसाब से।