मंत्री एल. मुरुगन ने मांगी इस्तीफे की अनुमति, तमिलनाडु में BJP को मजबूत करने पर फोकस

केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री एल. मुरुगन ने केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने और राज्यसभा की सदस्यता छोड़ने की इच्छा जताई है।

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Tuesday, 13 October, 2026
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केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री एल. मुरुगन ने केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने और राज्यसभा की सदस्यता छोड़ने की इच्छा जताई है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर अपने मंत्री पद की जिम्मेदारियों से मुक्त करने का अनुरोध किया है। मुरुगन अब तमिलनाडु में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के संगठन को मजबूत करने और जमीनी स्तर पर पार्टी का नेटवर्क बढ़ाने के लिए पूरा समय देना चाहते हैं। इसे 2029 के लोकसभा चुनाव की तैयारियों से भी जोड़कर देखा जा रहा है।

मुरुगन ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में सार्वजनिक जीवन में काम करने के अवसर देने के लिए आभार जताया। उन्होंने कहा कि वह राज्य में पार्टी की संगठनात्मक मौजूदगी बढ़ाने और कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर काम करने पर ध्यान देना चाहते हैं। उन्होंने यह पत्र सोशल मीडिया मंच एक्स पर भी साझा किया और जमीनी स्तर पर पार्टी के लिए काम करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

मुरुगन ने अपने पत्र में लिखा, “विनम्रता और कृतज्ञता के साथ मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि मुझे राज्य मंत्री की जिम्मेदारियों से मुक्त किया जाए और राज्यसभा की सदस्यता छोड़ने की अनुमति दी जाए, ताकि मैं तमिलनाडु में पार्टी को मजबूत करने के लिए अपना पूरा समय दे सकूं।”

साधारण परिवार से केंद्र सरकार तक का सफर

अपने राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए मुरुगन ने कहा कि वह एक साधारण परिवार से आते हैं और उन्होंने कभी कल्पना नहीं की थी कि एक दिन उन्हें केंद्र सरकार में काम करने का अवसर मिलेगा।

उन्होंने बताया कि उनके माता-पिता दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम करते थे और मवेशी चराते थे। उनका परिवार आज भी तमिलनाडु के कोनूर गांव में सादगी से जीवन बिताता है।

मुरुगन के मुताबिक, कॉलेज के दिनों में उनका जुड़ाव अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से हुआ। महाकवि भारती, सरदार वल्लभभाई पटेल और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के राष्ट्रवादी विचारों से प्रेरित होकर उन्होंने सार्वजनिक जीवन में अपनी यात्रा शुरू की।

उन्होंने कहा कि ABVP और BJP में करीब तीन दशकों के दौरान उनका मार्गदर्शक सिद्धांत हमेशा यही रहा है—“राष्ट्र पहले, पार्टी दूसरे और स्वयं सबसे आखिर में।”

मोदी का जताया आभार

मुरुगन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और समर्थन के लिए उनका धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में उन्हें जो जिम्मेदारियां और अवसर मिले, वे उनकी उम्मीदों से कहीं अधिक थे।

उन्होंने अनुसूचित जाति के लिए राष्ट्रीय आयोग के उपाध्यक्ष के रूप में अपने कार्यकाल, दो बार राज्यसभा के लिए चुने जाने और बाद में केंद्रीय मंत्रिपरिषद में जिम्मेदारी मिलने का भी जिक्र किया।

मुरुगन ने पत्र में लिखा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व और BJP की जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ाने की सोच के कारण उन्हें ऐसे अवसर मिले, जिनकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी।

तमिलनाडु में विकास कार्यों का किया जिक्र

मुरुगन ने तमिलनाडु के विकास पर प्रधानमंत्री के ध्यान की भी सराहना की। उन्होंने चेन्नई मेट्रो, तूतीकोरिन बंदरगाह के विस्तार, राजमार्गों के विकास और अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत 26 रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास जैसे कार्यों का उल्लेख किया।

इसके अलावा, उन्होंने गहरे समुद्र में मछली पकड़ने वाले जहाजों के लिए सहायता और नई तकनीकों पर काम करने वाले उभरते उद्यमों से जुड़ी पहलों का भी जिक्र किया।

मुरुगन ने कहा कि प्रधानमंत्री की हाल की तमिलनाडु यात्रा के दौरान लोगों की प्रतिक्रिया ने उन पर गहरी छाप छोड़ी। उनके मुताबिक, प्रधानमंत्री का जिस तरह स्वागत किया गया, उससे राज्य के भविष्य को लेकर लोगों की उम्मीदों का पता चलता है।

उन्होंने लिखा कि तमिलनाडु के प्रति प्रधानमंत्री की प्रतिबद्धता और उनके प्रति लोगों का स्नेह देखकर उन्हें गर्व और आभार महसूस हुआ। इससे तमिलनाडु, पार्टी और देश के लिए और अधिक काम करने का उनका संकल्प भी मजबूत हुआ।

तमिलों और भारतीय मछुआरों की सुरक्षा का भी किया उल्लेख

मुरुगन ने कहा कि उन्होंने तमिलनाडु से जुड़े मामलों में प्रधानमंत्री की चिंता और संवेदनशीलता को करीब से देखा है। इसमें संघर्ष वाले क्षेत्रों में फंसे तमिल लोगों की सुरक्षा और भारतीय मछुआरों के कल्याण जैसे मुद्दे शामिल हैं।उन्होंने बताया कि जब भी उन्होंने इन मामलों में प्रधानमंत्री से मदद मांगी, तो उन पर तुरंत ध्यान दिया गया।

मुरुगन के इस कदम का उद्देश्य अब तमिलनाडु में BJP के संगठन को मजबूत करने और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ सीधे काम करने पर ध्यान देना है। हालांकि, मंत्री पद और राज्यसभा की सदस्यता छोड़ने के उनके अनुरोध पर अंतिम फैसला संबंधित संवैधानिक और संसदीय प्रक्रियाओं के अनुसार होगा। 

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Netflix पर रिलीज हुई ‘रिपोर्टिंग लाइव’, ध्रुव त्रिपाठी के निर्देशन की हुई तारीफ

फिल्म ‘रिपोर्टिंग लाइव’ को लेकर तारीफों का सिलसिला जारी है। फिल्म स्कूल से निकलकर विज्ञापन की दुनिया में काम करने वाले ध्रुव त्रिपाठी ने अब निर्देशन के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई है।

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Tuesday, 13 October, 2026
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फिल्म ‘रिपोर्टिंग लाइव’ को लेकर तारीफों का सिलसिला जारी है। फिल्म स्कूल से निकलकर विज्ञापन की दुनिया में काम करने वाले ध्रुव त्रिपाठी ने अब निर्देशन के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई है। उनकी फिल्म ‘रिपोर्टिंग लाइव’ दुनियाभर में नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई है। फिल्म देखने के बाद विज्ञापन जगत से जुड़े एक व्यक्ति ने इसकी कहानी, कलाकारों के अभिनय और निर्देशन की जमकर तारीफ की है।

उन्होंने सोशल मीडिया पर फिल्म से जुड़ा अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि कुछ साल पहले ध्रुव त्रिपाठी लंदन में फिल्म स्कूल की पढ़ाई पूरी कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने BBH India में ट्रेनी कॉपीराइटर के तौर पर इंटर्नशिप की थी। आज ध्रुव ने एक फिल्म लिखने और उसका निर्देशन करने का काम किया है, जिसे दुनियाभर में नेटफ्लिक्स पर रिलीज किया गया है।

उन्होंने बताया कि पिछले हफ्ते फिल्म के प्रीमियर में शामिल होने का मौका मिला और वह इसके लिए खुद को सम्मानित महसूस कर रहे हैं।

सच्ची घटनाओं से प्रेरित है फिल्म

‘रिपोर्टिंग लाइव’ खोजी पत्रकारिता पर आधारित एक थ्रिलर फिल्म है, जो सच्ची घटनाओं से प्रेरित है। फिल्म की कहानी, कलाकारों के चयन और निर्देशन को सराहना मिली है। फिल्म देखने के बाद उन्होंने इसे एक अच्छी तरह से सुनाई गई कहानी बताया।

फिल्म में परिणीति चोपड़ा, देवेन भोजानी और आदिल हुसैन ने अहम भूमिकाएं निभाई हैं। उनके अभिनय को भी काफी अच्छा बताया गया है। तारीफ करने वाले व्यक्ति के मुताबिक, सभी कलाकारों ने अपने किरदारों को विश्वसनीय और वास्तविक अंदाज में पेश किया है।

इसके अलावा, उन्होंने दिग्गज अभिनेता अमोल पालेकर को लंबे समय बाद पर्दे पर देखकर भी खुशी जताई। फिल्म में अमोल पालेकर छोटी-सी भूमिका में नजर आए हैं।

ध्रुव त्रिपाठी के काम की सराहना

फिल्म की तारीफ करते हुए उन्होंने लोगों से इसे देखने की अपील भी की। उनका कहना है कि फिल्म देखने में बिताए गए दो घंटे सार्थक होंगे। उन्होंने ध्रुव त्रिपाठी के काम की सराहना करते हुए उन्हें बधाई दी और उम्मीद जताई कि भविष्य में भी वह ऐसी ही अच्छी फिल्में लेकर आएंगे।

‘रिपोर्टिंग लाइव’ के जरिए ध्रुव त्रिपाठी ने लेखन और निर्देशन के क्षेत्र में अपनी रचनात्मक क्षमता दिखाई है। फिल्म को लेकर मिली इस प्रतिक्रिया से इसकी कहानी और कलाकारों के प्रदर्शन पर सकारात्मक राय सामने आई है। 

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अजय कुमार बने अंग्रेजी अखबार ‘टॉप स्टोरी’ के ग्रुप एडिटर

तीन दशक से ज्यादा का है पत्रकारिता का अनुभव, ‘आज तक’, ‘स्टार न्यूज’, ‘इंडिया टीवी’ और ‘न्यूज नेशन’ में निभा चुके हैं अहम जिम्मेदारियां

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Tuesday, 13 October, 2026
Ajay Kumar

वरिष्ठ पत्रकार और जाने-माने टीवी होस्ट अजय कुमार ने अंग्रेजी अखबार ‘टॉप स्टोरी’ (Top Story) के ग्रुप एडिटर के रूप में नई जिम्मेदारी संभाली है। अखबार की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, अजय कुमार संपादकीय बोर्ड को सलाह देने, उसका प्रबंधन करने, संपादकीय दिशा को नए सिरे से तय करने और मार्गदर्शन देने का काम करेंगे। इसके साथ ही वह अखबार की मार्केट में मौजूदगी बढ़ाने, ब्रैंड को मजबूत करने, कंटेंट तैयार करने और संपादकीय गुणवत्ता बनाए रखने की दिशा में भी काम करेंगे।

बता दें कि ‘टॉप स्टोरी’ देश के प्रमुख अंग्रेजी समाचार दैनिकों में शामिल है। अखबार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, इसकी राष्ट्रीय स्तर पर एक लाख से अधिक प्रिंट प्रतियों का सर्कुलेशन है। अजय कुमार के जुड़ने से अखबार के प्रिंट, डिजिटल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को नई संपादकीय दिशा देने की उम्मीद जताई गई है।

प्रिंट पत्रकारिता में लौटे अजय कुमार

तीन दशक से अधिक समय से इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट पत्रकारिता में सक्रिय अजय कुमार एक बार फिर प्रिंट पत्रकारिता से जुड़ रहे हैं। उनका मानना है कि टेलीविजन न्यूज और सोशल मीडिया के विस्तार के बावजूद प्रिंट पत्रकारिता की विश्वसनीयता और व्यापक पाठक वर्ग के बीच उसकी अहमियत बनी हुई है।

अजय कुमार के मुताबिक, अच्छी तरह रिसर्च की गई, दस्तावेजों के आधार पर तैयार और व्यवस्थित समाचार रिपोर्टों के साथ-साथ संपादकीय व विचार लेखों की अपनी अलग पहचान है। प्रिंट और सोशल मीडिया पर प्रकाशित सामग्री लंबे समय तक उपलब्ध रहती है, जबकि टेलीविजन पर प्रसारित समाचारों की प्रस्तुति की तुलना में इन प्लेटफॉर्म पर सामग्री का जीवनकाल अधिक होता है।

उनका मानना है कि मौजूदा दौर में संघर्ष, अव्यवस्था, उथल-पुथल और अलग-अलग नैरेटिव के बीच प्रामाणिक पत्रकारिता को नए सिरे से सामने लाने का अवसर है। ऐसे समय में संपादकीय और विचार लेखों से समृद्ध प्रिंट पत्रकारिता की भूमिका फिर से महत्वपूर्ण हो रही है।

‘भारत 24’ से लेकर ‘इंडिया टीवी’ तक निभाई अहम भूमिका

अजय कुमार ने अगस्त 2022 में शुरू हुए 24 घंटे के न्यूज चैनल ‘भारत 24’ की लॉन्चिंग और उसे आगे बढ़ाने में में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने चैनल की अवधारणा तैयार करने, उसके लक्षित दर्शक वर्ग, पहुंच, तकनीकी सुधार, उपकरणों की खरीद और वितरण व्यवस्था से जुड़े कामों में योगदान दिया। वह चैनल की संपादकीय नींव तैयार करने के साथ दिसंबर 2025 तक मैनेजिंग एडिटर के रूप में जुड़े रहे। इस दौरान उन्होंने रात 8 बजे प्रसारित होने वाले ‘मिस्टर एनालाइजर’ और शाम 6 बजे के थीमैटिक स्पेशल शो की मेजबानी भी की।

इससे पहले अजय कुमार हिंदी न्यूज चैनल ‘इंडिया टीवी’ में मैनेजिंग एडिटर रहे। इंडिया टीवी डिजिटल के प्रमुख के रूप में उन्होंने Indiatv.in और Indiatvnews.com वेबसाइटों की जिम्मेदारी संभाली और चैनल के लिए कई यूट्यूब चैनल शुरू किए। इस दौरान उन्होंने ‘जीतेगा इंडिया’ नाम के दैनिक न्यूज शो की मेजबानी की, जिसमें असाधारण उपलब्धियां हासिल करने वाले भारतीयों की कहानियां सामने लाई जाती थीं। इसके अलावा उन्होंने ‘मुकाबला’, ‘अबकी बार किसकी सरकार’ और ‘खबर से आगे’ जैसे कार्यक्रम भी होस्ट किए।

‘न्यूज नेशन’ की शुरुआत में भी रहे शामिल

वर्ष 2013 में अजय कुमार ने पांच सदस्यों की एक कोर टीम के साथ मिलकर न्यूज चैनल ‘न्यूज नेशन’ की परिकल्पना, संरचना और शुरुआत में योगदान दिया। चैनल के मैनेजिंग एडिटर और प्राइम टाइम होस्ट के रूप में उन्होंने इसकी संपादकीय पहचान स्थापित करने में भूमिका निभाई।

न्यूज नेशन में अपने सात साल के कार्यकाल के दौरान उन्होंने ‘लाख टके की बात’, ‘क्वेश्चन आवर’, ‘जीरो आवर’, ‘नेशन की बात’, ‘सुपर क्वेश्चन आवर’ और ‘प्रधानमंत्री’ जैसे कार्यक्रमों की मेजबानी की।

इससे पहले अजय कुमार ने देश के प्रमुख हिंदी न्यूज चैनल ‘आज तक’ में चैनल हेड और एग्जीक्यूटिव एडिटर के रूप में काम किया। उनके कार्यकाल के दौरान चैनल की हिंदी न्यूज बाजार में मजबूत स्थिति बनाए रखने और उसे आगे बढ़ाने की दिशा में काम किया गया। उन्होंने देश की राजनीति से जुड़े कई महत्वपूर्ण घटनाक्रमों और लोकसभा व विधानसभा चुनावों को कवर किया। अन्ना हजारे के नेतृत्व में हुए भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन सहित कई बड़े राजनीतिक घटनाक्रमों पर भी उन्होंने रिपोर्टिंग और विश्लेषण किया।

‘स्टार न्यूज’ में भी संभाली संपादकीय जिम्मेदारी

अजय कुमार ‘स्टार न्यूज’ में एग्जीक्यूटिव एडिटर के रूप में भी काम कर चुके हैं। वहां उन्होंने ‘नेशन रिपोर्टर’ नाम के कार्यक्रम की मेजबानी की, जो चैनल के प्रमुख कार्यक्रमों में शामिल रहा। इस दौरान उन्होंने अपने नाम और पहचान के साथ एक ब्रैंडेड शो की शुरुआत की। अपने कार्यकाल में उन्होंने आठ सप्ताह के लिए ब्रिटेन के स्काई न्यूज में भी काम किया, जहां उन्होंने अंतरराष्ट्रीय खबरों पर आधारित दैनिक कार्यक्रम ‘फॉरेन एडिटर’ तैयार किया और उसकी मेजबानी की।

पुतिन, मोदी और वाजपेयी समेत कई प्रमुख हस्तियों के इंटरव्यू

अजय कुमार ने अपने पत्रकारिता करियर में कई प्रमुख अंतरराष्ट्रीय और भारतीय हस्तियों के इंटरव्यू किए हैं। इनमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर, पाकिस्तान के राष्ट्रपति रहे परवेज मुशर्रफ और अमेरिका की पूर्व विदेश मंत्री कोंडोलीजा राइस शामिल हैं।

उन्होंने देश के विभिन्न शहरों में हुए आतंकी हमलों, राजनीतिक संकटों और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति से जुड़े घटनाक्रमों की रिपोर्टिंग की है। वर्ष 1999 में कारगिल युद्ध की व्यापक कवरेज के दौरान वह भारतीय सेना की अग्रिम टुकड़ी के साथ चोटी 4897 पर पहुंचने वाले पहले पत्रकार थे। वर्ष 2001 में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर आतंकी हमले के बाद उन्होंने न्यूयॉर्क में हुई तबाही की रिपोर्टिंग की। इसके अलावा उन्होंने इराक युद्ध के दौरान एम्बेडेड पत्रकार के रूप में काम किया और अमेरिकी बमबारी के दौरान अफगानिस्तान से भी रिपोर्टिंग की।

1990 के दशक के उत्तरार्ध में उन्होंने आतंकवाद से प्रभावित कश्मीर से व्यापक रिपोर्टिंग की और वहां सक्रिय विभिन्न आतंकी संगठनों के प्रमुखों के इंटरव्यू किए। उन्होंने पाकिस्तान में चरमपंथी गतिविधियों और इस्लामी कट्टरपंथ के बढ़ते प्रभाव पर भी रिपोर्टिंग की। वर्ष 2001 में उन्होंने राइस यूनिवर्सिटी और सिरैक्यूज यूनिवर्सिटी में ‘भारतीय उपमहाद्वीप में आतंकवाद के कारण और प्रभाव’ विषय पर शोधपत्र भी प्रस्तुत किए।

कई समाचार पत्रों और अंतरराष्ट्रीय प्रकाशनों में लिखे कॉलम

टीवी पत्रकारिता के साथ अजय कुमार का प्रिंट और डिजिटल लेखन से भी जुड़ाव रहा है। वह ‘द न्यू इंडियन एक्सप्रेस’, ‘फर्स्टपोस्ट’ के डिजिटल प्लेटफॉर्म और पूर्व में प्रकाशित ‘मेल टुडे’ जैसे प्रकाशनों के लिए नियमित रूप से लिखते रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने ‘द हेराल्ड’, ‘जुंग’ और ‘ढाका क्रॉनिकल’ जैसे अंतरराष्ट्रीय प्रकाशनों के लिए भी लेखन किया है।

अजय कुमार के पास इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट पत्रकारिता में 33 साल से अधिक का अनुभव है। वर्ष 1996 में लोकसभा चुनाव की कवरेज और सीएनएन इंटरनेशनल पर अपने व्यक्तिगत कार्यक्रम के साथ उन्होंने चुनावी राजनीति की रिपोर्टिंग शुरू की थी। इसके बाद वह आठ लोकसभा चुनावों और 205 से अधिक विधानसभा चुनावों की रिपोर्टिंग, लाइव कार्यक्रमों, मतगणना दिवस के विशेष कवरेज और चुनाव संबंधी विशेष कार्यक्रमों का हिस्सा रहे हैं। अब ‘टॉप स्टोरी’ के ग्रुप एडिटर के रूप में वह अपने लंबे संपादकीय और चुनावी पत्रकारिता के अनुभव का इस्तेमाल अखबार के प्रिंट, डिजिटल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को आगे बढ़ाने में करेंगे।

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एमआईक्यू ने आशीष आशधीर, समीर बजाज और यासर सुहैल को सौंपी नई जिम्मेदारी

प्रोग्रामेटिक मीडिया कंपनी एमआईक्यू ने आशीष आशधीर, समीर बजाज और यासर सुहैल को सेल्स और स्ट्रैटेजी की अहम जिम्मेदारियां सौंपी हैं, जिससे भारत में कंपनी की ग्रोथ और साझेदारी को मजबूती मिलेगी।

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Tuesday, 13 October, 2026
MIQ

प्रोग्रामेटिक मीडिया कंपनी एमआईक्यू (MiQ) ने आशीष आशधीर (Ashish Ashdhir) को रीजनल डायरेक्टर - सेल्स (वेस्ट), समीर बजाज (Sameer Bajaj) को रीजनल डायरेक्टर - सेल्स (नॉर्थ) और यासर सुहैल (Yasser Suhail) को डायरेक्टर - स्ट्रैटेजी नियुक्त किया है।

एमआईक्यू से जुड़ने से पहले आशीष आशधीर ने जियोहॉटस्टार (JioHotstar), वायकॉम18 मीडिया (Viacom18 Media) और टाइम्स इंटरनेट (Times Internet) जैसी प्रमुख कंपनियों में एजेंसी रिलेशनशिप मैनेजमेंट से जुड़ी अलग-अलग जिम्मेदारियां संभाली हैं। अपनी नियुक्ति पर उन्होंने कहा कि एमआईक्यू के साथ जुड़ना उनके लिए खुशी की बात है।

वह भारत के तेजी से बदलते ओटीटी और मीडिया क्षेत्र में अपने अनुभव का इस्तेमाल कंपनी की अगली ग्रोथ को आगे बढ़ाने में करना चाहते हैं। उनके मुताबिक, डेटा, टेक्नोलॉजी और मीडिया विशेषज्ञता को एक साथ जोड़ने की एमआईक्यू की क्षमता ने उसे दुनियाभर के मार्केटर्स के लिए भरोसेमंद प्रोग्रामेटिक पार्टनर बनाया है।

समीर बजाज 18 वर्षों से अधिक के मीडिया और एडटेक अनुभव के साथ एमआईक्यू में शामिल हुए हैं। उन्होंने सिल्वरपुश (Silverpush), कन्वोसाइट (Convosight), सोनी पिक्चर्स एंटरटेनमेंट (Sony Pictures Entertainment) और स्टार टीवी नेटवर्क (Star TV Network) जैसी कंपनियों में नेतृत्वकारी भूमिकाएं निभाई हैं। बजाज ने कहा कि डिजिटल विज्ञापन उद्योग में बदलाव के दौर में एमआईक्यू से जुड़ना उनके लिए उत्साहजनक है।

उन्होंने कहा कि डेटा और टेक्नोलॉजी ब्रांड्स के उपभोक्ताओं तक पहुंचने के तरीके को तेजी से बदल रहे हैं और वह अपने अनुभव के जरिए भारत में कंपनी की अगली ग्रोथ में योगदान देना चाहते हैं।

यासर सुहैल इससे पहले वेवमेकर (Wavemaker), जो अब डब्ल्यूपीपी मीडिया (WPP Media) का हिस्सा है, में वाइस प्रेसिडेंट - क्लाइंट सर्विसेज के पद पर काम कर चुके हैं। उन्होंने जीओक्यूआईआई (GOQii) और पब्लिसिस मीडिया (Publicis Media) में भी नेतृत्वकारी भूमिकाएं निभाई हैं। सुहैल ने कहा कि एमआईक्यू के साथ जुड़ना उनके करियर का नया अध्याय है।

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महिला पत्रकारों से बदसलूकी पर SC सख्त, दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी को किया तलब

दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों की कवरेज कर रहीं महिला पत्रकारों के साथ कथित बदसलूकी और यौन उत्पीड़न के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है।

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Tuesday, 13 October, 2026
Journalists62

दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों की कवरेज कर रहीं महिला पत्रकारों के साथ कथित बदसलूकी और यौन उत्पीड़न के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी को अदालत में पेश होने और मामले में लगाए गए आरोपों पर जवाब देने के लिए कहा है। अदालत इस मामले पर गुरुवार, 15 अक्टूबर को सुनवाई करेगी।

यह मामला विरोध प्रदर्शनों की रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों की सुरक्षा से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान सामने आया। नेटवर्क ऑफ विमेन इन मीडिया, इंडिया (NWMI) और फ्रीडम ऑफ स्पीच कलेक्टिव की ओर से दायर याचिकाओं में पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की गई है। याचिकाओं में यह आरोप भी लगाया गया है कि विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट के 10 अक्टूबर के आदेश का पालन नहीं किया गया।

महिला पत्रकारों की सुरक्षा का मामला

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के सामने वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने महिला पत्रकारों से जुड़े मामले को उठाया। उन्होंने अदालत को बताया कि याचिका खास तौर पर उन महिला पत्रकारों की सुरक्षा से संबंधित है, जिन्होंने विरोध प्रदर्शनों की कवरेज के दौरान कथित यौन उत्पीड़न का सामना किया।

इंदिरा जयसिंह ने अदालत से अनुरोध किया कि इस याचिका पर भी विरोध प्रदर्शनों से जुड़े दूसरे मामलों के साथ सुनवाई की जाए। उन्होंने यह भी बताया कि याचिका के बारे में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को पहले ही सूचना दे दी गई है।

दलीलें सुनने के बाद मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि मामले में सहायता करने और आरोपों पर स्थिति स्पष्ट करने के लिए दिल्ली पुलिस के किसी वरिष्ठ अधिकारी को अदालत में मौजूद रहना चाहिए।

पीठ ने याचिका को विरोध प्रदर्शनों से जुड़े अन्य मामलों के साथ 15 अक्टूबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई।

पत्रकारों ने लगाए मारपीट और यौन उत्पीड़न के आरोप

नेटवर्क ऑफ विमेन इन मीडिया, इंडिया की याचिका में विरोध प्रदर्शनों की रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने की मांग की गई है। इसमें कथित मारपीट, धमकी और मनमाने ढंग से हिरासत में लिए जाने जैसी घटनाओं से पत्रकारों को बचाने की मांग भी शामिल है।

याचिका में पुलिस और पत्रकारों के बीच बातचीत तथा विरोध प्रदर्शनों के दौरान उनके साथ किए जाने वाले व्यवहार को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश बनाने की मांग की गई है। साथ ही, संबंधित घटनाओं की स्वतंत्र जांच कराने और दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग भी की गई है।

यह याचिका दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision यानी SIR) के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों की कवरेज के दौरान महिला पत्रकारों के साथ कथित बदसलूकी के आरोपों के बाद दायर की गई है।

इन पत्रकारों का आरोप है कि उन्होंने खुद को प्रेस का सदस्य बताने के बावजूद पुलिस की ओर से कथित तौर पर धक्का-मुक्की, हिरासत और अपने पेशेवर काम में बाधा का सामना किया।

3 अक्टूबर की घटना भी उठाई गई

याचिका में 3 अक्टूबर की एक अलग घटना का भी संदर्भ है। आरोप है कि जंतर-मंतर के पास विरोध प्रदर्शन के दौरान हिरासत में ली गईं तीन महिला पत्रकारों के साथ दिल्ली पुलिस के कुछ कर्मियों ने यौन उत्पीड़न किया।

दिल्ली पुलिस ने कहा था कि शिकायतों को निष्पक्ष जांच के लिए अपनी क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया है। इस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी मीडिया में सामने आई खबरों का स्वतः संज्ञान लिया था। आयोग ने दिल्ली पुलिस आयुक्त से आरोपों पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

पत्रकारों के काम में बाधा नहीं डालने का आदेश

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 11 अक्टूबर को दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान कहा था कि वकीलों, पत्रकारों और अन्य पेशेवरों को अपने काम करने से नहीं रोका जाना चाहिए। यह निर्देश आवाजाही पर पाबंदियों और कथित गैरकानूनी हिरासत से जुड़ी शिकायतों पर विचार करते हुए दिया गया था।

अब महिला पत्रकारों की सुरक्षा से जुड़ी याचिका पर 15 अक्टूबर को अन्य संबंधित मामलों के साथ सुनवाई होनी है। अदालत में दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी की मौजूदगी से इन आरोपों पर पुलिस का पक्ष सामने आने और मामले में आगे की कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।

फिलहाल, महिला पत्रकारों की ओर से लगाए गए आरोपों की जांच जारी है। इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच और अदालत की आगे की कार्यवाही के आधार पर ही सामने आएगा।

 

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पल्लवी मेस्त्री हवल बनीं पिडिलाइट इंडस्ट्रीज की हेड-मीडिया

पल्लवी मेस्त्री हवल ने पिडिलाइट इंडस्ट्रीज में हेड - मीडिया की जिम्मेदारी संभाली है। वह एक दशक से अधिक समय से कंपनी से जुड़ी हैं और पहले कैरेट इंडिया में ग्रुप हेड थीं।

Last Modified:
Tuesday, 13 October, 2026
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पल्लवी मेस्त्री हवल (Pallavi Mestry Haval) ने पिडिलाइट इंडस्ट्रीज (Pidilite Industries) में हेड - मीडिया (Head - Media) की जिम्मेदारी संभाली है। उन्होंने लिंक्डइन (LinkedIn) पर अपनी नई भूमिका की जानकारी साझा की।

पल्लवी एक दशक से अधिक समय से पिडिलाइट इंडस्ट्रीज से जुड़ी हुई हैं। कंपनी में शामिल होने से पहले वह कैरेट इंडिया (Carat India) में ग्रुप हेड (Group Head) के पद पर कार्यरत थीं। अपने करियर की शुरुआत में उन्होंने मैडिसन कम्युनिकेशंस (Madison Communications) के साथ भी काम किया है।

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AI में खबरों के इस्तेमाल पर मीडिया संस्थानों की नजर, SPUR से जुड़े 40 से ज्यादा नए प्रकाशक

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कंपनियां पत्रकारिता से जुड़ी खबरों और दूसरे कंटेंट का इस्तेमाल किस तरह कर रही हैं, इस पर नजर रखने और अपने अधिकारों को मजबूत करने के लिए मीडिया संस्थान एकजुट हो रहे हैं।

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Tuesday, 13 October, 2026
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कंपनियां पत्रकारिता से जुड़ी खबरों और दूसरे कंटेंट का इस्तेमाल किस तरह कर रही हैं, इस पर नजर रखने और अपने अधिकारों को मजबूत करने के लिए मीडिया संस्थान एकजुट हो रहे हैं। इसी कड़ी में द न्यूयॉर्क टाइम्स, द इकोनॉमिस्ट और एजेंस फ्रांस-प्रेस (AFP) जैसे बड़े मीडिया संस्थान ‘स्टैंडर्ड्स फॉर पब्लिशर यूसेज राइट्स’ (SPUR) गठबंधन से जुड़ गए हैं।

इस गठबंधन का मकसद AI कंपनियों की ओर से न्यूज कंटेंट के इस्तेमाल को लेकर साझा तकनीकी और व्यावसायिक मानक तैयार करना है। इसके जरिए प्रकाशक यह पता लगा सकेंगे कि उनके कंटेंट का इस्तेमाल AI सिस्टम किस तरह कर रहे हैं। साथ ही, जिन प्रकाशकों के कंटेंट का इस्तेमाल लाइसेंस के तहत किया जाता है, उनके लिए भुगतान और इस्तेमाल से जुड़ी पारदर्शी जानकारी की व्यवस्था बनाने की भी कोशिश की जा रही है।

80 से ज्यादा संगठनों तक पहुंचा गठबंधन

SPUR के हालिया विस्तार में 40 से ज्यादा नए प्रकाशक शामिल हुए हैं। इसके साथ ही गठबंधन की सदस्यता 20 से अधिक देशों के 80 से ज्यादा संगठनों तक पहुंच गई है। नए सदस्यों में द अटलांटिक और ब्राजील का नेशनल एसोसिएशन ऑफ न्यूजपेपर्स भी शामिल हैं। वहीं, इस गठबंधन के संस्थापक सदस्यों में फाइनेंशियल टाइम्स, बीबीसी और एसोसिएटेड प्रेस जैसे प्रमुख मीडिया संस्थान शामिल हैं।

इस पहल के जरिए प्रकाशक AI कंपनियों के साथ अपने संबंधों में कंटेंट के इस्तेमाल, उसके अधिकारों और भुगतान से जुड़े मामलों पर ज्यादा स्पष्टता लाना चाहते हैं।

AI में खबरों के इस्तेमाल का रिकॉर्ड रखने की पहल

इस महीने की शुरुआत में SPUR ने अपने ‘कंटेंट टेलीमेट्री स्टैंडर्ड’ का पहला संस्करण जारी किया था। यह एक ओपन-सोर्स तकनीकी व्यवस्था है, जिसे इस बात का रिकॉर्ड रखने के लिए तैयार किया गया है कि AI प्लेटफॉर्म प्रकाशकों के कंटेंट का इस्तेमाल कब और किस तरह करते हैं।

इस मानक के तहत यह दर्ज किया जा सकेगा कि किसी AI प्लेटफॉर्म ने प्रकाशक के कंटेंट को कब हासिल किया, AI के जवाब को आधार देने के लिए उसका इस्तेमाल कब किया, उसे जवाब में कब स्रोत के रूप में बताया, कब दिखाया और कब उस पर यूजर्स ने प्रतिक्रिया दी या उससे जुड़ाव दिखाया।

इस व्यवस्था का उद्देश्य प्रकाशकों को अपने कंटेंट के इस्तेमाल के बारे में बेहतर जानकारी देना है। इससे उन्हें यह समझने में मदद मिल सकती है कि उनकी खबरें और दूसरे कंटेंट AI प्लेटफॉर्म तक किस तरह पहुंच रहे हैं और उनका उपयोग कैसे किया जा रहा है।

कॉपीराइट और भुगतान को लेकर बढ़ रहा विवाद

यह पहल ऐसे समय में सामने आई है, जब न्यूज प्रकाशकों और AI कंपनियों के बीच कॉपीराइट और कंटेंट के इस्तेमाल के बदले भुगतान को लेकर तनाव बढ़ रहा है। कई मीडिया कंपनियों ने आरोप लगाया है कि उनके कॉपीराइट वाली खबरों और दूसरे कंटेंट का इस्तेमाल बड़े भाषा मॉडल (Large Language Models) को प्रशिक्षित करने के लिए बिना अनुमति किया गया। इस मुद्दे पर कुछ मीडिया कंपनियों ने कानूनी कार्रवाई भी की है।

इसके अलावा, प्रकाशकों की चिंता यह भी है कि AI से तैयार जवाबों के कारण यूजर न्यूज वेबसाइट्स पर जाने के बजाय सीधे AI प्लेटफॉर्म से जानकारी हासिल कर रहे हैं। इससे खबरों की वेबसाइट्स पर आने वाले पाठकों की संख्या और रेफरल ट्रैफिक प्रभावित हो सकता है।

ऐसे में प्रकाशक चाहते हैं कि AI कंपनियों की ओर से उनके कंटेंट के इस्तेमाल को मापने, उसकी जानकारी देने और जरूरत पड़ने पर लाइसेंस के तहत उसका इस्तेमाल करने के लिए स्पष्ट व्यवस्था हो।

SPUR लाइसेंस देने वाली संस्था नहीं

हालांकि, SPUR कोई सामूहिक लाइसेंसिंग संस्था नहीं है। इसका मतलब है कि यह गठबंधन सभी सदस्यों की ओर से AI कंपनियों के साथ लाइसेंसिंग समझौते नहीं करेगा।

प्रकाशकों का अपने कंटेंट के व्यावसायिक इस्तेमाल को लेकर अलग-अलग समझौते करने का अधिकार बरकरार रहेगा। SPUR का ध्यान साझा तकनीकी ढांचा और ऐसे मानक तैयार करने पर है, जिनसे कंटेंट के इस्तेमाल की अनुमति, उसकी निगरानी, माप और लाइसेंसिंग की प्रक्रिया को बेहतर बनाया जा सके।

भारत में ANI-OpenAI कॉपीराइट मामला चर्चा में

भारत में भी न्यूज कंटेंट के AI में इस्तेमाल को लेकर बहस जारी है। यहां यह मुद्दा ANI और OpenAI के बीच चल रहे कॉपीराइट मामले के जरिए सामने आया है।

दिए गए विवरण के मुताबिक, दिल्ली हाई कोर्ट ने जुलाई में कहा था कि मॉडल को प्रशिक्षित करने के लिए OpenAI की ओर से ANI के कंटेंट का इस्तेमाल ‘फेयर डीलिंग’ के दायरे में आता है। हालांकि, ANI ने इस फैसले के खिलाफ अपील की है। सितंबर में अदालत ने OpenAI से उसका जवाब भी मांगा था।

इस मामले पर मीडिया और AI उद्योग की नजर बनी हुई है, क्योंकि इससे यह स्पष्ट होने में मदद मिल सकती है कि भारतीय कॉपीराइट कानून के तहत प्रकाशकों के कंटेंट का AI मॉडल को प्रशिक्षित करने के लिए इस्तेमाल किस तरह देखा जाएगा।

कुल मिलाकर, SPUR का विस्तार इस बात का संकेत है कि न्यूज प्रकाशक AI कंपनियों के साथ कंटेंट के इस्तेमाल को लेकर ज्यादा पारदर्शिता और स्पष्ट नियम चाहते हैं। आने वाले समय में यह बहस और अहम हो सकती है कि AI कंपनियां पत्रकारिता के कंटेंट का इस्तेमाल किन शर्तों पर करेंगी और इसके बदले प्रकाशकों को किस तरह का अधिकार या भुगतान मिलेगा। 

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डीडी फ्री डिश के ऑक्शन नियमों में हो सकता है बदलाव, जनवरी 2027 से पहले समीक्षा की तैयारी

भारत में एक समय ऐसा था, जब डीडी फ्री डिश पर स्लॉट हासिल करना टीवी चैनलों के लिए काफी मुश्किल और प्रतिस्पर्धा भरा काम था।

Last Modified:
Tuesday, 13 October, 2026
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भारत में एक समय ऐसा था, जब डीडी फ्री डिश पर स्लॉट हासिल करना टीवी चैनलों के लिए काफी मुश्किल और प्रतिस्पर्धा भरा काम था। खासकर हिंदी भाषी क्षेत्रों और कम खर्च में टीवी देखने वाले दर्शकों तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रहे ब्रॉडकास्टर्स के लिए प्रसार भारती का यह मुफ्त डीटीएच प्लेटफॉर्म काफी अहम था। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह थी कि इसके जरिए दर्शकों तक पहुंच बनाने के लिए उनसे हर महीने का सब्सक्रिप्शन शुल्क लेने की जरूरत नहीं थी। हालांकि, यह खासियत आज भी बनी हुई है, लेकिन प्लेटफॉर्म पर स्लॉट हासिल करने के लिए होने वाली नीलामी का माहौल अब बदलता नजर आ रहा है।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, डीडी फ्री डिश की पहुंच 2018 में करीब 3.3 करोड़ घरों से बढ़कर 2024 में लगभग 4.9 करोड़ घरों तक पहुंच गई। वहीं, फिक्की-ईवाई के ताजा अनुमानों के अनुसार, 2025 में फ्री डिश के जरिए मुफ्त टीवी देखने वाले घरों की संख्या करीब 5.3 करोड़ थी।

इसके बावजूद, इस बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंच बनाने के लिए होने वाली नीलामी में बदलाव देखने को मिल रहा है। पहले जहां सीमित MPEG-2 क्षमता वाले स्लॉट हासिल करने के लिए चैनलों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा होती थी और वे ऊंची बोली लगाते थे, वहीं अब कई स्लॉट खाली रह जा रहे हैं। इन खाली स्लॉट के लिए बार-बार नीलामी करनी पड़ रही है।

सूत्रों के मुताबिक, इस स्थिति को देखते हुए प्रसार भारती जनवरी 2027 में होने वाले अगले सालाना नीलामी चक्र से पहले डीडी फ्री डिश की नीलामी प्रक्रिया की समीक्षा कर सकता है।

नीलामी के नियमों में संभावित बदलाव की तैयारी ऐसे समय में हो रही है, जब सरकारी प्रसारक को नीलामी से होने वाली कमाई में गिरावट, खाली स्लॉट भरने के लिए बार-बार प्रयास करने और पारंपरिक टीवी प्रसारण यानी लीनियर टेलीविजन पर बढ़ते दबाव जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

हालांकि, नीलामी प्रक्रिया में किसी भी तरह का बदलाव बाजार की मौजूदा स्थिति का आकलन करने और उद्योग से जुड़े पक्षों के साथ बातचीत के बाद ही किया जा सकता है। ऐसे में जनवरी 2027 के नीलामी चक्र से पहले डीडी फ्री डिश की नीलामी व्यवस्था में संभावित बदलाव पर सबकी नजर रहेगी। 

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राज नायक ने YAAP Digital के चेयरमैन एवं एमडी पद से दिया इस्तीफा, बताई वजह

उन्होंने इसे एक कठिन फैसला बताया। हालांकि, उन्होंने कंपनी की टीम के साथ काम करने के अनुभव को अच्छा बताया और YAAP Digital के भविष्य को लेकर भरोसा जताया।

Last Modified:
Monday, 12 October, 2026
Raj Nayak Yaap

डिजिटल मार्केटिंग कंपनी ‘याप डिजिटल लिमिटेड’ (YAAP Digital Ltd) के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर (CMD) राज नायक ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने यह फैसला काफी सोच-विचार के बाद लिया है। नायक ने अपने इस्तीफे की वजह पूर्णकालिक परिचालन संबंधी भूमिका की जिम्मेदारियों और अपनी निजी प्राथमिकताओं पर ध्यान देने की इच्छा को बताया है।

अपने इस्तीफे में राज नायक ने कहा कि इस स्तर पर पूर्णकालिक परिचालन संबंधी भूमिका की जिम्मेदारियां और उसकी व्यस्तता उतनी अधिक हैं, जितना वह फिलहाल अपने ऊपर लेना नहीं चाहते। उन्होंने इसे एक कठिन फैसला बताया। हालांकि, उन्होंने कंपनी की टीम के साथ काम करने के अनुभव को अच्छा बताया और YAAP Digital के भविष्य को लेकर भरोसा जताया।

राज नायक अब अपने उद्यमशीलता से जुड़े प्रयासों और निजी जीवन से जुड़ी प्राथमिकताओं पर ध्यान देना चाहते हैं। उन्होंने कंपनी की भविष्य की संभावनाओं को लेकर भी सकारात्मक रुख व्यक्त किया है।

गौरतलब है कि YAAP Digital Ltd ने इस साल जुलाई में राज नायक को कंपनी का चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर नियुक्त किया था। यह नियुक्ति कंपनी के संस्थापक, चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. अतुल हेगड़े के 7 जुलाई 2026 को निधन के बाद हुई थी।

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ऋत्विक भालेकर की NDTV में नई पारी, संभाली डिप्टी एडिटर की जिम्मेदारी

वह मुंबई ब्यूरो में अपनी भूमिका निभाएंगे। ऋत्विक भालेकर इससे पहले TV टुडे नेटवर्क के साथ जुड़े हुए थे, जहां उन्होंने इंडिया टुडे, आजतक और मुंबई तक मराठी डिजिटल के लिए काम किया।

Last Modified:
Monday, 12 October, 2026
Ritvick Bhalekar

पत्रकार ऋत्विक भालेकर ने एनडीटीवी (NDTV) के साथ मीडिया में अपनी नई पारी का आगाज किया है। उन्होंने यहां बतौर डिप्टी एडिटर नई जिम्मेदारी संभाली है। वह मुंबई ब्यूरो में अपनी भूमिका निभाएंगे। ऋत्विक भालेकर इससे पहले TV टुडे नेटवर्क के साथ जुड़े हुए थे, जहां उन्होंने इंडिया टुडे, आजतक और मुंबई तक मराठी डिजिटल के लिए काम किया।

TV टुडे नेटवर्क में अपनी करीब चार साल की पारी के दौरान उन्होंने एसोसिएट एडिटर के तौर पर जिम्मेदारी निभाई। ऋत्विक भालेकर को मीडिया इंडस्ट्री में काम करने का करीब 16 साल का अनुभव है।

ऋत्विक भालेकर की परवरिश मुंबई के वर्ली इलाके में हुई। उन्होंने दादर स्थित IES स्कूल से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की। इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज से जर्नलिज्म की पढ़ाई की और पुणे यूनिवर्सिटी से मास्टर्स इन कम्युनिकेशन की डिग्री हासिल की।

समाचार4मीडिया की ओर से ऋत्विक भालेकर को उनकी नई पारी के लिए ढेरों बधाई और शुभकानाएं।

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ओब्वियस ने जीते ट्विनिंग्स इंडिया और ओवल्टाइन इंडिया के रिटेनर मैंडेट

ओब्वियस ने ट्विनिंग्स इंडिया और ओवल्टाइन इंडिया के रिटेनर मैंडेट हासिल किए हैं। दोनों ब्रांड्स के जुड़ने से एजेंसी ने फूड एंड बेवरेज कैटेगरी में अपनी मौजूदगी और पोर्टफोलियो मजबूत किया है।

Last Modified:
Monday, 12 October, 2026
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ओब्वियस (Obveus) ने ट्विनिंग्स इंडिया (Twinings India) और ओवल्टाइन इंडिया (Ovaltine India) के रिटेनर मैंडेट हासिल किए हैं। दोनों नई जिम्मेदारियों के साथ एजेंसी ने फूड एंड बेवरेज कैटेगरी में अपनी मौजूदगी मजबूत की है।

दोनों ब्रांड एसोसिएटेड ब्रिटिश फूड्स (Associated British Foods-ABF) के इंटरनेशनल ग्रॉसरी पोर्टफोलियो का हिस्सा हैं। इनके जुड़ने के बाद ओब्वियस के ब्रांड पोर्टफोलियो में अडानी ग्रुप (Adani Group), बजाज (Bajaj), टाटा (Tata), मिसेज बेक्टर’स फूड स्पेशियलिटीज (Mrs. Bector’s Food Specialities), फिलिप मॉरिस इंटरनेशनल (Philip Morris International-PMI), हाउस ऑफ अभिनंदन लोढ़ा (House of Abhinandan Lodha) और सेंट-गोबेन (Saint-Gobain) जैसे नाम शामिल हो गए हैं।

ओब्वियस के फाउंडर रोहित कुमार कनोजिया (Rohit Kumar Kanojia) ने कहा कि ट्विनिंग्स और ओवल्टाइन का जुड़ना पूरी टीम के लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने कहा कि दोनों ब्रांड्स की लंबी विरासत है और उनकी मार्केटिंग की जिम्मेदारी मिलना एजेंसी के लिए महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि क्लाइंट्स को सिर्फ कैंपेन चलाने वाली एजेंसी नहीं, बल्कि ऐसा पार्टनर चाहिए जो उनके बिजनेस को समझे, रणनीतिक तरीके से सोचे और आइडिया को एग्जीक्यूशन तक लेकर जाए। ओब्वियस ने इसी सोच के साथ अपनी टीम और काम करने का तरीका तैयार किया है।

कनोजिया ने कहा कि अडानी, बजाज, टाटा, मिसेज बेक्टर’स, पीएमआई, हाउस ऑफ अभिनंदन लोढ़ा और सेंट-गोबेन जैसे अलग-अलग क्षेत्रों के ब्रांड्स के साथ काम करने से एजेंसी को विभिन्न कैटेगरी में अनुभव मिला है। ट्विनिंग्स और ओवल्टाइन का जुड़ना इस सफर में अगला महत्वपूर्ण कदम है।

ट्विनिंग्स इंडिया और ओवल्टाइन इंडिया के मार्केटिंग हेड एमडी. गुलफाम अंसारी (MD. Gulfam Ansari) ने कहा कि ट्विनिंग्स और ओवल्टाइन अलग-अलग ब्रांड्स हैं और दोनों की अपनी विरासत, पहचान और कंज्यूमर प्रॉमिस है।

ट्विनिंग्स की विरासत 1706 तक जाती है और यह क्वालिटी, कारीगरी और अच्छी चाय की परंपरा से जुड़ा है। वहीं, 1904 से स्विस न्यूट्रिशन साइंस पर आधारित ओवल्टाइन पोषण, ऊर्जा और परिवार के रोजमर्रा के पलों से जुड़ा ब्रांड है।

उन्होंने कहा कि भारत में दोनों ब्रांड्स के लिए अवसर नई पीढ़ी के उपभोक्ताओं के बीच अपनी पहचान और प्रासंगिकता बढ़ाने का है। आज के उपभोक्ता ज्यादा जिज्ञासु, हेल्थ कॉन्शियस और अपनी पसंद को लेकर पहले से अधिक चयनात्मक हैं।

अंसारी ने कहा कि ब्रांड को आगे बढ़ाने के लिए सिर्फ अच्छी कैंपेन पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए लगातार प्रभावी स्टोरीटेलिंग, कंज्यूमर बिहेवियर की गहरी समझ और ऐसा एग्जीक्यूशन जरूरी है, जो इनसाइट को मापने योग्य प्रभाव में बदल सके।

उन्होंने कहा कि ओब्वियस की रणनीतिक सोच, क्रिएटिव एनर्जी और मजबूत एग्जीक्यूशन ने उन्हें प्रभावित किया। अब दोनों टीमें मिलकर दोनों ब्रांड्स के अगले चरण को तैयार करने की दिशा में काम करेंगी।

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