काकून सेठी 8 अक्टूबर 2026 से मीडिया रिसर्च यूजर्स काउंसिल इंडिया की नई सीईओ होंगी। वह 35 वर्षों के अनुभव के साथ आईआरएस के रीलॉन्च की जिम्मेदारी संभालेंगी।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
मीडिया रिसर्च यूजर्स काउंसिल इंडिया (Media Research Users Council India) ने काकून सेठी (Kaacon Sethi) को अपना नया सीईओ (CEO) नियुक्त किया है। वह 8 अक्टूबर 2026 से यह जिम्मेदारी संभालेंगी। एमआरयूसीआई (MRUCI) में यह शीर्ष नेतृत्व पद करीब छह साल से खाली था। उनकी नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब इंडियन रीडरशिप सर्वे (Indian Readership Survey) के दोबारा शुरू होने की तैयारी है।
काकून सेठी के पास मीडिया, एंटरटेनमेंट, स्पोर्ट्स, कंटेंट और मार्केटिंग के क्षेत्र में 35 वर्षों से ज्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रमुख एजेंसियों के साथ मीडिया प्लानिंग और मीडिया बाइंग (Media Planning & Buying) से की थी।
इसके बाद वह सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन (Sony Entertainment Television) से जुड़ीं, जहां उन्होंने सेट (SET) के मार्केटिंग और सेल्स (Marketing & Sales) का नेतृत्व किया। इसी दौरान उन्होंने सोनी मैक्स (Sony MAX) को बिजनेस हेड (Business Head) के तौर पर लॉन्च किया और पीएंडएल (P&L) की जिम्मेदारी संभाली।
काकून सेठी के एग्जीक्यूटिव लीडरशिप (Executive Leadership) अनुभव में के सेरा सेरा प्रोडक्शंस (K Sera Sera Productions) की सीईओ और लिंटास मीडिया ग्रुप (Lintas Media Group) में ब्रांडेड कंटेंट सॉल्यूशंस (Branded Content Solutions) का नेतृत्व शामिल है।
सबसे हाल में उन्होंने दैनिक भास्कर ग्रुप (Dainik Bhaskar Group) में एक दशक से ज्यादा समय तक चीफ कॉरपोरेट मार्केटिंग ऑफिसर (Chief Corporate Marketing Officer) के तौर पर काम किया। इसके बाद उन्होंने कांटार-दैनिक भास्कर अर्बन भारत पहल (Kantar–Dainik Bhaskar Urban Bharat initiative) और रिपोर्ट में क्लाइंट लीड (Client Lead) की भूमिका निभाई।
एमआरयूसीआई में नई जिम्मेदारी के तहत काकून सेठी इंडियन रीडरशिप सर्वे को नए सिरे से शुरू करने की प्रक्रिया का नेतृत्व करेंगी। इसमें स्टडी डिजाइन (Study Design), मेथडोलॉजी (Methodology) और मीडिया क्वालिटी व इम्पैक्ट (Media Quality & Impact) को मापने के लिए नए फ्रेमवर्क पर काम किया जाएगा।
एमआरयूसीआई के चेयरमैन विक्रम सखूजा (Vikram Sakhuja) ने कहा, “मैं बहुत उत्साहित हूं कि काकून ऐसे समय में एमआरयूसीआई का नेतृत्व करेंगी, जब ऑडियंस मेजरमेंट (Audience Measurement) को विश्वसनीयता के साथ नए नजरिए की भी जरूरत है। मैं उन्हें शुभकामनाएं देता हूं।”
काकून सेठी ने कहा, “मैं एमआरयूसीआई की यह जिम्मेदारी संभालकर खुश हूं। ऑडियंस मेजरमेंट मीडिया इंडस्ट्री को बदलते मीडिया कंजम्पशन बिहेवियर (Media Consumption Behaviour) को समझने और बेहतर फैसले लेने में मदद करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।”
ओम्निकॉम मीडिया इंडिया के सीईओ कार्तिक शर्मा को एमआरयूसीआई बोर्ड ऑफ गवर्नर्स में नियुक्त किया गया है। वह मीडिया रिसर्च, एनालिटिक्स और कम्युनिकेशन प्लानिंग में करीब तीन दशक का अनुभव रखते हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
ओम्निकॉम मीडिया इंडिया (Omnicom Media India) के सीईओ कार्तिक शर्मा (Kartik Sharma) को मीडिया रिसर्च यूजर्स काउंसिल इंडिया (Media Research Users Council India) यानी एमआरयूसीआई (MRUCI) के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स (Board of Governors) में नियुक्त किया गया है।
कार्तिक शर्मा बोर्ड में नियुक्त किए गए चार नए सदस्यों में शामिल हैं। उनके साथ एचटी मीडिया (HT Media) में प्रिंट और रेडियो के सीईओ समुद्र भट्टाचार्य (Samudra Bhattacharya), साकल मीडिया प्राइवेट लिमिटेड (Sakal Media Pvt. Ltd.) की निदेशक जान्हवी अभिजीत पवार (Janhavi Abhijit Pawar) और डब्ल्यूपीपी मीडिया साउथ एशिया (WPP Media South Asia) की प्रेसिडेंट, क्लाइंट सॉल्यूशंस नवीन खेमका (Navin Khemka) को भी बोर्ड में नियुक्त किया गया है।
ये नियुक्तियां ऐसे समय हुई हैं, जब एमआरयूसीआई भारतीय रीडरशिप सर्वे (Indian Readership Survey) यानी आईआरएस (IRS) को दोबारा शुरू करने की दिशा में काम कर रहा है। संगठन के अनुसार, नए आईआरएस का उद्देश्य मीडिया कंजम्पशन (Media Consumption) के बदलते स्वरूप को ध्यान में रखते हुए आधुनिक क्रॉस-मीडिया मेजरमेंट फ्रेमवर्क (Cross-Media Measurement Framework) तैयार करना है।
कार्तिक शर्मा को मीडिया इंडस्ट्री (Media Industry) में करीब तीन दशक का अनुभव है। उन्हें कम्युनिकेशन प्लानिंग (Communication Planning), बिहेवियरल इकोनॉमिक्स (Behavioural Economics), मीडिया रिसर्च (Media Research), एनालिटिक्स (Analytics) और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल है। उन्होंने ग्राहकों के साथ मजबूत बिजनेस रिलेशनशिप बनाने पर भी काम किया है। उनके अनुभव में हिंदुस्तान यूनिलीवर (Hindustan Unilever), मोंडेलेज (Mondelez), नेटफ्लिक्स (Netflix) और लॉरियल (L’Oréal) जैसे प्रमुख ब्रांड शामिल हैं।
शर्मा ने अपने करियर की शुरुआत एचटीए (HTA) में मीडिया प्लानर (Media Planner) के रूप में की थी। इसके बाद वह लिंटास (Lintas) में चैनल प्लानिंग डायरेक्टर (Channel Planning Director) बने। आगे उन्होंने माइंडशेयर (Mindshare), मैडिसन मीडिया रिसर्च सेंटर (Madison Media Research Centre) और मैक्सस (Maxus) में अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालीं। मैक्सस में उन्होंने पश्चिम क्षेत्र का नेतृत्व किया।
प्रसार भारती की न्यूज सर्विस पीबीशब्द (PBSHABD) की पहुंच लगातार बढ़ रही है। अब देशभर के करीब 3,600 मीडिया संगठन इस सेवा से जुड़े हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
प्रसार भारती की न्यूज सर्विस पीबीशब्द (PBSHABD) की पहुंच लगातार बढ़ रही है। अब देशभर के करीब 3,600 मीडिया संगठन इस सेवा से जुड़े हैं। सार्वजनिक प्रसारक ने करीब दो साल पहले अपनी न्यूज इंफ्रास्ट्रक्चर को बाहरी यूजर्स के लिए भी उपलब्ध कराया था।
मार्च 2024 में शुरू किया गया पीबीशब्द, प्रसार भारती की पहले से चल रही प्रसार भारती न्यूज सर्विस (PBNS) का विस्तार है। पीबीएनएस पहले आकाशवाणी और दूरदर्शन के लिए एक इंटरनल न्यूज वायर के तौर पर काम करता था।
अब पीबीशब्द के जरिए रजिस्टर्ड अखबारों, टीवी और रेडियो ब्रॉडकास्टर्स, डिजिटल पब्लिशर्स और कंटेंट क्रिएटर्स को अलग-अलग फॉर्मेट और भाषाओं में तैयार न्यूज कंटेंट उपलब्ध कराया जाता है।
मार्च 2027 तक मुफ्त है सेवा
पीबीशब्द की सेवा फिलहाल मार्च 2027 तक मुफ्त है। इसके जरिए करीब 50 कैटेगरी में चौबीसों घंटे खबरें उपलब्ध कराई जाती हैं। कंटेंट 15 भारतीय भाषाओं में दिया जाता है।
पीबीशब्द के लिए प्रसार भारती ने नया न्यूज रूम शुरू करने के बजाय अपने मौजूदा न्यूज नेटवर्क का इस्तेमाल किया है। इसकी न्यूज पाइपलाइन में 1,500 से ज्यादा रिपोर्टर, कॉरेस्पॉन्डेंट और स्ट्रिंगर योगदान देते हैं। इनके साथ करीब 60 डेडिकेटेड एडिटोरियल डेस्क चौबीसों घंटे काम करते हैं।
आकाशवाणी और दूरदर्शन के क्षेत्रीय न्यूज यूनिट भी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कवर करते हैं। इससे पीबीशब्द का रिपोर्टिंग नेटवर्क प्रसार भारती के अपने प्लेटफॉर्म से काफी आगे तक पहुंचता है।
पांच फॉर्मेट में मिलता है कंटेंट
पीबीशब्द पर खबरें टेक्स्ट, वीडियो, ऑडियो, फोटो और इन्फोग्राफिक्स जैसे पांच फॉर्मेट में उपलब्ध होती हैं। इससे मीडिया संगठन एक ही न्यूज फीड का इस्तेमाल टीवी, प्रिंट, वेबसाइट, सोशल मीडिया और दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कर सकते हैं।
इस सर्विस की एक खास बात इसका डिस्ट्रीब्यूशन मॉडल है। रजिस्टर्ड यूजर्स को प्लेटफॉर्म से डाउनलोड किए गए कंटेंट के लिए कोई सब्सक्रिप्शन फीस नहीं देनी पड़ती। फिलहाल यह मुफ्त सुविधा मार्च 2027 तक जारी रहने की बात कही गई है।
बैकग्राउंडर के मुताबिक, इस कंटेंट पर प्रसार भारती का लोगो नहीं होता और क्रेडिट लाइन देना भी जरूरी नहीं है। इससे छोटे प्रकाशनों को फायदा हो सकता है, क्योंकि वे किसी राष्ट्रीय खबर को अपने ही अखबार या प्लेटफॉर्म के नाम से प्रकाशित कर सकते हैं और इसके लिए बड़ा रिपोर्टिंग नेटवर्क बनाए रखना जरूरी नहीं होता।
छोटे और क्षेत्रीय मीडिया संगठनों के लिए मददगार
यह मॉडल खास तौर पर उन छोटे और क्षेत्रीय मीडिया संगठनों के लिए उपयोगी हो सकता है, जिनके दिल्ली या भारत के बाहर अपने संवाददाता नहीं हैं। अलग-अलग फॉर्मेट में तैयार कंटेंट मिलने से प्रोडक्शन लागत कम करने और खबर मिलने से लेकर उसके प्रकाशन तक का समय घटाने में भी मदद मिल सकती है।
पीबीशब्द फिलहाल 15 भारतीय भाषाओं और करीब 50 कैटेगरी में कंटेंट उपलब्ध कराता है। इसमें राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और स्थानीय घटनाक्रम शामिल हैं। इसके यूजर्स में अखबार, न्यूज टीवी चैनल, डिजिटल पब्लिशर्स और कंटेंट क्रिएटर्स शामिल हैं।
आकाशवाणी और दूरदर्शन का बड़ा न्यूज नेटवर्क
पीबीशब्द के पीछे प्रसार भारती का बड़ा रिपोर्टिंग और बुलेटिन नेटवर्क काम करता है। आकाशवाणी के 46 क्षेत्रीय न्यूज यूनिट हैं और मुख्यालय स्तर पर भी ऑपरेशन चलता है। आकाशवाणी रोजाना 92 भाषाओं और बोलियों में 607 बुलेटिन तैयार करता है।
वहीं, दूरदर्शन न्यूज के 31 क्षेत्रीय न्यूज यूनिट और मुख्यालय का ऑपरेशन है। दूरदर्शन न्यूज रोजाना 22 से ज्यादा भाषाओं और बोलियों में 145 से ज्यादा बुलेटिन तैयार करता है।
खबरों की कई स्तर पर जांच
पीबीशब्द का कहना है कि कंटेंट जारी करने से पहले उसकी कई स्तर पर एडिटोरियल जांच की जाती है। फर्जी, बदले हुए या छेड़छाड़ किए गए कंटेंट को रोकने के लिए सुरक्षा उपाय किए गए हैं। साथ ही, बिना पुष्टि वाले ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से मिली जानकारी को लेकर भी सावधानी बरती जाती है।
खबरों में टाइमस्टैम्प, डेटलाइन और कैप्शन दिए जाते हैं, जिससे यूजर्स को यह पता चलता है कि घटना कब और कहां हुई। यह वेरिफिकेशन सिस्टम ऐसे समय में महत्वपूर्ण बताया गया है, जब खबरें टीवी, अखबार, वेबसाइट, यूट्यूब, सोशल मीडिया और मोबाइल ऐप जैसे कई प्लेटफॉर्म पर तेजी से फैलती हैं।
अब पीबीशब्द 2.0 की तैयारी
प्रसार भारती अब पीबीशब्द के अगले चरण की तैयारी कर रहा है। पीबीशब्द 2.0 में नए प्रोडक्ट और बेहतर कंटेंट डिलीवरी की सुविधा आने की उम्मीद है।
3,600 मीडिया संगठनों के जुड़ने के साथ पीबीशब्द प्रसार भारती के न्यूज नेटवर्क को अपने प्लेटफॉर्म से बाहर बड़ी संख्या में मीडिया संगठनों तक पहुंचाने का काम कर रहा है। इससे प्रसार भारती का राष्ट्रीय रिपोर्टिंग नेटवर्क देश के बहुभाषी और अलग-अलग प्लेटफॉर्म में बंटे न्यूज इकोसिस्टम से जुड़ रहा है।
जम्मू-कश्मीर सरकार ने विधानसभा को बताया है कि पत्रकार कल्याण योजना (JWS) 2023 के तहत सूचना एवं जनसंपर्क विभाग (DIPR) को अब तक एक भी आवेदन नहीं मिला है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
जम्मू-कश्मीर सरकार ने विधानसभा को बताया है कि पत्रकार कल्याण योजना (JWS) 2023 के तहत सूचना एवं जनसंपर्क विभाग (DIPR) को अब तक एक भी आवेदन नहीं मिला है। सरकार ने बताया कि इस योजना के तहत मुश्किल हालात का सामना कर रहे मान्यता प्राप्त और गैर-मान्यता प्राप्त पत्रकारों, फ्रीलांस पत्रकारों और उनके परिवारों को एक बार की आर्थिक मदद दी जाती है।
2023 में शुरू हुई थी योजना
विधायक रणबीर सिंह पठानिया के सवाल के जवाब में सरकार ने बताया कि केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की ओर से 1 अप्रैल 2023 को जारी पत्रकार कल्याण योजना पहले से ही राष्ट्रीय स्तर पर लागू है।
इस योजना के तहत पत्रकार की मृत्यु होने पर 5 लाख रुपये तक, स्थायी दिव्यांगता के मामले में 5 लाख रुपये तक और ऐसी गंभीर बीमारी के इलाज के लिए 3 लाख रुपये तक की आर्थिक मदद दी जा सकती है, जिसका इलाज केंद्रीय सरकार स्वास्थ्य योजना (CGHS) या बीमा के तहत कवर नहीं होता।
PIB या सूचना विभाग के जरिए कर सकते हैं आवेदन
सरकार ने बताया कि जम्मू-कश्मीर के पत्रकार इस योजना के तहत प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) और/या सूचना विभाग के जरिए आवेदन कर सकते हैं। केंद्र शासित प्रदेश से जुड़े पात्र मामलों को उचित सिफारिश के साथ आगे भेजा जा सकता है।
पिछले पांच वित्तीय वर्षों के दौरान जिलेवार कितने आवेदन मिले, कितनी राशि मंजूर हुई और कितनी आर्थिक सहायता जारी की गई, इस सवाल पर सरकार ने कहा कि JWS-2023 केवल जम्मू-कश्मीर के लिए बनाई गई योजना नहीं है।
शैलेंद्र झा के जन्मदिन पर पत्रकार Richa Sakalley ने फेसबुक पर एक पोस्ट साझा कर शैलेंद्र झा को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं और उनके साथ काम करने के अपने अनुभवों को याद किया।
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आज चर्चित वेब सीरीज ‘ग्रहण’ के लेखक और फिल्ममेकर, वरिष्ठ लेखक शैलेंद्र झा का जन्मदिन है। इस मौके पर मीडिया जगत से जुड़े उनके सहयोगी, मित्र और प्रशंसक सोशल मीडिया पर उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं दे रहे हैं और उनके साथ काम करने के अपने अनुभव साझा कर रहे हैं।
शैलेंद्र झा के जन्मदिन पर पत्रकार Richa Sakalley ने फेसबुक पर एक पोस्ट साझा कर शैलेंद्र झा को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं और उनके साथ काम करने के अपने अनुभवों को याद किया।
आज बॉस Shailendra Jha का जन्मदिन है। (कुछ लोगों के साथ ‘एक्स’ लगाना पसंद नहीं, क्योंकि जो बॉस थे, वो बॉस हैं और वो बॉस ही रहेंगे।)
मीडिया जैसे क्षेत्र में शैलेंद्र सर जैसे व्यक्तित्व वाले लोग उंगलियों पर गिने जा सकते हैं। शैलेंद्र सर धीर-गंभीर, कम बोलने वाले, सहज और बेहद सरल स्वभाव के धनी हैं। वो जब डांटते भी थे, तो कभी लगा नहीं कि डांट पड़ी है 😊, बावजूद इसके उनका Terror कायम था 👍
मुझे याद है, जब वीडियोकॉन टॉवर में स्थित टीवी टुडे ग्रुप में प्रवेश लेना ही एक बड़ी उपलब्धि होती थी। तब 2008 में Pranav Rawal सर ने मुझे टेस्ट के लिए बुलाया था। टेस्ट के बाद मुझे शैलेंद्र सर के केबिन में लाया गया। सर मेरी कॉपी देख रहे थे। पहले उन्होंने मेरी हैंडराइटिंग की तारीफ की और फिर कॉपी में तत्कालीन तेल संकट और शेल गैस को लेकर लिखे मेरे जवाब पर सवाल करने लगे। मैं बकर-बकर कर रही थी और वो ध्यान से सुन रहे थे। हालांकि, फिर 10-15 मिनट बाद वो मुझे Qamar Waheed Naqvi सर के पास ले गए।
वहां जाने से पहले बाहर प्रणव सर की हिदायत मिली— “थोड़ा कम बोलना और धीरे बोलना।” नकवी सर ने कुछ आम सवाल पूछे, सैलरी वगैरह के बारे में, और फिर मुझे जाने के लिए कह दिया गया। ये शायद नवंबर 2008 के अंत की बात है और फिर 8 दिसंबर 2008 को मैंने शैलेंद्र सर के नेतृत्व वाली Tez टीम में ज्वाइन कर लिया।
यही नहीं, शैलेंद्र सर ने मुझे और तेज टीम के दो और लोगों, Vatsalya Rai और Gunjan Kumar, को नकवी सर की 7 दिवसीय विशेष Script Writing Workshop में हिस्सा लेने का मौका भी दिया। Nostalgic me!!! 💃
हमारे ऐसे सबसे अलग और Encouraging Boss शैलेंद्र सर को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं। उनका लेखन ✍️, निर्देशन और रचनात्मकता बनी रहे और वो हमें प्रेरणा देते रहें।
God bless you, Sir. 🌹
Be blessed always. 💐
Happy long life to you. ❣️
(Richa Sakalley की फेसबुक पोस्ट से साभार)
वरिष्ठ पत्रकार हेमंत शर्मा द्वारा संपादित ‘अस्सी के राय साहब’ में दर्ज है राम बहादुर राय के जीवन और पत्रकारिता का सफर
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
वरिष्ठ पत्रकार राम बहादुर राय के 80वें वर्ष पर केंद्रित पुस्तक ‘अस्सी के राय साहब’ का शुक्रवार को नई दिल्ली में विमोचन हुआ। वरिष्ठ पत्रकार और टीवी9 के न्यूज डायरेक्टर हेमंत शर्मा द्वारा संपादित इस पुस्तक का प्रकाशन प्रभात प्रकाशन ने किया है। पुस्तक में राम बहादुर राय के व्यक्तित्व, पत्रकारिता और सार्वजनिक जीवन से जुड़े 100 से अधिक लेख, संस्मरण और अनुभव शामिल किए गए हैं।
विमोचन समारोह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राम बहादुर राय के पत्रकारीय जीवन को मूल्यों और समर्पण की मिसाल बताया। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को उनके पत्रकारिता जीवन से सीखने की जरूरत है। उन्होंने हिंदी पत्रकारिता की गौरवशाली परंपरा और उसके मूल्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि हिंदी पत्रकारिता ने केवल भाषा को गढ़ने का काम नहीं किया, बल्कि आधुनिक, व्यावहारिक, सरल, सहज, समावेशी और लोकतांत्रिक समाज के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि पत्रकारिता ने शिक्षा और साक्षरता के साथ समाज को मानवता, बराबरी, ईमानदारी, लोकतंत्र, अधिकारों और कर्तव्यों का पाठ पढ़ाया है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता की ताकत सच को सामने रखने में है। मौजूदा दौर की पत्रकारिता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि कभी-कभी यह सवाल उठता है कि कहीं पत्रकारिता अपने शुरुआती मूल्यों, आदर्शों और प्रतिबद्धता से दूर तो नहीं जा रही है। ऐसे समय में राम बहादुर राय का व्यक्तित्व उनके सामने एक उदाहरण के रूप में खड़ा होता है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि 80 वर्षीय राम बहादुर राय ने संन्यासी की तरह पत्रकारिता के व्रत को निभाया है। उन्होंने समाज से सीखा और स्वयं समाज के लिए एक उदाहरण बने। राजनाथ सिंह ने राय की पत्रकारिता की तुलना भारतीय परंपरा के कई महान व्यक्तित्वों से करते हुए कहा कि उन्होंने पत्रकारिता की चादर को कबीर की तरह निभाया, कहने के कौशल को तुलसी की तरह बरता और सच्चाई तथा समाचार को हरिश्चंद्र की तरह थामे रखा।
उन्होंने कहा कि राम बहादुर राय की नजर अर्जुन की तरह खबर पर रही और किसी तरह की सजावट या प्रभाव उन्हें अपने पत्रकारीय धर्म से डिगा नहीं सका। उनके लिए पत्रकारिता कभी केवल पेशा नहीं रही। राजनाथ सिंह ने इसे एक मिशन बताया। राजनाथ सिंह ने कहा कि राम बहादुर राय के पत्रकारीय जीवन को देखकर मूल्यों को लेकर उठने वाले संदेह दूर हो जाते हैं। उन्होंने राय के व्यक्तित्व को एक विशाल पर्वत के समान बताते हुए उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया।
इस अवसर पर केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि राम बहादुर राय हिंदी पत्रकारिता के बड़े हस्ताक्षर हैं। उन्होंने धरातल के संघर्षों को लिखा और ईमानदारी के साथ सत्य के पक्ष में खड़े रहे। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक राम बहादुर राय के जीवन के कई पहलुओं से लोगों को रूबरू कराएगी।
वरिष्ठ पत्रकार बनवारी ने हेमंत शर्मा को इस पुस्तक के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि राम बहादुर राय को अपनी प्रशंसा सुनना पसंद नहीं है और वे इस किताब के पक्ष में भी नहीं थे, लेकिन गुणी लोगों का सम्मान किया जाना चाहिए।
कार्यक्रम में इंदिरा गांधी कला केंद्र के अध्यक्ष राम बहादुर राय ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सरस्वती वाणी की देवी हैं और सच न बोलना सही नहीं होगा। उन्होंने कहा कि इस आयोजन से उनकी पूरी असहमति थी, लेकिन हेमंत शर्मा और केंद्रीय मंत्री के आग्रह के कारण उन्हें सहमत होना पड़ा। राम बहादुर राय ने केंद्रीय मंत्रियों से सत्ता के विकेंद्रीकरण से जुड़े भारतीय संविधान के 73वें और 74वें संशोधन अधिनियम की समीक्षा का आग्रह भी किया।
‘अस्सी के राय साहब’ राम बहादुर राय के 80वें वर्ष के अवसर पर उनके जीवन और पत्रकारिता के सफर को रेखांकित करती है। पुस्तक का संपादन हेमंत शर्मा के साथ मनोज मिश्रा, संदीप जोशी और संजीव कुमार ने किया है। इसमें देश के जाने-माने पत्रकारों, राजनेताओं और विचारकों के संस्मरण, अनुभव तथा राम बहादुर राय से जुड़े प्रसंग शामिल हैं।
संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के 81वें सत्र के दौरान शुक्रवार को विदेश मंत्री एस. जयशंकर से एक पाकिस्तानी पत्रकार ने आतंकवाद को लेकर सवाल किया।
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संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के 81वें सत्र के दौरान शुक्रवार को विदेश मंत्री एस. जयशंकर से एक पाकिस्तानी पत्रकार ने आतंकवाद को लेकर सवाल किया। इस पर जयशंकर ने तीखा जवाब देते हुए कहा, “एक आतंकी देश मुझसे ये सवाल पूछ रहा है।”
जयशंकर इन दिनों न्यूयॉर्क में हैं और यूएनजीए के हाई-लेवल वीक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं। यह सवाल उस समय पूछा गया, जब जयशंकर और लाइबेरिया की विदेश मंत्री सारा बेयसोলোव न्यांती प्रेस को संबोधित कर रहे थे।
क्या पूछा पाकिस्तानी पत्रकार ने?
कार्यक्रम शुरू होने से पहले इसे सिर्फ बयानों के लिए रखा गया था। दोनों मंत्रियों के अपनी बात पूरी करने के बाद एक पाकिस्तानी पत्रकार ने जयशंकर से सवाल किया, “आपकी सरकार पाकिस्तान में आतंकवाद को बढ़ावा देना कब बंद करेगी?”
इसके जवाब में जयशंकर ने कहा, “एक आतंकी देश मुझसे ये सवाल पूछ रहा है। कम ऑन।” इसके बाद संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हर्षवर्धन श्रृंगला ने पत्रकार से कहा कि उसने जवाब सुन लिया है और जवाब साफ तौर पर दिया जा चुका है।
यह बातचीत भारत और लाइबेरिया की ओर से समुद्री जहाजों और नाविकों की सुरक्षा को लेकर शुरू किए गए ‘ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स ऑन सेफ्टी एंड सिक्योरिटी ऑफ शिपिंग एंड सीफेरर्स’ से जुड़ी प्रेस बातचीत के दौरान हुई थी।
यूएनजीए में जयशंकर की मौजूदगी
जयशंकर न्यूयॉर्क में यूएनजीए के 81वें सत्र में हिस्सा लेने पहुंचे हैं। वह शनिवार को हाई-लेवल सेशन को संबोधित करने वाले हैं। अपने दौरे के दौरान उन्होंने कई बहुपक्षीय और द्विपक्षीय बैठकों में भी हिस्सा लिया है।
सीमा पार आतंकवाद पर भारत का रुख
भारत लगातार पाकिस्तान से सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ ‘विश्वसनीय कार्रवाई’ करने की मांग करता रहा है। भारत ने अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। पहलगाम हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी।
भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान से जुड़े आतंकवादी संगठनों और आतंकवाद के लिए होने वाली फंडिंग को लेकर भी अपनी चिंताएं उठाई हैं। भारत का कहना है कि पाकिस्तान में मौजूद या वहां से गतिविधियां चलाने वाले आतंकी नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई की जरूरत है।
बड़ी जिम्मेदारियां और खास पहचान, एंकरिंग से एडिटोरियल लीडरशिप तक ऐसे चमका अमिश देवगन का 25 साल से ज्यादा का सफर
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
जाने-माने पत्रकार और न्यूज एंकर अमिश देवगन ने ‘टाइम्स नेटवर्क’ के हिंदी न्यूज चैनल ‘टाइम्स नाउ नवभारत’ में बतौर मैनेजिंग एडिटर नई पारी शुरू की है। 25 साल से ज्यादा के पत्रकारिता अनुभव के साथ मिली यह भूमिका उनके अब तक के सफर में एक और महत्वपूर्ण पड़ाव है।
अमिश देवगन की खासियत यह रही है कि उन्होंने अपने करियर को कभी सिर्फ एंकरिंग तक सीमित नहीं रखा। रिपोर्टिंग से शुरुआत करने के बाद उन्होंने बिजनेस जर्नलिज्म, प्राइम टाइम एंकरिंग, कंटेंट और एडिटोरियल मैनेजमेंट जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में काम किया। यही विविध अनुभव आज उन्हें एक ऐसे संपादकीय प्रोफेशनल के तौर पर स्थापित करता है, जो स्क्रीन के साथ-साथ न्यूजरूम की जरूरतों और कामकाज को भी करीब से समझते हैं।
रिपोर्टिंग से शुरू हुआ सफर: अमिश देवगन ने वर्ष 2002 में ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ से पत्रकारिता की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने टेलीविजन की ओर रुख किया और ‘जी मीडिया’ से जुड़े। वर्ष 2005 में वह ‘जी बिजनेस’ का हिस्सा बने, जहां उनके करियर का एक लंबा और महत्वपूर्ण अध्याय शुरू हुआ।
‘जी बिजनेस’ में उन्होंने डिप्टी एडिटर, एडिटर (आउटपुट) और एडिटर (स्पेशल प्रोजेक्ट्स) जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। मई 2015 में वह चैनल के चीफ एडिटर बने। एक रिपोर्टर के तौर पर शुरू हुआ यह सफर कुछ ही वर्षों में एडिटोरियल लीडरशिप तक पहुंच चुका था।
बिजनेस जर्नलिज्म के दौर में उन्होंने कमोडिटी, एग्रीकल्चर, बाजार और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर काम किया। ‘Mandi Live’ जैसे कार्यक्रमों के जरिए उन्होंने कमोडिटी मार्केट से जुड़े विषयों को दर्शकों तक पहुंचाया। वहीं ‘Big Story Big Debate’ जैसे कार्यक्रमों के जरिए उनका दायरा बिजनेस न्यूज से आगे बढ़कर राजनीति, अर्थव्यवस्था, वित्तीय बाजार और देश-दुनिया के बड़े मुद्दों तक पहुंचा।
रिपोर्टिंग से प्राइम टाइम तक: अमिश देवगन के करियर की एक खास बात यह भी रही कि उनकी पहचान सिर्फ स्टूडियो एंकर के रूप में नहीं बनी। उनके करियर में रिपोर्टिंग और खोजी पत्रकारिता का भी महत्वपूर्ण स्थान रहा है। कोयला घोटाले, ओडिशा के माइनिंग मामले और कारोबारी मोईन कुरैशी से जुड़े मामलों पर उनकी रिपोर्टिंग का उल्लेख उनके पुराने प्रोफाइल्स में मिलता है।
रिपोर्टिंग का यह अनुभव बाद में उनकी एंकरिंग का आधार बना। अलग-अलग विषयों पर काम करने और जटिल मुद्दों को समझने का अनुभव उनके प्राइम टाइम कार्यक्रमों में भी दिखाई दिया। समय के साथ उन्होंने खुद को सिर्फ बिजनेस जर्नलिज्म तक सीमित नहीं रखा और राष्ट्रीय राजनीति तथा समसामयिक मुद्दों पर भी अपनी पहचान बनाई।
नेटवर्क18 में नई जिम्मेदारियों का दौर: ‘जी मीडिया’ में लंबी पारी के बाद वर्ष 2016 में अमिश देवगन ने नेटवर्क18 का रुख किया। वह IBN7, जो बाद में ‘न्यूज18 इंडिया’ बना, में एग्जिक्यूटिव एडिटर और एंकर के तौर पर जुड़े। उस समय उन्हें चैनल की हिंदी न्यूज स्ट्रैटेजी से जुड़ी जिम्मेदारियां भी दी गई थीं।
नेटवर्क18 में उनके करियर का सबसे चर्चित अध्याय ‘आर-पार’ के साथ जुड़ा। इस शो के जरिए उन्होंने राजनीति, अर्थव्यवस्था और समसामयिक मुद्दों को प्राइम टाइम बहस का हिस्सा बनाया। समय के साथ ‘आर-पार’ उनकी ऑन-स्क्रीन पहचान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया।
लेकिन अमिश देवगन की भूमिका सिर्फ कैमरे के सामने तक सीमित नहीं रही। नेटवर्क18 में रहते हुए उन्होंने एडिटोरियल और न्यूज ऑपरेशन से जुड़ी जिम्मेदारियां भी संभालीं। वर्ष 2019 में उन्हें न्यूज18 के उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान ऑपरेशंस का मैनेजिंग एडिटर बनाया गया। इस जिम्मेदारी के साथ उनका दायरा प्राइम टाइम एंकरिंग से आगे बढ़कर क्षेत्रीय न्यूज ऑपरेशंस और एडिटोरियल मैनेजमेंट तक पहुंचा।
यानी जिस सफर की शुरुआत एक रिपोर्टर के तौर पर हुई थी, वह धीरे-धीरे ऐसे मुकाम तक पहुंचा जहां कैमरे के सामने एंकरिंग के साथ-साथ न्यूजरूम के भीतर नेतृत्व की जिम्मेदारी भी अमिश देवगन के कंधों पर थी।
कम उम्र में बड़ी जिम्मेदारियों तक पहुंचने का सफर: अमिश देवगन के करियर को देखें तो इसकी खास बात उनकी जिम्मेदारियों का लगातार बढ़ना रहा है। वर्ष 2002 में पत्रकारिता शुरू करने के बाद उन्होंने कुछ ही वर्षों में बिजनेस जर्नलिज्म और टेलीविजन एंकरिंग में अपनी जगह बनाई। इसके बाद एडिटोरियल पदों पर आगे बढ़ते हुए उन्होंने चीफ एडिटर और फिर मैनेजिंग एडिटर जैसी जिम्मेदारियां संभालीं।
उनकी यात्रा यह भी दिखाती है कि टेलीविजन पत्रकारिता में एक लंबा करियर केवल स्क्रीन पर दिखाई देने वाली पहचान तक सीमित नहीं होता। रिपोर्टिंग, रिसर्च, कंटेंट प्लानिंग, एंकरिंग और न्यूजरूम मैनेजमेंट—इन अलग-अलग क्षेत्रों का अनुभव किसी पत्रकार को व्यापक संपादकीय भूमिका के लिए तैयार करता है। अमिश देवगन के करियर में इन सभी चरणों को देखा जा सकता है।
‘आर-पार’ ने बनाई अलग पहचान: अमिश देवगन के करियर की बात ‘आर-पार’ के बिना पूरी नहीं होती। यह कार्यक्रम उनके नेटवर्क18 कार्यकाल के दौरान उनकी प्रमुख ऑन-स्क्रीन पहचान बना और इसके साथ उनका नाम हिंदी न्यूज टेलीविजन के प्राइम टाइम से मजबूती से जुड़ा।
कार्यक्रम के जरिए उन्होंने राजनीति, अर्थव्यवस्था और समसामयिक घटनाओं से जुड़े मुद्दों पर बहस और चर्चा को आगे बढ़ाया। उनकी ऑन-स्क्रीन शैली और लगातार दिखाई देने वाली मौजूदगी ने उन्हें हिंदी न्यूज टेलीविजन के पहचाने जाने वाले चेहरों में शामिल किया।
कई सम्मान भी मिले: 25 साल से ज्यादा के पत्रकारिता सफर में अमिश देवगन को अलग-अलग मंचों पर सम्मान भी मिला है। उनके नाम IMF Young Emerging Editors Award 2015, Srishti Award for Business Journalism और Power Brand Trendsetter Award 2016 जैसे सम्मान दर्ज हैं। उनके करियर के दौरान उन्हें ENBA से भी सम्मान मिला।
अब टाइम्स नाउ नवभारत में नई पारी: करीब एक दशक तक नेटवर्क18 से जुड़े रहने के बाद अमिश देवगन ने हाल ही में संस्थान को अलविदा कहा। उनके जाने के साथ ‘आर-पार’ से जुड़ा एक लंबा अध्याय समाप्त हुआ, लेकिन इसके साथ ही उनके करियर का नया अध्याय भी शुरू हो गया।
अब ‘टाइम्स नाउ नवभारत’ में मैनेजिंग एडिटर की भूमिका उनके इसी अनुभव को एक नए मंच पर आगे बढ़ाने का अवसर है। वह नोएडा से अपना कामकाज संभालेंगे और ‘टाइम्स टीवी नेटवर्क’ के सीईओ व Times Media & Entertainment के चीफ ग्रोथ ऑफिसर आशीष सहगल को रिपोर्ट करेंगे।
कई भूमिकाओं में खुद को साबित किया: अमिश देवगन के अब तक के सफर को देखें तो उनकी पहचान किसी एक भूमिका तक सीमित नहीं रही है। उन्होंने रिपोर्टर, बिजनेस पत्रकार, एंकर, एडिटर, चीफ एडिटर और मैनेजिंग एडिटर के तौर पर काम किया है।
25 साल से ज्यादा पहले रिपोर्टिंग से शुरू हुआ यह सफर आज एक ऐसे मुकाम पर पहुंच चुका है जहां पत्रकारिता के अलग-अलग अनुभव उनके संपादकीय नेतृत्व का आधार बन रहे हैं। रिपोर्टिंग ने उन्हें खबर की जमीन से जोड़ा, बिजनेस जर्नलिज्म ने विषयों की गहराई समझने का अनुभव दिया, एंकरिंग ने उन्हें दर्शकों से सीधे जुड़ने का मंच दिया और एडिटोरियल लीडरशिप ने उन्हें न्यूजरूम के बड़े फैसलों की जिम्मेदारी दी।
अब टाइम्स नाउ नवभारत के साथ उनकी नई पारी इसी लंबे अनुभव का अगला पड़ाव है। समाचार4मीडिया की ओर से अमिश देवगन को उनकी नई जिम्मेदारी के लिए ढेरों बधाई और शुभकामनाएं।
कम्युनिकेशन इंडस्ट्री के दिग्गज भास्कर मजूमदार की याद में 27 सितंबर को नई दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (आईआईसी) में प्रार्थना सभा आयोजित की जाएगी।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
कम्युनिकेशन इंडस्ट्री के दिग्गज भास्कर मजूमदार की याद में 27 सितंबर को नई दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (आईआईसी) में प्रार्थना सभा आयोजित की जाएगी।
54 साल की उम्र में 24 सितंबर को निधन हुए भास्कर मजूमदार को याद करने के लिए उनके दोस्त, सहकर्मी और इंडस्ट्री से जुड़े लोग इस सभा में शामिल होंगे। यह कार्यक्रम दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक आईआईसी के मैक्स म्यूलर मार्ग स्थित मल्टीपर्पज हॉल 40 में होगा।
‘इन लविंग मेमोरी – भास्कर मजूमदार’ नाम से होने वाली इस प्रार्थना सभा में उनके जीवन और योगदान को याद किया जाएगा। परिवार, दोस्तों और इंडस्ट्री के सहयोगी इस मौके पर उन्हें श्रद्धांजलि देंगे।
कार्यक्रम के निमंत्रण में भास्कर मजूमदार को ऐसे व्यक्ति के तौर पर याद किया गया है, जो दूसरों की मदद के लिए हमेशा तैयार रहते थे। उनके गर्मजोशी भरे स्वभाव और अपने आसपास के लोगों के जीवन में खुशी लाने की क्षमता को भी याद किया गया है। लोगों से उनके जीवन को उस “खुशी, उद्देश्य और कृतज्ञता की भावना” के साथ याद करने की अपील की गई है, जिसके साथ उन्होंने अपना जीवन जिया।
भास्कर मजूमदार की जीवंत और खुशमिजाज शख्सियत को सम्मान देने के लिए कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोगों से चमकीले रंग के कपड़े पहनकर आने का भी अनुरोध किया गया है।
भास्कर मजूमदार को कम्युनिकेशन और प्रतिष्ठा प्रबंधन के क्षेत्र में दो दशक से ज्यादा का अनुभव था। उन्होंने रिलायंस इंडस्ट्रीज और ईएसपीएन स्टार स्पोर्ट्स समेत कई प्रमुख भारतीय और वैश्विक संस्थानों के साथ काम किया था।
वैभव गुप्ता ने BrandPipal में सीनियर मार्केटिंग मैनेजर-Account Based Marketing के रूप में नई जिम्मेदारी संभाली है। इससे पहले वह Daten Technology Solutions में मार्केटिंग मैनेजर के पद पर कार्यरत थे।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
वैभव गुप्ता (Vaibhav Gupta) ने ब्रांडपिपल (BrandPipal) में सीनियर मार्केटिंग मैनेजर- अकाउंट बेस्ड मार्केटिंग (Senior Marketing Manager - Account Based Marketing) के रूप में नई जिम्मेदारी संभाली है।
इससे पहले गुप्ता डेटन टेक्नोलॉजी सॉल्यूशंस (Daten Technology Solutions) में मार्केटिंग मैनेजर (Marketing Manager) के पद पर कार्यरत थे। वहां वह लीडरशिप (Leadership) और बिजनेस टीम्स (Business Teams) के साथ मिलकर कम्युनिकेशन प्रायोरिटीज (Communication Priorities) तय करने और स्पष्ट व एकरूप ऑर्गनाइजेशनल नैरेटिव्स (Organisational Narratives) तैयार करने पर काम कर रहे थे।
गुप्ता के पास बी2बी मार्केटिंग (B2B Marketing) में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है। उन्होंने आईटी सॉफ्टवेयर कंसल्टिंग सर्विसेज (IT Software Consulting Services), सास (SaaS) और प्रोडक्ट आधारित संगठनों (Product-based Organisations) के साथ काम किया है।
उनके अनुभव में अमेरिका, ब्रिटेन, एशिया-प्रशांत, मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका, भारत और ग्लोबल मार्केट्स के लिए गो-टू-मार्केट रणनीति (Go-to-Market Strategy) पर काम करना भी शामिल है।
गुजरात के गांधीनगर की सत्र अदालत ने गुरुवार को अडानी समूह की ओर से पत्रकार रवि नायर के खिलाफ दायर आपराधिक मानहानि मामले में उन्हें जमानत दे दी।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
गुजरात के गांधीनगर की सत्र अदालत ने गुरुवार को अडानी समूह की ओर से पत्रकार रवि नायर के खिलाफ दायर आपराधिक मानहानि मामले में उन्हें जमानत दे दी। नायर को इस मामले में इस साल की शुरुआत में दोषी ठहराया गया था।
अपील लंबित रहने के दौरान उन्हें पहले जमानत पर रिहा किया गया था, लेकिन 17 सितंबर को फिर से हिरासत में ले लिया गया। दरअसल, अपीलीय अदालत में कथित तौर पर पेश नहीं होने के कारण उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया गया था।
गांधीनगर के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश आशीष जेएस मल्होत्रा ने गुरुवार को नायर की जमानत याचिका मंजूर कर ली। उनकी ओर से अधिवक्ता अभीक चिमनी पेश हुए।
इससे एक दिन पहले बुधवार को गुजरात हाई कोर्ट ने गैर-जमानती वारंट को चुनौती देने वाली नायर की याचिका पर उन्हें अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद उन्होंने नियमित जमानत के लिए सत्र अदालत का रुख किया था।
किस मामले में हुई थी सजा?
फरवरी में एक मजिस्ट्रेट अदालत ने अडानी समूह की ओर से दायर आपराधिक मानहानि मामले में नायर को दोषी ठहराया था। यह मामला उनके कई ट्वीट और ऑनलाइन लेखों से जुड़ा था, जिनमें अडानी समूह पर कई तरह की कथित अनैतिक गतिविधियों के आरोप लगाए गए थे।
अदालत ने माना था कि इन लेखों और पोस्ट में की गई बातें निष्पक्ष आलोचना की सीमा से आगे चली गईं और आपराधिक मानहानि की श्रेणी में आती हैं। अडानी समूह ने सितंबर 2021 में नायर के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज की थी।
कंपनी समूह का आरोप था कि अक्टूबर 2020 से जुलाई 2021 के बीच नायर ने अपने एक्स (पहले ट्विटर) हैंडल से कई ट्वीट किए और ‘adaniwatch.org’ नाम की वेबसाइट पर लेख प्रकाशित किए। इनमें अडानी समूह पर भ्रष्टाचार, क्रोनी कैपिटलिज्म, पर्यावरण कानूनों में हेरफेर, सरकारी एजेंसियों के दुरुपयोग और अनैतिक कारोबारी गतिविधियों जैसे आरोप लगाए गए थे।
दोषी ठहराए जाने के बाद नायर ने न्यायिक मजिस्ट्रेट के फैसले को चुनौती देते हुए सत्र अदालत में अपील दायर की थी। अपील लंबित रहने के दौरान अदालत ने उन्हें जमानत दे दी थी।
हालांकि, इसी महीने अदालत में पेश नहीं होने के बाद उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया गया। इसके बाद नायर सत्र अदालत में पेश हुए और गैर-जमानती वारंट जारी किए जाने को चुनौती दी। अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी और 17 सितंबर को उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया। अब गांधीनगर की सत्र अदालत ने उनकी जमानत याचिका मंजूर कर दी है।