भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के जाने-माने डिस्ट्रीब्यूशन एक्सपर्ट और यशराज फिल्म्स (YRF) के पूर्व वाइस प्रेजिडेंट (डिस्ट्रीब्यूशन) सहदेव घेई का 11 जुलाई को निधन हो गया।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के जाने-माने डिस्ट्रीब्यूशन एक्सपर्ट और यशराज फिल्म्स (YRF) के पूर्व वाइस प्रेजिडेंट (डिस्ट्रीब्यूशन) सहदेव घेई का 11 जुलाई को निधन हो गया। बताया जा रहा है कि उन्हें दिल का दौरा (कार्डियक अरेस्ट) पड़ा, जिसके कारण उनका निधन हुआ। उन्होंने मुंबई में शनिवार की दोपहर करीब 3:45 बजे अंतिम सांस ली।
सहदेव घेई का अंतिम संस्कार 12 जुलाई को मुंबई के वर्सोवा हिंदू श्मशान घाट में किया गया। उनकी अंतिम यात्रा अंधेरी पश्चिम स्थित उनके निवास गैम्ब्स टावर, फोर बंग्लोज से सुबह 11 बजे निकली।
सहदेव घेई ने वर्ष 1993 में रिलीज हुई यशराज फिल्म्स की सुपरहिट फिल्म 'डर' के साथ कंपनी में अपनी पारी शुरू की थी। इसके बाद उन्होंने यशराज फिल्म्स के डिस्ट्रीब्यूशन कारोबार को खड़ा करने और उसे नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। दो दशक से ज्यादा समय तक उन्होंने कंपनी के डिस्ट्रीब्यूशन बिजनेस का नेतृत्व किया और फिल्म वितरण जगत में अपनी अलग पहचान बनाई।
मार्च 2017 में उन्होंने अपनी फुल-टाइम जिम्मेदारियों से इस्तीफा दे दिया था, लेकिन इसके बाद भी वह कुछ समय तक कंपनी के सलाहकार (कंसल्टेंट) के रूप में जुड़े रहे। कोरोना महामारी के दौरान उन्होंने सक्रिय कार्य से दूरी बना ली और शांत जीवन व्यतीत कर रहे थे।
उनके निधन की खबर से फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर है। कई फिल्म जगत से जुड़े लोगों और उनके पूर्व सहयोगियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है। साथ काम करने वाले लोगों का कहना है कि सहदेव घेई सिर्फ एक बेहतरीन प्रोफेशनल ही नहीं थे, बल्कि बेहद विनम्र, सहयोगी और हमेशा मुस्कुराकर लोगों का मार्गदर्शन करने वाले इंसान भी थे।
उनके साथ काम कर चुके कई लोगों का कहना है कि फिल्म डिस्ट्रीब्यूशन के क्षेत्र में उनके करियर को आगे बढ़ाने में सहदेव घेई का बड़ा योगदान रहा। उनकी सलाह, अनुभव और नेतृत्व ने कई पेशेवरों को नई पहचान दिलाई।
सहदेव घेई के निधन को यशराज फिल्म्स और पूरी फिल्म इंडस्ट्री के लिए बड़ी क्षति माना जा रहा है। उन्होंने भारतीय फिल्म वितरण कारोबार को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और अपने पीछे एक ऐसी विरासत छोड़ गए हैं, जिसे लंबे समय तक याद किया जाएगा।
प्रसार भारती (Prasar Bharati) ने दूरदर्शन (Doordarshan) और ऑल इंडिया रेडियो (AIR) के अधिकारियों के लिए AI आधारित विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने का फैसला किया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
सार्वजनिक प्रसारक प्रसार भारती (Prasar Bharati) ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence-AI) को अपने ब्रॉडकास्टिंग सिस्टम का हिस्सा बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इसी क्रम में दूरदर्शन (Doordarshan) और ऑल इंडिया रेडियो (All India Radio-AIR) के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए AI आधारित विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
महानिदेशालय दूरदर्शन (Directorate General of Doordarshan) की कमर्शियल सर्विस (Commercial Service) द्वारा जारी आंतरिक परिपत्र (Internal Circular) के अनुसार, यह तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम 15 से 17 जुलाई तक नई दिल्ली (New Delhi) स्थित डीजी दूरदर्शन कार्यालय में आयोजित होगा।
'Advanced Excel, Data Analysis and Artificial Intelligence (AI) Tools and Applications in Broadcasting – DD & AIR, Prasar Bharati' शीर्षक वाले इस कार्यक्रम का उद्देश्य अधिकारियों को कंटेंट निर्माण, प्रोडक्शन, डेटा एनालिटिक्स और प्रशासनिक कार्यों में AI आधारित टूल्स के उपयोग से परिचित कराना है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिभागियों को AI की बुनियादी अवधारणाएं, जेनरेटिव AI (Generative AI), प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग (Prompt Engineering), जिम्मेदार AI (Responsible AI) और ब्रॉडकास्टिंग से जुड़े व्यावहारिक उपयोगों की जानकारी दी जाएगी।
इस कार्यक्रम में ग्रुप A और ग्रुप B के अधिकारी, दूरदर्शन कमर्शियल सर्विस, दूरदर्शन केंद्र दिल्ली (Doordarshan Kendra Delhi) तथा दूरदर्शन और AIR के विभिन्न क्षेत्रीय कार्यालयों के अधिकारियों को आमंत्रित किया गया है। प्रतिभागियों को हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण के लिए अपने लैपटॉप, टैबलेट और मोबाइल डिवाइस साथ लाने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशिक्षण के दौरान ChatGPT, जेमिनी (Gemini), क्लॉड (Claude), माइक्रोसॉफ्ट कोपायलट (Microsoft Copilot), डीपसीक (DeepSeek), नोटबुकएलएम (NotebookLM), परप्लेक्सिटी (Perplexity), एडोबी फायरफ्लाई (Adobe Firefly), कैनवा (Canva), कैपकट (CapCut), रिवरसाइड (Riverside) और किमी (Kimi) जैसे AI प्लेटफॉर्म्स का प्रदर्शन किया जाएगा। अधिकारियों को बताया जाएगा कि इनका उपयोग स्क्रिप्ट लेखन, अनुवाद, सारांश तैयार करने, मेटाडाटा जनरेशन, इमेज और वीडियो निर्माण, रिसर्च, न्यूजरूम उत्पादकता और ब्रॉडकास्ट संचालन में कैसे किया जा सकता है।
कार्यक्रम में डेटा एनालिसिस पर भी विशेष जोर दिया जाएगा। अधिकारियों को एडवांस्ड माइक्रोसॉफ्ट एक्सेल (Microsoft Excel), पावर क्वेरी (Power Query), डैशबोर्ड निर्माण, ऑटोमेशन, डेटा क्लीनिंग, डेटा विजुअलाइजेशन और AI आधारित एनालिटिक्स का प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वे पारंपरिक डेटा विश्लेषण तकनीकों को AI क्षमताओं के साथ जोड़कर बेहतर रिपोर्टिंग, परिचालन दक्षता और निर्णय प्रक्रिया को मजबूत बना सकें।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को प्रिडिक्टिव AI (Predictive AI), एडैप्टिव AI (Adaptive AI) और एजेंटिक AI (Agentic AI) जैसी उभरती तकनीकों से भी परिचित कराया जाएगा। कार्यक्रम के अंत में मूल्यांकन आयोजित होगा और सफल प्रतिभागियों को डिजिटल प्रमाणपत्र (Digital Certificate) प्रदान किए जाएंगे।
इच्छुक अधिकारियों को 14 जुलाई तक अपने संबंधित नियंत्रक अधिकारियों (Controlling Officers) के माध्यम से ऑनलाइन पंजीकरण (Online Registration) कराने के निर्देश दिए गए हैं।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने 'Create in India Challenge (CIC) Season 2' के लिए उद्योग संगठनों, संस्थानों और अन्य संगठनों से प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने 'Create in India Challenge (CIC) Season 2' के लिए उद्योग संगठनों, संस्थानों और अन्य संगठनों से प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं। यह कार्यक्रम World Audio Visual and Entertainment Summit (WAVES) 2027 से पहले आयोजित किया जाएगा और इसका उद्देश्य देशभर में नई प्रतिभाओं को मंच देना और रचनात्मक नवाचार को बढ़ावा देना है।
मंत्रालय ने प्रस्तावों के चयन की प्रक्रिया को आसान और पारदर्शी बनाने के लिए एक एकीकृत ऑनलाइन पोर्टल भी लॉन्च किया है। इसी पोर्टल के जरिए सभी प्रस्ताव जमा किए जाएंगे और उनका मूल्यांकन किया जाएगा।
Create in India Challenge Season 2 का मकसद मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर में रचनात्मकता, नवाचार, कौशल विकास और नई प्रतिभाओं की पहचान करना है। इस कार्यक्रम के तहत चुनी गई चुनौतियां (Challenges) उद्योग की अगुवाई में आयोजित होंगी, जबकि सरकार उनका सहयोग करेगी। प्रतिभागियों को मेंटरशिप, ट्रेनिंग, अपस्किलिंग और सहयोगात्मक सीखने के अवसर भी मिलेंगे।
मंत्रालय के अनुसार, इस बार कार्यक्रम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), AVGC-XR, डिजिटल मीडिया, गेमिंग, ई-स्पोर्ट्स, एनीमेशन, VFX, कॉमिक्स, फिल्म, ब्रॉडकास्टिंग, म्यूजिक, डांस, AR/VR समेत कई उभरते क्षेत्रों को शामिल किया जाएगा।
इच्छुक संगठन 31 जुलाई 2026 तक आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से अपने प्रस्ताव भेज सकते हैं।
सरकार प्रत्येक चयनित चैलेंज के लिए एक करोड़ रुपये तक का एकमुश्त अनुदान भी देगी। हालांकि यह सहायता तकनीकी और वित्तीय मूल्यांकन, तय लक्ष्यों, जमीनी स्तर तक पहुंच और कौशल विकास जैसे मानकों के आधार पर दी जाएगी।
मंत्रालय की योजना सीजन-2 में 50 से अधिक उद्योग-आधारित चैलेंज शुरू करने की है। इसमें खास तौर पर AI, डिजिटल एवं सोशल मीडिया और AVGC-XR जैसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों पर अधिक जोर दिया जाएगा।
इस कार्यक्रम का समापन WAVES 2027 के दौरान आयोजित होने वाले 'CreatoSphere' में होगा। यहां विजेताओं और चयनित प्रोजेक्ट्स को उद्योग जगत के दिग्गजों, निवेशकों और नीति निर्माताओं के सामने अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिलेगा। इससे उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने के साथ-साथ व्यावसायिक अवसर भी मिल सकते हैं।
मंत्रालय ने बताया कि Create in India Challenge के पहले सीजन में 33 उद्योग-आधारित चैलेंज आयोजित किए गए थे, जिन्हें अच्छा प्रतिसाद मिला। अब दूसरे सीजन के जरिए उद्योग की भागीदारी और युवाओं की सहभागिता को और बढ़ाने की योजना है, ताकि भारत की रचनात्मक अर्थव्यवस्था मजबूत हो और वैश्विक स्तर की प्रतिभाएं तैयार की जा सकें।
यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'Create in India, Create for the World' विजन के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य भारत को रचनात्मक नवाचार और अगली पीढ़ी की मीडिया प्रतिभाओं का वैश्विक केंद्र बनाना है।
‘बिजनेसवर्ल्ड’ के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ और एक्सचेंज4मीडिया ग्रुप के फाउंडर डॉ. अनुराग बत्रा समेत तमाम हस्तियों, लेखकों, प्रकाशकों, मित्रों और शुभचिंतकों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
डायमंड पॉकेट बुक्स के निदेशक एवं देश के प्रतिष्ठित प्रकाशक नरेंद्र कुमार वर्मा की स्मृति में सोमवार (13 जुलाई) को नई दिल्ली स्थित इंडिया हैबिटेट सेंटर के स्टीन ऑडिटोरियम में 'Prayer Meeting & Celebration of Life' का आयोजन किया गया। इस अवसर पर साहित्य, प्रकाशन, शिक्षा, मीडिया और सामाजिक क्षेत्र से जुड़ी बड़ी संख्या में गणमान्य हस्तियों, लेखकों, प्रकाशकों, मित्रों और शुभचिंतकों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
प्रार्थना सभा के दौरान उपस्थित लोगों ने नरेंद्र कुमार वर्मा के व्यक्तित्व, उनके सरल स्वभाव और भारतीय प्रकाशन जगत में उनके उल्लेखनीय योगदान को याद किया। वक्ताओं ने कहा कि उन्होंने केवल एक सफल प्रकाशक के रूप में ही नहीं, बल्कि नए लेखकों को अवसर देने वाले मार्गदर्शक और साहित्य के सच्चे संरक्षक के रूप में भी अपनी अलग पहचान बनाई।
कार्यक्रम में पहुंचे लोगों ने उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए और उनके साथ बिताए गए संस्मरण साझा किए। कई वक्ताओं ने कहा कि नरेंद्र कुमार वर्मा ने अपने लंबे प्रकाशन जीवन में हिंदी साहित्य को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके योगदान और साहित्य के प्रति समर्पण को हमेशा याद किया जाएगा।
गौरतलब है कि नरेंद्र कुमार वर्मा का 10 जुलाई 2026 को 77 वर्ष की आयु में निधन हो गया था। उनके निधन के बाद देशभर के साहित्यकारों, लेखकों और प्रकाशन जगत से जुड़े लोगों ने गहरा शोक जताते हुए उन्हें अपनी श्रद्धांजलि दी और उनके निधन को भारतीय प्रकाशन जगत की अपूरणीय क्षति बताया।




डायमंड पॉकेट बुक्स के निदेशक और देश के जाने-माने प्रकाशक नरेंद्र कुमार वर्मा का 10 जुलाई 2026 को निधन हो गया है। उनके निधन से भारतीय प्रकाशन और साहित्य जगत में शोक की लहर है। वे 77 वर्ष के थे।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
डायमंड पॉकेट बुक्स के निदेशक और देश के जाने-माने प्रकाशक नरेंद्र कुमार वर्मा का 10 जुलाई 2026 को निधन हो गया है। उनके निधन से भारतीय प्रकाशन और साहित्य जगत में शोक की लहर है। वे करीब 77 वर्ष के थे।
परिवार की ओर से जारी सूचना के अनुसार, उनकी अंतिम यात्रा 11 जुलाई को दोपहर 12 बजे नोएडा स्थित उनके निवास (231, सेक्टर-15ए) से शुरू हुई। दोपहर 1 बजे नई दिल्ली के लोधी श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार किया गया।
इसके अलावा, उनकी स्मृति में 'Prayer Meeting & Celebration of Life' का आयोजन 13 जुलाई 2026 (सोमवार) को शाम 5 बजे स्टीन ऑडिटोरियम, इंडिया हैबिटैट सेंटर, लोधी रोड, नई दिल्ली में किया जाएगा। परिवार ने सभी मित्रों, शुभचिंतकों और साहित्य प्रेमियों से इसमें शामिल होकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने की अपील की है।
नरेंद्र कुमार वर्मा के निधन पर देशभर से साहित्यकारों, लेखकों और प्रकाशन जगत की कई प्रमुख हस्तियों ने शोक व्यक्त किया है। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. रमेश पोखरियाल 'निशंक' ने भी गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि नरेंद्र कुमार वर्मा केवल एक प्रतिष्ठित प्रकाशक नहीं थे, बल्कि उनके लिए परिवार के सदस्य, आत्मीय अभिभावक और सच्चे शुभचिंतक थे। उन्होंने कहा कि वर्मा जी ने न केवल उनकी अनेक पुस्तकों का प्रकाशन किया, बल्कि हर नई रचना के लिए प्रेरित किया। उनके अनुसार, भारतीय प्रकाशन जगत और साहित्य समाज के लिए उनका योगदान अविस्मरणीय रहेगा तथा उनका निधन एक अपूरणीय क्षति है।
डायमंड बुक्स के संस्थापक आदरणीय श्री नरेंद्र कुमार वर्मा जी के निधन का समाचार सुनकर मन अत्यंत स्तब्ध, व्यथित और शोकाकुल है।
— Dr. Ramesh Pokhriyal Nishank (@DrRPNishank) July 11, 2026
मेरे लिए श्री वर्मा जी केवल एक प्रतिष्ठित प्रकाशक नहीं थे, बल्कि परिवार के अभिन्न सदस्य, आत्मीय अभिभावक और सच्चे शुभचिंतक थे। उन्होंने केवल मेरी अनेक… pic.twitter.com/gGAS2QE9c0
कई लेखकों और साहित्यकारों ने सोशल मीडिया पर उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि नरेंद्र कुमार वर्मा ने नए लेखकों को अवसर देने और भारतीय प्रकाशन जगत को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके व्यक्तित्व, सादगी और साहित्य के प्रति समर्पण को हमेशा याद किया जाएगा।
प्रसार भारती ने आकाशवाणी पटना परिसर में PPP मॉडल के तहत डिजिटल LED यूनिपोल विज्ञापन ढांचा विकसित करने के लिए निजी कंपनियों से EOI मांगे हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
प्रसार भारती ने अपनी भूमि परिसंपत्तियों का बेहतर व्यावसायिक उपयोग करने और गैर-कर राजस्व बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सार्वजनिक प्रसारक ने पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत आकाशवाणी पटना परिसर में डिजिटल यूनिपोल विज्ञापन अवसंरचना विकसित और संचालित करने के लिए निजी कंपनियों से एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) आमंत्रित किए हैं। इसी तरह के प्रस्ताव मुंबई, झारखंड और देश के अन्य केंद्रों के लिए भी जारी किए गए हैं।
प्रस्ताव के अनुसार चयनित निजी कंपनी एलईडी आधारित यूनिपोल विज्ञापन संरचनाओं की डिजाइनिंग, निर्माण, स्थापना, संचालन और रखरखाव का पूरा खर्च स्वयं वहन करेगी। सरकार को इस परियोजना में कोई पूंजी निवेश नहीं करना होगा। बदले में कंपनी विज्ञापन से होने वाली वार्षिक आय का एक हिस्सा तय शर्तों के अनुसार प्रसार भारती के साथ साझा करेगी। साथ ही डिजिटल स्क्रीन के कुल विज्ञापन समय का 33 प्रतिशत हिस्सा प्रसार भारती को जनहित अभियानों और सरकारी संदेशों के प्रसारण के लिए मिलेगा।
यह अनुबंध शुरुआती तौर पर पांच वर्षों के लिए होगा, जिसे स्वीकृति मिलने पर अगले पांच वर्षों तक बढ़ाया जा सकेगा। अनुबंध समाप्त होने के बाद डिजिटल विज्ञापन ढांचे का स्वामित्व प्रसार भारती को सौंप दिया जाएगा। चयनित कंपनी को नगर निकायों से आवश्यक अनुमतियां लेने, बिजली कनेक्शन की व्यवस्था करने तथा सुरक्षा, संरचनात्मक मानकों और पर्यावरणीय नियमों का पालन सुनिश्चित करना होगा।
परियोजना के तहत 5,500 निट्स तक की ब्राइटनेस, 3,840 हर्ट्ज़ रिफ्रेश रेट और लगभग एक लाख घंटे की क्षमता वाले पी-8 एलईडी डिस्प्ले लगाए जाएंगे, जो लंबी दूरी से भी स्पष्ट दिखाई देंगे। इससे पटना के फ्रेजर रोड स्थित आकाशवाणी परिसर में प्रीमियम डिजिटल आउटडोर विज्ञापन इन्वेंट्री विकसित होगी। इच्छुक कंपनियों को अपने वित्तीय, तकनीकी और परियोजना अनुभव से जुड़े दस्तावेजों के साथ आवेदन जमा करना होगा। एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट जमा करने की अंतिम तिथि 22 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है।
तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में YSRCP के प्रवक्ता नागार्जुन यादव को तेलंगाना पुलिस ने आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले से हिरासत में लिया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के प्रवक्ता नागार्जुन यादव को तेलंगाना पुलिस ने आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले से हिरासत में लिया है।
पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई 10 जुलाई को हैदराबाद के बेगम बाजार पुलिस स्टेशन में दर्ज एक मामले के सिलसिले में की गई है। यह शिकायत अधिवक्ता कैलाश सज्जन ने दर्ज कराई थी।
शिकायत में नागार्जुन यादव के साथ Sakshi TV के एंकर कोम्मिनेनी श्रीनिवास राव (KSR) और अन्य लोगों के नाम भी शामिल किए गए हैं। आरोप है कि एक टीवी डिबेट के दौरान मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां की गईं।
शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्होंने फेसबुक पर साझा किए गए एक वीडियो में नागार्जुन यादव को मुख्यमंत्री के सरकारी शब्दों की समझ पर सवाल उठाते और उनकी तुलना डिलीवरी कर्मियों से करते हुए देखा। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि कार्यक्रम के दौरान एंकर ने इस टिप्पणी पर कोई आपत्ति नहीं जताई।
अधिवक्ता कैलाश सज्जन का आरोप है कि इन टिप्पणियों का उद्देश्य संवैधानिक पद पर बैठे मुख्यमंत्री की गरिमा को ठेस पहुंचाना, तेलंगाना के लोगों की भावनाओं को आहत करना और समाज में वैमनस्य फैलाना था।
पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। इनमें दंगा भड़काने की नीयत से उकसाने, जानबूझकर अपमान करने, झूठी जानकारी फैलाने और समाज के विभिन्न वर्गों के बीच नफरत या दुश्मनी फैलाने से जुड़ी धाराएं शामिल हैं।
पुलिस ने बताया कि मामले की जांच जारी है और इसी सिलसिले में नागार्जुन यादव को हिरासत में लेकर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
अमेरिका के जॉर्जिया राज्य में गूगल (Google) की भारतीय मूल की वरिष्ठ टेक्नोलॉजी अधिकारी शीतल वर्जेसियन (Sheetal Wrzesien) की कथित तौर पर उनके पति ने गोली मारकर हत्या कर दी।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
अमेरिका के जॉर्जिया राज्य में गूगल (Google) की भारतीय मूल की वरिष्ठ टेक्नोलॉजी अधिकारी शीतल वर्जेसियन (Sheetal Wrzesien) की कथित तौर पर उनके पति ने गोली मारकर हत्या कर दी। इस घटना में उनका 23 वर्षीय बेटा भी गोली लगने से घायल हो गया है।
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस ने शीतल के पति किर्क बी. वर्जेसियन (56) को गिरफ्तार कर लिया है। उन्हें कॉब काउंटी एडल्ट डिटेंशन सेंटर में बिना जमानत के रखा गया है।
पुलिस के मुताबिक, मंगलवार रात करीब 8 बजे (स्थानीय समय) जॉर्जिया के स्मिर्ना शहर स्थित एक घर में गोलीबारी की सूचना मिली थी। मौके पर पहुंचने पर पुलिस ने 57 वर्षीय शीतल वर्जेसियन को घर के अंदर गोली लगने की हालत में पाया। उन्हें बचाने की कोशिश की गई, लेकिन उनकी मौत हो गई।
वहीं, दंपति का 23 वर्षीय बेटा जेसन वर्जेसियन घर के बाहर घायल अवस्था में मिला। उसे गोली लगी थी और इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। फिलहाल उसकी स्वास्थ्य स्थिति के बारे में कोई नई जानकारी नहीं दी गई है।
पति पर कई गंभीर आरोप
कॉब काउंटी पुलिस ने किर्क वर्जेसियन के खिलाफ फेलोनी मर्डर (गंभीर हत्या), दो मामलों में गंभीर हमले (Aggravated Assault) और अपराध के दौरान हथियार रखने के दो आरोप दर्ज किए हैं।
पुलिस ने इस घटना को घरेलू हिंसा (Domestic Violence) का मामला बताया है। अधिकारियों का कहना है कि इस घटना से आम लोगों को कोई खतरा नहीं है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि गोलीबारी की वजह क्या थी। मामले की जांच जारी है।
Google में वरिष्ठ पद पर थीं शीतल
शीतल वर्जेसियन Google में इंजीनियरिंग लीडर के पद पर कार्यरत थीं। उन्हें टेक्नोलॉजी क्षेत्र में 20 से अधिक वर्षों का अनुभव था।
Google से पहले उन्होंने HomeDepot.com में मोबाइल और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन से जुड़ी परियोजनाओं का नेतृत्व किया था। इसके अलावा उन्होंने मौसम और फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी से जुड़े क्षेत्रों में भी कई महत्वपूर्ण तकनीकी जिम्मेदारियां निभाईं।
उनकी विशेषज्ञता रणनीतिक नेतृत्व, संगठनात्मक बदलाव, मोबाइल और वेब टेक्नोलॉजी, मार्केटिंग टेक्नोलॉजी और ई-कॉमर्स जैसे क्षेत्रों में थी।
शीतल ने अपना बचपन इंग्लैंड, भारत और घाना में बिताया। बाद में वह अमेरिका चली गईं और Georgia Institute of Technology से कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई की।
वह जॉर्जिया के अटलांटा में अपने पति और दो बच्चों जेसन और जेसिका के साथ रहती थीं। शीतल दो सॉफ्टवेयर पेटेंट की सह-आविष्कारक भी थीं। इसके अलावा वह Georgia Tech College of Computing की एडवाइजरी बोर्ड की सदस्य और Georgia Tech Alumni Association के बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज़ में भी शामिल थीं।
नोएडा की फिल्म सिटी में बुधवार सुबह एक महिला पत्रकार के साथ छेड़छाड़ का मामला सामने आया है। यह घटना दिनदहाड़े उस इलाके में हुई, जहां कई मीडिया संस्थानों के दफ्तर मौजूद हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
नोएडा की फिल्म सिटी में बुधवार सुबह एक महिला पत्रकार के साथ छेड़छाड़ का मामला सामने आया है। आरोप है कि एक बाइक सवार युवक ने ऑफिस जाते समय ऑटो-रिक्शा में बैठी पत्रकार का पीछा किया, अश्लील इशारे किए और अभद्र टिप्पणियां कीं। यह घटना दिनदहाड़े उस इलाके में हुई, जहां कई मीडिया संस्थानों के दफ्तर मौजूद हैं।
पीड़ित पत्रकार ने घटना के बाद सेक्टर-20 थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज की मदद से आरोपी की पहचान कर ली गई है और उसे जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
ऑटो के साथ-साथ चलता रहा बाइक सवार
महिला पत्रकार ने बताया कि वह सुबह करीब 10 बजे एक्सप्रेस टॉवर स्थित अपने कार्यालय जा रही थीं। इसी दौरान एक बाइक सवार युवक उनके ऑटो के पास आया और अंदर झांकने लगा। इसके बाद वह लगातार ऑटो के साथ-साथ चलता रहा।
पत्रकार के अनुसार, युवक ने उनके पास आकर अश्लील इशारे किए और अभद्र टिप्पणियां भी कीं।
उन्होंने बताया, "शुरुआत में मुझे लगा कि शायद वह संयोग से साथ चल रहा है, लेकिन जब उसने बार-बार ऑटो के बराबर आकर गंदे इशारे करने शुरू किए, तब साफ हो गया कि वह मेरा पीछा कर रहा है। मैं उसका पीछा करना चाहती थी, लेकिन ऑटो उसकी बाइक की रफ्तार का मुकाबला नहीं कर सका।"
वीडियो बनाते ही भाग निकला आरोपी
पत्रकार ने अपनी शिकायत में बताया कि जैसे ही उन्होंने मोबाइल निकालकर वीडियो रिकॉर्ड करना शुरू किया, आरोपी वहां से भाग गया। हालांकि, वह उसका एक वीडियो बनाने में सफल रहीं, जिसमें काले कपड़े पहने एक युवक मोटरसाइकिल से ऑटो को ओवरटेक कर तेजी से भागता हुआ दिखाई देता है।
बाद में पत्रकार ने यह वीडियो सोशल मीडिया पर भी साझा किया।
CCTV से हुई पहचान
सेक्टर-20 थाना प्रभारी अरविंद कुमार ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपी की पहचान कर ली गई है। जांच में उसका पता दिल्ली की एक झुग्गी बस्ती का मिला है।
उन्होंने कहा कि पुलिस मामले की जांच कर रही है और उम्मीद है कि एक-दो दिन के भीतर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। पुलिस के अनुसार, आरोपी की गिरफ्तारी के बाद उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी।
महिला सुरक्षा पर उठे सवाल
घटना के बाद पत्रकार ने कहा कि नोएडा जैसे शहर में दिनदहाड़े इस तरह की घटना होना बेहद चिंताजनक है। उनके मुताबिक, यह मामला महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है, खासकर ऐसे इलाके में जहां बड़ी संख्या में मीडिया संस्थानों के कार्यालय मौजूद हैं।
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के तेजी से बढ़ते प्रभाव पर चिंता जताई है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के तेजी से बढ़ते प्रभाव पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर खुद को पत्रकार बताने वाले कई लोग मुख्यधारा की पत्रकारिता की साख को नुकसान पहुंचा रहे हैं और गलत जानकारी फैला रहे हैं।
एक डिजिटल न्यूज पोर्टल को दिए पॉडकास्ट में उमर अब्दुल्ला ने कहा, "आज जिसके हाथ में मोबाइल है, वह फेसबुक पेज बनाकर खुद को पत्रकार कहने लगता है। उसे यह भी नहीं पता कि खबर कैसे लिखी जाती है, सवाल कैसे पूछे जाते हैं या रिपोर्टिंग कैसे की जाती है। ऐसे लोग सिर्फ झूठ फैलाने का काम कर रहे हैं।"
मुख्यमंत्री ने पारंपरिक पत्रकारिता और मौजूदा डिजिटल मीडिया के बीच अंतर बताते हुए कहा कि पहले किसी कार्यक्रम में एक-दो पत्रकार नजर आते थे, लेकिन अब 15-20 लोग अलग-अलग चैनलों और प्लेटफॉर्म्स के लोगो लेकर पहुंच जाते हैं।
उन्होंने कहा, "पहले किसी कार्यक्रम में एक पत्रकार होता था, अब 15-20 लोग दिखाई देते हैं। हर किसी के हाथ में कई-कई चैनलों के लोगो होते हैं। 10 पत्रकारों के साथ 40 लोगो नजर आते हैं, लेकिन कई लोग उन्हें ठीक से पकड़ना भी नहीं जानते, फिर भी प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हैं।"
उमर अब्दुल्ला ने बिना किसी का नाम लिए कुछ डिजिटल न्यूज एग्रीगेटर्स और नई न्यूज एजेंसियों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कई सोशल मीडिया चैनल खुद को पत्रकारिता का मंच बता रहे हैं, जबकि कुछ ऐसे संस्थान भी खुद को न्यूज एजेंसी कहते हैं जिनके पास कोई वास्तविक पाठक या दर्शक आधार नहीं है।
उन्होंने कहा, "सोशल मीडिया चैनल खुद को पत्रकार बता रहे हैं और जिनके पास कोई सब्सक्राइबर नहीं है, वे भी खुद को न्यूज एजेंसी कह रहे हैं। लेकिन असली और भरोसेमंद खबर लोगों तक नहीं पहुंच पा रही है। इसका कोई समाधान निकालना होगा।"
जब उनसे पूछा गया कि उनकी सरकार मीडिया संस्थानों या पत्रकारों को इंटरव्यू और सरकारी कार्यक्रमों में पहुंच देने का फैसला कैसे करती है, तो मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके लिए पूरी जांच-पड़ताल की जाती है।
उन्होंने बताया, "हम किसी भी मीडिया संस्थान या पत्रकार की विश्वसनीयता, पृष्ठभूमि, पहुंच और स्वीकार्यता को देखते हैं। उनके पुराने काम और इंटरव्यू भी जांचते हैं कि उनका काम कितना गंभीर और जिम्मेदार है। ऐसा नहीं है कि सड़क पर किसी को देखकर इंटरव्यू के लिए बुला लिया जाए।"
मीडिया के बदलते स्वरूप पर उमर अब्दुल्ला ने कहा कि तकनीक और माध्यम भले बदल गए हों, लेकिन पत्रकारिता के मूल सिद्धांत आज भी वही हैं। उन्होंने कहा, "माध्यम बदल गया है, लेकिन पत्रकारिता का तरीका नहीं बदला है।"
मुख्यमंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब जम्मू-कश्मीर समेत देशभर में डिजिटल कंटेंट के नियमन, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही और गैर-पारंपरिक मीडिया की विश्वसनीयता को लेकर लगातार बहस चल रही है।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा टेलीविजन ऑडियंस रेटिंग्स पर रोक लगाने के फैसले के बाद BARC को हर तिमाही 7.5 करोड़ रुपये से ज्यादा के सीधे राजस्व नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) द्वारा टेलीविजन ऑडियंस रेटिंग्स (TV Ratings) पर रोक लगाने के फैसले के बाद ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) को हर तिमाही 7.5 करोड़ रुपये से ज्यादा के सीधे रेवेन्यू नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। मंत्रालय ने यह फैसला तब तक के लिए लिया है, जब तक BARC सरकार की नई टेलीविजन रेटिंग एजेंसी (Television Rating Agencies) पॉलिसी के तहत अपना पंजीकरण (Registration) नहीं करा लेता।
फिलहाल BARC को होने वाला सीधा वित्तीय नुकसान इसलिए होगा क्योंकि मंत्रालय ने उसे निर्देश दिया है कि रेटिंग्स बंद रहने की अवधि के दौरान वह न्यूज चैनलों से किसी तरह का सब्सक्रिप्शन शुल्क न वसूले। हालांकि, इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि यह रोक लंबे समय तक जारी रहती है तो इसका असर सिर्फ BARC की कमाई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मीडिया प्लानिंग, विज्ञापन डील और विज्ञापन अभियानों के प्रदर्शन को मापने की पूरी प्रक्रिया प्रभावित होगी। साथ ही विज्ञापन बजट का बड़ा हिस्सा डिजिटल प्लेटफॉर्म की ओर जा सकता है।
बाद में मंत्रालय ने इस रोक का दायरा केवल न्यूज चैनलों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे सभी टीवी चैनलों और सभी जॉनर पर लागू कर दिया। यानी अब BARC के नए नियमों के तहत पंजीकरण होने तक किसी भी टीवी चैनल की रेटिंग जारी नहीं होगी।
इंडस्ट्री से जुड़े कई अधिकारियों का कहना है कि जब रेटिंग्स दोबारा शुरू होंगी, तब कई न्यूज ब्रॉडकास्टर्स BARC से अपने सब्सक्रिप्शन बिलों में समायोजन (Adjustment) की मांग कर सकते हैं। चूंकि मंत्रालय ने साफ निर्देश दिया है कि रेटिंग्स बंद रहने के दौरान न्यूज चैनलों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा, इसलिए चैनल यह चाहेंगे कि उस अवधि की फीस भविष्य के तिमाही बिलों में समायोजित कर दी जाए, न कि नया बिल जारी किया जाए।
अधिकारियों का कहना है कि अधिकांश न्यूज नेटवर्क उस अवधि का सब्सक्रिप्शन शुल्क नहीं देना चाहेंगे, जब रेटिंग्स उपलब्ध नहीं थीं। इसके बजाय वे आने वाले बिलों में उसी हिसाब से राशि कम करने की मांग करेंगे।
हालांकि, इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस रुकावट से देश में कुल विज्ञापन खर्च (Advertising Spend) में कोई बड़ी कमी नहीं आएगी। लेकिन विज्ञापन बजट का बंटवारा जरूर बदलेगा। इसका सबसे ज्यादा असर छोटे टीवी चैनलों और विशेष श्रेणी (Niche) के चैनलों पर पड़ सकता है, जबकि बड़े टीवी नेटवर्क और डिजिटल प्लेटफॉर्म को इसका फायदा मिल सकता है।
BARC के रेवेन्यू मॉडल पर बढ़ा दबाव
रेटिंग्स पर लगी रोक के बाद BARC का सब्सक्रिप्शन आधारित रेवेन्यू मॉडल भी चर्चा में आ गया है।
वित्त वर्ष 2026-27 के लिए BARC की प्राइसिंग पॉलिसी के अनुसार, उसकी कमाई कई स्रोतों से होती है। इसमें ब्रॉडकास्टर्स से मिलने वाला सब्सक्रिप्शन शुल्क, विज्ञापन से जुड़ा सेस (Cess), प्रीमियम एनालिटिक्स सेवाएं और यूजर लाइसेंस शुल्क शामिल हैं।
इस मॉडल का सबसे अहम हिस्सा ड्यूल-थ्रेशोल्ड प्राइसिंग सिस्टम है। इसके तहत किसी भी ब्रॉडकास्टर को हर साल या तो अपनी नेट टीवी विज्ञापन आय का 0.8 फीसदी देना होता है या फिर प्रति चैनल 20 लाख रुपये, जो भी राशि अधिक हो। इस व्यवस्था का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि जिन चैनलों की विज्ञापन आय कम है, वे भी कम से कम तय न्यूनतम शुल्क का भुगतान करें।
उदाहरण के तौर पर, यदि किसी चैनल की सालाना विज्ञापन आय 25 करोड़ रुपये है, तब भी उसे 20 लाख रुपये का न्यूनतम शुल्क देना होगा। वहीं यदि किसी नेटवर्क की विज्ञापन आय 100 करोड़ रुपये है, तो उसे 0.8 फीसदी के हिसाब से लगभग 80 लाख रुपये का भुगतान करना पड़ेगा। सब्सक्रिप्शन फीस के अलावा BARC अपने प्रीमियम डेटा प्रोडक्ट्स के लिए भी अलग से शुल्क लेता है।
BARC के Prime Package में दर्शकों से जुड़े आंकड़े (Audience Analytics), कार्यक्रमों का विश्लेषण (Programme Analysis) और व्युअरशिप रिपोर्टिंग जैसी सुविधाएं शामिल होती हैं। वहीं, इससे ऊपर का Supreme Package और ज्यादा एडवांस एनालिटिक्स उपलब्ध कराता है। इसमें स्विचिंग-ग्रिड एनालिसिस (Switching Grid Analysis), बिहेवियरल टारगेटिंग (Behavioural Targeting) और व्यक्तिगत दर्शक विश्लेषण (Individual Viewership Analysis) जैसी सेवाएं शामिल हैं।
इसके अलावा BARC अपनी SpotTrek सेवाओं के जरिए भी कमाई करता है। इसके तहत किसी चैनल के कमर्शियल स्पॉट ट्रैकिंग के लिए सालाना 2 लाख रुपये और कमर्शियल के साथ प्रमोशनल स्पॉट ट्रैकिंग के लिए 3 लाख रुपये शुल्क लिया जाता है। इसके अलावा प्रति स्पॉट इस्तेमाल के आधार पर भी शुल्क लिया जाता है, जिसकी शुरुआत 7 रुपये प्रति स्पॉट से होती है।
BARC यूजर लाइसेंस (User Licence) के लिए भी अलग से शुल्क लेता है। यह शुल्क सब्सक्राइबर की कमाई के आधार पर तय होता है। यदि किसी संस्था को तय सीमा से अधिक यूजर जोड़ने होते हैं, तो प्रत्येक अतिरिक्त यूजर के लिए 60 हजार रुपये सालाना का शुल्क देना पड़ता है।
विज्ञापन खर्च कम नहीं होगा, लेकिन उसका बंटवारा बदल जाएगा
Thoth Advisors के मैनेजिंग पार्टनर और BARC इंडिया के पूर्व CEO पार्थो दासगुप्ता का मानना है कि रेटिंग्स पर रोक लगने से देश में कुल विज्ञापन खर्च कम होने की संभावना नहीं है, लेकिन विज्ञापन का पैसा अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर नए तरीके से बंटेगा।
उन्होंने कहा, "मुझे नहीं लगता कि कुल विज्ञापन खर्च में कोई कमी आएगी। हां, यह जरूर है कि विज्ञापन का पैसा एक जगह से दूसरी जगह जाएगा। सबसे ज्यादा फायदा बड़े खिलाड़ियों यानी डिजिटल और बड़े टीवी नेटवर्क को होगा, जबकि छोटे चैनलों और छोटे जॉनर को नुकसान उठाना पड़ेगा।"
हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि BARC की अपनी आय जरूर प्रभावित होगी, क्योंकि उसकी कमाई सीधे तौर पर टीवी विज्ञापन और ब्रॉडकास्टर्स के सब्सक्रिप्शन शुल्क पर निर्भर करती है।
उन्होंने कहा, "जहां तक टीवी की कमाई और BARC की आय का सवाल है, क्योंकि BARC की कमाई टीवी विज्ञापन रेवेन्यू का एक प्रतिशत होती है, इसलिए बड़े खिलाड़ियों को फायदा होगा और छोटे खिलाड़ियों को नुकसान होगा। अगर सरकार न्यूज चैनलों की तरह सब्सक्रिप्शन पर रोक लगाए रखती है, तो इस दौरान BARC की कमाई पूरी तरह प्रभावित होगी। मुझे लगता है कि इस स्थिति का सबसे बड़ा फायदा बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म को मिलेगा।"
7.5 करोड़ रुपये का तिमाही नुकसान तो सिर्फ शुरुआत है
Chrome Data Analytics के फाउंडर पंकज कृष्णा के अनुसार, BARC की सालाना कमाई करीब 300 करोड़ रुपये है। इसमें न्यूज चैनलों की हिस्सेदारी लगभग 10 फीसदी, यानी करीब 30 करोड़ रुपये सालाना है।
उन्होंने कहा, "अगर BARC की रेटिंग्स एक तिमाही तक बंद रहती हैं, तो इसका असर दो स्तर पर देखा जाना चाहिए। पहला, BARC की अपनी सब्सक्रिप्शन आय पर और दूसरा, पूरे विज्ञापन इंडस्ट्री में मीडिया प्लानिंग को लेकर पैदा होने वाली अनिश्चितता पर।"
इन आंकड़ों के आधार पर सिर्फ न्यूज चैनलों से मिलने वाले सब्सक्रिप्शन पर रोक के कारण BARC को एक तिमाही में करीब 7.5 करोड़ रुपये का सीधा नुकसान होगा।
पंकज कृष्णा ने कहा, "यह तो केवल तुरंत दिखाई देने वाला नुकसान है। लेकिन इसका असर इससे कहीं ज्यादा बड़ा होगा। अगर एक तिमाही तक रेटिंग्स उपलब्ध नहीं रहतीं, तो विज्ञापनदाता, मीडिया एजेंसियां और ब्रॉडकास्टर्स सभी को कैंपेन प्लानिंग, विज्ञापन दरें तय करने, बेंचमार्क बनाने और प्रदर्शन का मूल्यांकन करने में अनिश्चितता का सामना करना पड़ेगा।"
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का यह कदम मौजूदा टीवी ऑडियंस मेजरमेंट सिस्टम की विश्वसनीयता को लेकर उठ रहे गंभीर सवालों की ओर इशारा करता है।
पंकज कृष्णा ने कहा, "डेटा पर रोक लगाने का फैसला मौजूदा मेजरमेंट सिस्टम की विश्वसनीयता और मजबूती को लेकर उठी चिंताओं से जुड़ा हुआ लगता है। 'लैंडिंग पेज' विवाद लंबे समय से खासकर न्यूज चैनलों में चर्चा का विषय रहा है। ऐसे मामलों में चैनलों की जबरन दृश्यता (Forced Visibility) दर्शकों के देखने के व्यवहार को प्रभावित कर सकती है। इसके अलावा इंडस्ट्री अभी भी पुराने हार्डवेयर आधारित मेजरमेंट सिस्टम पर निर्भर है, जो आज के मल्टी-प्लेटफॉर्म कंटेंट माहौल के लिए पर्याप्त नहीं माना जा सकता।"
यह सिर्फ रेटिंग्स का संकट नहीं, भरोसे का संकट भी है
रेटिंग्स पर लगी रोक के बाद एक बार फिर यह बहस तेज हो गई है कि क्या भारत को दूसरी ऑडियंस मेजरमेंट एजेंसी की जरूरत है।
Sales Strategist LLP के फाउंडर और कनेक्टेड टीवी (CTV) विशेषज्ञ विशाल खन्ना का मानना है कि केवल दूसरी रेटिंग एजेंसी बना देने से इंडस्ट्री की मूल समस्याएं खत्म नहीं होंगी।
उन्होंने कहा, "क्या हमें दूसरी रेटिंग एजेंसी चाहिए? कागज पर देखें तो जवाब हां है। लेकिन हकीकत यह है कि पूरी दुनिया में ऑडियंस मेजरमेंट का कारोबार लगभग एकाधिकार (Monopoly) वाला रहा है। भारत में हम पहले A-MAP और TAM जैसी एजेंसियां भी देख चुके हैं। असली सवाल प्रतिस्पर्धा का नहीं है, बल्कि यह है कि दूसरी मेजरमेंट प्रणाली के लिए पैसा कौन देगा।"
विशाल खन्ना के अनुसार, असली समस्या इंडस्ट्री की गवर्नेंस व्यवस्था में है।
उन्होंने कहा, "यह सिर्फ रेटिंग्स का संकट नहीं है, बल्कि भरोसे की व्यवस्था (Trust Architecture) का संकट है, जो रेटिंग्स के रूप में दिखाई दे रहा है। BARC की असली समस्या कभी सिर्फ एक CEO या किसी एक नियम की नहीं रही। असली समस्या यह है कि जिन लोगों को मापा जा रहा है, वही लोग मापने वाले सिस्टम के मालिक भी हैं। यानी हर हाल में फायदा उन्हीं का होता है।"
उन्होंने सरकार की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था, "दुनिया के ज्यादातर देशों में सरकारें ऑडियंस मेजरमेंट का काम नहीं करतीं। यह सरकार का काम नहीं है कि वह इस कारोबार में सीधे दखल दे।"
भारत के मेजरमेंट सिस्टम को आधुनिक बनाने का मौका
इंडस्ट्री के कई अनुभवी लोगों का मानना है कि मौजूदा स्थिति भारत के टेलीविजन ऑडियंस मेजरमेंट सिस्टम को आधुनिक बनाने का बड़ा अवसर भी साबित हो सकती है। पार्थो दासगुप्ता ने बताया कि BARC ने 2017-18 के दौरान डिजिटल ऑडियंस मेजरमेंट का पायलट प्रोजेक्ट भी चलाया था, लेकिन बाद में इसे बंद कर दिया गया।
उन्होंने कहा, "इस समस्या का समाधान दो चरणों में हो सकता है। सबसे पहले BARC को मंत्रालय की सभी शर्तें पूरी करनी चाहिए और जल्द से जल्द नए नियमों के तहत पंजीकरण हासिल करना चाहिए। इसमें वे सभी बिंदु शामिल हैं जिनका उल्लेख सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने किया है। BARC ने 2017-18 में डिजिटल रेटिंग सर्विस का सफल पायलट भी किया था, लेकिन बाद में बोर्ड ने उस परियोजना को रोक दिया। अगर उस समय मिले अनुभवों को लागू किया गया होता तो आज स्थिति अलग हो सकती थी।"
उन्होंने कहा कि दूसरा चरण इससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण है। उनके मुताबिक, अब भारत को ऐसे डेटरमिनिस्टिक (Deterministic) और आउटकम-आधारित (Outcome-Based) ऑडियंस मेजरमेंट सिस्टम की ओर बढ़ना चाहिए, जो टीवी, OTT और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बदलते दर्शकों के व्यवहार को सही तरीके से माप सके।
दासगुप्ता ने कहा, "अब मेजरमेंट सिस्टम को ज्यादा सटीक और नतीजों पर आधारित बनाना होगा। पूरी दुनिया इसी दिशा में आगे बढ़ रही है। इससे भारत के OTT और डिजिटल प्लेटफॉर्म को भी फायदा होगा और सभी प्लेटफॉर्म के लिए समान अवसर (Level Playing Field) तैयार होगा। दुनिया में इस दिशा में बदलाव हो रहे हैं और अब भारत को भी अंतरराष्ट्रीय मानकों के साथ कदम मिलाना होगा।"
ब्रॉडकास्टर्स और विज्ञापनदाताओं पर पड़ेगा व्यापक असर
रेटिंग्स पर लगी रोक का असर केवल BARC की सब्सक्रिप्शन आय तक सीमित नहीं रहेगा। इसका प्रभाव पूरे टेलीविजन इंडस्ट्री और विज्ञापन बाजार पर भी पड़ेगा। टेलीविजन रेटिंग्स आज भी विज्ञापन इंडस्ट्री की साझा मुद्रा (Common Currency) मानी जाती हैं। विज्ञापन दरें तय करने, मीडिया प्लानिंग करने, विज्ञापन सौदों पर बातचीत करने और किसी कैंपेन की सफलता का आकलन करने के लिए इन्हीं रेटिंग्स का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि बड़े जनरल एंटरटेनमेंट चैनल (GEC) और बड़े टीवी नेटवर्क, जिनके विज्ञापनदाताओं के साथ पहले से मजबूत संबंध हैं, इस स्थिति का सामना अपेक्षाकृत बेहतर तरीके से कर सकते हैं।
लेकिन छोटे ब्रॉडकास्टर्स और विशेष श्रेणी (Niche) के चैनलों पर इसका दबाव बढ़ सकता है। रेटिंग्स उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में विज्ञापनदाता अपने बजट का बड़ा हिस्सा उन डिजिटल प्लेटफॉर्म की ओर मोड़ सकते हैं, जहां अब भी रियल-टाइम परफॉर्मेंस मेजरमेंट उपलब्ध है।
इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो छोटे चैनलों के लिए विज्ञापन जुटाना और अपनी दर्शक संख्या साबित करना और भी मुश्किल हो सकता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह रोक सिर्फ कुछ समय के लिए लगाया गया एक नियामकीय (Regulatory) कदम साबित होगी या फिर यह भारत के ऑडियंस मेजरमेंट सिस्टम में बड़े बदलाव की शुरुआत बनेगी।
इसका जवाब काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि BARC नई Television Rating Agencies Policy के तहत कितनी जल्दी अपना पंजीकरण हासिल करता है और क्या इस दौरान पूरा इंडस्ट्री मिलकर लंबे समय से उठ रहे गवर्नेंस, पारदर्शिता (Transparency) और टीवी, OTT व डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए एकीकृत ऑडियंस मेजरमेंट जैसे मुद्दों का स्थायी समाधान निकालने की दिशा में आगे बढ़ता है।
इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि इस अवसर का सही इस्तेमाल किया गया, तो भारत का ऑडियंस मेजरमेंट सिस्टम पहले से ज्यादा आधुनिक, पारदर्शी और भरोसेमंद बन सकता है। वहीं, अगर सुधारों में देरी हुई तो इसका असर सिर्फ BARC तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे टेलीविजन और विज्ञापन इंडस्ट्री को लंबे समय तक इसकी कीमत चुकानी पड़ सकती है।