आदित्य गुप्ता कॉर्निटोज में मार्केटिंग, ब्रांडिंग और इनोवेशन के हेड बने हैं। इससे पहले वह पतंजलि फूड्स में मीडिया, ब्रांडिंग और कम्युनिकेशंस की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
आदित्य गुप्ता (Aditya Gupta) ने स्नैक ब्रांड कॉर्निटोज (Cornitos) में हेड ऑफ मार्केटिंग, ब्रांडिंग एंड इनोवेशन (Head of Marketing, Branding & Innovation) के तौर पर नई जिम्मेदारी संभाली है। वह जुलाई में कंपनी से जुड़े थे और अब उन्होंने लिंक्डइन (LinkedIn) पोस्ट के जरिए अपनी नियुक्ति की आधिकारिक जानकारी साझा की है।
गुप्ता को इंटीग्रेटेड मार्केटिंग (Integrated Marketing), ब्रांड ट्रांसफॉर्मेशन (Brand Transformation) और ओमनीचैनल ग्रोथ (Omnichannel Growth) का 17 साल से ज्यादा का अनुभव है। उन्होंने एफएमसीजी (FMCG), रिटेल (Retail), वेलनेस (Wellness) और डी2सी (D2C) सेक्टर में अलग-अलग ब्रांड्स के साथ काम किया है।
अपने करियर में उन्होंने कंज्यूमर इनसाइट्स (Consumer Insights), क्रिएटिविटी (Creativity), टेक्नोलॉजी (Technology) और कॉमर्स (Commerce) को साथ जोड़कर ब्रांड्स को तैयार करने और उनका विस्तार करने पर काम किया है।
कॉर्निटोज से जुड़ने से पहले गुप्ता पतंजलि फूड्स (Patanjali Foods) में जनरल मैनेजर- मीडिया, ब्रांडिंग एंड कम्युनिकेशंस (General Manager - Media, Branding and Communications) के पद पर थे। इससे पहले वह पॉपकॉर्न (Popkorn) और वैल्यू 360 कम्युनिकेशंस (Value 360 Communications) समेत कई कंपनियों के साथ भी काम कर चुके हैं।
इंस्टाग्राम ने बालाघाट में आदिवासी बच्चों की मौत और स्वास्थ्य संकट की रिपोर्टिंग कर रहे तीन स्वतंत्र पत्रकारों के अकाउंट अस्थायी रूप से सस्पेंड किए, जिन्हें बुधवार सुबह बहाल कर दिया गया।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम (Instagram) ने सोमवार को मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में आदिवासी बच्चों की मौत से जुड़े मामले की रिपोर्टिंग कर रहे तीन स्वतंत्र पत्रकारों के अकाउंट कुछ समय के लिए सस्पेंड कर दिए। हालांकि, बुधवार सुबह तीनों अकाउंट दोबारा बहाल हो गए।
जिन पत्रकारों के अकाउंट पर कार्रवाई हुई, उनमें मोनिका सिंह (Monika Singh), बिंदु गुर्जर (Bindu Gurjar) और लोकभद्र सिंह (Lokbhadra Singh) शामिल हैं। तीनों बालाघाट में आदिवासी बच्चों की मौत के बाद हुए विरोध प्रदर्शनों और इलाके से जुड़े कई मुद्दों पर ग्राउंड रिपोर्टिंग (Ground Reporting) कर रहे थे।
उनकी रिपोर्टिंग में अस्पताल के कथित कुप्रबंधन (Hospital Mismanagement), आशा कार्यकर्ताओं (ASHA Workers) की परेशानियों और आदिवासी संगठनों के विरोध प्रदर्शनों जैसे मुद्दे शामिल थे। अकाउंट बहाल होने के बाद लोकभद्र सिंह ने आरोप लगाया कि पत्रकारों को परेशान करने और उनका हौसला तोड़ने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि ऐसी कोशिशों के बावजूद वे पीछे नहीं हटेंगे।
The Press Club of India strongly condemns the suspension of the Instagram accounts of three independent journalists following their ground reporting from Balaghat, Madhya Pradesh, on a public health crisis involving the deaths of children from the Adivasi community. pic.twitter.com/3lcjVXcbEd
— Press Club of India (@PCITweets) September 8, 2026
इस मामले पर प्रेस क्लब ऑफ इंडिया (Press Club of India) ने भी प्रतिक्रिया दी है। संगठन ने तीन स्वतंत्र पत्रकारों के इंस्टाग्राम अकाउंट सस्पेंड किए जाने की कड़ी निंदा की। प्रेस क्लब ने कहा कि पत्रकार बालाघाट में आदिवासी समुदाय के बच्चों की मौत से जुड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट (Public Health Crisis) की ग्राउंड रिपोर्टिंग कर रहे थे।
तीनों पत्रकारों के अकाउंट दो दिन बाद बहाल होने के बाद फिलहाल वे दोबारा सोशल मीडिया पर उपलब्ध हैं।
जिनेमा मीडिया व एंटरटेनमेंट ने PFMPL के अनसिक्योर्ड फाइनेंशियल क्रेडिटर्स की बकाया रकम के निपटारे के लिए 24,99,000 इक्विटी शेयर जारी करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
जिनेमा मीडिया व एंटरटेनमेंट लिमिटेड (Zinema Media & Entertainment Limited) ने Premier Futsal Management Private Limited (PFMPL) के अनसिक्योर्ड फाइनेंशियल क्रेडिटर्स की बकाया रकम के निपटारे के लिए 24,99,000 इक्विटी शेयर जारी करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। कंपनी के बोर्ड ने यह फैसला 8 सितंबर 2026 की बैठक में लिया।
कंपनी के अनुसार, इन शेयरों को Preferential Issue के जरिए Private Placement basis पर जारी किया जाएगा। यह पूरी प्रक्रिया PFMPL के रेजोल्यूशन प्लान को लागू करने का हिस्सा है। यह रेजोल्यूशन प्लान NCLT की डिविजन बेंच-I, चेन्नई के 19 दिसंबर 2024 के आदेश के तहत लागू किया जा रहा है।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि शेयरों का अंतिम अलॉटमेंट अभी पूरा हो गया है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि इश्यू शेयरधारकों की मंजूरी और अन्य जरूरी वैधानिक एवं नियामकीय मंजूरियों के अधीन रहेगा। कंपनी को इस इश्यू के लिए शेयरधारकों की मंजूरी लेने के लिए आम बैठक भी बुलानी है।
₹10 के फेस वैल्यू वाले होंगे शेयर
प्रस्ताव के तहत अधिकतम 24,99,000 इक्विटी शेयर जारी किए जाएंगे। प्रत्येक शेयर की फेस वैल्यू ₹10 होगी। इस तरह प्रस्तावित शेयरों की कुल फेस वैल्यू ₹2,49,90,000 यानी करीब ₹2.50 करोड़ होगी। ये शेयर PFMPL के अनसिक्योर्ड फाइनेंशियल क्रेडिटर्स को उनकी Settlement Amount के हिस्से के रूप में दिए जाएंगे। यानी यह सामान्य तरीके से बाजार से पैसा जुटाने वाला Preferential Issue नहीं है, बल्कि PFMPL के रेजोल्यूशन प्लान के तहत क्रेडिटर्स के बकाये के निपटारे की प्रक्रिया से जुड़ा है।
तीन नॉन-प्रमोटर अलॉटीज को मिलेंगे शेयर
कंपनी द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, प्रस्तावित 24,99,000 शेयर तीन नॉन-प्रमोटर अलॉटीज को दिए जाएंगे।
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अलॉटी |
कैटेगरी |
शेयर |
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Prime Events |
Non-Promoter |
10,17,441 |
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Prime Global Sport Management LLP |
Non-Promoter |
11,19,835 |
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Chelliah Arun Pandian (A & P Group) |
Non-Promoter |
3,61,724 |
|
कुल |
24,99,000 |
Authorized Share Capital भी बढ़ाने का प्रस्ताव
कंपनी के बोर्ड ने Authorized Share Capital बढ़ाने को भी मंजूरी दी है। इसे मौजूदा ₹8 करोड़ से बढ़ाकर ₹10 करोड़ करने का प्रस्ताव है। इसके तहत कंपनी की अधिकृत इक्विटी शेयर संख्या 80 लाख से बढ़कर 1 करोड़ शेयर हो जाएगी। प्रत्येक शेयर की फेस वैल्यू ₹10 होगी। इस बदलाव के लिए कंपनी के Memorandum of Association (MOA) में भी संशोधन किया जाएगा। यह प्रस्ताव भी शेयरधारकों की मंजूरी के अधीन रहेगा।
Statutory Auditor में भी बदलाव
कंपनी ने अपने Statutory Auditor में बदलाव की जानकारी भी दी है। M/s. Ganesamoorthy T. & Associates ने 1 सितंबर 2026 से ऑडिटर पद से इस्तीफा दे दिया है। कंपनी के अनुसार, कारोबार के बढ़ते आकार के कारण संसाधनों की कमी इस्तीफे की वजह रही। इसके बाद बोर्ड ने M/s. Patni Mandhana & Associates को नया Statutory Auditor नियुक्त करने की मंजूरी दी है। हालांकि, यह नियुक्ति भी शेयरधारकों की मंजूरी के अधीन है।
प्रस्तावित नियुक्ति के मुताबिक, नई ऑडिट फर्म आगामी AGM के समापन से लगातार पांच वित्तीय वर्षों तक कंपनी के Statutory Auditor के रूप में काम करेगी।
30 सितंबर को होगी वार्षिक आम बैठक
कंपनी की वार्षिक आम बैठक (AGM) बुधवार, 30 सितंबर 2026 को आयोजित होगी। कंपनी ने AGM से जुड़े नोटिस और Annual Report के लिए 4 सितंबर 2026 को कट-ऑफ डेट रखी है। वहीं, AGM में वोट देने के लिए 23 सितंबर 2026 की तारीख तय की गई है। आम बैठक में शेयरधारकों के सामने Preferential Issue और Authorized Share Capital में बदलाव समेत जरूरी प्रस्ताव रखे जाएंगे और इन पर उनकी मंजूरी ली जाएगी।
10 सितंबर तक बंद रहेगी ट्रेडिंग विंडो
कंपनी ने Designated Persons और Insiders के लिए ट्रेडिंग विंडो भी बंद रखी है। यह 3 सितंबर 2026 से बंद है और बोर्ड बैठक समाप्त होने के 48 घंटे बाद तक बंद रहेगी। कंपनी के मुताबिक, ट्रेडिंग विंडो गुरुवार, 10 सितंबर 2026 तक बंद रहेगी।
विदेश यात्रा करने और इंटरनेशनल वेबसाइट्स पर शॉपिंग करने वाले IDFC FIRST Bank के क्रेडिट कार्ड ग्राहकों के लिए अच्छी खबर है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
विदेश यात्रा करने और इंटरनेशनल वेबसाइट्स पर शॉपिंग करने वाले IDFC FIRST Bank के क्रेडिट कार्ड ग्राहकों के लिए अच्छी खबर है। बैंक ने अपने क्रेडिट कार्ड्स पर Zero Forex Markup की सुविधा देने का ऐलान किया है। बैंक का कहना है कि इस कदम से विदेश में कार्ड से खर्च करने वाले ग्राहकों को अतिरिक्त शुल्क से राहत मिलेगी और इंटरनेशनल ट्रांजैक्शन ज्यादा किफायती होंगे।
नई सुविधा के तहत पात्र IDFC FIRST Bank क्रेडिट कार्ड से विदेशी मुद्रा (Foreign Currency) में किए गए ट्रांजैक्शन पर ग्राहकों से सामान्य तौर पर लगने वाला Forex Markup Charge नहीं लिया जाएगा। बैंक ने इस पहल को “Travel more. Shop more. Save more” के संदेश के साथ पेश किया है। यानी ज्यादा यात्रा करें, ज्यादा शॉपिंग करें और ज्यादा बचत करें।
क्या होता है Forex Markup?
जब आप भारत के बाहर किसी देश में अपने भारतीय क्रेडिट कार्ड से पेमेंट करते हैं या किसी विदेशी वेबसाइट से सामान खरीदते हैं, तो ट्रांजैक्शन की रकम को भारतीय रुपये से विदेशी मुद्रा में बदला जाता है। इस दौरान कई बैंक और कार्ड कंपनियां करेंसी कन्वर्जन के अलावा एक अतिरिक्त शुल्क लेती हैं, जिसे Forex Markup कहा जाता है।
आमतौर पर यह शुल्क करीब 1.5% से 3.5% तक हो सकता है। कार्ड और बैंक के हिसाब से यह अलग-अलग होता है। ऐसे में अगर कोई व्यक्ति विदेश में ज्यादा खर्च करता है, तो Forex Markup के रूप में अच्छी-खासी अतिरिक्त रकम देनी पड़ सकती है। Zero Forex Markup का मतलब है कि पात्र कार्ड पर इस अतिरिक्त मार्कअप शुल्क से राहत मिलेगी।
पहले से भी कुछ कार्ड पर मिल रही है सुविधा
IDFC FIRST Bank अपने कुछ क्रेडिट कार्ड्स में पहले से ही Zero Forex Markup की सुविधा दे रहा है। इनमें FIRST WOW!, Mayura और Diamond Reserve जैसे कार्ड शामिल हैं। उदाहरण के लिए, FIRST WOW! क्रेडिट कार्ड पर इंटरनेशनल ट्रांजैक्शन के लिए फिलहाल 0% Forex Markup की सुविधा दी जा रही है। वहीं, Diamond Reserve को इसी साल एक प्रीमियम Zero-Forex Travel कार्ड के तौर पर लॉन्च किया गया था। अब बैंक की Zero Forex पहल को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
किन लोगों को होगा सबसे ज्यादा फायदा?
इस सुविधा का सबसे ज्यादा फायदा उन लोगों को हो सकता है जो लगातार विदेश यात्रा करते हैं या विदेशी वेबसाइट्स और इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म पर खरीदारी करते हैं। मसलन, विदेश में होटल की बुकिंग, शॉपिंग, टिकट, रेस्टोरेंट पेमेंट या दूसरे खर्च क्रेडिट कार्ड से करने पर Forex Markup नहीं देना पड़ेगा, अगर संबंधित कार्ड इस सुविधा के लिए पात्र है। इसी तरह विदेशी वेबसाइट से डॉलर, यूरो या किसी अन्य विदेशी मुद्रा में खरीदारी करने वाले ग्राहकों के लिए भी यह सुविधा फायदेमंद हो सकती है।
क्रेडिट कार्ड बाजार में बढ़ सकती है प्रतिस्पर्धा
IDFC FIRST Bank का यह कदम भारत के तेजी से बढ़ते क्रेडिट कार्ड बाजार में प्रतिस्पर्धा को और बढ़ा सकता है। खासतौर पर Travel और Premium Credit Card सेगमेंट में बैंक अब ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए सिर्फ रिवॉर्ड पॉइंट्स पर निर्भर नहीं हैं।
Lounge Access, Travel Rewards, International Acceptance और Zero Forex Markup जैसी सुविधाएं भी ग्राहकों के लिए महत्वपूर्ण बनती जा रही हैं। ऐसे में Zero Forex Markup को व्यापक स्तर पर बढ़ावा देकर IDFC FIRST Bank इस सेगमेंट में अपनी स्थिति और मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
विदेश यात्रा और इंटरनेशनल खर्च बढ़ने का असर
भारतीयों के विदेश यात्रा करने का चलन बढ़ रहा है। इसके साथ ही लोग विदेशी कंपनियों और इंटरनेशनल ई-कॉमर्स वेबसाइट्स पर भी ज्यादा खर्च कर रहे हैं। ऐसे में विदेशी मुद्रा में होने वाले ट्रांजैक्शन पर लगने वाली अतिरिक्त लागत ग्राहकों के लिए महत्वपूर्ण हो जाती है। Zero Forex Markup जैसी सुविधा बैंक के क्रेडिट कार्ड को ग्राहकों के लिए ज्यादा आकर्षक बना सकती है। IDFC FIRST Bank का फोकस अब इसी बढ़ती जरूरत को ध्यान में रखते हुए इंटरनेशनल खर्च को ज्यादा किफायती बनाने पर है।
डॉट एंड की ने सिद्धार्थ वाया को सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और बिजनेस हेड नियुक्त किया है। वह कंपनी के कारोबार की कमान संभालेंगे और उनके पास एफएमसीजी तथा पर्सनल केयर का लंबा अनुभव है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
डी2सी स्किनकेयर ब्रांड डॉट एंड की (Dot & Key) ने सिद्धार्थ वाया (Siddharth Vaya) को सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और बिजनेस हेड (Senior Vice President & Business Head) नियुक्त किया है। वह कंपनी के बिजनेस (Business) की जिम्मेदारी संभालेंगे।
सिद्धार्थ को एफएमसीजी (FMCG) और पर्सनल केयर (Personal Care) इंडस्ट्री में करीब दो दशक का अनुभव है। उन्होंने डी2सी (D2C), पारंपरिक ब्रांड्स, मल्टीनेशनल कंपनियों और बड़े भारतीय कारोबारी समूहों में सेल्स, मार्केटिंग और लीडरशिप रोल्स में काम किया है।
डॉट एंड की से पहले वह बियर्डो (Beardo) में चीफ बिजनेस ऑफिसर (Chief Business Officer) थे। इससे पहले उन्होंने मैरिको (Marico) में सैफोला ऑयल्स (Saffola Oils) पोर्टफोलियो के कैटेगरी हेड (Category Head) के तौर पर काम किया। उन्होंने मैरिको में मेल ग्रूमिंग (Male Grooming) कैटेगरी की जिम्मेदारी भी संभाली और पुरुषों के पर्सनल केयर कारोबार को बढ़ाने में काम किया।
सिद्धार्थ ने अपने करियर के शुरुआती दौर में निविया इंडिया (NIVEA India) के साथ छह साल से ज्यादा समय बिताया। यहां उन्होंने बॉडी लोशन कैटेगरी और निविया मेन (NIVEA Men) पोर्टफोलियो की जिम्मेदारी संभाली। इससे पहले उन्होंने रेकिट बेंकिजर (Reckitt Benckiser) से करियर शुरू किया और करीब पांच साल तक अलग-अलग सेल्स रोल्स में काम किया।
डॉट एंड की स्किनकेयर के को-फाउंडर और सीईओ (Co-Founder & CEO) सुयश सराफ (Suyash Saraf) ने कहा कि सिद्धार्थ का एफएमसीजी और कैटेगरी लीडरशिप का अनुभव कंपनी के लिए काफी काम आएगा। उन्होंने कहा कि सेल्स, मार्केटिंग और बिजनेस में सिद्धार्थ का अनुभव कंपनी के अगले ग्रोथ फेज (Growth Phase) में अहम भूमिका निभाएगा।
ओमनीकॉम ग्लोबल सॉल्यूशंस ने स्वप्निल देशमुख को हेड ऑफ ऑपरेशंस नियुक्त किया है। पुणे में रहकर वह कंपनी के ऑपरेशंस पोर्टफोलियो, बिजनेस ट्रांसफॉर्मेशन और डिलीवरी से जुड़े काम संभालेंगे।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
ओमनीकॉम ग्लोबल सॉल्यूशंस (Omnicom Global Solutions) ने स्वप्निल देशमुख (Swapnil Deshmukh) को हेड ऑफ ऑपरेशंस (Head of Operations) नियुक्त किया है। वह पुणे से काम करेंगे और कंपनी के ऑपरेशंस पोर्टफोलियो (Operations Portfolio) की जिम्मेदारी संभालेंगे।
स्वप्निल को ऑपरेशंस, बिजनेस ट्रांसफॉर्मेशन (Business Transformation), डिलीवरी गवर्नेंस (Delivery Governance), स्ट्रैटेजी एक्जीक्यूशन (Strategy Execution), डिजिटल मॉडर्नाइजेशन (Digital Modernization), ईआरपी प्रोग्राम्स (ERP Programs), एनालिटिक्स (Analytics) और एआई में दो दशक से ज्यादा का अनुभव है।
ओजीएस से जुड़ने से पहले वह केपीएमजी (KPMG) में एसोसिएट पार्टनर (Associate Partner) थे। इससे पहले वह ईवाई (EY), एलएंडटी (L&T), ज़ीकस (Zycus) और राज टेक्नोलॉजीज (Raj Technologies) जैसी कंपनियों के साथ काम कर चुके हैं।
ओजीएस इंडिया और फिलीपींस के सीओओ (COO) किरण गुरुस्वामी (Kiran Guruswami) ने कहा कि कंपनी के बढ़ते कारोबार के साथ अब ऐसे ऑपरेटिंग मॉडल (Operating Model) की जरूरत है, जो अगले फेज की ग्रोथ को सपोर्ट कर सके। उन्होंने कहा कि स्वप्निल का अनुभव कंपनी को जटिल प्रक्रियाओं को आसान बनाने और बेहतर एक्जीक्यूशन में मदद करेगा।
ओजीएस इंडिया के एसवीपी, ऑपरेशंस (SVP, Operations) स्वप्निल देशमुख ने कहा कि वह कंपनी के अगले ग्रोथ फेज में टीम का हिस्सा बनकर उत्साहित हैं। उनका फोकस ऑपरेटिंग सिस्टम को मजबूत करने, विजिबिलिटी और गवर्नेंस (Governance) बेहतर करने और ऐसे फ्रेमवर्क (Frameworks) तैयार करने पर रहेगा, जिससे कंपनी तेजी से और बेहतर तरीके से आगे बढ़ सके।
दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स को चलती मेट्रो ट्रेन की खिड़की पर मोबाइल फोन लगाकर वीडियो बनाने को लेकर चेतावनी दी है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स को चलती मेट्रो ट्रेन की खिड़की पर मोबाइल फोन लगाकर वीडियो बनाने को लेकर चेतावनी दी है। DMRC ने कहा है कि इस तरह वीडियो बनाना यात्रियों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है और इससे चोट लगने का खतरा भी हो सकता है।
दरअसल, पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर इस तरह के कई वीडियो सामने आए हैं, जिनमें कंटेंट क्रिएटर्स सिनेमाई अंदाज में वीडियो बनाने के लिए चलती मेट्रो की खिड़की का इस्तेमाल कर रहे हैं। इन वीडियो में मोबाइल फोन को मेट्रो की खिड़की से सटाकर या लगाकर रखा जाता है और चलती ट्रेन को वीडियो का हिस्सा बनाया जाता है।
DMRC ने इस तरह की गतिविधि को गंभीरता से लिया है। कॉरपोरेशन ने कहा कि इस तरह की शूटिंग से दूसरे यात्रियों को असुविधा हो सकती है और उन्हें चोट भी लग सकती है। इसके अलावा, वीडियो बनाने के दौरान इस्तेमाल किया जा रहा मोबाइल फोन भी क्षतिग्रस्त हो सकता है।
DMRC ने अपने बयान में कहा, “DMRC अधिकारी इस मामले को पूरी गंभीरता से देख रहे हैं। अगर कोई कंटेंट क्रिएटर इस तरह की शूटिंग करते हुए पकड़ा गया, तो उसके खिलाफ जरूरी कार्रवाई की जाएगी।” कॉरपोरेशन ने यह भी कहा कि इस तरह की गतिविधि से दूसरे यात्रियों को परेशानी या चोट हो सकती है और मोबाइल फोन को भी नुकसान पहुंच सकता है।
DMRC ने कंटेंट क्रिएटर्स को दिल्ली मेट्रो परिसर के अंदर इस तरह के वीडियो नहीं बनाने के निर्देश दिए हैं। मेट्रो परिसर में ऐसी रील, डांस वीडियो, संगीत प्रस्तुति और अन्य गतिविधियों पर भी रोक है, जिनसे साथी यात्रियों को असुविधा होती है।
यह चेतावनी ऐसे समय में आई है, जब पिछले कुछ दिनों में सोशल मीडिया पर मोबाइल फोन को मेट्रो की खिड़की से लगाकर वीडियो बनाने का चलन तेजी से सामने आया है। इन वीडियो पर नजर पड़ने के बाद दिल्ली मेट्रो ने इस मामले को गंभीरता से लिया और कंटेंट क्रिएटर्स को सावधान किया है।
फॉक्स न्यूज मीडिया से मारिया बार्टिरोमो का 12.5 साल लंबा सफर खत्म हो गया है। उनके जाने के बाद मॉर्निंग शो और वॉल स्ट्रीट कार्यक्रमों के फॉर्मेट में भी बड़ा बदलाव किया गया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
मारिया बार्टिरोमो (Maria Bartiromo) अब फॉक्स न्यूज मीडिया (FOX News Media) का हिस्सा नहीं हैं। नेटवर्क ने पुष्टि की है कि 3 सितंबर 2026 से उनका कंपनी के साथ 12.5 साल लंबा सफर खत्म हो गया है। इस दौरान वह अमेरिकी बिजनेस टेलीविजन (Business Television) के प्रमुख चेहरों में शामिल रहीं।
फॉक्स न्यूज मीडिया ने उनके काम के लिए धन्यवाद दिया और आगे के सफर के लिए शुभकामनाएं दीं। बार्टिरोमो का मॉर्निंग शो (Morning Show) मॉर्निंग्स विद मारिया (Mornings with Maria) भी अब बंद हो गया है। फॉक्स बिजनेस नेटवर्क (FOX Business Network) पर सुबह 6 से 9 बजे तक चलने वाले इस शो का आखिरी एपिसोड 3 सितंबर को प्रसारित हुआ।
अब इसकी जगह मॉर्निंग्स विद फॉक्स बिजनेस (Mornings with FOX Business) शुरू होगा। इसमें किसी एक एंकर की जगह अलग-अलग एंकर बारी-बारी से शो संभालेंगे।
बार्टिरोमो का शुक्रवार शाम का कार्यक्रम मारिया बार्टिरोमो’स वॉल स्ट्रीट (Maria Bartiromo’s Wall Street) भी नए नाम के साथ आएगा। इसे एफबीएन’स वॉल स्ट्रीट (FBN’s Wall Street) नाम दिया गया है और इस हफ्ते इसे चेरिल कैसोन (Cheryl Casone) होस्ट करेंगी। बाद में यह शो भी रोटेटिंग एंकर (Rotating Anchor) फॉर्मेट में जाएगा।
फॉक्स बिजनेस आने वाले हफ्तों में अपने वीकडे शेड्यूल (Weekday Schedule) में और बदलाव करने की तैयारी कर रहा है। नेटवर्क फिलहाल बार्टिरोमो की जगह किसी एक एंकर को लाने के बजाय अलग-अलग एंकर वाले फॉर्मेट पर आगे बढ़ रहा है।
आज यानी 5 सितंबर को वर्ल्ड समोसा डे है। जी हां, यह सच है। समोसे के नाम भी एक खास दिन है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
डॉ. संदीप गोयल।।
आज यानी 5 सितंबर को वर्ल्ड समोसा डे है। जी हां, यह सच है। समोसे के नाम भी एक खास दिन है। भारत में घर से लेकर ऑफिस की कैंटीन तक और हलवाई की दुकान से लेकर बड़े रेस्तरां तक समोसा अपनी खास जगह बना चुका है। लेकिन अब यह सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। लंदन से लॉस एंजिल्स तक समोसा दुनिया को अपने स्वाद का दीवाना बना रहा है।
गरमा-गरम, कुरकुरी और डीप फ्राइड परत में आलू और मसालों से भरा यह त्रिकोण पहली बाइट में जीभ जला सकता है, लेकिन इसके बाद भी दूसरी बाइट लेने से कोई खुद को रोक नहीं पाता। ब्रिटिश भले ही कभी भारत पर शासन करने आए थे, लेकिन मजेदार बात यह है कि अब भारतीय समोसा उनके चाय के समय का हिस्सा बन चुका है।
चटनी के साथ दुनिया जीत रहा समोसा: लंदन में समोसा इतना लोकप्रिय हो चुका है कि वहां इसे चाय के साथ खाए जाने वाले स्नैक के तौर पर आसानी से देखा जा सकता है। प्रेट और वेटरोज जैसी जगहों पर 'स्पाइस्ड पोटैटो एंड पी समोसा' 2.50 पाउंड में मिलता है। इसे दक्षिण एशियाई स्वाद से प्रेरित एक खास डिश के तौर पर पेश किया जाता है। लेकिन इसे 'हैंडक्राफ्टेड' कहना भारतीयों को थोड़ा अजीब लग सकता है। आखिर राजौरी गार्डन की कोई आंटी सुबह 6 बजे टीवी पर 'अनुपमा' देखते हुए और बेटे पर चिल्लाते हुए एक हाथ से 200 समोसे बना सकती हैं!
अमेरिका ने भी समोसे को अपना लिया है, लेकिन अपने अंदाज में। वहां क्विनोआ समोसा, केल समोसा, बेक्ड समोसा और ग्लूटेन-फ्री समोसा जैसे प्रयोग हो रहे हैं। ब्रुकलिन के एक कैफे में 'डिकंस्ट्रक्टेड समोसा बाउल' तक मिलता है। यानी समोसे के टूट जाने पर डिब्बे में जो आलू की सब्जी और टूटी हुई परत बचती है, वही कुछ अलग नाम से परोस दी गई! ऑस्ट्रेलिया में समोसा पोस्ट-सर्फ स्नैक के तौर पर पसंद किया जाता है। टोरंटो में यह 14 डॉलर का 'आर्टिसनल' समोसा बन चुका है, जबकि दुबई में इन्फ्लुएंसर्स के लिए गोल्ड-लीफ समोसा तक उपलब्ध है।
हालांकि भारतीयों के लिए समोसे की असली पहचान आज भी वही है—हलवाई की दुकान वाला समोसा, जिसमें 90 प्रतिशत मैदा, 10 प्रतिशत आलू और 100 प्रतिशत भावना होती है। और फिर ऑफिस कैंटीन का वह समोसा, जो शाम 4 बजे क्लाइंट मीटिंग के दौरान बिल्कुल सही समय पर आ जाता है।
समोसे की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं: हर वैश्विक सितारे की तरह समोसे की भी एक दिलचस्प और विवादित शुरुआत की कहानी है। हम भारतीय इसे अपना समझते हैं, लेकिन तकनीकी तौर पर समोसा भारतीय नहीं है।
इसका शुरुआती रूप 10वीं सदी में मध्य पूर्व में 'संबुसक' के नाम से सामने आया था। यह एक छोटी पेस्ट्री थी, जिसमें कीमा भरा जाता था। फारसी व्यापारी इसे अपने सफर के दौरान साथ रखते थे, ताकि यात्रा में इसे आसानी से खाया जा सके। इसके बाद यह मध्य एशिया पहुंचा और उज्बेकिस्तान में 'सम्सा' के रूप में लोकप्रिय हुआ, जहां इसे आज भी तंदूर में पकाया जाता है।
13वीं-14वीं सदी में समोसा दिल्ली सल्तनत के दौर में भारत पहुंचा। मोरक्को के यात्री इब्न बतूता ने 1334 में मुहम्मद बिन तुगलक के दरबार में खाए गए 'संबुसक' का जिक्र किया था। उसमें कीमा, बादाम, अखरोट और मसालों का इस्तेमाल किया गया था। यानी उस समय समोसे में आलू नहीं था। पुर्तगालियों ने भारत में आलू बाद में पहुंचाया।
आज जिस आलू वाले समोसे के लिए हम दीवाने हैं, उसका मौजूदा रूप 19वीं सदी के ब्रिटिश दौर में विकसित हुआ। ब्रिटिश आलू लेकर आए और भारतीयों ने उसे उस अरबी पेस्ट्री के अंदर भरकर तल दिया। इस तरह यह एक ऐसा मेल बन गया, जिसमें भारतीय, इस्लामी और यूरोपीय खानपान की झलक दिखाई देती है। आज समोसे की कितनी किस्में हैं? आधिकारिक तौर पर 500 से ज्यादा और अनौपचारिक तौर पर शायद हर भारतीय मां की अपनी एक किस्म है।
भारत के अपने समोसे: भारत में समोसे के कई रूप हैं।
पंजाबी शाही समोसा: बड़ा और लगभग मुट्ठी के आकार का। इसमें आलू-मटर, पनीर, ड्राई फ्रूट्स और भरपूर अंदाज होता है।
बंगाली शिंगारा: आकार में छोटा और स्वाद में थोड़ा मीठा। इसमें मूंगफली और फूलगोभी का इस्तेमाल भी होता है।
हैदराबादी लुख्मी: चपटी और चौकोर, जिसमें मीट की फिलिंग होती है।
गुजराती चोराफली समोसा: छोटा और सूखा, जिसे एक-दो नहीं बल्कि 15 तक खाने का मन हो सकता है।
इंदौरी कचौरी वाला समोसा: इसमें आलू की जगह दाल की फिलिंग होती है, जिससे समोसे की पहचान को लेकर थोड़ा भ्रम जरूर पैदा हो सकता है।
दुनिया ने अपने हिसाब से बदला समोसा: मध्य पूर्व में समोसा आज भी मीट और बेक किए गए रूप में मिलता है और उसे मूल समोसे के करीब माना जाता है। पूर्वी अफ्रीका में इसे 'संबुसा' कहा जाता है। इसमें दाल और हरी मिर्च का इस्तेमाल होता है और केन्या में रमज़ान के दौरान भारत से भी ज्यादा समोसे खाए जाते हैं। पुर्तगाल में गोवा के प्रभाव वाला चिकन फिलिंग का रूप 'चमुकास' देखने को मिलता है। लंदन में चीज और बीन्स वाला 'कॉर्निश समोसा' भी है। वहीं न्यूयॉर्क के 'ब्रंच समोसा' में पुल्ड पोर्क, मैकरोनी एंड चीज, नुटेला और केले जैसी फिलिंग तक शामिल हो चुकी हैं। और प्रयोग यहीं खत्म नहीं होते। दिल्ली में नूडल्स समोसा, मुंबई में पिज्जा समोसा, अहमदाबाद में चॉकलेट समोसा, कनाडा में बटर चिकन समोसा और कोरिया में किमची समोसा भी देखने को मिलता है।
लेकिन समोसे के शौकीन लोगों से पूछिए तो 800 साल बाद भी केवल दो किस्में सबसे ऊपर हैं-
समोसे का त्रिकोण भी है खास: आखिर समोसा दुनिया भर में इतना सफल क्यों हुआ? पहली वजह है इसकी कीमत। यह कूटनीति से सस्ता है। दुनिया को योग के जरिए प्रभावित करना हो तो मेहनत करनी पड़ती है, लेकिन समोसे के लिए सिर्फ भूख चाहिए।
दूसरी वजह है कि आलू वाला समोसा शाकाहारी होता है। ऐसे समय में जब दुनिया वीगन, हलाल और कोषेर जैसे अलग-अलग खानपान विकल्पों की बात करती है, आलू वाला समोसा चुपचाप कहता है—मैं सबके लिए हूं। हां, अगर इसमें कीमा डाल दिया तो बात अलग है।
तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण वजह इसका आकार है। त्रिकोण को इंजीनियरिंग में सबसे मजबूत आकृतियों में माना जाता है। मिस्र के लोग इसे जानते थे और उन्होंने पिरामिड बनाए। भारतीयों ने उसी विचार को आगे बढ़ाया—त्रिकोण के अंदर आलू भरा और उसे तल दिया। यही तो असली नवाचार है। पश्चिम के पास सैंडविच था। ब्रेड की दो स्लाइस और उनके बीच कुछ। हमने कहा कि भरावन को तीनों तरफ से बंद कर देते हैं, ताकि वह बाहर न निकल सके। यह रणनीतिक सोच है।
समोसा सिर्फ स्नैक नहीं, एक भावना है: समोसे की असली सफलता सिर्फ उसके स्वाद में नहीं है। यह लोगों के बीच एक तरह का सामाजिक रिश्ता बनाता है। कोई एक समोसा नहीं खाता। एक खाया तो दूसरा लेना ही पड़ता है। टीम के लिए समोसे मंगाए हैं तो चटनी भी चाहिए। चटनी है तो हरी और लाल दोनों चाहिए। आपको हरी पसंद है तो आपके सहयोगी को लाल पसंद होगी। समोसा भारत का एक बड़ा सामाजिक बराबरी वाला स्वाद भी है। बॉम्बे हाई कोर्ट हो, गुरुग्राम की मीडिया एजेंसी हो या इंदिरानगर का स्टार्टअप—शाम 4 बजे सवाल एक ही हो सकता है, 'समोसा मंगाएं?' सीईओ और इंटर्न एक ही पेपर बैग से समोसा निकालते हैं और एक ही तरह से गरम समोसे से अपनी जीभ जलाते हैं। किसी और खाने में शायद यह ताकत नहीं है। ट्रफल में नहीं, एवोकाडो टोस्ट में तो बिल्कुल नहीं।
और सच कहें तो समोसे ने वह काम कर दिखाया है, जो कई सरकारी अभियानों के लिए भी आसान नहीं रहा। 'मेक इन इंडिया' अपनी जगह है, लेकिन 'ईट इन इंडिया' भी कम नहीं। आज अमेरिका के ओहायो में बैठा व्यक्ति भले ही बिहार को नक्शे पर न खोज पाए, लेकिन वह समोसे को जरूर पहचानता है। इसलिए आज वर्ल्ड समोसा डे पर देशभक्ति का सही तरीका यही है कि डिकंस्ट्रक्टेड, एयर-फ्राइड, क्विनोआ वाले या ग्लूटेन-फ्री समोसे के पीछे न भागें। किसी नजदीकी हलवाई की दुकान पर जाएं, जहां तेल आपके किसी रिश्ते से भी पुराना हो सकता है, पीली रोशनी के नीचे समोसे पसीना बहाते हुए आपका इंतजार कर रहे हों।
दो समोसे मांगिए। आपको तीन मिलेंगे, क्योंकि 'तीन का शगुन होता है।'
जीभ जलाइए। गर्व के साथ जलाइए।
जय हिंद। जय समोसा।
(लेखक डॉ. संदीप गोयल FoodFood TV में Chief Tasting Officer (CTO) हैं।)
बॉलीवुड एक्ट्रेस श्रुति हसन को उनकी तस्वीर, पहचान और व्यक्तित्व के बिना अनुमति इस्तेमाल किए जाने के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
बॉलीवुड एक्ट्रेस श्रुति हसन को उनकी तस्वीर, पहचान और व्यक्तित्व के बिना अनुमति इस्तेमाल किए जाने के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने AI से बनाए गए Deepfake और दूसरे डिजिटल कंटेंट में श्रुति हसन की Image, Likeness और Persona के अनधिकृत इस्तेमाल के खिलाफ अंतरिम सुरक्षा दी है।
जस्टिस माधव जामदार ने श्रुति हसन की याचिका पर यह अंतरिम आदेश दिया। एक्ट्रेस ने अपनी Personality Rights और Publicity Rights की सुरक्षा की मांग की थी। उनकी याचिका में AI-generated Deepfakes, बदले हुए वीडियो, बिना अनुमति किए गए Commercial Endorsements और उनकी पहचान का इस्तेमाल कर बनाए गए Merchandise को लेकर चिंता जताई गई थी।
कोर्ट ने कहा कि इस तरह के कंटेंट का लगातार ऑनलाइन प्रसार एक्ट्रेस की गुडविल, रेप्युटेशन और कमर्शियल इंट्रेस्ट को लंबे समय तक नुकसान पहुंचा सकता है। कोर्ट ने यह भी माना कि इंटरनेट पर एक बार कोई डिजिटल कंटेंट उपलब्ध हो जाने के बाद उसे तेजी से कॉपी और शेयर किया जा सकता है। ऐसे में केवल आर्थिक मुआवजा देना हुए नुकसान की भरपाई के लिए पर्याप्त नहीं हो सकता।
जस्टिस माधव जामदार ने यह भी कहा कि कोर्ट के सामने मौजूद सामग्री से प्रथम दृष्टया श्रुति हसन के Personality Rights, Publicity Rights और Moral Rights के उल्लंघन के संकेत मिलते हैं। कोर्ट के आदेश में संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) और अनुच्छेद 21 के तहत मिलने वाली सुरक्षा का भी उल्लेख किया गया। इसमें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ-साथ निजता और सम्मान के साथ जीवन जीने के अधिकार को भी शामिल किया गया है। इसके बाद कोर्ट ने श्रुति हसन की याचिका में बताए गए आपत्तिजनक डिजिटल कंटेंट को हटाने का निर्देश दिया।
श्रुति हसन ने पिछले महीने कई संस्थाओं और लोगों के खिलाफ यह मुकदमा दायर किया था। आरोप था कि इन संस्थाओं ने उनकी पहचान और व्यक्तित्व का इस्तेमाल ऐसे डिजिटल कंटेंट को बनाने, होस्ट करने या फैलाने के लिए किया, जिसके लिए उनकी अनुमति नहीं ली गई थी।
मामले की पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने उन कई प्रतिवादियों को अपना पक्ष रखने का मौका दिया था, जिन्होंने शुरुआत में जवाब नहीं दिया था। कोर्ट ने उन्हें अपनी ओर से पेश होने या जवाब दाखिल करने के लिए समय भी दिया।
इसके बावजूद कुछ प्रतिवादी कई हफ्तों का समय मिलने के बाद भी कोर्ट में पेश नहीं हुए और न ही उन्होंने अपना बचाव पेश किया। इसके बाद कोर्ट ने उनके खिलाफ Ad-Interim Injunction जारी करते हुए आपत्तिजनक कंटेंट के इस्तेमाल पर अंतरिम रोक लगा दी।
वहीं, कुछ ऐसे प्रतिवादी भी कोर्ट के सामने पेश हुए जिन्होंने यह भरोसा दिलाया कि उनके प्लेटफॉर्म पर मौजूद ऐसा कंटेंट, जो श्रुति हसन के अधिकारों का उल्लंघन करता है, उसे हटा दिया जाएगा। इसके लिए उन्होंने श्रुति हसन के कानूनी प्रतिनिधियों से स्पष्ट और पढ़े जा सकने वाले URLs उपलब्ध कराने को कहा।
यह मामला ऐसे समय में आया है जब AI की मदद से बनाए जा रहे डीपफेक वीडियो और डिजिटल कंटेंट को लेकर दुनियाभर में चिंता बढ़ रही है। खास तौर पर फिल्म और मीडिया इंडस्ट्री से जुड़े लोगों की तस्वीर, आवाज और पहचान का बिना अनुमति इस्तेमाल कर फर्जी वीडियो, विज्ञापन या दूसरे कमर्शियल कंटेंट बनाए जाने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं।
बॉम्बे हाईकोर्ट का यह अंतरिम आदेश इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह सेलिब्रिटीज की पहचान और Persona के डिजिटल इस्तेमाल से जुड़े अधिकारों को लेकर अदालत की गंभीरता को दिखाता है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लिंक्डइन पर साझा किए गए अपने विचारों में उन्होंने कहा कि पत्रकारिता जैसे चुनौतीपूर्ण पेशे में फिटनेस कोई विकल्प नहीं, बल्कि प्राथमिकता होनी चाहिए।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
'टाइम्स नेटवर्क' (Times Network) में मैनेजिंग एडिटर-डिजिटल (हिंदी एवं क्षेत्रीय भाषाएं) शमशेर सिंह ने पत्रकारों के बीच बढ़ते मानसिक तनाव और कार्य दबाव को लेकर फिटनेस के महत्व पर जोर दिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लिंक्डइन पर साझा किए गए अपने विचारों में उन्होंने कहा कि पत्रकारिता जैसे चुनौतीपूर्ण पेशे में फिटनेस कोई विकल्प नहीं, बल्कि प्राथमिकता होनी चाहिए।
शमशेर सिंह ने लिखा कि अधिकांश पत्रकार फिटनेस के लिए समय न होने का तर्क देते हैं, लेकिन वास्तविक समस्या समय की कमी नहीं बल्कि फिटनेस को प्राथमिकता न देना है। उनके अनुसार, स्वस्थ रहने के लिए घंटों जिम में बिताने या लंबी दूरी दौड़ने की जरूरत नहीं है। प्रतिदिन 30 से 45 मिनट का नियमित व्यायाम भी पर्याप्त हो सकता है। उन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की सिफारिशों का उल्लेख करते हुए कहा कि हर व्यक्ति को सप्ताह में 150 से 300 मिनट शारीरिक गतिविधि जरूर करनी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि पत्रकारों के लिए फिटनेस केवल शरीर को आकर्षक बनाने का माध्यम नहीं, बल्कि बेहतर स्टैमिना, फोकस, मानसिक मजबूती और दबाव में सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने का जरिया है। शमशेर सिंह ने पत्रकारों से अपील की कि जिस तरह वे ब्रेकिंग न्यूज, मीटिंग्स और डेडलाइंस के लिए समय निकालते हैं, उसी तरह अपने स्वास्थ्य के लिए भी समय तय करें। उन्होंने संदेश दिया कि डेडलाइन करियर बनाती है, लेकिन अनुशासन उस ऊर्जा को बनाए रखता है, जो लंबे समय तक सफलता के लिए जरूरी है।