लोकतंत्र में चौथे स्तंभ का मजबूत और निष्पक्ष होना जरूरी: डॉ. एसपी सिंह बघेल

नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) का दो दिवसीय राष्ट्रीय पत्रकार सम्मेलन और राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक आगरा में आयोजित

Last Modified:
Saturday, 06 June, 2026
NUJI Seminar


इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ जर्नलिस्ट्स से संबद्ध नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) का दो दिवसीय राष्ट्रीय पत्रकार सम्मेलन और राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक शनिवार को जेपी ऑडिटोरियम, खंदारी परिसर (भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय) में शुरू हुई। प्रथम दिन के सत्र की शुरुआत केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. एसपी सिंह बघेल ने की। सम्मेलन के मुख्य वक्ता उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय एवं विशिष्ट अतिथि एनयूजेआई के राष्ट्रीय महासचिव प्रदीप तिवारी थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता एनयूजेआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष रास बिहारी ने की।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ. एसपी बघेल ने कहा कि पत्रकारिता में काफी संभावनाएं हैं। लोकतंत्र के हित में चौथे स्तंभ का मजबूत एवं निष्पक्ष होना जरूरी है। हर फील्ड में परिवर्तन हो रहा है। मीडिया भी इससे अछूता नहीं है। परिवर्तन होना भी चाहिए तभी पत्रकारिता मजबूत बनी रह सकती है।

मुख्य वक्ता योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि आज हर जगह नैतिकता में कमी आई है। चाहे वह कार्यपालिका हो या अन्य स्तंभ। चौथे स्तंभ में भी गिरावट आई है। पत्रकारिता की निष्पक्षता पर भी सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में पत्रकारिता में निष्पक्षता एवं स्वच्छता जरूरी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि दो दिवसीय बैठक में पत्रकारिता में आ रही गिरावट एवं पत्रकार हितों के संबंध में गंभीर चिंतन होगा। चिंतन में सामने आई बातों के समाधान के लिए सरकार हर संभव मदद करेगी।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे रास बिहारी एवं विशिष्ट अतिथि प्रदीप तिवारी ने कहा कि वर्तमान समय में पत्रकारिता एवं पत्रकार संकट में हैं। पत्रकारों के सामने सुरक्षा, वेतन भत्ते और रोजगार का गंभीर संकट है। संगठन लगातार पत्रकार हितों के लिए संघर्ष कर रहा है। सरकार को पत्रकारों की मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

संगठन के राष्ट्रीय संगठन मंत्री प्रमोद गोस्वामी ने दो दिवसीय सम्मेलन की जानकारी देते हुए कहा कि लोकतंत्र में मीडिया चौथा स्तंभ है लेकिन पत्रकारों के लिए सुविधाएं नहीं हैं। पत्रकारों पर हमले हो रहे हैं। पेंशन नहीं मिल रही है। सरकार पत्रकार हितों पर ध्यान नहीं दे रही है।

सम्मेलन के प्रथम सत्र में पत्रकार समाज के विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। सम्मेलन में एनयूजेआई की 25 राज्य इकाइयों के 300 से ज्यादा सदस्य हिस्सा ले रहे हैं।

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‘वाडीलाल इंडस्ट्रीज़’ ने सैबल भट्टाचार्य को सौंपी बड़ी जिम्मेदारी

सैबल भट्टाचार्य (Saibal Bhattacharyya) ने ‘वाडीलाल इंडस्ट्रीज़’ में मुख्य परिचालन अधिकारी (COO) के रूप में जॉइन किया है। उनके पास बिक्री, मार्केटिंग और बिजनेस संचालन का 23 वर्षों का अनुभव है।

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Saturday, 06 June, 2026
Saibal Bhattacharyya

सैबल भट्टाचार्य (Saibal Bhattacharyya) ने ‘वाडीलाल इंडस्ट्रीज़’ (Vadilal Industries) में मुख्य परिचालन अधिकारी (COO) के रूप में नई जिम्मेदारी संभाल ली है। इससे पहले वह एक वर्ष से अधिक समय तक ‘नागर्रो’ (Nagarro) में Director-Strategic Initiatives के पद पर कार्यरत थे। वहां वह रणनीतिक पहलों और कारोबारी विकास से जुड़े कार्यों की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।

सैबल भट्टाचार्य ने इससे पहले ‘पेप्सिको’ (PepsiCo) में करीब पांच वर्षों तक Senior Director-Sales के रूप में काम किया। वह दिसंबर 2024 तक कंपनी के साथ जुड़े रहे और बिक्री रणनीति तथा बिजनेस ग्रोथ में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उन्हें बिक्री, मार्केटिंग, बिजनेस संचालन और लाभ-हानि प्रबंधन (P&L Management) में 23 वर्षों का वैश्विक अनुभव हासिल है। अपने करियर के दौरान उन्होंने विभिन्न बाजारों में टीमों का नेतृत्व करते हुए कई कारोबारी परियोजनाओं को आगे बढ़ाया है।

‘वाडीलाल इंडस्ट्रीज़’ (Vadilal Industries) में उनकी नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब कंपनी अपने कारोबार के विस्तार और परिचालन क्षमता को मजबूत करने पर फोकस कर रही है। इंडस्ट्री जानकारों का मानना है कि उनका व्यापक अनुभव कंपनी की विकास रणनीति को गति देने में मददगार साबित हो सकता है।

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भारतीय बैंकिंग सेक्टर की शानदार उड़ान : FY26 में बैंकों ने दर्ज की रिकॉर्ड कमाई

भारत का बैंकिंग सेक्टर कई मोर्चों पर मजबूती से आगे बढ़ रहा है। जहां निजी बैंक नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं, वहीं सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक भी अपनी पुरानी छवि बदलते हुए बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।

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Friday, 05 June, 2026
bankprofit

भारत के बैंकिंग सेक्टर ने वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में एक बार फिर शानदार प्रदर्शन किया है। मजबूत आर्थिक वृद्धि, बेहतर एसेट क्वालिटी और परिचालन दक्षता के दम पर निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने रिकॉर्ड मुनाफा दर्ज किया। रेडिफ्यूज़न की ICYMI रिपोर्ट "The Profit Kings: How India’s Banks Turned Trust into Treasure” में देश के सबसे अधिक लाभ कमाने वाले बैंकों का विश्लेषण किया गया है। रिपोर्ट बताती है कि बैंकिंग उद्योग में ग्राहकों का भरोसा आज भी सबसे मूल्यवान संपत्ति है, जिसने बैंकों को रिकॉर्ड कमाई तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है।

रिपोर्ट के अनुसार, देश के सबसे अधिक मुनाफा कमाने वाले बैंक के रूप में एचडीएफसी बैंक शीर्ष पर रहा। बैंक ने 20,351 करोड़ रुपये का तिमाही शुद्ध लाभ दर्ज किया। प्रतिस्पर्धियों से काफी आगे निकलते हुए एचडीएफसी बैंक ने साबित किया कि केवल आकार नहीं, बल्कि ग्राहकों का विश्वास और मजबूत प्रदर्शन ही नेतृत्व तय करता है।

दूसरे स्थान पर देश का सबसे बड़ा बैंक भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) रहा, जिसने 19,643 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया। महानगरों से लेकर गांवों तक फैले अपने विशाल नेटवर्क के जरिए एसबीआई लगातार ग्राहकों के भरोसे को मजबूत आय में बदल रहा है।

निजी क्षेत्र के एक अन्य प्रमुख बैंक आईसीआईसीआई बैंक ने 14,755 करोड़ रुपये का लाभ दर्ज किया। डिजिटल सेवाओं, आक्रामक रणनीति और तेज़ी से बढ़ते कारोबार के बल पर बैंक ने बाजार में अपनी मजबूत स्थिति कायम रखी है।

एक्सिस बैंक ने 7,603 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज कर शांत लेकिन निरंतर विकास की मिसाल पेश की। वहीं सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक ऑफ बड़ौदा ने 5,801 करोड़ रुपये का लाभ अर्जित कर यह साबित किया कि सरकारी बैंक आज भी प्रतिस्पर्धा में मजबूती से टिके हुए हैं।

पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) ने 5,592 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया। यह बैंक के बैलेंस शीट सुधार और भरोसे की वापसी का संकेत माना जा रहा है। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने भी 5,504 करोड़ रुपये का लाभ कमाकर शीर्ष लाभदायक बैंकों की सूची में अपनी जगह बनाई।

कोटक महिंद्रा बैंक ने 5,423 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया। बैंक ने एक बार फिर दिखाया कि फोकस, अनुशासन और चुनिंदा विस्तार की रणनीति बड़े आकार से अधिक प्रभावी हो सकती है। वहीं कैनरा बैंक ने 4,574 करोड़ रुपये का लाभ अर्जित कर अपनी स्थिर प्रगति जारी रखी।

रिपोर्ट में भारतीय बैंक, बैंक ऑफ इंडिया और बैंक ऑफ महाराष्ट्र का भी उल्लेख किया गया है। भारतीय बैंक ने 3,173 करोड़ रुपये, बैंक ऑफ इंडिया ने 3,088 करोड़ रुपये और बैंक ऑफ महाराष्ट्र ने 2,045 करोड़ रुपये का लाभ दर्ज किया। इन बैंकों ने साबित किया कि मुनाफा केवल बड़े बैंकों तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटे और मध्यम आकार के बैंक भी मजबूत प्रदर्शन कर सकते हैं।

रिपोर्ट का निष्कर्ष यह है कि भारत का बैंकिंग सेक्टर कई मोर्चों पर मजबूती से आगे बढ़ रहा है। जहां निजी बैंक नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं, वहीं सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक भी अपनी पुरानी छवि बदलते हुए बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। आज बैंक सिर्फ लोगों की बचत सुरक्षित नहीं रख रहे, बल्कि ग्राहकों के भरोसे को देश की सबसे लाभदायक परिसंपत्तियों में बदल रहे हैं। यही भरोसा भारतीय बैंकिंग उद्योग की सबसे बड़ी ताकत और सबसे बड़ा मुनाफे का स्रोत बन चुका है।

स्रोत: ट्रेंडलाइन (Trendlyne)

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आगरा में 6-7 जून को होगा ‘एनयूजेआई’ का राष्ट्रीय सम्मेलन

‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया)’ (NUJI) का राष्ट्रीय सम्मेलन 6 और 7 जून को आगरा में आयोजित होगा। सम्मेलन में 25 राज्यों के 200 से अधिक प्रतिनिधि और कई वरिष्ठ जनप्रतिनिधि शामिल होंगे।

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Thursday, 04 June, 2026
NUJI

‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया)’ (NUJI) का राष्ट्रीय सम्मेलन और राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक 6 और 7 जून 2026 को आगरा में आयोजित की जाएगी। कार्यक्रम का आयोजन जेपी ऑडिटोरियम, खंदारी परिसर स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में होगा।

सम्मेलन में ‘एनयूजेआई’ (NUJI) की 25 राज्य इकाइयों के 200 से अधिक प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष रास बिहारी (Ras Bihari) करेंगे।

‘एनयूजेआई’ (NUJI) के महासचिव प्रदीप तिवारी (Pradeep Tiwari) ने बताया कि सम्मेलन और राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में मीडिया जगत से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। साथ ही संगठन के आगामी चुनाव कार्यक्रम की घोषणा भी इसी सम्मेलन में की जाएगी।

सम्मेलन को उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य (Keshav Prasad Maurya), केंद्रीय राज्यमंत्री एसपी सिंह बघेल (SP Singh Baghel), उत्तर प्रदेश के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह (Dayashankar Singh), उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय (Yogendra Upadhyay), विधायक धर्मपाल सिंह (Dharampal Singh) और विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. आशु रानी (Prof. Ashu Rani) संबोधित करेंगी।

राष्ट्रीय संगठन मंत्री प्रमोद गोस्वामी (Pramod Goswami) के अनुसार, सम्मेलन का पहला सत्र 6 जून को दोपहर 3 बजे होगा, जिसमें एसपी सिंह बघेल और दयाशंकर सिंह मुख्य अतिथि रहेंगे। वहीं दूसरा सत्र 7 जून को सुबह 11 बजे आयोजित होगा, जिसमें उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।

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फिल्म निर्माता व CBFC के पूर्व चेयरमैन पहलाज निहलानी का निधन

हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के वरिष्ठ निर्माता और केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के पूर्व अध्यक्ष पहलाज निहलानी का 4 जून 2026 को निधन हो गया। वह 76 वर्ष के थे।

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Thursday, 04 June, 2026
Pahlaj Nihalani

हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के वरिष्ठ निर्माता और केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के पूर्व अध्यक्ष पहलाज निहलानी का 4 जून 2026 को निधन हो गया। वह 76 वर्ष के थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पहलाज निहलानी पिछले कुछ समय से लिवर सिरोसिस की बीमारी से जूझ रहे थे और उनका इलाज चल रहा था। बताया जा रहा है कि निधन से पहले वह करीब एक महीने तक अस्पताल में भर्ती भी रहे थे।

पहलाज निहलानी ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत वर्ष 1982 में निर्माता के तौर पर फिल्म ‘हाथकड़ी’ से की थी। इसके बाद उन्होंने 1985 में ‘आंधी-तूफान’ और 1986 में ‘इल्जाम’ जैसी फिल्मों का निर्माण किया। फिल्म ‘इल्जाम’ के जरिए अभिनेता गोविंदा ने बॉलीवुड में अपने अभिनय करियर की शुरुआत की थी।

फिल्म निर्माण के अलावा पहलाज निहलानी ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के तहत केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के अध्यक्ष के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई। इसके साथ ही उन्होंने एसोसिएशन ऑफ पिक्चर्स एंड टीवी प्रोग्राम प्रोड्यूसर्स का 29 वर्षों तक नेतृत्व किया और वर्ष 2009 में इस पद से इस्तीफा दिया था।

उनके निधन पर मौजूदा CBFC अध्यक्ष और प्रसार भारती के पूर्व CEO शशि शेखर वेम्पति ने शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “पूर्व CBFC चेयरमैन श्री पहलाज निहलानी के निधन पर पूरे CBFC परिवार की ओर से हार्दिक संवेदनाएं।”

पहलाज निहलानी का निधन भारतीय फिल्म उद्योग के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है। उन्होंने निर्माता और प्रशासक, दोनों भूमिकाओं में फिल्म जगत को महत्वपूर्ण योगदान दिया।

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डार्क पैटर्न पर CCPA का बड़ा एक्शन, PhysicsWallah और McAfee पर जुर्माना

ऑनलाइन ग्राहकों को गुमराह करने वाले 'डार्क पैटर्न' इस्तेमाल करने के आरोप में CCPA ने PhysicsWallah और McAfee Software India पर जुर्माना लगाया है।

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Thursday, 04 June, 2026
PW84751

केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने ऑनलाइन ग्राहकों को गुमराह करने वाले तथाकथित "डार्क पैटर्न" इस्तेमाल करने के मामले में एडटेक कंपनी PhysicsWallah और साइबर सुरक्षा कंपनी McAfee Software India पर जुर्माना लगाया है।

नियामकीय जांच के बाद CCPA ने PhysicsWallah पर 5 लाख रुपये और McAfee Software India पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। साथ ही दोनों कंपनियों को अपने ऐप और वेबसाइट से ऐसे सभी भ्रामक और ग्राहकों को प्रभावित करने वाले डिजाइन फीचर्स तुरंत हटाने का निर्देश दिया गया है।

यह कार्रवाई उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019, उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) नियम 2020 और डार्क पैटर्न की रोकथाम एवं नियमन संबंधी 2023 के दिशा-निर्देशों के तहत की गई है।

CCPA ने PhysicsWallah के प्लेटफॉर्म की स्वतः संज्ञान (Suo Motu) जांच शुरू की थी। जांच में तीन ऐसे मामले सामने आए, जो मुख्य रूप से कम उम्र के छात्रों को प्रभावित करने वाले पाए गए।

जांच में पता चला कि कोर्स खरीदने के दौरान PhysicsWallah अपने ग्राहकों की स्पष्ट अनुमति लिए बिना PW Foundation के लिए 10 रुपये का दान (Donation) पहले से ही जोड़ देता था। यदि कोई ग्राहक इस दान को हटाने की कोशिश करता था, तो स्क्रीन पर बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और शादी जैसे भावनात्मक संदेश दिखाए जाते थे, जिससे ग्राहक पर दान जारी रखने का मानसिक दबाव बनाया जाता था।

CCPA ने यह भी पाया कि कंपनी कई कोर्स को मुफ्त (Free) बताकर प्रचारित कर रही थी, लेकिन उन कोर्स तक पहुंचने से पहले छात्रों को अपना मोबाइल नंबर और ई-मेल आईडी जैसी महत्वपूर्ण व्यक्तिगत जानकारी देना अनिवार्य था।

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि अलग-अलग प्रोफाइल पर कोर्स की सामग्री समान थी। इससे यह साबित हुआ कि शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराने के लिए इतनी व्यक्तिगत जानकारी लेना जरूरी नहीं था और यह केवल डेटा जुटाने का तरीका था।

वहीं McAfee Software India के मामले में CCPA ने उसके सब्सक्रिप्शन रिन्यूअल सिस्टम की जांच की और उसमें उपभोक्ताओं को प्रभावित करने वाले डिजाइन तत्व पाए।

जांच में पता चला कि सब्सक्रिप्शन रिन्यू करने के दौरान ग्राहकों को कोई निष्पक्ष विकल्प नहीं दिया जा रहा था। स्क्रीन पर सिर्फ दो विकल्प दिखाई देते थे- "Renew Now" और "Accept Risk"।

CCPA का कहना है कि इस डिजाइन में रिन्यूअल के विकल्प को प्रमुखता से दिखाया गया था, जबकि रिन्यूअल न करने को सीधे साइबर सुरक्षा जोखिम के रूप में पेश किया गया। नियामक के अनुसार, McAfee यह साबित नहीं कर सका कि रिन्यूअल न करने पर ग्राहक को तत्काल साइबर सुरक्षा खतरा जरूर होगा।

CCPA की मुख्य आयुक्त निधि खरे और आयुक्त अनुपम मिश्रा ने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपभोक्ता की सहमति हमेशा स्पष्ट, स्वैच्छिक और किसी भी तरह के डिजाइन-आधारित दबाव से मुक्त होनी चाहिए।

प्राधिकरण ने कहा कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ग्राहकों को भ्रमित करने या मनोवैज्ञानिक दबाव डालकर निर्णय लेने के लिए मजबूर नहीं कर सकते।

यह कार्रवाई भारत में 2023 के डार्क पैटर्न दिशानिर्देशों को लागू करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। इन दिशानिर्देशों के तहत 13 तरह की भ्रामक और उपभोक्ताओं को प्रभावित करने वाली डिजिटल तकनीकों को अनुचित व्यापारिक व्यवहार (Unfair Trade Practice) घोषित किया गया है।

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न्यूजरूम से विधानसभा तक: शलभ मणि त्रिपाठी के सफर की कहानी

हर सार्वजनिक जीवन से जुड़े व्यक्ति की एक ऐसी यात्रा होती है, जो उसकी पहचान बन जाती है। शलभ मणि त्रिपाठी की यात्रा भी ऐसी ही है।

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Wednesday, 03 June, 2026
ShalabhManiTripathi12

हर सार्वजनिक जीवन से जुड़े व्यक्ति की एक ऐसी यात्रा होती है, जो उसकी पहचान बन जाती है। शलभ मणि त्रिपाठी की यात्रा भी ऐसी ही है। यह सफर सत्ता के गलियारों से नहीं, बल्कि हिंदी पत्रकारिता के व्यस्त न्यूजरूम से शुरू हुआ था, जहां हर दिन डेडलाइन का दबाव होता था, खबरें तेजी से तैयार की जाती थीं और देश की नब्ज अक्सर सुर्खियां बनने से पहले ही महसूस कर ली जाती थी।

1 दिसंबर 1977 को उत्तर प्रदेश के देवरिया में जन्मे शलभ मणि त्रिपाठी एक मध्यमवर्गीय परिवार में पले-बढ़े। उनके पिता सरकारी स्कूल में शिक्षक थे। ऐसे माहौल में उनका पालन-पोषण हुआ, जहां शिक्षा, अनुशासन और सार्वजनिक सेवा को बहुत महत्व दिया जाता था। पढ़ाई में उनका विषय गणित था, लेकिन आगे चलकर कहानी कहने और लोगों तक उनकी बात पहुंचाने का हुनर ही उनकी असली पहचान बना।

साल 1998 में उन्होंने पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा। इसके साथ ही शुरू हुआ लगभग दो दशक लंबा करियर, जिसने उन्हें जिलों, कस्बों और राजनीतिक मैदानों तक पहुंचाया। इस दौरान उन्होंने देश को बदलते हुए बहुत करीब से देखा। चाहे स्थानीय मुद्दों की रिपोर्टिंग हो या राष्ट्रीय घटनाक्रम की कवरेज, उन्होंने आम लोगों की उम्मीदों और चिंताओं को समझने की एक अलग पहचान बनाई। उनके लिए पत्रकारिता सिर्फ एक पेशा नहीं थी, बल्कि तेजी से बदलते भारत की हकीकत को समझने का एक माध्यम थी।

दैनिक जागरण, अमर उजाला और कई टीवी न्यूज नेटवर्क जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उनका सफर आधुनिक भारत के कई बड़े राजनीतिक और सामाजिक बदलावों का गवाह बना। एक पत्रकार के रूप में उन्होंने सवाल पूछना, जवाबदेही तय करना और स्पष्ट तरीके से अपनी बात रखना सीखा। यही अनुभव आगे चलकर उनके सार्वजनिक जीवन की सोच और कार्यशैली का आधार बने। फिर उनकी जिंदगी में एक बड़ा मोड़ आया।

साल 2016 में राजनीति, प्रशासन और जननीतियों पर वर्षों तक रिपोर्टिंग करने के बाद शलभ मणि त्रिपाठी ने खुद राजनीति में उतरने का फैसला किया। यह ऐसा बदलाव था, जिसे बहुत कम लोग सफलतापूर्वक कर पाते हैं। सत्ता को बाहर से देखने और फिर खुद जिम्मेदारी संभालने के लिए अलग तरह के विश्वास और संकल्प की जरूरत होती है। लेकिन यह फैसला उन मुद्दों पर सीधे काम करने की उनकी इच्छा को दर्शाता था, जिन पर वह वर्षों तक रिपोर्टिंग करते रहे थे।

उनकी इस यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण अध्याय साल 2022 में सामने आया, जब वे देवरिया से उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्य चुने गए। कई लोगों के लिए यह उस लंबे करियर की उपलब्धि थी, जो जनता से जुड़ाव और जमीनी समझ पर आधारित था। वहीं शलभ मणि त्रिपाठी के लिए यह उन लोगों के प्रति एक नई जिम्मेदारी की शुरुआत थी, जिनकी कहानियां वह कभी पत्रकार के रूप में दुनिया तक पहुंचाते थे।

उनकी कहानी को खास बनाती है सिर्फ उनके पद नहीं, बल्कि वह बदलाव जो उनकी यात्रा में दिखाई देता है। उन्होंने सार्वजनिक जीवन को अलग-अलग नजरियों से देखा है। एक तरफ वह पत्रकार रहे, जिन्होंने बदलावों को दर्ज किया और दूसरी तरफ विधायक बने, जो उन बदलावों का हिस्सा हैं।

आज जब शलभ मणि त्रिपाठी अपना जन्मदिन मना रहे हैं, तो उनका सफर यह याद दिलाता है कि करियर हमेशा सीधी रेखा में नहीं चलता। कई बार जीवन के एक अध्याय में सीखे गए कौशल ही अगले और बड़े उद्देश्य की नींव बनते हैं। न्यूजरूम की चर्चाओं से लेकर विधानसभा की बहसों तक, उनकी कहानी खुद को नए रूप में ढालने, लगातार प्रयास करते रहने और सार्वजनिक जीवन से गहरे जुड़ाव की कहानी है।

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'McCann' से अलग हुए संबित मोहंती

संबित मोहंती (Sambit Mohanty) ने ‘मैककैन’ (McCann) छोड़ दिया है। वह कंपनी के बेंगलुरु ऑफिस में बिजनेस लीडर और क्रिएटिव हेड की दोहरी जिम्मेदारी संभाल रहे थे।

Last Modified:
Wednesday, 03 June, 2026
sambit

संबित मोहंती (Sambit Mohanty) ने ‘मैककैन’ (McCann) छोड़ दिया है। मई 2025 में उन्हें ‘मैककैन बेंगलुरु’ (McCann Bangalore) में विस्तारित भूमिका दी गई थी। इसके तहत वह बेंगलुरु ऑफिस में बिजनेस लीडर और क्रिएटिव हेड की दोहरी जिम्मेदारी संभाल रहे थे।

संबित मोहंती को विज्ञापन इंडस्ट्री में दो दशक से ज्यादा का अनुभव है। वह अपनी मजबूत ब्रांड की समझ और कम्युनिकेशन स्किल्स के लिए जाने जाते हैं। अपने करियर के दौरान उन्होंने कई बड़े ब्रांड्स और कैम्पेन पर काम किया है। इंडस्ट्री में उन्हें क्रिएटिव और बिजनेस दोनों क्षेत्रों में मजबूत पकड़ रखने वाले प्रोफेशनल के तौर पर देखा जाता है। हालांकि फिलहाल उन्होंने अपने अगले कदम का खुलासा नहीं किया है।

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हैप्पी बर्थडे अनिल सिंघवी: बिजनेस पत्रकारिता में विश्वसनीयता और विश्लेषण का पर्याय हैं आप

बिजनेस न्यूज चैनल ‘जी बिजनेस’ (Zee Business) के मैनेजिंग एडिटर और देश के प्रमुख शेयर बाजार विश्लेषकों में से एक अनिल सिंघवी का आज जन्मदिन है।

Last Modified:
Tuesday, 02 June, 2026
Anil Singhvi

बिजनेस न्यूज चैनल ‘जी बिजनेस’ (Zee Business) के मैनेजिंग एडिटर और देश के प्रमुख शेयर बाजार विश्लेषकों में से एक अनिल सिंघवी का आज जन्मदिन है। अपनी गहन विश्लेषण क्षमता, जटिल बाजार अवधारणाओं को सरल भाषा में समझाने की कला और निवेशकों को सटीक सलाह देने के लिए मशहूर अनिल सिंघवी ने न केवल बिजनेस पत्रकारिता में अपनी पहचान बनाई, बल्कि लाखों निवेशकों के दिलों में भी खास जगह बनाई है।

राजस्थान से ताल्लुक रखने वाले अनिल सिंघवी ने चार्टर्ड अकाउंटेंसी और कंपनी सेक्रेटरी की पढ़ाई पूरी की और शेयर बाजार में अपने करियर की शुरुआत की। पत्रकारिता में उनका प्रवेश संयोगवश हुआ, जब 35 साल की उम्र में उन्हें सीएनबीसी आवाज के लिए चुना गया।

अपने जुनून और मेहनत से उन्होंने बिजनेस पत्रकारिता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनका लोकप्रिय शो DNA ऑफ मार्केट आज लाखों निवेशकों की सुबह का अभिन्न हिस्सा है, जो उनकी सादगी और स्पष्ट संवाद शैली को दर्शाता है।

अनिल सिंघवी ने साबित किया है कि शेयर बाजार केवल आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि धैर्य, समझदारी और भावनाओं का संगम है। उनकी सलाह ने अनगिनत निवेशकों को वित्तीय स्वतंत्रता की राह पर आगे बढ़ाया है। जी बिजनेस के अनुसार, आज अपने जन्मदिन पर भी उन्होंने लोगों को निवेश करने के तमाम टिप्स दिए हैं, जिससे उनकी निवेशकों के प्रति प्रतिबद्धता और समर्पण झलकता है।

सोशल मीडिया पर आज सुबह से ही उन्हें शुभकामनाओं का तांता लगा हुआ है। सहयोगी, इंडस्ट्री के साथी और लाखों प्रशंसक उन्हें ‘मार्केट गुरु’, ‘निवेशकों का साथी’ और ‘आर्थिक शिक्षक’ जैसे शब्दों से सम्मानित कर रहे हैं। उनकी सहजता और सटीक विश्लेषण ने उन्हें हर वर्ग के दर्शकों का चहेता बनाया है।

वित्तीय जागरूकता के दौर में अनिल सिंघवी का नाम उस बदलाव का प्रतीक है, जिसने बिजनेस पत्रकारिता को क्लासरूम से निकालकर हर घर तक पहुंचाया। हम उन्हें उनके जन्मदिन पर हार्दिक शुभकामनाएं देते हैं और कामना करते हैं कि वे यूं ही निवेशकों का मार्गदर्शन करते रहें और देश की आर्थिक समझ को नई ऊंचाइयों तक ले जाएं।

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'ज़ी एंटरटेनमेंट' ने राज कुमार अग्रवाल को सौंपी बड़ी जिम्मेदारी

राज कुमार अग्रवाल ने 'ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड' (ZEEL) जॉइन किया है। उन्हें 'ज़ी टीवी' (Zee TV), 'ज़ी अनमोल' (Zee Anmol) और '&TV' के मार्केटिंग प्रमुख की जिम्मेदारी दी गई है।

Last Modified:
Tuesday, 02 June, 2026
rajkumar

राज कुमार अग्रवाल (Rahj Kumar Agarwal) ने 'ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड' (Zee Entertainment Enterprises Limited) जॉइन किया है। उन्हें 'ज़ी टीवी' (Zee TV), 'ज़ी अनमोल' (Zee Anmol) और '&TV' के लिए सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और मार्केटिंग प्रमुख की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

उन्होंने अपने LinkedIn पोस्ट के जरिए इस नई भूमिका की जानकारी साझा की। राज कुमार अग्रवाल ने लिखा, “नई भूमिका, नई ऊर्जा और नई शुरुआत। यह बताते हुए खुशी हो रही है कि मैंने 'ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड' (ZEEL) में नई जिम्मेदारी संभाली है।”

उन्होंने अपने करियर के दौरान साथ देने वाले सहयोगियों और टीम का भी आभार जताया। साथ ही कहा कि वह आने वाले समय में नई चीजें सीखने, टीम के साथ काम करने और कंपनी की तरक्की में योगदान देने को लेकर उत्साहित हैं। राज कुमार अग्रवाल की नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब 'ज़ी एंटरटेनमेंट' (ZEEL) अपने टेलीविजन नेटवर्क में content और audience engagement strategy को और मजबूत करने पर फोकस कर रहा है।

इससे पहले वह करीब सात वर्षों तक 'जियोस्टार' (JioStar) के साथ जुड़े रहे। वहां वह आखिरी बार सीनियर डायरेक्टर - मार्केटिंग, 'कलर्स' (Colors) की भूमिका निभा रहे थे।

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सकारात्मक खबरों को जगह दे मीडिया, वरना युवा ‘कॉकरोच’ के पीछे चल पड़ेंगे: उपराष्ट्रपति

उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा है कि मीडिया को समाज में हो रहे अच्छे और सकारात्मक कामों को ज्यादा प्रमुखता से दिखाना चाहिए।

Last Modified:
Monday, 01 June, 2026
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उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा है कि मीडिया को समाज में हो रहे अच्छे और सकारात्मक कामों को ज्यादा प्रमुखता से दिखाना चाहिए। उनका मानना है कि अगर सकारात्मक गतिविधियों की पर्याप्त रिपोर्टिंग नहीं होगी, तो युवाओं तक सही जानकारी नहीं पहुंचेगी और वे गलत दिशा में जा सकते हैं।

रविवार को मलयालम दैनिक ‘दीपिका’ के 140वें स्थापना दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए राधाकृष्णन ने कहा कि रचनात्मक और जिम्मेदार पत्रकारिता समाज को सही दिशा देने और लोगों का भरोसा मजबूत करने के लिए बेहद जरूरी है।

उन्होंने कहा, “सकारात्मक गतिविधियों की अच्छी रिपोर्टिंग होनी चाहिए। तभी युवाओं को सही जानकारी मिलेगी। अन्यथा वे रुचि खो देंगे और ‘कॉकरोच’ का अनुसरण करने लगेंगे।”

उपराष्ट्रपति का यह बयान हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर चर्चा में आए व्यंग्यात्मक प्लेटफॉर्म ‘कॉकरोच जनता पार्टी (CJP)’ की ओर इशारा माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि कुछ चीजें अचानक चर्चा में आ जाती हैं, लेकिन उनका प्रभाव लंबे समय तक नहीं रहता। अगर कोई काम वास्तव में अच्छा है तो लोग एक सप्ताह, दस दिन या एक महीने बाद भी उसकी सराहना करेंगे।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य तभी पूरा हो सकता है, जब समाज का हर वर्ग इसमें योगदान दे। उन्होंने कहा कि देश का विकास किसी एक व्यक्ति, पार्टी या सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है।

राधाकृष्णन ने कहा कि पत्रकारिता का धर्म है कि वह अच्छे कामों की सराहना करे और गलत कामों की निडर होकर आलोचना भी करे। हालांकि, समाचारों की रिपोर्टिंग तथ्यात्मक और निष्पक्ष होनी चाहिए, जबकि राय और विचारों के लिए संपादकीय पृष्ठ उचित स्थान है।

उन्होंने मीडिया के सामने बढ़ती चुनौतियों का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक आज गलत सूचनाएं, जनता का घटता भरोसा, व्यावसायिक दबाव और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का तेजी से बढ़ता प्रभाव मीडिया के लिए बड़ी चुनौतियां बन चुके हैं।

उपराष्ट्रपति ने चिंता जताई कि आज लोग किसी मुद्दे को गहराई से समझने के बजाय सिर्फ हेडलाइन और कैप्शन देखकर ही राय बना लेते हैं। उन्होंने कहा कि मीडिया को समाज में करुणा, वैज्ञानिक सोच, सामुदायिक सेवा, पर्यावरण संरक्षण और मानवीय उपलब्धियों जैसी सकारात्मक कहानियों को आगे लाना चाहिए, ताकि पत्रकारिता सामाजिक बदलाव का प्रभावी माध्यम बन सके।

इस मौके पर उन्होंने ‘दीपिका’ अखबार की भी सराहना की और कहा कि इसने सामाजिक सौहार्द, शिक्षा के प्रसार, सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण और सकारात्मक जनचर्चा को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

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