नए जमाने की नई विसंगतियों का आईना है वरिष्ठ पत्रकार पीयूष पांडे का ये व्यंग्य संग्रह

पिछले पांच-एक साल में एक नई बात हुई है। अपन लोग बात-बात पर आहत होने लगे हैं। आहत हैं इसलिए आक्रामक भी हो गए हैं

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 03 February, 2020
Last Modified:
Monday, 03 February, 2020
PIYUSH PANDEY


प्रभात रंजन, वरिष्ठ लेखक।। पिछले पांच-एक साल में एक नई बात हुई है। अपन लोग बात-बात पर आहत होने लगे हैं। आहत हैं इसलिए आक्रामक भी हो गए हैं। इस चक्क...
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