सोशल मीडिया कंपनी Snap के चीफ बिजनेस ऑफिसर अजीत मोहन ने करीब चार साल बाद अपने पद से हटने का फैसला किया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
सोशल मीडिया कंपनी Snap के चीफ बिजनेस ऑफिसर अजीत मोहन ने करीब चार साल बाद अपने पद से हटने का फैसला किया है। मोहन ने LinkedIn पोस्ट के जरिए अपने जाने की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह फैसला पूरी तरह व्यक्तिगत कारणों से लिया गया है और वह अब अपने परिवार के पास सिंगापुर लौटना चाहते हैं।
अजीत मोहन ने Snap में अपने चार साल के कार्यकाल के दौरान कंपनी के विज्ञापन कारोबार को दोबारा मजबूत करने पर खास तौर पर काम किया। उनका फोकस Snap के एड प्लेटफॉर्म को परफॉर्मेंस और डायरेक्ट-रिस्पॉन्स विज्ञापन के लिहाज से मजबूत बनाने और विज्ञापनदाताओं को बेहतर और मापने योग्य नतीजे देने पर रहा।
Snap के एड बिजनेस को फिर से खड़ा करने पर रहा फोकस
मोहन ने अपनी पोस्ट में अपने कार्यकाल को याद करते हुए कहा कि जब उन्होंने Snap जॉइन किया था, तब कंपनी के विज्ञापन कारोबार को नए सिरे से खड़ा करने का लक्ष्य रखा गया था।
उनके मुताबिक, इसके तहत Snap के एड प्लेटफॉर्म को परफॉर्मेंस के लिए दोबारा तैयार किया गया और डायरेक्ट-रिस्पॉन्स ऐडवर्टाइजिंग को बिजनेस का प्रमुख आधार बनाया गया। साथ ही विज्ञापनदाताओं को यह दिखाने पर जोर दिया गया कि करीब एक अरब यूजर्स तक पहुंच रखने वाला प्लेटफॉर्म उनके लिए वास्तविक और मापने योग्य नतीजे दे सकता है।
मोहन ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में कंपनी ने इस दिशा में काफी बड़ी प्रगति की है।
परिवार से दूर रहने के कारण लिया फैसला
अजीत मोहन ने साफ किया कि कंपनी छोड़ने की मुख्य वजह व्यक्तिगत है। उनका परिवार सिंगापुर में रहता है, जबकि उनके काम की वजह से उन्हें लंबे समय से अमेरिका और सिंगापुर के बीच लगातार यात्रा करनी पड़ रही थी। उन्होंने बताया कि पिछले दो साल में उन्हें न्यूयॉर्क, लॉस एंजिल्स और सिंगापुर के बीच लगातार आना-जाना पड़ा। इसके अलावा लंदन, दुबई और बेंगलुरु की यात्राएं भी करनी पड़ीं।
अब वह अपने परिवार के साथ ज्यादा समय बिताना चाहते हैं। मोहन ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि अब वह ट्रांस-पैसिफिक फ्लाइट्स में समय बिताने के बजाय अपने बच्चों के साथ ज्यादा वक्त बिताना चाहते हैं।
Snap के भविष्य को लेकर भरोसा
पद छोड़ने के बावजूद मोहन ने Snap और उसके भविष्य को लेकर भरोसा जताया है। उन्होंने कहा कि वह कंपनी से पूरी तरह सकारात्मक भावना के साथ जा रहे हैं।
उनके मुताबिक, Snap के CEO Evan Spiegel और नेतृत्व टीम ऐसी कंपनी बनाने की दिशा में काम कर रही है, जहां मानवीय जुड़ाव और प्रामाणिकता को केंद्र में रखा गया है और कंप्यूटिंग के भविष्य को लेकर बड़ा दांव लगाया जा रहा है। मोहन ने यह भी कहा कि वह आगे भी Snap को एक प्रशंसक और शेयरधारक के तौर पर सपोर्ट करते रहेंगे।
Ronan Harris संभालेंगे कमर्शियल बिजनेस
अजीत मोहन ने यह भी बताया कि उनके सहयोगी और दोस्त रोनन हैरिस अब Snap के चीफ कमर्शियल ऑफिसर (CCO) की जिम्मेदारी संभालेंगे। मोहन ने हैरिस के साथ पिछले चार वर्षों के अपने कामकाजी रिश्ते का जिक्र करते हुए कहा कि वह कंपनी के कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए उनके जिम्मेदारी संभालने से बेहद खुश हैं।
2022 में Snap से जुड़े थे अजीत मोहन
अजीत मोहन ने साल 2022 में Snap जॉइन किया था। उन्होंने शुरुआत में APAC के प्रेजिडेंट तौर पर कंपनी की जिम्मेदारी संभाली थी। इसके बाद उनकी भूमिका बढ़ाकर उन्हें कंपनी के व्यापक ग्लोबल बिजनेस की जिम्मेदारी दी गई। Snap से पहले मोहन Meta India के वाइस प्रेजिडेंट और मैनेजिंग डायरेक्टर रह चुके हैं। Meta में उन्होंने भारत में कंपनी के कारोबार का नेतृत्व किया था।
इसके अलावा उन्होंने Star India में भी अहम नेतृत्व भूमिकाओं में काम किया है। अपने करियर के शुरुआती दौर में वह McKinsey & Company से भी जुड़े रहे।
अभी किसी नई कंपनी में जाने का ऐलान नहीं
अजीत मोहन ने फिलहाल किसी दूसरी कंपनी में नई जिम्मेदारी संभालने का ऐलान नहीं किया है। उन्होंने संकेत दिया है कि वह अगला कदम तय करने से पहले कुछ समय ब्रेक लेना चाहते हैं। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि शायद अब वह 15 साल पुरानी अपनी किताब लिखने की योजना पर काम कर सकते हैं। इसके अलावा फिल्म बनाने या AI को बेहतर तरीके से समझने की कोशिश करने का भी जिक्र किया।फिलहाल उनका इरादा कुछ समय आराम करने और परिवार के साथ वक्त बिताने का है।
OpenAI के साथ साझेदारी की घोषणा के कुछ ही दिनों बाद टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप की पैरेंट कंपनी Bennett, Coleman & Co. Ltd. (BCCL) में बड़े स्तर पर पुनर्गठन की चर्चा तेज हो गई है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
OpenAI के साथ साझेदारी की घोषणा के कुछ ही दिनों बाद टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप की पैरेंट कंपनी Bennett, Coleman & Co. Ltd. (BCCL) में बड़े स्तर पर पुनर्गठन की चर्चा तेज हो गई है। मामले से जुड़े लोगों के मुताबिक, कंपनी अपने अलग-अलग पब्लिकेशन और विभागों में एम्प्लॉयीज की संख्या में करीब 5 से 10 फीसदी तक कमी कर सकती है।
हालांकि, BCCL ने किसी तय संख्या में एम्प्लॉयीज की कटौती की बात से इनकार किया है। कंपनी का कहना है कि वह अपनी कार्यप्रणाली, भूमिकाओं और ऑपरेशनल स्ट्रक्चर की लगातार समीक्षा करती रहती है।
किन पदों की हो रही है समीक्षा?
मामले से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, हाल ही में विभाग प्रमुखों ने टीम लीडर्स के साथ बैठकें की हैं। इन बैठकों में उनसे ऐसे पदों और जिम्मेदारियों की सूची तैयार करने को कहा गया है, जो अब पहले की तरह प्रासंगिक नहीं रह गए हैं।सूत्रों का यह भी कहना है कि कुछ ऐसे कामों की पहचान करने को कहा गया है, जिन्हें भविष्य में AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से किया जा सकता है।
एक संपादकीय एम्प्लॉयी के मुताबिक, अभी तक कंपनी की ओर से एम्प्लॉयीज की छंटनी को लेकर कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन संगठन के भीतर इसको लेकर चर्चा जरूर है।
कुछ एम्प्लॉयीज को कॉन्ट्रैक्ट पर लाने की भी चर्चा
इंडस्ट्री से जुड़े सूत्रों के अनुसार, संभावित बदलाव सिर्फ एम्प्लॉयीज की संख्या कम करने तक सीमित नहीं हो सकते। कुछ एम्प्लॉयीज को परमानेंट रोल से कॉन्ट्रैक्चुअल रोल में शिफ्ट किए जाने की भी चर्चा है। बताया जा रहा है कि ऐसी स्थिति में कुछ एम्प्लॉयीज की सैलरी में भी बड़ी कमी आ सकती है।
हालांकि, इस बारे में भी BCCL की ओर से कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है।
Response में पहले ही हो चुका है पुनर्गठन
BCCL में यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब कंपनी के Response बिजनेस में पहले ही पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। एक्सचेंज4मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले सप्ताह Response में 40 से ज्यादा एम्प्लॉयीज को कंपनी से बाहर होने के लिए कहा गया था। अब कंपनी के दूसरे पब्लिकेशन और विभागों में भी भूमिकाओं और कामकाज की समीक्षा की खबर सामने आई है।
पब्लिकेशन और एडिशन की पेजिनेशन में भी बदलाव संभव
एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, समूह के कुछ पब्लिकेशन और एडिशन में पेजिनेशन कम किया जा सकता है। इसके साथ ही उनकी एडिटोरियल स्ट्रैटेजी में भी बदलाव किए जाने की संभावना है। इसका मकसद बाजार में अपनी स्थिति मजबूत करना, ऑडियंस को बेहतर तरीके से जोड़ना और ग्रोथ को बढ़ावा देना बताया जा रहा है।
BCCL में करीब 7,000 एम्प्लॉयीज
BCCL भारत की बड़ी मीडिया कंपनियों में शामिल है। इसके प्रमुख ब्रैंड्स में The Times of India और The Economic Times शामिल हैं। कंपनी के देशभर में करीब 7,000 एम्प्लॉयी होने की बात कही गई है। ऐसे में अगर 5 से 10 फीसदी एम्प्लॉयीज की कटौती होती है, तो इसका असर बड़ी संख्या में एम्प्लॉयीज पर पड़ सकता है। हालांकि, फिलहाल यह आंकड़ा कंपनी की ओर से घोषित या पुष्टि किया हुआ नहीं है।
AI और बदलते मीडिया बिजनेस का दबाव
मीडिया इंडस्ट्री इस समय तेजी से बदल रहे कंज्यूमर बिहेवियर, पारंपरिक रेवेन्यू मॉडल पर दबाव और AI के बढ़ते इस्तेमाल जैसी चुनौतियों से गुजर रही है।
पाठकों का डिजिटल प्लेटफॉर्म की ओर बढ़ता रुझान, न्यूज कंजम्पशन के बदलते तरीके और विज्ञापन बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने पारंपरिक मीडिया कंपनियों को अपने बिजनेस मॉडल और ऑपरेशनल स्ट्रक्चर की समीक्षा करने के लिए मजबूर किया है।
BCCL में सामने आया ताजा घटनाक्रम भी इसी बड़े बदलाव के संदर्भ में देखा जा रहा है।
BCCL ने छंटनी के तय लक्ष्य से किया इनकार
एम्प्लॉयीज की संभावित छंटनी को लेकर BCCL के एक वरिष्ठ अधिकारी ने एक्सचेंज4मीडिया को बताया कि 5-10 फीसदी एम्प्लॉयीज की कटौती का कोई तय लक्ष्य नहीं है।
कंपनी के मुताबिक, एक आधुनिक और प्रगतिशील संगठन के तौर पर BCCL अपनी प्रक्रियाओं, भूमिकाओं और कामकाज के ढांचे की लगातार समीक्षा करती है। इसका उद्देश्य ज्यादा बेहतर तरीके से काम करना और AI समेत नई तकनीकों को अपनाकर कंपनी को अधिक चुस्त, प्रतिस्पर्धी और भविष्य के लिए तैयार रखना है।
कंपनी ने यह भी कहा कि जैसे-जैसे जिम्मेदारियां बदलती हैं, उसका फोकस रोल को नए तरीके से डिजाइन करने, एम्प्लॉयीज की स्किल बढ़ाने और जहां संभव हो वहां उन्हें दूसरी भूमिकाओं में शिफ्ट करने पर रहता है।
एडिशन को लेकर BCCL ने कहा कि अलग-अलग एडिशन समय-समय पर ऑडियंस की जरूरतों और बिजनेस परफॉर्मेंस को देखते हुए अपनी पेजिनेशन और कंटेंट मिक्स की समीक्षा करते हैं।
BCCL में पहले से चल रहा है बिजनेस रिऑर्गनाइजेशन
BCCL के मौजूदा वर्कफोर्स रिव्यू को कंपनी के व्यापक बिजनेस रिऑर्गनाइजेशन के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। फरवरी में भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने BCCL के कुछ बिजनेस के आंतरिक पुनर्गठन को मंजूरी दी थी। इसके तहत BCCL के कुछ EIBME बिजनेस को Times Horizon Private Limited (THPL) में डिमर्ज किया जाना है।
हालांकि, मौजूदा एम्प्लॉयीज और भूमिकाओं की समीक्षा को इस कानूनी पुनर्गठन से अलग प्रक्रिया माना जा रहा है। इसके बावजूद इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का मानना है कि दोनों घटनाक्रम BCCL में बिजनेस वर्टिकल्स को ज्यादा स्पष्ट करने और ऑपरेशंस को अधिक प्रभावी बनाने की व्यापक कोशिश का हिस्सा हो सकते हैं।
फिलहाल एम्प्लॉयीज की संख्या में कटौती को लेकर BCCL ने किसी तय लक्ष्य की पुष्टि नहीं की है। ऐसे में आगे कंपनी की ओर से होने वाली आधिकारिक घोषणा पर सबकी नजर रहेगी।
मीडिया और एंटरटेनमेंट कंपनी बोधी ट्री मल्टीमीडिया (Bodhi Tree Multimedia) अपनी उधारी क्षमता बढ़ाने की तैयारी में है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
मीडिया और एंटरटेनमेंट कंपनी बोधी ट्री मल्टीमीडिया (Bodhi Tree Multimedia) अपनी उधारी क्षमता बढ़ाने की तैयारी में है। कंपनी ने बोर्ड की मंजूरी के बाद कुल बारोइंग पॉवर्स को बढ़ाकर ₹200 करोड़ तक करने का प्रस्ताव रखा है। इस प्रस्ताव पर अंतिम मंजूरी शेयरधारकों से ली जाएगी। इसके लिए कंपनी ने अपनी 13वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) 30 सितंबर 2026 को बुलाई है।
AGM वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग या अन्य ऑडियो-विजुअल माध्यम से होगी। बैठक सुबह 10:30 बजे शुरू होगी। इसमें वित्त वर्ष 2025-26 के audited standalone और consolidated financial statements को अपनाने के साथ-साथ अन्य प्रस्तावों पर भी शेयरधारक मतदान करेंगे।
₹200 करोड़ तक उधार लेने के लिए शेयरधारकों की मंजूरी
AGM में Companies Act, 2013 की Section 180(1)(c) के तहत एक special resolution रखा जाएगा। इसके जरिए बोर्ड को कंपनी की कुल आउटस्टैंडिंग बारोइंग्स को ₹200 करोड़ तक बढ़ाने की अनुमति देने का प्रस्ताव है। यानी अभी कंपनी को ₹200 करोड़ की नई कर्ज सीमा मिल नहीं गई है। यह केवल प्रस्तावित बारोइंग लिमिट है, जिस पर शेयरधारकों की मंजूरी जरूरी है।
कंपनी इस उधारी क्षमता का इस्तेमाल वर्किंग कैपिटल, कैपिटल एक्सपेंडिचर, सामान्य कारोबारी जरूरतों और कारोबार के विस्तार के लिए कर सकती है। साथ ही मौजूदा उधारी की रीफाइनेंसिंग के लिए भी फंड का इस्तेमाल किया जा सकता है।
कंपनी टर्म लोन्स, बॉन्ड्स, डिबेंचर्स और External Commercial Borrowings (ECBs) जैसे अलग-अलग माध्यमों से फंड जुटा सकती है। ECB से जुड़ी उधारी में RBI के लागू नियमों और Master Directions का पालन करना होगा।
₹38.25 करोड़ तक के रिलेटेड पार्टी ट्रांजेक्शंस पर भी वोटिंग
AGM में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए मैटेरियल रिलेटेड पार्टी ट्रांजेक्शंस को मंजूरी देने का प्रस्ताव भी रखा गया है। ये लेनदेन सामान्य कारोबारी गतिविधियों के तहत लोन, एडवांस या प्रोजेक्ट एडवांस के रूप में किए जाने हैं।
प्रस्तावित लेनदेन में प्रमुख रूप से ये कंपनियां शामिल हैं:
इनमें जिन लेनदेन की रकम बताई गई है, उनका कुल अनुमानित मूल्य ₹38.25 करोड़ है। कंपनी के मुताबिक ये लेनदेन सामान्य कारोबारी गतिविधियों के तहत और arm's length basis पर किए जाने हैं।
23 सितंबर है वोटिंग के लिए कट-ऑफ डेट
AGM में वोटिंग के अधिकार तय करने के लिए 23 सितंबर 2026 को कट-ऑफ डेट रखा गया है। कंपनी की Register of Members और Share Transfer Books 24 सितंबर से 30 सितंबर 2026 तक बंद रहेंगी। शेयरधारकों के लिए रिमोट ई-वोटिंग की सुविधा 26 सितंबर 2026 से 29 सितंबर 2026 तक उपलब्ध रहेगी। इसके जरिए पात्र शेयरधारक AGM से पहले अपने वोट डाल सकेंगे।
सुकेश देवदास मोटवानी फिर बन सकते हैं डायरेक्टर
AGM के एजेंडे में सुकेश देवदास मोटवानी की डायरेक्टर के तौर पर दोबारा नियुक्ति का प्रस्ताव भी शामिल है। वह रोटेशन के आधार पर रिटायर हो रहे हैं और उन्होंने दोबारा निदेशक पद के लिए अपनी उम्मीदवारी पेश की है।
कंपनी के लिए क्यों अहम है यह प्रस्ताव?
₹200 करोड़ तक बारोइंग पॉवर (कंपनी का बोर्ड कितनी अधिकतम रकम तक कंपनी के नाम पर कर्ज या उधारी ले सकता है) बढ़ाने का प्रस्ताव कंपनी को भविष्य में अपनी कारोबारी जरूरतों के लिए ज्यादा फंड जुटाने की सुविधा दे सकता है। कंपनी इस सीमा का इस्तेमाल वर्किंग कैपिटल, कैपिटल एक्पेंडिचर, कारोबार के विस्तार और मौजूदा उधारी की रीफाइनेंसिंग जैसी जरूरतों के लिए कर सकती है।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि ₹200 करोड़ की सीमा अभी शेयरधारकों की मंजूरी के लिए प्रस्तावित है। 30 सितंबर की AGM में मंजूरी मिलने के बाद ही बोर्ड को प्रस्तावित सीमा के भीतर उधारी जुटाने की शक्ति मिलेगी।
ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज ने रेजिन सुरेंद्रन को चीफ डिजिटल एंड इंफॉर्मेशन ऑफिसर नियुक्त किया है। उनके पास डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन का 24 साल से ज्यादा अनुभव है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज (Britannia Industries) ने रेजिन सुरेंद्रन (Rejin Surendran) को चीफ डिजिटल एंड इंफॉर्मेशन ऑफिसर (Chief Digital and Information Officer) नियुक्त किया है। वह 1 अक्टूबर 2026 से अपनी नई जिम्मेदारी संभालेंगे। रेजिन के पास डिजिटल और टेक्नोलॉजी ट्रांसफॉर्मेशन (Technology Transformation) का 24 साल से ज्यादा का अनुभव है।
ब्रिटानिया से जुड़ने से पहले रेजिन विप्रो एंटरप्राइजेज (Wipro Enterprises) में ग्लोबल चीफ इंफॉर्मेशन ऑफिसर (Global Chief Information Officer) थे। उन्होंने यहां 4.5 साल से ज्यादा समय तक काम किया और 25 देशों में फैली ग्लोबल टेक्नोलॉजी टीम (Global Technology Team) का नेतृत्व किया।
इससे पहले वह कोका-कोला (Coca-Cola) के बॉटलिंग इन्वेस्टमेंट्स ग्रुप (Bottling Investments Group) में डिजिटल एंड ईआरपी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (Digital & ERP CoE) के हेड थे।
रेजिन ने यूनिलीवर (Unilever) के साथ भी 13 साल से ज्यादा समय तक काम किया है। यहां उन्होंने कंपनी के डिजिटल सप्लाई चेन (Digital Supply Chain) रोडमैप पर काम किया। इसमें फैक्ट्रियों और लॉजिस्टिक्स को डिजिटल बनाने की जिम्मेदारी भी शामिल थी।
टिम्सी जयपुरिया इससे पहले द हिंदुस्तान टाइम्स लिमिटेड में स्पेशल कॉरेस्पोंडेंट, बिजनेस ब्यूरो के तौर पर काम कर चुकी हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
मीडिया इंडस्ट्री से एक अहम खबर सामने आई है। टिम्सी जयपुरिया (Timsy Jaipuria) ने CNBC-TV18 से 10 साल की पारी के बाद विदाई ले ली है। वह चैनल में एडिटर-फाइनेंस एंड इकोनॉमिक पॉलिसी के पद पर कार्यरत थीं।
टिम्सी जयपुरिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लिंक्डइन पर अपने इस बदलाव की जानकारी दी है।
टिम्सी जयपुरिया इससे पहले द हिंदुस्तान टाइम्स लिमिटेड (The Hindustan Times Limited) के साथ स्पेशल कॉरेस्पोंडेंट, बिजनेस ब्यूरो के तौर पर काम कर चुकी हैं।
टिम्सी जयपुरिया को आर्थिक नीति, अंतरराष्ट्रीय व्यापार, टैक्सेशन, रियल एस्टेट और कॉरपोरेट मामलों की कवरेज का 18 साल का अनुभव है।
टिम्सी जयपुरिया इससे पहले द हिंदुस्तान टाइम्स लिमिटेड में स्पेशल कॉरेस्पोंडेंट, बिजनेस ब्यूरो के तौर पर काम कर चुकी हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
मीडिया इंडस्ट्री से एक अहम खबर सामने आई है। टिम्सी जयपुरिया (Timsy Jaipuria) ने CNBC-TV18 से 10 साल की पारी के बाद विदाई ले ली है। वह चैनल में एडिटर-फाइनेंस एंड इकोनॉमिक पॉलिसी के पद पर कार्यरत थीं।
टिम्सी जयपुरिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लिंक्डइन पर अपने इस बदलाव की जानकारी दी है।
टिम्सी जयपुरिया इससे पहले द हिंदुस्तान टाइम्स लिमिटेड (The Hindustan Times Limited) के साथ स्पेशल कॉरेस्पोंडेंट, बिजनेस ब्यूरो के तौर पर काम कर चुकी हैं।
टिम्सी जयपुरिया को आर्थिक नीति, अंतरराष्ट्रीय व्यापार, टैक्सेशन, रियल एस्टेट और कॉरपोरेट मामलों की कवरेज का 18 साल का अनुभव है।
अवनीश कुमार मिश्रा इससे पहले दैनिक भास्कर डिजिटल में कार्यरत थे, जहां से उन्होंने हाल ही में इस्तीफा दे दिया था।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
पत्रकार अवनीश कुमार मिश्रा एक बार फिर ‘दैनिक जागरण’ परिवार का हिस्सा बन गए हैं। अपनी नई भूमिका में वह लखनऊ में चीफ रिपोर्टर की जिम्मेदारी संभालेंगे।
अवनीश कुमार मिश्रा इससे पहले ‘दैनिक भास्कर’ (डिजिटल) में कार्यरत थे, जहां से उन्होंने हाल ही में इस्तीफा दे दिया था।
अवनीश कुमार मिश्रा ने दैनिक जागरण में वापसी को लेकर सोशल मीडिया पर लिखा कि कुछ सफर कभी खत्म नहीं होते, बल्कि एक नए पड़ाव के साथ फिर शुरू होते हैं। उन्होंने कहा कि लखनऊ में चीफ रिपोर्टर की जिम्मेदारी के साथ एक बार फिर दैनिक जागरण परिवार में वापसी हुई है।
उन्होंने दैनिक जागरण को संस्थान नहीं बल्कि अपना घर-परिवार बताते हुए कहा कि यहां से जुड़ी पुरानी यादें, सीख और रिश्ते हमेशा दिल के करीब रहे हैं। नई जिम्मेदारी, नई ऊर्जा और नए संकल्प के साथ वह एक बार फिर अपना सफर शुरू कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि दैनिक जागरण में वापसी नहीं, बल्कि अपने घर लौटने जैसा अहसास है और प्रभु की कृपा बने रहने की कामना की।
अवनीश कुमार मिश्रा के करियर में दैनिक जागरण के साथ लंबा जुड़ाव रहा है। उन्होंने 27 फरवरी 2015 से 27 जून 2019 तक दैनिक जागरण में रिपोर्टर के तौर पर काम किया। इसके बाद 29 जून 2019 से 20 जनवरी 2023 तक वह दैनिक जागरण में सीनियर क्राइम रिपोर्टर रहे।
इसके बाद 21 जनवरी 2023 से 31 जुलाई 2024 तक उन्होंने दैनिक जागरण, साहिबाबाद (गाजियाबाद) में ब्यूरो चीफ की जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद जुलाई 2024 से मार्च 2025 तक वह दैनिक जागरण, नोएडा/ग्रेटर नोएडा में ब्यूरो चीफ रहे।
बाद में यहां से अलग होकर अवनीश कुमार मिश्रा ने अप्रैल 2025 से जुलाई 2026 तक दैनिक भास्कर डिजिटल में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम किया। अब दैनिक भास्कर डिजिटल से विदाई के बाद वह एक बार फिर दैनिक जागरण से जुड़ गए हैं और लखनऊ में चीफ रिपोर्टर की जिम्मेदारी संभालेंगे।
समाचार4मीडिया की ओर से अवनीश कुमार मिश्रा को उनके नए सफर के लिए ढेरों बधाई और शुभकामनाएं।
PVR INOX ने कंपनी में Rs 200 करोड़ के कथित किकबैक को लेकर सामने आई खबरों पर सफाई दी है। कंपनी ने कहा है कि इस मामले में बाहरी विशेषज्ञों से कराई गई प्रारंभिक जांच में किकबैक का कोई सबूत नहीं मिला।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
PVR INOX ने कंपनी में Rs 200 करोड़ के कथित किकबैक को लेकर सामने आई खबरों पर सफाई दी है। कंपनी ने कहा है कि इस मामले में बाहरी विशेषज्ञों से कराई गई प्रारंभिक जांच में किकबैक का कोई सबूत नहीं मिला।
बता दें कि किकबैक का मतलब किसी कारोबारी सौदे या काम को दिलाने के बदले छिपकर कमीशन या पैसा लेना-देना होता है।
कंपनी की यह सफाई नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) की ओर से पूछे गए सवालों के जवाब में आई है। दरअसल, 7 सितंबर को एक रिपोर्ट में PVR INOX के शेयरों में करीब 8 फीसदी की गिरावट और कंपनी में कथित Rs 200 करोड़ के किकबैक को लेकर आंतरिक जांच की बात कही गई थी।
अप्रैल में मिली थीं गुमनाम शिकायतें
PVR INOX के मुताबिक, यह मामला अप्रैल 2026 की शुरुआत में सामने आया। उस समय कंपनी के दो प्रमोटर्स को कुछ कर्मचारियों द्वारा कथित अनियमितता किए जाने को लेकर गुमनाम संदेश मिले थे। कंपनी ने कहा कि इन संदेशों में प्रमोद अरोड़ा का सीधे तौर पर नाम नहीं लिया गया था। इनमें कुछ संक्षिप्त नाम और शुरुआती अक्षरों का इस्तेमाल किया गया था। शिकायतों में कथित किकबैक से जुड़े डेवलपर्स के नाम, तारीख या किसी खास घटना जैसी ठोस जानकारी भी नहीं दी गई थी। इसके बावजूद प्रमोटर्स ने कंपनी की आंतरिक नीतियों के तहत इन शिकायतों को आगे विचार के लिए कंपनी के पास भेज दिया।
बाहरी विशेषज्ञों से कराई गई प्रारंभिक जांच
PVR INOX ने कहा कि शिकायतें गुमनाम थीं और उनमें सत्यापन योग्य जानकारी भी नहीं थी। इसके बावजूद बेहतर कॉरपोरेट गवर्नेंस को ध्यान में रखते हुए कंपनी ने बाहरी विशेषज्ञों से मामले की प्रारंभिक जांच कराई।
कंपनी के मुताबिक, इस प्रारंभिक आकलन में किसी तरह के किकबैक यानी छिपे हुए कमीशन या भुगतान का कोई सबूत नहीं मिला। इस तरह कंपनी ने Rs 200 करोड़ के कथित किकबैक से जुड़ी खबरों पर अपना पक्ष साफ करते हुए कहा है कि बाहरी विशेषज्ञों की प्रारंभिक जांच में इन आरोपों की पुष्टि नहीं हुई।
प्रमोद अरोड़ा के इस्तीफे पर भी सफाई
इस पूरे मामले में प्रमोद अरोड़ा का कंपनी से जाना भी चर्चा में रहा। PVR INOX ने बताया कि प्रमोद अरोड़ा ने 4 मई 2026 को व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए इस्तीफा दिया था। कंपनी ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया था, लेकिन साथ ही कंपनी के प्रति उनकी जारी जिम्मेदारियों को बरकरार रखा गया और अपने अधिकारों व कानूनी उपायों को सुरक्षित रखा गया।
PVR INOX ने खास तौर पर स्पष्ट किया कि प्रमोद अरोड़ा को कंपनी छोड़ने के लिए नहीं कहा गया था। कंपनी ने 25 मई को स्टॉक एक्सचेंजों को उनके इस्तीफे की जानकारी भी दी थी।
शिकायत और इस्तीफे के समय को लेकर बनी अटकलें
Arora का इस्तीफा उस समय हुआ जब कंपनी को गुमनाम शिकायतें मिल चुकी थीं और मामले का प्रारंभिक आकलन चल रहा था। इसी वजह से दोनों घटनाओं को लेकर अटकलें लगाई गईं। हालांकि, PVR INOX ने दोनों घटनाओं के बीच किसी तरह का सीधा संबंध होने की बात नहीं कही है। कंपनी ने दोहराया है कि प्रारंभिक बाहरी जांच में किकबैक के आरोपों के समर्थन में कोई सबूत नहीं मिला।
कॉरपोरेट गवर्नेंस पर कंपनी का जोर
PVR INOX ने कहा कि यह पूरा मामला कंपनी के कॉरपोरेट गवर्नेंस, नैतिक कारोबारी व्यवहार और संगठन में जवाबदेही को लेकर उसकी प्रतिबद्धता को दिखाता है। कंपनी के मुताबिक, उसके कारोबार और हितधारकों के साथ संबंधों को लेकर नीतियां, प्रक्रियाएं और आंतरिक नियंत्रण व्यवस्था मौजूद हैं। कंपनी ने कहा कि वह लागू कानूनों और अपने गवर्नेंस मानकों के अनुरूप कारोबार करने के लिए प्रतिबद्ध है। PVR INOX ने अपनी ओर से ईमानदारी, पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी जोर दिया है।
निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है?
PVR INOX की सफाई के बाद Rs 200 करोड़ के कथित किकबैक का मामला एक अलग तस्वीर पेश करता है। कंपनी ने यह जरूर माना है कि गुमनाम शिकायतों के बाद बाहरी विशेषज्ञों से प्रारंभिक जांच कराई गई थी, लेकिन उसका कहना है कि इस जांच में किकबैक के आरोपों को साबित करने वाला कोई सबूत नहीं मिला।
फिलहाल कंपनी का आधिकारिक रुख यही है कि प्रारंभिक बाहरी आकलन में Rs 200 करोड़ के कथित किकबैक की पुष्टि नहीं हुई है।
गुरसिमरन कौर मेहर इससे पहले रॉयटर्स में सीनियर कॉरेस्पोंडेंट के तौर पर कार्यरत थीं। उन्होंने लिंक्डइन पोस्ट के जरिए ब्लूमबर्ग न्यूज में नई भूमिका की जानकारी दी।
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गुरसिमरन कौर मेहर ने ब्लूमबर्ग न्यूज (Bloomberg News) के साथ अपनी नई पारी शुरू की है। उन्होंने कंपनी में ब्रेकिंग न्यूज एडिटर के तौर पर जॉइन किया है। इसकी जानकारी उन्होंने लिंक्डइन पर एक पोस्ट के जरिए साझा की।
गुरसिमरन ने अपनी पोस्ट में लिखा कि वह ब्लूमबर्ग न्यूज में ब्रेकिंग न्यूज एडिटर के तौर पर जुड़कर बेहद उत्साहित हैं और आगे की नई जिम्मेदारियों को लेकर उत्सुक हैं।
ब्लूमबर्ग न्यूज से जुड़ने से पहले गुरसिमरन कौर मेहर करीब साढ़े तीन साल तक रॉयटर्स (Reuters) के साथ रहीं। नवंबर 2025 से अगस्त 2026 तक उन्होंने रॉयटर्स में सीनियर कॉरेस्पोंडेंट की जिम्मेदारी संभाली। इससे पहले अगस्त 2023 से अक्टूबर 2025 तक वह कॉरेस्पोंडेंट और फरवरी 2023 से जुलाई 2023 तक ट्रेनी कॉरेस्पोंडेंट- ग्लोबल न्यूज मॉनिटरिंग के तौर पर काम कर चुकी हैं।
वह दक्षिण एशिया को कवर करने वाली ब्रेकिंग न्यूज रिपोर्टर रही हैं। न्यूज राइटिंग, ब्रेकिंग न्यूज और एडिटिंग में भी उनका अनुभव है।
गुरसिमरन कौर मेहर ने सेंट जोसेफ्स यूनिवर्सिटी, बेंगलुरु से जर्नलिज्म, इंटरनेशनल रिलेशंस, पब्लिक पॉलिसी एंड पीस स्टडीज में बैचलर ऑफ आर्ट्स की डिग्री हासिल की है।
कई दशकों तक अखबार ही मीडिया कंपनियों का सबसे बड़ा कारोबार रहा। डिजिटल प्लेटफॉर्म, इवेंट्स और दूसरी ब्रैंडेड प्रॉपर्टीज भी अखबार के कारोबार को मजबूत करने के लिए बनाई जाती थीं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
कंचन श्रीवास्तव, सीनियर एडिटर, एक्सचेंज4मीडिया ।।
कई दशकों तक अखबार ही मीडिया कंपनियों का सबसे बड़ा कारोबार रहा। डिजिटल प्लेटफॉर्म, इवेंट्स और दूसरी ब्रैंडेड प्रॉपर्टीज भी अखबार के कारोबार को मजबूत करने के लिए बनाई जाती थीं। लेकिन अब यह तस्वीर तेजी से बदल रही है। भारत के बड़े अखबार समूह अब सिर्फ प्रिंट कंपनियां नहीं रह गए हैं, बल्कि धीरे-धीरे डाइवर्सिफाइड मीडिया बिजनेस बन रहे हैं।
मीडिया इंडस्ट्री के जानकारों के मुताबिक, बड़े प्रकाशक अब अपनी पुरानी ताकतों- विश्वसनीय ब्रैंड, विज्ञापनदाताओं के साथ मजबूत रिश्ते, क्षेत्रीय पहुंच, उपभोक्ताओं की बड़ी कम्युनिटी और ऑनलाइन-ऑफलाइन दर्शकों को एक साथ जोड़ने की क्षमता, का इस्तेमाल नए कारोबार खड़े करने में कर रहे हैं।
इंडस्ट्री लीडर्स का कहना है कि कई प्रकाशक अब अपनी कुल कमाई का 25-30% हिस्सा प्रिंट के बाहर के कारोबार से हासिल कर रहे हैं। इससे मुख्य अखबार कारोबार को भी लंबे समय तक टिकाऊ बनाए रखने में मदद मिल रही है।
इवेंट्स और डिजिटल से तेजी से बढ़ रही कमाई
मीडिया रिसर्च यूजर्स काउंसिल इंडिया (MRUCI) के चेयरमैन और मैडिसन वर्ल्ड के पार्टनर एवं डायरेक्टर विक्रम सखूजा के मुताबिक, पिछले 4-5 वर्षों में अखबारों के स्पॉन्सरशिप आधारित इवेंट्स, डिजिटल विज्ञापन और आउटडोर विज्ञापन (OOH) कारोबार में तेजी से बढ़ोतरी हुई है।
आज ज्यादातर अखबार, खासकर क्षेत्रीय प्रकाशक, हर साल कई इवेंट्स और अवॉर्ड कार्यक्रम आयोजित करते हैं। इनसे उन्हें स्पॉन्सरशिप और रजिस्ट्रेशन के जरिए करोड़ों रुपये की कमाई होती है। कुछ फिल्म और महिला पत्रिकाओं के लिए तो एक ही इवेंट से होने वाली कमाई उनके पूरे साल के विज्ञापन और सब्सक्रिप्शन राजस्व के बराबर या उससे भी ज्यादा हो सकती है।
प्रिंट मजबूत है, इसलिए नए कारोबार का मौका
The Hindu Group के चीफ डिजिटल बिजनेस ऑफिसर प्रदीप गैरोला का कहना है कि भारतीय समाचार प्रकाशकों के लिए मौजूदा स्थिति एक तरह से फायदेमंद है। यहां अखबार का कारोबार अभी भी मजबूत है, इसलिए प्रकाशक नए राजस्व स्रोत तैयार कर सकते हैं। उनके मुताबिक, भारत में प्रकाशकों के पास कमजोर होते कारोबार को बचाने के लिए मजबूरी में डाइवर्सिफिकेशन करने के बजाय मजबूत स्थिति से नए कारोबार खड़े करने का मौका है।
प्रदीप गैरोला का मानना है कि अगर यह स्थिति आगे भी बनी रहती है तो भारत के प्रकाशक अमेरिका और यूरोप के न्यूज इंडस्ट्री में देखने को मिली भारी छंटनी और अस्तित्व से जुड़े दबाव से कुछ हद तक बच सकते हैं। मौजूदा स्थिरता का इस्तेमाल एक ज्यादा विविध और मजबूत न्यूज बिजनेस तैयार करने में किया जा सकता है।
CRISIL का अनुमान, गैर-प्रिंट कारोबार की हिस्सेदारी 25% तक
इस बदलाव का पैमाना CRISIL की एक हालिया स्टडी से भी समझा जा सकता है। भारत के पांच बड़े और व्यापक रूप से प्रसारित दैनिक अखबारों पर आधारित इस अध्ययन के मुताबिक, गैर-प्रिंट कारोबार की हिस्सेदारी FY19 में करीब 13% थी, जो बढ़कर लगभग 25% होने का अनुमान है।
CRISIL को उम्मीद है कि FY25 से FY27 के बीच गैर-प्रिंट राजस्व सालाना 10-12% की दर से बढ़ सकता है, जबकि पारंपरिक प्रिंट कारोबार की वृद्धि दर करीब 2-3% रहने का अनुमान है।
इस बदलाव का मतलब सिर्फ इतना नहीं है कि प्रकाशक प्रिंट से होने वाली कमाई की जगह कोई दूसरा कारोबार खड़ा कर रहे हैं। वे उन संपत्तियों से कमाई कर रहे हैं, जिन्हें अखबारों ने दशकों में तैयार किया है। इनमें भरोसेमंद ब्रैंड, विज्ञापनदाताओं के साथ रिश्ते, क्षेत्रीय पहुंच, फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर और बड़ी उपभोक्ता कम्युनिटी शामिल हैं।
प्रिंट का सीधा विकल्प नहीं बन पाया डिजिटल
प्रकाशकों के लिए चुनौती यह भी है कि डिजिटल कारोबार अभी तक प्रिंट के लिए एक सीधा और पूरी तरह समान विकल्प नहीं बन पाया है। ऐसे में प्रिंट में धीरे-धीरे आ रही गिरावट का जवाब किसी एक नए माध्यम में तलाशने के बजाय कई अलग-अलग कारोबारों के पोर्टफोलियो में खोजा जा रहा है।
भारत के पास अभी कारोबार में विविधता लाने का है मौका
भारत का प्रकाशन बाजार अभी भी पश्चिमी देशों से काफी अलग है। CRISIL के मुताबिक, भारतीय अखबार कंपनियों की करीब 75% कमाई अभी भी प्रिंट सर्कुलेशन और विज्ञापन से आती है। इसके मुकाबले The New York Times में प्रिंट सर्कुलेशन और विज्ञापन की हिस्सेदारी करीब 23.8% है। WAN-IFRA की एक स्टडी के अनुसार, Financial Times में यह करीब 10-15%, The Economist Group में 15-20% और Wall Street Journal/Dow Jones में 10-15% है। इसका मतलब है कि भारतीय प्रकाशकों के पास अपने पश्चिमी समकक्षों की तुलना में डाइवर्सिफिकेशन के लिए ज्यादा समय है, क्योंकि उनका मुख्य प्रिंट कारोबार अभी भी अपेक्षाकृत मजबूत है।
हालांकि, दबाव के संकेत दिखाई देने लगे हैं। बड़ी अखबार कंपनियों का सर्कुलेशन बेस 2019 में करीब 1.5 करोड़ से घटकर 2025 में लगभग 1 करोड़ रह गया। वहीं पिछले सात वर्षों में प्रिंट से जुड़े राजस्व में सालाना आधार पर करीब 1-2% की औसत गिरावट का अनुमान है।
दुनियाभर में भी बदल रहा है मीडिया का कारोबार
दुनिया के दूसरे हिस्सों में भी तस्वीर कुछ ऐसी ही है। WAN-IFRA की World Press Trends Outlook रिपोर्ट में 66 देशों के 170 से ज्यादा वरिष्ठ मीडिया अधिकारियों को शामिल किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, अब प्रकाशकों के कुल राजस्व में प्रिंट सर्कुलेशन और विज्ञापन की हिस्सेदारी 43.6% रह गई है, जो पांच साल पहले 56.2% थी। वहीं डिजिटल सर्कुलेशन और विज्ञापन की हिस्सेदारी करीब 31% है। इवेंट्स, B2B सेवाओं और ई-कॉमर्स जैसी दूसरी गतिविधियां मिलकर करीब 25.4% राजस्व दे रही हैं।
WAN-IFRA के डायरेक्टर ऑफ इनसाइट्स डीन रोपर के मुताबिक, लगातार बदलते माहौल के बीच प्रकाशक नए तरीके अपना रहे हैं और अपने कारोबार को उसके हिसाब से ढाल रहे हैं।
अब सिर्फ विज्ञापन की जगह पूरा समाधान बेच रहे हैं मीडिया हाउस
डाइवर्सिफिकेशन का असर प्रकाशकों और विज्ञापनदाताओं के रिश्ते पर भी पड़ा है। Kioas Marketing के सीईओ सजल गुप्ता के मुताबिक, प्रिंट आज भी विश्वसनीयता, बड़े पैमाने पर पहुंच और प्रभावशाली कम्युनिकेशन देता है। लेकिन विज्ञापनदाता अब डिजिटल, OOH और एक्सपीरियेंशियल प्रॉपर्टीज के जरिए इस प्रभाव को आगे बढ़ाना चाहते हैं।
यानी मीडिया कंपनियों की पेशकश अब सिर्फ एक अखबार में विज्ञापन देने तक सीमित नहीं है। अब एक इंटीग्रेटेड पैकेज तैयार किया जा रहा है—ब्रैंड की पहचान और विश्वसनीयता के लिए प्रिंट, टारगेटिंग और एंगेजमेंट के लिए डिजिटल, फिजिकल विजिबिलिटी और बार-बार पहुंच के लिए OOH और सीधे उपभोक्ताओं से जुड़ने के लिए इवेंट्स।
बड़े अखबार समूहों के लिए यह मॉडल इसलिए भी फायदेमंद है क्योंकि उनके पास पहले से विज्ञापनदाताओं के साथ रिश्ते, स्थानीय मौजूदगी, फिजिकल एसेट्स और मजबूत ब्रैंड मौजूद हैं।
OOH और इवेंट्स भी बन रहे हैं बड़ा कारोबार
Pitch Madison Advertising Report 2026 के मुताबिक, भारत का OOH बाजार 2025 में 4% बढ़कर 4,835 करोड़ रुपये हो गया, जो 2024 में 4,650 करोड़ रुपये था। ऐसे में प्रकाशकों के लिए OOH और इवेंट्स सिर्फ नए राजस्व स्रोत नहीं हैं, बल्कि मौजूदा विज्ञापन संबंधों का विस्तार भी हैं।
PDlab.me के फाउंडर संदीप अमर के मुताबिक, ब्रैंड अब केवल अखबार में विज्ञापन देने के बजाय इवेंट्स, प्रिंट, OOH और न्यूज ब्रैंड की विश्वसनीयता को जोड़ने वाले इंटीग्रेटेड पैकेज को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। ऐसे पैकेज के जरिए ब्रैंड्स को पारंपरिक मीडिया विजिबिलिटी के साथ सेलिब्रिटीज, नीति निर्माताओं, स्टेकहोल्डर्स और ऑडियंस तक पहुंच मिल सकती है।
इसी वजह से मीडिया कंपनियां अब बुक पब्लिशिंग, एजुकेशन, ट्रेनिंग, कंटेंट सिंडिकेशन, IT सॉल्यूशंस और एफिलिएट मार्केटिंग जैसे क्षेत्रों में भी उतर रही हैं। इनमें से हर कारोबार भले ही अलग-अलग छोटा हो, लेकिन मिलकर ये किसी एक राजस्व स्रोत पर निर्भरता कम करते हैं।
डाइवर्सिफिकेशन से मिल रहा है समय, लेकिन संकट से पूरी सुरक्षा नहीं
हालांकि, नए कारोबार बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि उनसे प्रिंट जितना ही मुनाफा भी मिलेगा। CRISIL के मुताबिक, गैर-प्रिंट कारोबार का मार्जिन इस वित्त वर्ष में करीब 12-13% रहने का अनुमान है। OOH और इवेंट्स में पारंपरिक प्रिंट कारोबार की तुलना में वैरिएबल कॉस्ट ज्यादा होती है और प्रतिस्पर्धा भी अधिक है।
इसलिए प्रकाशकों का लक्ष्य जरूरी नहीं है कि प्रिंट से होने वाली हर एक रुपये की कमाई की जगह उतने ही मुनाफे वाला दूसरा रुपया खड़ा किया जाए। असली उद्देश्य पर्याप्त वैकल्पिक राजस्व स्रोत तैयार करना है, ताकि आने वाले समय में प्रिंट कारोबार के कमजोर होने का असर पूरी कंपनी पर न पड़े।
असली चुनौती अब मुनाफे के साथ ग्रोथ की है
आखिरकार असली सवाल यह होगा कि ये नए कारोबार कितनी तेजी और कितने मुनाफे के साथ बढ़ते हैं। अगर प्रिंट की हिस्सेदारी आने वाले वर्षों में अमेरिका और दुनिया के दूसरे हिस्सों की तरह कम होती है, तो क्या भारतीय मीडिया कंपनियां अपने नए कारोबार के दम पर खुद को बड़ा और मजबूत बनाए रख पाएंगी?
यही भारतीय अखबार समूहों के लिए अगले कुछ वर्षों की सबसे बड़ी चुनौती होगी। फिलहाल तस्वीर यह है कि अखबार अब अकेला कारोबार नहीं रह गया है। उसके आसपास तैयार की गई पूरी मीडिया इकोसिस्टम अब कमाई का नया आधार बन रही है।
मल्टीप्लेक्स कंपनी PVR INOX Limited ने अपने शेयर बायबैक की तारीख और दूसरी जरूरी जानकारी जारी कर दी है। कंपनी करीब ₹300 करोड़ की अधिकतम रकम में अपने 20,68,965 इक्विटी शेयर वापस खरीदेगी।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
मल्टीप्लेक्स कंपनी PVR INOX Limited अपने शेयरधारकों से अधिकतम 20,68,965 इक्विटी शेयर वापस खरीदने जा रही है। कंपनी ने इसके लिए ₹1,450 प्रति शेयर का भाव तय किया है और बायबैक पर अधिकतम ₹300 करोड़ खर्च किए जाएंगे। यह बायबैक टेंडर ऑफर के जरिए किया जाएगा।
कंपनी के मुताबिक, बायबैक के तहत खरीदे जाने वाले 20,68,965 शेयर उसके 31 मार्च 2026 तक के कुल पेड-अप इक्विटी शेयर कैपिटल का 2.11% हैं। वहीं, ₹300 करोड़ का कुल बायबैक आकार कंपनी के पेड-अप इक्विटी शेयर कैपिटल और फ्री रिजर्व के मुकाबले ऑडिटेड स्टैंडअलोन आधार पर 4.09% और कंसोलिडेटेड आधार पर 4.07% है। ये दोनों आंकड़े अलग-अलग आधार पर बायबैक के आकार को दर्शाते हैं।
10 सितंबर से शुरू होगा बायबैक
PVR INOX का बायबैक 10 सितंबर 2026 को खुलेगा और 17 सितंबर 2026 को बंद होगा। शेयरधारक इसी अवधि के दौरान अपने पात्र शेयर बायबैक में टेंडर कर सकेंगे। हालांकि, 14 सितंबर 2026 को टेंडरिंग नहीं होगी, क्योंकि उस दिन SEBI द्वारा घोषित अवकाश है।
बायबैक के लिए पात्र शेयरधारकों की पहचान 4 सितंबर 2026 की रिकॉर्ड डेट के आधार पर की गई है। यानी इस तारीख को कंपनी के शेयर रखने वाले पात्र शेयरधारक बायबैक में हिस्सा ले सकते हैं, बशर्ते वे लागू नियमों के तहत पात्र हों।
छोटे शेयरधारकों के लिए अलग कोटा
कंपनी ने छोटे शेयरधारकों के लिए बायबैक में अलग श्रेणी रखी है। अनुमानित रूप से छोटे शेयरधारकों को हर 157 शेयर पर 9 शेयर टेंडर करने का अधिकार होगा।
वहीं, सामान्य श्रेणी के अन्य पात्र शेयरधारकों के लिए अनुमानित अनुपात हर 1,108 शेयर पर 21 शेयर है। कंपनी ने साफ किया है कि ये अनुपात अनुमानित हैं और राउंडिंग के कारण वास्तविक पात्रता में मामूली अंतर हो सकता है। वास्तविक बायबैक एंटाइटलमेंट छोटे शेयरधारकों के लिए 5.7330888703% और सामान्य श्रेणी के लिए 1.8953355370% है।
बायबैक क्यों कर रही है कंपनी?
PVR INOX ने बायबैक की वजह भी बताई है। कंपनी के मुताबिक, उसने मध्यम अवधि की अपनी रणनीतिक और कारोबारी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया है। साथ ही, कंपनी अपने सरप्लस फंड का एक हिस्सा शेयरधारकों को वापस करना चाहती है।
कंपनी का मानना है कि बायबैक से उसके प्रति शेयर आय (EPS) और रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) में सुधार होने की उम्मीद है। बोर्ड ने 31 अगस्त 2026 की बैठक में उपलब्ध फ्री रिजर्व और नकदी की स्थिति को ध्यान में रखते हुए बायबैक के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी।
फंड कहां से आएगा?
कंपनी के बोर्ड के प्रस्ताव के मुताबिक, बायबैक को फ्री रिजर्व, सिक्योरिटीज प्रीमियम अकाउंट और कानून के तहत अनुमत अन्य स्रोतों से फंड किया जा सकता है। इसलिए इसे सीधे तौर पर केवल किसी एक स्रोत से फंड होने वाला बायबैक बताना सही नहीं होगा।
शेयरधारकों को कब मिलेगा पैसा?
बायबैक में स्वीकार किए गए शेयरों के लिए भुगतान की अंतिम तारीख 24 सितंबर 2026 है। इसी तारीख तक पात्र शेयरधारकों को भुगतान और स्वीकार न किए गए शेयरों की वापसी की प्रक्रिया पूरी की जानी है।
इसके बाद बायबैक के तहत खरीदे गए शेयरों को खत्म करने यानी बायबैक किए गए शेयरों को रद्द करने की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर 2026 तय की गई है।
किसने संभाली जिम्मेदारी?
बायबैक के लिए DAM Capital Advisors Limited को मैनेजर और KFin Technologies Limited को रजिस्ट्रार नियुक्त किया गया है। पात्र शेयरधारक अपने बायबैक एंटाइटलमेंट की जानकारी रजिस्ट्रार की ओर से बताई गई प्रक्रिया के जरिए भी देख सकते हैं।
PVR INOX का यह बायबैक कंपनी के मौजूदा पात्र शेयरधारकों के लिए है और इसमें शेयरों की खरीद ₹1,450 प्रति शेयर के तय भाव पर टेंडर ऑफर के जरिए की जाएगी। हालांकि, प्रत्येक शेयरधारक के कितने शेयर वास्तव में स्वीकार होंगे, यह संबंधित श्रेणी और बायबैक प्रक्रिया के तहत तय होगा।