बेगम बाग, मेरठ निवासी आचार्य प्रवीन चौहान ने हाल ही मे एक मलयालम...
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समाचार4मीडिया ब्यूरो
समाचार4मीडिया ब्यूरो।।
बेगम बाग, मेरठ निवासी आचार्य प्रवीन चौहान ने हाल ही
मे एक मलयालम फिल्म ‘Puzhayamma’ मे बतौर अतिथि भूमिका का
रोल किया। इसफिल्म को एशिया बुक ऑफ
रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है। फिल्म को FIRST FEATURE FILM WITH RIVER AS BACKDROPTHEME की कैटेगरी मे अवॉर्ड दिया गया।
फिल्म के लेखक व निर्देशक विजीश
मानी (केरल), प्रड्यूसर गोकुलम गोपाल (केरल), हॉलिवुड एक्ट्रेस लिंडा अरेसेनो (अमेरिका), मलयालम एक्ट्रेस मीनाक्षी, आचार्य प्रवीन चौहान (मेरठ), फातिमा मनसूरी (बहरीन), प्रकाश वाडीकल समेत फिल्म की टीम को एशिया बुक
ऑफ रिकॉर्ड अवार्ड से नवाजा गया। फिल्म केरल, बनारस, हरिद्वार, ऋषिकेश
व गंगोत्री मे फिल्माई गई है।फिल्म
फरवरी 2019 में रिलीज होगी।
ग्रिन (Grin) ने घोषणा की है कि वह विद्वान और भू-राजनीति विशेषज्ञ रामी देसाई (Rami Desai) की पहली नॉन-फिक्शन पुस्तक प्रकाशित करेगा।
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Samachar4media Bureau
प्रकाशन संस्था ग्रिन (Grin) ने घोषणा की है कि वह विद्वान और भू-राजनीति विशेषज्ञ (Geopolitical Expert) रामी देसाई (Rami Desai) की पहली नॉन-फिक्शन (Non-fiction) पुस्तक प्रकाशित करेगा।
पुस्तक का कार्यशील शीर्षक (Working Title) 'द अनसंग फ्रंटियर: एक्सक्लूज़न, एलियनेशन एंड द मेकिंग ऑफ कॉन्फ्लिक्ट इन द इंडियन नॉर्थईस्ट' (The Unsung Frontier: Exclusion, Alienation and the Making of Conflict in the Indian Northeast) रखा गया है।
इसकी जानकारी ग्रिन (Grin) की मुख्य कार्यकारी अधिकारी (Chief Executive Officer-CEO) लक्ष्मी कौल (Lakshmi Kaul) ने लिंक्डइन (LinkedIn) पोस्ट के जरिए साझा की।
परियोजना की घोषणा करते हुए लक्ष्मी कौल (Lakshmi Kaul) ने लिखा, "हमें यह घोषणा करते हुए बेहद खुशी हो रही है कि विद्वान और भू-राजनीति विशेषज्ञ रामी देसाई (Rami Desai) अपनी पहली नॉन-फिक्शन पुस्तक, जिसका कार्यशील शीर्षक 'द अनसंग फ्रंटियर: एक्सक्लूज़न, एलियनेशन एंड द मेकिंग ऑफ कॉन्फ्लिक्ट इन द इंडियन नॉर्थईस्ट' (The Unsung Frontier: Exclusion, Alienation and the Making of Conflict in the Indian Northeast) है, हमारे साथ प्रकाशित करेंगी। इस पुस्तक के लिए जुड़े रहिए।"
उन्होंने आगे लिखा, "इस कहानी को उस विशेषज्ञ से बेहतर कौन बता सकता है, जिसने वर्षों तक जमीनी स्तर पर काम किया हो। हमें न केवल ग्रिन (Grin) परिवार में आपका स्वागत करते हुए खुशी हो रही है, बल्कि इस कहानी को वास्तविक रूप में सामने लाने के लिए हम आपके आभारी भी हैं।"
केंद्र सरकार ने सुरक्षा कारणों से BAT-BMS, Epoch-i-ion और Lossigy नाम के तीन मोबाइल ऐप को Google Play Store और Apple App Store से हटाने का आदेश दिया है।
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Samachar4media Bureau
केंद्र सरकार ने सुरक्षा कारणों से BAT-BMS, Epoch-i-ion और Lossigy नाम के तीन मोबाइल ऐप को Google Play Store और Apple App Store से हटाने का आदेश दिया है। सरकार को आशंका है कि इन ऐप्स का इस्तेमाल ई-रिक्शा को दूर से बंद (रिमोटली डिसेबल) करने के लिए किया जा सकता है, जिससे लोगों की सुरक्षा और रोजगार दोनों पर असर पड़ सकता है।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सूत्रों के मुताबिक, इस मामले की जांच जारी है और सरकार पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। मंत्रालय का कहना है कि इन ऐप्स के गलत इस्तेमाल की संभावना को देखते हुए यह कदम उठाया गया है।
शुक्रवार को CII साइबर सिक्योरिटी समिट के दौरान आईटी सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि सरकार की नजर में आए दो ऐप्स को ऐप स्टोर से हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि सरकार गूगल और एप्पल जैसे ऐप स्टोर संचालकों से भी बात करेगी, ताकि भविष्य में किसी भी संभावित खतरनाक ऐप को उपलब्ध कराने से पहले उसकी अच्छी तरह जांच की जा सके।
कैसे सामने आया मामला?
यह विवाद तब शुरू हुआ जब सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हुए। इनमें दावा किया गया कि कुछ ई-रिक्शा को ब्लूटूथ के जरिए दूर से बंद किया जा रहा है। आरोप है कि इसके लिए BAT-BMS ऐप का इस्तेमाल किया जा रहा था।
ये ऐप आखिर करते क्या हैं?
ये ऐप ब्लूटूथ से जुड़े बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) के साथ काम करते हैं, जिनका इस्तेमाल लिथियम-आयन बैटरियों की निगरानी के लिए किया जाता है। आमतौर पर निर्माता और तकनीशियन इनकी मदद से बैटरी की स्थिति, चार्जिंग, डिस्चार्ज, खराबी और अन्य सेटिंग्स की जांच करते हैं।
लेकिन कुछ वर्जन ऐसे भी हैं, जिनके जरिए बैटरी की डिस्चार्ज सेटिंग को ऑन या ऑफ किया जा सकता है। यदि बैटरी सिस्टम में पर्याप्त सुरक्षा नहीं है, तो कोई भी व्यक्ति ब्लूटूथ के जरिए उससे जुड़कर ई-रिक्शा की बिजली सप्लाई बंद कर सकता है, जिससे वाहन तुरंत रुक जाता है।
ई-रिक्शा क्यों हो रहे हैं प्रभावित?
रिपोर्ट के अनुसार, कई ई-रिक्शा में ऐसे आफ्टरमार्केट ब्लूटूथ बैटरी सिस्टम लगे हैं, जिनमें डिफॉल्ट पासवर्ड, ऑथेंटिकेशन या अन्य सुरक्षा इंतजाम नहीं हैं। ऐसे में लगभग 10 से 15 मीटर की दूरी पर मौजूद कोई भी व्यक्ति इन ऐप्स के जरिए बैटरी से कनेक्ट होकर उसकी सेटिंग बदल सकता है और ई-रिक्शा की बिजली बंद कर सकता है।
फिलहाल सरकार इस पूरे मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इन ऐप्स का इस्तेमाल किस तरह किया जा रहा है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या अतिरिक्त सुरक्षा उपाय किए जाएं।
डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के 11 वर्ष पूरे होने पर केंद्र सरकार ने शिक्षा क्षेत्र में डिजिटल बदलाव की उपलब्धियां साझा की हैं।
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Samachar4media Bureau
डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के 11 वर्ष पूरे होने पर केंद्र सरकार ने शिक्षा क्षेत्र में डिजिटल बदलाव की उपलब्धियां साझा की हैं। सरकार का कहना है कि Academic Bank of Credits (ABC), APAAR ID और National Academic Depository (NAD) जैसी पहल के जरिए अब छात्रों के शैक्षणिक रिकॉर्ड सुरक्षित, डिजिटल और आसानी से सत्यापित किए जा सकते हैं। इससे स्कूल और कॉलेज बदलने की प्रक्रिया भी पहले से कहीं अधिक आसान हो गई है।
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अनुसार, 1 जुलाई 2026 तक 26.29 करोड़ से अधिक APAAR ID बनाई जा चुकी हैं, जबकि 110.65 करोड़ से ज्यादा शैक्षणिक रिकॉर्ड डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड किए जा चुके हैं। इसके अलावा 2,963 उच्च शिक्षण संस्थान Academic Bank of Credits (ABC) प्लेटफॉर्म से जुड़ चुके हैं।
सरकार के मुताबिक, Academic Bank of Credits (ABC) शिक्षा मंत्रालय और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की पहल है। यह एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जहां छात्र अपने शैक्षणिक क्रेडिट सुरक्षित रख सकते हैं, उन्हें एक संस्थान से दूसरे संस्थान में ट्रांसफर कर सकते हैं और जरूरत पड़ने पर उनका उपयोग भी कर सकते हैं। यह व्यवस्था राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत मल्टीपल एंट्री-मल्टीपल एग्जिट (MEME) और लचीली पढ़ाई की व्यवस्था को बढ़ावा देती है।
ABC को APAAR (Automated Permanent Academic Account Registry) से जोड़ा गया है। इसके तहत हर छात्र को एक स्थायी डिजिटल अकादमिक पहचान (Academic Identity) मिलती है, जिससे स्कूल, कॉलेज, स्किल डेवलपमेंट और अन्य मान्यता प्राप्त संस्थानों के रिकॉर्ड एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध रहते हैं।
सरकार ने बताया कि National Academic Depository (NAD) के जरिए डिग्री, डिप्लोमा, मार्कशीट और अन्य शैक्षणिक प्रमाणपत्र डिजिटल रूप में सुरक्षित रखे जाते हैं। छात्र इन्हें कभी भी और कहीं से भी एक्सेस कर सकते हैं। साथ ही, शिक्षण संस्थान, नियोक्ता और सरकारी एजेंसियां इन दस्तावेजों का ऑनलाइन सत्यापन कर सकती हैं।
मंत्रालय के अनुसार, इस व्यवस्था से कागजी दस्तावेजों पर निर्भरता कम हुई है, फर्जी प्रमाणपत्रों पर रोक लगाने में मदद मिली है और प्रवेश, छात्रवृत्ति, नौकरी तथा इंटर्नशिप जैसी प्रक्रियाएं अधिक पारदर्शी और तेज हुई हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं के आवेदनों की डिजिटल जांच से भी मानव हस्तक्षेप कम हुआ है और पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनी है।
सरकार का कहना है कि ABC, APAAR, NAD और DigiLocker के एकीकरण से देश में एक मजबूत डिजिटल शैक्षणिक इकोसिस्टम तैयार हुआ है। इससे छात्रों को अपने शैक्षणिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखने, आसानी से साझा करने और कहीं भी सत्यापित कराने की सुविधा मिल रही है।
छत्तीसगढ़ के रुंगटा इंटरनेशनल स्किल्स यूनिवर्सिटी की एमबीए छात्रा अंजलि राठौर ने बताया कि APAAR ID से दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया आसान हो गई है और कागजी कार्यवाही काफी कम हुई है। वहीं, गवर्नमेंट वी.वाई.टी. पीजी ऑटोनॉमस कॉलेज, दुर्ग के छात्र आशीष तिवंगन ने कहा कि अब उनकी मार्कशीट और अन्य शैक्षणिक रिकॉर्ड डिजिटल रूप से सुरक्षित हैं तथा भविष्य में एडमिशन, क्रेडिट ट्रांसफर और छात्रवृत्ति के लिए भी यह व्यवस्था काफी उपयोगी साबित हो रही है।
सरकार का कहना है कि पिछले 11 वर्षों में डिजिटल इंडिया अभियान ने शिक्षा सेवाओं को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाया है। आने वाले समय में इन पहलों के जरिए पेपरलेस गवर्नेंस को और मजबूत किया जाएगा तथा विकसित भारत के लक्ष्य को गति मिलेगी।
इस लैब के साथ विभिन्न क्षेत्रों के अनुभवी फोरेंसिक वैज्ञानिकों की एक टीम भी जुड़ी है, जो डिजिटल, फिजिकल और क्राइम सीन जांच से जुड़े परीक्षण करती है एवं रिपोर्ट तैयार करती है।
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देश में फोरेंसिक साइंस क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि के तौर पर, लक्सर एविडेंस लैब्स प्राइवेट लिमिटेड को नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेटरीज़ (NABL) से मान्यता मिल गई है। NABL, भारत सरकार के तहत टेस्टिंग और कैलिब्रेशन लैब्स को मान्यता देने वाली प्रमुख संस्था है।
बता दें कि NABL की मान्यता को किसी भी लैब की काबिलियत, वैज्ञानिक क्षमता और काम की गुणवत्ता की महत्वपूर्ण पहचान माना जाता है। यह मान्यता तभी मिलती है, जब टेस्टिंग के तरीकों, लैब की प्रक्रिया, क्वालिटी सिस्टम, इंफ्रास्ट्रक्चर, उपकरणों के कैलिब्रेशन, दस्तावेज़ों और स्टाफ की वैज्ञानिक योग्यता की पूरी और सख्त जांच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य मानकों के अनुसार की जाती है। इसके लिए NABL के विशेषज्ञों की टीम लैब का निरीक्षण करती है।
इस बारे में जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इस उपलब्धि के साथ, लक्सर लैब्स (Laxhar Lab) भारत की पहली प्राइवेट फोरेंसिक लैब बन गई है, जिसे एक साथ कई डोमेन—डिजिटल फोरेंसिक्स, फिजिकल फोरेंसिक्स और क्राइम सीन मैनेजमेंट—में NABL की मान्यता मिली है। यह उपलब्धि उत्तर प्रदेश के लिए भी खास है, जहां लक्सर लैब्स (Laxhar Lab) सरकारी और प्राइवेट, दोनों श्रेणियों में फोरेंसिक जांच के लिए NABL मान्यता पाने वाली पहली लैब बन गई है।
देश में अब आम लोगों तक पहुंचेगा फोरेंसिक साइंस: प्रेस रिलीज के अनुसार, कई वर्षों से भारत में फोरेंसिक साइंस की सुविधा मुख्य रूप से सरकारी लैब्स तक सीमित थी, जिससे आम लोगों और निजी संस्थानों के लिए इसका उपयोग करना आसान नहीं था। इस मान्यता के बाद अब कोई भी व्यक्ति, वकील, कंपनी, संस्थान या जांच एजेंसी एक मान्यता-प्राप्त प्राइवेट लैब से सबूतों की फोरेंसिक जांच करा सकती है।
चाहे मामला विवादित हस्ताक्षर का हो, जाली दस्तावेज़ का, साइबर धोखाधड़ी का, मोबाइल फोन की जांच का, ऑडियो या वीडियो की प्रामाणिकता की जांच का, फिंगरप्रिंट परीक्षण का, क्लाउड में मौजूद डिजिटल सबूतों का, क्राइम सीन जांच का या टेक्निकल सर्विलांस काउंटर-मेजर्स (TSCM) का—अब लोगों के पास ऐसी फोरेंसिक सेवाएं उपलब्ध हैं, जो वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप जांची-परखी गई हैं और न्यायिक मामलों, कॉर्पोरेट जांच, बीमा दावों तथा अन्य विवादों के समाधान में सहायक हो सकती हैं।
यह लैब भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 (Bharatiya Sakshya Adhiniyam, 2023) की धारा 39 और 63 समेत अन्य लागू प्रावधानों के अनुरूप फोरेंसिक जांच और विशेषज्ञ राय (Expert Opinion) उपलब्ध कराती है। इसकी रिपोर्ट और विशेषज्ञ राय का उपयोग न्यायालयों तथा अन्य सक्षम प्राधिकारियों के समक्ष, लागू कानूनी प्रावधानों के अनुसार किया जा सकता है। लक्सर लैब राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में सेक्टर-73, नोएडा स्थित एन्थुरियम टावर में मौजूद है, जहां से वह देशभर के ग्राहकों तक अपनी सेवाएं पहुंचाएगी।

लक्सर लैब (Laxhar Lab) की अगुवाई फोरेंसिक सेवाओं के डायरेक्टर इंद्रजीत राय कर रहे हैं, जिन्हें वर्ष 2023 में वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स से सम्मानित किया जा चुका है। वे फोरेंसिक विशेषज्ञ होने के साथ-साथ फोरेंसिक पत्रकार भी रह चुके हैं। इससे पहले वे एबीपी न्यूज़ में कार्यकारी संपादक, जी न्यूज में उप संपादक और नेटवर्क18 में क्राइम एडिटर के रूप में कार्य कर चुके हैं। इस लैब के साथ विभिन्न क्षेत्रों के अनुभवी फोरेंसिक वैज्ञानिकों की एक टीम भी जुड़ी है, जो डिजिटल, फिजिकल और क्राइम सीन जांच से जुड़े परीक्षण करती है एवं रिपोर्ट तैयार करती है।
इस मौके पर इंद्रजीत राय ने कहा, ‘यह मान्यता सिर्फ लक्सर लैब के लिए नहीं, बल्कि विज्ञान के जरिए इंसाफ चाहने वाले हर नागरिक के लिए एक बड़ा पड़ाव है। हमारा मकसद हमेशा यही रहा है कि मान्यता-प्राप्त फोरेंसिक सेवाएं सिर्फ सरकारी दफ्तरों तक सीमित न रहें, बल्कि हर किसी तक पहुंचें। आज हर आम इंसान, वकील, कारोबारी और संस्थान के पास एक अंतरराष्ट्रीय मान्यता-प्राप्त लैब से भरोसेमंद और वैज्ञानिक तरीके से परीक्षण किए गए सबूत प्राप्त करने का अवसर है।’
लक्सर लैब (Laxhar Lab) निम्नलिखित क्षेत्रों में मान्यता-प्राप्त फोरेंसिक सेवाएं प्रदान करती है—
देश के न्यायिक तंत्र में आम आदमी के लिए एक बड़ा कदम: प्रेस रिलीज में कहा गया है कि NABL की यह मान्यता लक्सर लैब (Laxhar Lab) की वैज्ञानिक गुणवत्ता, निष्पक्षता और तकनीकी क्षमता के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को और मजबूत करती है। मान्यता-प्राप्त फोरेंसिक सेवाओं को आम लोगों तक पहुंचाकर यह लैब सबूत-आधारित न्याय व्यवस्था को मजबूती देने, जांच एजेंसियों, वकीलों, संस्थानों और आम नागरिकों को भरोसेमंद वैज्ञानिक जांच उपलब्ध कराने की दिशा में काम करने का लक्ष्य रखती है।
डेंट्सू क्रिएटिव (Dentsu Creative) की सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (Senior Vice President) प्रिया सीएम (Priya CM) ने कहा कि लोटे (Lotte) दुनिया के प्रमुख कन्फेक्शनरी (Confectionery) ब्रांड्स में से एक है।
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लोटे इंडिया (Lotte India) ने डेंट्सू क्रिएटिव (Dentsu Creative) को अपना क्रिएटिव एजेंसी पार्टनर (Creative Agency Partner) नियुक्त किया है। यह अकाउंट मल्टी-एजेंसी पिच (Multi-agency Pitch) के बाद डेंट्सू क्रिएटिव (Dentsu Creative) को मिला है और इसे एजेंसी का चेन्नई (Chennai) कार्यालय संभालेगा।
कंपनी के अनुसार, यह रणनीतिक साझेदारी (Strategic Partnership) लोटे इंडिया (Lotte India) के प्रमुख ब्रांड्स को मजबूत बनाने और नई पीढ़ी के स्नैक उपभोक्ताओं के लिए नए अनुभव तैयार करने पर केंद्रित होगी। डेंट्सू क्रिएटिव (Dentsu Creative) ब्रांड स्ट्रैटेजी (Brand Strategy), क्रिएटिव डेवलपमेंट (Creative Development) और इंटीग्रेटेड कैंपेन (Integrated Campaigns) की जिम्मेदारी संभालेगी।
इसमें चोको पाई (Choco Pie), पेपेरो (PEPERO), जोई (Joee) और कॉफी बाइट (Coffy Bite), एक्लेयर्स (Eclairs), कोकोनट पंच (Coconut Punch), लैक्टो किंग (Lacto King), कैरामिल्क (Caramilk), च्यूइट्स (Chewits), लॉली ब्लिस (Lolly Bliss), लोटे जूसीज़ (Lotte Juicies) सहित अन्य ब्रांड्स शामिल हैं। इसकी शुरुआत भारत में कोरिया (Korea) के नंबर-1 स्नैक ब्रांड पेपेरो (PEPERO) के नए कैंपेन से होगी।
डेंट्सू (Dentsu) के प्रेसिडेंट – इंटीग्रेटेड क्लाइंट मैनेजमेंट (President – Integrated Client Management) इंद्रजीत मुखर्जी (Indrajeet Mookherjee) ने कहा कि लोटे (Lotte) जैसे प्रतिष्ठित ब्रांड के साथ साझेदारी करना उनके लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि यह जीत डेंट्सू (Dentsu) की डेटा-आधारित क्रिएटिविटी (Data-driven Creativity) और उपभोक्ताओं के साथ सार्थक जुड़ाव बनाने की क्षमता को दर्शाती है।
डेंट्सू क्रिएटिव (Dentsu Creative) की सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (Senior Vice President) प्रिया सीएम (Priya CM) ने कहा कि लोटे (Lotte) दुनिया के प्रमुख कन्फेक्शनरी (Confectionery) ब्रांड्स में से एक है। उन्होंने कहा कि यह श्रेणी रचनात्मकता की नई सीमाएं तय करने, उपभोक्ताओं के साथ जुड़ाव बढ़ाने और प्रभावशाली ब्रांड कम्युनिकेशन (Brand Communication) विकसित करने के लिए व्यापक अवसर प्रदान करती है।
दिल्ली हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) सूचना का अधिकार (RTI) कानून के तहत 'पब्लिक अथॉरिटी' (सार्वजनिक प्राधिकरण) है।
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दिल्ली हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) सूचना का अधिकार (RTI) कानून के तहत 'पब्लिक अथॉरिटी' (सार्वजनिक प्राधिकरण) है। इसका मतलब है कि अब NSE पर भी RTI Act के प्रावधान लागू होंगे और कानून के तहत उससे जानकारी मांगी जा सकेगी।
जस्टिस सी. हरि शंकर और ओम प्रकाश शुक्ला की खंडपीठ ने वर्ष 2010 में दिए गए एकल पीठ के फैसले को बरकरार रखते हुए NSE की अपील खारिज कर दी।
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि वह एकल पीठ के इस निष्कर्ष से पूरी तरह सहमत है कि NSE, RTI Act की धारा 2(h) के तहत "अथॉरिटी" यानी सार्वजनिक प्राधिकरण की श्रेणी में आता है।
क्या था मामला?
साल 2010 में तत्कालीन जस्टिस संजीव खन्ना ने अपने फैसले में कहा था कि भले ही NSE की स्थापना कंपनी अधिनियम के तहत एक निजी कंपनी के रूप में हुई हो, लेकिन Securities Contracts (Regulation) Act, 1956 के तहत उसे स्टॉक एक्सचेंज के रूप में मिली मान्यता उसे सार्वजनिक कार्य करने वाली संस्था बना देती है।
कोर्ट ने यह भी कहा था कि NSE को मिली यह मान्यता पहले केंद्र सरकार और बाद में SEBI के जरिए दी गई। इसलिए यह संस्था RTI कानून के तहत सार्वजनिक प्राधिकरण मानी जाएगी। साथ ही, एकल पीठ ने यह भी माना था कि NSE पर केंद्र सरकार का नियंत्रण है।
NSE ने क्या दलील दी?
NSE ने इस फैसले को चुनौती देते हुए कहा था कि वह Companies Act, 1956 के तहत पंजीकृत एक निजी कंपनी है, इसलिए उसे सरकारी संस्था या सार्वजनिक प्राधिकरण नहीं माना जा सकता।
हालांकि, दिल्ली हाई कोर्ट की खंडपीठ ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया और कहा कि एकल पीठ का फैसला पूरी तरह तर्कसंगत और कानून के अनुरूप है। कोर्ट ने कहा कि उसके निष्कर्षों में हस्तक्षेप करने की कोई वजह नहीं है।
इस फैसले के साथ ही दिल्ली हाई कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि NSE सूचना का अधिकार कानून के दायरे में आएगा और उससे RTI के तहत जानकारी मांगी जा सकेगी।
दिल्ली हाई कोर्ट ने मशहूर संगीतकार इलैयाराजा को बड़ा झटका देते हुए सारेगामा इंडिया लिमिटेड के पक्ष में पहले से जारी अंतरिम रोक (इंटरिम इंजंक्शन) को हटाने से इनकार कर दिया है।
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दिल्ली हाई कोर्ट ने मशहूर संगीतकार इलैयाराजा को बड़ा झटका देते हुए सारेगामा इंडिया लिमिटेड के पक्ष में पहले से जारी अंतरिम रोक (इंटरिम इंजंक्शन) को हटाने से इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि फिलहाल यह रोक जारी रहेगी।
जस्टिस तुषार राव गेडेला ने इलैयाराजा की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने फरवरी में जारी अंतरिम आदेश को रद्द करने की मांग की थी। इस आदेश के तहत इलैयाराजा को उन गीतों और संगीत रचनाओं का इस्तेमाल करने, उनका लाइसेंस जारी करने या उन पर स्वामित्व का दावा करने से रोका गया है, जिन पर सारेगामा अपना कॉपीराइट होने का दावा करती है।
यह मामला 134 फिल्मों के गीतों और संगीत रचनाओं से जुड़ा है। इनमें Annakkili, 16 Vayathiniley, Kavikkuyil, Bharathi, Pallavi Anu Pallavi, Mullum Malarum, Raaja Paarvai, Netrikkann और Kalyanaraman जैसी कई चर्चित फिल्में शामिल हैं।
सारेगामा ने अदालत में दायर अपनी याचिका में कहा था कि कंपनी की स्थापना वर्ष 1901 में हुई थी और पहले इसका नाम The Gramophone Company of India Limited था। कंपनी का दावा है कि वर्ष 1976 से 2001 के बीच उसने कई फिल्म निर्माताओं के साथ समझौते किए थे, जिनके तहत इन फिल्मों के गीतों की साउंड रिकॉर्डिंग, संगीत और साहित्यिक रचनाओं के कॉपीराइट उसे सौंपे गए थे।
सारेगामा का यह भी कहना है कि उसके पास तमिल, हिंदी, मलयालम, कन्नड़, तेलुगु सहित कई भाषाओं के गीतों का बड़ा कैटलॉग है और वह इनका लाइसेंस तीसरे पक्ष को देती है।
कंपनी के मुताबिक, फरवरी 2026 की शुरुआत में उसे पता चला कि उसके कॉपीराइट वाले गीत Amazon Music, iTunes और JioSaavn जैसे प्लेटफॉर्म पर कथित तौर पर बिना अनुमति इस्तेमाल किए जा रहे हैं। साथ ही, इलैयाराजा इन रचनाओं पर अपना स्वामित्व भी जता रहे थे।
सारेगामा ने यह भी बताया कि इलैयाराजा ने 13 जनवरी 2026 को एक कानूनी नोटिस जारी कर दावा किया था कि जिन संगीत रचनाओं को उन्होंने तैयार, कंपोज, अरेंज और ऑर्केस्ट्रेट किया है, उन पर उनका अधिकार है। इनमें वे रचनाएं भी शामिल थीं, जो इस मुकदमे का हिस्सा हैं।
इसी आधार पर हाई कोर्ट ने 13 फरवरी 2026 को अंतरिम राहत देते हुए कहा था कि पहली नजर में सारेगामा का पक्ष मजबूत दिखाई देता है। अदालत ने माना था कि यदि कंपनी को अंतरिम संरक्षण नहीं दिया गया, तो उसे अपूरणीय नुकसान हो सकता है। इसलिए इलैयाराजा और उनके प्रतिनिधियों को इन गीतों का व्यावसायिक इस्तेमाल करने, लाइसेंस जारी करने या उन पर स्वामित्व का दावा करने से रोक दिया गया था।
बाद में इलैयाराजा ने इस अंतरिम आदेश को हटाने की मांग करते हुए अदालत का रुख किया, लेकिन बुधवार को दिल्ली हाई कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके साथ ही सारेगामा के पक्ष में जारी अंतरिम रोक फिलहाल बरकरार रहेगी।
पत्रकार शादमा शेख (Shadma Shaikh) ने चैनल न्यूज एशिया (Channel News Asia) में साउथ एशिया कॉरेस्पोंडेंट के रूप में नई जिम्मेदारी संभाली है।
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Samachar4media Bureau
वरिष्ठ पत्रकार शादमा शेख (Shadma Shaikh) ने चैनल न्यूज एशिया (Channel News Asia-CNA) में "साउथ एशिया कॉरेस्पोंडेंट (South Asia Correspondent)" के रूप में नई पारी की शुरुआत की है। इसकी जानकारी उन्होंने लिंक्डइन (LinkedIn) पर एक पोस्ट के जरिए साझा की।
शादमा शेख (Shadma Shaikh) बेंगलुरु (Bengaluru) में ही कार्यरत रहेंगी, जहां चैनल न्यूज एशिया (Channel News Asia-CNA) अपना पहला भारत ब्यूरो (India Bureau) स्थापित कर रहा है।
अपने लिंक्डइन (LinkedIn) पोस्ट में उन्होंने कहा कि उनके करियर का बड़ा हिस्सा टेक्नोलॉजी (Technology) रिपोर्टिंग पर केंद्रित रहा है। उन्होंने लिखा कि ऐसे समय में भारत (India) पर रिपोर्टिंग करने का अवसर मिलना उनके लिए उत्साहजनक है, जब देश के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence-AI), डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर (Digital Infrastructure), मैन्युफैक्चरिंग (Manufacturing), क्लाइमेट (Climate), हेल्थकेयर (Healthcare) और जियोपॉलिटिक्स (Geopolitics) से जुड़े फैसले एशिया (Asia) और दुनिया भर की चर्चाओं को प्रभावित कर रहे हैं।
शादमा शेख (Shadma Shaikh) सोशल इम्पैक्ट न्यूज़रूम (Social Impact Newsroom) फैक्टरडेली (FactorDaily) की सह-संस्थापक (Co-Founder) भी हैं। टेक्नोलॉजी और डिजिटल इकोसिस्टम की रिपोर्टिंग में उनका लंबा अनुभव रहा है।
भारत के वरिष्ठ पत्रकार आर. राजगोपाल का पासपोर्ट नवीनीकरण (Passport Renewal) वोटर लिस्ट से नाम हटने के कारण अटक गया है। इस मामले को लेकर एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने गहरी चिंता जताई है
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Samachar4media Bureau
भारत के वरिष्ठ पत्रकार आर. राजगोपाल का पासपोर्ट नवीनीकरण (Passport Renewal) वोटर लिस्ट से नाम हटने के कारण अटक गया है। इस मामले को लेकर एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने गहरी चिंता जताई है और कहा है कि यह मामला दिखाता है कि देश के लाखों लोग Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया की वजह से किस तरह की परेशानियों का सामना कर रहे हैं।
राजगोपाल, जो पहले The Telegraph के संपादक रह चुके हैं, का कहना है कि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (SIR) के दौरान उनका नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया गया। इसके बाद उनके पासपोर्ट के नवीनीकरण की प्रक्रिया भी प्रभावित हो गई।
क्या है पूरा मामला?
भारतीय निर्वाचन आयोग ने 4 नवंबर 2025 से 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में Special Intensive Revision (SIR) अभियान शुरू किया था। इसका उद्देश्य अयोग्य मतदाताओं की पहचान कर मतदाता सूची को अपडेट करना बताया गया था।
हालांकि, इस प्रक्रिया को लेकर लगातार विवाद बना हुआ है। आलोचकों का आरोप है कि इस अभियान के दौरान लाखों योग्य मतदाताओं के नाम भी वोटर लिस्ट से हटा दिए गए, जबकि चुनाव आयोग इन आरोपों को खारिज करता रहा है।
अब तक इस प्रक्रिया के तहत करीब 6 करोड़ मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा चुके हैं। इनमें से लगभग 90 लाख नाम केवल पश्चिम बंगाल से हटाए गए हैं। राजगोपाल भी उन हजारों लोगों में शामिल हैं जिन्होंने इस फैसले को अदालत में चुनौती दी है।
25 साल से एक ही इलाके में रह रहे थे
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राजगोपाल ने बताया कि वह पिछले 25 वर्षों से कोलकाता के बालीगंज इलाके में रह रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2010 से वह नियमित मतदाता रहे हैं और 2016 से 2023 तक कोलकाता के प्रमुख दैनिक अखबार 'द टेलीग्राफ' के संपादक रहे। इसके बावजूद उनका नाम इसलिए हटा दिया गया क्योंकि उनके और उनके पिता का नाम वर्ष 2002 की मतदाता सूची में नहीं मिला।
उन्होंने बताया कि उन्होंने अपना मैट्रिक प्रमाणपत्र भी जमा किया, लेकिन इसके बावजूद उनका नाम दोबारा नहीं जोड़ा गया। फिलहाल उनकी अपील संबंधित ट्रिब्यूनल में लंबित है।
पासपोर्ट नवीनीकरण भी रुका
राजगोपाल का कहना है कि बाद में अधिकारियों ने उन्हें बताया कि कोलकाता पुलिस पासपोर्ट नवीनीकरण के लिए आवश्यक पुलिस सत्यापन (Police Verification) पूरा नहीं कर सकी, क्योंकि उनका नाम वोटर लिस्ट में नहीं था।
उन्होंने कहा कि उन्हें यह बात हैरान करने वाली लगी, क्योंकि उन्हें ऐसा कोई सार्वजनिक नियम नहीं मिला जिसमें पासपोर्ट नवीनीकरण के लिए वोटर आईडी को अनिवार्य दस्तावेज बताया गया हो। इस पूरे मामले पर निर्वाचन आयोग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने क्या कहा?
एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने अपने बयान में कहा कि अगर एक जाने-माने पत्रकार और पूर्व संपादक के साथ ऐसा हो सकता है, तो आम नागरिकों, खासकर समाज के कमजोर वर्गों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
गिल्ड ने कहा कि यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि उन लाखों भारतीयों की परेशानी को सामने लाता है जिनके नाम SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए हैं।
सोशल मीडिया पर मिला समर्थन
राजगोपाल के मामले को सोशल मीडिया पर भी व्यापक समर्थन मिला है। वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि वह राजगोपाल के साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा कि सबसे डराने वाली बात यह है कि ऐसा किसी के साथ भी हो सकता है।
वहीं, सुप्रिया श्रीनेत ने आरोप लगाया कि राजगोपाल को उनकी पत्रकारिता और जवाबदेही की मांग की कीमत चुकानी पड़ रही है।
केरल से भी उठा मामला
इस बीच वी.डी. सतीशन ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी से इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि कोलकाता पुलिस की प्रतिकूल सत्यापन रिपोर्ट की वजह से राजगोपाल का पासपोर्ट नवीनीकरण रुक गया। उनके मुताबिक, वोटर लिस्ट से नाम हटने के कारण ही यह स्थिति पैदा हुई है। उन्होंने यह भी बताया कि राजगोपाल ने अपना नाम दोबारा मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए अपील दायर कर दी है।
वहीं, पिनरयी विजयन ने भी फेसबुक पोस्ट के जरिए इस मामले पर हैरानी जताई। उन्होंने कहा कि SIR प्रक्रिया के कारण राजगोपाल का नाम वोटर लिस्ट से हटा और इसी वजह से उनका पासपोर्ट भी नवीनीकृत नहीं हो सका।
फूड ब्रैंड Del Monte India ने अपनी क्रिएटिव कम्युनिकेशन की जिम्मेदारी Creativeland Asia की दिल्ली टीम को सौंप दी है।
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Samachar4media Bureau
फूड ब्रैंड Del Monte India ने अपनी क्रिएटिव कम्युनिकेशन की जिम्मेदारी Creativeland Asia की दिल्ली टीम को सौंप दी है। यह फैसला कई एजेंसियों के बीच हुए मूल्यांकन (Multi-Agency Evaluation) के बाद लिया गया।
इस नई साझेदारी के तहत Creativeland Asia, Del Monte India के लिए ब्रैंड और प्रॉडक्ट कम्युनिकेशन की पूरी रणनीति तैयार करेगी। एजेंसी का फोकस अलग-अलग प्रोडक्ट कैटेगरी के लिए क्रिएटिव कैंपेन विकसित करने, ग्राहकों के साथ ब्रैंड की मजबूत पहचान बनाने और Del Monte की फूड एक्सपर्टीज और विरासत को और मजबूती से पेश करने पर रहेगा।
इस साझेदारी पर Creativeland Asia के चीफ बिजनेस ऑफिसर मयूर चंद्रा ने कहा कि Del Monte एक ऐसा ब्रैंड है, जिसकी वैश्विक विरासत काफी मजबूत है और जो आज भी ग्राहकों के बीच अपनी प्रासंगिकता बनाए हुए है।
उन्होंने कहा कि भारत में लोगों की खाने-पीने की पसंद लगातार बदल रही है। ऐसे में उपभोक्ता ऐसे ब्रैंड चाहते हैं जो किचन में नए प्रयोग करने की प्रेरणा दें और रोजमर्रा के खाने को ज्यादा स्वादिष्ट और खास बनाएं। उनके मुताबिक, Del Monte की विशेषज्ञता, बेहतर प्रोडक्ट्स और बेहतरीन भोजन के अनुभव को एक अलग और प्रभावशाली कहानी के रूप में पेश करने का अच्छा अवसर है। उन्होंने कहा कि कंपनी Del Monte के साथ मिलकर ब्रैंड की अगली विकास यात्रा का हिस्सा बनने को लेकर उत्साहित है।
वहीं, Del Monte Foods की डिप्टी जनरल मैनेजर (मार्केटिंग) किरणप्रीत कौर ने कहा कि ग्राहकों की अपेक्षाएं लगातार बदल रही हैं। ऐसे में कंपनी की खासियतों को ऐसे तरीके से पेश करना जरूरी है जो लोगों के लिए प्रासंगिक भी हो और उन्हें प्रेरित भी करे।
उन्होंने कहा कि Creativeland Asia ने कंपनी के विजन और फूड कैटेगरी की अच्छी समझ दिखाई है। उन्हें उम्मीद है कि दोनों मिलकर ऐसे ब्रैंड कैंपेन तैयार करेंगे जो ग्राहकों पर मजबूत प्रभाव छोड़ें।
कंपनी के अनुसार, इस पूरे अकाउंट का संचालन Creativeland Asia के दिल्ली कार्यालय से किया जाएगा।