बेगम बाग, मेरठ निवासी आचार्य प्रवीन चौहान ने हाल ही मे एक मलयालम...
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समाचार4मीडिया ब्यूरो
समाचार4मीडिया ब्यूरो।।
बेगम बाग, मेरठ निवासी आचार्य प्रवीन चौहान ने हाल ही
मे एक मलयालम फिल्म ‘Puzhayamma’ मे बतौर अतिथि भूमिका का
रोल किया। इसफिल्म को एशिया बुक ऑफ
रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है। फिल्म को FIRST FEATURE FILM WITH RIVER AS BACKDROPTHEME की कैटेगरी मे अवॉर्ड दिया गया।
फिल्म के लेखक व निर्देशक विजीश
मानी (केरल), प्रड्यूसर गोकुलम गोपाल (केरल), हॉलिवुड एक्ट्रेस लिंडा अरेसेनो (अमेरिका), मलयालम एक्ट्रेस मीनाक्षी, आचार्य प्रवीन चौहान (मेरठ), फातिमा मनसूरी (बहरीन), प्रकाश वाडीकल समेत फिल्म की टीम को एशिया बुक
ऑफ रिकॉर्ड अवार्ड से नवाजा गया। फिल्म केरल, बनारस, हरिद्वार, ऋषिकेश
व गंगोत्री मे फिल्माई गई है।फिल्म
फरवरी 2019 में रिलीज होगी।
महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने खाद्य पदार्थों के भंडारण और डिस्ट्रीब्यूशन केंद्रों पर जांच तेज कर दी है।
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Samachar4media Bureau
महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने खाद्य पदार्थों के भंडारण और डिस्ट्रीब्यूशन केंद्रों पर जांच तेज कर दी है। खाद्य सुरक्षा से जुड़ी कई खामियां सामने आने के बाद प्रशासन ने पुणे जिले के चाकण स्थित रिलायंस रिटेल के एक वेयरहाउस का लाइसेंस रद्द कर दिया है। वहीं, खेड़ तालुका के निघोजे में Blinkit से जुड़े एक केंद्र का लाइसेंस निलंबित कर दिया गया है और उसका कामकाज रोक दिया गया है।
FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे के नेतृत्व में चल रही इस कार्रवाई का दायरा रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, रिलायंस रिटेल और जोमैटो हाइपरप्योर से जुड़े वेयरहाउस तक भी पहुंचा है। पुणे और ठाणे जिलों में इन केंद्रों की जांच की गई है। प्रशासन को इस बात का संदेह है कि इस्तेमाल के लायक नहीं बचे, खराब या अस्वीकृत खाद्य पदार्थ, जिन्हें नष्ट किया जाना था, कहीं दोबारा बाजार में तो नहीं पहुंचाए गए।
इस व्यापक कार्रवाई के दौरान FDA ने 48.08 लाख रुपये कीमत का 8,392 किलोग्राम सामान जब्त किया। इसके अलावा, पांच वेयरहाउस के लाइसेंस निलंबित किए गए और बिना लाइसेंस चल रहे दो प्रतिष्ठानों को काम बंद करने का आदेश दिया गया।
रिलायंस के वेयरहाउस में चूहे और कॉकरोच मिलने का दावा
प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (PTI) की रिपोर्ट के मुताबिक, 14 अक्टूबर को पुणे जिले के चाकण स्थित रिलायंस रिटेल के वेयरहाउस की जांच में कई गंभीर खामियां सामने आईं। अधिकारियों ने वहां चूहों की गतिविधियां देखीं। फर्श की दरारों में कॉकरोच भी मिले। इसके अलावा, कर्मचारियों के परिसर के अंदर थूकने की बात भी जांच में सामने आई।
अधिकारियों के मुताबिक, वेयरहाउस में एक्सपायरी डेट निकल चुके और खराब हो चुके खाद्य पदार्थों को दूसरे सामान से अलग नहीं रखा गया था। केंद्र के पास ऐसा सत्यापित प्रमाण भी नहीं था, जिससे यह साबित हो सके कि एक्सपायरी हो चुके सामान को नियमों के मुताबिक नष्ट किया गया है। हालांकि, वेयरहाउस ने कचरा निपटाने वाली एक एजेंसी के साथ समझौता होने की जानकारी दी थी।
इन खामियों के बाद FDA ने 15 अक्टूबर को वेयरहाउस का लाइसेंस रद्द कर दिया। इसके बाद नॉर्थ महालुंगे MIDC पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई।
Blinkit से जुड़े केंद्र में भी मिलीं खामियां
14 अक्टूबर को ही खेड़ तालुका के निघोजे में Linkit Commerce Pvt Ltd द्वारा संचालित एक वेयरहाउस की भी जांच की गई। इस केंद्र में खाद्य पदार्थों के भंडारण और कर्मचारियों के प्रशिक्षण को लेकर सवाल उठे।
FDA के अधिकारियों को वहां खाद्य पदार्थों के पैकेट लीक होते मिले और कॉकरोच की समस्या भी सामने आई। जांच में कोल्ड रूम का तापमान 5 डिग्री सेल्सियस से अधिक पाया गया। वेयरहाउस जरूरी तापमान पर सामान रखे जाने का रिकॉर्ड भी उपलब्ध नहीं करा सका।
भंडारण के तरीके में भी खामियां मिलीं। कच्चे और दूसरे खाद्य पदार्थों को एक साथ रखा गया था। अधिकारियों ने टाटा नमक के 50 किलोग्राम और सूजी के 60 किलोग्राम पैकेट सीधे फर्श पर रखे हुए पाए।
करीब 600 कर्मचारियों में से सिर्फ पांच ने लिया था प्रशिक्षण
वेयरहाउस में कर्मचारियों के प्रशिक्षण को लेकर भी चिंता जताई गई। रिपोर्ट के मुताबिक, वहां काम करने वाले करीब 600 कर्मचारियों में से केवल पांच ने खाद्य सुरक्षा प्रशिक्षण एवं प्रमाणन (FoSTaC) कार्यक्रम पूरा किया था।
FDA ने 15 अक्टूबर को इस केंद्र का लाइसेंस निलंबित कर दिया। इस मामले में साउथ महालुंगे MIDC पुलिस स्टेशन में भी FIR दर्ज की गई।
एक्सपायरी और खराब सामान दोबारा बाजार में पहुंचने की जांच
दोनों वेयरहाउस के खिलाफ कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब FDA उन खाद्य पदार्थों के निपटान की व्यापक जांच कर रहा है, जिन्हें बिक्री के लिए अनुपयुक्त घोषित किया गया था या जिन्हें नष्ट किया जाना था। इस कैंपेन के तहत पुणे और ठाणे में बड़े खुदरा कारोबारियों और खाद्य डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों से जुड़े केंद्रों की जांच की गई है।
नियामक को संदेह है कि नष्ट करने के लिए एजेंसियों को सौंपा गया एक्सपायरी, खराब या अस्वीकृत सामान बिचौलियों या बिना अनुमति वाले केंद्रों के जरिए दोबारा आपूर्ति श्रृंखला में पहुंचाया गया हो सकता है। FDA इसी आशंका की जांच कर रहा है कि ऐसा सामान कहीं फिर से बाजार में तो नहीं बेचा गया।
तुकाराम मुंढे के नेतृत्व में FDA की हालिया कार्रवाइयों में वेयरहाउस और खाद्य पदार्थों को संभालने वाले दूसरे केंद्रों में खाद्य सुरक्षा नियमों के पालन पर खास ध्यान दिया जा रहा है।
इस फिल्म के निर्देशक एवं पटकथा लेखक माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के सहायक प्राध्यापक डॉ. लोकेन्द्र सिंह हैं।
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Samachar4media Bureau
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के जीवन और ‘वंदेमातरम’ से जुड़े उनके ऐतिहासिक संघर्ष पर आधारित एआई शॉर्ट फिल्म ‘वंदेमातरम और डॉ. हेडगेवार’ का चयन प्रतिष्ठित ‘उज्जैनी शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल' (सीजन-4) में स्क्रीनिंग के लिए किया गया है। 24-25 अक्टूबर को उज्जैन में आयोजित फिल्म फेस्टिवल में इसकी स्क्रीनिंग होगी। इस फिल्म के निर्देशक एवं पटकथा लेखक माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के सहायक प्राध्यापक डॉ. लोकेन्द्र सिंह हैं। फिल्म की कहानी ऐतिहासिक तथ्यों और संस्मरणों पर आधारित है, जो आज की युवा पीढ़ी में राष्ट्रभक्ति की अलख जगाती है। उल्लेखनीय है कि यह साल वंदेमातरम की रचना का 150वाँ वर्ष और आरएसएस का शताब्दी वर्ष है।
फिल्म की पटकथा दर्शकों को 1905 के बंग-भंग आंदोलन और ब्रिटिश हुकूमत द्वारा लागू किए गए कुख्यात ‘रिस्ले सर्कुलर’ के दौर में ले जाती है। कहानी दर्शाती है कि कैसे अंग्रेजी सरकार द्वारा ‘वंदेमातरम’ के उद्घोष पर पाबंदी लगाने के बावजूद, 1907 में नील सिटी हाईस्कूल नागपुर के एक 18-19 वर्षीय किशोर केशव बलिराम हेडगेवार ने ब्रिटिश स्कूल इंस्पेक्टर के स्वागत में पूरी कक्षा से गगनभेदी ‘वंदेमातरम’ का नारा लगवा दिया था।
फिल्म में 1908 के रामपायली (बालाघाट, मध्य प्रदेश) में दशहरे के अवसर पर युवा केशव के ओजस्वी भाषण ‘सीमोल्लंघन’, उनके खिलाफ चले राजद्रोह के मुकदमे और परिवार द्वारा झेले गए दमन को भी बेहद मार्मिक ढंग से रेखांकित किया गया है। इसके अलावा 1930 के यवतमाल जंगल सत्याग्रह के दौरान अकोला जेल यात्रा के समय रेलवे स्टेशनों पर उमड़ी जनमेदिनी और ‘वंदेमातरम’ की गूंज, तथा 1937 में प्रांतीय सरकारों के दौर में इस राष्ट्रगीत के सम्मान की रक्षा के लिए डॉ. हेडगेवार के दृढ़ संकल्प को प्रभावशाली दृश्यों व संगीत के माध्यम से जीवंत किया गया है।
देशभक्ति और ऐतिहासिक चेतना का सशक्त दस्तावेज: फिल्म के निर्देशक लोकेन्द्र सिंह ने बताया कि ‘वंदेमातरम’ केवल एक गीत या नारा नहीं, बल्कि भारत की स्वाधीनता का बीज मंत्र और राष्ट्रीय चेतना की अमर ध्वनि है। डॉ. हेडगेवार का पूरा जीवन मातृभूमि की वंदना और इस मंत्र के सम्मान के लिए समर्पित रहा। यह लघु फिल्म दर्शकों को इतिहास के उन अनछुए और गौरवशाली पन्नों से रूबरू कराती है, जहाँ त्याग और राष्ट्रभक्ति सर्वोपरि थी। उन्होंने बताया कि यह उनकी पहली एआई फिल्म है। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व भी उनकी फिल्में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल में सराही जा चुकी हैं, जिनमें ‘बाचा : द राइजिंग विलेज’, ‘समिधा’, ‘गो-वर’ और ‘कद’ प्रमुख तौर पर शामिल हैं।
JioStar के वाइस चेयरमैन ने खेलों के मीडिया राइट्स की बढ़ती लागत, Disney Star के एक प्रीमियम क्रिकेट राइट के गलत आकलन और कमाई के नए मॉडल की जरूरत पर रखी अपनी बात
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खेलों की लोकप्रियता और उनसे होने वाली कमाई के बीच संतुलन होना जरूरी है। खेलों से दर्शकों को जितना रोमांच मिलता है, उनका आर्थिक मॉडल भी उसी के अनुरूप होना चाहिए। JioStar के वाइस चेयरमैन उदय शंकर ने APOS Sports Edge में खेल प्रसारण उद्योग की चुनौतियों पर बात करते हुए यह विचार रखा। उन्होंने खेलों के मीडिया राइट्स की बढ़ती कीमतों, विज्ञापन और सब्सक्रिप्शन से होने वाली कमाई तथा भारत में क्रिकेट से आगे दूसरे खेलों को विकसित करने की संभावनाओं पर भी चर्चा की।
उदय शंकर ने कहा कि खेलों के मीडिया राइट्स के बाजार में पिछले 15 से 17 वर्षों के दौरान बड़ा बदलाव आया है। पहले चार-पांच प्रमुख दावेदार राइट्स हासिल करने के लिए प्रतिस्पर्धा करते थे, लेकिन अब इस बाजार में बड़े दावेदारों की संख्या काफी कम रह गई है। उन्होंने कहा कि मीडिया राइट्स की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं, जबकि भारत में विज्ञापन और सब्सक्रिप्शन से होने वाली कमाई उस गति से नहीं बढ़ पाई है। सब्सक्राइबर्स की संख्या अधिक होने के बावजूद प्रति सब्सक्राइबर मिलने वाला राजस्व सीमित है। ऐसे में ब्रॉडकास्टर्स और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स के लिए खेलों के प्रसारण का कारोबार टिकाऊ बनाए रखना चुनौती बन रहा है।
उन्होंने Disney Star का उदाहरण देते हुए कहा कि कंपनी ने क्रिकेट के एक प्रीमियम मीडिया राइट की कीमत का आकलन करने में गलती की थी। उदय शंकर के मुताबिक, इस गलती से कंपनी पर इतना दबाव पड़ा कि मजबूत राजस्व होने के बावजूद उसके लिए इससे उबरना मुश्किल हो गया। उन्होंने कहा कि इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के अगले मीडिया राइट्स की बोली के दौरान कंपनियां अधिक अनुशासन बरत सकती हैं। वे उन प्रीमियम खेलों के राइट्स हासिल करने में भी ज्यादा सावधानी बरतेंगी, जिनके लिए पांच या दस साल पहले वे आक्रामक तरीके से बोली लगाने को तैयार रहती थीं।
उदय शंकर ने IPL को दर्शकों की पहुंच, लोकप्रियता और कारोबारी संभावनाओं के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि क्रिकेट भारत में राष्ट्रीय जुनून है और वीडियो कंटेंट देखने वाले लोगों की संख्या बढ़ने के साथ इसकी लोकप्रियता को भी फायदा मिलेगा। हालांकि, उनके मुताबिक, भारत में खेलों के बाजार को क्रिकेट से आगे बढ़ाने की भी बड़ी संभावना है। उन्होंने कबड्डी जैसे दूसरे खेलों का जिक्र करते हुए कहा कि बड़ी संख्या में दर्शकों का होना अपने आप में किसी खेल के कारोबार को टिकाऊ बनाने की गारंटी नहीं है। इसके लिए कमाई के प्रभावी मॉडल विकसित करना जरूरी है।
उदय शंकर ने प्रो कबड्डी लीग का उदाहरण देते हुए कहा कि किसी खेल को मुख्यधारा के पेशेवर कारोबार के रूप में विकसित करने के लिए लंबे समय तक निवेश और व्यवस्थित ढांचे की जरूरत होती है। कबड्डी भारत में पहले से लोकप्रिय था, लेकिन इसे पेशेवर लीग के रूप में स्थापित करने के लिए निवेश और संगठित प्रयास करने पड़े। उन्होंने कहा कि क्रिकेट के मुकाबले कई दूसरे खेलों में प्रतिभाओं की पहचान करने और उन्हें आगे बढ़ाने के लिए जरूरी सुविधाओं तथा संस्थागत सहयोग की कमी है। कबड्डी के लिए समर्पित स्टेडियम का अभाव भी बुनियादी ढांचे से जुड़ी चुनौतियों को दिखाता है। टूर्नामेंट आयोजित करने के लिए कई बार आयोजन स्थल तैयार करने पड़ते हैं और बाद में उन्हें हटाना पड़ता है।
क्रिकेट के व्यस्त कैलेंडर पर भी उदय शंकर ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि समस्या केवल मैचों की संख्या ज्यादा होने की नहीं है, बल्कि कई बार कार्यक्रम तैयार करते समय दर्शकों की रुचि को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जाता। बड़े मुकाबले दर्शकों को आकर्षित करते हैं, लेकिन जब शीर्ष रैंकिंग वाली टीमों का सामना काफी नीचे की रैंकिंग वाली टीमों से होता है, तो दर्शकों की दिलचस्पी कम हो सकती है। उन्होंने इस स्थिति की तुलना टेनिस से करते हुए कहा कि दुनिया के शीर्ष खिलाड़ी और 200वीं रैंकिंग के खिलाड़ी के बीच मुकाबले में दर्शकों की रुचि सीमित हो सकती है। उनके मुताबिक, क्रिकेट में ऐसे मैचों की अधिकता खेल के प्रति दर्शकों के उत्साह को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि बड़े मुकाबलों को देखने दर्शक आते हैं, लेकिन उनसे पर्याप्त कमाई कर पाना अलग चुनौती है।
खेलों के कारोबार को मजबूत बनाने के लिए उदय शंकर ने कमाई के नए तरीकों पर भी जोर दिया। उनके मुताबिक, केवल विज्ञापन और पारंपरिक सब्सक्रिप्शन पर निर्भर रहना मुश्किल होता जा रहा है। JioStar की रणनीति में कारोबारी चुनौतियों से निपटने के लिए तकनीक और रचनात्मकता को साथ लेकर चलना महत्वपूर्ण है। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का जिक्र करते हुए कहा कि इसकी भूमिका केवल कंटेंट तैयार करने की प्रक्रिया को तेज करने तक सीमित नहीं है। यह कंटेंट बनाने, दर्शकों तक पहुंचाने और उससे कमाई करने के तरीकों को भी बदल सकता है।
उदय शंकर ने कनेक्टेड टीवी (CTV) और मोबाइल पर कंटेंट देखने के बढ़ते चलन को भी अवसर के रूप में देखा। उन्होंने कहा कि पारंपरिक सैटेलाइट और केबल टीवी का कारोबार दबाव में है, जबकि कनेक्टेड टीवी और मोबाइल पर बढ़ती खपत दर्शकों तक पहुंचने के नए रास्ते खोल सकती है। उनके मुताबिक, अगले 10 से 15 वर्षों में भारत का खेल बाजार अधिक विविध हो सकता है। इसके लिए खेलों के मीडिया राइट्स रखने वाली संस्थाओं, ब्रॉडकास्टर्स और खेल संगठनों को लंबी अवधि की सोच के साथ प्रतिभाओं, बुनियादी ढांचे और दर्शकों की भागीदारी में निवेश करना होगा। साथ ही, खेलों के कारोबार को केवल लाइव मैचों तक सीमित रखने के बजाय उनसे जुड़े अन्य अवसरों से भी मूल्य तैयार करना होगा।
पत्रकार नितिन ठाकुर ने मीडिया के मौजूदा परिदृश्य को लेकर फेसबुक पर एक पोस्ट लिखी है, जिसमें उन्होंने डिजिटल मीडिया और टेलीविजन पत्रकारिता के बदलते स्वरूप पर तंज कसा है।
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पत्रकार नितिन ठाकुर ने मीडिया के मौजूदा परिदृश्य को लेकर फेसबुक पर एक पोस्ट लिखी है, जिसमें उन्होंने डिजिटल मीडिया और टेलीविजन पत्रकारिता के बदलते स्वरूप पर तंज कसा है। उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में सामने आई है, जब डिजिटल प्लेटफॉर्म मीडिया इंडस्ट्री का एक अहम हिस्सा बन चुके हैं और बड़ी संख्या में पत्रकार टीवी से डिजिटल मीडिया की ओर रुख कर चुके हैं।
नितिन ठाकुर ने अपनी पोस्ट में कहा है कि डिजिटल मीडिया से जुड़े लोग आखिरकार उसी मुकाम पर पहुंच गए हैं, जहां पहुंचने के लिए वे पहले टीवी पत्रकारों की आलोचना किया करते थे। उन्होंने इस बदलाव को दिलचस्प बताते हुए कहा कि इनमें से अधिकतर लोग ऐसे हैं, जो पहले टेलीविजन पत्रकारिता का हिस्सा थे और अब डिजिटल मीडिया में काम कर रहे हैं।
नितिन ठाकुर ने अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखा है, “मुझे इस बात की बेहद खुशी है कि डिजिटल वाले आखिर वहीं आ गए जहां पहुंचने के लिए वो टीवी वालों को हर तरह की गालियां देते थे। ज़्यादा मज़ेदार ये है कि इनमें अधिकतर वही हैं जो कभी टीवी में थे और अब डिजिटल में हैं। एक चक्र पूरा हुआ। इति!!”
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नसीम अहमद दिवाली का विज्ञापन लेने फ्लोर मिल गए थे, जहां विवाद के बाद उनके साथ जमकर मारपीट की गई, जिससे उनकी मौत हो गई।
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उत्तर प्रदेश के हापुड़ में पत्रकार मोहम्मद नसीम अहमद की हत्या का मामला सामने आया है। आरोप है कि 18 अक्टूबर को जरौठी रोड स्थित एक फ्लोर मिल में दिवाली के विज्ञापन को लेकर विवाद के बाद उनके साथ कथित तौर पर मारपीट की गई। गंभीर हालत में उन्हें गढ़ रोड स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नसीम अहमद जनवाणी अखबार से जुड़े हुए थे और अपने कुछ साथियों के साथ फ्लोर मिल पहुंचे थे। उनके साथ मौजूद सलाउद्दीन ने आरोप लगाया कि दिवाली के विज्ञापन को लेकर वहां कहासुनी हुई। इसी दौरान कुछ लोगों ने कथित तौर पर नसीम अहमद और उनके साथियों को फर्जी पत्रकार कहा, जिसके बाद विवाद बढ़ गया।
घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। हापुड़ के पुलिस अधीक्षक मधुबन कुमार सिंह ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया और मामले की जांच के निर्देश दिए।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नसीम अहमद के दामाद डॉ. शाहरुख की शिकायत पर हापुड़ देहात थाने में चार नामजद और कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने मामले में कुछ लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नसीम अहमद की छोटी बेटी की शादी 14 नवंबर को होनी थी। उनकी मौत की खबर के बाद परिवार में शोक का माहौल है।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने मीडिया से कहा है कि वह उन नेताओं को उनके पुराने बयान याद दिलाए, जिन्होंने कभी कहा था कि अगर वे सत्ता में नहीं आए तो अपनी पार्टी भंग कर देंगे।
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कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने मीडिया से कहा है कि वह उन नेताओं को उनके पुराने बयान याद दिलाए, जिन्होंने कभी कहा था कि अगर वे सत्ता में नहीं आए तो अपनी पार्टी भंग कर देंगे। उन्होंने कहा कि मीडिया को यह भी याद दिलाना चाहिए कि उन नेताओं ने बाद में क्या किया और बीजेपी (BJP) व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को लेकर पहले क्या-क्या कहा था।
शिवकुमार रविवार शाम मैसूरु में कंबाला कार्यक्रम का उद्घाटन करने पहुंचे थे। इस दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने यह बात कही।
2028 में सत्ता में आने के दावे पर दिया जवाब
सीएम शिवकुमार की यह टिप्पणी केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी के उस बयान के जवाब में आई, जिसमें उन्होंने कहा था कि बीजेपी-जेडी(एस) गठबंधन 2028 में कर्नाटक की सत्ता में वापसी करेगा। इस पर शिवकुमार ने कहा कि मीडिया को नेताओं के पुराने बयानों का फ्लैशबैक दिखाना चाहिए, ताकि लोगों को याद रहे कि पहले उन्होंने क्या कहा था और बाद में उनका रुख क्या रहा।
जब शिवकुमार से कुमारस्वामी के उस बयान पर प्रतिक्रिया मांगी गई, जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्हें अपना एक अलग रूप दिखाना पड़ सकता है, तो मुख्यमंत्री ने इस पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, “मैं बड़े लोगों के बारे में बात नहीं करना चाहता।” इसके बाद वह हाथ जोड़कर वहां से चले गए।
गन्ना किसानों के मुद्दे पर क्या बोले शिवकुमार?
गन्ना किसानों की मांगों को लेकर पूछे गए सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने का समय मांगा है। वह गन्ने की कीमत बढ़ाने और सूखे से राहत जैसे मुद्दों पर प्रधानमंत्री से चर्चा करना चाहते हैं, क्योंकि इन मामलों में केंद्र सरकार का सहयोग जरूरी है।
शिवकुमार ने कहा कि अगर सभी राजनीतिक दल सहमत होते हैं, तो वह एक प्रतिनिधिमंडल को भी साथ लेकर जाएंगे। उन्होंने गन्ना किसानों से अपना विरोध-प्रदर्शन वापस लेने की अपील करते हुए कहा, “मैं किसानों के मुद्दे पर राजनीति करने के लिए तैयार नहीं हूं।”
दिल्ली पुलिस ने SIR प्रदर्शन से जुड़े कथित भ्रामक दावों, अफवाहों और फर्जी वीडियो प्रसारित करने के आरोप में 37 से ज्यादा सोशल मीडिया अकाउंट की पहचान की है।
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Samachar4media Bureau
दिल्ली पुलिस ने SIR प्रदर्शन से जुड़े कथित भ्रामक दावों, अफवाहों और फर्जी वीडियो प्रसारित करने के आरोप में 37 से ज्यादा सोशल मीडिया अकाउंट की पहचान की है। इनमें 17 अकाउंट दक्षिणपंथी संगठनों से जुड़े बताए गए हैं। पुलिस ने इस मामले में एफआईआर (FIR) भी दर्ज की हैं और कुछ अकाउंट के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है।
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस अधिकारी ने रविवार को यह जानकारी दी। अधिकारी के अनुसार, अब तक 17 सोशल मीडिया अकाउंट के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत कार्रवाई की गई है। इन अकाउंट पर लोगों को भड़काने और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने का आरोप है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को पोस्ट हटाने का नोटिस
पुलिस ने संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को नोटिस भेजकर कथित भ्रामक पोस्ट हटाने के लिए कहा है। इसके अलावा, X से उन उपयोगकर्ताओं की जानकारी मांगी गई है, जिन पर फर्जी वीडियो अपलोड करने का आरोप है।
पुलिस के मुताबिक, इन पोस्ट और वीडियो से सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका थी। जांच के दौरान ऐसे कई अकाउंट की भी पहचान की गई है, जिन पर प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाने और प्रदर्शन को लेकर भ्रामक जानकारी फैलाने का आरोप है।
पुलिस कुछ अन्य अकाउंट की भी जांच कर रही है, जिन पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई को लेकर कथित रूप से फर्जी सामग्री साझा करने का आरोप है।
AI से बनाई गईं ACP और महिला पत्रकार की तस्वीरें
इस मामले में दर्ज एफआईआर में से एक के आधार पर पुलिस ने कुछ सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं को गिरफ्तार किया है। उन पर सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) विवेक भगत और एक महिला पत्रकार की AI से बनाई गई तस्वीरें तैयार करने और उन्हें प्रसारित करने का आरोप है।
पुलिस के मुताबिक, इन तस्वीरों के जरिए कथित तौर पर यह दिखाने की कोशिश की गई थी कि महिला पत्रकार को परेशान किया जा रहा है। जांचकर्ताओं ने तस्वीरों की जांच की और उन्हें AI से तैयार किया गया पाया। यह मामला उस शिकायत से जुड़ा है, जिसमें महिला पत्रकार ने आरोप लगाया था कि 3 अक्टूबर को जंतर-मंतर के पास प्रदर्शन की रिपोर्टिंग के दौरान ACP विवेक भगत ने उनका यौन उत्पीड़न किया था।
दूसरी ओर, विवेक भगत ने भी महिला पत्रकार के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद 13 अक्टूबर को कथित जातिसूचक टिप्पणियां करने के आरोप में महिला पत्रकार के खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (SC/ST) अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत एफआईआर दर्ज की गई। इस मामले में दोनों पक्षों की शिकायतों और आरोपों की जांच की जा रही है।
प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाने वाले अकाउंट भी जांच के दायरे में
पुलिस के अनुसार, जांच में ऐसे कई दक्षिणपंथी सोशल मीडिया अकाउंट सामने आए हैं, जिनसे प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाते हुए पोस्ट और रील साझा की गईं। पुलिस का आरोप है कि कुछ पोस्ट में प्रदर्शनों को गलत तरीके से पेश किया गया।
इसके अलावा, प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई से संबंधित कथित रूप से मनगढ़ंत सामग्री साझा करने वाले दूसरे अकाउंट की भी पहचान की गई है।
पुलिस विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर गतिविधियों की निगरानी कर रही है। अधिकारी के मुताबिक, मामले की जांच अभी जारी है और आगे भी कार्रवाई की जा सकती है।
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने राइस ब्रान (चावल की भूसी) से बनने वाले तेल (Rice Bran Oil) के स्वास्थ्य संबंधी दावों को लेकर तीन कंपनियों को नोटिस जारी किया है।
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Samachar4media Bureau
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने राइस ब्रान (चावल की भूसी) से बनने वाले तेल (Rice Bran Oil) के स्वास्थ्य संबंधी दावों को लेकर तीन कंपनियों को नोटिस जारी किया है। इनमें हैदराबाद की Gemini Edibles & Fats India Ltd, BigBasket और Flipkart शामिल हैं। नियामक के मुताबिक, कंपनियों की ओर से ‘Freedom Cooking Rice Bran Oil’ को लेकर किए गए कुछ दावे भ्रामक हो सकते हैं और तय नियमों के तहत इनकी अनुमति नहीं है।
समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, FSSAI ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इन नोटिसों की जानकारी दी। BigBasket का संचालन करने वाली कंपनी Innovative Retail Concepts और Flipkart India को भी इस मामले में नोटिस जारी किया गया है।
कोलेस्ट्रॉल कम करने के दावे पर उठे सवाल
FSSAI के मुताबिक, ‘Freedom Cooking Rice Bran Oil’ का प्रचार ई-कॉमर्स मंचों और सोशल मीडिया पर कुछ स्वास्थ्य संबंधी दावों के साथ किया जा रहा था। इनमें “खराब कोलेस्ट्रॉल कम करने और अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बनाए रखने या बढ़ाने” जैसे दावे शामिल थे। इसके अलावा, उत्पाद में “10,000 से अधिक पीपीएम प्राकृतिक ओराइज़नॉल” होने की बात भी कही गई थी।
नियामक ने कहा कि कोलेस्ट्रॉल और दिल की सेहत से जुड़े ये दावे खाद्य तेलों, खासकर चावल की भूसी के तेल के लिए लागू विज्ञापन और दावों से जुड़े नियमों के तहत अनुमत नहीं पाए गए।
FSSAI के विज्ञापन और दावे संबंधी नियम 2018 के तहत खाद्य उत्पादों के बारे में किए जाने वाले दावों को तय मानकों का पालन करना होता है। कंपनियों को अपने उत्पादों के प्रचार में ऐसे दावे नहीं करने चाहिए, जिनकी संबंधित नियमों के तहत अनुमति नहीं है।
अपनी वेबसाइट पर लाइसेंस को लेकर भी सवाल
FSSAI ने Gemini Edibles & Fats India के मामले में एक और कमी की ओर ध्यान दिलाया है। नियामक के मुताबिक, कंपनी अपनी ई-कॉमर्स वेबसाइट के जरिए खाद्य उत्पादों की पेशकश और बिक्री कर रही थी, लेकिन उसके पास इस गतिविधि को कवर करने वाला वैध केंद्रीय लाइसेंस दिखाई नहीं दिया।
इस मामले में तीनों खाद्य कारोबार संचालकों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। उनसे पूछा गया है कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जानी चाहिए। हालांकि, नोटिस जारी होने का मतलब यह नहीं है कि कंपनियों के खिलाफ अंतिम कार्रवाई हो चुकी है। नियामक की ओर से उठाए गए सवालों पर कंपनियों का जवाब और आगे की कार्रवाई इस मामले में अहम होगी।
दो अन्य कंपनियों पर भी कार्रवाई
FSSAI ने खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन से जुड़े दो अन्य मामलों में भी कार्रवाई की है। नियामक ने निरीक्षण के दौरान गंभीर कमियां पाए जाने के बाद DNV Food Products Ltd का लाइसेंस निलंबित कर दिया है। निरीक्षण में साफ-सफाई, स्वच्छता, खाद्य उत्पादों के भंडारण और लाइसेंस से जुड़े नियमों के पालन में कमियां सामने आई थीं।
इसके अलावा, Jhanvittanni का लाइसेंस भी रद्द कर दिया गया है। FSSAI के मुताबिक, इस कंपनी की ओर से खाद्य सुरक्षा नियमों और विनियमों का लगातार पालन नहीं किया जा रहा था। इन कार्रवाइयों के जरिए नियामक ने खाद्य उत्पादों की बिक्री, उनके प्रचार और कारोबार से जुड़े लाइसेंस नियमों के पालन पर अपना रुख स्पष्ट किया है।
फ्रिट्ज फर्नांडिस महिंद्रा एक्सपीरियंसेज से जुड़ गए हैं। 17 वर्षों से अधिक अनुभव वाले फर्नांडिस इवेंट्स और पार्टनरशिप्स की जिम्मेदारी संभालेंगे। इससे पहले वह पीवीआर लिमिटेड में प्रमुख थे।
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Samachar4media Bureau
फ्रिट्ज फर्नांडिस (Fritz Fernandes) महिंद्रा ग्रुप (Mahindra Group) से जुड़ गए हैं। उन्होंने महिंद्रा एक्सपीरियंसेज (Mahindra Experiences) में इवेंट्स और पार्टनरशिप्स के प्रमुख की जिम्मेदारी संभाली है। फर्नांडिस ने लिंक्डइन (LinkedIn) पोस्ट के जरिए अपने नए पद की जानकारी साझा की।
फर्नांडिस के पास लग्जरी लाइफस्टाइल, हॉस्पिटैलिटी, म्यूजिक, स्पोर्ट्स और सिनेमा के क्षेत्र में 17 वर्षों से अधिक का अनुभव है। उनके करियर में बिजनेस बनाने के साथ कंज्यूमर्स के लिए नए एक्सपीरियंसेज तैयार करने पर खास फोकस रहा है।
महिंद्रा ग्रुप में शामिल होने से पहले वह पीवीआर लिमिटेड (PVR Limited) में वाइस प्रेसिडेंट और एक्सपीरियंसेज के प्रमुख के पद पर काम कर रहे थे।
अपने करियर में फर्नांडिस द बे क्लब-मुंबई (The Bay Club-Mumbai), कैडिला फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड (Cadila Pharmaceuticals Limited), कोंडे नास्ट इंडिया (Condé Nast India), फुटबॉल स्पोर्ट्स डेवलपमेंट लिमिटेड (Football Sports Development Limited), डीएनए नेटवर्क्स (DNA Networks) और ईएमआई म्यूजिक (EMI Music) जैसी कंपनियों में भी अलग-अलग भूमिकाओं में काम कर चुके हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने बच्चों को सोशल मीडिया के खतरों से बचाने के लिए राष्ट्रीय नियम बनाने की मांग वाली जनहित याचिका पर केंद्र और NCPCR से जवाब मांगा है।
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Samachar4media Bureau
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को बच्चों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से जुड़े कथित खतरों से बचाने के लिए एक व्यापक और सख्ती से लागू किए जा सकने वाले राष्ट्रीय ढांचे की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) पर केंद्र सरकार और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) से जवाब मांगा है। यह याचिका इंदौर के एमराल्ड हाइट्स इंटरनेशनल स्कूल और उसके अकादमिक निदेशक सिद्धार्थ सिंह गिरनार ने दाखिल की है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, कानून एवं न्याय मंत्रालय और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग को नोटिस जारी किए। वैभव चौधरी की ओर से दाखिल इस याचिका को सुप्रीम कोर्ट में पहले से लंबित एक अन्य याचिका के साथ जोड़ दिया गया है। अब इस मामले पर 7 दिसंबर को सुनवाई होगी।
याचिका में अदालत से उचित आदेश जारी करने की मांग की गई है। इसमें कहा गया है कि बच्चों को सोशल मीडिया के संभावित खतरों से प्रभावी सुरक्षा देने में संबंधित पक्षों की लगातार नाकामी मनमानी और अनुचित है। याचिका के मुताबिक, यह संविधान के अनुच्छेद 14, 15(3), 21 और 21A का उल्लंघन करती है।
इन खतरों में बच्चों को बहला-फुसलाकर अपने जाल में फंसाना, यौन शोषण, साइबर बुलिंग यानी इंटरनेट पर परेशान करना, उम्र के लिहाज से अनुचित और नुकसान पहुंचाने वाली सामग्री दिखना, बच्चों के व्यवहार के आधार पर उनकी प्रोफाइल तैयार करना और ऐसे फीचर शामिल हैं, जो उन्हें लंबे समय तक प्लेटफॉर्म इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित करते हैं।
सोशल मीडिया इस्तेमाल के लिए उम्र तय करने की मांग
याचिका में बच्चों की उम्र की अनिवार्य जांच, उनकी उम्र के हिसाब से सोशल मीडिया तक पहुंच, माता-पिता की सत्यापित सहमति और बच्चों को साइबर बुलिंग, यौन शोषण, हानिकारक सामग्री और सोशल मीडिया के जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल से बचाने के लिए मजबूत सुरक्षा उपाय लागू करने की मांग की गई है।
याचिकाकर्ता ने केंद्र सरकार को बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए एक अलग, व्यापक और कानूनी रूप से लागू किए जा सकने वाले नियामक ढांचे को तैयार करने, अधिसूचित करने और लागू करने का निर्देश देने की भी मांग की है।
याचिका में कहा गया है कि अदालत केंद्र सरकार को निर्देश दे कि तय की जाने वाली उम्र से कम बच्चों के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इस्तेमाल करने पर रोक लगाई जाए। वहीं, निर्धारित उम्र से अधिक के बच्चों के लिए इन प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल को उचित नियमों के तहत नियंत्रित किया जाए।
इसके अलावा, याचिका में मांग की गई है कि केंद्र सरकार तय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बच्चों के खाते बनाने, उन्हें बनाए रखने और इस्तेमाल करने के लिए उम्र के आधार पर उचित पाबंदियां तैयार करे और उन्हें लागू करे।
बच्चों पर सोशल मीडिया के असर को लेकर चिंता
याचिका में ऐसे कई मामलों का जिक्र किया गया है, जिनमें कम उम्र के बच्चे सोशल मीडिया खाते चला रहे हैं, अनजान लोगों के संपर्क में आ रहे हैं और उन्हें इंटरनेट पर परेशान किया जा रहा है। इसमें मोबाइल फोन का लंबे समय तक इस्तेमाल करने के कारण बच्चों की नींद पूरी न होने और एकाग्रता कम होने की समस्या भी उठाई गई है।
याचिका के मुताबिक, माता-पिता ने बच्चों के जरूरत से ज्यादा स्क्रीन देखने, ऑनलाइन लोकप्रियता को लेकर चिंता करने, अपने शरीर और रूप-रंग को लेकर असहज महसूस करने, दूसरों से दूरी बनाने और पढ़ाई तथा बाहर की गतिविधियों में रुचि कम होने जैसी समस्याओं पर भी चिंता जताई है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि स्कूल और माता-पिता अकेले इस समस्या से नहीं निपट सकते। इसकी वजह यह है कि सोशल मीडिया से जुड़े खतरे सिर्फ इंटरनेट पर उपलब्ध सामग्री तक सीमित नहीं हैं। इन प्लेटफॉर्म की बनावट और काम करने का तरीका भी बच्चों को लंबे समय तक इनसे जुड़े रहने के लिए प्रोत्साहित करता है।
बच्चों के लिए कई तरह के खतरे
याचिका में कहा गया है कि बच्चे सोशल मीडिया पर कई तरह के खतरों के प्रति खास तौर पर संवेदनशील होते हैं। इनमें बच्चों को बहला-फुसलाकर अपने जाल में फंसाना, यौन शोषण, ब्लैकमेल करना, किसी और की पहचान अपनाकर धोखा देना, निजी तस्वीरों का प्रसार और हिंसक, यौन रूप से स्पष्ट या खुद को नुकसान पहुंचाने से जुड़ी सामग्री के संपर्क में आना शामिल है।
याचिकाकर्ता ने इन खतरों से बच्चों को बचाने के लिए उम्र के आधार पर नियम बनाने और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल को नियंत्रित करने वाला एक मजबूत राष्ट्रीय ढांचा तैयार करने की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल संबंधित मंत्रालयों और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 7 दिसंबर को होगी।