डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की मीडिया कंपनी TMTG को अप्रैल-जून में 2,261 करोड़ रुपये का घाटा हुआ। छह महीने में कंपनी का घाटा 6,118 करोड़ रुपये रहा।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की मीडिया कंपनी ट्रंप मीडिया एंड टेक्नोलॉजी ग्रुप (Trump Media & Technology Group-TMTG) को 2026 की दूसरी तिमाही में बड़ा घाटा हुआ है। अप्रैल से जून के बीच कंपनी को 2,261 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, जबकि इस दौरान उसकी कुल कमाई सिर्फ 16.15 करोड़ रुपये रही।
जनवरी से जून 2026 तक की छह महीने की अवधि में TMTG का कुल नेट लॉस 6,118 करोड़ रुपये रहा। इस दौरान कंपनी की कमाई 23.75 करोड़ रुपये रही। यानी छह महीने में कंपनी का घाटा उसकी कुल कमाई से करीब 258 गुना ज्यादा रहा।
कंपनी ने अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (Securities and Exchange Commission-SEC) को दी रिपोर्ट में बताया कि अप्रैल-जून का घाटा पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में काफी बढ़ गया है।
डिजिटल एसेट्स से बड़ा नुकसान
TMTG के घाटे की सबसे बड़ी वजह डिजिटल एसेट्स और शेयरों की कीमत में गिरावट रही। इनकी वैल्यू कम होने से कंपनी को करीब 1,809 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इसके अलावा कंपनी पर करीब 111 करोड़ रुपये का ब्याज खर्च और 77 करोड़ रुपये का शेयर आधारित भुगतान खर्च भी आया।
वहीं, कंपनी की कमाई काफी कम रही। अप्रैल-जून के दौरान उसे विज्ञापन से करीब 13.6 करोड़ रुपये और सब्सक्रिप्शन से 1.7 करोड़ रुपये की आय हुई। TMTG का मुख्य प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल (Truth Social) है। कंपनी इसके अलावा ट्रुथ+ (Truth+) वीडियो स्ट्रीमिंग और ट्रुथ.एफआई (Truth.Fi) फिनटेक कारोबार भी चलाती है। पिछले एक साल में कंपनी ने क्रिप्टोकरेंसी कारोबार में भी विस्तार किया है।
ट्रुथ सोशल की पहुंच में भी गिरावट
डोनाल्ड ट्रंप ने 2022 में ट्रुथ सोशल लॉन्च किया था। यह उनका अपना सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म है, लेकिन यह एक्स (X) और फेसबुक (Facebook) जैसी बड़ी सोशल मीडिया कंपनियों के स्तर तक नहीं पहुंच पाया है।
न्यूयॉर्क टाइम्स (The New York Times) ने ऑनलाइन आंकड़े जुटाने वाली कंपनी सिमिलरवेब (Similarweb) के आंकड़ों के हवाले से बताया कि जुलाई 2026 में ट्रुथ सोशल की वेबसाइट पर आने वाले लोगों की संख्या पिछले साल की तुलना में एक तिहाई से ज्यादा कम हो गई।
TMTG के शेयर अमेरिकी शेयर बाजार नैस्डैक (Nasdaq) पर DJT नाम से कारोबार करते हैं। कंपनी के खराब वित्तीय नतीजे सामने आने के बाद सोमवार को इसके शेयर करीब 8 फीसदी गिर गए।
ट्रंप की पोस्ट से कमाई का नया रास्ता
TMTG ने 1 अगस्त से ट्रुथ एपीआई (Truth API) नाम की नई सर्विस शुरू की है। इसके जरिए कंपनियों को ट्रुथ सोशल पर ट्रंप की पोस्ट सीधे और तेजी से उपलब्ध कराई जाती हैं।
कंपनी के अंतरिम सीईओ (Interim CEO) केविन मैकगर्न (Kevin McGurn) के मुताबिक, अब तक 10 कंपनियां इस सर्विस से जुड़ चुकी हैं। इसके लिए कंपनियां हर महीने करीब 57 लाख से 95 लाख रुपये तक का भुगतान कर रही हैं।
इस सर्विस में कंपनियों की दिलचस्पी की एक वजह ट्रंप की सोशल मीडिया पोस्ट का शेयर बाजार पर पड़ने वाला असर है। उदाहरण के तौर पर अगर ट्रंप किसी देश पर नया टैरिफ लगाने की घोषणा सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए करते हैं, तो उससे संबंधित कंपनियों या उस देश के शेयरों में तुरंत बदलाव देखने को मिल सकता है।
ऐसे में ट्रंप की पोस्ट बाकी लोगों से पहले मिलना कंपनियों के लिए अहम हो सकता है। इससे उन्हें बाजार की स्थिति को समझने और निवेश से जुड़े फैसले लेने के लिए कुछ अतिरिक्त समय मिल सकता है।
FMCG कंपनी Emami Limited के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक 17 सितंबर 2026 को होने जा रही है।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
FMCG कंपनी Emami Limited के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक 17 सितंबर 2026 को होने जा रही है। इस बैठक में कंपनी के पूरी तरह चुकता (Fully Paid-up) इक्विटी शेयरों के बायबैक के प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा।
कंपनी ने इस बैठक की जानकारी 14 सितंबर 2026 को शेयर बाजारों को दी है। बोर्ड बैठक में शेयर बायबैक से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा और विचार किया जाएगा।
यह प्रस्ताव Companies Act, 2013 की धारा 68, 69 और 70 के प्रावधानों के तहत रखा गया है। इसके साथ ही यह SEBI (Buy-back of Securities) Regulations, 2018, जिसमें समय-समय पर बदलाव किए गए हैं, के अनुरूप भी होगा।
Emami ने यह सूचना SEBI (Listing Obligations and Disclosure Requirements) Regulations, 2015 के Regulation 29 के तहत जारी की है। कंपनी ने कहा है कि 17 सितंबर को बोर्ड बैठक खत्म होने के बाद बैठक में लिए गए फैसले की जानकारी स्टॉक एक्सचेंजों को दी जाएगी।
BW Disrupt की ओर से BW Disrupt Founders’ Forum और BW Disrupt 40 Under 40 Awards 2026 का आयोजन 15 सितंबर को नई दिल्ली के The Park में किया जाएगा।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
BW Disrupt की ओर से BW Disrupt Founders’ Forum और BW Disrupt 40 Under 40 Awards 2026 का आयोजन 15 सितंबर को नई दिल्ली के The Park में किया जाएगा। BW Businessworld के सहयोग से होने वाले इस कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 10:30 बजे से होगी। इस बार कार्यक्रम की थीम “Towards India’s Next Growth Decade” रखी गई है।
कार्यक्रम में देश के कई स्टार्टअप फाउंडर्स, निवेशक और बिजनेस लीडर्स एक साथ जुटेंगे। फोरम की शुरुआत BW Businessworld के चेयरमैन और एडिटर-इन-चीफ और Exchange4media Group के फाउंडर डॉ. अनुराग बत्रा के संबोधन से होगी। वह इस बात पर चर्चा करेंगे कि क्या भारत की स्टार्टअप अर्थव्यवस्था 2030 तक देश की GDP में 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर का योगदान दे सकती है।
स्टार्टअप और ग्रोथ पर चर्चा
फोरम में भारत में बदलते बिजनेस और ग्रोथ के माहौल पर कई अहम चर्चाएं होंगी। “The New Grammar of Growth: Capital, Conviction and Companies That Endure” सेशन में फाउंडर्स और बिजनेस लीडर्स इस बात पर चर्चा करेंगे कि बदलते माहौल में लंबे समय तक टिकने वाली कंपनियां खड़ी करने के लिए किन चीजों की जरूरत है।
इसके बाद “Bharat’s Billion-Consumer Opportunity” सेशन में भारत में तेजी से बदलते कंज्यूमर मार्केट और नई पीढ़ी के ब्रांड्स के लिए मौजूद अवसरों पर चर्चा होगी। इस सेशन में Digio के को-फाउंडर और CEO अभिनव पाराशर, Globizera Services FZCO की फाउंडर और CEO स्वाति बाबेल, Dogsee Chew की को-फाउंडर और CMO स्नेह शर्मा, Cumin Co की को-फाउंडर और CMO निहारिका जोशी और WickedGud के फाउंडर और CEO भुमन दानी समेत अन्य वक्ता शामिल होंगे।
दोपहर के सत्रों में भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर और निवेश के अवसरों पर फोकस रहेगा। “Inside India’s Manufacturing Moment: Founders, Factories and The Future” सेशन में मैन्युफैक्चरिंग, एनर्जी और इंडस्ट्रियल बिजनेस से जुड़े अवसरों पर चर्चा की जाएगी।
निवेश के बदलते दौर पर भी चर्चा
इसके बाद “The Great Capital Reset” सेशन में निवेश के बदलते पैटर्न और वेंचर कैपिटल के अगले दौर पर चर्चा होगी। इसमें Fundamentum के को-फाउंडर और जनरल पार्टनर आशीष कुमार, Orios Venture Partners की को-फाउंडर सुखमनी बेदी, VG Capital की को-फाउंडर और मैनेजिंग पार्टनर Ntasha और 247VC के फाउंडर और जनरल पार्टनर शशांक रांदेव शामिल होंगे।
फोरम का अंतिम सेशन “The Decade-Builders: What Will India’s 40 Under 40 Leave Behind?” होगा। इसमें अगली पीढ़ी के उद्यमियों की ओर से बनाई जा रही कंपनियों और उनकी क्षमताओं पर चर्चा की जाएगी।
40 Under 40 Awards का 10वां संस्करण
कार्यक्रम का समापन BW Disrupt 40 Under 40 Awards 2026 के 10वें संस्करण के साथ होगा। इन पुरस्कारों के जरिए उन युवा लीडर्स को सम्मानित किया जाएगा, जो नए बिजनेस खड़े कर रहे हैं, नई कैटेगरी बना रहे हैं और भारत के बदलते उद्यमिता के माहौल में योगदान दे रहे हैं।
इस बार का आयोजन खास है क्योंकि यह 40 Under 40 Awards का 10वां संस्करण है। कार्यक्रम में एक दशक के दौरान उभरते बिजनेस लीडर्स की उपलब्धियों को सेलिब्रेट किया जाएगा और इस बात पर भी फोकस रहेगा कि भारत के अगले विकास दशक में उद्यमियों और कंपनियों से किस तरह की भूमिका की उम्मीद होगी।
BW Disrupt और BW Businessworld के सहयोग से BW Disrupt 40 Under 40 Awards 2026 के 10वें संस्करण का आयोजन नई दिल्ली के 'दि पार्क' होटल में आज कर रहा है।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
BW Disrupt और BW Businessworld के सहयोग से BW Disrupt 40 Under 40 Awards 2026 के 10वें संस्करण का आयोजन नई दिल्ली के 'दि पार्क' होटल में आज कर रहा है। यह संस्करण खास है, क्योंकि इसके साथ युवा उद्यमियों और उभरते बिजनेस लीडर्स को पहचान देने के इस मंच को एक दशक पूरा हो जाएगा।
एक दशक से उभरती प्रतिभाओं की पहचान
BW Disrupt 40 Under 40 Awards की शुरुआत से ही कोशिश रही है कि ऐसे युवा लीडर्स को पहचान दी जाए, जो अपने करियर या बिजनेस के शुरुआती दौर में कुछ अलग कर रहे हैं। यह मंच उन लोगों को सामने लाता है, जिनके बिजनेस, आइडिया और नेतृत्व में लंबे समय तक असर डालने की क्षमता दिखाई देती है।
10वें संस्करण में भी अलग-अलग सेक्टर में काम कर रहे युवा लीडर्स पर फोकस किया जाएगा। ये ऐसे लोग हैं जो भारत के बदलते उद्यमिता के माहौल में अपने काम के जरिए योगदान दे रहे हैं।
कई स्तरों पर होता है मूल्यांकन
BW Disrupt 40 Under 40 Awards के लिए उम्मीदवारों का चयन एक से ज्यादा स्तरों वाली ज्यूरी और मूल्यांकन प्रक्रिया के जरिए किया जाता है। इसमें सिर्फ किसी बिजनेस का आकार या उसकी लोकप्रियता ही नहीं देखी जाती, बल्कि कई दूसरे पहलुओं को भी ध्यान में रखा जाता है।
इस प्रक्रिया में बिजनेस की गुणवत्ता, उद्यमी का सफर, इनोवेशन, नेतृत्व, प्रभाव और आगे लंबे समय तक ग्रोथ की क्षमता जैसे पहलुओं का आकलन किया जाता है। इसके बाद कई चरणों के मूल्यांकन के आधार पर अंतिम विजेताओं का चयन किया जाता है।
इसका मकसद सिर्फ सफल युवा प्रोफेशनल्स और उद्यमियों को चुनना नहीं है, बल्कि ऐसे लोगों की पहचान करना है, जिनके काम में अपने सेक्टर को आगे बढ़ाने, प्रभाव डालने और भविष्य को आकार देने की क्षमता दिखाई देती है।
कई नाम बना चुके हैं पहचान
पिछले एक दशक में BW Disrupt 40 Under 40 भारत में उभरते उद्यमियों और बिजनेस लीडर्स को पहचान देने वाला एक प्रमुख मंच बन गया है। इसके पहले के संस्करणों में boAt के अमन गुप्ता, Mamaearth की गजल अलघ, Libas के सिद्धार्थ केशवानी, Porter के प्रणव गोयल, InsuranceDekho के अंकित, iQOO India के निपुण मरिया और Blue Tokai Coffee के शिवम शाही जैसे नाम शामिल रहे हैं।
इनमें से कई लोगों को उनके शुरुआती दौर में पहचान मिली थी और बाद में उन्होंने अपने बिजनेस को आगे बढ़ाया, नई कैटेगरी में अपनी जगह बनाई और भारत के स्टार्टअप व बिजनेस इकोसिस्टम में प्रमुख नाम बने।
10वें संस्करण के साथ BW Disrupt 40 Under 40 Awards इसी विरासत को आगे बढ़ाएगा। इस बार भी फोकस ऐसे युवा लीडर्स की पहचान करने पर रहेगा, जिनमें आगे बढ़ने की क्षमता है और जिन्हें सही पहचान और मंच मिलने से उनके सफर को और गति मिल सकती है।
रूपल शाह ने यूआईपाथ में हेड ऑफ मार्केटिंग-इंडिया के रूप में नई जिम्मेदारी संभाली है। वह क्लाउडफ्लेयर से यहां पहुंची हैं और भारत में कंपनी की मार्केटिंग स्ट्रैटेजी मजबूत करेंगी।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
रूपल शाह (Roopal Shah) ने ऑटोमेशन कंपनी यूआईपाथ (UiPath) में हेड ऑफ मार्केटिंग-इंडिया (Head of Marketing, India) के तौर पर नई पारी शुरू की है। वह क्लाउडफ्लेयर (Cloudflare) से यूआईपाथ में आई हैं, जहां उन्होंने चार साल से ज्यादा समय तक काम किया।
शाह ने लिंक्डइन (LinkedIn) पोस्ट के जरिए अपनी नई भूमिका की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यूआईपाथ भारत में अपनी मौजूदगी बढ़ा रही है और ऐसे में उनका फोकस कंपनी की पोजिशनिंग मजबूत करने पर रहेगा। कंपनी एजेंटिक ऑटोमेशन (Agentic Automation) के क्षेत्र में अपने विस्तार पर काम कर रही है।
यूआईपाथ से पहले शाह क्लाउडफ्लेयर में हेड ऑफ मार्केटिंग-इंडिया एंड सार्क (Head of Marketing - India & SAARC) थीं। उन्होंने कंपनी के साथ साढ़े चार साल से ज्यादा समय बिताया।
शाह के पास बी2बी टेक्नोलॉजी मार्केटिंग (B2B Technology Marketing) में 14 साल से ज्यादा का अनुभव है। उनके अनुभव में डिजिटल मार्केटिंग (Digital Marketing), डिमांड जनरेशन (Demand Generation), गो-टू-मार्केट स्ट्रैटेजी (Go-to-Market Strategy) और मार्केट एक्सपेंशन (Market Expansion) जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
क्लाउडफ्लेयर से पहले उन्होंने मैकाफी (McAfee) में सात साल काम किया। इसके अलावा वह सोनी गल्फ एफजेडई (Sony Gulf FZE) के साथ भी तीन साल जुड़ी रही हैं।
पंजाब नेशनल बैंक (PNB) ने 10 सितंबर 2026 से दिवेश सेहरा को अपने बोर्ड में डायरेक्टर नियुक्त किया है।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
पंजाब नेशनल बैंक (PNB) ने 10 सितंबर 2026 से दिवेश सेहरा को अपने बोर्ड में डायरेक्टर नियुक्त किया है। उनकी नियुक्ति के बाद डी. आनंदन डायरेक्टर पद पर नहीं रहेंगे। यानी दिवेश सेहरा ने डी. आनंदन की जगह ली है।
बैंक ने यह नियुक्ति Banking Companies (Acquisition and Transfer of Undertakings) Act, 1970 की धारा 9(3)(b) के तहत की है। यह नियुक्ति भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग (Department of Financial Services) की 10 सितंबर 2026 की अधिसूचना के बाद की गई है।
वित्त मंत्रालय में संयुक्त सचिव हैं दिवेश सेहरा
दिवेश सेहरा फिलहाल भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग में संयुक्त सचिव (Joint Secretary) के पद पर कार्यरत हैं। PNB के बोर्ड में उनका कार्यकाल अगले आदेश तक जारी रहेगा।
बैंक ने बताया है कि दिवेश सेहरा और बैंक के दूसरे डायरेक्टरों के बीच कोई आपसी पारिवारिक या अन्य संबंध (inter se relationship) नहीं है। इसके अलावा, किसी SEBI आदेश या किसी अन्य प्राधिकरण की ओर से उन्हें किसी पद पर रहने से प्रतिबंधित नहीं किया गया है। बैंक ने यह भी कहा है कि दिवेश सेहरा की विस्तृत प्रोफाइल बाद में उपलब्ध कराई जाएगी।
डिजिटल भुगतान, इंटरनेट और ऑनलाइन व्यवहार ने भारतीय ब्रांडों के लिए ग्राहकों की पसंद समझना आसान किया है। अब मार्केटिंग रणनीति में डिजिटल संकेतों और खरीदारी की मंशा अहम हो गई है।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
भारतीय ब्रांडों के लिए ग्राहकों तक पहुंचने का तरीका तेजी से बदल रहा है। पिछले एक दशक में मार्केटिंग (Marketing) का फोकस ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंच बनाने पर रहा, लेकिन डिजिटल भुगतान (Digital Payments), इंटरनेट और ऑनलाइन व्यवहार ने अब उपभोक्ताओं की पसंद और खरीदारी की मंशा समझने के नए रास्ते खोल दिए हैं।
पहले रोजमर्रा के कई लेनदेन नकद में होते थे। सब्जी विक्रेता या किराना दुकानदार को दिए गए पैसे की जानकारी किसी ब्रांड के लिए आसानी से उपलब्ध नहीं होती थी। ऐसे में कंपनियां सीमित सैंपल (Sample) के आधार पर करोड़ों उपभोक्ताओं के व्यवहार का अनुमान लगाती थीं।
अब स्थिति बदल चुकी है। यूपीआई भुगतान (UPI Payments), ऑनलाइन सर्च (Online Search), वेबसाइट पर दोबारा आना या रात में छोड़े गए कार्ट (Cart) को अगली सुबह पूरा करना जैसे व्यवहार डिजिटल रिकॉर्ड (Digital Record) छोड़ते हैं। मार्च 2026 को समाप्त तिमाही में भारत में इंटरनेट सब्सक्राइबर (Internet Subscribers) की संख्या 1.09 अरब से ज्यादा हो गई। इसकी अहमियत सिर्फ इंटरनेट की पहुंच तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे उपयोगकर्ताओं की पसंद और खरीदारी की मंशा को तेजी से समझा जा सकता है।
इस बदलाव का असर विज्ञापन बाजार (Advertising Market) पर भी दिखाई दे रहा है। एफआईसीसीआई-ईवाई मीडिया एंड एंटरटेनमेंट रिपोर्ट 2026 (FICCI-EY Media & Entertainment Report 2026) के मुताबिक, 2025 में ई-कॉमर्स और पॉइंट-ऑफ-सेल विज्ञापन (Point-of-Sale Advertising) 50 प्रतिशत बढ़कर 22,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
वहीं, डेंट्सु-ई4एम डिजिटल रिपोर्ट (Dentsu-e4m Digital Report) के अनुसार भारत में डिजिटल विज्ञापन खर्च का 42 प्रतिशत हिस्सा प्रोग्रामेटिक तरीके (Programmatic) से खरीदा जा रहा है। इसमें रियल टाइम संकेतों (Real-Time Signals) के आधार पर विज्ञापन खरीदने का काम किया जाता है।
हालांकि, ज्यादा डेटा (Data) मिलने का मतलब हमेशा उपभोक्ताओं को बेहतर तरीके से समझ लेना नहीं है। कंपनियां आसानी से मापे जा सकने वाले आंकड़ों पर ज्यादा ध्यान दे सकती हैं और वास्तविक कारोबारी नतीजे पीछे छूट सकते हैं। ऐसे में जरूरी है कि ब्रांड पहले यह तय करें कि किन परिणामों के लिए मार्केटिंग बजट खर्च करना सही है।
आज भारतीय उपभोक्ता किसी ब्रांड के उसके पास पहुंचने का इंतजार नहीं कर रहा। वह अपनी जरूरत और सुविधा के हिसाब से तेजी से फैसला ले रहा है और उसके फैसले का डिजिटल रिकॉर्ड भी बन रहा है। ऐसे में ब्रांडों के लिए सिर्फ ज्यादा शोर पैदा करना नहीं, बल्कि सही समय पर उपयोगी साबित होना ज्यादा जरूरी हो गया है।
राहुल सेनगुप्ता को कर्मिक सॉल्यूशंस में वाइस प्रेसिडेंट-सेल्स एंड मार्केटिंग नियुक्त किया गया है। इससे पहले वह प्रमोटएज में सेल्स और मार्केटिंग के हेड पद पर जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
राहुल सेनगुप्ता (Rahul Sengupta) को कर्मिक सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड (Karmick Solutions Pvt Ltd) में वाइस प्रेसिडेंट-सेल्स एंड मार्केटिंग (Vice President - Sales & Marketing) नियुक्त किया गया है। उन्होंने लिंक्डइन (LinkedIn) पोस्ट के जरिए अपनी नई जिम्मेदारी की जानकारी साझा की।
अपनी पोस्ट में सेनगुप्ता ने कहा कि वह कंपनी के साथ नई भूमिका शुरू करने को लेकर खुश हैं। उन्होंने इसे अपने प्रोफेशनल जर्नी (Professional Journey) का अगला कदम बताया।
कर्मिक सॉल्यूशंस से जुड़ने से पहले सेनगुप्ता प्रमोटएज (PromotEdge) में हेड ऑफ सेल्स एंड मार्केटिंग (Head of Sales and Marketing) के पद पर थे। इस भूमिका में उन्होंने सेल्स इनिशिएटिव्स (Sales Initiatives) और मार्केटिंग गतिविधियों को आगे बढ़ाने के साथ कंपनी की बिजनेस ग्रोथ (Business Growth) और क्लाइंट एंगेजमेंट (Client Engagement) में योगदान दिया।
नई भूमिका में सेनगुप्ता का फोकस कंपनी के सेल्स और मार्केटिंग फंक्शंस (Sales and Marketing Functions) को मजबूत करने और ग्रोथ प्लान (Growth Plan) को आगे बढ़ाने पर रहेगा। सेल्स और मार्केटिंग लीडरशिप में उनके अनुभव से कंपनी को बिजनेस विस्तार और मार्केट रिलेशनशिप (Market Relationships) मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
करिश्मा राणे ने गोदरेज प्रॉपर्टीज में डिप्टी जनरल मैनेजर-कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस का पद संभाला है। इससे पहले वह शापूरजी पालोनजी रियल एस्टेट के साथ चार साल तक जुड़ीं रही थीं।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
करिश्मा राणे (Karishma Rane) ने गोदरेज प्रॉपर्टीज लिमिटेड (Godrej Properties Limited) ज्वाइन की है। उन्हें कंपनी में डिप्टी जनरल मैनेजर-कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस (Deputy General Manager - Corporate Communications) की जिम्मेदारी दी गई है। इस नई भूमिका के साथ वह कम्युनिकेशंस करियर (Communications Career) के अगले फेज में पहुंच गई हैं।
गोदरेज प्रॉपर्टीज से जुड़ने से पहले करिश्मा राणे शापूरजी पालोनजी रियल एस्टेट (Shapoorji Pallonji Real Estate) के साथ करीब चार साल तक काम कर चुकी हैं। उनके पास कम्युनिकेशंस के क्षेत्र में 17 साल से ज्यादा का अनुभव है।
अपने करियर के दौरान उन्होंने कई बड़े कारोबारी समूहों के साथ काम किया है। उनका अनुभव कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस (Corporate Communications), ब्रांड बिल्डिंग (Brand Building), नैरेटिव डेवलपमेंट (Narrative Development) और स्ट्रैटेजिक कम्युनिकेशंस (Strategic Communications) जैसे क्षेत्रों में रहा है।
गोदरेज प्रॉपर्टीज में करिश्मा कंपनी की कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस लीडरशिप (Corporate Communications Leadership) का हिस्सा होंगी। नई भूमिका में उनका पिछला अनुभव और बड़े व अलग-अलग बिजनेस पोर्टफोलियो के साथ काम करने का अनुभव कंपनी के लिए काम आएगा।
डिजिटल मार्केटिंग, कंटेंट और टेक्नोलॉजी क्षेत्र की कंपनी YAAP Digital को Parle Candy Culture का डिजिटल और मीडिया पार्टनर बनाया गया है।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
डिजिटल मार्केटिंग, कंटेंट और टेक्नोलॉजी क्षेत्र की कंपनी YAAP Digital को Parle Candy Culture का डिजिटल और मीडिया पार्टनर बनाया गया है। कंपनी ने बताया कि कई एजेंसियों के बीच हुई प्रतिस्पर्धी पिच के बाद उसे यह क्रिएटिव और मीडिया काम मिला है। इस साझेदारी से YAAP के प्रमुख एफएमसीजी ब्रैंड्स के पोर्टफोलियो को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
Parle Candy Culture, Parle Products का डिजिटल-केंद्रित कन्फेक्शनरी प्लेटफॉर्म है। इसके तहत Parle के कई लोकप्रिय कैंडी ब्रैंड एक साथ आते हैं। इनमें Kismi, Mango Bite, Orange Bite, Mazelo, Poppins, Rol-a-Cola, Londonderry, 2 in 1 Éclair, Kapi Candy, Mazelo Fruit Gang, Duet, Smoothies, Fusion और Kacha Mango Bite शामिल हैं।
डिजिटल दुनिया में और मजबूत होगी Candy Culture की मौजूदगी
Parle Candy Culture ने अपनी शुरुआत के बाद से ही भारत में पसंद की जाने वाली कैंडी से जुड़ी पुरानी यादों और खुशी को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सामने लाकर एक ऑनलाइन समुदाय तैयार किया है। अब YAAP के साथ साझेदारी के जरिए ब्रैंड अपनी डिजिटल मौजूदगी को और मजबूत करने की तैयारी कर रहा है।
कंपनी के मुताबिक, इस साझेदारी के तहत ऐसा कंटेंट तैयार किया जाएगा जो लोगों की मौजूदा पसंद और संस्कृति से जुड़ा हो। साथ ही, अलग-अलग डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपभोक्ताओं के लिए बेहतर और ज्यादा दिलचस्प अनुभव तैयार करने पर भी जोर रहेगा।
सोशल मीडिया से लेकर इन्फ्लुएंसर कैंपेन तक YAAP संभालेगी जिम्मेदारी
इस मैंडेट के तहत YAAP Parle Candy Culture की एकीकृत सोशल और मीडिया रणनीति तैयार करेगी। इसमें डिजिटल कम्युनिकेशन, कंटेंट तैयार करना, सोशल मीडिया मैनेजमेंट, इन्फ्लुएंसर के साथ साझेदारी और मीडिया प्लानिंग व खरीदारी शामिल होगी।
इसके अलावा, ब्रैंड के लिए लगातार चलने वाली कहानियों और कंटेंट, मौजूदा मुद्दों से जुड़े कैंपेन, क्रिएटर के जरिए बातचीत, त्योहारों से जुड़े अभियान और प्रदर्शन पर आधारित मीडिया रणनीतियां तैयार की जाएंगी।
इसका मकसद उपभोक्ताओं की ब्रैंड के साथ जुड़ाव को बढ़ाना और Parle Candy Culture की डिजिटल पहुंच को और व्यापक बनाना है।
AI और आंकड़ों की मदद से नई पीढ़ी तक पहुंचने की तैयारी
YAAP ने कहा कि वह AI आधारित इनसाइट्स, आंकड़ों पर आधारित फैसलों और स्थानीय संस्कृति से जुड़े कंटेंट को साथ लेकर काम करेगी। इसके जरिए ब्रैंड अपने मौजूदा उपभोक्ताओं के साथ रिश्ते को और मजबूत करने के साथ-साथ नई पीढ़ी के ग्राहकों तक भी पहुंच बनाने की कोशिश करेगा।
Parle Products के वाइस प्रेसिडेंट Mayank Shah ने कहा कि Parle Candy Culture का मकसद अपनी लोकप्रिय कन्फेक्शनरी ब्रैंड्स के लिए लोगों के लंबे समय से चले आ रहे लगाव को बनाए रखते हुए आज की डिजिटल दुनिया के हिसाब से प्रासंगिक बने रहना है। उन्होंने कहा कि कंपनी ऐसे साझेदार की तलाश में थी, जो क्रिएटिव सोच के साथ रणनीतिक मीडिया योजना को भी अच्छी तरह जोड़ सके।
Shah के मुताबिक, YAAP का एकीकृत तरीका, डिजिटल विशेषज्ञता और आधुनिक उपभोक्ता व्यवहार की समझ उसे इस काम के लिए सही साझेदार बनाती है।
Parle के साथ काम करना बड़ी उपलब्धिॉ: YAAP
YAAP के सीनियर पार्टनर मनन कपूर ने कहा कि Parle भारत के सबसे प्रतिष्ठित और पसंद किए जाने वाले ब्रैंड्स में से एक है और उसके कन्फेक्शनरी ब्रैंड्स ने कई पीढ़ियों की यादों में जगह बनाई है।
उन्होंने कहा कि YAAP इस साझेदारी के जरिए क्रिएटिविटी, कंटेंट, क्रिएटर्स और मीडिया को एक साथ लाकर ऐसी बातचीत तैयार करने पर ध्यान देगी, जो लोगों की संस्कृति और मौजूदा ट्रेंड से जुड़ी होने के साथ-साथ कारोबार के लिहाज से भी असरदार हो।
Kapur के मुताबिक, कंपनी आंकड़ों और AI आधारित इनसाइट्स की मदद से प्रभावी कहानी कहने पर काम करेगी, ताकि उपभोक्ताओं का जुड़ाव बढ़ाया जा सके और Parle की डिजिटल विरासत को आगे ले जाया जा सके।
YAAP के FMCG पोर्टफोलियो को मिलेगा बढ़ावा
कंपनी के मुताबिक, Parle Candy Culture के साथ यह साझेदारी उसके बढ़ते FMCG पोर्टफोलियो में एक और अहम उपलब्धि है। इससे YAAP की ऐसी एकीकृत मार्केटिंग सेवाएं देने की क्षमता भी सामने आती है, जिनमें क्रिएटिविटी, टेक्नोलॉजी और मीडिया को एक साथ इस्तेमाल किया जाता है और कारोबार पर पड़ने वाले असर को मापा जा सकता है।
1929 से Parle की पहचान
Parle Products की शुरुआत 1929 में हुई थी। कंपनी आज भारत की प्रमुख बिस्किट, स्नैक्स और कन्फेक्शनरी निर्माता कंपनियों में शामिल है। इसके प्रमुख ब्रैंड्स में दुनिया के सबसे ज्यादा बिकने वाले बिस्किट्स में शामिल Parle-G भी है। कंपनी ने अलग-अलग श्रेणियों में कई लोकप्रिय ब्रैंड तैयार किए हैं, जिन्हें भारत और दुनिया भर में उपभोक्ताओं का भरोसा और पसंद मिली है।
डिजिटल मार्केटिंग और क्रिएटर इकॉनमी पर YAAP का फोकस
YAAP खुद को नई पीढ़ी की डिजिटल मार्केटिंग, कंटेंट और टेक्नोलॉजी सेवाएं देने वाली कंपनी के तौर पर पेश करती है। कंपनी मार्केटिंग और क्रिएटर इकॉनमी के तेजी से बढ़ते क्षेत्र में काम करती है।
YAAP का मॉडल डेटा, AI आधारित तकनीक और कंटेंट को एक साथ जोड़कर आधुनिक मार्केटिंग समाधान देने पर केंद्रित है। कंपनी वैश्विक, बहुराष्ट्रीय, क्षेत्रीय और स्थानीय ब्रैंड्स के साथ-साथ युवा उपभोक्ताओं पर केंद्रित क्रिएटर ब्रैंड्स के लिए भी डिजिटल समाधान उपलब्ध कराती है।
भारत में क्विक कॉमर्स का मुकाबला अब सिर्फ कुछ मिनटों में किराना पहुंचाने तक सीमित नहीं रहा है। Flipkart Minutes और Blinkit के बीच मुकाबला तेजी से बड़ा हो रहा है।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
भारत में क्विक कॉमर्स का मुकाबला अब सिर्फ कुछ मिनटों में किराना पहुंचाने तक सीमित नहीं रहा है। Flipkart Minutes और Blinkit के बीच मुकाबला तेजी से बड़ा हो रहा है। मौजूदा कारोबार, ऑर्डर और मुनाफे के मामले में Blinkit अभी काफी आगे है, लेकिन Flipkart Minutes ने जिस तेजी से अपने स्टोर और ऑर्डर बढ़ाए हैं, उससे यह मुकाबला आने वाले समय में और दिलचस्प होने वाला है।
Flipkart Minutes पर मोबाइल फोन को हटाकर औसत नेट ऑर्डर वैल्यू करीब 500-530 रुपये बताई गई है। वहीं Blinkit की जून तिमाही में यह वैल्यू 518 रुपये थी। ये आंकड़े UBS के आकलन पर आधारित हैं। मोबाइल फोन को शामिल करने पर Flipkart Minutes की औसत ऑर्डर वैल्यू इससे ऊपर चली जाती है।
हालांकि, सिर्फ औसत ऑर्डर वैल्यू से दोनों कंपनियों के कारोबार की पूरी तस्वीर नहीं मिलती। महंगे स्मार्टफोन किसी ऑर्डर की कीमत को काफी बढ़ा सकते हैं, लेकिन इससे यह पता नहीं चलता कि ग्राहक कितनी बार दोबारा ऑर्डर कर रहा है, किसी स्टोर से कितने ऑर्डर निकल रहे हैं या हर डिलीवरी पर कंपनी को कितना फायदा हो रहा है।
Blinkit की बढ़त अभी बरकरार
वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में Blinkit ने 33.1 करोड़ ऑर्डर पूरे किए। यानी रोजाना करीब 36 लाख ऑर्डर। इस दौरान कंपनी का नेट ऑर्डर वैल्यू 17,132 करोड़ रुपये रहा, जो सालाना आधार पर 86 फीसदी ज्यादा था।
Blinkit के पास इस अवधि में 3.18 करोड़ मासिक लेन-देन करने वाले ग्राहक और 2,443 डार्क स्टोर थे। कंपनी ने पहली बार समायोजित EBITDA में 102 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया, जबकि एक साल पहले उसे 162 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। उसका योगदान मार्जिन भी 5.3 फीसदी रहा। इससे यह संकेत मिलता है कि क्विक कॉमर्स में बड़े पैमाने पर कारोबार के साथ अब मुनाफे की तस्वीर भी धीरे-धीरे सुधर रही है। हालांकि, मार्जिन अभी भी बहुत ज्यादा नहीं है।
Flipkart Minutes की रफ्तार ने चौंकाया
Flipkart Minutes के पूरे वित्तीय आंकड़े सार्वजनिक रूप से Blinkit की तरह उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए इसके ऑर्डर और स्टोर से जुड़े कुछ आंकड़े अनुमान या UBS के आकलन पर आधारित हैं। 6 सितंबर 2026 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, Flipkart Minutes अब अनुमानित तौर पर रोजाना 11 लाख से 12 लाख ऑर्डर संभाल रहा है। पिछले साल नवंबर में यह आंकड़ा करीब 3.90 लाख से 4 लाख ऑर्डर प्रतिदिन था। यह आधिकारिक Flipkart आंकड़ा नहीं, बल्कि रिपोर्ट में दिया गया अनुमान है।
वहीं स्टोर नेटवर्क के मामले में Flipkart ने आधिकारिक तौर पर जून 2026 में बताया था कि Minutes ने 1,000 माइक्रो-फुलफिलमेंट सेंटर का आंकड़ा पार कर लिया है। ये सेंटर 130 से ज्यादा शहरों और 8,000 से ज्यादा पिनकोड में फैले थे। कंपनी ने नेटवर्क को 2026 के अंत तक करीब 1,500 सेंटर तक ले जाने की योजना भी बताई थी।
UBS के आकलन के मुताबिक, Minutes का एक औसत स्टोर रोजाना 800-1,000 ऑर्डर संभाल रहा है। करीब पांच-छह महीने पुराने स्टोरों में यह संख्या 1,200-1,500 ऑर्डर प्रतिदिन तक पहुंच सकती है।
ऑर्डर के मामले में कितना अंतर?
अगर Flipkart Minutes के रोजाना 12 लाख ऑर्डर के ऊपरी अनुमान को आधार माना जाए, तो 91 दिनों की एक तिमाही में करीब 10.92 करोड़ ऑर्डर बनते हैं। यह Blinkit के 33.1 करोड़ तिमाही ऑर्डर का लगभग एक-तिहाई है। इसलिए यहां एक बात साफ समझनी जरूरी है- Minutes की औसत ऑर्डर वैल्यू Blinkit के करीब पहुंच रही है, लेकिन कुल ऑर्डर की संख्या अभी काफी पीछे है। 11-12 लाख रोजाना ऑर्डर का आंकड़ा अनुमान है, जबकि Blinkit के 33.1 करोड़ तिमाही ऑर्डर कंपनी के रिपोर्टेड आंकड़े हैं।
Flipkart को पुराने ग्राहक आधार का फायदा
Flipkart Minutes की सबसे बड़ी ताकत यह है कि उसे ग्राहक आधार शून्य से तैयार नहीं करना पड़ रहा। Flipkart के पास पहले से करोड़ों ग्राहक, विक्रेता, भुगतान नेटवर्क, गोदाम और डिलीवरी का बुनियादी ढांचा मौजूद है।
UBS के आकलन के मुताबिक, जिन जगहों पर Minutes उपलब्ध है, वहां Flipkart पर आने वाले करीब 40-45 फीसदी ग्राहक उसके क्विक कॉमर्स सेक्शन का भी इस्तेमाल करते हैं। यह आंकड़ा भी आधिकारिक कंपनी आंकड़ा नहीं, बल्कि UBS के चेक्स पर आधारित अनुमान है।
यही वजह है कि Flipkart के लिए Minutes को बढ़ाना किसी नए क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के मुकाबले आसान हो सकता है। ग्राहक पहले से Flipkart पर मौजूद हैं और कंपनी उन्हें रोजमर्रा की खरीदारी के लिए उसी ऐप पर बनाए रखना चाहती है।
मोबाइल से किराने तक पहुंचने की कोशिश
Flipkart की ताकत लंबे समय से मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी बड़ी खरीदारी में रही है। अब Minutes के जरिए कंपनी रोजमर्रा के सामान की खरीदारी भी अपने प्लेटफॉर्म पर लाना चाहती है। एक ग्राहक सोमवार को किराना, बुधवार को कॉस्मेटिक्स और शुक्रवार को स्मार्टफोन खरीद सकता है। कंपनी के लिए लक्ष्य यही है कि बड़ी खरीदारी के बीच भी ग्राहक रोजमर्रा की जरूरतों के लिए Flipkart पर वापस आता रहे।
यहीं पर Blinkit और Flipkart Minutes की रणनीति एक-दूसरे से टकराती है। Flipkart को Blinkit जैसी बार-बार होने वाली खरीदारी चाहिए, जबकि Blinkit धीरे-धीरे बड़ी और ज्यादा कैटेगरीज वाले सामान की तरफ बढ़ रहा है। Blinkit अब सिर्फ दूध, फल और सब्जियों तक सीमित नहीं है। ब्यूटी प्रोडक्ट्स, खिलौने, छोटे इलेक्ट्रॉनिक्स, स्टेशनरी और दूसरे सामान भी उसके कारोबार का हिस्सा बन रहे हैं।
असली परीक्षा होगी मुनाफे की
Flipkart Minutes के सामने सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ ज्यादा स्टोर खोलना नहीं, बल्कि उन स्टोरों को पर्याप्त ऑर्डर और मुनाफे तक पहुंचाना है। UBS के आकलन के मुताबिक, करीब 500-600 रुपये की औसत ऑर्डर वैल्यू पर एक परिपक्व Minutes स्टोर को ब्रेक-ईवन के करीब पहुंचने के लिए लगभग 1,400-1,500 ऑर्डर प्रतिदिन की जरूरत हो सकती है। जबकि औसत स्टोर अभी इससे नीचे है। यह भी कंपनी का आधिकारिक आंकड़ा नहीं, बल्कि आकलन है।
दूसरी तरफ Blinkit के एक स्टोर ने जून तिमाही में औसतन 8.27 लाख रुपये का नेट ऑर्डर वैल्यू प्रतिदिन दर्ज किया। कंपनी का मानना है कि एक परिपक्व स्टोर आगे चलकर 11 लाख रुपये प्रतिदिन तक पहुंच सकता है। वहीं एक Blinkit स्टोर और उससे जुड़ी वेयरहाउसिंग के लिए करीब 2.5 करोड़ रुपये के पूंजीगत खर्च का अनुमान है।
छोटे शहरों पर भी नजर
Flipkart Minutes की रणनीति सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। कंपनी ने जून में बताया था कि उसका नेटवर्क 130 से ज्यादा शहरों और 8,000 से ज्यादा पिनकोड तक पहुंच चुका है। Tier-II और Tier-III शहरों में भी तेज विस्तार हो रहा है। कंपनी के मुताबिक, इन बाजारों में उसका कारोबार पिछले साल की तुलना में 42 गुना बढ़ा था।
उत्तर प्रदेश भी Minutes के विस्तार में अहम भूमिका निभा रहा है। कंपनी ने जून में गोरखपुर में अपना 1,000वां माइक्रो-फुलफिलमेंट सेंटर खोला था। उत्तर प्रदेश में ऑर्डर सालाना आधार पर 6 गुना बढ़ने और राज्य के Tier-II व Tier-III बाजारों में 20 गुना वृद्धि की जानकारी कंपनी ने दी थी।
फिलहाल Blinkit आगे, लेकिन Flipkart की रफ्तार तेज
मौजूदा तस्वीर में Blinkit के पास ऑर्डर, स्टोर, ग्राहक और घोषित मुनाफे के मामले में साफ बढ़त है। वहीं Flipkart Minutes की सबसे बड़ी ताकत उसका तेज विस्तार, पहले से मौजूद ग्राहक आधार और इलेक्ट्रॉनिक्स समेत कई कैटेगरीज में मजबूत पकड़ है। इस मुकाबले में सिर्फ ऑर्डर वैल्यू देखना पर्याप्त नहीं होगा। क्विक कॉमर्स का असली खेल ऑर्डर की संख्या, ग्राहक कितनी बार लौटता है, स्टोर की क्षमता, डिलीवरी लागत और हर ऑर्डर पर होने वाली कमाई से तय होगा।
Flipkart Minutes ने दो साल से भी कम समय में 1,000 से ज्यादा सेंटर खड़े कर दिए हैं और ऑर्डर तेजी से बढ़ाए हैं। लेकिन अब अगला सवाल यह है कि क्या वह इस रफ्तार को लंबे समय तक मुनाफे में बदल पाएगा। फिलहाल कहा जा सकता है कि Blinkit के पास बढ़त है, लेकिन Flipkart Minutes तेजी से पीछा कर रहा है। आने वाले समय में असली मुकाबला इस बात पर होगा कि कौन कम लागत में ज्यादा ग्राहकों को बार-बार ऑर्डर करने के लिए तैयार कर पाता है।