अंकुर अग्रवाल बने WPP Media में सीनियर वाइस प्रेजिडेंट (Client Services)

नई भूमिका में अंकुर अग्रवाल का फोकस WPP Media में स्ट्रैटेजिक बढ़त को मजबूत करने, टीमों को सशक्त बनाने और क्लाइंट्स के लिए बिजनेस परफॉर्मेंस को बेहतर बनाने पर रहेगा।

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Tuesday, 11 August, 2026
Ankur Agarwal


मीडिया और विज्ञापन इंडस्ट्री के अनुभवी प्रोफेशनल अंकुर अग्रवाल ने ‘WPP Media’ में सीनियर वाइस प्रेजिडेंट (Client Services, India) के पद पर नई जिम्मेदारी संभाली है। उन्होंने यह जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लिंक्डइन (LinkedIn) पर शेयर की है।

अपनी नई भूमिका में अंकुर अग्रवाल का फोकस WPP Media में स्ट्रैटेजिक बढ़त को मजबूत करने, टीमों को सशक्त बनाने और क्लाइंट्स के लिए बिजनेस परफॉर्मेंस को बेहतर बनाने पर रहेगा। WPP Media में उनका काम AI आधारित मीडिया सॉल्यूशंस, ऑपरेशनल एक्सीलेंस और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी फ्रेमवर्क के जरिए क्लाइंट्स के लिए बेहतर बिजनेस नतीजे और दीर्घकालिक वैल्यू तैयार करने पर केंद्रित होगा।

अंकुर अग्रवाल को स्ट्रैटेजिक लीडरशिप, बिजनेस ग्रोथ और क्लाइंट रिलेशनशिप मैनेजमेंट का दो दशक से ज्यादा का अनुभव है। वह मल्टीनेशनल कंपनियों के साथ-साथ तेजी से बढ़ते स्टार्टअप्स में भी नेतृत्वकारी भूमिकाओं में काम कर चुके हैं। अपने करियर के दौरान उन्होंने बिजनेस ग्रोथ, ब्रैंड बिल्डिंग, क्लाइंट सर्विस, बिजनेस डेवलपमेंट और टीम लीडरशिप जैसे क्षेत्रों में काम किया है।

WPP Media से जुड़ने से पहले अंकुर अग्रवाल T&P India में पार्टनर और हेड- North & New Business Development की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उन्होंने मई 2024 में T&P India जॉइन किया था। इससे पहले वह mSix&Partners में Head - North & New Business Development, Principal Partner - Client Leadership और Partner - Client Leadership जैसी भूमिकाओं में रहे।

अंकुर अग्रवाल ने T&P को भारत में शुरुआत से खड़ा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वह वहां National Head of Growth & Office Head के तौर पर भी काम कर चुके हैं। उनके अनुसार, उनका फोकस बेहतर क्लाइंट सर्विस मॉडल तैयार करने, ऑपरेशंस को स्केल करने और पूरी P&L की जिम्मेदारी संभालने पर रहा है।

T&P में उनके नेतृत्व में एजेंसी ने COMvergence की रैंकिंग में लगातार दो वर्षों तक भारत की Top 5 एजेंसियों में जगह बनाई और 2025 में T&P नेटवर्क के भीतर वैश्विक स्तर पर नंबर 1 रैंक हासिल की। उनके योगदान को देखते हुए उन्हें 2024 में T&P के Global Partner के तौर पर शामिल किया गया था।

अंकुर अग्रवाल के करियर की शुरुआत Lintas Media Group से हुई, जहां उन्होंने अक्टूबर 2010 से जून 2012 तक मीडिया ग्रुप हेड के तौर पर काम किया। इसके बाद उन्होंने Havas Media में एसोसिएट मीडिया डायरेक्टर और एग्जिक्यूटिव बिजनेस डायरेक्टर की जिम्मेदारियां संभालीं। मार्च 2015 से सितंबर 2017 तक वह Yepme.com में मार्केटिंग और रेवेन्यू हेड रहे। इसके बाद सितंबर 2017 से mSix&Partners में उनकी विभिन्न नेतृत्वकारी भूमिकाओं का सिलसिला शुरू हुआ।

पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो अंकुर अग्रवाल ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडवर्टाइजिंग से PGDAC किया है। उन्होंने Barkatullah Vishwavidyalaya से एडवर्टाइजिंग में बी. कॉम की डिग्री ली है।

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सोनी पिक्चर्स में अब अनुरति टंडन संभालेंगी Digital B2B Business की कमान

अनुरति टंडन अब मनीष अग्रवाल की जगह यह जिम्मेदारी संभालेंगी। मनीष अग्रवाल ने SPNI में करीब 7 साल बिताने के बाद संस्थान से आगे बढ़ने का फैसला किया है।

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Tuesday, 11 August, 2026
Anurati Tandon

‘सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया’ (SPNI) में बड़ा बदलाव हुआ है। दरअसल, अनुरति टंडन को Digital B2B Business का हेड नियुक्त किया गया है। इससे पहले वह सीईओ के ऑफिस में Chief of Staff की जिम्मेदारी संभाल रही थीं।

अनुरति टंडन अब मनीष अग्रवाल की जगह यह जिम्मेदारी संभालेंगी। मनीष अग्रवाल ने SPNI में करीब 7 साल बिताने के बाद संस्थान से आगे बढ़ने का फैसला किया है। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कंपनी के Digital B2B और Syndication Business को तैयार करने और मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

SPNI के चीफ रेवेन्यू ऑफिसर राजेश कौल ने एक इंटरनल मेल में अनुरति टंडन की नई जिम्मेदारी को लेकर कहा कि अपनी मौजूदा भूमिका में उन्होंने सीईओ ऑफिस के भीतर कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स और पहलों को आगे बढ़ाया है। इस दौरान उन्होंने रेवेन्यू और बिजनेस ग्रोथ से जुड़े कामों में अलग-अलग टीमों के साथ मिलकर काम किया।

राजेश कौल ने कहा कि उन्हें भरोसा है कि अनुरति टंडन की रणनीतिक समझ और अलग-अलग कार्यक्षेत्रों में काम करने का अनुभव इस बिजनेस को उसके विकास के अगले चरण में आगे ले जाने में मदद करेगा। वह अगले कुछ महीनों तक CEO’s Office को भी सपोर्ट करती रहेंगी और इसी के साथ अपनी नई जिम्मेदारी संभालेंगी। वह राजेश कौल की लीडरशिप टीम का हिस्सा होंगी।

इसके साथ ही राजेश कौल ने मनीष अग्रवाल के योगदान, नेतृत्व और SPNI के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के लिए उनका आभार जताया और उनके भविष्य के प्रयासों के लिए शुभकामनाएं दीं।

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राहुल श्रीवास्तव की NDTV में वापसी, बने कंसल्टिंग एडिटर

करीब चार दशक के अपने पत्रकारिता करियर में राहुल श्रीवास्तव ने प्रिंट, टेलीविजन और डिजिटल मीडिया में काम किया है। उन्हें राजनीतिक रिपोर्टिंग और संपादकीय नेतृत्व का गहरा अनुभव है।

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Tuesday, 11 August, 2026
Rahul Shrivastava

वरिष्ठ पत्रकार राहुल श्रीवास्तव की ‘एनडीटीवी’ (NDTV) में वापसी हुई है। उन्होंने यहां पर कंसल्टिंग एडिटर के पद पर जिम्मेदारी संभाली है। करीब चार दशक के अपने पत्रकारिता करियर में राहुल श्रीवास्तव ने प्रिंट, टेलीविजन और डिजिटल मीडिया में काम किया है। उन्हें राजनीतिक रिपोर्टिंग और संपादकीय नेतृत्व का गहरा अनुभव है।

राहुल श्रीवास्तव इससे पहले ‘Jist News’ और ‘India Today’ ग्रुप समेत कई प्रतिष्ठित संस्थानों में वरिष्ठ संपादकीय पदों पर काम कर चुके हैं। एनडीटीवी के साथ भी उनका लंबा जुड़ाव रहा है। अपने पिछले कार्यकाल के दौरान वह 1999 से 2017 तक एनडीटीवी में पॉलिटिकल एडिटर रहे थे।

इस नियुक्ति पर एनडीटीवी के सीईओ और एडिटर-इन-चीफ राहुल कंवल ने कहा कि राहुल श्रीवास्तव देश के सबसे अनुभवी राजनीतिक पत्रकारों में से एक हैं। उन्हें भारत की राजनीतिक संस्थाओं, राजनीतिक हस्तियों और चुनावी परिदृश्य की गहरी समझ है। उन्होंने कहा कि राहुल श्रीवास्तव का संपादकीय विवेक, रिपोर्टिंग का अनुभव और जटिल घटनाक्रमों को संदर्भ के साथ समझाने की क्षमता एनडीटीवी की राजनीतिक कवरेज को मजबूती देगी।

वहीं, राहुल श्रीवास्तव ने अपनी नियुक्ति पर कहा कि यह भारतीय राजनीति और पत्रकारिता के लिए एक महत्वपूर्ण समय है। उन्होंने कहा कि वह एनडीटीवी की कवरेज में अपने अनुभव का योगदान देने और दर्शकों को देश में हो रहे घटनाक्रमों, फैसलों और राजनीतिक बदलावों को बेहतर ढंग से समझने में मदद करने को लेकर उत्साहित हैं।

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Network18 ने अभिनय चौहान को किया प्रमोट, बने चीफ ग्रोथ ऑफिसर-गवर्नमेंट अफेयर्स

इससे पहले वह कंपनी में एग्जिक्यूटिव वाइस प्रेजिडेंट के पद पर कार्यरत थे।

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Tuesday, 11 August, 2026
Abhinay Chauhan

‘नेटवर्क18 मीडिया एंड इन्वेस्टमेंट लिमिटेड’ (Network18 Media & Investments Ltd.) ने अभिनय चौहान को प्रमोट करते हुए चीफ ग्रोथ ऑफिसर, गवर्नमेंट अफेयर्स की जिम्मेदारी दी है। इससे पहले वह कंपनी में एग्जिक्यूटिव वाइस प्रेजिडेंट के पद पर कार्यरत थे।

Network18 में अपने कार्यकाल के दौरान अभिनय चौहान ने राज्य सरकारों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) के साथ कंपनी के संबंधों को मैनेज करने और मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई है। इसके साथ ही उन्होंने इस क्षेत्र में नए अवसरों की पहचान करने और उन्हें आगे बढ़ाने पर भी काम किया है।

नई जिम्मेदारी में उनका फोकस नेटवर्क18 के लैंग्वेज चैनलों, डिजिटल प्रॉपर्टीज, Forbes India और AETN18 (HistoryTV18) के लिए सरकार से जुड़े रेवेन्यू को बढ़ाने पर रहेगा। वह सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र के क्षेत्र में कंपनी की मौजूदगी और प्रभाव को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

उनकी भूमिका नेटवर्क18 की ब्रॉडकास्ट और डिजिटल इकाइयों को एक साथ जोड़ने की कंपनी की व्यापक स्ट्रैटेजी का भी हिस्सा होगी। सरकार और पब्लिक सेक्टर से जुड़े क्षेत्र में कंपनी की मौजूदगी और प्रभाव को मजबूत करने में उनका योगदान महत्वपूर्ण रहेगा।

नेटवर्क18 से जुड़ने से पहले अभिनय चौहान बिजनेस और फाइनेंशियल न्यूज प्लेटफॉर्म ‘ब्लूमबर्गक्विंट’ (BloombergQuint) में वाइस प्रेजिडेंट के पद पर कार्यरत थे। वहां उन्होंने ऑपरेशनल स्ट्रैटेजी और अलग-अलग टीमों के बीच समन्वय से जुड़े काम का नेतृत्व किया था।

 

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UPI पेमेंट रहेगा फ्री: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दूर किया बड़ा भ्रम

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने साफ किया कि आम यूजर्स के लिए UPI पेमेंट फ्री रहेगा और कोई ट्रांजैक्शन चार्ज नहीं लगाया जाएगा।

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Tuesday, 11 August, 2026
upicharge

यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (Unified Payments Interface-UPI) से भुगतान करने वाले आम लोगों के लिए राहत की खबर है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने साफ किया है कि सामान्य UPI पेमेंट पर यूजर्स से कोई ट्रांजैक्शन चार्ज नहीं लिया जाएगा।

राज्यसभा में सोमवार को बोलते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल, 2026 (Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026) में UPI पेमेंट पर कोई टैक्स या चार्ज लगाने का प्रावधान नहीं है। उन्होंने साफ कहा कि UPI शुरू होने के बाद से आम लोगों के लिए फ्री रहा है और आगे भी ऐसा ही रहेगा।

यह सफाई उन सवालों के बीच आई है, जिनमें आशंका जताई जा रही थी कि नए कानून में किए जा रहे बदलावों से डिजिटल पेमेंट पर शुल्क लगाने का रास्ता खुल सकता है। हालांकि, निर्मला सीतारमण ने यह भी बताया कि भविष्य में एक सीमित श्रेणी के बड़े ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (Merchant Discount Rate-MDR) लागू किया जा सकता है। लेकिन फिलहाल ऐसा कोई सिस्टम तय नहीं किया गया है।

कानून पास होने के बाद नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (National Payments Corporation of India-NPCI) की अगुवाई वाली UPI सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी इस पर विचार करेगी। यही तय किया जाएगा कि MDR लागू किया जाए या नहीं और अगर लागू होता है तो उसका दायरा और तरीका क्या होगा।

MDR डिजिटल पेमेंट को प्रोसेस करने से जुड़ा शुल्क है, जिसे आम तौर पर मर्चेंट साइड के पेमेंट सिस्टम में लिया जाता है। इसका मतलब यह सीधे ग्राहक से वसूला जाने वाला शुल्क नहीं है। सरकार ने यह भी कहा है कि छोटे कारोबारियों और वित्तीय पहुंच को ध्यान में रखते हुए डिजिटल पेमेंट सिस्टम को आगे बढ़ाना उसकी प्राथमिकता बनी हुई है।

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जी एंटरटेनमेंट के बोर्ड ने चार स्वतंत्र निदेशकों को फिर से नियुक्त करने की दी मंजूरी

जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज (Zee Entertainment Enterprises Limited) के बोर्ड ने कंपनी के चार स्वतंत्र निदेशकों की दोबारा नियुक्ति को मंजूरी दी है

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Tuesday, 11 August, 2026
ZeeEnt85412

जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज (Zee Entertainment Enterprises Limited) के बोर्ड ने कंपनी के चार स्वतंत्र निदेशकों की दोबारा नियुक्ति को मंजूरी दी है। इनमें दीपू बंसल, उत्तम प्रकाश अग्रवाल, डॉ. वेंकट रमणा मूर्ति पिनिसेट्टी और शिशिर बाबूभाई देसाई शामिल हैं। इन सभी को दूसरे कार्यकाल के लिए पांच साल तक स्वतंत्र निदेशक बनाए रखने की सिफारिश की गई है। हालांकि, इन नियुक्तियों के लिए कंपनी के आगामी Annual General Meeting (AGM) में शेयरधारकों की मंजूरी जरूरी होगी।

दीपू बंसल का दूसरा कार्यकाल

कंपनी के बोर्ड ने दीपू बंसल (DIN: 09497525) को स्वतंत्र निदेशक के तौर पर दूसरे पांच साल के कार्यकाल के लिए दोबारा नियुक्त करने की मंजूरी दी है। उनका नया कार्यकाल 13 अक्टूबर 2026 से 12 अक्टूबर 2031 तक रहेगा। यह नियुक्ति नामांकन एवं पारिश्रमिक समिति (Nomination and Remuneration Committee) की सिफारिश पर की गई है और इसके लिए शेयरधारकों की मंजूरी जरूरी होगी।

उत्तम प्रकाश अग्रवाल भी बने रहेंगे स्वतंत्र निदेशक

बोर्ड ने उत्तम प्रकाश अग्रवाल (DIN: 00272983) को भी स्वतंत्र निदेशक के तौर पर दूसरे पांच साल के कार्यकाल के लिए दोबारा नियुक्त करने की सिफारिश की है। उनका प्रस्तावित कार्यकाल 17 दिसंबर 2026 से 16 दिसंबर 2031 तक रहेगा। यह नियुक्ति भी नामांकन एवं पारिश्रमिक समिति (Nomination and Remuneration Committee) की सिफारिश पर की गई है और AGM में शेयरधारकों की मंजूरी के अधीन है।

डॉ. वेंकट रमणा मूर्ति पिनिसेट्टी की भी पुनर्नियुक्ति

कंपनी ने डॉ. वेंकट रमणा मूर्ति पिनिसेट्टी (DIN: 03483544) को भी स्वतंत्र निदेशक के रूप में दूसरे पांच साल के कार्यकाल के लिए दोबारा नियुक्त करने की मंजूरी दी है। उनका प्रस्तावित कार्यकाल 17 दिसंबर 2026 से 16 दिसंबर 2031 तक होगा। इसके लिए भी AGM में शेयरधारकों की मंजूरी जरूरी होगी।

शिशिर बाबूभाई देसाई भी दूसरी बार होंगे स्वतंत्र निदेशक

इसी तरह शिशिर बाबूभाई देसाई (DIN: 01453410) को भी स्वतंत्र निदेशक के रूप में दूसरे पांच साल के कार्यकाल के लिए दोबारा नियुक्त करने की सिफारिश की गई है। उनका प्रस्तावित कार्यकाल 17 दिसंबर 2026 से 16 दिसंबर 2031 तक रहेगा। यह नियुक्ति भी नामांकन एवं पारिश्रमिक समिति (Nomination and Remuneration Committee) की सिफारिश और शेयरधारकों की मंजूरी के अधीन है।

कंपनी के बोर्ड ने इन चारों स्वतंत्र निदेशकों की पुनर्नियुक्ति का प्रस्ताव आगामी AGM में शेयरधारकों के सामने रखने का फैसला किया है। यानी AGM में मंजूरी मिलने के बाद ही इनका दूसरा कार्यकाल औपचारिक रूप से लागू होगा।

 

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TV टुडे नेटवर्क: AI व डिजिटेक को लेकर बड़ी योजना, एम्प्लॉयीज की सेहत-वेलनेस पर बढ़ाया खर्च

टीवी टुडे नेटवर्क लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अपनी बिजनेस रिस्पॉन्सिबिलिटी एंड सस्टेनेबिलिटी रिपोर्ट (BRSR) जारी की है।

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Tuesday, 11 August, 2026
tvtoday84512

टीवी टुडे नेटवर्क लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अपनी बिजनेस रिस्पॉन्सिबिलिटी एंड सस्टेनेबिलिटी रिपोर्ट (BRSR) जारी की है। कंपनी ने यह रिपोर्ट सेबी के नियमों के तहत 10 अगस्त 2026 को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज को जमा कराई। यह रिपोर्ट कंपनी की वित्त वर्ष 2025-26 की इंटीग्रेटेड एनुअल रिपोर्ट का हिस्सा है।

कंपनी ने रिपोर्ट में पर्यावरण, सामाजिक जिम्मेदारी और कॉरपोरेट गवर्नेंस यानी ESG से जुड़े अपने काम, नीतियों, एम्प्लॉयीज की स्थिति, CSR गतिविधियों, साइबर सिक्योरिटी और टेक्नोलॉजी से जुड़े कदमों की जानकारी दी है। कंपनी का कहना है कि उसका फोकस लंबे समय के लिए सभी स्टेकहोल्डर्स के लिए वैल्यू बनाने और कारोबार को जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ाने पर है। यह कंपनी की चौथी BRSR रिपोर्ट है और इसे नेशनल गाइडलाइंस ऑन रिस्पॉन्सिबल बिजनेस कंडक्ट (NGRBC) के सभी नौ सिद्धांतों के अनुरूप तैयार किया गया है।

कंपनी में 2,329 एम्प्लॉयीज, करीब 25 फीसदी महिलाएं

रिपोर्ट के मुताबिक 31 मार्च 2026 तक टीवी टुडे नेटवर्क में कुल 2,329 एम्प्लॉयी थे। इनमें 2,121 स्थायी एम्प्लॉयी और 208 अन्य एम्प्लॉयी शामिल हैं। कुल एम्प्लॉयीज में 1,740 पुरुष और 589 महिलाएं हैं। यानी कंपनी की कुल वर्कफोर्स में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 25 फीसदी है। कंपनी ने बताया है कि उसके पास अलग से ‘वर्कर्स’ कैटेगरी नहीं है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कंपनी के बोर्ड में उस समय छह निदेशकों में तीन महिलाएं थीं। हालांकि 28 अप्रैल 2026 से अभिषेक मल्होत्रा को नॉन-एग्जीक्यूटिव इंडिपेंडेंट डायरेक्टर नियुक्त किए जाने के बाद बोर्ड में निदेशकों की संख्या सात हो गई।

कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 में CSR के लिए 2.19 करोड़ रुपये का आवंटन दिखाया है। कंपनी का कुल टर्नओवर 817.15 करोड़ रुपये और नेटवर्थ 889.21 करोड़ रुपये बताई गई है।

कारोबार का करीब 99 फीसदी हिस्सा टीवी और डिजिटल मीडिया से

रिपोर्ट के अनुसार टीवी टुडे नेटवर्क के कुल टर्नओवर में टेलीविजन और अन्य मीडिया ऑपरेशंस का योगदान 98.97 फीसदी है। इसमें टीवी पर न्यूज और करंट अफेयर्स की ब्रॉडकास्टिंग के साथ डिजिटल मीडिया और दूसरे मीडिया ऑपरेशंस शामिल हैं। कंपनी की देशभर में 21 ऑफिस लोकेशन बताई गई हैं और उसकी पहुंच दुनिया के 67 देशों तक है।

कंपनी के प्रमुख ग्राहकों में विज्ञापनदाता और उसके टीवी चैनलों तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म के दर्शक/सब्सक्राइबर शामिल हैं। रिपोर्ट में एक्सपोर्ट से जुड़े कारोबार का योगदान 13.64 फीसदी बताया गया है।

AI और डिजिटल टेक्नोलॉजी को लेकर कंपनी की बड़ी योजना

रिपोर्ट का एक अहम हिस्सा AI और टेक्नोलॉजी से जुड़ा है। कंपनी ने माना है कि मीडिया इंडस्ट्री तेजी से AI और डिजिटल प्लेटफॉर्म आधारित सिस्टम की तरफ बढ़ रही है। इसके साथ पारंपरिक वर्कफ्लो के पुराने पड़ने, कुछ थर्ड-पार्टी प्लेटफॉर्म और एल्गोरिदम पर ज्यादा निर्भरता और AI, ऑटोमेशन तथा एडवांस्ड एनालिटिक्स में स्किल गैप जैसी चुनौतियां भी हैं।

वहीं कंपनी AI को एक बड़े अवसर के तौर पर भी देख रही है। रिपोर्ट के मुताबिक जनरेटिव AI और इंटेलिजेंट ऑटोमेशन की मदद से कंटेंट तैयार करने की क्षमता और क्रिएटिविटी बढ़ाने, काम को ज्यादा तेज बनाने और दर्शकों के लिए पर्सनलाइज्ड कंटेंट तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है। कंपनी इंटरैक्टिव स्टोरीटेलिंग, लाइव डिजिटल एक्सपीरियंस और दूसरे इमर्सिव फॉर्मेट के जरिए ऑडियंस एंगेजमेंट बढ़ाने की भी योजना पर काम कर रही है।

इसके लिए कंपनी अपने CMS में AI आधारित टूल्स को अपडेट कर रही है। इनका मकसद कुछ ही क्लिक में स्टोरी से जुड़े डेटा, तस्वीरें और वीडियो उपलब्ध कराकर खबर तैयार करने में लगने वाला समय कम करना है। वीडियो प्रोडक्शन, एडिटिंग और पब्लिशिंग के काम को ऑटोमेट करने और दर्शकों की एंगेजमेंट के आधार पर रियल टाइम में कंटेंट ऑप्टिमाइज करने पर भी काम किया जा रहा है।

कंपनी अपने खुद के डिजिटल प्लेटफॉर्म को मजबूत करने और अलग-अलग सोशल मीडिया व शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म पर मौजूदगी बढ़ाने की भी बात करती है। साथ ही एम्प्लॉयीज को AI, डेटा और डिजिटल स्टोरीटेलिंग टूल्स की ट्रेनिंग देने, प्रयोग को बढ़ावा देने और टेक्नोलॉजी कंपनियों व स्टार्टअप्स के साथ साझेदारी करने की योजना है।

साइबर सिक्योरिटी पर भी जोर

कंपनी ने डेटा प्राइवेसी और साइबर सिक्योरिटी को कारोबार के लिए अहम जोखिम माना है। रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी की इंफॉर्मेशन सिक्योरिटी पॉलिसी ISO 27001 मानकों के अनुरूप है और साइबर सिक्योरिटी को रणनीतिक बिजनेस रिस्क के तौर पर देखा जाता है। कंपनी ने Zero Trust Architecture, बैकअप सिस्टम, संवेदनशील डेटा की एन्क्रिप्शन, IT नेटवर्क की नियमित सिक्योरिटी असेसमेंट, लगातार मॉनिटरिंग और एक्सेस कंट्रोल जैसे कदमों का जिक्र किया है।

कंपनी के मुताबिक वित्त वर्ष के दौरान कोई डेटा ब्रीच रिपोर्ट नहीं हुई।  

एम्प्लॉयीज की सेहत और वेलनेस पर खर्च बढ़ा

टीवी टुडे नेटवर्क ने एम्प्लॉयीज के स्वास्थ्य और कल्याण के लिए कई पहल की हैं। रिपोर्ट के मुताबिक सभी एम्प्लॉयीज को हेल्थ और एक्सीडेंट इंश्योरेंस का कवर मिला हुआ है। स्थायी एम्प्लॉयीज के लिए स्वास्थ्य बीमा और दुर्घटना बीमा की कवरेज 100 फीसदी बताई गई है।

कंपनी ने एम्प्लॉयीज के वेलनेस कार्यक्रमों पर अपने कुल रेवेन्यू का 0.78 फीसदी खर्च किया, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह 0.40 फीसदी था। कंपनी ने 100 फीसदी रिटर्न-टू-वर्क रेट भी दर्ज किया। स्वास्थ्य और सुरक्षा तथा स्किल अपग्रेडेशन ट्रेनिंग में 92 फीसदी एम्प्लॉयीज को कवर किया गया, जबकि सभी स्थायी एम्प्लॉयीज के परफॉर्मेंस और करियर डेवलपमेंट रिव्यू किए गए।

कंपनी के कॉरपोरेट ऑफिस में 24 घंटे मेडिकल सुविधा उपलब्ध होने, डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ की व्यवस्था तथा अस्पतालों के साथ आपातकालीन सेवाओं के लिए टाई-अप की भी जानकारी दी गई है। एम्प्लॉयीज के लिए हेल्थ चेकअप, आई कैंप, योग, फिटनेस, फिजियोथेरेपी, न्यूट्रिशन काउंसलिंग और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े कार्यक्रम भी आयोजित किए गए।

मानसिक स्वास्थ्य के लिए कंपनी ने बाहरी पार्टनर के जरिए 100 फीसदी एम्प्लॉयीज को काउंसलिंग की सुविधा उपलब्ध कराई। रिपोर्ट के मुताबिक 244 एम्प्लॉयीज ने इसके लिए साइन-अप किया और 161 काउंसलिंग सेशन हुए।

CSR के तहत 7 प्रोजेक्ट, 5 लाख से ज्यादा लोगों तक पहुंच

CSR के मोर्चे पर कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 में 7 प्रोजेक्ट लागू किए। इनमें पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका, आपदा प्रबंधन, खेल और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्र शामिल रहे। ये कार्यक्रम उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार और झारखंड के पांच आकांक्षी जिलों समेत कई इलाकों में चलाए गए।

कंपनी के मुताबिक उसके सामाजिक प्रभाव से जुड़े कार्यक्रमों से 2025-26 तक 5 लाख से ज्यादा लाभार्थियों की जिंदगी पर सकारात्मक असर पड़ा है। अब कंपनी का लक्ष्य 2030 तक अतिरिक्त 2.5 लाख लोगों तक पहुंचने का है।

पर्यावरण से जुड़े CSR कार्यक्रमों से करीब 99,000 लोगों को फायदा हुआ। शिक्षा से जुड़े कार्यक्रमों के जरिए करीब 4,000 बच्चों को मदद मिली। आजीविका से जुड़े कार्यक्रमों से करीब 19,700 लोगों को फायदा हुआ, जिनमें 3,000 से ज्यादा महिलाएं शामिल थीं। स्वास्थ्य और सैनिटेशन से जुड़े कार्यक्रमों से करीब 65,700 लोगों को फायदा हुआ।

AIIMS दिल्ली के साथ आपदा प्रबंधन पर काम

CSR के तहत कंपनी ने AIIMS दिल्ली के साथ ब्लड सप्लाई से जुड़े Blood Supply Contingency and Emergency Plan (B-SCEP) को मजबूत करने में सहयोग किया। कंपनी के अनुसार इस पहल का मकसद आपदा या मेडिकल इमरजेंसी के समय सुरक्षित और पर्याप्त ब्लड सप्लाई सुनिश्चित करना है और इससे कम से कम 9,200 लोगों की जान बचाने की क्षमता का अनुमान है।

इसके अलावा कंपनी ने ग्रामीण विकास और खेलों को भी CSR का हिस्सा बनाया। करीब 200 युवा तीरंदाजों को ट्रेनिंग और आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए गए। कई प्रतिभागियों ने सब-डिस्ट्रिक्ट, जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया और पुरस्कार भी जीते। ग्रामीण विकास से जुड़े कार्यक्रमों से करीब 4,100 लोगों को फायदा हुआ।

पर्यावरण के लिए ऊर्जा और वेस्ट मैनेजमेंट पर काम

कंपनी ने ऊर्जा की खपत और पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने के लिए ऊर्जा-कुशल उपकरणों के इस्तेमाल पर जोर दिया है। रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2025-26 में कुल ऊर्जा खपत 34,521.35 GJ बताई गई है। प्रति एम्प्लॉयी ऊर्जा खपत 14.82 GJ रही। कंपनी की Scope 1 emissions 648.16 tCO2e और Scope 2 emissions 5,960.05 tCO2e बताई गई हैं।

वेस्ट मैनेजमेंट के तहत प्लास्टिक कचरे को नोएडा अथॉरिटी के जरिए म्युनिसिपल सॉलिड वेस्ट के रूप में निपटाया जाता है। ई-वेस्ट को अधिकृत रिसाइक्लर्स को दिया जाता है, जबकि मेडिकल रूम से निकलने वाले बायोमेडिकल वेस्ट को नोएडा के एक नजदीकी अस्पताल के साथ समन्वय करके संभाला जाता है। इस्तेमाल की गई बैटरियों को बदलते समय विक्रेताओं को वापस कर दिया जाता है।

कंपनी ने यह भी बताया कि उसके ऑफिस किसी इकोलॉजिकली सेंसिटिव एरिया के पास नहीं हैं और रिपोर्टिंग अवधि में पर्यावरण कानूनों से जुड़े किसी नॉन-कम्प्लायंस का मामला सामने नहीं आया।

सरकार और रेगुलेटरी नीतियों पर भी कंपनी की भागीदारी

टीवी टुडे नेटवर्क ने बताया है कि वह छह राष्ट्रीय स्तर के इंडस्ट्री एसोसिएशन और चैंबर की सदस्य है। इनमें News Broadcasters & Digital Association (NBDA), Indian Broadcasting & Digital Foundation (IBDF), Association of Radio Operators for India (AROI), Digital News Publishers Association (DNPA), Confederation of Indian Industry (CII) और Internet and Mobile Association of India (IAMAI) शामिल हैं।

कंपनी ने मीडिया और ब्रॉडकास्टिंग से जुड़े कई नीतिगत मामलों पर इंडस्ट्री बॉडीज के जरिए अपने सुझाव दिए। इनमें 2025 के ब्रॉडकास्टिंग और केबल सेवाओं से जुड़े TRAI ड्राफ्ट नियम, DD Free Dish की ई-ऑक्शन पॉलिसी, भारत में टीवी रेटिंग एजेंसियों से जुड़े 2025 के संशोधन, IT Rules 2021 में बदलाव, कॉपीराइट उल्लंघन और एंटी-पाइरेसी रणनीति तथा Copyright and Generative AI पर DPIIT के कंसल्टेशन पेपर जैसे मुद्दे शामिल हैं।

कॉरपोरेट गवर्नेंस और एंटी-करप्शन पर कंपनी का दावा

रिपोर्ट में कंपनी ने कहा है कि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान उसके खिलाफ कोई महत्वपूर्ण जुर्माना या पेनल्टी नहीं लगाई गई। डायरेक्टर्स या KMPs से जुड़े किसी कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट का मामला भी रिपोर्ट नहीं हुआ। कंपनी के खिलाफ एंटी-कम्पीटिटिव प्रैक्टिस से जुड़ा कोई प्रतिकूल आदेश भी जारी नहीं हुआ।

कंपनी के पास एंटी-ब्राइबरी और एंटी-करप्शन पॉलिसी है और उसने अनैतिक गतिविधियों के खिलाफ जीरो-टॉलरेंस की नीति अपनाने की बात कही है। वरिष्ठ प्रबंधन की ओर से इस पॉलिसी के पालन को लेकर तिमाही अनुपालन घोषणाएं भी की जाती हैं।

दर्शकों की शिकायतों के लिए दो-स्तरीय व्यवस्था

दर्शकों की शिकायतों के लिए कंपनी ने अपनी वेबसाइट और इंडस्ट्री बॉडी के जरिए शिकायत दर्ज कराने की व्यवस्था का जिक्र किया है। रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में MIB के जरिए 26 दर्शकों की शिकायतें और कंपनी को सीधे 1,204 दर्शकों की शिकायतें मिलीं। रिपोर्ट में इन सभी शिकायतों के साल के अंत तक पेंडिंग न रहने की जानकारी दी गई है।

कंपनी के मुताबिक, अगर किसी दर्शक को शिकायत पर कंपनी के जवाब से संतुष्टि नहीं होती है तो मामला न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एवं डिजिटल स्टैंडर्ड एसोसिएशन तक ले जाया जा सकता है। कंपनी को मिलने वाली शिकायतों को संबंधित आंतरिक टीमों के पास जांच के लिए भेजा जाता है और उसके बाद शिकायतकर्ता को जवाब दिया जाता है।

2030 तक 7.5 लाख लाभार्थियों तक पहुंचने का लक्ष्य

कंपनी ने अपने आगे के लक्ष्यों को भी रिपोर्ट में रखा है। इसके मुताबिक 2030 तक CSR कार्यक्रमों के जरिए कुल 7.5 लाख लाभार्थियों तक सकारात्मक प्रभाव पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके तहत शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट, आजीविका, स्वास्थ्य और सैनिटेशन तथा पर्यावरण जैसे क्षेत्रों पर ध्यान दिया जाएगा।

एम्प्लॉयीज के मामले में कंपनी का लक्ष्य वर्क-लाइफ बैलेंस से जुड़ी संतुष्टि में 15-20 फीसदी सुधार, सालाना हेल्थ चेकअप में 90-95 फीसदी एम्प्लॉयीज की कवरेज और हर साल स्पोर्ट्स, फिटनेस और वेलनेस गतिविधियों में 60-70 फीसदी वर्कफोर्स की भागीदारी सुनिश्चित करना है। मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं तक 100 फीसदी एम्प्लॉयीज की पहुंच और वेल-being स्कोर में 15-20 फीसदी सुधार का भी लक्ष्य रखा गया है।

कुल मिलाकर, टीवी टुडे नेटवर्क की FY 2025-26 BRSR रिपोर्ट में कंपनी ने अपने कारोबार के साथ-साथ AI और डिजिटल बदलाव, साइबर सिक्योरिटी, एम्प्लॉयीज की वेलनेस, CSR, पर्यावरण संरक्षण, कॉरपोरेट गवर्नेंस और दर्शकों की शिकायतों से जुड़े कदमों का विस्तृत ब्यौरा दिया है। कंपनी ने खास तौर पर यह संकेत दिया है कि आने वाले वर्षों में टेक्नोलॉजी, AI और डिजिटल प्लेटफॉर्म उसके कारोबार और कंटेंट ऑपरेशंस में अहम भूमिका निभाएंगे। 

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भारतीय मीडिया में ‘न्यूजरूम रीसेट’: क्यों जा रही हैं लोगों की नौकरियां?

HR डिपार्टमेंट की ओर से बैठक के संदेश आते हैं, जल्दबाजी में फोन किए जाते हैं, एम्प्लॉयीज से इस्तीफा मांगने वाले वॉट्सऐप संदेश आते हैं और न्यूजरूम धीरे-धीरे, एक-एक टीम करके छोटे होते जाते हैं।

Last Modified:
Monday, 10 August, 2026
Laysoff521

तस्मयी लाहा रॉय, एडिटर, एक्सचेंज4मीडिया ।।

“मुझे पता है कि मैं हैरान हूं... दुखी रही हूं, जबकि हैरान होने की बजाय मुझे खुश दिखना चाहिए।”

पत्रकारिता का पुरस्कार लेने के लिए मंच पर खड़ी Andy Sachs के हाथ में ट्रॉफी तो है, लेकिन उनका ध्यान उस पर नहीं है।

क्योंकि मुझे अभी पता चला है कि मेरे अखबार के कई प्रतिभाशाली और पुरस्कार जीत चुके पत्रकारों को नौकरी से निकाल दिया गया है। वो भी एक संदेश के जरिए।”

कुछ ही पल बाद वह एक ऐसी बात कहती हैं, जो तालियां खत्म होने के बाद भी लंबे समय तक याद रहती है।

“हम समझते हैं कि पत्रकारिता बदल रही है। लेकिन जब इसका असर खुद पर पड़ता है, तो बहुत दुख होता है... और तकनीकी भाषा में कहें तो हमारी हालत अब ‘खत्म’ है।”

यह दृश्य द डेविल वियर्स प्राडा 2 (The Devil Wears Prada 2) का है। काल्पनिक है, लेकिन पूरी तरह काल्पनिक नहीं।

भारत की न्यूज इंडस्ट्री में छंटनी के बाद कोई पुरस्कार लेने वाला भाषण नहीं होता। यहां सिर्फ HR डिपार्टमेंट की ओर से बैठक के संदेश आते हैं, जल्दबाजी में फोन किए जाते हैं, एम्प्लॉयीज से इस्तीफा मांगने वाले वॉट्सऐप संदेश आते हैं और न्यूजरूम धीरे-धीरे, एक-एक टीम करके छोटे होते जाते हैं।

Andy Sachs पर्दे पर जिस स्थिति का जिक्र करती हैं, वह अब भारतीय मीडिया में भी तेजी से जानी-पहचानी हकीकत बनती जा रही है। ‘पुनर्गठन’ या ‘लागत कम करने’ जैसे शब्दों के पीछे कई ऐसे करियर हैं, जिन्हें अचानक रोक दिया गया है। साथ ही एक ऐसी इंडस्ट्री है, जो अपने इतिहास के सबसे बड़े बदलावों में से एक से गुजर रही है।

2025 में करीब 1,000 मीडिया प्रोफेशनल्स ने गंवाई नौकरी

2025 में देशभर के न्यूजरूम में हुए पुनर्गठन के चलते अनुमानित 1,000 मीडिया प्रोफेशनल्स की नौकरियां गईं। 2026 में यह सिलसिला और तेज हुआ है। अगस्त तक एक्सचेंज4मीडिया की रिपोर्टिंग के मुताबिक, यह संख्या पहले ही 1,000 का आंकड़ा पार कर चुकी है, जबकि साल के अभी कई महीने बाकी हैं।

इस छंटनी से शायद ही कोई वर्ग बचा हो। जर्नलिस्ट, प्रोड्यूसर्स, वीडियो एडिटर्स, कैमरापर्सन, डिजाइनर, प्रोडक्ट व टेक्नोलॉजी सेक्टर से जुड़े एम्प्लॉयी, सेल्स टीम और सहायक एम्प्लॉयी- सभी प्रभावित हुए हैं।

छंटनी का असर अलग-अलग स्तर के एम्प्लॉयीज पर पड़ा है। इसमें नए-नए भर्ती हुए एम्प्लॉयी भी हैं और लंबे समय से काम कर रहे एडिटर और बिजनेस हेड भी। यहां तक कि उन संस्थानों में भी नौकरियां गई हैं, जिन्हें कभी इंडस्ट्री के सबसे स्थिर नियोक्ताओं में गिना जाता था।

ये अब अलग-अलग जगहों पर होने वाली छंटनी नहीं रह गई हैं। ये उस गहरे बदलाव के साफ संकेत हैं, जो चुपचाप न्यूज कारोबार को नए तरीके से परिभाषित कर रहा है।

पिछले 18 महीनों में भारत के कई बड़े मीडिया संगठनों में पुनर्गठन देखने को मिला है। इसका असर टीवी नेटवर्क, अखबार समूह, डिजिटल कंपनियों और कारोबार से जुड़ी खबरों के न्यूजरूम तक हुआ है।

यह लहर अंग्रेजी, हिंदी और क्षेत्रीय मीडिया- हर जगह पहुंची है। इससे संकेत मिलता है कि संकट किसी एक मंच या किसी एक कारोबार मॉडल तक सीमित नहीं है।

आखिर ऐसा क्यों हो रहा है?

यह अब सिर्फ एक कंपनी के खर्च कम करने या किसी एक न्यूजरूम के अपने बजट को कसने की कहानी नहीं है। दो दर्जन से ज्यादा मौजूदा और पूर्व मीडिया अधिकारियों, HR लीडर्स, एडिटर्स और एम्प्लॉयीज से बातचीत से संकेत मिलता है कि इंडस्ट्री एक नए दौर में प्रवेश कर चुकी है।

बदल रहा पत्रकारिता का पूरा आर्थिक मॉडल  

विज्ञापन अभी भी दबाव में है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के काम करने वाले एल्गोरिदम पहले से ज्यादा अनिश्चित हो गए हैं। दर्शक और पाठक अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स में बंट रहे हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस न्यूजरूम के काम करने के तरीके को बदल रही है और मैनेजमेंट पर मुनाफा देने का लगातार दबाव है।

इन सबका नतीजा यह है कि न्यूज संगठन किस तरह बनाए जाएं, उनमें कितने लोग काम करें और उन्हें लंबे समय तक कैसे चलाया जाए- इन सभी चीजों में बड़ा बदलाव हो रहा है।

आंकड़े पूरी कहानी बताते हैं

भारत का व्यापक मीडिया व एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री भले ही लगातार बढ़ रहा हो, लेकिन न्यूज क्षेत्र तेजी से एक अलग स्थिति में जाता दिख रहा है। हाल की FICCI-EY रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में डिजिटल सदस्यता से होने वाली कमाई में 60 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। इसकी बड़ी वजह वीडियो और संगीत स्ट्रीमिंग में मजबूत वृद्धि रही।

पैसे देकर लिए जाने वाले वीडियो सदस्यता खातों की संख्या बढ़कर 21.6 करोड़ हो गई, जबकि पैसे देकर संगीत सुनने वाले ग्राहकों की संख्या 37 फीसदी बढ़कर 1.44 करोड़ हो गई।

लेकिन न्यूज इंडस्ट्री अभी भी लोगों को खबरों के लिए पैसे देने के लिए तैयार करने में संघर्ष कर रहा है।

भारत में सिर्फ करीब 40 लाख भुगतान वाली डिजिटल न्यूज सदस्यताएं हैं। इससे पता चलता है कि ऐसे बाजार में पत्रकारिता तैयार करने का आर्थिक मॉडल कितना मुश्किल है, जहां पाठक लंबे समय से मुफ्त खबरें पढ़ने के आदी हो चुके हैं।

पब्लिशर्स को इसके साथ एक और बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है- अपने पाठकों और दर्शकों को बनाए रखना।

उसी रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में ऑनलाइन न्यूज प्लेटफॉर्म्स की पहुंच 9 फीसदी कम हुई। इंडस्ट्री से जुड़े लोगों ने इसकी वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से तैयार सर्च समरीज और AI एप्लीकेशंस के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल को बताया है। इन तकनीकों की वजह से लोगों को उनके सवालों के जवाब सीधे मिल जाते हैं और उन्हें प्रकाशक की वेबसाइट पर जाने की जरूरत कम पड़ती है।

एक ऐसी इंडस्ट्री के लिए, जो अभी भी काफी हद तक विज्ञापन पर निर्भर है, कम पाठकों का मतलब है कम पेज व्यू, कम कमाई और लागत कम करने का बढ़ता दबाव। इससे एक दुष्चक्र बनता है। कम कमाई के कारण कंपनियों को अपनी टीम छोटी करनी पड़ती है, जबकि प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए तकनीक और AI में ज्यादा निवेश करना पड़ रहा है।

सूचीबद्ध मीडिया कंपनियों पर भी दबाव

यह दबाव शेयर बाजार में सूचीबद्ध मीडिया कंपनियों के प्रदर्शन में भी दिखाई देता है। कुछ कंपनियां आक्रामक लागत नियंत्रण और पुनर्गठन के जरिए मुनाफे में वापस आई हैं, जबकि कुछ अभी भी कमजोर ऐड मार्केट, टेलीविजन से होने वाली कमाई पर दबाव और धीमी डिजिटल कमाई से जूझ रही हैं।

कंपनियों के तिमाही नतीजों के दौरान मैनेजमेंट की बातचीत में भी अब विस्तार के बजाय कामकाज को ज्यादा कुशल बनाने, मुनाफे और लागत कम करने पर ज्यादा जोर दिखाई देता है। कुछ पब्लिशर्स के लिए प्रिंट जैसे पुराने कारोबार में स्थिरता के संकेत जरूर मिले हैं, लेकिन डिजिटल कारोबार, जिसे कभी इंडस्ट्री का सबसे बड़ा विकास इंजन माना जाता था, अब खुद दबाव में है।

उदाहरण के लिए HT मीडिया ने बताया कि उसके प्रिंट कारोबार में अच्छी वृद्धि के बावजूद डिजिटल कारोबार को चुनौतियों का सामना करना पड़ा।

जून तिमाही में डिजिटल कारोबार से होने वाली आय साल-दर-साल 28 फीसदी घटकर 27 करोड़ रुपये रह गई, जबकि यह कारोबार लगातार घाटे में रहा। कंपनी ने इस गिरावट के लिए तिमाही के दौरान किए गए कारोबारी ढांचे में बदलाव को जिम्मेदार बताया।

इसके नतीजे न्यूज पब्लिशर्स के सामने मौजूद बड़ी चुनौती को दिखाते हैं। लोग भले ही ऑनलाइन न्यूज पढ़ रहे हों, लेकिन उस खपत को मुनाफे वाले डिजिटल कारोबार में बदलना लगातार मुश्किल हो रहा है।

HT मीडिया अकेली कंपनी नहीं

नेटवर्क18 मीडिया एंड इन्वेस्टमेंट्स का प्रदर्शन एक अलग तस्वीर दिखाता है। जून तिमाही में कंपनी की कुल परिचालन आय 10.3 फीसदी बढ़कर 516 करोड़ रुपये हो गई। इसमें कई राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के दौरान बढ़े विज्ञापन खर्च की बड़ी भूमिका रही। लेकिन इसके बावजूद कंपनी को 38.7 करोड़ रुपये का कुल शुद्ध घाटा हुआ। पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी को 148 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ था।

जागरण प्रकाशन, डीबी कॉर्प, टीवी टुडे नेटवर्क और जी मीडिया जैसी कंपनियों के जून तिमाही के नतीजे अभी आने बाकी हैं। इसलिए भारत की पूरी न्यूज इंडस्ट्री की वित्तीय तस्वीर अभी सामने आना बाकी है।

ठीक है... लेकिन कंपनियां आखिर तय कैसे करती हैं कि किसे नौकरी से निकाला जाए?

वित्तीय नतीजे यह समझाते हैं कि कंपनियों पर दबाव क्यों है। लेकिन यह नहीं बताते कि बंद दरवाजों के पीछे छंटनी की प्रक्रिया आखिर कैसे होती है।

एक प्रमुख मीडिया कंपनी के पूर्व सीनियर HR अधिकारी, जो कई पुनर्गठन प्रक्रियाओं में सीधे शामिल रहे हैं, कहते हैं कि छंटनी आम तौर पर पहला कदम नहीं होता। उनके मुताबिक, “यह लगभग हमेशा आखिरी कदम होता है।”

उनके अनुसार, इसके पीछे कोई एक घटना नहीं होती, बल्कि कई दबाव एक साथ आते हैं।

विज्ञापन की वृद्धि धीमी हुई। डिजिटल पब्लिशर्स को Google के खोज तंत्र में हुए बदलावों का असर झेलना पड़ा, जिससे खासकर अमेरिका जैसे बाजारों से मिलने वाला ज्यादा कमाई वाला अंतरराष्ट्रीय ट्रैफिक कम हुआ। साथ ही कमाई का स्तर भी कमजोर हुआ।

उन्होंने बताया, “जब ट्रैफिक और कमाई दोनों एक साथ गिरने लगे तो कंपनियों को समझ आया कि पुराना विकास मॉडल अब टिकाऊ नहीं है।”

पहले कंपनियों ने समस्या से बाहर निकलने के लिए विकास का सहारा लेने की कोशिश की। टीमें बढ़ाई गईं। नए कंटेंट प्रारूप आजमाए गए। कई प्रयोग शुरू किए गए, इस उम्मीद में कि ट्रैफिक वापस आएगा। लेकिन जब यह रणनीति काम नहीं आई तो बातचीत विकास से बचने की तरफ चली गई।

उनके शब्दों में, “डिजिटल बदलाव अब नए प्रयोगों के बारे में नहीं रहा। यह लागत के बारे में हो गया।”

पहले लोगों को नहीं, पदों को निशाना बनाया गया

पूर्व HR अधिकारी के मुताबिक, शुरुआत में कंपनियों ने सीधे एम्प्लॉयीज को निशाना नहीं बनाया। सबसे पहले पदों पर नजर गई। भर्ती रोक दी गई। खाली पदों को नहीं भरा गया। किसी एम्प्लॉयी के जाने के बाद उसकी जगह नई भर्ती रोक दी गई।

हर डिपार्टमेंट, हर एम्प्लॉयी और हर वेतन पर खर्च की समीक्षा शुरू हुई। आम धारणा के उलट, शुरुआती लागत समीक्षा अक्सर एडिटोरियल डिपार्टमेंट के बजाय टेक्नोलॉजी, प्रोडक्ट और सहायक डिपार्टमेंट्स में की गई।

उनका कहना था, “टेक्नोलॉजी से जुड़े पांच वरिष्ठ पदों पर काम करने वाले लोग कभी-कभी उतनी लागत बचा सकते हैं, जितनी दर्जनों जूनियर एडिटोरियल पदों को खत्म करने से बच सकती है।”

जब इन उपायों के बाद भी आर्थिक अंतर कम नहीं हुआ, तभी कंपनियों ने एम्प्लॉयीज की छंटनी शुरू की।

डिपार्टमेंट हेड्स को एम्प्लॉयीज की संख्या घटाने का लक्ष्य देने के बजाय लागत कम करने का लक्ष्य दिया गया और उनसे पूछा गया कि वे यह लक्ष्य कैसे हासिल करेंगे।

प्रदर्शन का आकलन एक आधार था, लेकिन सिर्फ यही आधार नहीं था।

उत्पाद से होने वाली कमाई, पद की जरूरत खत्म होना, भविष्य की कारोबारी प्राथमिकताएं और कुल वेतन खर्च- इन सभी चीजों को एक साथ देखा गया और उसके बाद अंतिम फैसले लिए गए।

AI ने भी बदल दी न्यूजरूम की तस्वीर

पुनर्गठन के साथ-साथ न्यूजरूम में AI का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ा है। टीमों से कम लोगों में ज्यादा काम करने की उम्मीद की जाने लगी। AI उपकरण रोजमर्रा के काम का हिस्सा बनने लगे। जो पत्रकार पहले एक दिन में आठ खबरें तैयार करते थे, उनसे अब 10 या 12 खबरें तैयार करने की उम्मीद की जाने लगी।

पूर्व HR अधिकारी ने कहा, “उम्मीद सिर्फ लागत कम करने की नहीं थी। साथ ही काम की उत्पादकता बढ़ाने की भी थी।”

हालांकि, पुनर्गठन के फैसलों से परिचित कुछ अधिकारियों ने एक्सचेंज4मीडिया से नाम न बताने की शर्त पर कहा कि इन प्रक्रियाओं को सिर्फ लागत कम करने के तौर पर देखना सही नहीं है।

एक ऐसे अधिकारी के मुताबिक, जिनके संगठन ने पिछले दो वर्षों में अपने मीडिया कारोबार में करीब 300 पद कम किए हैं, यह प्रक्रिया पहले एम्प्लॉयी को नौकरी से निकालने से काफी पहले शुरू हो जाती है।

उनके मुताबिक, उद्देश्य तेजी से बदलते उपभोक्ता व्यवहार, तकनीक और कमाई के तरीकों के हिसाब से कारोबार को फिर से तैयार करना, कामकाज को ज्यादा कुशल बनाना और उन क्षेत्रों में निवेश पर ध्यान देना है जहां लंबे समय में विकास की संभावना ज्यादा है।

स्रोत ने बताया कि संगठन के ढांचे की समय-समय पर समीक्षा की जाती है ताकि लगातार चुनौतीपूर्ण होते मीडिया माहौल में कारोबार टिकाऊ और मुनाफे वाला बना रहे।

उन्होंने यह भी कहा कि जहां पद प्रभावित होते हैं, वहां कंपनियां आम तौर पर अपनी आंतरिक नीतियों और लागू कानूनी नियमों का पालन करती हैं। नौकरी से अलग होने के दौरान मिलने वाली सहायता परिस्थितियों के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है।

एक्सचेंज4मीडिया ने पिछले कुछ महीनों में पुनर्गठन या एम्प्लॉयीज की संख्या कम करने वाले कई मीडिया संगठनों से संपर्क किया।

ज्यादातर ने आधिकारिक तौर पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया, जबकि कुछ ने कोई जवाब नहीं दिया।

इंसानी कीमत

जिन एम्प्लॉयीज की नौकरियां गईं, उनके लिए ये छंटनी सिर्फ कंपनी के हिसाब-किताब के फैसले नहीं थे। ये उनकी जिंदगी से जुड़े बेहद निजी और मुश्किल पल थे।

एक अंग्रेजी न्यूज चैनल में यह प्रक्रिया अप्रैल के आखिरी सप्ताह में चुपचाप शुरू हुई। एम्प्लॉयीज को एक-एक करके HR डिपार्टमेंट ने बुलाया और बताया गया कि अब उनकी सेवाओं की जरूरत नहीं है। यह प्रक्रिया मई तक चली और कुछ एम्प्लॉयीज की विदाई जून तक जारी रही।

कुल मिलाकर अनुमानित 150 एम्प्लॉयीज को नौकरी से निकाला गया, जिनमें बड़ी संख्या अंग्रेजी न्यूज संचालन से जुड़े लोगों की थी। चैनल बंद नहीं हुआ, लेकिन उसके अंग्रेजी टेलीविजन और डिजिटल संचालन को काफी छोटा कर दिया गया। अब दोनों प्लेटफॉर्म्स को संभालने के लिए काफी छोटी टीम बची थी।

प्रभावित एम्प्लॉयीज में से कई ऐसे थे, जिन्होंने संगठन के साथ चार से पांच साल बिताए थे।

एम्प्लॉयीज के मुताबिक, नौकरी से अलग होने की प्रक्रिया और मुआवजा कंपनी की नीति के मुताबिक था, लेकिन आधिकारिक वजह आम तौर पर ‘लागत कम करना’ जैसे व्यापक शब्दों से आगे नहीं जाती थी।

हालांकि, एक पूर्व एम्प्लॉयी का मानना था कि समस्या इससे कहीं गहरी थी।

उसने कहा, “हमें लागत कम करना वजह बताई गई, लेकिन मुझे नहीं लगता कि असली समस्या यही थी। यह बड़ी मैनेजमेंट संबंधी कमियों का नतीजा था। योजना बनाने, काम को लागू करने और फैसले लेने- तीनों में दिक्कत आई थी और आखिरकार एम्प्लॉयीज को इसकी कीमत चुकानी पड़ी।”

एक अन्य न्यूज नेटवर्क में भी करीब 120 लोग बाहर

इंडस्ट्री में ऐसा ही एक और मामला सामने आया। एक अन्य प्रमुख टेलीविजन न्यूज नेटवर्क में इस साल पुनर्गठन के तहत एडिटोरियल और कारोबारी डिपार्टमेंट्स से जुड़े करीब 120 एम्प्लॉयीज को बाहर जाने को कहा गया, ऐसा मामले से परिचित कई लोगों ने बताया।

कई एम्प्लॉयीज ने अचानक नौकरी जाने की बात बताई। कुछ से संदेश के जरिए इस्तीफा मांगा गया, जबकि कुछ से जल्दबाजी में HR डिपार्टमेंट ने बातचीत की।

एक एम्प्लॉयी ने बताया कि वह एक मीटिंग के बीच में थे, तभी उन्हें संदेश मिला कि वह तुरंत कंपनी का आंतरिक HR ऐप डाउनलोड करे और बिना देरी किए अपना इस्तीफा जमा करे।

कुछ दूसरी संस्थाओं के विपरीत, इन एम्प्लॉयीज ने बताया कि नौकरी से अलग होते समय उन्हें कोई मुआवजा नहीं दिया गया।

ये घटनाएं बताती हैं कि हाल की कई विदाइयां कितनी अचानक और परेशान करने वाली रही हैं। वर्षों में बनाया गया करियर कुछ ही मिनटों में खत्म हो गया।

छंटनी अब अस्थायी कारोबारी दबाव के जवाब में उठाए जाने वाले अलग-अलग कदम नहीं रह गए हैं। वे न्यूजरूम की अर्थव्यवस्था में हो रहे बड़े पुनर्गठन का हिस्सा बन गए हैं और अलग-अलग मालिकाना समूहों, प्लेटफॉर्म्स और कारोबारी मॉडलों वाली संस्थाओं को प्रभावित कर रहे हैं।

इसका असर सिर्फ नौकरी गंवाने वालों तक सीमित नहीं है।

जो एम्प्लॉयी बचे हैं, वे छोटी टीमें, बढ़ती जिम्मेदारियां, ज्यादा काम की उम्मीद और AI की मदद से काम करने के तरीकों पर बढ़ती निर्भरता की बात करते हैं।

कई न्यूजरूम्स में पुनर्गठन ने सिर्फ यह नहीं बदला कि वहां कौन काम करता है, बल्कि यह भी बदल दिया है कि पत्रकारिता तैयार कैसे की जाती है।

मीडिया में निवेश और भर्ती खत्म नहीं हुई, बस दिशा बदल गई

पुनर्गठन के साथ-साथ कई मीडिया संगठन डिजिटल कारोबार, पत्रकारों की व्यक्तिगत पहचान पर आधारित पत्रकारिता, न्यूज पत्रिकाओं, पॉडकास्ट, यूट्यूब और सीधे उपभोक्ता तक पहुंचने वाले उत्पादों के आसपास खुद को फिर से तैयार कर रहे हैं।

अब लक्ष्य सिर्फ ज्यादा खबरें प्रकाशित करना नहीं रह गया है।

अब कोशिश है वफादार पाठक-दर्शक तैयार करने, मजबूत समुदाय बनाने और पारंपरिक विज्ञापन से अलग कमाई के टिकाऊ रास्ते खोजने की।

यह बदलाव पूरी इंडस्ट्री में दिखाई दे रहा है।

पुराने मीडिया प्रकाशक वीडियो और पत्रकारों पर आधारित डिजिटल सामग्री में ज्यादा निवेश कर रहे हैं। वहीं डिजिटल मीडिया कंपनियां पॉडकास्ट, न्यूज पत्रिकाओं और सदस्यता आधारित सेवाओं का विस्तार कर रही हैं।

उदाहरण के लिए ThePrint, जो एक स्वतंत्र मीडिया संगठन है, ने भारत के बड़े डिजिटल न्यूज वीडियो संचालन में से एक तैयार किया है। उसके YouTube पर करीब 30 लाख ग्राहक हैं। यह उसके लिखित न्यूज और पॉडकास्ट रणनीति के साथ मिलकर काम करता है।

इसके साथ ही प्रकाशक विशेष विषयों पर आधारित डिपार्टमेंट, पाठक-दर्शक बढ़ाने वाली टीमें, उत्पाद, आंकड़ों, सदस्यता और कमाई से जुड़ी टीमों में भी निवेश बढ़ा रहे हैं।

कई संगठनों ने डिजिटल कहानी कहने और पत्रकार-केंद्रित प्रारूपों पर ध्यान देते हुए चुनिंदा एडिटोरियल भर्तियां भी की हैं।

इससे पता चलता है कि पूरी इंडस्ट्री एक जैसी गति से सिकुड़ नहीं रही है।

इसके बजाय प्रतिभा और निवेश उन कारोबारों की तरफ जा रहे हैं जो खोज तंत्र से मिलने वाले ट्रैफिक और पारंपरिक विज्ञापन पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय पाठकों और दर्शकों के साथ सीधा संबंध बना सकते हैं।

क्या पत्रकारिता की पढ़ाई करना अब भी फायदे का सौदा है?

पुनर्गठन की मौजूदा लहर से एक असहज सवाल भी उठ रहा है- क्या पत्रकारिता में करियर बनाने के लिए लगातार बढ़ती शिक्षा लागत अब भी सही है?

भारत के प्रमुख पत्रकारिता संस्थानों में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों की फीस आज करीब 2 लाख रुपये से लेकर 10 लाख रुपये से ज्यादा तक हो सकती है। यह फीस संस्थान और विशेषज्ञता के आधार पर अलग-अलग होती है।

प्रमुख निजी पत्रकारिता और मीडिया संस्थानों में डिग्री या स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम की लागत कई लाख रुपये तक पहुंच सकती है।

एशियन कॉलेज ऑफ जर्नलिज्म, सिम्बायोसिस इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया एंड कम्युनिकेशन, एमिटी यूनिवर्सिटी, मणिपाल एकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन और क्राइस्ट यूनिवर्सिटी जैसे संस्थानों में पढ़ाई छात्रों और उनके परिवारों के लिए बड़ा आर्थिक निवेश है।

लेकिन राजनीश सिंह, मैनेजिंग पार्टनर, SimplyHR Solutions और TV18 के पूर्व Group Head-HR के मुताबिक शुरुआती वेतन में लगभग उसी अनुपात में बढ़ोतरी नहीं हुई है।

उन्होंने कहा, “चिंता की बात यह है कि मीडिया में करियर का आर्थिक ढांचा करीब दो दशक में मूल रूप से नहीं बदला है। जब मैंने करीब 20 साल पहले इंडस्ट्री जॉइन की थी, तब शुरुआती वेतन 20,000-25,000 रुपये के आसपास था। आज भी कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लगभग इसी तरह का शुरुआती वेतन देते हैं। इससे पता चलता है कि इसमें बहुत कम बदलाव आया है। एक पेशे के तौर पर मीडिया अभी भी आर्थिक रूप से कम भुगतान वाला क्षेत्र है, जबकि इसमें काफी कौशल और मेहनत की जरूरत होती है।”

सिंह का मानना है कि पत्रकारिता अब धीरे-धीरे ऐसा पेशा बनता जा रहा है, जिसे आर्थिक लाभ से ज्यादा जुनून के दम पर लोग चुनते हैं।

साथ ही, उनका कहना है कि अनुभवी पेशेवर कॉरपोरेट कम्युनिकेशन, सार्वजनिक मामलों और स्वतंत्र काम की तरफ जा रहे हैं। दूसरी तरफ AI और लगातार बढ़ता लागत दबाव आने वाले वर्षों में न्यूजरूम्स को और छोटा कर सकता है।

उन्होंने कहा, “पत्रकारिता खत्म नहीं हो रही है। लेकिन मीडिया संस्थानों में पहले की तुलना में निश्चित तौर पर कम लोग काम करेंगे।”

उनके मुताबिक, आने वाले समय के पत्रकारों को खुद को बदलने के लिए तैयार रहना होगा, तकनीक की अच्छी समझ रखनी होगी और उन्हें एक ही विषय तक सीमित रहने के बजाय अलग-अलग प्रारूपों और विषयों में काम करने के लिए तैयार रहना होगा।

पत्रकारिता की पढ़ाई को लेकर दूसरा नजरिया

YourStory के एडिटर-इन चीफ और ACJ-Bloomberg, Post-Graduate Diploma in Business and Financial Journalism के पूर्व डीन जरशद एनके इस मुद्दे को थोड़ा अलग तरीके से देखते हैं।

उनका कहना है कि पत्रकारिता की पढ़ाई की लागत अपने आप में समस्या नहीं है, बशर्ते छात्रों को उसके बदले वास्तविक लाभ मिले।

उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि अगर छात्र को फायदा मिल रहा है तो लागत सही है। ACJ-Bloomberg में, जहां मैं संस्थापक डीन था, फीस ज्यादा हो सकती है, लेकिन छात्रों को ऐसी योग्यताएं सिखाई जाती हैं जो उन्हें अच्छी तनख्वाह वाली नौकरी पाने में मदद करती हैं। पत्रकारिता गहराई की तरफ बढ़ रही है और दुर्भाग्य से ज्यादातर पत्रकारिता स्कूल अभी भी विस्तार पर ज्यादा ध्यान देते हैं। यही समस्या है।”

उन्होंने आगे कहा कि दूसरी समस्या यह है कि संस्थान युवा पीढ़ी के मीडिया देखने-पढ़ने के तरीके से दूर हो गए हैं।उनके मुताबिक, युवा संस्थागत राय की तुलना में व्यक्तिगत अनुभव को ज्यादा महत्व देते हैं।

“उनके लिए विश्वसनीयता से ज्यादा असलियत मायने रखती है। सोशल मीडिया पर पत्रकारों को अपने संस्थानों की तुलना में जो प्रतिक्रिया मिलती है, उसे देखकर यह साफ हो जाता है। पत्रकारिता स्कूलों को इसका रास्ता निकालना होगा। लागत समस्या नहीं है, जब तक नौकरी मिलने की स्थिति अच्छी है। ACJ-Bloomberg में हमारे 100 फीसदी प्लेसमेंट हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि अच्छे कारोबारी पत्रकारों की मांग काफी ज्यादा है।”

अब वही टिकेगा जो खुद को बदल पाएगा

यह खुद को बदलने की जरूरत सिर्फ कक्षा तक सीमित नहीं है।

यह आधुनिक न्यूजरूम्स में सबसे बड़ी जरूरतों में से एक बन गई है, खासकर तब जब संगठन छोटी टीमों और बदलते कारोबारी मॉडल के साथ काम कर रहे हैं।

एक पूर्व वरिष्ठ HR अधिकारी ने बताया कि पुनर्गठन के दौरान सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बदलाव का विरोध था। उन्होंने कहा, “हमारे पास ऐसे लोग थे जो कहते थे, ‘मैं स्वास्थ्य से जुड़ी खबरें करता हूं। मैं जीवनशैली की खबरें नहीं लिख सकता।’ अब यह सोच टिकाऊ नहीं है।”

उनके मुताबिक, “इंडस्ट्री बदल गई है, लेकिन कई पेशेवर उसके साथ नहीं बदले।”

उन्होंने कहा, “आज के न्यूजरूम में खुद को बदलने की क्षमता, विशेषज्ञता जितनी ही महत्वपूर्ण हो गई है। जो पत्रकार अलग-अलग विषयों, प्रारूपों और AI की मदद से काम करने के तरीकों में काम कर सकते हैं, उनके लिए आगे के अवसर उन लोगों की तुलना में ज्यादा हैं, जिनकी पहचान सिर्फ एक विशेषज्ञता से जुड़ी है।”

लेकिन इससे भी बड़ी चुनौती नेतृत्व के सामने है। कई वर्षों तक प्रकाशक डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से मिलने वाले ट्रैफिक पर काफी निर्भर रहे, बजाय इसके कि वे वफादार और सीधे पाठक-दर्शक तैयार करते। जब एल्गोरिदम बदले तो इस निर्भरता की कमजोरी पूरी तरह सामने आ गई।

अंत में सवाल यही है- क्या न्यूजरूम बचेगा?

द डेविल वियर्स प्राडा 2 में Andy Sachs अपना पुरस्कार लेने के बाद मंच से चली जाती हैं। भारत के न्यूजरूम्स में छंटनी के बाद तालियां नहीं बजतीं। यहां सिर्फ अगले काम की तलाश होती है। अगले अनुबंध की तलाश होती है। अगले अवसर की तलाश होती है।

पत्रकारिता बचेगी। लेकिन जिस न्यूजरूम को पत्रकारों की कई पीढ़ियों ने जाना और समझा है, क्या वह उसी रूप में बचा रहेगा? इसका जवाब कहीं ज्यादा मुश्किल है।

 

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GTC Network ने दोबारा शुरू किया गुरबाणी का लाइव प्रसारण

SGPC की आपत्तियों के बीच कुछ मिनट ही रुका प्रसारण, श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या में फोन आने के बाद लिया गया दोबारा शुरू करने का फैसला

Last Modified:
Monday, 10 August, 2026
GTC Network.

‘जीटीसी नेटवर्क’ (GTC Network) ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) की ओर से उठाई गई आपत्तियों के बीच गोल्डन टेंपल से गुरबाणी का लाइव प्रसारण दोबारा शुरू कर दिया है। प्रसारण कुछ ही मिनट के लिए बाधित रहा, जिसके बाद श्रद्धालुओं के बड़ी संख्या में फोन आने के बाद इसे फिर से शुरू कर दिया गया। अब गुरबाणी का प्रसारण रोजाना अपने निर्धारित समय के अनुसार जारी है।

GTC Network के फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. रवींद्र नारायण ने एक भावुक वीडियो संदेश में कहा कि प्रसारण कुछ मिनट के लिए रोका गया था, लेकिन श्रद्धालुओं की ओर से लगातार फोन आने लगे। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की भावनाओं और उनकी आस्था को देखते हुए नेटवर्क को प्रसारण दोबारा शुरू करना पड़ा।

डॉ. रवींद्र नारायण ने कहा कि गुरबाणी का प्रसारण अब हर दिन अपने निर्धारित समय के अनुसार जारी रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि अब तक गोल्डन टेंपल से होने वाला गुरबाणी का प्रसारण डीडी फ्री डिश (DD Free Dish) के दर्शकों के लिए उपलब्ध नहीं था। GTC Punjabi के जरिए यह प्रसारण खासकर शाम के समय इन दर्शकों के लिए उपलब्ध हुआ है। उन्होंने कहा कि डीडी फ्री डिश का इस्तेमाल बड़े स्तर पर ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोग करते हैं, जो पहले इस प्रसारण को नहीं देख पाते थे।

डॉ. नारायण ने दोहराया कि GTC Network का उद्देश्य गुरबाणी को वैश्विक संगत तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि यह प्रसारण आध्यात्मिक सेवा के तौर पर किया जा रहा है और इसमें किसी तरह का व्यावसायिक या निहित स्वार्थ नहीं है।

गौरतलब है कि यह संक्षिप्त व्यवधान SGPC की ओर से उसकी आधिकारिक गुरबाणी फीड के री-टेलीकास्ट को लेकर उठाई गई आपत्तियों के बाद आया था। हालांकि, GTC Network के मुताबिक श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या में मिली प्रतिक्रिया और प्रसारण रुकने पर उनकी भावनात्मक प्रतिक्रिया को देखते हुए इसे दोबारा शुरू करने का फैसला किया गया। प्रसारण बहाल होने के बाद दर्शक GTC Punjabi पर अपने निर्धारित समय के अनुसार रोजाना गुरबाणी का प्रसारण देख सकते हैं।

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गीतिका शरण ने एथेना इन्फोनॉमिक्स में संभाली नई जिम्मेदारी

गीतिका शरण (Gitika Sharan) ने Athena Infonomics और APLYD में Head of Marketing and Strategic Communications के रूप में नई जिम्मेदारी संभाली है।

Last Modified:
Monday, 10 August, 2026
geetika

गीतिका शरण (Gitika Sharan) ने एथेना इन्फोनॉमिक्स (Athena Infonomics) और एप्लाइड (APLYD) में हेड ऑफ मार्केटिंग एंड स्ट्रैटेजिक कम्युनिकेशंस (Head of Marketing and Strategic Communications) के रूप में नई जिम्मेदारी संभाली है। उन्होंने लिंक्डइन (LinkedIn) पोस्ट के जरिए अपनी नई भूमिका की जानकारी साझा की।

नई भूमिका में गीतिका शरण दोनों संस्थानों के लिए मार्केटिंग (Marketing) और स्ट्रैटेजिक कम्युनिकेशंस (Strategic Communications) का नेतृत्व करेंगी। वह कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस (Corporate Communications), पब्लिक रिलेशंस (PR), मार्केटिंग और ब्रांड बिल्डिंग के अपने अनुभव का इस्तेमाल करेंगी।

इससे पहले गीतिका शरण वाधवानी एआई ग्लोबल (Wadhwani AI Global) में हेड ऑफ मार्केटिंग एंड कम्युनिकेशंस (Head of Marketing & Communications) थीं। उन्होंने वेलस्पन वर्ल्ड (Welspun World) में जनरल मैनेजर–मारटेक (General Manager – Martech) के रूप में भी काम किया है।

इसके अलावा वह इंदिरा आईवीएफ ग्रुप (Indira IVF Group) सहित कई संस्थानों में कम्युनिकेशंस और मार्केटिंग से जुड़ी जिम्मेदारियां संभाल चुकी हैं।

गीतिका शरण ने अपनी पोस्ट में बताया कि कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस और ब्रांड मार्केटिंग में कई वर्षों तक काम करने के बाद करीब एक साल पहले उन्होंने इम्पैक्ट सेक्टर (Impact Sector) की ओर कदम बढ़ाया था। अब Athena Infonomics और APLYD में नई भूमिका के साथ वह इसी क्षेत्र में अपने अनुभव को आगे बढ़ाएंगी।

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SGPC के लीगल नोटिस के बाद GTC Network ने रोका गुरबाणी का लाइव प्रसारण

गुरबाणी के कथित अनधिकृत री-स्ट्रीमिंग को लेकर SGPC ने जारी किया था लीगल नोटिस, GTC Network के डॉ. रवींद्र नारायण ने वैश्विक सिख संगत के लिए प्रसारण फिर शुरू करने की अपील की

Last Modified:
Sunday, 09 August, 2026
GTC Network

‘जीटीसी नेटवर्क’ (GTC Network) ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) की आपत्तियों के बाद गोल्डन टेंपल से गुरबाणी के लाइव प्रसारण को फिलहाल रोक दिया है। SGPC ने आरोप लगाया था कि GTC Network उसकी आधिकारिक फीड को कथित तौर पर बिना अनुमति री-स्ट्रीम कर रहा था।

SGPC के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने कहा है कि गुरबाणी के प्रसारण अधिकार विशेष रूप से कमेटी के पास सुरक्षित हैं। उनके मुताबिक, SGPC की औपचारिक अनुमति के बिना किसी भी चैनल या डिजिटल प्लेटफॉर्म को इस सामग्री को री-स्ट्रीम या अपलोड करने की अनुमति नहीं है।

इसके बाद SGPC की ओर से GTC Network को लीगल नोटिस जारी किया गया, जिसके बाद नेटवर्क ने फिलहाल गुरबाणी के अपने प्रसारण को रोक दिया।

इस बारे में GTC Network के फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. रवींद्र नारायण ने SGPC से अपील की है कि वह उदार रुख अपनाए और वैश्विक सिख संगत के लिए नेटवर्क को दोबारा गुरबाणी का प्रसारण शुरू करने की अनुमति दे।

डॉ. नारायण ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य केवल गुरबाणी का प्रचार करना और श्रद्धालुओं की सेवा करना है। इसमें किसी तरह का व्यावसायिक या निहित स्वार्थ नहीं है।

उन्होंने कहा कि शाम के प्रसारण के रुकने से दुनियाभर के श्रद्धालुओं में चिंता और निराशा पैदा हुई है। उनके मुताबिक, 1,000 से अधिक अन्य प्लेटफॉर्म भी SGPC की आधिकारिक फीड साझा कर रहे हैं। ऐसे में यह सवाल उठता है कि कानूनी कार्रवाई विशेष रूप से GTC Network के खिलाफ ही क्यों की गई।

डॉ. नारायण ने कहा कि नेटवर्क ने SGPC की आपत्तियों का तुरंत सम्मान करते हुए गुरबाणी का री-स्ट्रीम रोक दिया। उन्होंने कमेटी से प्रसारण दोबारा शुरू करने की अनुमति देने की अपील की है। साथ ही उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रसारण पूरी धार्मिक मर्यादा के साथ और मर्यादा का पालन करते हुए किया जाएगा।

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