Saregama सिर्फ म्यूजिक कंपनी नहीं, अब AI से Live Events तक नए बिजनेस पर दांव: विक्रम मेहरा

सारेगामा इंडिया के MD विक्रम मेहरा ने Q1 नतीजों के बाद कॉन्फ्रेंस कॉल में कंपनी की रणनीति, AI, सब्सक्रिप्शन, आर्टिस्ट मैनेजमेंट, लाइव इवेंट्स और वीडियो बिजनेस पर बात की।

Vikas Saxena by
Published - Wednesday, 12 August, 2026
Last Modified:
Wednesday, 12 August, 2026
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देश की अग्रणी म्यूजिक कंपनियों में शुमार सारेगामा इंडिया (Saregama India) के मैनेजिंग डायरेक्टर विक्रम मेहरा ने कंपनी की पहली तिमाही के नतीजों के बाद हुई कॉन्फ्रेंस कॉल में कारोबार की दिशा, म्यूजिक इंडस्ट्री के भविष्य, AI, पेड सब्सक्रिप्शन, आर्टिस्ट मैनेजमेंट, लाइव इवेंट्स और वीडियो बिजनेस को लेकर विस्तार से बात की। उन्होंने साफ कहा कि कंपनी को किसी एक तिमाही के प्रदर्शन से नहीं, बल्कि कम से कम 12 महीने के आधार पर देखा जाना चाहिए।

मेहरा के मुताबिक, Q1 FY27 में Saregama का ऑपरेशनल रेवेन्यू 263.6 करोड़ रुपये रहा, जो सालाना आधार पर 27% ज्यादा है। एडजस्टेड EBITDA 112.4 करोड़ रुपये रहा, जिसमें 69% की बढ़ोतरी हुई। ऑपरेशनल PBT 70.5 करोड़ रुपये रहा, जो एक साल पहले के मुकाबले 38% ज्यादा है। हालांकि, उन्होंने निवेशकों को सलाह दी कि कंपनी के प्रदर्शन को एक तिमाही के बजाय रोलिंग 12-महीने के आधार पर देखें।

भारत दुनिया के सबसे बड़े लेकिन कम इस्तेमाल हुए Music Markets में

मेहरा ने कहा कि भारत दुनिया के सबसे बड़े लेकिन अभी भी काफी कम इस्तेमाल हुए म्यूजिक मार्केट्स में से एक है। उनके मुताबिक, 2025 में ग्लोबल रिकॉर्डेड म्यूजिक मार्केट 31.7 अरब डॉलर का था, लेकिन भारत की हिस्सेदारी सिर्फ करीब 1% रही, जबकि दुनिया की करीब 18% आबादी भारत में रहती है।

उनका मानना है कि Saregama के सामने अगले 20 साल में इस अवसर का फायदा उठाने की बड़ी संभावना है। कंपनी का म्यूजिक बिजनेस अब सिर्फ पुराने गानों के कैटलॉग तक सीमित नहीं है, बल्कि वह लगातार नए म्यूजिक IP पर भी काम कर रही है।

म्यूजिक बिजनेस में 20-23% ग्रोथ का भरोसा

मेहरा ने बताया कि Music vertical, जिसमें Licensing, Artiste Management और Retail शामिल हैं, ने पहली तिमाही में 230.6 करोड़ रुपये का रेवेन्यू दर्ज किया, जो सालाना आधार पर 39% की वृद्धि है।

हालांकि, उन्होंने कहा कि कंपनी तिमाही आधार पर कोई खास ग्रोथ गाइडेंस देने से बचती है। Saregama की मध्यम अवधि की गाइडेंस अभी भी यही है कि Music vertical में सालाना 20% से 23% की ग्रोथ रहेगी।

मेहरा ने यह भी बताया कि कंपनी इस वित्त वर्ष नए म्यूजिक कंटेंट पर करीब 300 से 350 करोड़ रुपये खर्च करने वाली है। इनमें कई बड़े फिल्म और म्यूजिक प्रोजेक्ट शामिल हैं।

अब Saregama सिर्फ पुरानी Music Catalogue कंपनी नहीं

मेहरा के मुताबिक, Saregama को केवल पुराने गानों के कैटलॉग वाली कंपनी समझना सही नहीं होगा। उन्होंने बताया कि FY26 में कंपनी के म्यूजिक रेवेन्यू का करीब 60% हिस्सा 2000 के बाद रिलीज हुए गानों से आया। इनमें करीब 45% रेवेन्यू 2020 के बाद रिलीज हुए म्यूजिक से आया।

यानी कंपनी का कारोबार तेजी से नए म्यूजिक IP की तरफ भी बढ़ रहा है। Saregama के पास करीब 1.80 लाख गानों का कैटलॉग है और हर साल इसमें हजारों नए गाने जुड़ रहे हैं।

Paid Music Subscription में बड़ा मौका

मेहरा ने भारत में पेड म्यूजिक सब्सक्रिप्शन को कंपनी के लिए सबसे बड़े भविष्य के अवसरों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि भारत में पेड स्ट्रीमिंग की पहुंच अभी करीब 3% है, जबकि स्वीडन में यह 67%, अमेरिका में 57% और ब्राजील व चीन जैसे बाजारों में करीब 18% है।

उनका मानना है कि अगर म्यूजिक सब्सक्रिप्शन की कीमत करीब 100 रुपये महीना रखी जाए और मुफ्त म्यूजिक की सप्लाई कम होती है, तो भारत में पेड सब्सक्राइबर्स की संख्या तेजी से बढ़ सकती है।

मेहरा ने सवाल-जवाब के दौरान अपना निजी अनुमान बताते हुए कहा कि अगर मुफ्त म्यूजिक की सप्लाई बंद होती है तो भारत में 100 रुपये प्रति महीने की कीमत पर 100 मिलियन यानी 10 करोड़ पेड सब्सक्राइबर्स तक पहुंचना संभव है। उनका अनुमान है कि ऐसा 12 से 18 महीने में भी हो सकता है। उन्होंने कहा कि EY और IMI की रिसर्च में भी बड़ी संख्या में लोगों ने कहा है कि मुफ्त म्यूजिक उपलब्ध नहीं होने पर वे पेड सर्विस के लिए भुगतान करने को तैयार हैं।

AI से पुराने गानों को मिल सकती है नई जिंदगी

Saregama AI को लेकर भी काफी प्रयोग कर रही है। मेहरा ने बताया कि कंपनी ने AI के लिए दो अलग टीमें बनाई हैं। एक टीम AI की मदद से Saregama के गानों से जुड़े नए ऑडियो कंटेंट, पॉडकास्ट और पुराने गानों के लिए नए म्यूजिक वीडियो बनाने पर काम कर रही है। दूसरी टीम कंपनी के अंदर अलग-अलग प्रक्रियाओं में AI का इस्तेमाल करके लागत और काम की रफ्तार बेहतर करने पर काम कर रही है।

उन्होंने बताया कि पुराने गानों के मामले में Saregama के पास गानों के अधिकार तो हैं, लेकिन 1960 और 1970 के दशक की फिल्मों के मूल म्यूजिक वीडियो के अधिकार अक्सर कंपनी के पास नहीं हैं। ऐसे में नए वीडियो बनाना महंगा पड़ता था। अब AI की मदद से कम लागत में पुराने गानों के लिए नए और वास्तविक जैसे दिखने वाले वीडियो तैयार किए जा सकते हैं।

मेहरा के मुताबिक, अगर यह प्रयोग सफल रहा तो पुराने ऑडियो को नए वीडियो के साथ पेश कर Gen X को टारगेट किया जा सकता है। वहीं, गानों के इंस्ट्रूमेंटेशन में बदलाव कर उन्हें थोड़ा आधुनिक रूप देकर नए वीडियो के साथ Gen Z के लिए भी पेश किया जा सकता है।

AI पर अभी बड़ा निवेश नहीं, पहले छोटे प्रयोग

मेहरा ने कहा कि AI से जुड़े प्रयोग अभी शुरुआती दौर में हैं। कंपनी पहले छोटे स्तर पर प्रयोग करेगी, देखेगी कि कौन सा कंटेंट और कौन सी भाषा बेहतर काम करती है और फिर सफल मॉडल को बड़े स्तर पर लागू किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि AI के लिए फिलहाल अलग से बड़ा बजट रखने की जरूरत नहीं है। म्यूजिक से जुड़े ये खर्च 300-350 करोड़ रुपये के कुल नए म्यूजिक कंटेंट निवेश के भीतर ही रहेंगे। उन्होंने यहां तक कहा कि AI की मदद से एक म्यूजिक वीडियो बनाने की लागत करीब 70 हजार रुपये तक हो सकती है।

Podcast में भी पुराने गानों का इस्तेमाल

Saregama AI के जरिए पॉडकास्टिंग में भी नया प्रयोग कर रही है। मेहरा ने बताया कि कंपनी ऐसे पॉडकास्ट बनाने की कोशिश कर रही है जिनमें Saregama के लोकप्रिय गानों को कहानी के साथ जोड़ा जाए।

मसलन, अगर किसी व्यक्ति की पुरानी यादों या प्यार, जुदाई और दोस्ती की कहानी है, तो उस कहानी के साथ उसी दौर या भावना से जुड़े Saregama के लोकप्रिय गाने जोड़े जा सकते हैं। कंपनी आगे चलकर ऐसे कंटेंट को थर्ड-पार्टी पॉडकास्ट कंपनियों को लाइसेंस भी कर सकती है।

Live Events को बड़ी ग्रोथ की उम्मीद

मेहरा ने Live Events को भी कंपनी के लिए बड़ा अवसर बताया। उन्होंने कहा कि भारत में COVID के बाद लाइव इवेंट्स का बाजार तेजी से बढ़ा है। Gen Z और Millennials अब सामान खरीदने के बजाय अनुभवों पर ज्यादा खर्च करना चाहते हैं, जिससे लाइव इवेंट्स को फायदा मिल रहा है।

उनके मुताबिक, आने वाले समय में Live Events Saregama का सबसे तेजी से बढ़ने वाला वर्टिकल हो सकता है। हालांकि, असली चुनौती रेवेन्यू बढ़ाने के बजाय इस बिजनेस के मार्जिन को बेहतर करना होगी।

कंपनी इसके लिए अपने खुद के IP पर भी जोर दे रही है। UN40, Manoj Muntashir के साथ Krishna शो और Carvaan Live जैसे अपने IP लंबे समय में बेहतर मार्जिन देने वाले बिजनेस बन सकते हैं।

Artiste Management में 309 कलाकार, 44 करोड़ नहीं 440 मिलियन का सोशल मीडिया बेस

मेहरा ने बताया कि तिमाही के अंत तक Saregama 309 कलाकारों का प्रतिनिधित्व कर रही थी। इन कलाकारों के Instagram और YouTube पर कुल मिलाकर 440 मिलियन से ज्यादा फॉलोअर्स और सब्सक्राइबर्स हैं।

कंपनी का मॉडल सिर्फ कलाकारों की बुकिंग कराने तक सीमित नहीं है। Saregama उन्हें अपने म्यूजिक वीडियो, गानों, FilterCopy कंटेंट और Live Events के जरिए भी आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है।

मेहरा ने कहा कि यही Saregama के Artiste Management मॉडल की सबसे बड़ी खासियत है। कंपनी कलाकार को बड़ा बनाने में मदद करती है और जैसे-जैसे कलाकार की लोकप्रियता और कमाई बढ़ती है, कंपनी को भी फायदा होता है।

उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि एक ही कलाकार के साथ Saregama म्यूजिक, लाइव कॉमेडी, फिल्म और Artiste Management जैसे अलग-अलग स्तरों पर काम कर सकती है। इसी तरह युवा कलाकारों को कंपनी अपने गानों, म्यूजिक वीडियो, FilterCopy सीरीज और लाइव इवेंट्स में मौके देती है।

Pocket Aces को लेकर भी भरोसा

मेहरा ने Pocket Aces के बारे में कहा कि कंपनी का अधिग्रहण मुख्य रूप से Gen Z तक पहुंच मजबूत करने के लिए किया गया था। उनका मानना है कि किसी म्यूजिक लेबल की सबसे बड़ी ताकत सिर्फ पैसे नहीं, बल्कि यह क्षमता भी है कि वह किसी गाने या एल्बम को युवा दर्शकों के बीच कितना बड़ा बना सकता है।

उन्होंने बताया कि Pocket Aces पिछले वित्त वर्ष में ब्रेक-ईवन पर पहुंच गया और इस वित्त वर्ष कंपनी को इससे मुनाफा आने की उम्मीद है।

Video Business को धीरे-धीरे बंद करेगी कंपनी

Saregama अपने फिल्म बिजनेस को धीरे-धीरे खत्म करने की दिशा में बढ़ रही है। मेहरा ने कहा कि कंपनी फिल्मों में मुख्य रूप से इसलिए गई थी ताकि उन फिल्मों का म्यूजिक हासिल किया जा सके। अब यह जरूरत Bhansali Productions में निवेश के जरिए पूरी होगी।

उनके मुताबिक, बैलेंस शीट में मौजूद फिल्मों को अगले करीब तीन से चार तिमाहियों में रिलीज कर दिए जाने की उम्मीद है। इसके बाद Video Business का आकार मौजूदा स्तर के आसपास ही रहेगा और कंपनी नए फिल्म प्रोजेक्ट्स में पहले की तरह निवेश नहीं करेगी।

Short-form Content और Brands भी अहम कमाई का जरिया

मेहरा ने कहा कि Saregama अब किसी एक कमाई के जरिये पर निर्भर नहीं रहना चाहती। कंपनी Music, Artiste Management, Live Events और Short-form Content को एक साथ जोड़कर एक ऐसा मॉडल बना रही है, जिसके जरिए ब्रांड्स को Gen Z तक पहुंचने के कई रास्ते मिलते हैं।

उनके मुताबिक, किसी ब्रांड को म्यूजिक लाइसेंस, नया गाना, Instagram के लिए short-form content या Gen Z से जुड़े Live Events की sponsorship जैसी कई सेवाएं एक ही कंपनी से मिल सकती हैं।

सबसे बड़ा अवसर Streaming और Advertising में

मेहरा के मुताबिक, आने वाले समय में Saregama के लिए सबसे बड़ा रेवेन्यू अवसर Paid Music Streaming में है। इसके अलावा Short-form Content में भी कमाई बढ़ाने की बड़ी संभावना है। अभी कई short-form apps म्यूजिक कंपनियों को fixed fee मॉडल पर भुगतान करते हैं, लेकिन आगे चलकर advertising revenue sharing का मॉडल बढ़ सकता है।

इसके अलावा YouTube जैसे प्लेटफॉर्म पर विज्ञापन खर्च बढ़ने का फायदा भी म्यूजिक कंपनियों को मिल सकता है। उन्होंने Public Performance Rights को भी भारत में एक बड़ा लेकिन अभी पूरी तरह इस्तेमाल नहीं हुआ अवसर बताया।

अगले 20-30 साल की ग्रोथ पर दांव

कॉल के आखिर में मेहरा ने कहा कि Saregama की ग्रोथ कहानी अगले कुछ सालों तक ही सीमित नहीं है। उनके मुताबिक, भारत में डिजिटल खपत बढ़ने, नए इंटरनेट यूजर्स जुड़ने और मौजूदा यूजर्स के ज्यादा कंटेंट इस्तेमाल करने से कंपनी को लंबे समय तक फायदा मिल सकता है।

उन्होंने कहा कि भारत अभी ग्लोबल स्ट्रीमिंग मार्केट के शुरुआती दौर में है। इसलिए कंपनी के सामने सब्सक्राइबर्स बढ़ाने, प्रति ग्राहक कमाई (ARPU) बढ़ाने और नए फॉर्मेट्स में विस्तार करने- तीनों अवसर खुले हुए हैं। मेहरा का मानना है कि कंपनी अपने मौजूदा कंटेंट कैटलॉग, नए म्यूजिक IP, मजबूत बैलेंस शीट और अलग-अलग बिजनेस को जोड़ने वाले मॉडल के दम पर अगले 20 से 30 साल तक कमाई बढ़ाने की क्षमता रखती है।

 

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TIPS Music ने AI व डिजिटल म्यूजिक को लेकर कही बड़ी बात, कॉपीराइट व रॉयल्टी को बताया चुनौती

म्यूजिक कंपनी TIPS Music Limited ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अपनी Business Responsibility and Sustainability Report (BRSR) जारी की है।

Samachar4media Bureau by
Published - Sunday, 09 August, 2026
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Sunday, 09 August, 2026
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म्यूजिक कंपनी TIPS Music Limited ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अपनी Business Responsibility and Sustainability Report (BRSR) जारी की है। कंपनी ने इस रिपोर्ट में अपने कारोबार के साथ-साथ पर्यावरण, कर्मचारियों, कॉरपोरेट गवर्नेंस और सामाजिक जिम्मेदारियों से जुड़ी कई जानकारियां साझा की हैं। कंपनी ने अपनी रिपोर्ट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटलाइजेशन को म्यूजिक इंडस्ट्री के लिए अहम अवसर के साथ-साथ चुनौती भी बताया है।

TIPS Music के मुताबिक, डिजिटलाइजेशन ने म्यूजिक इंडस्ट्री का पूरा तरीका बदल दिया है। फिजिकल फॉर्मेट में म्यूजिक की बिक्री घटने के साथ स्ट्रीमिंग, डाउनलोड, इंटरनेट रेडियो और सब्सक्रिप्शन आधारित म्यूजिक सर्विसेज तेजी से अहम चैनल बन गए हैं। कंपनी का कहना है कि डिजिटल टेक्नोलॉजी ने म्यूजिक के डिस्ट्रीब्यूशन के साथ-साथ कमाई के तरीकों को भी बदल दिया है।

AI को लेकर कंपनी ने जताई चिंता

रिपोर्ट में TIPS Music ने AI-generated music को एक तरफ रचनात्मकता के नए मौके देने वाला बताया है, तो दूसरी तरफ इसे एक जोखिम भी माना है। कंपनी के मुताबिक AI म्यूजिक प्रोडक्शन को आसान और ज्यादा लोगों तक पहुंचाने में मदद कर सकता है, लेकिन इससे कॉपीराइट, रॉयल्टी और इंसानों द्वारा बनाए गए ओरिजिनल म्यूजिक की वैल्यू से जुड़े सवाल भी खड़े होते हैं। कंपनी ने कहा है कि AI से जुड़ी इन चुनौतियों से निपटने के लिए कॉपीराइट प्रोटेक्शन को मजबूत करने और कानूनी व्यवस्था को बदलती परिस्थितियों के मुताबिक तैयार करने की जरूरत है।

डेटा प्राइवेसी और कॉपीराइट पर भी नजर

TIPS Music ने डेटा प्राइवेसी और साइबर सिक्योरिटी को अपने कारोबार से जुड़े जोखिमों में शामिल किया है। कंपनी के अनुसार, कॉपीराइट वाली सामग्री के अनधिकृत इस्तेमाल पर नजर रखने के लिए एक डेडिकेटेड टीम काम करती है। कंपनी ने प्राइवेसी से जुड़े मामलों की निगरानी और जोखिम कम करने के लिए इंटरनल कंट्रोल और प्रक्रियाओं को भी मजबूत किया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी का कारोबार ऑडियो-विजुअल म्यूजिक कंटेंट बनाने और हासिल करने तथा भारत और विदेशों में अलग-अलग प्लेटफॉर्म के जरिए अपनी म्यूजिक लाइब्रेरी को लाइसेंस देकर कमाई करने पर आधारित है। FY 2025-26 में कंपनी के कुल टर्नओवर में एक्सपोर्ट का योगदान 68.57% रहा।

कंपनी में 98 कर्मचारी

FY 2025-26 के अंत में TIPS Music में कुल 98 कर्मचारी थे। इनमें 69 स्थायी और 29 अन्य कर्मचारी शामिल थे। स्थायी कर्मचारियों में 48 पुरुष और 21 महिलाएं थीं। बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में 6 में से 1 महिला और Key Management Personnel में भी 6 में से 1 महिला थी।

कंपनी ने यह भी बताया कि कर्मचारियों की सेहत और सुरक्षा को लेकर कई सुविधाएं दी जाती हैं। इसके अलावा, कंपनी के मुताबिक कर्मचारियों के लिए हेल्थ और सेफ्टी ट्रेनिंग तथा स्किल अपग्रेडेशन प्रोग्राम भी चलाए गए।

पर्यावरण को लेकर भी उठाए कदम

कंपनी ने बताया कि उसके कारोबार की प्रकृति के कारण मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ा बड़ा पर्यावरणीय प्रभाव नहीं है। इसके बावजूद प्लास्टिक के इस्तेमाल को कम करने के लिए प्लास्टिक गार्बेज बैग की जगह बायोडिग्रेडेबल बैग का इस्तेमाल किया जा रहा है। कंप्यूटर और दूसरे ई-वेस्ट को प्रमाणित एजेंसियों को सौंपा जाता है। कंपनी ने ऑफिस में प्लास्टिक बोतलों की जगह ग्लास और स्टील की बोतलों के इस्तेमाल तथा डिजिटल प्रक्रियाओं के जरिए कागज की खपत कम करने की बात भी कही है।
कंपनी ने यह भी बताया कि FY 2025-26 में कंज्यूमर से जुड़े डेटा प्राइवेसी, विज्ञापन और साइबर सिक्योरिटी समेत बताए गए मामलों में कोई शिकायत दर्ज नहीं हुई। रिपोर्ट में डेटा ब्रीच के मामले भी शून्य बताए गए हैं।

कुल मिलाकर, TIPS Music की BRSR रिपोर्ट से साफ है कि कंपनी के लिए डिजिटल म्यूजिक और AI आने वाले समय में बड़े अवसर हैं, लेकिन इनके साथ कॉपीराइट, रॉयल्टी, डेटा प्राइवेसी और साइबर सिक्योरिटी जैसी चुनौतियों पर भी लगातार ध्यान देना जरूरी होगा।

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Warner Music Group के CFO और COO अरमिन जर्जा ने दिया इस्तीफा

Warner Music Group (WMG) के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) और चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (COO) अरमिन जर्जा (Armin Zerza) ने निजी कारणों से अपने पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया है।

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Published - Saturday, 01 August, 2026
Last Modified:
Saturday, 01 August, 2026
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Warner Music Group (WMG) के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) और चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (COO) अरमिन जर्जा (Armin Zerza) ने निजी कारणों से अपने पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि, कंपनी ने बताया कि वह वित्तीय वर्ष (Fiscal Year) के अंत तक ट्रांजिशन प्रक्रिया को सुचारु रूप से पूरा कराने के लिए कंपनी के साथ जुड़े रहेंगे।

कंपनी ने अपने नए CFO की नियुक्ति के लिए औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। तब तक ग्लोबल कंट्रोलर और चीफ अकाउंटिंग ऑफिसर (Chief Accounting Officer) लू डिकलर (Lou Dickler) को अंतरिम (Acting) CFO की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

WMG के मुताबिक, लू डिकलर इससे पहले भी अंतरिम CFO की भूमिका निभा चुके हैं। उन्हें वित्तीय मामलों का लंबा अनुभव है और कंपनी के संचालन की गहरी समझ भी है। इसी वजह से उन्हें यह अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है।

इस मौके पर Warner Music Group के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) रॉबर्ट किंकल (Robert Kyncl) ने कहा, "अरमिन जर्जा कंपनी के विकास और बदलाव के महत्वपूर्ण दौर में हमारी नेतृत्व टीम के बेहद अहम सदस्य रहे हैं। उन्होंने कंपनी को मजबूत व्यावसायिक और वित्तीय नेतृत्व दिया है। हम उनके योगदान के लिए उनका दिल से धन्यवाद करते हैं और उनके भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हैं।"

अरमिन जर्जा के इस्तीफे के बाद अब कंपनी की नजर नए CFO की नियुक्ति पर होगी। तब तक लू डिकलर अंतरिम CFO के तौर पर कंपनी की वित्तीय जिम्मेदारियां संभालेंगे।

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भारत में 2028 तक दोगुने हो सकते हैं पेड म्यूजिक सब्सक्राइबर, EY-IMI रिपोर्ट में बड़ा दावा

भारत में म्यूजिक सुनने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन अब म्यूजिक इंडस्ट्री की नजर ऐसे लोगों पर है जो इसके लिए पैसे भी खर्च करें।

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Published - Saturday, 25 July, 2026
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Saturday, 25 July, 2026
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भारत में म्यूजिक सुनने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन अब म्यूजिक इंडस्ट्री की नजर ऐसे लोगों पर है जो इसके लिए पैसे भी खर्च करें। EY और इंडियन म्यूजिक इंडस्ट्री (IMI) की संयुक्त रिपोर्ट के मुताबिक, अगर मौजूदा कमाई (मॉनेटाइजेशन) की कोशिशें इसी तरह जारी रहीं, तो देश में पेड म्यूजिक सब्सक्राइबरों की संख्या 2028 तक बढ़कर 2.8 से 3 करोड़ (28-30 मिलियन) तक पहुंच सकती है।

रिपोर्ट के अनुसार, साल 2025 में भारत में करीब 1.4 करोड़ (14 मिलियन) पेड म्यूजिक सब्सक्राइबर थे। यह तब है, जब म्यूजिक देश में सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले डिजिटल मनोरंजन माध्यमों में शामिल है।

15 हजार से ज्यादा स्मार्टफोन यूजर्स पर किए गए सर्वे में सामने आया कि 96 फीसदी लोग अपने स्मार्टफोन पर म्यूजिक सुनते हैं। इनमें से 80 फीसदी लोग हर दिन एक घंटे से ज्यादा समय म्यूजिक स्ट्रीमिंग या सुनने में बिताते हैं।

हालांकि, सबसे बड़ी चुनौती इन श्रोताओं को पेड सब्सक्राइबर में बदलने की है। रिपोर्ट के मुताबिक, केवल 38 फीसदी लोगों ने कभी म्यूजिक स्ट्रीमिंग सर्विस के लिए भुगतान किया है, जबकि 86 फीसदी लोग किसी न किसी वीडियो OTT प्लेटफॉर्म का सब्सक्रिप्शन ले चुके हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इसकी बड़ी वजह मुफ्त में उपलब्ध म्यूजिक और फ्री व प्रीमियम म्यूजिक सर्विस के बीच बहुत कम अंतर होना है। यही कारण है कि लोग भुगतान करने की बजाय मुफ्त विकल्पों का इस्तेमाल करना पसंद करते हैं।

हालांकि, रिपोर्ट में इस क्षेत्र में बड़े अवसर भी दिखाई देते हैं। 61 फीसदी लोगों ने कहा कि अगर मुफ्त विकल्प उपलब्ध न हों और सब्सक्रिप्शन की कीमत किफायती हो, तो वे म्यूजिक स्ट्रीमिंग के लिए भुगतान करने को तैयार हैं। वहीं, 39 फीसदी लोगों का कहना है कि वे ऐसी स्थिति में भी मुफ्त या पायरेटेड स्रोतों का इस्तेमाल करना पसंद करेंगे।

रिपोर्ट के मुताबिक, 60 फीसदी लोग अभी भी म्यूजिक सुनने के लिए समर्पित डिजिटल स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करना पसंद करते हैं। हालांकि, नए गाने खोजने के लिए लोग तेजी से शॉर्ट वीडियो और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की ओर बढ़ रहे हैं, जो बदलती उपभोक्ता आदतों का संकेत है।

IMI के अध्यक्ष ब्लेज़ फर्नांडिस ने कहा कि भारत के म्यूजिक इकोसिस्टम को आगे बढ़ाने के लिए उपभोक्ताओं का मजबूत समर्थन जरूरी है। उनके मुताबिक, पेड सब्सक्रिप्शन सिर्फ एक सेवा का शुल्क नहीं, बल्कि कलाकारों और भारतीय संगीत विरासत में किया गया निवेश है।

IMI के चेयरमैन विक्रम मेहरा ने कहा कि यह रिपोर्ट दिखाती है कि भारतीय उपभोक्ता अच्छी गुणवत्ता वाले कंटेंट के लिए भुगतान करने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि IMI डिजिटल स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स के साथ मिलकर पेड ऑडियो इकोसिस्टम को मजबूत करेगा, ताकि भारत दुनिया के शीर्ष पांच म्यूजिक बाजारों में अपनी जगह बना सके।

EY इंडिया में मीडिया और एंटरटेनमेंट लीडर आशीष फेरवानी ने कहा कि म्यूजिक भारत में सबसे लोकप्रिय डिजिटल मनोरंजन माध्यमों में से एक है। उनका मानना है कि बेहतर जागरूकता, प्रीमियम सेवाओं में स्पष्ट अंतर और नए इनोवेटिव फीचर्स के जरिए पेड सब्सक्रिप्शन की रफ्तार और तेज की जा सकती है।

कुल मिलाकर, रिपोर्ट बताती है कि भारत में म्यूजिक स्ट्रीमिंग इंडस्ट्री के लिए आने वाले वर्षों में बड़ा अवसर मौजूद है। अब चुनौती नए श्रोता जोड़ने से ज्यादा मौजूदा श्रोताओं को यह भरोसा दिलाने की है कि बेहतर म्यूजिक अनुभव के लिए भुगतान करना फायदे का सौदा है।

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'म्यूजिक ब्रॉडकास्ट' ने अनुरिता पटेल व मिली शाह को सीनियर मैनेजमेंट में किया शामिल

'रेडियो सिटी' की पैरेंट कंपनी म्यूजिक ब्रॉडकास्ट लिमिटेड ने अपनी वरिष्ठ प्रबंधन टीम को मजबूत करते हुए अनुरिता पटेल और मिली शाह को सीनियर मैनेजमेंट पर्सनल के रूप में नामित किया है।

Vikas Saxena by
Published - Thursday, 23 July, 2026
Last Modified:
Thursday, 23 July, 2026
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'रेडियो सिटी' की पैरेंट कंपनी म्यूजिक ब्रॉडकास्ट लिमिटेड (Music Broadcast Limited) ने अपनी वरिष्ठ प्रबंधन टीम (Senior Management) को मजबूत करते हुए अनुरिता पटेल और मिली शाह को सीनियर मैनेजमेंट पर्सनल (Senior Management Personnel) के रूप में नामित किया है। यह फैसला कंपनी के निदेशक मंडल की 22 जुलाई 2026 को हुई बैठक में लिया गया।

कंपनी ने शेयर बाजार को दी गई सूचना में बताया कि यह निर्णय नॉमिनेशन एंड रेम्यूनरेशन कमेटी की सिफारिश के आधार पर लिया गया है। दोनों की नई जिम्मेदारियां 22 जुलाई 2026 से प्रभावी हो गई हैं।

कौन हैं अनुरिता पटेल और मिली शाह?

कंपनी के अनुसार, अनुरिता पटेल फिलहाल नेशनल प्रोग्रामिंग की प्रमुख (Head – National Programming) हैं। वहीं, मिली शाह कंपनी में कमर्शियल और एडमिनिस्ट्रेशन विभाग का नेतृत्व कर रही हैं।

अब दोनों को सेबी (SEBI) के लिस्टिंग नियमों के तहत आधिकारिक तौर पर सीनियर मैनेजमेंट पर्सनल का दर्जा दिया गया है।

नौकरी की शर्तों में कोई बदलाव नहीं

कंपनी ने स्पष्ट किया है कि यह कोई नई नियुक्ति (Appointment) नहीं है। अनुरिता पटेल और मिली शाह पहले से ही कंपनी में पूर्णकालिक (Full-time) कर्मचारी के रूप में कार्यरत हैं। उनके पदनाम और पहचान में बदलाव किया गया है, लेकिन नौकरी की शर्तों, वेतन या अन्य सेवा शर्तों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

बोर्ड बैठक में लिया गया फैसला

Music Broadcast Limited के बोर्ड की बैठक 22 जुलाई को दोपहर 2:30 बजे शुरू हुई और 4:30 बजे समाप्त हुई। बैठक में दोनों अधिकारियों को वरिष्ठ प्रबंधन का दर्जा देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।

कंपनी ने यह जानकारी SEBI (Listing Obligations and Disclosure Requirements) Regulations, 2015 के रेगुलेशन 30 के तहत बीएसई (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) को भेजी है।

गौरतलब है कि Music Broadcast Limited देश के प्रमुख एफएम रेडियो नेटवर्क Radio City का संचालन करती है और रेडियो प्रसारण के क्षेत्र में उसकी मजबूत मौजूदगी है।

 

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Tips Music ने शेयर बायबैक टाला, पहली तिमाही में आय में दर्ज की मजबूत बढ़त

म्यूजिक कंपनी Tips Music Limited ने अपने प्रस्तावित शेयर बायबैक (Share Buyback) को फिलहाल टालने का फैसला किया है।

Samachar4media Bureau by
Published - Wednesday, 22 July, 2026
Last Modified:
Wednesday, 22 July, 2026
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म्यूजिक कंपनी Tips Music Limited ने अपने प्रस्तावित शेयर बायबैक (Share Buyback) को फिलहाल टालने का फैसला किया है। हालांकि, इसके साथ ही कंपनी ने वित्त वर्ष की पहली तिमाही (Q1) में आय (Revenue) में साल-दर-साल मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की है।

पहली तिमाही में आय 1.07 अरब रुपये पहुंची

कंपनी के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में उसका रेवेन्यू 1.07 अरब रुपये (करीब 107 करोड़ रुपये) रहा। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह 881 मिलियन रुपये (करीब 88.1 करोड़ रुपये) था।

इस तरह कंपनी की आय में सालाना आधार पर उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली, जो उसके म्यूजिक कारोबार के लगातार मजबूत प्रदर्शन को दर्शाती है।

 शेयर बायबैक फिलहाल टला

कंपनी ने एक अलग घोषणा में बताया कि उसने अपने प्रस्तावित शेयर बायबैक को फिलहाल स्थगित (Deferred) कर दिया है। हालांकि, कंपनी ने यह नहीं बताया कि बायबैक अब कब किया जाएगा या इसे टालने के पीछे क्या वजह है।

फिलहाल बायबैक की नई समय-सीमा या अन्य शर्तों को लेकर भी कोई जानकारी साझा नहीं की गई है।

हालांकि, बायबैक टालने के फैसले के बावजूद कंपनी की पहली तिमाही के नतीजे बताते हैं कि उसके मुख्य म्यूजिक कारोबार से होने वाली आय में लगातार मजबूती बनी हुई है।

 

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भारत में महंगा हुआ Apple Music, सभी सब्सक्रिप्शन प्लान्स की कीमतें बढ़ीं

यदि आप Apple Music का इस्तेमाल करते हैं, तो अब इसके लिए आपको पहले से ज्यादा पैसे चुकाने होंगे। Apple ने भारत में अपने Student, Individual और Family प्लान्स की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है।

Samachar4media Bureau by
Published - Tuesday, 21 July, 2026
Last Modified:
Tuesday, 21 July, 2026
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यदि आप Apple Music का इस्तेमाल करते हैं, तो अब इसके लिए आपको पहले से ज्यादा पैसे चुकाने होंगे। Apple ने भारत में अपने Student, Individual और Family प्लान्स की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है। कंपनी का कहना है कि म्यूजिक के लाइसेंस (Music Licensing) की बढ़ती लागत के चलते यह फैसला लिया गया है।

नई कीमतों के अनुसार, Student प्लान अब 59 रुपये की जगह 69 रुपये प्रति माह का हो गया है। वहीं Individual प्लान की कीमत 119 रुपये से बढ़ाकर 139 रुपये प्रति माह कर दी गई है।

इसके अलावा, Family प्लान, जिसमें एक साथ छह सदस्य Apple Music का इस्तेमाल कर सकते हैं, अब 179 रुपये की जगह 229 रुपये प्रति माह में मिलेगा।

Apple ने अपने Apple One सब्सक्रिप्शन बंडल की कीमतों में भी बढ़ोतरी की है। Apple One Individual प्लान अब 175 रुपये की जगह 195 रुपये प्रति माह का हो गया है। कंपनी ने अन्य Apple One प्लान्स की कीमतें भी बढ़ाई हैं।

Apple के मुताबिक, यह बदलाव दुनिया भर में बढ़ रही म्यूजिक लाइसेंसिंग लागत के कारण किया गया है। कंपनी ने इसे वैश्विक स्तर पर लागू किए जा रहे प्राइस अपडेट का हिस्सा बताया है। भारत के अलावा अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोप जैसे कई बाजारों में भी Apple Music की कीमतें बढ़ाई गई हैं।

हालांकि, कंपनी ने कीमत बढ़ाने के साथ किसी नए फीचर या अतिरिक्त सुविधा का ऐलान नहीं किया है।

यह 2022 के बाद Apple Music की पहली वैश्विक प्राइस बढ़ोतरी है। वहीं भारत में पिछले दो वर्षों के भीतर यह दूसरी बार है जब Apple ने अपने म्यूजिक सब्सक्रिप्शन की कीमतें बढ़ाई हैं। इससे पहले 2024 के आखिर में कंपनी ने Individual प्लान की कीमत 99 रुपये से बढ़ाकर 119 रुपये की थी।

कीमतें बढ़ने के बावजूद Apple Music की मौजूदा सुविधाएं पहले की तरह जारी रहेंगी। इनमें बिना विज्ञापन (Ad-Free) म्यूजिक सुनने की सुविधा, ऑफलाइन डाउनलोड, Spatial Audio, Lossless Audio और 10 करोड़ (100 मिलियन) से ज्यादा गानों की लाइब्रेरी शामिल है। कुछ देशों में स्टूडेंट प्लान लेने वालों को पहले की तरह Apple TV+ का लाभ भी मिलता रहेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया भर में कंटेंट और लाइसेंसिंग की लागत लगातार बढ़ रही है। इसी वजह से कई स्ट्रीमिंग कंपनियां अपने सब्सक्रिप्शन प्लान महंगे कर रही हैं। भारत में भी डिजिटल मनोरंजन सेवाओं पर बढ़ता खर्च अब उपभोक्ताओं के लिए एक नई चुनौती बनता जा रहा है, जिसे उद्योग जगत में 'स्ट्रीमफ्लेशन' (Streamflation) कहा जा रहा है।

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MIB का बड़ा फैसला, कंटेंट निगरानी समिति के दायरे में आए कम्युनिटी रेडियो स्टेशन

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने निजी एफएम रेडियो चैनलों पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रमों और विज्ञापनों की निगरानी करने वाली इंटर-मिनिस्टीरियल कमेटी (IMC) का दायरा बढ़ा दिया है

Samachar4media Bureau by
Published - Thursday, 16 July, 2026
Last Modified:
Thursday, 16 July, 2026
CommunityRadio845

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने निजी एफएम रेडियो चैनलों पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रमों और विज्ञापनों की निगरानी करने वाली इंटर-मिनिस्टीरियल कमेटी (IMC) का दायरा बढ़ा दिया है। मंत्रालय ने 15 जुलाई 2026 को नया आदेश जारी किया है, जिसने 5 मई 2026 के पुराने आदेश की जगह ले ली है।

नई व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत यह है कि अब कम्युनिटी रेडियो स्टेशन (CRS) भी इस समिति के अधिकार क्षेत्र में आ गए हैं। इससे पहले यह समिति केवल निजी एफएम रेडियो स्टेशनों से जुड़े मामलों की ही जांच करती थी।

अब दो तरह के रेडियो स्टेशनों की होगी निगरानी

मई 2026 में गठित IMC केवल प्राइवेट एफएम रेडियो फेज-III पॉलिसी, 2011 के तहत काम कर रही थी। इसका काम निजी एफएम रेडियो स्टेशनों द्वारा कार्यक्रम और विज्ञापन संहिता (Programme & Advertisement Code) के उल्लंघन से जुड़ी शिकायतों की जांच करना था।

लेकिन 15 जुलाई के नए आदेश के बाद अब यही समिति 13 फरवरी 2024 की कम्युनिटी रेडियो पॉलिसी के तहत आने वाले कम्युनिटी रेडियो स्टेशनों की शिकायतों और नियमों के उल्लंघन की भी समीक्षा करेगी।

यानी अब एक ही समिति निजी एफएम रेडियो नेटवर्क और गैर-लाभकारी कम्युनिटी रेडियो स्टेशनों- दोनों से जुड़े मामलों पर अपनी सिफारिशें देगी।

समिति को बनाया गया और मजबूत

मंत्रालय ने समिति की संरचना में भी बदलाव किया है।

पहले समिति की अध्यक्षता अतिरिक्त सचिव/संयुक्त सचिव में से कोई एक करता था। अब अतिरिक्त सचिव, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को स्थायी रूप से अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि संयुक्त सचिव (इंडस्ट्री) के लिए अलग सदस्य का पद बनाया गया है।

इस बदलाव के साथ समिति के सदस्यों की संख्या 9 से बढ़कर 10 हो गई है।

समिति में पहले की तरह गृह मंत्रालय, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, उपभोक्ता मामलों का विभाग, एफआईसीसीआई (FICCI), प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया, बार काउंसिल ऑफ इंडिया और आकाशवाणी (AIR) के प्रतिनिधि शामिल रहेंगे। इसके अलावा मंत्रालय का एक डिप्टी सेक्रेटरी या डायरेक्टर सदस्य-सचिव (Member Convener) की भूमिका निभाएगा।

नियमों में तकनीकी गलती भी सुधारी

नए आदेश में मंत्रालय ने एक तकनीकी त्रुटि भी ठीक की है।

5 मई के आदेश में निजी एफएम रेडियो पर कार्रवाई से जुड़े प्रावधान का हवाला देते समय क्लॉज 24.2 लिखा गया था, जबकि सही प्रावधान क्लॉज 24.1 है। 15 जुलाई के आदेश में इस गलती को सुधार दिया गया है।

इसके साथ ही कम्युनिटी रेडियो स्टेशनों पर कार्रवाई के लिए अलग प्रावधान भी जोड़ा गया है।

कम्युनिटी रेडियो पॉलिसी भी की गई संलग्न

मई के आदेश में संबंधित नियमों का केवल उल्लेख किया गया था, लेकिन जुलाई के आदेश के साथ 13 फरवरी 2024 की कम्युनिटी रेडियो पॉलिसी को पूरी तरह संलग्न (Annexure-I) किया गया है।

इस पॉलिसी में कम्युनिटी रेडियो से जुड़े कई अहम नियम शामिल हैं, जैसे—

  • केवल गैर-लाभकारी संस्थाएं, शैक्षणिक संस्थान, कृषि विश्वविद्यालय, आईसीएआर संस्थान, स्वयं सहायता समूह (SHG) और पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट ही कम्युनिटी रेडियो चला सकेंगे।
  • व्यक्ति, राजनीतिक दल, लाभ कमाने वाली कंपनियां, प्रतिबंधित संगठन और धार्मिक संस्थाएं इसके लिए आवेदन नहीं कर सकेंगी।
  • कम से कम 50% कार्यक्रम स्थानीय समुदाय की भागीदारी से तैयार होने चाहिए।
  • इनमें से आधे कार्यक्रम महिलाओं के सशक्तिकरण से जुड़े विषयों पर होने चाहिए।
  • कम्युनिटी रेडियो अपने स्तर पर समाचार या करंट अफेयर्स कार्यक्रम तैयार नहीं कर सकेंगे। वे केवल आकाशवाणी (AIR) से प्राप्त समाचारों का प्रसारण या अनुवाद कर सकेंगे। हालांकि ट्रैफिक अपडेट, मौसम, स्थानीय सांस्कृतिक कार्यक्रम, परीक्षा परिणाम और जनसुरक्षा से जुड़ी सूचनाओं को सीमित रूप से प्रसारित करने की अनुमति होगी।

नियम तोड़ने पर क्या होगी कार्रवाई?

कम्युनिटी रेडियो स्टेशनों के लिए चरणबद्ध दंड व्यवस्था भी तय की गई है।

  • पहली बार नियम उल्लंघन पर एक महीने तक प्रसारण निलंबित किया जा सकता है।
  • दूसरी बार उल्लंघन पर अधिकतम तीन महीने तक निलंबन हो सकता है।
  • तीसरी बार नियम तोड़ने पर अनुमति (Permission Agreement) रद्द कर दी जाएगी और संबंधित संस्था अगले पांच वर्षों तक दोबारा आवेदन नहीं कर सकेगी।

समिति के पास क्या होंगे अधिकार?

IMC का काम अंतिम फैसला देना नहीं है। समिति शिकायतों की जांच कर अपनी सिफारिशें केंद्र सरकार को भेजेगी। अंतिम निर्णय सरकार ही लेगी।

समिति जरूरत पड़ने पर—

  • कार्यक्रम या विज्ञापन संहिता के उल्लंघन पर कार्रवाई की सिफारिश कर सकती है।
  • कम्युनिटी रेडियो से जुड़े मामलों में भी दंड की सिफारिश कर सकती है।
  • किसी विशेष कार्यक्रम या कंटेंट को हटाने, उसमें बदलाव करने या तय अवधि तक कार्यक्रम अथवा पूरे चैनल का प्रसारण रोकने की सिफारिश कर सकती है।

हालांकि किसी भी कार्रवाई से पहले संबंधित रेडियो स्टेशन को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा।

क्या है इसका मतलब?

करीब ढाई महीने के भीतर मंत्रालय ने IMC को पहले से ज्यादा व्यापक और मजबूत बना दिया है। अब यह समिति सिर्फ निजी एफएम रेडियो तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि देशभर के 500 से अधिक कम्युनिटी रेडियो स्टेशनों से जुड़े कंटेंट विवादों और शिकायतों की भी समीक्षा करेगी।

इस बदलाव के साथ निजी एफएम और कम्युनिटी रेडियो- दोनों क्षेत्रों के लिए कंटेंट निगरानी का एक साझा मंच तैयार हो गया है, जिसमें कानून, मीडिया, उद्योग, उपभोक्ता संरक्षण और सरकारी विभागों के प्रतिनिधि शामिल हैं। सरकार का मानना है कि इससे शिकायतों के निपटारे की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और प्रभावी होगी।

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Gaana से जुड़ीं शबनम मजूमदार, बनीं डायरेक्टर (पार्टनरशिप्स एंड अलायंसेज)

शबनम मजूमदार के पास टेलीकॉम, बैंकिंग एवं वित्तीय सेवाएं (BFSI) तथा मीडिया एवं एंटरटेनमेंट सेक्टर में दो दशक से अधिक का अनुभव है।

Samachar4media Bureau by
Published - Tuesday, 30 June, 2026
Last Modified:
Tuesday, 30 June, 2026
Shabnam Majumdar

म्यूजिक स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म गाना (Gaana) ने शबनम मजूमदार को डायरेक्टर– पार्टनरशिप्स एंड अलायंसेज के पद पर नियुक्त किया है। अपनी नई भूमिका में वह कंपनी के लिए रेवेन्यू पार्टनरशिप्स का नेतृत्व करेंगी। साथ ही स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप्स विकसित करने, नए पार्टनरशिप अवसरों का विस्तार करने और व्यावसायिक सहयोग के जरिए गाना के इकोसिस्टम को और मजबूत बनाने पर उनका मुख्य फोकस रहेगा।

शबनम मजूमदार के पास टेलीकॉम, बैंकिंग एवं वित्तीय सेवाएं (BFSI) तथा मीडिया एवं एंटरटेनमेंट सेक्टर में दो दशक से अधिक का अनुभव है। उन्हें स्ट्रैटेजिक बी2बी (B2B) पार्टनरशिप्स, रेवेन्यू ग्रोथ, मार्केट एक्सपेंशन, गो-टू-मार्केट स्ट्रैटेजी, ग्लोबल अकाउंट मैनेजमेंट और एंटरप्राइज सेल्स जैसे क्षेत्रों में महारत हासिल है।

गाना से जुड़ने से पहले वह ZEE5 में एसोसिएट डायरेक्टर– स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप्स (डिजिटल) के पद पर कार्यरत थीं। वहां उन्होंने टेलीकॉम, इंटरनेट सेवा प्रदाताओं (ISP), फिनटेक और ई-कॉमर्स कंपनियों के साथ साझेदारियों के माध्यम से सब्सक्रिप्शन रेवेन्यू बढ़ाने पर काम किया।

अपने करियर के दौरान शबनम Vodafone India, G4S, 92.7 Big FM, HSBC, ICICI Prudential Life Insurance और Max Life Insurance जैसी जानी-मानी कंपनियों से भी जुड़ी रही हैं।

उन्होंने बड़े पैमाने पर बिजनेस डेवलपमेंट और पार्टनरशिप से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स का नेतृत्व किया है। इनमें एंटरप्राइज टेलीकॉम कॉन्ट्रैक्ट्स, ओटीटी (OTT) सब्सक्रिप्शन पार्टनरशिप्स, एडवरटाइजिंग सेल्स, स्पोर्ट्स स्पॉन्सरशिप्स और भारत सहित अन्य उभरते बाजारों में मार्केट एक्सपेंशन से जुड़ी पहल शामिल हैं।

कॉर्पोरेट करियर के अलावा शबनम मजूमदार पशु कल्याण और सामुदायिक सेवा से भी सक्रिय रूप से जुड़ी हैं। वह 'The Philanthropist & The Happy Dog' नामक एक एनिमल रेस्क्यू ट्रस्ट की संस्थापक हैं, जो बेसहारा पशुओं के संरक्षण और उनके कल्याण के लिए काम करता है।

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Saregama India की वित्तीय स्थिति मजबूत, शॉर्ट टर्म बैंक सुविधाओं को मिली टॉप रेटिंग

'सारेगामा इंडिया' की वित्तीय स्थिति पर भरोसा जताते हुए CARE Ratings ने कंपनी की लंबी अवधि (Long Term) की बैंक सुविधाओं की CARE AA- (स्टेबल आउटलुक) रेटिंग को बरकरार रखा है।

Vikas Saxena by
Published - Saturday, 27 June, 2026
Last Modified:
Saturday, 27 June, 2026
Saregama568

म्यूजिक व एंटरटेनमेंट कंपनी 'सारेगामा इंडिया' (Saregama India) की वित्तीय स्थिति पर भरोसा जताते हुए CARE Ratings ने कंपनी की लंबी अवधि (Long Term) की बैंक सुविधाओं की CARE AA- (स्टेबल आउटलुक) रेटिंग को बरकरार रखा है। वहीं, कंपनी की शॉर्ट टर्म बैंक सुविधाओं को CARE A1+ रेटिंग दी गई है, जो इस श्रेणी की सबसे ऊंची रेटिंग मानी जाती है।

कंपनी ने इस संबंध में स्टॉक एक्सचेंज को जानकारी देते हुए बताया कि 26 जून 2026 को CARE Ratings ने अपनी समीक्षा पूरी करने के बाद यह रेटिंग जारी की है।

रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी की 100 करोड़ रुपये की लॉन्ग टर्म बैंक सुविधाओं को CARE AA-; Stable रेटिंग के साथ दोबारा पुष्टि (Reaffirmed) मिली है। हालांकि, इस सुविधा की राशि पहले के 101.50 करोड़ रुपये से घटाकर 100 करोड़ रुपये कर दी गई है।

इसके अलावा, 130 करोड़ रुपये की शॉर्ट टर्म बैंक सुविधा को पहली बार CARE A1+ रेटिंग दी गई है। वहीं, 3.50 करोड़ रुपये की दूसरी शॉर्ट टर्म बैंक सुविधा की CARE A1+ रेटिंग भी पहले की तरह बरकरार रखी गई है।

CARE Ratings ने यह रेटिंग कंपनी के वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) के ऑडिटेड वित्तीय नतीजों और हालिया परिचालन प्रदर्शन की समीक्षा के आधार पर दी है।

कुल मिलाकर, CARE Ratings ने 233.50 करोड़ रुपये की बैंक सुविधाओं का मूल्यांकन किया है। इनमें 100 करोड़ रुपये की लॉन्ग टर्म सुविधाएं और 133.50 करोड़ रुपये की शॉर्ट टर्म सुविधाएं शामिल हैं।

आमतौर पर CARE AA- रेटिंग का मतलब होता है कि कंपनी की दीर्घकालिक कर्ज चुकाने की क्षमता मजबूत है और जोखिम का स्तर कम है। वहीं, CARE A1+ शॉर्ट टर्म उधारी के लिए सर्वोच्च रेटिंग मानी जाती है, जो बताती है कि कंपनी की अल्पकालिक भुगतान क्षमता भी काफी मजबूत है।

कंपनी ने अपनी नियामकीय फाइलिंग में कहा है कि यह जानकारी SEBI (Listing Obligations and Disclosure Requirements) Regulations, 2015 के तहत निवेशकों और शेयरधारकों को उपलब्ध कराई जा रही है।

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'पॉकेट एफएम' के सीईओ ने 'Pocket TV' बंद होने की खबरों पर दी सफाई

पॉकेट एफएम (Pocket FM) के CEO रोहन नायक (Rohan Nayak) ने कहा कि Pocket TV को बंद नहीं किया गया, बल्कि यह एक बीटा प्रयोग था जिसने अपना उद्देश्य पूरा कर लिया।

Samachar4media Bureau by
Published - Friday, 26 June, 2026
Last Modified:
Friday, 26 June, 2026
pocket tv

पॉकेट एफएम (Pocket FM) के सह-संस्थापक (Co-founder) और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) रोहन नायक (Rohan Nayak) ने उन मीडिया रिपोर्ट्स का खंडन किया है, जिनमें दावा किया गया था कि कंपनी ने अचानक अपने माइक्रोड्रामा (Microdrama) प्लेटफॉर्म Pocket TV को बंद कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि Pocket TV को शुरुआत से ही एक बीटा (Beta) प्रयोग के रूप में लॉन्च किया गया था और उसने अपना निर्धारित उद्देश्य पूरा कर लिया।

लिंक्डइन (LinkedIn) पर साझा किए गए एक पोस्ट में रोहन नायक (Rohan Nayak) ने कहा कि "Pocket FM shuts down Pocket TV" जैसी सुर्खियां वास्तविक स्थिति को गलत तरीके से पेश करती हैं। उन्होंने लिखा कि कंपनी ने Pocket TV को करीब पांच महीने तक बीटा प्रोडक्ट के रूप में चलाया, इस दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल कीं और उसके बाद इसे बंद कर दिया।

रोहन नायक (Rohan Nayak) के मुताबिक, इस प्रयोग से कंपनी को यह समझने में मदद मिली कि माइक्रोड्रामा (Microdrama) प्लेटफॉर्म पर नए यूजर्स को जोड़ना अपेक्षाकृत आसान है, लेकिन उन्हें लंबे समय तक बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि असली समस्या यूजर एक्विजिशन (User Acquisition) नहीं, बल्कि लॉन्ग-टर्म रिटेंशन (Long-term Retention) है।

उन्होंने माइक्रोड्रामा उद्योग के मौजूदा बिजनेस मॉडल पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि इस कैटेगरी में कई कंपनियां भारी ग्राहक अधिग्रहण खर्च, डार्क पैटर्न्स (Dark Patterns) और ऑटो-रिन्यूअल (Auto-renewal) जैसे तरीकों के सहारे कारोबार चला रही हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी बिजनेस की सफलता केवल इसलिए है क्योंकि सब्सक्रिप्शन रद्द करना जानबूझकर मुश्किल बनाया गया है, तो वह वास्तविक प्रोडक्ट-मार्केट फिट (Product-Market Fit) नहीं है।

रोहन नायक (Rohan Nayak) ने दावा किया कि पॉकेट एफएम (Pocket FM) के 50 प्रतिशत से अधिक यूजर्स 12 महीने बाद भी प्लेटफॉर्म पर सक्रिय रहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी का डेली एक्टिव यूजर (Daily Active User) बेस कई समर्पित माइक्रोड्रामा प्लेटफॉर्म्स से बड़ा है, जबकि कंपनी मार्केटिंग पर अपेक्षाकृत कम खर्च करती है।

उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि "रिटेंशन एक रणनीति है, जबकि वायरल होना सिर्फ एक घटना है।" साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि Pocket TV से मिली सीख के आधार पर कंपनी ने माइक्रोड्रामा कैटेगरी के लिए एक नया दृष्टिकोण तैयार किया है और इससे जुड़े नए ऐलान जल्द किए जाएंगे।

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