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ऐसे मामलों में हम व्युअरशिप पर नहीं देते ध्यान: फे डिसूजा, मिरर नाउ

देश में टेलिविजन न्यूाज इंडस्ट्री को नई दिशा देने और इसे नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने में...

समाचार4मीडिया ब्यूरो 6 years ago

समाचार4मीडिया ब्यूरो।।

देश में टेलिविजन न्‍यूज इंडस्‍ट्री को नई दिशा देने और इसे नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने में अहम योगदान देने वालों को सम्मानित करने के लिए पिछले दिनों नोएडा के होटल रेडिसन ब्लू में ‘एक्‍सचेंज4मीडिया न्‍यूज ब्रॉडकास्टिंग अवॉर्ड्स’ (enba) दिए गए। इनबा का यह 11वां एडिशन का आयोजन हुआ, जिसमें अंग्रेजी न्यूज चैनल ‘मिरर नाउ’ (Mirror Now) ने कई अवॉर्ड्स जीते।

‘मिरर नाउ’ की एग्जिक्यूटिव एडिटर फे डिसूजा को ‘न्यूज टेलिविजन एडिटर-इन-चीफ ऑफ द ईयर’ (अंग्रेजी) के अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। वहीं, जूरी चॉइस के तहत इसे ‘न्यूज चैनल ऑफ द ईयर’ अवॉर्ड’ दिया गया। इसके अलावा इसे ‘Mahul-The Toxic Hell’ के लिए ‘बेस्ट न्यूज कवरेज और ‘VERIFIED’ शो के लिए बेस्ट टॉक शो का अवॉर्ड दिया गया।

‘मिरर नाउ’ द्वारा इन अवॉर्ड्स के जीतने पर हमारी सहयोगी वेबसाइट ‘एक्सचेंज4मीडिया’ (exchange4media) ने चैनल की एग्जिक्यूटिव एडिटर फे डिसूजा से उनकी इस जीत और आगामी चुनावों में चैनल की कवरेज प्लानिंग समेत कई मुद्दों पर विस्तार से बातचीत की। प्रस्तुत हैं इस बातचीत के प्रमुख अंशः

इस तरह के अवॉर्ड्स मिलने पर आपको कैसा महसूस होता है?

हमने जब ‘मिरर नाउ’ शुरू किया था, तब हमारा आइडिया व्युअर्स को एक विकल्प प्रदान करना था। हम जो भी निर्णय लेते है, उसमें हमेशा विकल्प होता है। यह अवॉर्ड इस बात का सबूत है कि हमने जो निर्णय लिया, वह सही था। हमें विश्वास है कि चैनल सही ट्रैक पर है।  

कुछ दिनों पहले आपने ट्वीट किया था कि न्यूज अपडेट देने के मामले में चैनल की रफ्तार कम रहेगी। आखिर इसके पीछे क्या कारण था?

‘मिरर नाउ’ हमेशा ऐसा करता रहा है। हाल ही में पाकिस्तान के साथ हमारे देश का जो तनाव हुआ, ऐसे में तमाम ऐसी इंफॉर्मेशन थीं, जो आधिकारिक नहीं थी। भारत सरकार द्वारा इस मामले में किसी भी तरह की पुष्टि नहीं की गई और न ही कोई आधिकारिक सूचना आई थी, ऐसे में हमने निर्णय किया था कि हम पाकिस्तान की तरफ से आ रही खबरों को नहीं चलाएंगे, बल्कि अपने देश की सरकार द्वारा इंफॉर्मेशन देने का इंतजार करेंगे और उन इंफॉर्मेशन का ही इस्तेमाल करेंगे। ऐसे में दर्शकों को लगा होगा कि चैनल पर कुछ भी नहीं है। इसलिए मैं लोगों को इस बारे में बताना चाहती थी कि कि हम अपने चैनल पर इंफॉर्मेशन क्यों नहीं दे रहे थे।  

भारत-पाकिस्तान के बीच पिछले दिनों हुए विवाद की कवरेज को लेकर मीडिया को भी काफी आलोचना का सामना करना पड़ा है। इस बारे में आपका क्या मानना है?

आपकी बात सही है। हालांकि, दूसरे चैनलों के बारे में तो मैं नहीं बता सकती हूं, लेकिन जहां तक ‘मिरर नाउ’ की बात है तो हमने कुछ चीजें तय कर रखी हैं। ऐसे समय में जब देश संघर्ष में है, हम देश के साथ खड़े हैं। मीडिया के तौर पर, खासकर टेलिविजन मीडिया पर हमें जिम्मेदार बनना होगा, क्योंकि यह पूरे देश के साथ ही सीमा पार भी लाइव टेलिकास्ट होता है। दूसरी तरफ ऐसे लोग थे, जिन्होंने भारतीय मीडिया का हवाला दिया और इसका इस्तेमाल हमारे खिलाफ किया। उन्होंने कुछ नेताओं की बातों को खूब उछाला और हमारे खिलाफ इनका इस्तेमाल किया। मेरा मानना है कि इस तरह की स्थिति में यह जरूरी नहीं है कि आप अपने व्युअर्स को लगातार अपडेट देते रहें। हमने तब तक इंतजार किया, जब तक कि सरकार ने घोषणा नहीं की। इसके बाद हमने सरकार की कही हुई बातों को प्रसारित किया।   

जब आप इस तरह का फैसला लेते हैं, तो क्या व्युअरशिप पर भी इसका प्रभाव पड़ता है?

जब भी हम इस तरह का फैसला लेते है, तो हमें वास्तव में नहीं पता होता है कि इसे लेकर व्युअर्स किस तरह की प्रतिक्रिया देंगे। लेकिन हम मानते हैं कि इससे जो क्रेडिबिलिटी हमें मिलती है, वह एक हफ्ते की व्युअरशिप से ज्यादा समय तक रहेगी। एक हफ्ते की ज्यादा व्युअरशिप हासिल करने के मुकाबले मैं क्रेडिबिलिटी को प्राथमिकता दूंगी। यदि इससे व्युअरशिप पर प्रभाव पड़ता है, तो भी मुझे फर्क नहीं पड़ता है। मुझे नहीं लगता कि क्रेडिबिलिटी के मुकाबले व्युअरशिप ज्यादा महत्वपूर्ण है। यदि एक तरफ देश हो और दूसरी तरफ व्युअरशिप तो मेरी नजर में देश ही सबसे ज्यादा जरूरी होगा। यह अवॉर्ड भी इसी बात का उदाहरण है।  

लोकसभा चुनावों की कवरेज के लिए आपकी क्या स्ट्रैटेजी रहेगी?

लोकसभा चुनावो की कवरेज के दौरान हमारा ज्यादा से ज्यादा फोकस आम लोगों पर रहेगा। हम किसी भी स्टोरी को लोगों के नजरिये से देखते हैं। हमारा पूरा ध्यान देश की जनता, खासकर युवा पीढ़ी पर रहेगा। अपने देश में ऐसे युवाओं की संख्या बहुत ज्यादा है, जो इस बार चुनाव में अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इनमें से कई युवाओं की उम्र तो 30 साल से कम है, जबकि कई पहली बार वोट डालेंगे। हम इन युवाओं से बात कर जानेंगे कि वे अपने इस अधिकार के बारे में क्या सोचते हैं। कौन से ऐसे मुद्दे हैं, जो उनके लिए मायने रखते हैं और हम उन्हें सही जानकारी देने में किस तरह मदद कर सकते हैं। इस तरह से युवाओं को सही चुनाव करने में मदद मिलेगी।  

देश में आम चुनावों की आहट के साथ ही सभी चैनलों ने अपने स्पेशल इलेक्शन शो के बारे में बात करनी शुरू कर दी है। ऐसे में इलेक्शन की कवरेज को लेकर ‘मिरर नाउ’ ने किस तरह की प्लानिंग की है?

यही हम लोगों का काम है कि नए-नए शो लेकर आएं, नए आइडिया लेकर आएं। वैसे, हमारी प्लानिंग पूरे देश में घूमने की है। हमारी सहयोगी तन्वी शुक्ला देश भर के लोगों का मिजाज जानेंगी। इस आइडिया का उद्देश्य लोगों से मिलकर उनके शहर के बारे में चर्चा की जाएगी। इस दौरान ज्यादा से ज्यादा युवाओं से बातचीत कर उनसे जुड़ने की कोशिश की जाएगी। किसी भी अन्य चैनल को मुकाबले युवाओं से कनेक्ट करने में हम ज्यादा सफल रहे हैं, क्योंकि हमारे पास युवाओं की टीम है और हम उस उम्र के युवाओं की मनोदशा को बेहतर समझ सकते हैं।

आजकल के समय में खबरों को सनसनीखेज बनाया जाता है। ऐसे में कई बार गलत खबरें भी चल जाती हैं। ऐसी स्थिति से ‘मिरर नाउ’ किस तरह निपटता है?

बिना तथ्यों की जांच के लिए हम कोई खबर नहीं चलाते हैं। तथ्यों की दोबारा से जांच करने के लिए हम उस स्टोरी पर 20 मिनट ज्यादा खर्च करते हैं। हमारा मानना है कि दूसरों के मुकाबले भले ही खबर देने में थोड़ी देर हो जाए, लेकिन हम पहले किसी भी तरह से यह सुनिश्चित करेंगे कि वह खबर सही हो। ब्रेकिंग न्यूज से ज्यादा हमारे लिए क्रेडिबिलिटी बहुत जरूरी है। कहने का मतलब है कि खबरों की आपाधापी में हम ब्रेकिंग न्यूज के नाम पर गलत खबर नहीं चलाना पसंद नहीं करते हैं। जहां तक दूसरे चैनलों की बात है, तो हमें पता है कि अभी बहुत आलोचना हो रही है। मेरा मानना है कि आलोचना का सबसे अच्छा तरीका यही है कि यदि आपको लगता है कि कोई सनसनी फैला रहा है अथवा गैरजिम्मेदार है तो आपको उस चैनल को नहीं देखना चाहिए। हालांकि, हम ये तय नहीं कर सकते हैं कि आपको क्या देखना चाहिए, लेकिन एक ऑडियंस के रूप में यह शक्ति आपके हाथों में है।


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