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जैसे कंपाउडर डॉक्टर नहीं होता, वैसे ही हर मोबाइल वाला पत्रकार नहीं होता: जयदीप कर्णिक
प्रतिष्ठित ‘एक्सचेंज4मीडिया न्यूज ब्रॉडकास्टिंग अवॉर्ड्स’ (enba) के 11वें एडिशन का आयोजन 16 फरवरी को नोएडा के...
समाचार4मीडिया ब्यूरो 6 years ago
समाचार4मीडिया ब्यूरो।।
प्रतिष्ठित ‘एक्सचेंज4मीडिया न्यूज ब्रॉडकास्टिंग अवॉर्ड्स’ (enba) के 11वें एडिशन का आयोजन 16 फरवरी को नोएडा के होटल रेडिसन ब्लू में किया गया। इस मौके पर देश में टेलिविजन न्यूज इंडस्ट्री को नई दिशा देने और इंडस्ट्री को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने में अहम योगदान देने वालों को ‘इनबा अवॉर्ड्स’ से सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के दौरान मीडिया क्षेत्र की हस्तियों ने विभिन्न पैनल डिस्कशन के जरिये अपने विचार व्यक्त किए। ऐसे ही एक पैनल का विषय ‘How Does Today’s Media deal with the Fake News’ रखा गया था। 'TV9' की एंकर नबिला जमालुद्दीन ने बतौर सेशन चेयर इसे मॉडरेट किया। इस पैनल डिस्कशन में ‘अमर उजाला’ डिजिटल के एडिटर जयदीप कर्णिक, ‘बीबीसी न्यूज’ हिंदी के एडिटर मुकेश शर्मा, जागरण न्यू मीडिया और विश्वास न्यूज के सीनियर एडिटर प्रत्युष रंजन, वरिष्ठ पत्रकार अखिलेश शुक्ला और ‘Google News Initiative India Training Network @ Internews’ की प्रोग्राम डायरेक्टर सुरभि मलिक मौजूद रहीं।
जयदीप कर्णिक का कहना था, ‘समाचार माध्यमों में यह व्यवस्था शुरू से है और किसी भी जवाबदेह समाचार संस्थान ने जानबूझकर झूठी खबर को प्रसारित नहीं किया है। अगर गलती से कभी ऐसा हो भी जाता था तो अखबारों में खेद प्रकाशित किए जाते थे और बड़े चैनलों में भी ऐसा ही होता था, लेकिन अब यह खत्म हो गया है। शर्मिंदगी और जवाबदेही भी खत्म हो गई है। हमें दिक्कत वहां होती है, जब हम लोग समाज में फैल रहे झूठ को अपने-अपने माध्यम से प्रसारित करते हैं। आजकल हर आदमी रिपोर्टर बन गया है।’
उन्होंने कहा, ‘फेक न्यूज को लेकर जर्मनी में इंडियन कॉन्फ्रेंस में इसी तरह की चर्चा हो रही थी। वहां पूछा गया था कि यह दिक्कत क्यों हो रही है? वहां निकलकर सामने आया कि दिक्कत तब होती है, जब सभी लोग खुद को पत्रकार समझने लगते हैं। लोगों को लगता है कि उनके हाथ में मोबाइल है, इसलिए वे भी रिपोर्टर हो गए हैं। लेकिन, सभी कपाउंडर जिस तरह से डॉक्टर नहीं हो सकते, उसी तरह से हाथ में मोबाइल लेने वाला हर आदमी पत्रकार नहीं हो सकता है। ऐसे में जवाबदेही जब खत्म हो जाती है और लोग बिना देखे और पुष्टि किए बिना उसे आगे फॉरवर्ड कर देंगे तो गड़बड़ होगी। आजकल धड़ाधड़ शेयर और फॉरवर्ड करने का जो सिलसिला शुरू हुआ है, वहां गड़बड़ हो रही है। ऐसे में हमें यह सोचना चाहिए कि ऐसी न्यूज धड़ाधड़ फॉरवर्ड होकर जब हमारे न्यूज रूम में आती है और वहां पर भी उसकी पुष्टि नहीं होगी तो आखिर समाज किसका मुंह देखेगा।’
समाचार माध्यमों की जवाबदेही के बारे में जयदीप कर्णिक का कहना था, ‘आखिर किसी को तो पता लगाना होगा कि यह घटना हुई है। रही बात पुलवामा में शहीदों की संख्या को लेकर विभिन्न चैनलों के दावे की तो इसकी आधिकारिक सूची जारी होती है, ऐसे में उस सूची में जितने नाम हों, सिर्फ उतनों के बारे में बताना चाहिए था। शुरुआत में जल्दबाजी में आंकड़े गलत हो सकते हैं, क्योंकि चैनलों को स्क्रॉल चलाना है, लेकिन खबर अनुमान पर नहीं, बल्कि पुख्ता जानकारी पर चलाई जानी चाहिए। जैसे पुलवामा में जब हम 39 जवानों के शहीद होने की खबर दे रहे थे तो फेसबुक पर लोगों के कमेंट आ रहे थे कि 44 जवान शहीद हुए हैं और आप 39 बता रहे हैं, तब मैंने कहा कि हमारे पास 39 की सूची है और इसलिए हम ये आंकड़ा दे रहे हैं। कई बार झूठ इतना प्रसारित हो जाता है कि सच को भी लोग झूठ मानने लगते हैं।’
उन्होंने कहा कि किसी भी मैसेज पर आंखें मूंदकर भरोसा न करें और बिना उसकी पुष्टि हुए आगे फॉरवर्ड न करें। यदि आपको किसी मैसेज अथवा विडियो के बारे में पुख्ता जानकारी नहीं है तो उसे फॉरवर्ड न करें, इस तरह फेक न्यूज के खतरे से काफी हद तक बचा जा सकता है।
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