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क्या आपने सुनी है पीएम मोदी की ये नई कविता, सुनें यहां
तीखे और हल्के सवालों के बीच बेहद निराले अंदाज में हुआ इंटरव्यू का समापन
समाचार4मीडिया ब्यूरो 6 years ago
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अब तक जितने भी इंटरव्यू आये हैं, उनमें यदि ‘न्यूज़ नेशन’ को दिए इंटरव्यू को सबसे जुदा कहा जाए तो कुछ गलत नहीं होगा। इस इंटरव्यू में सामान्य इंटरव्यू की तरह सवाल-जवाब थे, जिसमें कुछ तीखे और कुछ हल्के थे, लेकिन इसका अंत बेहद निराला था। कहते ही हैं कि अंत भला तो सब भला।‘ न्यूज़ नेशन’ की तरफ से वरिष्ठ पत्रकार दीपक चौरसिया और उनकी सहयोगी पिनाज त्यागी ने पीएम मोदी पर सवाल दागे, जिसका उन्होंने न केवल खूबसूरती से जवाब दिया, बल्कि बीच-बीच में कई ऐसे शब्द भी इस्तेमाल किये जो उनके काम और विपक्ष के आरोपों में भेद करने के लिए काफी थे। मसलन...उनका टेपरिकॉर्ड...हमारा ट्रैक रिकॉर्ड। दीपक चौरसिया ने एक ऐसा भी सवाल किया, जो संभवतः पहले भी पूछा जा चुका है, मगर इस बार का जवाब बिल्कुल अलग था। ‘मोदी हैं तो लोकतंत्र खतरे में है?’ इस पर पीएम मोदी ने गुजरात से जुड़े दो किस्से सुनाकर उन सभी को खामोश कर दिया, जो यह सवाल दागते नहीं थकते।
उन्होंने कहा, ‘मुख्यमंत्री रहते वक़्त महीने के अंत में मेरे पास ऐसी भी फाइलें आती थीं, जिनमें रिटायर होने वाले अधिकारियों को पुराने मामलों के संबंध में नोटिस देने का जिक्र होता था। मैंने यह प्रथा बंद कराई, मैंने कहा कि जिस व्यक्ति ने अपनी जिंदगी के इतने साल सेवा में दिए, उसे घर जाते वक़्त आप नोटिस देंगे? देना ही है तो 6 महीने पहले दीजिये, ताकि उसे जवाब देने का वक़्त मिले, क्या यह लोकतंत्र को खतरे में डालने वाला विचार है?’
दूसरे किस्से में उन्होंने गुजरात स्थापना दिवस का उल्लेख करते हुए कहा, ‘मैंने उस मौके पर सभी दलों के पूर्व विधायकों, नेताओं को आमंत्रित किया। हम सभी ने साथ बैठकर यह ख़ुशी बांटी, क्या यह लोकतंत्र को खतरे में डालने वाला काम है?’ सवाल जवाब के सिलसिले को मुकाम तक पहुंचाने और इंटरव्यू के अंत को अनोखा रूप देने से पहले मोदी ने कुछ विषयों को लेकर मीडिया को कठघरे में भी खड़ा किया।
जब चौरसिया ने विपक्ष के 30 हजार करोड़ इधर से उधर करने के आरोप पर सवाल पूछा तो उन्होंने नाराज़गी व्यक्त करते हुए कहा, ‘यदि ये सवाल कोई पत्रकार उनसे पूछेगा तो मैं उसे घर जाकर सम्मानित करूँगा कि चलो भाई तुमने सवाल पूछा तो...जवाब मिले न मिले। अभी तक जो खुद को निष्पक्ष और महान पत्रकार मानते हैं, उन्होंने कभी उनसे यह सवाल नहीं पूछा।’ इसी तरह बंगाल में हुई चुनावी हिंसा पर पीएम बोले, ‘उस गंभीर विषय को तू-तू मैं-मैं में हल्का करने की ज़रूरत नहीं है।’
जब बात हिमाचल की निकली तो पीएम के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान आ गई और अगले ही पल उन्होंने इस मुस्कान की वजह भी स्पष्ट कर दी। उन्होंने बताया कि इंटरव्यू वाले दिन ही हिमाचल की चुनावी रैली से लौटते समय उन्होंने एक कविता तैयार की है। दीपक चौरसिया ने पीएम से कविता सुनाने को कहा तो उन्होंने हंसते हुए जवाब दिया कि पता नहीं आपके दर्शकों को पसंद आएगी भी या नहीं। हालांकि, पत्रकारों के आग्रह को पीएम अस्वीकार नहीं कर सके और उन्होंने अपनी लिखी कविता सुनाई।
‘आसमान में सिर उठाकर
घने बादलों को चीरकर
रोशनी का संकल्प लें
अभी तो सूरज उगा है।।
दृढ़ निश्चय के साथ चलकर
हर मुश्किल को पारकर
घोर अंधेरे को मिटाने
अभी तो सूरज उगा है।।
विश्वास की लौ जलाकर
विकास का दीपक लेकर
सपनों को साकार करने
अभी तो सूरज उगा है।।
न अपना न पराया
न मेरा न तेरा
सबका तेज बनकर
अभी तो सूरज उगा है।।
आग को समेटते
प्रकाश को बिखेरता
चलता और चलाता
अभी तो सूरज उगा है।।
विकृति ने प्रकृति को दबोचा
अपनों से ध्वस्त होती आज है
कल बचाने और बनाने
अभी तो सूरज उगा है।।
पीएम द्वारा सवालों के बीच अपने अंदर के कवि को इस तरह सबसे सामने लाने का संभवतः यह पहला मौका था और इसीलिए ‘न्यूज़ नेशन’ का यह इंटरव्यू सबसे ख़ास हो गया। चलते-चलते दीपक चौरसिया और पिनाज त्यागी ने मोदी से दो सवाल पूछे और ‘अंत भला, तो सब भला’ वाली कहावत के साथ ये मैराथन इंटरव्यू समाप्त हो गया।
पूरा इंटरव्यू आप यहां देख सकते हैं- पीएम की कविता सुनने के लिए 1.7 मिनट पर क्लिक कीजिए
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