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सकाल के लिए मीडिया सिर्फ रीच नहीं, रिश्तों का माध्यम है: उदय जाधव
गोवा में हुए e4m बिजनेस लीडर्स रिट्रीट के मंच पर Sakal Media Group के CEO उदय जाधव ने बेहद खुलकर बातचीत की
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 9 months ago
चहनीत कौर, सीनियर कॉरेस्पोंडेंट, एक्सचेंज4मीडिया ।।
गोवा में हुए e4m बिजनेस लीडर्स रिट्रीट के मंच पर Sakal Media Group के CEO उदय जाधव ने बेहद खुलकर बातचीत की और महाराष्ट्र के सबसे भरोसेमंद मीडिया समूहों में से एक 'सकाल' की 93 साल की यात्रा पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने बताया कि किस तरह ‘सकाल’ ने समय के साथ खुद को बदला है, लेकिन अपने मूल सिद्धांतों- भरोसे, प्रासंगिकता और सामाजिक जिम्मेदारी से कभी समझौता नहीं किया।
1932 में स्थापित Sakal Media Group ने प्रिंट, टेलीविजन, डिजिटल और ग्राउंड एक्टिवेशन हर माध्यम में अपनी मौजूदगी दर्ज की है। आज सिर्फ उसका प्रिंट संस्करण ही हर सुबह महाराष्ट्र के 15 लाख से ज्यादा घरों तक पहुंचता है। उदय जाधव ने कहा, “सकाल को उसकी विश्वसनीयता और समाज के प्रति उसकी प्रतिबद्धता के लिए जाना जाता है। हमारा मानना है कि मीडिया का काम सिर्फ सूचनाएं देना नहीं, बल्कि लोगों की समस्याओं को समझना और उनके समाधान में भागीदार बनना भी है।”
इस दौरान उन्होंने अपनी जिंदगी से जुड़ा एक निजी किस्सा भी साझा किया। उन्होंने बताया कि कैसे ‘सकाल’ में छपे एक छोटे से जॉब एड ने उनका पूरा करियर बदल दिया। “MBA के बाद मैं रोज 50 किलोमीटर दूर नौकरी के लिए सफर करता था। एक दिन ‘सकाल’ में मैंने मैनेजमेंट ट्रेनी की एक छोटी-सी वैकेंसी देखी। उसी विज्ञापन से मेरी 'सकाल' में एंट्री हुई और आज मैं इसी संस्था का नेतृत्व कर रहा हूं।”
चार घंटे की यात्रा से बचने की कोशिश में जो शुरुआत हुई, वही एक लंबे मीडिया करियर की नींव बन गई।
जमीन से जुड़ाव और बदलाव की पहल: 'सकाल' की मिशन वाली मीडिया रणनीति
उदय जाधव ने मंच पर विस्तार से बताया कि किस तरह 'सकाल मीडिया ग्रुप' ने पत्रकारिता से आगे बढ़कर समाज में ठोस बदलाव लाने की दिशा में काम किया है, खासतौर पर अपने कृषि-फोकस्ड वर्टिकल ‘Agrowon’ के जरिए, जो देश का इकलौता रोज प्रकाशित होने वाला किसान-समर्पित अखबार है।
उन्होंने बताया कि एक सरकारी सर्वे में यह बात सामने आई थी कि किसानों को तकनीकी जानकारी की सख्त जरूरत है। इस जरूरत को समझते हुए 'सकाल' ने एक नौ सप्ताह का प्रशिक्षण पाठ्यक्रम तैयार किया। जाधव ने कहा, “हमने महाराष्ट्र के हर गांव तक पहुंच बनाई और तीन लाख से ज्यादा किसानों को मिट्टी परीक्षण से लेकर मार्केट लिंकिंग तक की ट्रेनिंग दी। प्रतिक्रिया जबरदस्त रही, इससे साबित हुआ कि मीडिया सिर्फ सूचनाएं देने वाला नहीं, ज्ञान का सशक्त माध्यम भी बन सकता है।”
उन्होंने यह भी बताया कि किस तरह राष्ट्रीय मीडिया अक्सर शहरी दर्शकों पर केंद्रित रहता है, जबकि क्षेत्रीय बाजारों में अपार संभावनाएं छिपी हैं। महाराष्ट्र में मौजूद शिक्षा संबंधी आँकड़ों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “राज्य के 2.2 करोड़ स्कूली छात्रों में से 1.7 करोड़ से ज्यादा बच्चे मराठी माध्यम में पढ़ते हैं। अगर मुंबई और पुणे दो मेट्रो शहर हैं, तो बाकी पूरा महाराष्ट्र मिलकर एक तीसरा मेट्रो बनता है। इस हिस्से को नजरअंदाज करना किसी भी बाजार विशेषज्ञ के लिए चूक होगी।”
'सकाल' की सरकार के साथ की गई साझेदारियां भी इसके व्यापक सामाजिक योगदान को दर्शाती हैं। ग्रुप ने रियल एस्टेट में करियर बनाने के इच्छुक लोगों के लिए RERA सर्टिफिकेशन ट्रेनिंग और राज्यभर के 10 लाख से ज्यादा निर्माण श्रमिकों के लिए सुरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए हैं। जाधव ने कहा, “हम डेवलपर्स, नगर निगमों और वेलफेयर बॉडीज के साथ मिलकर काम करते हैं। ये सिर्फ कैंपेन नहीं हैं, बल्कि स्टेकहोल्डर्स के लिए परिणामों को बेहतर बनाने की संस्थागत कोशिशें हैं।”
“Fevicol जैसा जोड़ चाहिए”: ब्रांड साझेदारियों और क्षेत्रीय बाजार की ताकत पर बोले उदय जाधव
सेशन के आख़िरी हिस्से में उदय जाधव ने सकाल मीडिया ग्रुप की ब्रांड साझेदारियों की मिसालें साझा करते हुए बताया कि कैसे एक मजबूत रणनीति और लोकल समझ मिलकर बड़े असर पैदा कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि गार्नियर के लिए पूरे राज्य में 'वेट सैंपलिंग' कैंपेन, Google के लिए डिजिटल साक्षरता अभियान, Gillette के साथ युवा ग्रूमिंग सेशन्स और पुणे के FMCG ब्रांड सवाई मसाले के लिए एक प्रभावशाली मीडिया रणनीति 'सकाल' ने तैयार की।
उन्होंने बताया, “सवाई ने बेहद सीमित बजट से शुरुआत की थी, लेकिन जब उन्हें अच्छे नतीजे मिले तो उन्होंने 18 महीनों में अपना मीडिया बजट दस गुना तक बढ़ा दिया। तीन साल का टारगेट उन्होंने सिर्फ डेढ़ साल में हासिल कर लिया।”
जाधव ने जोर देकर कहा कि जब रणनीति लोकल बाजार की समझ के साथ बनाई जाती है, तो क्षेत्रीय मीडिया ठोस और मापने लायक परिणाम दे सकता है।
उन्होंने यह भी बताया कि सकाल के पास जमीनी स्तर पर 10,000 से अधिक लोगों की टीम है, जिसकी मौजूदगी महाराष्ट्र के 358 तालुकों और 28,000 गांवों में है। “हम सिर्फ रीच की बात नहीं करते, हमारे लिए मीडिया का मतलब रिश्तों से है। हमें अपने पाठकों, दर्शकों और क्लाइंट्स—सबके दिल की बात समझनी आती है।”
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने मार्केटर्स और क्षेत्रीय मीडिया हाउसेज के बीच और गहरे सहयोग की अपील की। उन्होंने मुस्कराते हुए कहा, “लंबे समय में टिकाऊ सफलता वहीं मिलती है जहां मीडिया और ब्रांड्स के बीच भरोसे का रिश्ता हो। हमारा रिश्ता भी ‘Fevicol के जोड़’ जैसा मजबूत होना चाहिए।”
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