पाकिस्तान के प्रसिद्ध पत्रकार और राजनीतिक टिप्पणीकार इमरान रियाज खान का आखिरकार चार महीने बाद पता चल ही गया
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समाचार4मीडिया ब्यूरो
पाकिस्तान के प्रसिद्ध पत्रकार और राजनीतिक टिप्पणीकार इमरान रियाज खान का आखिरकार अपने घर लौट आए हैं। सियालकोट पुलिस ने सोमवार सुबह सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी दी।
सियालकोट पुलिस ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में कहा कि पत्रकार/एंकर इमरान रियाज खान को सुरक्षित बरामद कर लिया गया है। वह अब अपने परिवार के साथ हैं। पंजाब के महानिरीक्षक उस्मान अनवर और सियालकोट के जिला पुलिस अधिकारी हसन इकबाल ने इसकी पुष्टि की है कि इमरान अब 'घर पर सुरक्षित' है। वहीं, रियाज खान के वकील मियां अली अशफाक ने भी सोशल मीडिया पर पुष्टि की। उन्होंने कहा कि कई कठिनाइयों के बाद भी अल्लाह की रहम से वह अपने राजकुमार को वापस ले आए।
बता दें कि रियाज चार महीने से अधिक समय से लापता थे। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के अध्यक्ष इमरान खान की नौ मई को गिरफ्तारी के बाद देशभर में हुए हिंसक प्रदर्शनों के दो दिन बाद 47 वर्षीय एंकर को कथित तौर पर गिरफ्तार कर लिया गया था।
इमरान रियाज खान पाकिस्तान के नामचीन न्यूज एंकर्स में शुमार हैं और तमाम बड़े न्यूज चैनलों के साथ काम कर चुके हैं। इमरान खान जब सत्ता में थे तो वो काफी ताकतवर माने जाते थे। कई विवादों में उनका नाम भी सामने आया था।
पिछले साल अप्रैल में इमरान की सरकार गिरी तो रियाज ने अपना यूट्यूब चैनल शुरू किया। वो लगातार शाहबाज शरीफ की हुकूमत और फौज को ललकारते रहे। उन्हें दो महीने पहले भी गिरफ्तार किया गया था, लेकिन कुछ ही घंटे बाद इस्लामाबाद हाई कोर्ट के आदेश पर छोड़ दिया गया था।
पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को नौ मई को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उनके समर्थकों ने जिन्ना हाउस समेत फौज के कई ठिकानों पर जबरदस्त हमले किए थे, जिनमें कई लोग मारे गए थे। उस दौरान रियाज ने फौज और आईएसआई पर तंज कसे थे। इसके बाद 11 मई की रात सियालकोट एयरपोर्ट से उन्हें गिरफ्तार किया गया था। 15 मई को एक अधिकारी ने लाहौर हाई कोर्ट को बताया था कि इमरान रियाज से लिखित हलफनामा लेने के बाद जेल से रिहा कर दिया गया था, तब से ही वह लापता थे।
16 मई को इमरान रियाज खान के पिता मुहम्मद रियाज ने सियालकोट सिविल लाइंस पुलिस में उनके कथित अपहरण की प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
अमेरिका की मीडिया व टेलीकॉम कंपनी 'कॉमकास्ट' ने घोषणा की है कि वह अपने मीडिया और एंटरटेनमेंट कारोबार NBCUniversal और Sky को अलग कर दो स्वतंत्र, शेयर बाजार में सूचीबद्ध (लिस्टेड) कंपनियां बनाएगी।
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अमेरिका की दिग्गज मीडिया और टेलीकॉम कंपनी 'कॉमकास्ट' (Comcast) ने बड़ा फैसला लिया है। कंपनी ने घोषणा की है कि वह अपने मीडिया और एंटरटेनमेंट कारोबार NBCUniversal और Sky को अलग कर दो स्वतंत्र, शेयर बाजार में सूचीबद्ध (लिस्टेड) कंपनियां बनाएगी।
इस खबर के बाद सोमवार को प्री-मार्केट ट्रेडिंग में Comcast के शेयरों में 20% से ज्यादा की तेजी देखने को मिली।
कंपनी के मुताबिक, यह बंटवारा करीब एक साल में पूरा होने की उम्मीद है। इसके बाद एक कंपनी के पास Comcast का केबल ब्रॉडबैंड, वायरलेस और बिजनेस सर्विसेज का कारोबार रहेगा, जबकि दूसरी कंपनी के तहत Universal Theme Parks, फिल्म और टीवी स्टूडियो, NBC, स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म Peacock और यूरोपीय मीडिया बिजनेस Sky आएंगे।
Comcast के चेयरमैन और सह-CEO ब्रायन रॉबर्ट्स ने कहा कि इस फैसले से दोनों कंपनियों को अलग-अलग रणनीति के साथ काम करने और नए कारोबारी अवसरों का फायदा उठाने का मौका मिलेगा।
कंपनी ने यह भी बताया कि मौजूदा Co-CEO माइक कैवनॉ नई NBCUniversal कंपनी का नेतृत्व करेंगे। वहीं, कंपनी के पूर्व मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) माइकल एंजेलाकिस दोबारा Comcast में लौटेंगे और अलग होने के बाद मुख्य कंपनी के CEO की जिम्मेदारी संभालेंगे।
इस विभाजन के बाद मौजूदा Comcast के शेयरधारकों को दोनों नई कंपनियों के शेयर मिलेंगे। साथ ही Comcast शुरुआत में नई NBCUniversal कंपनी में 19.9% तक हिस्सेदारी अपने पास रखेगी, जिसे वह समय के साथ बेचने की योजना बना रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब पारंपरिक टीवी कारोबार लगातार दबाव में है और Netflix जैसी स्ट्रीमिंग कंपनियों से प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है। वहीं, अमेरिकी मीडिया इंडस्ट्री में बड़े विलय और पुनर्गठन का दौर भी जारी है, जिससे कंपनियां अपने कारोबार को अधिक मजबूत और प्रतिस्पर्धी बनाने की कोशिश कर रही हैं।
युगांडा के सेना प्रमुख मुहूजी कैनेरुगाबा (Muhoozi Kainerugaba) ने देश के दो बड़े मीडिया संस्थानों को बंद करने का आदेश देने का दावा किया है।
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युगांडा के सेना प्रमुख मुहूजी कैनेरुगाबा (Muhoozi Kainerugaba) ने देश के दो बड़े मीडिया संस्थानों को बंद करने का आदेश देने का दावा किया है। उन्होंने कहा कि Daily Monitor और NTV Uganda उनकी अनुमति के बिना दोबारा नहीं खुलेंगे।
मुहूजी कैनेरुगाबा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि उन्हें "फ्री प्रेस" पर भरोसा नहीं है। उन्होंने कहा कि अब से युगांडा से जुड़ी कोई भी नकारात्मक खबर प्रकाशित या प्रसारित करने से पहले उनके कार्यालय की मंजूरी लेनी होगी। उन्होंने यह भी कहा कि आगे से देश के सभी मीडिया संस्थानों को इन नियमों का पालन करना होगा।
Daily Monitor और NTV Uganda दोनों Nation Media Group के स्वामित्व में हैं। Daily Monitor ने बताया कि राजधानी कंपाला के नमुवोंगो स्थित कंपनी के मुख्यालय और सेरेना होटल कार्यालय के बाहर भारी संख्या में सुरक्षाबलों की तैनाती की गई है। कर्मचारियों के अनुसार, किसी भी व्यक्ति को दफ्तर के अंदर जाने या बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी जा रही थी।
रिपोर्टों के मुताबिक, Nation Media Group के स्वामित्व वाले NTV Uganda, Spark TV और उसके अन्य टीवी एवं रेडियो चैनलों का प्रसारण भी रविवार को बंद हो गया।
मुहूजी कैनेरुगाबा ने दावा किया कि उन्हें मीडिया संस्थानों को बंद करने का अधिकार 2017 में उनके पिता और युगांडा के राष्ट्रपति Yoweri Museveni ने दिया था। मुहूजी को राष्ट्रपति का संभावित उत्तराधिकारी भी माना जाता है और वे अपने विवादित सोशल मीडिया बयानों को लेकर अक्सर चर्चा में रहते हैं।
युगांडा में मीडिया पर कार्रवाई का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले 2013 में सरकार ने Daily Monitor को 10 दिनों के लिए बंद कर दिया था। वहीं 2007 में सरकार की आलोचनात्मक रिपोर्टिंग के बाद NTV Uganda का प्रसारण शुरू होने के कुछ ही महीनों बाद रोक दिया गया था।
हालांकि, इस पूरे मामले पर अभी तक Uganda People's Defence Forces>, Uganda Police Force और Uganda Communications Commission की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
वहीं, National Association of Broadcasters ने इस कार्रवाई पर गहरी चिंता जताई है। संगठन ने कहा कि वह पूरे घटनाक्रम पर नजर रखे हुए है और इस कदम का देश के मीडिया माहौल तथा संविधान में मिले अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंतित है।
अमेरिकी सांसदों ने एक द्विदलीय समझौते के तहत सोशल मीडिया कंपनियों के लिए बच्चों और अभिभावकों को सुरक्षा टूल उपलब्ध कराना अनिवार्य करने पर सहमति बनाई है।
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अमेरिका में बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। अमेरिकी हाउस एनर्जी एंड कॉमर्स कमेटी के रिपब्लिकन और डेमोक्रेट नेताओं ने एक द्विदलीय (Bipartisan) समझौता किया है, जिसके तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को बच्चों और अभिभावकों के लिए सुरक्षा सुविधाएं और नियंत्रण संबंधी टूल उपलब्ध कराने होंगे।
कमेटी के चेयरमैन ब्रेट गुथ्री और वरिष्ठ डेमोक्रेट सदस्य फ्रैंक पैलोन ने सोमवार को इस समझौते की घोषणा की। हालांकि उन्होंने प्रस्ताव के विस्तृत प्रावधानों का खुलासा नहीं किया, लेकिन कहा कि यह कदम “बिग टेक कंपनियों को जवाबदेह बनाने” की दिशा में महत्वपूर्ण होगा।
दोनों नेताओं ने संयुक्त बयान में कहा कि कई महीनों तक दोनों दलों ने मिलकर काम किया और अब बच्चों के लिए डिजिटल माहौल को बेहतर बनाने वाली नीतियों पर सहमति बन गई है।
अमेरिका में टेक कंपनियां लंबे समय से युवाओं और किशोरों पर उनके प्रभाव को लेकर जांच के दायरे में हैं। कई अभिभावक और राज्य सरकारें स्कूलों में मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने जैसी पहल कर रही हैं ताकि बच्चों की सोशल मीडिया तक पहुंच सीमित की जा सके।
इस समझौते में सोशल मीडिया नियमन से जुड़े कई विवादास्पद मुद्दों को भी संबोधित किया गया है। हालांकि इसमें “ड्यूटी ऑफ केयर” (Duty of Care) का प्रावधान शामिल नहीं किया गया है। यह प्रावधान सोशल मीडिया कंपनियों को बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अपने प्लेटफॉर्म डिजाइन करने के लिए बाध्य करता।
डेमोक्रेट सांसदों और कुछ प्रमुख रिपब्लिकन नेताओं, विशेष रूप से टेनेसी की सीनेटर मार्शा ब्लैकबर्न, लंबे समय से इस प्रावधान को कानून का हिस्सा बनाने की मांग करते रहे हैं। इसी वजह से अब तक इस तरह के विधेयकों को आगे बढ़ाने में कठिनाई आती रही है।
समझौते के तहत राज्यों को ऐसे कानून बनाने की अनुमति होगी जो इस प्रस्तावित कानून से भी अधिक सुरक्षा प्रदान करें। इसे डेमोक्रेट्स की बड़ी जीत माना जा रहा है क्योंकि वे राज्यों के मौजूदा कानूनों को बनाए रखना चाहते थे।
हालांकि यह समझौता अभी कानून नहीं बना है। इसे लागू होने से पहले अमेरिकी सीनेट और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मंजूरी हासिल करनी होगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी हाउस के स्पीकर माइक जॉनसन इस समझौते का समर्थन करते हैं।
राज्यों ने पहले ही बनाए हैं अपने कानून
अमेरिका में लंबे समय से सोशल मीडिया को लेकर व्यापक राष्ट्रीय कानून नहीं बन पाया है। इसके चलते कई राज्यों ने अपने स्तर पर कानून लागू किए हैं। गैर-पक्षपाती संस्था नेशनल कॉन्फ्रेंस ऑफ स्टेट लेजिस्लेचर्स के अनुसार, पिछले वर्ष कम से कम 20 राज्यों ने बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग को नियंत्रित करने से जुड़े कानून पारित किए थे।
युवाओं में सबसे लोकप्रिय प्लेटफॉर्म
प्यू रिसर्च सेंटर की दिसंबर में जारी रिपोर्ट के अनुसार, 13 से 17 वर्ष के अमेरिकी किशोरों के बीच Snapchat, Instagram, YouTube और TikTok सबसे लोकप्रिय डिजिटल प्लेटफॉर्म हैं।
इसी बीच Meta, TikTok, YouTube और Snapchat जैसी कंपनियां हजारों मुकदमों का सामना कर रही हैं। इन पर आरोप है कि उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इस तरह डिजाइन किए हैं, जो युवाओं के मानसिक और सामाजिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं।
विशेष रूप से Meta पर यह आरोप भी लग चुका है कि उसने सोशल मीडिया से बच्चों को होने वाले नुकसान से जुड़े मामलों में कानूनी सुरक्षा हासिल करने के लिए अमेरिकी सांसदों के बीच लॉबिंग की थी। हालांकि Meta का कहना है कि प्रस्तावित कानूनी भाषा मौजूदा मुकदमों को खत्म नहीं करेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह कानून पारित हो जाता है, तो अमेरिका में बच्चों की डिजिटल सुरक्षा को लेकर सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी पहले से कहीं अधिक बढ़ जाएगी।
दुनिया की प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिकाओं में शामिल Granta ने कॉमनवेल्थ शॉर्ट स्टोरी प्राइज की विजेता कहानियों को प्रकाशित करना बंद करने का फैसला किया है।
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दुनिया की प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिकाओं में शामिल Granta ने कॉमनवेल्थ शॉर्ट स्टोरी प्राइज की विजेता कहानियों को प्रकाशित करना बंद करने का फैसला किया है। यह निर्णय उस विवाद के बाद लिया गया है, जिसमें इस साल के एक विजेता लेखक पर अपनी कहानी लिखने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करने का आरोप लगा था।
Granta ने कहा है कि अब वह ऐसे बाहरी प्रकाशन साझेदारियों का हिस्सा नहीं बनेगी, जहां उसके पास संपादकीय नियंत्रण नहीं होता। हालांकि, पत्रिका ने यह भी स्पष्ट किया कि कॉमनवेल्थ प्राइज के लिए शॉर्टलिस्ट हुई कहानियां सार्वजनिक हित में उसकी वेबसाइट पर उपलब्ध रहेंगी।
विवाद की शुरुआत कैरेबियाई क्षेत्र की विजेता कहानी ‘The Serpent in the Grove’ से हुई, जिसे लेखक जमीर नजीर ने लिखा है। मई के मध्य में सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने दावा किया कि कहानी में ऐसे कई संकेत दिखाई देते हैं जो AI द्वारा लिखी गई सामग्री में आमतौर पर देखने को मिलते हैं।
आलोचकों ने कहानी की कुछ खास लेखन शैलियों और वाक्यों को उदाहरण के तौर पर पेश किया और कहा कि इनमें AI की छाप नजर आती है। हालांकि, लेखक जमीर नजीर ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया।
मई के आखिर में एक बयान में नजीर ने कहा कि उनकी लेखन प्रक्रिया सामान्य लेखकों से अलग है। उन्होंने बताया कि वह पूरी कहानी अपने एंड्रॉयड फोन पर लिखते हैं। स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण उनके लिए लंबे समय तक बैठकर टाइप करना मुश्किल है, इसलिए वे स्पीच-टू-टेक्स्ट तकनीक का इस्तेमाल करते हैं और बाद में बहुत कम संपादन करते हैं।
Granta की प्रकाशक सिग्रिड रॉसिंग ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह संभव है कि कहीं AI से जुड़ी साहित्यिक चोरी का मामला हो, लेकिन फिलहाल इसके पक्ष में कोई ठोस सबूत नहीं है।
वहीं, कॉमनवेल्थ फाउंडेशन के महानिदेशक रजमी फारूक ने स्पष्ट किया कि शॉर्टलिस्ट किए गए सभी लेखकों ने व्यक्तिगत रूप से पुष्टि की है कि उन्होंने अपनी रचनाओं में AI का इस्तेमाल नहीं किया है। फाउंडेशन ने अतिरिक्त जांच और बातचीत के बाद भी यही निष्कर्ष निकाला।
कॉमनवेल्थ शॉर्ट स्टोरी प्राइज के तहत कुल विजेता को 5,000 पाउंड और क्षेत्रीय विजेताओं को 2,500 पाउंड की पुरस्कार राशि दी जाती है। AI के बढ़ते इस्तेमाल के बीच यह विवाद साहित्य जगत में नई बहस छेड़ रहा है कि रचनात्मक लेखन में तकनीक की भूमिका क्या होनी चाहिए और इसकी निगरानी कैसे की जाए।
अमेरिका की मीडिया इंडस्ट्री में एक बड़ी हलचल देखने को मिली है, जहां Fox Corporation ने स्ट्रीमिंग क्षेत्र की अग्रणी कंपनी Roku को 22 अरब डॉलर की नकद और शेयरों की डील में खरीदने पर सहमति जताई है।
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अमेरिका की मीडिया इंडस्ट्री में एक बड़ी हलचल देखने को मिली है, जहां Fox Corporation ने स्ट्रीमिंग क्षेत्र की अग्रणी कंपनी Roku को 22 अरब डॉलर की नकद और शेयरों की डील में खरीदने पर सहमति जताई है। इस सौदे के तहत Roku के शेयरों का मूल्य 160 डॉलर प्रति शेयर तय किया गया है। इस डील के बाद बनने वाली नई इकाई अमेरिका में टीवी व्युअरशिप के लिहाज से तीसरी सबसे बड़ी कंपनी बन जाएगी।
इस समझौते के बाद Fox के पास मौजूद स्पोर्ट्स, न्यूज और एंटरटेनमेंट कंटेंट के साथ-साथ उसकी ऐड-समर्थित स्ट्रीमिंग सर्विस Tubi और Roku के हार्डवेयर, स्मार्ट टीवी प्लेटफॉर्म और बढ़ते विज्ञापन बिजनेस का एक बड़ा इकोसिस्टम एक साथ आ जाएगा। हालांकि Roku अपना ओपन प्लेटफॉर्म बनाए रखेगा, यानी उस पर Netflix, Amazon Prime Video और YouTube जैसे ऐप्स पहले की तरह चलते रहेंगे।
इस डील के पीछे अमेरिकी मीडिया इंडस्ट्री में दो बड़े दबाव बताए जा रहे हैं। पहला, कंटेंट बनाने वाली कंपनियां अब यह नहीं चाहतीं कि वे किसी और के डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म पर निर्भर रहें और वहां पहुंच व डेटा के लिए “किराया” देती रहें। अब कंपनियां सीधे दर्शकों से रिश्ता बनाना चाहती हैं ताकि विज्ञापन और डेटा दोनों पर उनका नियंत्रण रहे।
दूसरा बड़ा कारण पारंपरिक टीवी यानी लाइनर टीवी का तेजी से गिरना है। इसके चलते ब्रॉडकास्ट कंपनियां अब स्ट्रीमिंग और कनेक्टेड टीवी (CTV) की ओर तेजी से शिफ्ट हो रही हैं, जहां लाइव स्पोर्ट्स, न्यूज और विज्ञापन का भविष्य देखा जा रहा है। Fox के लिए यह कदम उसकी रणनीति का हिस्सा है, जिसमें वह स्पोर्ट्स, न्यूज और लाइव इवेंट्स पर फोकस करते हुए घरों के टीवी स्क्रीन तक सीधे हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर के जरिए पहुंच बनाना चाहती है।
भारत में इसका एक सीधा उदाहरण Reliance Industries Limited और Disney Star के विलय से बना JioStar मॉडल माना जा सकता है, जहां कंटेंट और डिस्ट्रीब्यूशन दोनों एक ही छत के नीचे आ गए हैं। इसी तरह Viacom18 और JioCinema जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए Reliance ने कंटेंट, डेटा और एडवरटाइजिंग को एकीकृत करने की कोशिश की है।
इसके अलावा भारत में भी स्मार्ट टीवी और प्लेटफॉर्म इकोसिस्टम को कंट्रोल करने की दिशा में तेजी देखी गई है, जहां Tata Play और Jio के इंटीग्रेटेड स्मार्ट टीवी अनुभव जैसे मॉडल दर्शकों के पहले स्क्रीन यानी टीवी होम पेज पर पकड़ बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
कुल मिलाकर यह डील एक बड़े वैश्विक ट्रेंड का हिस्सा है, जहां मीडिया कंपनियां अब अलग-अलग स्ट्रीमिंग ऐप्स की बजाय एकीकृत इकोसिस्टम बना रही हैं, जिसमें कंटेंट, प्लेटफॉर्म, हार्डवेयर और विज्ञापन सब एक ही नियंत्रण में आ रहे हैं। इसी दिशा में Omnicom Group और Interpublic Group जैसे एडवरटाइजिंग दिग्गजों के विलय और Paramount Global तथा Warner Bros Discovery जैसी कंपनियों में चल रहे बदलाव भी इसी बड़ी मीडिया कंसोलिडेशन की ओर इशारा करते हैं।
आज के समय में मीडिया इंडस्ट्री में ताकत उन कंपनियों के हाथ में जा रही है जो कंटेंट के साथ-साथ प्लेटफॉर्म और डेटा दोनों को नियंत्रित कर रही हैं, जिससे विज्ञापन, पहुंच और दर्शक व्यवहार पर उनका असर और भी ज्यादा मजबूत हो रहा है।
दुनिया के बड़े अरबपतियों में शामिल Jeff Bezos ने ‘The Washington Post’ में हुई बड़ी छंटनी का बचाव किया है।
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दुनिया के बड़े अरबपतियों में शामिल Jeff Bezos ने ‘The Washington Post’ में हुई बड़ी छंटनी का बचाव किया है। उन्होंने कहा कि अखबार को लंबे समय तक टिके रहने के लिए आर्थिक रूप से मजबूत और पाठकों के लिए प्रासंगिक बने रहना जरूरी है, चाहे उनके पास कितनी भी निजी संपत्ति क्यों न हो।
CNBC को दिए इंटरव्यू में बेजोस से पूछा गया कि आखिर उन्होंने अपनी दौलत का इस्तेमाल अखबार को बचाने के लिए क्यों नहीं किया, जबकि हाल ही में ‘Washington Post’ में करीब 30 फीसदी एम्प्लॉयीज की छंटनी की गई है। इस पर बेजोस ने साफ कहा कि अखबार को अपने पैरों पर खड़ा होना चाहिए और खुद कमाई करने वाला संस्थान बनना जरूरी है।
उन्होंने कहा, “The Post को एक ऐसा बिजनेस बनना होगा जो अपने दम पर चल सके और मुनाफा कमा सके।”
बेजोस ने बताया कि उन्होंने मैनेजमेंट से कहा था कि छंटनी का फैसला डेटा और प्रदर्शन के आधार पर लिया जाए। हालांकि उन्होंने एक अहम अपवाद भी रखा। उन्होंने कहा कि खोजी पत्रकारिता यानी Investigative Reporting के मामले में सिर्फ डेटा को आधार नहीं बनाया जाना चाहिए।
बेजोस के मुताबिक, खोजी पत्रकारिता ही ‘Washington Post’ की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि छंटनी के बाद भी अखबार का न्यूजरूम उतना छोटा नहीं हुआ है जितना लोग मान रहे हैं।
उन्होंने कहा, “आज छंटनी के बाद भी हमारा न्यूजरूम उतना बड़ा है, जितना Watergate और Pentagon Papers के दौर से भी बड़ा था।”
बेजोस का मानना है कि आर्थिक अनुशासन अखबार को और मजबूत बनाएगा और भविष्य में उसकी प्रासंगिकता बनाए रखने में मदद करेगा। उन्होंने हाल ही में ‘Washington Post’ को ट्रंप प्रशासन से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए मिले Pulitzer Prize का भी जिक्र किया और कहा कि अखबार अब भी असरदार पत्रकारिता कर रहा है।
जब उनसे पूछा गया कि क्या वह अब भी अखबार का मालिक बने रहना चाहते हैं, जबकि उनके दूसरे बिजनेस हितों के कारण हितों के टकराव की आशंका रहती है, तो बेजोस ने साफ कहा कि वह अखबार के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।
उन्होंने याद दिलाया कि जब उन्होंने 2013 में ‘Washington Post’ खरीदा था, तब यह घाटे में चल रहा था और न्यूजरूम भी काफी छोटा था। बाद में अखबार को दो साल में मुनाफे में लाया गया और फिर उस कमाई को संपादकीय टीम को मजबूत करने में लगाया गया।
बेजोस ने कहा, “अब हमने न्यूजरूम को थोड़ा छोटा जरूर किया है, लेकिन यह उतना छोटा नहीं हुआ है जितना उस समय था जब मैंने इसे खरीदा था।”
ब्रिटेन के चर्चित रियलिटी शो ‘Married at First Sight UK’ एक बड़े विवाद में घिर गया है। शो में हिस्सा लेने वाली कुछ महिला प्रतिभागियों ने रेप और यौन शोषण जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।
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ब्रिटेन के चर्चित रियलिटी शो ‘Married at First Sight UK’ एक बड़े विवाद में घिर गया है। शो में हिस्सा लेने वाली कुछ महिला प्रतिभागियों ने रेप और यौन शोषण जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। अब इस मामले पर Channel 4 की चीफ एग्जिक्यूटिव प्रिया डोगरा ने पहली बार खुलकर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने महिलाओं की पीड़ा पर दुख जताते हुए कहा कि वह “गहराई से माफी” मांगती हैं।
हालांकि प्रिया डोगरा ने यह भी कहा कि चैनल ने उस समय शिकायतों को सही तरीके से संभाला था, लेकिन अब पूरे मामले की दोबारा जांच के लिए बाहरी रिव्यू शुरू कराया गया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि शो प्रतिभागियों के लिए सुरक्षित है।
दरअसल, ‘Married at First Sight UK’ में एक्सपर्ट्स सिंगल लोगों की जोड़ी बनाते हैं और उन्हें शादी करवाते हैं। शो में कपल्स पहली बार अपनी शादी के दिन मिलते हैं। यह शो ब्रिटेन में काफी लोकप्रिय है।
मामला तब गरमा गया जब BBC के चर्चित कार्यक्रम ‘Panorama’ में दो महिलाओं ने आरोप लगाया कि शो में उनके ऑन-स्क्रीन पति ने उनके साथ रेप किया। दोनों महिलाओं की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है। वहीं एक अन्य महिला प्रतिभागी शोना मेंडरसन ने आरोप लगाया कि उनके ऑन-स्क्रीन पति ने उनकी सहमति के बिना सेक्सुअल एक्ट किया। हालांकि जिन पुरुषों पर आरोप लगे हैं, उन्होंने सभी आरोपों से इनकार किया है।
BBC की रिपोर्ट के बाद कई पूर्व प्रतिभागियों ने भी शो को लेकर अपनी चिंताएं जताई हैं। वहीं लंदन की मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने भी लोगों से आगे आकर शिकायत करने की अपील की है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे हर शिकायत सुनने और जांच करने के लिए तैयार हैं।
बताया जा रहा है कि पुलिस पहले से ही Channel 4 और शो बनाने वाली प्रोडक्शन कंपनी CPL Productions के संपर्क में है।
Channel 4 की वार्षिक रिपोर्ट के दौरान प्रिया डोगरा ने कहा कि उन्होंने महिलाओं की बातें सुनी हैं और उनकी तकलीफ बेहद परेशान करने वाली है। उन्होंने कहा कि चैनल के लिए सभी कार्यक्रमों में प्रतिभागियों की सुरक्षा सबसे अहम है। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि चैनल खुद इन आरोपों की जांच नहीं कर सकता, क्योंकि यह काम पुलिस और दूसरी जांच एजेंसियों का है।
Channel 4 के चीफ कंटेंट ऑफिसर इयान कैट्ज ने भी कहा कि चैनल ने उस समय उपलब्ध जानकारी के आधार पर सही फैसले लिए थे और महिलाओं को जरूरी सहायता दी गई थी। लेकिन आरोप बेहद गंभीर हैं, इसलिए अब दोबारा समीक्षा करना जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसे शो और सुरक्षित बनाए जा सकें।
इस पूरे मामले ने ब्रिटेन में रियलिटी शोज की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। ब्रिटिश संसद की संस्कृति समिति के सांसदों ने भी Channel 4 और मीडिया रेगुलेटर Ofcom से जवाब मांगा है।
समिति की चेयरपर्सन कैरोलिन डिनेनाज ने कहा कि ‘Married at First Sight’ से जुड़े ये आरोप बेहद डराने वाले हैं और यह चिंता बढ़ाते हैं कि क्या रियलिटी शोज में प्रतिभागियों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त कदम उठाए जा रहे हैं या नहीं।
अमेरिका के मशहूर मीडिया कारोबारी टेड टर्नर का 87 साल की उम्र में निधन हो गया है। CNN नेटवर्क ने खुद इस खबर की पुष्टि की है।
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अमेरिका के मशहूर मीडिया कारोबारी टेड टर्नर का 87 साल की उम्र में निधन हो गया है। CNN नेटवर्क ने खुद इस खबर की पुष्टि की है। टर्नर वही शख्स थे जिन्होंने दुनिया को 24 घंटे चलने वाले न्यूज चैनल का कॉन्सेप्ट दिया और मीडिया इंडस्ट्री को पूरी तरह बदलकर रख दिया।
टेड टर्नर ने साल 1980 में CNN (केबल न्यूज नेटवर्क) की शुरुआत की थी। यह दुनिया का पहला ऐसा चैनल था जो 24 घंटे लगातार खबरें दिखाता था। उस समय कई लोगों को यह आइडिया अजीब लगा और चैनल का मजाक भी उड़ाया गया, लेकिन धीरे-धीरे CNN दुनिया का सबसे भरोसेमंद न्यूज प्लेटफॉर्म बन गया।
CNN ने कई बड़े घटनाक्रमों की लाइव और लगातार कवरेज करके अपनी पहचान बनाई। 1981 में अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन पर हमले की खबर हो या 1986 का चैलेंजर स्पेस शटल हादसा- CNN ने तेज और लगातार अपडेट देकर खुद को साबित किया। इसके बाद 1990-91 के गल्फ वॉर की लाइव कवरेज ने चैनल को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टेड टर्नर को श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें ब्रॉडकास्ट इतिहास के सबसे बड़े नामों में से एक बताया और कहा कि वे उनके अच्छे दोस्त भी थे। वहीं CNN के मौजूदा चेयरमैन और CEO मार्क थॉम्पसन ने कहा कि टर्नर वह शख्स थे जिनके कंधों पर खड़े होकर आज CNN आगे बढ़ रहा है।
टर्नर सिर्फ CNN तक ही सीमित नहीं थे। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अपने परिवार के बिजनेस से की थी और बाद में एक रेडियो स्टेशन खरीदा। यही आगे चलकर Turner Broadcasting System (TBS) बना, जिसने उन्हें अमेरिका के बड़े मीडिया टायकून में शामिल कर दिया।
अपनी अलग और बेबाक पर्सनैलिटी के लिए भी टर्नर काफी मशहूर थे। उन्हें “माउथ ऑफ द साउथ” और “कैप्टन आउटरेजियस” जैसे नामों से भी जाना जाता था। कहा जाता है कि वे कई सालों तक CNN के ऑफिस में ही रहते थे और सीधे न्यूजरूम में जाकर बहस करते थे।
मीडिया के अलावा भी टर्नर कई क्षेत्रों में सक्रिय रहे। वे एक बेहतरीन नाविक थे और 1977 में अमेरिका कप जीत चुके थे। उन्होंने कई स्पोर्ट्स टीम्स के मालिकाना हक भी रखे, जिनमें अटलांटा ब्रेव्स (बेसबॉल) और अटलांटा हॉक्स (बास्केटबॉल) शामिल हैं।
टर्नर एक बड़े समाजसेवी भी थे। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र को 1 बिलियन डॉलर (करीब 8,000 करोड़ रुपये) दान दिए और पर्यावरण से जुड़े कई कामों में योगदान दिया।
टेड टर्नर की निजी जिंदगी भी चर्चा में रही। उनकी शादी मशहूर अभिनेत्री जेन फोंडा से हुई थी, जो 2001 तक चली। साल 2018 में उन्होंने बताया था कि उन्हें लेवी बॉडी डिमेंशिया नाम की बीमारी है।
टेड टर्नर का जाना मीडिया इंडस्ट्री के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है। उन्होंने जिस 24 घंटे के न्यूज मॉडल की शुरुआत की थी, वही आज दुनिया भर के न्यूज चैनलों की पहचान बन चुका है।
अमेरिका की मीडिया इंडस्ट्री में एक बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी (Warner Bros. Discovery) के शेयरहोल्डर्स ने कंपनी को बेचने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
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Samachar4media Bureau
अमेरिका की मीडिया इंडस्ट्री में एक बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी (Warner Bros. Discovery) के शेयरहोल्डर्स ने कंपनी को बेचने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसके बाद अब Paramount Global करीब 110 अरब डॉलर (एंटरप्राइज वैल्यू) की बड़ी डील के जरिए WBD को खरीदने की दिशा में आगे बढ़ गया है।
डील के मुताबिक, Paramount WBD के सभी शेयर 31 डॉलर प्रति शेयर के हिसाब से खरीदेगा। इस सौदे में कंपनी की इक्विटी वैल्यू करीब 81 अरब डॉलर आंकी गई है। अगर यह डील पूरी हो जाती है, तो Paramount के पास Warner Bros की बड़ी-बड़ी फ्रेंचाइजी जैसे Harry Potter और Game of Thrones का कंट्रोल आ जाएगा। साथ ही HBO Max और न्यूज़ नेटवर्क CNN भी इसी के दायरे में आ जाएंगे।
कंपनी के CEO David Zaslav ने कहा कि शेयरहोल्डर्स की मंजूरी इस ऐतिहासिक डील को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। वहीं Paramount का कहना है कि आने वाले महीनों में डील को फाइनल करने की उम्मीद है, जिससे एक नई तरह की बड़ी मीडिया कंपनी बनाई जा सकेगी।
हालांकि, यह सौदा अभी पूरी तरह से पक्का नहीं हुआ है। इसे अमेरिका के न्याय विभाग और यूरोप के रेगुलेटर्स से मंजूरी मिलना बाकी है। वहीं, कई एक्सपर्ट्स और इंडस्ट्री के लोग इस डील का विरोध भी कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे मीडिया इंडस्ट्री कुछ बड़ी कंपनियों के हाथ में सिमट जाएगी।
कैसे शुरू हुआ पूरा मामला?
यह डील इतनी आसान नहीं रही। पिछले साल के आखिर में Netflix भी Warner Bros के साथ करीब 72 अरब डॉलर की डील करने की कोशिश में था। लेकिन Paramount ने इससे ज्यादा कीमत की पेशकश कर दी और सीधे शेयरहोल्डर्स के पास पहुंच गया। इसके बाद कई महीनों तक दोनों कंपनियों के बीच टक्कर चली, लेकिन आखिर में Paramount बाजी मार ले गया और Netflix पीछे हट गया।
डील के क्या होंगे असर?
अगर यह सौदा पूरा हो जाता है, तो हॉलीवुड के दो बड़े स्टूडियो एक ही छत के नीचे आ जाएंगे। साथ ही Paramount और HBO Max जैसे बड़े स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म भी एक साथ आ सकते हैं। इसके अलावा अमेरिका के दो बड़े न्यूज नेटवर्क- CBS और CNN भी एक ही ग्रुप का हिस्सा बन जाएंगे।
लेकिन इस डील को लेकर इंडस्ट्री के कई कलाकार, डायरेक्टर्स और राइटर्स खुश नहीं हैं। उनका कहना है कि इससे नौकरियां जा सकती हैं और कंटेंट में विविधता कम हो सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी में कुछ जगहों पर छंटनी और बदलाव भी हो सकते हैं।
वहीं, कंपनियों का दावा है कि इससे यूजर्स को ज्यादा कंटेंट और बेहतर सर्विस मिलेगी। लेकिन आलोचकों को डर है कि आगे चलकर स्ट्रीमिंग की कीमतें बढ़ सकती हैं और कंटेंट के विकल्प कम हो सकते हैं।
कुल मिलाकर, यह डील अगर पूरी होती है, तो अमेरिकी मीडिया इंडस्ट्री की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है।
BBC ने वित्तीय दबाव के चलते लगभग 2000 कर्मचारियों की छंटनी की योजना बनाई है। यह 15 साल में सबसे बड़ा restructuring कदम है, जिससे कंपनी 500 मिलियन पाउंड की बचत करना चाहती है।
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Samachar4media Bureau
ब्रिटेन के पब्लिक ब्रॉडकास्टर BBC ने वित्तीय दबाव के चलते अपने वर्कफोर्स में बड़े पैमाने पर कटौती करने का फैसला किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब 1,800 से 2,000 कर्मचारियों की नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं, जो पिछले 15 वर्षों में सबसे बड़ी छंटनी मानी जा रही है।
यह फैसला BBC के बढ़ते खर्च और घटती आय के बीच लिया गया है। अंतरिम डायरेक्टर जनरल रोड्री टैल्फन डेविस ने कर्मचारियों को बताया कि कंपनी को अगले दो वर्षों में लगभग 500 मिलियन पाउंड की बचत करनी है।
उन्होंने संकेत दिया कि केवल कर्मचारियों की संख्या ही नहीं, बल्कि कुछ चैनल या सेवाएं भी बंद की जा सकती हैं। डेविस ने कहा कि उत्पादन लागत में वृद्धि, लाइसेंस फीस और कमर्शियल इनकम पर दबाव, और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता जैसे कारण इस स्थिति के लिए जिम्मेदार हैं।
BBC अब भर्ती, यात्रा, कंसल्टेंसी और इवेंट्स जैसे खर्चों में भी कटौती करेगा। इस बीच, ब्रॉडकास्टिंग यूनियन Bectu की प्रमुख फिलिपा चाइल्ड्स ने इस फैसले को कर्मचारियों के लिए “विनाशकारी” बताया है। यह बदलाव ऐसे समय में हो रहा है जब मई में पूर्व Google एग्जीक्यूटिव मैट ब्रिटिन BBC की कमान संभालने वाले हैं।