होम / इंडस्ट्री ब्रीफिंग / रेवेन्यू के मामले में कुछ इस तरह रहा टीवी न्यूज कंपनियों का प्रदर्शन...
रेवेन्यू के मामले में कुछ इस तरह रहा टीवी न्यूज कंपनियों का प्रदर्शन...
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 31 मार्च को समाप्त हो रहे चालू वित्तीय वर्ष (current financial year) के नजदीक आते ही विभिन्न सूचीबद्ध (listed) कंपनियां अपने वार्षिक परिणामों को दर्शाना शुरू कर देंगी। ऐसे में यदि हम सूचीबद्ध टेलिविजन न
समाचार4मीडिया ब्यूरो 8 years ago
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
31 मार्च को समाप्त हो रहे चालू वित्तीय वर्ष (current financial year) के नजदीक आते ही विभिन्न सूचीबद्ध (listed) कंपनियां अपने वार्षिक परिणामों को दर्शाना शुरू कर देंगी। ऐसे में यदि हम सूचीबद्ध टेलिविजन न्यूज कंपनियों के साल भर के वित्तीय परिणामों पर एक नजर डालें तो पता चलता है कि इनमें से अधिकांश के परिणामों में गिरावट आई है। ये तथ्य सिर्फ वित्तीय वर्ष 2017 के शुरुआती नौ महीने (April-December) के बीच इन कंपनियों के प्रदर्शन के आधार पर दर्शाए गए हैं और आखिरी तिमाही के नतीजे आने के बाद इनमें काफी अंतर हो सकता है।
सबसे पहले यदि हम ‘एनडीटीवी’ की बात करें तो 31 दिसंबर 2016 तक तीनों तिमाहियों (Q1, Q2 and Q3) के दौरान विभिन्न ऑपरेशंस के द्वारा इसकी कुल आय 368.32 करोड़ रुपये रही है। जबकि पिछले वित्तीय वर्ष में इसी अवधि के दौरान एनडीटीवी ने कुल 396.03 करोड़ रुपये की इनकम की थी। ऐसे में यदि दोनों वित्तीय वर्ष की तुलना करें तो पता चलता है कि इस वित्तीय वर्ष में इसमें 27.71 करोड़ रुपये यानी 6.99 प्रतिशत की कमी आई है।
इसमें अगला नंबर ‘जी मीडिया कॉरपोरेशन लिमिटेड’ (ZMCL) का है। इस नेटवर्क के पास 11 न्यूज चैनल हैं। 31 दिसंबर 2016 तक इस नेटवर्क के रिकॉर्ड की बात करें तो इसकी कुल आय में 16.47 करोड़ रुपये की कमी आई है। पिछले वित्तीय वर्ष में अप्रैल से दिसंबर के बीच के मुकाबले चालू वित्तीय वर्ष में इसी अवधि के दौरान नेटवर्क की इनकम में चार प्रतिशत की कमी देखने को मिली है। पहले जहां यह 406.79 थी जो इस वित्तीय वर्ष में फिसलकर 390.32 करोड़ रुपये रह गई।
बड़ी कंपनियों के प्रदर्शन में गिरावट के बारे में ‘हैप्पिनेस इनफाइनाइट सॉल्यूशंस’ (Happiness Infinite Solutions) के सीईओ ज्वलंत स्वरूप ने कहा, ‘इस दौरान मार्केट काफी अस्थिर रहा, खासकर नोटबंदी (demonetisation.) के बाद।’ उनका कहना है कि तीसरी तिमाही के परिणाम नोटबंदी के प्रभाव के अगले माह ही आ गए ऐसे में इनमें गिरावट होना लाजिमी है, क्योंकि इस दौरान विज्ञापन में भी काफी कमी आ गई थी।
दीपावली पर फेस्टिव सीजन के दौरान ब्रॉडकास्टर्स को काफी विज्ञापन मिले थे लेकिन वह नवंबर में गायब हो गए। इस वजह से भी इस तिमाही के परिणाम ज्यादा बेहतर नहीं रहे। स्वरूप ने एक कारण यह भी बताया कि डिजिटल के आने के बाद से टेलिविजन को ज्यादा पैसा नहीं मिला। ऐसे में टीवी और प्रिंट एडवर्टाइजिंग के लिए यह तिमाही ज्यादा बेहतर नहीं रहा।
‘सकाल ग्रुप’ के पूर्व सीईओ ज्वलंत स्वरूप ने इस बात पर भी जोर दिया कि टेलिविजन न्यूज भी कई स्थानों पर बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाई। उन्होंने कहा, ‘प्रोग्रामिंग में जिस तरह की नई चीजों की जरूरत थी, वह ज्यादा नहीं हो पाईं।’ हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इसके विपरीत ‘हॉट स्टार’ जैसे डिजिटल प्लेयर ने पिछले वर्ष की तुलना में अच्छे नतीजे दिए।
‘नेटवर्क 18 ग्रुप’ की दो कंपनियों का भी यही हाल रहा। चालू वित्तीय वर्ष में ‘टीवी18 ब्रॉडकास्ट लिमिटेड’ की कुल आय में 47.9 करोड़ रुपये की कमी आई। अप्रैल से दिसंबर 2015 के बीच कंपनी को 748.4 करोड़ रुपये की इनकम हुई। अप्रैल से दिसंबर 2016 की अवधि के दौरान 6.4 प्रतिशत गिरावट के साथ यह राशि सिर्फ 700 करोड़ रुपये रह गई।
जहां तक ‘नेटवर्क18 मीडिया एंड इन्वेटमेंट लिमिटेड’ कंपनी की बात है तो इसकी कुल इनकम 1179.14 रुपये से घटकर 1103.36 करोड़ रुपये रह गई। यदि नौ महीने के तुलनात्मक अध्ययन की बात करें तो पिछले वित्तीय वर्ष के मुकाबले इस बार इसकी इनकम में 6.4 प्रतिशत यानी 75.78 करोड़ रुपये की कमी हो गई।
लेकिन ‘टीवी टुडे नेटवर्क लिमिटेड’ द्वारा फरवरी की शुरुआत में जारी किए गए परिणाम इन सबसे अलग रहे। टीवी टुडे द्वारा जारी तीन तिमाहियों के परिणामों के अनुसार कंपनी की कुल इनकम 408.03 करोड़ रुपये हो गई। जो 31 दिसंबर 2015 को 400.19 करोड़ रुपये थी। इस प्रकार इसकी कुल इनकम में 7.84 करोड़ रुपये का इजाफा देखने को मिला।
इस बारे में दूरदर्शन और ऑलइंडिया रेडियो की पूर्व डायरेक्टर जनरल अर्चना दत्ता ने माना कि यह सेक्टर हमेशा परेशानियों से जूझता रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रसार भारती को भी न्यूज बिजनेस में आने पर कॉमर्शियल की तरफ से काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा, ‘स्टॉक मार्केट पर कराए गए प्रोग्राम के लिए हमें स्पॉन्सर भी मिल गए थे लेकिन अन्य के लिए हमें स्ट्रगल करना पड़ा।’ उन्होंने कहा कि स्पॉन्सर्ड कंटेंट पर काम करने के बावजूद स्टेट ब्रॉडकास्टर को एडवर्टाइजर्स के साथ सीमित सफलता हासिल हुई।
उन्होंने कहा कि हार्ड न्यूज को तथ्यों के आधार पर (factually) प्रसारित करने के बावजूद यह उतनी ज्यादा नहीं बिकी। हालांकि जब इसमें कुछ ओपिनियंस (opinions) डाले गए तो इसने आर्थिक रूप से काफी अच्छा काम किया।
हालांकि रेवेन्यू ग्रोथ और प्रॉफिट को लेकर पूरी स्थिति तब ही साफ होगी जब वार्षिक नतीजे जारी किए जाएंगे। लेकिन तीसरी तिमाही तक के आंकड़ों से साफ है कि कई टेलिविजन न्यूज कंपनियों के प्रदर्शन में काफी गिरावट आई है। चौथी तिमाही के दौरान इन कंपनियों के रेवेन्यू में बढ़ोतरी हो सकती है। लेकिन मीडिया बायर अरुण शर्मा का कहना था कि यह सब अप्रत्याशित था और किसी को इसकी संभावना नहीं थी। उनका कहना था कि पिछले छह महीने काफी खराब रहे हैं और नोटबंदी इसके पीछे काफी बड़ा कारण रहा।
इसके साथ ही उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि मार्केट अब रफ्तार पकड़ रहा है। उन्होंने कहा कि इंडियन प्रीमियर लीग के स्पॉन्सरशिप अधिकार और महंगे विज्ञापन स्लॉट के कारण अच्छे संकेत मिल रहे हैं और अप्रैल से जून के बीच सामान्य स्थिति बहाल हो जाएगी। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे हम नए वित्तीय वर्ष में प्रवेश करेंगे, विभिन्न न्यूज ब्रॉडकास्टिंग द्वारा आर्थिक सुधारों की दिशा में उठाए गए कदमों का असर दिखने लगेगा।
उदाहरण के लिए- न्यूज एकत्रित करने के लिए महंगे ब्रॉडकास्ट कैमरों के स्थान पर एनडीटीवी अब मोबाइल फोन के इस्तेमाल का विकल्प अपना रहा है। इसके साथ ही वे चैनल स्पॉन्सर डील की दिशा में काम कर रहे हैं।
ZMCL की बात करें तो नोटबंदी के बावजूद उनके टेलिविजन बिजनेस ने अच्छा ऐडवर्टाइजिंग रेवेन्यू हासिल किया है। ऐसे में अब उन्हें अपने गिरते सबस्क्रिप्शन रेवेन्यू को बढ़ाने की दिशा में काम करना होगा और यह काफी चुनौतीपूर्ण होगा। हालांकि 31 दिसंबर 2016 तक इसमें 50.3 प्रतिशत का इजाफा हुआ है।
ZMCL के नए चैनल जैसे ‘WION’, ‘Zee Kalinga News’, ‘Zee Purvaiya’ और ‘Zee Rajasthan News’ एक बार मार्केट में अपनी पकड़ बना लेते हैं तो कंपनी का सबस्क्रिप्श रेवेन्यू वापस आने की उम्मीद है। पिछले कैलेंडर वर्ष की समाप्ति तक इन चैनलों ने अपने सबस्क्रिप्शन रेवेन्यू अकाउंट्स नहीं खोले थे।
‘पिच मैडिसन ऐडवर्टाइजिंग रिपोर्ट’ (PMAR) – 2017 में संभावना जताई गई है कि चालू वर्ष में टेलिविजन ऐडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री में 13 प्रतिशत तक का इजाफा होगा। न्यूज ब्रॉडकास्टर्स के पास इसके पीछे एक कारण भी है। अनुमान है कि 2017 की समाप्ति तक टेलिविजन ऐडवर्टाइजिंग का कारोबार 21296 करोड़ रुपये हो जाएगा। पूर्व में न्यूज ब्रॉडकास्टर्स को ऐडवर्टाइजिंग के क्षेत्र में 10 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ोतरी मिली है। यदि इस साल भी यही ट्रेंड चलता रहा तो नोटबंदी के बाद यह चैनलों को आगे बढ़ने में मदद करेगा। माना जा रहा है कि फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स (FMCG) ब्रैंड्स जैसे पतंजलि अपने विज्ञापन खर्च पर काफी ज्यादा खर्च करेंगे।
टैग्स