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युवा पत्रकार विष्णु पांडेय, तुम बेहतरीन थे...हमेशा याद आओगे...
युवा पत्रकार विष्णु पांडेय, तुम बेहतरीन थे...हमेशा याद आओगे...
मैं साल 2007 में हिन्दी में पत्रकारिता करने जब आईआईएमसी जेएनयू कैंपस पहुचा तब स्मार्ट लड़के-लड़कियों से भरी अंग्रेजी पत्रकारिता की क्लास में देशी हाव-भाव वाला एक लड़का विष्णु पांडे मिला। वो कर तो रहा था अंग्रेजी पत्रकारिता लेकिन मन से वह हिन्दी पत्रकारिता का ही छात्र था। हिन्दी और अंग्रेजी में कमाल की भाषायी पकड़ के साथ मुहंफट लफ्फाजी के साथ तेज टोन मे
समाचार4मीडिया ब्यूरो
9 years ago
मैं साल 2007 में हिन्दी में पत्रकारिता करने जब आईआईएमसी जेएनयू कैंपस पहुचा तब स्मार्ट लड़के-लड़कियों से भरी अंग्रेजी पत्रकारिता की क्लास में देशी हाव-भाव वाला एक लड़का विष्णु पांडे मिला। वो कर तो रहा था अंग्रेजी पत्रकारिता लेकिन मन से वह हिन्दी पत्रकारिता का ही छात्र था। हिन्दी और अंग्रेजी में कमाल की भाषायी पकड़ के साथ मुहंफट लफ्फाजी के साथ तेज टोन में बोलना उसके व्यक्तित्व का एक विशेष सौंदर्य था।
आईआईएमसी में पढ़ाई खत्म होने के बाद मैं और विष्णु दोनों ही बिजनेस स्टैडंर्ड मे बतौर ट्रेनी पत्रकार काम करने गये। विष्णु को कानपुर का ब्यूरो बनाया गया और मैं दिल्ली में ही रहा। कानपुर से विष्णु जर्बदस्त बिजनेस रिपोटिंग करता था। मुझे अच्छे से याद है विष्णु द्वारा भेजी जाने वाली खबरों को लगाने के लिए हिन्दी बिजनेस स्टैडंर्ड की डेस्क टीम कई बार डेडलाइन तक इंतजार करती थीं। एक समय तो ऐसा भी था जब हिन्दी बिजनेस स्टैडंर्ड हिन्दी के फ्रंट पेज में छपना विष्णु के लिए आम बात थी।
अंग्रेजी एडिशन में भी विष्णु का ऐसा ही जलवा बरकरार था। विष्णु कानपुर से रोजाना मुझे फोन मिलाता था। कई बार हमारी बातों का सिलसिला घंटे-दो घंटे तक चलता था। उन बातों में राजनीति, बिजनेस, साहित्य से लेकर दुनियादारी के हर पहलू पर हम बात करते थे। दिल्ली आने पर विष्णु मेरे ही कमरे में रूकता था और पूरी रात बकैती करता रहता था। करीब चार साल तक मैं और विष्णु लगातार टच में रहे। फिर जब मैंने सिविल सर्विस की तैयारी करने का निर्णय लिया तो विष्णु से संपर्क कम हो गया। इस बीच में विष्णु ने बिजनेस स्टैडंर्ड को छोड़कर दिल्ली मे इकोनामिक टाइम्स के अंग्रेजी एडिशन को ज्वाइन कर लिया ।
दोनों अपनी-अपनी जिदंगी में व्यस्त हो गये। मैं यह बात मानता हूं कि विष्णु ईश्वर से जुड़ने का मेरा और तुम्हारा तरीका बहुत अलग-अलग था, शायद मैं तुम्हारे तरीके को पंसद भी नहीं करता था मित्र। क्योंकि मैं उसे काफी कर्मकांड आधारित मानता था फिर भी मैं मानता हूँ कि अध्यात्म पर हुई हमारी वार्तालाप ने मुझे सोचने का एक नया नजरिया दिया और मेरे आध्यात्मिक साक्षात्कार में तुमने एक अहम भूमिका निभायी। दोस्त तुम्हारे द्वारा भेट स्वरूप दी गयी भगवत गीता आज भी मेरा मार्गदर्शन करती है और आगे भी करती रहेगी।
मित्र आज तुम इस दुनिया से चले गये हो, मेरे पास कुछ कहने को नहीं बचा है, बस तुम्हारे साथ बिताये गये समय की बातें और यादें शेष है जो आंखों से बार-बार गुजरती है। तुम्हारी लफ्फाजी में हंसने की आवाज कानों में गूंजती है। विष्णु तुमको एक बात बताता हूँ, मित्र आईआईएमसी 2007-2008 कें पूरे बैच में, चाहे वह किसी भी डिपार्टमेंट का हो तुमसे बेहतर कोई न था, तुम्हारी भाषायी पकड, न्यूज सेंस, विश्लेषणात्मक क्षमता और मिट्ठी से जुड़ा व्यक्तित्व तुमको सबसे बेहतरीन बनाता था। लेकिन तुमने अपनी इन संभावनाओं को कभी भी निखारने का प्रयास नही किया।
तुम्हारे भौतिक जीवन का अंत इस तरह आकस्मिक होगा ये मैनें कभी सोचा नहीं था। अंत में बस यही कहना चाहता हूँ कि अपने जीवन के वे पल जो एक मित्र के तौर पर तुमने मेरे साथ बिताये, वे पल सदैव मेरे लिए यादगार रहेंगे। श्रदासुमन अर्पित करते हुए बस यही ईश्वर से प्रार्थना है कि तुम्हारी आत्मा को शांति मिले और प्रेम मिले।
तुम्हारा दोस्त
कपिल शर्मा
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