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विज्ञापन जगत में 40 साल: संदीप गोयल ने बताया कैसे बदल गई ऐडवर्टाइजिंग की दुनिया
विज्ञापन की दुनिया में जब संदीप गोयल बात करते हैं, तो उनकी बातों में एक अलग ही सहजता नजर आती है। यह सहजता चार दशकों के अनुभव से आती है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 1 hour ago
विज्ञापन की दुनिया में जब संदीप गोयल बात करते हैं, तो उनकी बातों में एक अलग ही सहजता नजर आती है। यह सहजता चार दशकों के अनुभव से आती है। वे भारी-भरकम इंडस्ट्री शब्दों का इस्तेमाल नहीं करते और अपनी राय खुलकर रखते हैं।
10 मार्च 2026 को संदीप गोयल ने विज्ञापन जगत में 40 साल पूरे कर लिए। यह ऐसा मुकाम है जो उन्हें भारत के सबसे लंबे समय तक काम करने वाले ऐडवर्टाइजिंग प्रोफेशनल्स में शामिल करता है।
अपने करियर में उन्होंने कई अहम भूमिकाएं निभाईं। कभी वह HTA (आज का Wunderman Thompson) में तेज-तर्रार अकाउंट मैनेजर रहे, तो कभी Rediffusion में प्रेजिडेंट बनकर एयरटेल जैसे ब्रैंड को शुरुआत से खड़ा करने में मदद की। बाद में उन्होंने Dentsu को भारत लाने में भी अहम भूमिका निभाई और इसे करीब ₹1,200 करोड़ के कारोबार तक पहुंचाया। आज वह उस एजेंसी के मालिक हैं, जिसका नाम भारतीय विज्ञापन इतिहास में बेहद प्रतिष्ठित माना जाता है- Rediffusion।
लेकिन उनसे आमने-सामने बात करने पर ऐसा नहीं लगता कि वह अपने करियर का बखान कर रहे हैं। वह ज्यादा दिलचस्प तरीके से यह बताते हैं कि विज्ञापन की दुनिया पहले कैसी थी, अब क्या हो गई है और क्या इसे फिर से पहले जैसा बनाया जा सकता है।
अमृतसर से HTA तक का सफर
साल 1986, संदीप गोयल ने पंजाब यूनिवर्सिटी से अंग्रेजी साहित्य में गोल्ड मेडल हासिल किया था और FMS दिल्ली से MBA किया था। उस समय वह Goodlass Nerolac Paints में काम कर रहे थे और पेंट डीलर्स से मिलकर बिक्री बढ़ाने का काम करते थे। उनकी उम्र उस समय 23 साल थी।
वे बताते हैं, “मैं समझ गया था कि डीलर्स के साथ जाकर पेंट बेचना मुझे लंबे समय तक अच्छा नहीं लगेगा। मजा आता था, लेकिन उसमें करियर नहीं दिखता था। इसलिए मैंने तय किया कि विज्ञापन में जाना चाहिए। अंग्रेजी साहित्य पढ़ने की वजह से मेरा झुकाव रचनात्मक चीजों की ओर था और मुझे लगा कि विज्ञापन ज्यादा मजेदार होगा।”
इसके बाद उन्होंने Hindustan Thompson Associates (HTA) में अकाउंट एग्जिक्यूटिव के तौर पर काम शुरू किया। उस समय विज्ञापन की दुनिया अलग थी, पैसा भी था, टैलेंट भी था और एक तरह का बौद्धिक माहौल भी।
गोयल कहते हैं, “उस समय हम बहुत जल्दी आगे बढ़ जाते थे। सच कहूं तो इतनी कम उम्र में यह पता नहीं होता कि करियर किस दिशा में जाएगा। मैंने बस इसलिए विज्ञापन जॉइन किया क्योंकि यह ज्यादा मजेदार लगा और सेल्स से ज्यादा बौद्धिक काम लगा।”
Rediffusion और एयरटेल की कहानी
इसके बाद उनका करियर तेजी से आगे बढ़ा। उन्होंने Trikaya Grey में काम किया, फिर DDB Mudra की Interact Vision में भी रहे। साल 1994 में उन्होंने Rediffusion जॉइन की, जहां उन्हें न्यू बिजनेस हेड बनाया गया।
Rediffusion पहले से ही एक मशहूर एजेंसी थी। इसकी स्थापना Diwan Arun Nanda, Ajit Balakrishnan और Mohammed Khan ने 1973 में की थी। इस एजेंसी ने Lakme, Garden Vareli, Eveready जैसे कई ब्रैंड्स को मजबूत पहचान दी।
Rediffusion ने Maruti का लोगो डिजाइन किया और कांग्रेस पार्टी के लिए राजनीतिक कैंपेन भी बनाया था। गोयल जब यहां पहुंचे तो Airtel का अकाउंट भी एजेंसी के साथ जुड़ गया। इसके बाद एयरटेल को शून्य से मार्केट लीडर बनाने में Rediffusion ने बड़ी भूमिका निभाई।
साल 1997 में 35 साल की उम्र में गोयल को Rediffusion का प्रेजिडेंट बना दिया गया। इसके बाद एजेंसी के पास Colgate, Citibank, Tata और Taj Hotels जैसे बड़े क्लाइंट भी आए और कंपनी भारत की टॉप तीन एजेंसियों में पहुंच गई।
Zee से Dentsu और फिर नई शुरुआत
साल 2001 में गोयल Zee Telefilms के ग्रुप CEO बने। उस समय Zee के 32 टीवी चैनल थे और वे 100 से ज्यादा देशों में देखे जाते थे। इसके बाद 2003 में उन्होंने जापान की कंपनी Dentsu को भारत लाने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने इसे शून्य से शुरू करके ₹1,200 करोड़ के कारोबार तक पहुंचाया।
साल 2011 के बाद संदीप गोयल के करियर का एक नया दौर शुरू हुआ। इस दौरान उन्होंने खुद को सिर्फ विज्ञापन तक सीमित नहीं रखा, बल्कि कई अलग-अलग क्षेत्रों में काम किया।
साल 2012 में उन्होंने FMS दिल्ली से PhD शुरू की, जिसे उन्होंने 2017 में पूरा किया। इसी दौरान उन्होंने Mogae Media को भी आगे बढ़ाया और डेटा इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म Zeotap के साथ भी जुड़े, जो आज दुनिया के कई देशों में बड़ी कंपनियों के साथ काम करता है। इसके अलावा उन्होंने Sync Media के साथ भी काम किया।
बाद में 2018 से 2021 तक वह Snap Inc. (Snapchat की पेरेंट कंपनी) में इंडिया हेड रहे। यहां उन्होंने भारत में प्लेटफॉर्म के लिए विज्ञापनदाताओं और मीडिया खरीदारों के साथ मजबूत रिश्ते बनाने पर काम किया।
इसी दौरान 2019 से 2023 तक उन्होंने पंजाब सरकार को ब्रैंड और कम्युनिकेशन सलाहकार के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं। इस भूमिका में उन्हें सरकारी स्तर पर बड़े पैमाने पर कम्युनिकेशन और ब्रैंडिंग के काम को करीब से देखने का मौका मिला।
2021 में Rediffusion की घर वापसी
साल 2021 में उनकी कंपनी Mogae Consultants ने Rediffusion और Everest एजेंसियों को खरीद लिया। इस तरह गोयल उसी एजेंसी में वापस लौटे, लेकिन इस बार मालिक के रूप में।
वे बताते हैं कि जब उन्होंने Rediffusion संभाली, तब कंपनी एक मुश्किल दौर से गुजर रही थी। बड़े क्लाइंट जा चुके थे और एजेंसी का मनोबल भी कमजोर था।
फिर भी उन्होंने इसे दोबारा खड़ा करने की शुरुआत की।
पिछले चार सालों में एजेंसी ने अपने कारोबार को दोबारा मजबूत करने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं। इस दौरान दिल्ली और बेंगलुरु में कंपनी के ऑफिस फिर से शुरू किए गए, जबकि चंडीगढ़ और कोलकाता में भी एजेंसी ने अपना विस्तार किया।
इसके साथ ही Rediffusion ने कई नए बड़े क्लाइंट भी जोड़े हैं। इनमें Taj Hotels, BMW, Dabur, Zydus, Shyam Steel, Tata Power और Nippon India Mutual Fund जैसे प्रमुख ब्रांड शामिल हैं।
AI और कंटेंट पर बड़ा दांव
आज गोयल का सबसे बड़ा फोकस AI और कंटेंट पर है। Rediffusion की Aesthetic Intelligence Lab (AIL) को अब RAIDS (Rediffusion AI Design Studios) के नाम से चलाया जा रहा है। इसके क्लाइंट्स में Tata Play, Tata Consumer Products, Danone, Wipro Consumer, HDFC Mutual Fund और Birla Opus शामिल हैं। साल 2025 में RAIDS ने 50 से ज्यादा क्लाइंट्स के साथ काम किया। गोयल अब इस बिजनेस में बाहरी निवेश भी लाने की योजना बना रहे हैं।
वे कहते हैं, “हम AI में बिल्कुल नई चीजें कर रहे हैं- सोशल, डिजिटल और एजेंटिक AI में भी। AI बहुत अच्छा प्रदर्शन कर रहा है।” उनका मानना है कि आने वाले समय में ब्रैंड्स कंटेंट के साथ ज्यादा जुड़ेंगे और ब्रैंडेड कंटेंट ही विज्ञापन का अगला बड़ा दौर होगा।
“डेटा ने ऐडवर्टाइजिंग की आत्मा खत्म कर दी”
गोयल का एक बड़ा और विवादित बयान है- “डेटा ने विज्ञापन की आत्मा को खत्म कर दिया।”
उनके अनुसार पहले विज्ञापन दिल से जुड़ने का काम करता था। लेकिन आज सब कुछ मैट्रिक्स, डेटा और नंबर पर आधारित हो गया है।
वे कहते हैं, “आज ग्राहक एक इंसान नहीं रहा। वह एक एल्गोरिद्म बन गया है। अगर आपका विज्ञापन उस एल्गोरिद्म की भाषा में नहीं है, तो उसका कोई मतलब नहीं रह जाता।”
अवॉर्ड्स और IPL पर खुली राय
Rediffusion ने फैसला किया है कि वह किसी अवॉर्ड शो में हिस्सा नहीं लेगी।
गोयल कहते हैं, “किसी क्लाइंट ने कभी यह नहीं पूछा कि आपने कितने अवॉर्ड जीते हैं। असली चीज काम का असर है।” वह यह भी कहते हैं कि आज ब्रैंड को मशहूर करने के लिए क्रिएटिव आइडिया से ज्यादा मीडिया बजट मायने रखता है।
उनके मुताबिक, “अगर आप IPL में ₹200 करोड़ खर्च कर दें, तो कोई भी विज्ञापन मशहूर हो सकता है।”
क्या ऐडवर्टाइजिंग की चमक खत्म हो गई?
गोयल का मानना है कि पहले विज्ञापन में देश के सबसे तेज दिमाग आते थे। लेकिन अब स्थिति बदल गई है।
वे कहते हैं, “पहले अगर मैं कहता था कि मैं HTA में काम करता हूं तो लोग ध्यान देते थे। आज अगर आप कहें कि आप किसी एजेंसी में काम करते हैं, तो बहुत फर्क नहीं पड़ता।” उनके मुताबिक पहले एजेंसियों को बहुत सम्मान मिलता था, लेकिन अब कई क्लाइंट उन्हें सिर्फ एक सर्विस प्रोवाइडर की तरह देखते हैं।
40 साल बाद भी उम्मीद बाकी
चार दशकों के बाद भी गोयल ने विज्ञापन की दुनिया नहीं छोड़ी। उन्होंने बैंकिंग, टेलीकॉम जैसे कई क्षेत्रों से ऑफर मिलने के बावजूद इसी उद्योग में बने रहने का फैसला किया।
वे कहते हैं, “पहले ऑफिस जाने का बहुत उत्साह होता था। रोज नए आइडिया, नई चीजें होती थीं। आज वह मजा कम हो गया है।” फिर भी उन्हें उम्मीद है कि शायद एक दिन विज्ञापन की दुनिया में फिर वही ऊर्जा लौट आए।
वे अंत में गुरु ग्रंथ साहिब की एक पंक्ति याद करते हैं- “नानक दुखिया सब संसार।”
गोयल कहते हैं, “शायद यही सच है। लेकिन उम्मीद है कि इस इंडस्ट्री में फिर से वही पुरानी चमक लौटे।”
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