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कब तक आरक्षण का लाभ लेंगे 'समृद्धशाली' रामविलास पासवान-चिराग पासवान, बोले रोहित सरदाना
<p style="text-align: justify;"><strong>समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।</strong></p> <p style="text-align: justify;">'सब्जी मंडी और मीडिया इंडस्ट्री में बस एक ही अंतर है, वहां सब्जी बेची जाती है और यहां खबर। किसके बेचने का तरीका सबसे अच्छा है बस यही मायने रखता है।' ये बातें जी न्यूज के आउटपुट एडिटर और न्यूज एंकर रोहित सरदाना ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय
समाचार4मीडिया ब्यूरो 9 years ago
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
'सब्जी मंडी और मीडिया इंडस्ट्री में बस एक ही अंतर है, वहां सब्जी बेची जाती है और यहां खबर। किसके बेचने का तरीका सबसे अच्छा है बस यही मायने रखता है।' ये बातें जी न्यूज के आउटपुट एडिटर और न्यूज एंकर रोहित सरदाना ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, नोएडा परिसर के सत्रारंभ समारोह में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कही।
समारोह के दौरान रोहित सरदाना ने मुख्य वक्ता के तौर पर छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि अकसर देखा गया है कि समाज में कोई बदलाव लाना चाहता है तो वह पत्रकारिता कोर्स कर मैदान में कूद पड़ता है। उन्होंने कहा, पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद कई सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं और लंबा सफर तय करने के बाद ही आप समाज में बदलाव की दिशा का काम कर सकते हैं और वह भी तब जब पत्रकार उस मुकाम पर पहुंच जाए, जहां से उसकी आवाज को सुना जा सके। उन्होंने कहा कि आज देश में लगभग ढाई सौ से भी ज्यादा चैनल हैं जिनके बीच आगे रहने के लिए गलाकाट मुकाबला चल रहा है।
‘पत्रकारिता का बदलता परिदृश्य’ विषय पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि आज पत्रकारिता के मायने बदल गए हैं। पहले कहा जाता था कि पत्रकार का कोई देश नहीं होता, उसकी कोई सीमाएं नहीं होती, उसका कोई धर्म-जाति नहीं होती, लेकिन अब सब बदल गया है। आज पत्रकार की स्वयं से लड़ाई तटस्थता और निष्पक्षता को लेकर है और उसे ही यह तय करना है कि वह तटस्थ है या निष्पक्ष।
उन्होंने कहा कि आज बहुत से लोग पत्रकारिता में कदम रखने वाले छात्रों को समझाते हैं कि मीडिया में आकर अपनी जिंदगी क्यों खराब कर ली, यहां जॉब्स की संभावनाएं कम हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। टीवी चैनल और अखबारों में बाहर से लगता है कि वहां कोई जगह नहीं है लेकिन जब पत्रकार अपने व्यक्तित्व को पॉलिश करके वहां पहुंचता है तो उसके लिए इस क्षेत्र में अपार संभावनाए हैं।
‘मीडिया में संभावनओं’ पर प्रकाश डालते हुए रोहित सरदाना ने कहा कि पत्रकारिता में कई ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें संभावनाएं तो बहुत हैं लेकिन उनका सही तरीके से उपयोग नहीं किया गया है। उदाहरण के तौर पर कृषि आधारित पत्रकारिता व सकारात्मक पत्रकारिता। लोग इन क्षेत्रों में जाना नहीं चाहते। आने वाले समय में इन क्षेत्रों के लिए अलग से मीडिया हाउस खुलने की उम्मीद है जिसमें रोजगार की अनंत संभावनाएं हैं। उन्होंने ऑनलाइन मीडिया और मोबाइल न्यूज ऐप के बारे में भी छात्रों को अवगत कराया। उन्होंने कहा कि आज हर किसी के पास अखबार पढ़ने और टीवी देखने का समय नहीं है। ऐसे लोग खबरों को मोबाइल पर ही पढ़ना चाहते हैं, इसलिए आज टीवी चैनल और अखबार भी इस ओर शिफ्ट हो रहे हैं और यहां भी पत्रकारों के लिए बहुत से जॉब के अवसर हैं।
उन्होंने कहा कि आज टीवी चैनलों या अखबारों पर अच्छे खबरों की कमी है, नए पत्रकारों को पॉजीटिव न्यूज की ओर अपना रुख करना चाहिए, ऐसी न्यूज जिससे समाज में बदलाव आ सके।
विडियो के जरिए सुनिए रोहित सरदाना का ये दमदार भाषण...
समारोह में मौजूद विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करते हुए जी न्यूज के आउटपुट एडिटर ने कहा कि मीडिया के बदलते परिदृश्य में आपको नए अवसरों को भुना कर कुछ नया और कुछ अलग करना होगा। पत्रकारिता के क्षेत्र में आप खुद नए क्षेत्र विकसित करने का प्रयास करें।
एक छात्र के प्रश्न का उत्तर देते हुए रोहित ने कहा कि पत्रकार का काम जनता तक बहुमूल्य जानकारियां पहुंचना होता है जो उन्हें जागरूक करे और समाज में सकारात्मक बदलाव ला सके। पत्रकारों को यह तय करने होगा कि उन्हें तटस्थ रहना है या निष्पक्ष, आप भावी पत्रकारों के सामने भी यही सवाल है। आज की पत्रकारिता में नकारात्मकता हावी होती जा रही है। जरूरत है सकारात्मक लोगों को सामने लाने की जो समाज में अच्छा काम कर रहे हैं, इस काम के लिए न्यूजसेंस विकसित करना होगा और जब आप पढ़ेगें तब आप में न्यूज सेंस विकसित होगी।
सवाल-जवाब सेशन में उन्होंने कहा कि पत्रकारों के बीच हितों की लड़ाईं का मुद्दा कोई नया नहीं है, यह पहले भी होता था, तब किताब या अखबारों में हफ्ते में एक दिन स्टोरी छपती थी उस पर हफ्ते में एक बार बहस होती थी, लेकिन आज टीवी है, जिस पर हर दिन प्राइम टाइम शो आता है, हर दिन डिबेट होती है इसलिए ये टकराव रोज होते, हैं। उन्होंने कहा कि सबके अपने-अपने विचार हैं, जिसको जो पसंद है वो उन विचारों के साथ चलता है। उन्होंने कहा कि पत्रकार क्या गलत नहीं हो सकता, यदि ऐसा है तो उस पर भी सवाल उठना चाहिए। पहले जनता सीधे सवाल नहीं कर सकती थी, लेकिन आज सोशल मीडिया माध्यम है अपनी बात रखने का। उन्होंने कहा कि पहले पत्रकारों पर सवाल नहीं उठ पाते थे, लेकिन आज उठ रहे हैं, जोकि अच्छा है, क्योंकि इससे पता चलता है कि पत्रकार पक्षकार है या फिर पत्रकार। उन्होंने अरनब गोस्वामी का उदाहरण देते हुए कहा कि अरनब गोस्वमी ने कहा जो लोग देश के खिलाफ पत्रकारिता कर रहे हैं उन पर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यहां अरनब ने किसी का नाम नहीं लिया, फिर भी कुछ पत्रकार कूद पड़े, ये बताने के लिए कि ये सब उन्हें कहा जा रहा है। इसका मतलब है कि आपके अंदर अपराध बोध है।
उन्होंने ये भी कहा कि दलित चिंतन एक बिजनेस हो गया है, जिन दलित चिंतक को आप टीवी पर देखते हो उनके घर जाकर देखो, उनके घर पर चांदी के गौतम बुद्ध लगे होंगे। उन्होंने केंद्र सरकार पर भी कटाक्ष करते हुए कहा कि जब सरकार लोगों गैस सब्सिडी छोड़ने की बात करती है तो उसे रामविलास पासवान से भी कहना चाहिए कि वे आरक्षण छोड़ दे, एक गरीब का बच्चा पढ़ जाएगा। लेकिन ऐसा नहीं है। रामविलास भी आरक्षित सीट से जीतते हैं और उनका बेटा चिराग पासवान भी। रामविलास जब सासंद बन चुके हैं, मंत्री बन चुके हैं, जब वे इतने सक्षम है और कोई संसाधन की कमी नहीं है तो फिर चिराग पासवान को जनरल सीट से क्यों नहीं लड़ाया जाता है। कब तक वे आरक्षण का लाभ लेते रहेंगे?
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