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क्यों 'पत्रकारिता अपराध नहीं है' के नारों से गूंजा श्रीनगर
गणतंत्र दिवस पर होने वाले कार्यक्रमों की कवरेज से कई वरिष्ठ पत्रकार वंचित...
समाचार4मीडिया ब्यूरो 7 years ago
समाचार4मीडिया ब्यूरो।।
कश्मीरी फोटो पत्रकार मेहराज उद्दीन 1979 से श्रीनगर में गणतंत्र दिवस पर होने वाले आयोजन को कवर करते आ रहे हैं, लेकिन इस बार उनके साथ कुछ ऐसा हुआ जो अब से पहले कभी नहीं हुआ। दरअसल, प्रशासन ने कार्यक्रम स्थल पर उनके प्रवेश को लेकर रोक लगा दी थी। प्रशासन ने सिर्फ मेहराज उद्दीन के साथ ही इस तरह का सलूक नहीं किया, बल्कि छह पत्रकारों को गणतंत्र दिवस पर श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में प्रवेश नहीं करने दिया, जिससे वे कार्यक्रम की कवरेज नहीं कर सके।
जिन पत्रकारों को कवरेज के लिए स्टेडियम में प्रवेश नहीं दिया गया, उनमें एसोसिएटेड प्रेस टीवी (APTN) के मेहराजउद्दीन (ब्यूरो चीफ) और उमर मेहराज (वीडियो पत्रकार) के अलावा एएफपी के फोटो पत्रकार तवसीफ मुस्तफा, एएनआई ब्यूरो चीफ बिलाल अहमद भट्ट, रायटर्स के फोटो पत्रकार दानिश इस्माइल वानी और डेली कश्मीर उज़मा के फोटो पत्रकार अमन फारूख शामिल थे। सभी छह पत्रकार जम्मू-कश्मीर के सूचना विभाग से मान्यता प्राप्त हैं।
इस बारे में सफाई देते हुए पुलिस का कहना है कि इन फोटो पत्रकारों के बारे में खुफिया विभाग की ओर से दी गई प्रतिकूल रिपोर्ट के बाद इस तरह का कदम उठाया गया। हालांकि इन सभी को पुलिस की ओर से सुरक्षा मंजूरी पास जारी किए गए थे। इस घटना के विरोध में कई पत्रकारों ने समारोह को कवर नहीं किया। मामले के तूल पकड़ने पर पुलिस ने इसे कम्युनिकेशन गैप बताया है। बता दें कि 26 जनवरी को हुई इस घटना को लेकर श्रीनगर के पत्रकारों में काफी नाराजगी है। घटना के विरोध में कई पत्रकार श्रीनगर में सड़कों पर तख्तियां लेकर उतरे, जिसमें लिखा था 'पत्रकारिता अपराध नहीं है।'
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राज्यपाल के सलाहकार के विजय कुमार का कहना है कि इस मामले पर गौर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भविष्य में बेहतर समन्वय के लिए पत्रकारों को पास जारी करने के लिए सुरक्षा मंजूरी की पूरी प्रक्रिया की समीक्षा की जाएगी।
वहीं, संपादकों की संस्था ‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ (Editors Guild of India) ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। गिल्ड ने एक बयान जारी कर इस घटना को प्रेस की स्वतंत्रता पर 'राज्य-प्रायोजित' हमला बताया है। बयान में कहा गया है, ‘गिल्ड सरकार से यह भी आश्वासन चाहता है कि इस तरह की निंदनीय घटनाएं दोबारा न हों। अगर जरूरत पड़े तो उच्च सुरक्षा वाले क्षेत्रों में पत्रकारों के पेशेवर कर्तव्यों को निभाने के लिए एक दोषमुक्त और पक्षपात रहित प्रणाली को जल्द से जल्द लागू किया जाए।’
The Editors Guild of India has issued a statement. pic.twitter.com/WqXniu5Jai
— Editors Guild of India (@IndEditorsGuild) January 28, 2019
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