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ख़बरों के लिए पागलपन की हद तक जुनूनी पत्रकार थे राधाकृष्णन: उमेश उपाध्याय
राधाकृष्णन नायर- सोचते ही एक नायाब चेहरा ज़ेहन में उभरता है। हंसता हुआ और...
समाचार4मीडिया ब्यूरो 7 years ago
उमेश उपाध्याय
वरिष्ठ पत्रकार ।।
राधाकृष्णन नायर- सोचते ही एक नायाब चेहरा ज़ेहन में उभरता है। हंसता हुआ और आत्मीयता से भरपूर। ख़बर के लिए जुनून की हद तक जाने वाला पत्रकार जिसे नेपथ्य में रहना ही पसंद था। राधा से मेरा परिचय 2014 में हुआ, जब मैंने ‘नेटवर्क18’ में संपादकीय कार्यभार संभाला। मिलते ही हम दोनों की अच्छी जमी।
राधा के प्राण ख़बरों में बसते थे। ख़बरों के लिए पागलपन की हद तक जुनूनी पत्रकार देखना हो तो वैसे थे राधा। एक अनूठी शख़्सियत के धनी थे राधा। कोई भी नई ख़बर आते ही तत्परता भरी सबसे तेज़ आवाज़ जो न्यूज़रूम में सुनाई देती थी, वह राधा की ही होती थी। ख़बर आते ही पैरों में चपलता, आंखों में चमक और क़ुछ बेहतर और नया करने की अधीरता राधा को एक शानदार पत्रकार और संपादक बनाते थे।
वह पत्रकार ही क्या, जो प्रश्न न करे। ख़बरों को लेकर प्रश्न करना और फिर साथियों को उनके उत्तर खोजने के लिए प्रेरित और उत्साहित करना उन्हें एक अलग ही श्रेणी में खड़ा करते थे। वे ख़ुद प्रश्न करने तक ही सीमित नहीं बल्कि अपने साथियों को भी प्रश्न करने देते थे। इसलिये राधा के साथ आप काम कर रहे हो तो फिर आपके साथ ख़बर पर बहस न हो ये संभव ही नहीं था, क्योंकि ख़बर के हर पहलू में जाना उनकी आदत का हिस्सा था। पर अच्छी बहस के बाद फिर सहज हो जाना भी उनके साथ मेरे संबंधो की ठोस बुनियाद थी। आप राधा के सीनियर हों या जूनियर आपको उनके साथ काम करके मज़ा ही आता था।
राधा की एक ख़ासियत और थी जो उन्हें अलग बनाती थी। वो थी अपने साथियों के लिए और उनके साथ खड़े रहना। अपने कनिष्ठतम सहयोगी तक की बात सुनना और फिर उसका साथ देना कोई राधा से सीखे। आज कम्पटीशन के कठिन दौर में ये गुण सहज नहीं है। असहज परिस्थितियों में भी सहजता से जीते थे राधाकृष्ण नायर। विलक्षणता, संपादकीय पद और उससे जुड़ी प्रतिष्ठा के साथ भी एकदम सरल और सामान्य जीवन- ये एक साथ मिलना आज के दौर में एक मुश्किल बात है। पर राधा ऐसे ही थे। उनके जाने पर एक रिक्तता आएगी। ईश्वर उनके परिवार को इस विपदा से उभरने की शक्ति दे। यही प्रार्थना है।
मेरी विनम्र श्रद्धांजलि।
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