होम / इंडस्ट्री ब्रीफिंग / राहुल के बयानों से तिलमिलाईं स्मिता प्रकाश, इस तरह किया पलटवार
राहुल के बयानों से तिलमिलाईं स्मिता प्रकाश, इस तरह किया पलटवार
पत्रकारों को अक्सर आगे कुआं, पीछे खाई वाली स्थिति से गुज़रना...
समाचार4मीडिया ब्यूरो 7 years ago
समाचार4मीडिया ब्यूरो।।
पत्रकारों को अक्सर आगे कुआं, पीछे खाई वाली स्थिति से गुज़रना पड़ता है। वो सवाल पूछते हैं, तो सवाल खड़े किए जाते हैं। सवाल नहीं पूछते हैं तो भी सवाल खड़े किए जाते हैं।
सबसे ताज़ा उदाहरण नए साल पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इंटरव्यू लेने वालीं न्यूज़ एजेंसी ‘एएनआई’ की संपादक स्मिता प्रकाश का है। स्मिता ने पीएम से कई सवाल पूछे। इनमें कुछ चुभने वाले सवाल भी थे, इसके बावजूद उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने स्मिता पर पक्षपात का आरोप लगाया है। लगभग 95 मिनट तक चले इंटरव्यू में नोटबंदी, कालाधन और पांच राज्यों में मिली हार से जुड़े सवालों को भी शामिल किया गया था।
खासकर नोटबंदी और कालेधन का मुद्दा भाजपा नेतृत्व को शुरू से असहज करता रहा है। कई मौकों पर पार्टी अध्यक्ष अमित शाह भी इनका सीधा जवाब देने से कतराते रहे हैं। ऐसे में सवालों का रूप देकर इन तीखे मुद्दों को उठाना कोई आसान काम नहीं था, क्योंकि सामने कोई और नहीं, बल्कि देश के प्रधानमंत्री थे। वैसे भी, मोदी और शाह की जोड़ी के लिए ये कहा जाता है कि अहसज करने वाले सवाल उनका मिजाज बिगाड़ देते हैं। ये बात सही है कि आमतौर पर इतने बड़े स्तर पर होने वाले इंटरव्यू के सवालों से पहले ही जवाब देने वाले को परिचित करा दिया जाता है, लेकिन सवाल किस लहजे में पूछना है, ये पत्रकार पर निर्भर करता है।
पत्रकार चाहे तो अपने अंदाज़ से नीरस से लगने वाले इंटरव्यू को रोचक बना सकता है, उसके शब्दों का तीखापन सुनने वाले को निष्पक्षता और निडरता का अहसास कराता है। स्मिता प्रकाश ने भले ही ज्यादा तीखे शब्दों का इस्तेमाल न किया हो, लेकिन उन्होंने चाशनी में लपेटकर भी सवाल नहीं पूछे। उन्होंने कई मौकों पर प्रधानमंत्री की बात काटी और एक नया सवाल उनके सामने रख दिया। जैसे, ‘पांच राज्यों में भाजपा चुनाव हारी है और आप एनडीए के प्रधानमंत्री हैं, तो क्या आप इसे एक असफलता नहीं मानते?, आपने 2013 से कई बार कांग्रेस मुक्त भारत की बात कही है, लेकिन जिस तरह के नतीजे आ रहे हैं उनके अनुसार लोग कांग्रेस को विकल्प मान रहे हैं, तो कांग्रेस मुक्त भारत का आपका लक्ष्य साकार नहीं हो पा रहा?, 2017 तक मोदी-शाह फैक्टर के बारे में कहा जाता था कि कोई इसे हरा नहीं सकता, लेकिन अब ऐसा नहीं है, तो क्या नेतृत्व को हार की ज़िम्मेदारी नहीं लेनी चाहिए?, क्या नोटबंदी की ज़रूरत थी, उसके उद्देश्य पूरे हुए?’ क्या इसे पक्षपात कहा जा सकता है?
नरेंद्र मोदी से यह पूछना कि क्या मोदी लहर ख़त्म हो गई है, कोई आसान काम नहीं, लेकिन स्मिता प्रकाश ने यह सवाल भी बेहिचक दागा। इसमें कोई दोराय नहीं कि इंटरव्यू हद से ज्यादा लंबा हो गया था और इसके चलते लोग उसे बीच में छोड़ने को मजबूर हो गए, मगर इसकी वजह कुछ और नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री के व्याख्यात्मक जवाब थे।
इस इंटरव्यू के बाद राहुल गांधी ने एक प्रेस कांफ्रेंस में प्रधानमंत्री के साथ-साथ स्मिता प्रकाश पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा ‘पीएम मोदी में आपके सामने बैठने की हिम्मत नहीं है और मैं यहां आता हूं... आप मुझसे कोई भी प्रश्न पूछ सकते हैं... मैं हर सात-दस दिनों में यहां आता हूं। आपने कल प्रधानमंत्री का साक्षात्कार देखा... मतलब दब्बू पत्रकार, वो सवाल भी कर रही थीं और जवाब भी खुद दे रही थीं’।
राहुल के इस वार का स्मिता ने भी करारा जवाब दिया। उन्होंने ट्वीट करके कहा ‘डियर मिस्टर राहुल गांधी, आपने प्रेस कांफ्रेंस में मुझ पर हमला किया है। मैं सवाल पूछ रही थी, जवाब नहीं दे रही थी। अगर आप पीएम मोदी पर हमला करना चाहते हैं तो आगे बढ़ें, लेकिन मेरा उपहास करना बेतुका है। देश के सबसे पुराने राजनीतिक दल के अध्यक्ष से ऐसी उम्मीद नहीं है’।
स्मिता को अपने इस जवाबी हमले के लिए सोशल मीडिया यूजर्स का समर्थन मिला है।
Dear Mr Rahul Gandhi, cheap shot at your press conference to attack me. I was asking questions not answering. You want to attack Mr Modi, go ahead but downright absurd to ridicule me. Not expected of a president of the oldest political party in the country.
— Smita Prakash (@smitaprakash) January 2, 2019
'आजतक' के एंकर रोहित सरदाना ने स्मिता का समर्थन करते हुए लिखा है ‘राहुल गांधी कह रहे हैं प्रधानमंत्री के इंटरव्यू में सवाल करने वाली ही जवाब भी दे रही थी। हैरानी है कि ‘अभिव्यक्ति की आज़ादी’ और पत्रकारिता का दम भरने वाले एक भी ‘पत्रकार’ ने उन्हें टोका नहीं। डीडी न्यूज के एंकर अशोक श्रीवास्तव ने भी राहुल गांधी को आड़े हाथों लेते हुए स्मिता के पक्ष में ट्वीट किया है। उन्होंने लिखा है कि बीते कुछ सालों से कुछ पत्रकार देश में मीडिया की "आज़ादी" के "स्वयम्भू-सिपाही" बने हुए हैं और मीडिया पर "हमले" के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। कल #राहुल_गाँधी ने एक महिला पत्रकार @smitaprakash पर निजी हमला किया। देश का एक भी "बाल-वीर" पत्रकार न सड़क पर उतरा न सोशल मीडिया पर !
राहुल गांधी कह रहे हैं प्रधानमंत्री के इंटरव्यू में सवाल करने वाली ही जवाब भी दे रही थी. हैरानी है कि ‘अभिव्यक्ति की आज़ादी’ और पत्रकारिता का दम भरने वाले एक भी ‘पत्रकार’ ने उन्हें टोका नहीं.
— रोहित सरदाना (@sardanarohit) January 2, 2019
बीते कुछ सालों से कुछ पत्रकार देश में मीडिया की "आज़ादी" के "स्वयम्भू-सिपाही" बने हुए हैं और मीडिया पर "हमले" के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं।
— Ashok Shrivastav (@ashokshrivasta6) January 3, 2019
कल #राहुल_गाँधी ने एक महिला पत्रकार @smitaprakash पर निजी हमला किया। देश का एक भी "बाल-वीर" पत्रकार न सड़क पर उतरा न सोशल मीडिया पर !
टैग्स राहुल गांधी स्मिता प्रकाश