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मजीठिया मामले में SC हुई सख्त, उत्तराखंड के श्रम आयुक्त के खिलाफ जारी किया वारंट
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। मजीठिया वेज बोर्ड के मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया और सुनवाई के दौरान गैरहाजिर रहने और कोर्ट के आदेशों का पालन न करने पर उत्तराखंड के श्रम आयुक्त के खिलाफ जमानती वारंट जारी कर दिया। मामले की सुनवाई अब 4 अ
समाचार4मीडिया ब्यूरो 9 years ago
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
मजीठिया वेज बोर्ड के मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया और सुनवाई के दौरान गैरहाजिर रहने और कोर्ट के आदेशों का पालन न करने पर उत्तराखंड के श्रम आयुक्त के खिलाफ जमानती वारंट जारी कर दिया। मामले की सुनवाई अब 4 अक्टूबर को होगी और इस दिन पुलिस श्रम आयुक्त की उपस्थित सुनिश्चित करेगी।
कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव और श्रम आयुक्त को यह निर्देश भी जारी किया है कि वे अगली तारीख को मजीठिया वेज बोर्ड लागू किए जाने की विस्तृत रिपोर्ट भी प्रस्तुत करें।
वहीं दूसरी तरफ, अन्य चार राज्यों उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, नागालैंड और मणिपुर के श्रम आयुक्त कोर्ट के प्रश्रों के उत्तर देने के लिए व्यक्तिगत तौर पर अपने-अपने राज्य के स्टैंडिंग काउसिलों के साथ कोर्ट रूम में उपस्थित थे। कोर्ट ने उन्हें 6 सप्ताह के भीतर मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशें लागू कराए जाने के निर्देश दिए।
जस्टिस रंजन गोगोई व जस्टिस पीसी पंत की बेंच ने मौखिक रुप से अखबारों के प्रबंधन को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि यदि वे मजीठिया वेज बोर्ड के नियमों को 6 सप्ताह के भीतर लागू नहीं करते हैं, तो वे जेल जाने को तैयार रहें।
जस्टिस गोगोई ने यह भी स्पष्ट किया कि कोई भी प्रबंधन मजीठिया अवॉर्ड को 20जे की आड़ में नहीं छिपा सकता। जस्टिस गोगोई ने स्पष्ट किया कि 20जे उन कर्मचारियों के लिए है जो मजीठिया अवॉर्ड से ज्यादा वेतनमान पा रहे हैं, वहीं इससे कम वेतनमान पाने वाले कर्मचारियों के साथ किया गया किसी प्रकार का समझौता अमान्य होगा।
श्रम आयुक्तों ने अपनी सफाई में कहा कि कर्मचारी हमारे पर 17(1) के तहत क्लेम नहीं कर रहे हैं, जो क्लेम कर रहे हैं हम उनके पक्ष में खुलकर खड़े हैं।
वहीं पत्रकारों की लड़ाई सुप्रीम कोर्ट में लड़ रहे एडवोकेट उमेश शर्मा ने पत्रकारों से कहा कि मैं बार-बार सबसे कह रहा हूं कि 17(1) के तहत श्रम आयुक्त के यहां क्लेम लगाइए, क्योंकि पहले उन्हीं को श्रम विभाग वरियता देगा, जिसने 17(1) के तहत क्लेम किया है। उन्होंने बताया कि अब 4 अक्टूबर को महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, राजस्थान, झारखंड और दिल्ली के लेबर कमिश्नर को सुप्रीम कोर्ट में हाजिर होने का आदेश दिया गया है। इन प्रदेशों के पत्रकार जल्द से जल्द 17(1) के तहत श्रम आयुक्त कार्यालय में क्लेम लगाएं।
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