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चुनावी रिपोर्टिंग के दिलचस्प अंदाज में प्रतीक त्रिवेदी सबके 'भैयाजी' ही बन गए...
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। देश में चुनावी मौसम गरम है। राजनीतिक पार्टियां अपने पांच साल का विकास का नारा बुलंद कर रहीं हैं। वहीं देश की जनता दूरबीन लगाकर प्रदेश में विकास को तलाश रही है। और इन सब विकास और विनाश की लीला पर कैमरे की आंख लिए घूम रहे हैं प्रतीक त्रिवेदी।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 9 years ago
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
देश में चुनावी मौसम गरम है। राजनीतिक पार्टियां अपने पांच साल का विकास का नारा बुलंद कर रहीं हैं। वहीं देश की जनता दूरबीन लगाकर प्रदेश में विकास को तलाश रही है। और इन सब विकास और विनाश की लीला पर कैमरे की आंख लिए घूम रहे हैं प्रतीक त्रिवेदी। प्रतीक न्यूज इंडिया18 में सीनियर एडिटर तो हैं ही लेकिन अपने शो 'भैयाजी कहिन' के बाद लोगों ने उनको नया नाम दे दिया है भैय्या जी...
प्रतीक का शो खबरिया चैनलों का पॉपुलर शोज में अपनी एक अलग जगह बना चुका है। प्रतीक बिना लाग लपेट के विकास की जमीनी हकीकत दिखाते हैं। यही इस शो की यूएसपी भी है। प्रतीक के चेहरे पर जो एक्सप्रेशन आते हैं, वाकई उसे देखकर दर्शक का मन खुश हो जाता है। टीवी पर जिस दिलचस्प तरीके से उन्होंने चुनावी रिपोर्टिंग का एक अलहदा स्टाइल बनाया, वे देखकर दर्शक कुछ देर के लिए रिमोट को दूर रख देता है। कभी उनकी आंखे, तो कभी उनके हाथ तो कभी उनके चलने का स्टाइल, उनकी हर अदा अलहदा है।
प्रतीक यूपी के गांव-गांव और शहर-शहर जाकर न केवल जनता के मूड को एकदम अलग अंदाज में टटोल रहे हैं.. कहां कितना और कैसा विकास हुआ है उसकी भी खूब कलई खोल रहे हैं। कभी वे चाय की दुकान पर बैठ जाते हैं तो कभी बुजुर्गों के बीच उनके मन की बात जानने पहुंच जाते हैं। महिलाओं, बच्चियों से उनके अंदाज में विकास, चुनाव और उनके नजरिए की बात भी लोगों के सामने की पूरी कोशिश में लगे रहते हैं। चुनावी मौसम में शहरों में गलियों के चौक-चौराहों पर, गांव में पान की दुकान पर, चाय की दुकान पर चुनाव और चुनावी मजमा है। रैलियां हो रही हैं। नेता जी प्रशंसकों के साथ नए नए वादे लिए लोगों तक पहुंच रहे हैं। ऐसे में प्रतीक भैयजी के स्टाइल में खूब मौज ले रहे हैं और दर्शको को अपने शो पर ठहरने के लिए रोक लेते हैं।
प्रतीक भैय्या जी से बात करते करते नेताओं की दल बदलू प्रवृति पर भी खूब चुटकी लेते नजर रहे हैं। चुनावी समर में एक पार्टी से दूसरी पार्टी में अपने आपको चमकाने पहुंचे नेताओं का चेहरा वो खासकर दिखाने की बात करते हैं। इस पूरे शो में उनका एक खास अंदाज जो खासा लोकप्रिय हुआ है- क्या बात है.. और पाजी जरा कैमरा तो पास लाओ... दर्शक न केवल प्रतीक के अंदाज को बल्कि जनता और नेताओं के बीच उनकी बातचीत और सवालों के अदाज को भी खूब पसंद कर रहे हैं।
यकीन मानिए कुछ सेकेंड को रीता शांत हो गईं, मुस्कुराती रहीं फिर जब उन्होंने चिंतन मनन कर लिया फिर अपना मुंह खोला। वहीं कभी दलितों के घर विकास की गाथा गाती अखिलेश सरकार को विकास का आईना दिखाते हैं, जहां एक औरत रोती हुई कहती है वोट का का हैं दें देंगे.. लेकिन हमारे लिए का कुछ सरकार सचमुच में करेगी?
कहीं टूटी सड़के, कहीं 500 लोगों की बस्ती में एक पानी का बंबा(नल) क्या ये है विकास?
प्रतीक बताते हैं कि मैं जब लोगों के बीच होता हूं तो मैं भी वही होता हूं। उनके रंग में रंग जाता हूं उनकी दिल की बात सुनता हूं। फिर उनकी समस्या को उठाकर जवाब मांगता हूं। शायद यही वजह है कि मैं जहां भी जाता हूं लोग मुझे बहुत प्यार करते हैं।
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