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अरनब-बरखा विवाद पर राजदीप सरदेसाई ने यह कहकर किया किनारा...
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। पत्रकारिता जगत में इन दिनों एनडीटीवी (NDTV) की कंसल्टिंग एडिटर और मशहूर पत्रकार बरखा दत्त व टाइम्स नाऊ (Times Now) के एडिटर-इन-चीफ अरनब गोस्वामी के बीच चल रहा ‘शब्द युद्ध’ छाया
समाचार4मीडिया ब्यूरो 9 years ago
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
पत्रकारिता जगत में इन दिनों एनडीटीवी (NDTV) की कंसल्टिंग एडिटर और मशहूर पत्रकार बरखा दत्त व टाइम्स नाऊ (Times Now) के एडिटर-इन-चीफ अरनब गोस्वामी के बीच चल रहा ‘शब्द युद्ध’ छाया हुआ है। इस मुद्दे पर इंडिया टुडे (India Today) के कंसल्टिंग एडिटर राजदीप सरदेसाई ने इंडिया टुडे ग्रुप की ओपिनियन वेबसाइट ‘DailyO’ पर एक आर्टिकल लिखा है।
इस आर्टिकल का हिंदी अनुवाद आप यहां पढ़ सकते हैं...
कल शाम एक वेबसाइट ने मुझसे इन दिनों सोशल मीडिया और टीवी पर चल रही अरनब गोस्वामी और बरखा दत्त के बीच बयानबाजी को लेकर सवाल पूछा, लेकिन यह सवाल मेरे लिए बहुत मुश्किल था क्योंकि अधिकांश मुद्दों पर मैं अपनी बात मजबूती से रखता हूं और मेरा मानना है कि आजकल के समय में चुप रहना विकल्प नहीं है। फिर भी मैं चुप रहा और निश्चय कर लिया कि इस विवाद के बारे में मैं कुछ नहीं बोलूंगा।
शायद मेरे दिमाग में यह बात थी कि बरखा दत्त और अरनब दोनों मेरे पुराने साथी रह चुके हैं और मैं उन दोनों के काम की बहुत इज्जत करता हूं। इसलिए मैं सोशल मीडिया जैसे ट्विटर आदि पर इस विवाद में नहीं पड़ना चाहता जहां पर कही गई आपकी बात सार्वजनिक हो जाती है। इसका कारण शायद यह भी हो सकता है कि मैं अपने आपको ऐसे व्यक्ति के रूप में देखना चाहता हूं, जो झगड़ों आदि से दूर रहता है।
लेकिन शायद मैं उस दिन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की पत्नी मिशेल ओबामा द्वारा दिए गए भाषण से काफी प्रभावित था। अपने उस भाषण में उन्होंने अपनी बात काफी प्रभावी रूप से कही थी। मिशेल ने अमेरिकी राष्ट्रपति की दौड़ में शामिल रिपब्लिक पार्टी के प्रतिद्वंद्वी का नाम लिए बगैर कहा कि किस तरह समाज में विद्वेष भरा जा रहा है। मिशेल का कहना था, ‘ टेलिविजन पर हम रोजाना बड़ी हस्तियों के मुंह से इस तरह की अभद्र भाषा सुनते हैं जो ठीक नहीं है। जब कोई गलत होता है अथवा असभ्य व्यवहार करता है तो आपको उस स्तर तक गिरने की जरूरत नहीं है। हमारा ध्येय यह होना चाहिए कि जब सामने वाले का गुस्सा का शांत हो जाएगा तब हम अपनी बात जोरदार तरीके से रखेंगे।‘
हालांकि मिशेल अमेरिका के बारे में बात कर रही थीं लेकिन उनकी इस बात को अपने देश के बारे में रखकर भी सोचा जा सकता है। जब मैंने 2014 में अपनी किताब ‘The Election That Changed India’ लिखी थी तो मुझसे इस शीर्षक को लेकर कई बार सवाल पूछा गया था। आखिर, क्या कोई एक चुनाव प्राचीन सभ्यता वाले देश को बदल सकता है?
दो साल बाद धीरे-धीरे हमें अब इस बात का जवाब मिल रहा है। एक चुनाव से हमारा जीवन आश्चर्यजनक रूप से नहीं बदल सकता है। आज भी देश में लालफीताशाही और भ्रष्टाचार का खात्मा नहीं हुआ है। गंगा आज भी काफी प्रदूषित है, किसान आज भी आत्महत्या कर रहे हैं। सब्जियों के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, बिजली कटौती जारी है, सड़कें खस्ताहाल है और जाम आज भी बड़ी समस्या बना हुआ है। लेकिन एक चुनाव परिणाम विजेता पक्ष को काफी सशक्त बना सकता है। आप राजदीप का पूरा ब्लॉग नीचे अंग्रेजी में पढ़े सकते है।
राजदीप सरदेसाई द्वारा अंग्रेजी में लिखा गया मूल लेख नीचे लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं...
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