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‘हिन्दुस्तान’ के विजय सिंह की अचानक मौत पर पत्रकारों ने कुछ यूं किया याद...
दैनिक ‘हिन्दुस्तान’ के मुजफ्फरपुर एडिशन के सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत पत्रकार विजय सिंह की गुरुवार देर रात एक सड़क हादसे में मौत हो गई। वे 49 वर्ष के थे। उनकी अचानक हुई मौत से पत्रकारों और रिश्तेदारों में शोक की लहर दौड़ गई। कई पत्रकारों ने उन्हें अपने-अपने शब्दों में श्रृद्धांजलि दी, जिसे आप नीचे पढ़ सकते हैं-
समाचार4मीडिया ब्यूरो 9 years ago
दैनिक ‘हिन्दुस्तान’ के मुजफ्फरपुर एडिशन के सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत पत्रकार विजय सिंह की गुरुवार देर रात एक सड़क हादसे में मौत हो गई। वे 49 वर्ष के थे। उनकी अचानक हुई मौत से पत्रकारों और रिश्तेदारों में शोक की लहर दौड़ गई। कई पत्रकारों ने उन्हें अपने-अपने शब्दों में श्रृद्धांजलि दी, जिसे आप नीचे पढ़ सकते हैं-
अनुरंजन झा, वरिष्ठ पत्रकार
विजय सिंह, एक मित्र, एक भाई, एक शुभचिंतक, एक सच्चे सलाहकार, मेरे लिए कुछ ऐसे ही थे विजय भाई। सुबह से जब यह खबर मिली है कि विजय भाई किसी सड़क हादसे में हम सबको छोड़ गए। अजीब घबराहट हो रही है, यकीन करना मुश्किल हीं नहीं नामुमकिन सा है। सुबह से कूछ सूझ नहीं रहा। इधर-उधर फोन लगा रहा हूं सब सकते में हैं। बेहद दर्दनाक है यह।
अपनी मिट्टी, अपने गांव, अपने शहर से अद्भुत प्यार था विजय भाई को और यही वजह थी कि किसी और शहर में नहीं बस सके। हमारा और विजय भाई का शहर एक ही है मोतिहारी। हमारे हर कदम पर उनकी बारीक निगाह होती, ईशारा करते औऱ जरुरत होती तो टोकते भी। जबसे सोशल मीडिया का दौर आया विजय भाई और अपडेट रहते और दूसरों को अपडेट करते रहते। अक्सर देर रात मैसेज बॉक्स में संदेश छोड़ते, अभी तक जाग रहे हैं गुरु। मैंने कई बार उनको कहा कि महानगरों में देर रात तक जागना तो सामान्य है लेकिन छोटे शहर में इतनी रात तक जागना ठीक नहीं, फिर जोर की हंसी। आत्मीयता के लिए जरुरी नहीं खूब मुलाकातें हों। दूर रहकर भी एक दूसरे का खयाल रखा जा सकता है और यही कुछ था हमारे बीच।
पिछले बिहार विधानसभा चुनाव के वक्त दिल्ली की एक पत्रकार के साथ हमारे विधानसभा चुनाव का जायजा ले रहे थे। कच्ची-पक्की सड़कों पर कई किलोमीटर तक पीछा कर हमारी गाड़ी को घेरा (मेरा फोन नहीं लग रहा था), दिल्ली से गई पत्रकारों की टीम से परिचय कराया और बोले हमारे यहां के पत्रकार खबर करने के अलावा हकीकत जानने के लिए प्रैक्टिकल भी करते हैं, विकास के आश्वासन पर वोट मांग रहे हैं वो भी बिना किसी दल के समर्थन के। कुछ ऐसे थे विजय भाई।
कुछ दिनों पहले फोन आया और मैं देख नहीं पाया, बाद में हमने फोन किया तो बोले छुट्टी का दिन है आराम कर रहे होंगे। मैंने आदतन कहा कि कहां भाई जी अपन तो एक ही बार आराम करेंगे। जोर से हंसे बोले अभी वो वक्त नहीं आया है। विजय भाई अभी वो वक्त कहां आया था आपके भी आऱाम करने का। आप तो कर्मठ थे आराम की क्या जल्दी हो गई। ईश्वर आपकी आत्मा को शांति दें और आपके परिवार, आपके शुभचिंतकों को संबल। विनम्र श्रद्धांजलि!
संजीत मिश्रा, चीफ सब एडिटर, प्रभात खबर
आपका यूं अचानक से दूर चले जाना
याद आएगा अपनों को ये मुस्कुराना!
विजय सिंह नहीं रहे। आज इसी मनहूस खबर से सुबह हुई। बिंदास शख्सियत का यूं चला जाना, बहुत रुलायेगा सबको। सीनियर जर्नलिस्ट विजय भैया अभी हिन्दुस्तान मुजफ्फरपुर में डेस्क पर कार्यरत थे। देर रात ऑफिस से घर जाते वक़्त सड़क हादसे में यह मनहूस हादसा हो गया!
रवि प्रकाश, वरिष्ठ पत्रकार-
यकीन नहीं हो रहा। दुखी हूं। पिछली बार जब हम मिले, आप कितने खुश थे। मोतिहारी से मुजफ्फरपुर की ट्रेन यात्रा हमारी आखिरी मुलाकात बन जाएगी, ऐसा अंदाजा नहीं था। आपसे हर मुलाकात प्रेरणा देती थी। आप कितने इनोवेटिव थे। अपडेट रहते थे। पिछली दफा भी हमनें खूब बातें की थीं। नयी योजनाओं पर। अफसोस, अब आपसे मुलाकात नहीं होगी।
प्रभात खबर के सिलिगुड़ी संस्करण में रहते हुए आपने CPM के घोषणा पत्र में गड़बड़ी की बहुचर्चित स्टोरी की। हिन्दुस्तान में हाल ही में आपने नेपाल पर शानदार रिपोर्ट लिखी। दैनिक जागरण में रहते हुए भी आपकी कलम ने अपनी ठसक बनाए रखी। आपकी कई कहानियां हमारे जेहन में है। मोतिहारी मोह नहीं होता, तो आप हमारी तरह किसी दूसरे शहर में होते। और बेहतर जिंदगी जीते। आपको मोतिहारी से मुहब्बत थी। वरना, रोज सुबह ट्रेन से मुजफ्फरपुर आना और देर रात मोतिहारी वापस लौटना, हर किसी के वश की बात नहीं। आपको सिलिगुड़ी रास नहीं आया। मेरे जोर देने के बावजूद कई और शहरों के बेहतरीन ऑफर आपने नहीं स्वीकारे। आपका मोतिहारी प्रेम! विजय भैया, आप रुला कर चले गए। आपकी इतनी यादें हैं कि किताब लिख दूं। ईश्वर आपकी आत्मा को शांति बख्शें और परिवार को इस दुख से उबरने की शक्ति दे। मेरी विनम्र श्रद्धांजलि। प्रणाम। सलाम। आप हमारी यादों में जिंदा रहेंगे। हमेशा।
(मोतिहारी से बाहर के मेरे दोस्त, जो विजय सिंह को नहीं जानते, उनके लिए- विजय सिंह चंपारण के वरिष्ठ पत्रकार थे। इन दिनों हिन्दुस्तान अखबार के मुजफ्फरपुर संस्करण में वरिष्ठ पद पर थे। आज अल सुबह (रात के 1 बजे) मुजफ्फरपुर में हुई एक सड़क दुर्घटना में उनका स्वर्गवास हो गया। इससे पूर्व वे प्रभात खबर, दैनिक जागरण और समाचार एजेंसी भाषा के साथ भी उल्लेखनीय पारियां खेल चुके थे।)
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