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IWPC ने बढ़ते विवाद के बीच दी ये सफाई...    

<p style="text-align: justify;"><strong>समाचार</strong><strong>4</strong><strong>मी‍डिया ब्यूरो ।।</strong></p> <p style="text-align: justify;">‘इंडियन वूमेन प्रेस कॉप्स’ (Indian Women's Press Corps) द्वारा अपने सदस्‍यों से मांगी गई अंडरटेकिंग का मुद्दा इन दिनों जोर-शोर से छाया हुआ है। दरअसल, अंडरटेकिंग का मामला सदस्‍यों द्वारा IWPC के परिसर को कि

समाचार4मीडिया ब्यूरो 9 years ago

समाचार4मी‍डिया ब्यूरो ।।

‘इंडियन वूमेन प्रेस कॉप्स’ (Indian Women's Press Corps) द्वारा अपने सदस्‍यों से मांगी गई अंडरटेकिंग का मुद्दा इन दिनों जोर-शोर से छाया हुआ है। दरअसल, अंडरटेकिंग का मामला सदस्‍यों द्वारा IWPC के परिसर को किसी दूसरे संगठन द्वारा किसी कार्यक्रम के लिए इस्‍तेमाल करने की अनुमति देने को लेकर बना हुआ है। IWPC की प्रेजिडेंट सुषमा रामचंद्रन ने IWPC द्वारा जारी स्‍टेटमेंट के जरिये इस मामले पर प्रकाश डाला है। इस स्‍टेटमेंट में कहा गया है कि यह कोई मेंबरशिप फॉर्म नहीं है, जैसा कि कुछ लोगों द्वारा प्रचारित किया जा रहा है। अंडरटेकिंग का मतलब विभिन्‍न संगठनों द्वारा किए गए कार्यकलापों की जिम्‍मेदारी से IWPC के सदस्‍यों को अलग करना है। यह नई बुकिंग को लेकर अगस्‍त में लागू किए गए नियम शर्तों का ही एक हिस्‍सा था।

इससे पहले संस्था की अध्यक्षा सुषमा रामचंद्रन का बयान भी काफी सुर्खियों में रहा है जिसमें उन्होंने कहा कि संस्था के प्रांगण में कोई भी राष्ट्रविरोधी गतिविधि नहीं होगी। अपने बयान पर उन्हें आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। इस बारे में सुषमा का कहना था कि राष्ट्रवादी और राष्ट्रविरोधी शब्द पर बवाल खड़ा हो रहा है। हमने राष्ट्रवादी और राष्ट्रविरोधी शब्द पॉलिटीकल कनटेक्स्ट में नहीं कहा था। संस्था से बाहरी व्यक्ति ने इसका मुद्दा बनाया है यही नहीं, हमारे मेंबर्स को भी भड़काने का काम किया।

जब उनसे पूछा गया गया कि ऐसी क्या नौबत आ गई कि संस्था के प्रांगण में गतिविधियों को सीमित करने पर विचार किया जाने लगा तो उनका जवाब था कि पिछले कुछ समय में कुछेक संस्थाओं में ऐसी गतिविधियां हुई हैं जिसकी वजह से मैनेजमेंट के लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, ऐसी ही गतिविधियों से बचने के लिए संस्था के नियमों पर पुर्नविचार किया जा रहा है। जैसा कि आईडब्ल्यूपीसी महिलाओं से जुड़ी संस्था है तो हमें और भी सावधानी बरतनी होगी। महिला पत्रकारों को सुरक्षा की ज्यादा जरूरत होती है।

सुषमा ने बताया कि नई बुकिंग पॉलिसी पिछले साल हुए कई आयोजनों के बाद बनाई गई थी। सबसे पहला कार्यक्रम प्रेस क्‍लब में हुआ था, जहां किसी गैर मीडिया संगठन द्वारा आयोजित कार्यक्रम के लिए ऑफिस के पदाधिकारियों को जिम्‍मेदारी दी गई थी, जबकि उन लोगों ने हॉल को किराए पर लिया था। दूसरा मामला तब सामने आया था जब कुछ सदस्‍य अपने नजदीकी लोगों को पॉलिटिकल पार्टी अथवा अन्‍य आयोजनों के लिए परिसर के इस्‍तेमाल की अनुमति के लिए रेफर कर रहे थे। एक मामले में तो जिस एनजीओ (NGO) को रेफर किया गया था, उसके आरएसएस (RSS) के साथ नजदीकी रिश्‍ते निकले थे। ये लोग अपने स्‍वयंसेवकों को हमारे परिसर में ट्रेंड करना चाहते थे। पूछताछ करने पर संबंधित सदस्‍य का कहना था कि उन्‍हें इस तरह के लिंक्‍स की कोई जानकारी नहीं थी लेकिन उन्‍होंने उक्‍त एनजीओ की जिम्‍मेदारी को लेने से भी इनकार कर दिया। वहीं दूसरे मामले में हमें आरएसएस से जुड़े एक और कार्यक्रम का प्रस्‍ताव मिला था। उस मामले में तो संस्‍था की प्रेजिडेंट को भी मना करने पर धमकी दी गई थी। इसके अलावा एक अन्‍य एनजीओ ने तो अपने पोस्‍टरों से परिसर की दीवारों को काफी गंदा कर दिया था। इस तरह की हरकत का विरोध करने पर उनका कहना था कि उन्‍होंने हॉल लेने के लिए भुगतान किया है तो वे ऐसा क्‍यों न करें।

IWPC की ओर से जारी स्‍टेटमेंट में कहा गया है कि इस तरह के मामलों की लिस्‍ट काफी लंबी है लेकिन बाद में IWPC ने यह निर्णय लिया कि संस्‍था और इसके सदस्‍यों को जिम्‍मेदारी से मुक्‍त करने के लिए किसी पॉलिसी की जरूरत है। इसके अलावा संस्‍था द्वारा बुकिंग के नियम शर्तों को भी दोबारा से तय करने की जरूरत महसूस हो रही थी कि जब भी कोई परिसर को किराए पर ले तो वह यहां उपलब्‍ध सुविधाओं का दुरुपयोग न करे।

संस्‍था की प्रेजिडेंट सुषमा के अनुसार, चूंकि वह IWPC की संस्‍थापक सदस्‍य (founder member) हैं इसलिए वह भी इस पक्ष में हैं कि इस तरह के दुरुपयोग से संस्‍था के मेंबर्स पर किसी तरह की जिम्‍मेदारी न आए, इसके लिए इस तरह के कड़े नियम बनाना जरूरी है। इस तरह के मामलों में गलती न होने पर भी ऑफिस के पदाधिकारियों पर एफआईआर की रिपोर्ट दर्ज होने तक की आशंका बनी रहती है। पिछले दिनों तो एक महिला पत्रकार का नाम एफआईआर में महज इसलिए लिख दिया गया था कि वह कार्यक्रम के दौरान मंच (dais) पर बैठी हुई थीं। ऐसे में IWPC की जिम्‍मेदारी बनती है कि अपने सदस्‍यों को इस तरह की स्थिति से बचाने के लिए कुछ उपाय किए जाएं।

इन मुद्दों पर एक प्रबंधन समिति (managing committee) चर्चा करेगी और निर्णय लेगी। अंडरटेकिंग मामले को हटा दिया जाए, इसमें संशोधन किया जाए अथवा इसे जारी रखा जाए, इसका फैसला चुनी गई एग्‍जीक्‍युटिव कमेटी करेगी।

सुषमा के अनुसार, ‘कुछ मेंबर्स ने इस क्‍लॉज (clause) को हटाने की गुहार लगाई है। मेंबर्स का कहना है कि प्रेजिडेंट होने के नाते उन्‍हें इस क्‍लॉज को हटाने का अधिकार है। लेकिन मेरा मानना है कि इस मामले को मैनेजिंग कमेटी पर छोड़ देना चाहिए।’

उन्‍होंने बताया कि IWPC के बुकिंग नियमों में बदलाव का मामला किसी तरह के राजनीतिक आयोजन को लेकर नहीं किया गया है। बाहरी आर्गनाइजेशंस के लिए जो भी नियम बनाए गए है, उनसे मेंबर्स के हितों की रक्षा होगी। इसके अलावा राष्‍ट्रवाद (nationalism) और गैरराष्‍ट्रवाद (anti-nationalism) जैसी बातों से भी इसे जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।

उन्‍होंने बताया कि वर्तमान में कार्यरत मैनजिंग कमेटी ने इस साल विभिन्‍न कार्यक्रमों के द्वारा 32 लाख रुपये का फंड जुटाकर संस्‍था को काफी बेहतर स्थिति में पहुंचा दिया है। इन कार्यक्रमों में प्रेसवार्ता समेत विभिन्‍न सांस्‍कृतिक कार्यकम भी शामिल हैं।

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