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चीन की मीडिया ने भारत को खामियाजा भुगतने की दी धमकी...
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। चीन को ताइवान के साथ भारत के बढ़ते रिश्ते रास नहीं आ रहे हैं। दरअसल ताइवान के महिला सांसदों की एक टीम भारत दौरे पर है और यह बात चीन की मीडिया को पसंद नहीं आ रही। चीन की मीडिया ने भारत को को आगाह किया है कि बीजिंग को चुनौती देने का नई दिल्ली
समाचार4मीडिया ब्यूरो 9 years ago
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
चीन को ताइवान के साथ भारत के बढ़ते रिश्ते रास नहीं आ रहे हैं। दरअसल ताइवान के महिला सांसदों की एक टीम भारत दौरे पर है और यह बात चीन की मीडिया को पसंद नहीं आ रही। चीन की मीडिया ने भारत को को आगाह किया है कि बीजिंग को चुनौती देने का नई दिल्ली को खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
वैसे ताइवान के महिला सांसदों का ये दौरा दोनों देशों के बीच दिसंबर 2016 में बने संसदीय मित्रता फोरम के तहत रिश्ते सुधारने की कवायद का हिस्सा है।
सरकारी समाचार पत्र ग्लोबल टाइम्स में ‘नई दिल्ली को ताइवान कार्ड खेलने का खामियाजा भुगतना पड़ेगा’ शीर्षक से प्रकाशित एक आलेख में कहा है, ताइवान के मुद्दे पर चीन को चुनौती देकर भारत आग के साथ खेल रहा है।
अखबार में प्रकाशित आलेख में कहा गया है, ऐसे समय में जब अमेरिका के नए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ताइवान के मुद्दे पर चीन को चुनौती नहीं देकर एक चीन की नीति पर सहमत होने और इसका सम्मान करने का फैसला किया है, भारत ने मुश्किल खड़ी की है।
लेख में आगे लिखा है, ‘कुछ भारतीय ताइवान को चीन की दुखती रग मानते हैं। भारत लंबे वक्त से ताइवान, दक्षिण चीन सागर और दलाई लामा के मसलों को चीन के साथ मोलभाव के लिए इस्तेमाल करना चाहता है। ताइवान में आजादी का समर्थन करने वाली ताकतें दुनिया भर में अलग-थलग पड़ी हैं। ऐसे में चीन को रोकने के लिए ताइवान का इस्तेमाल करने वाले देशों को नुकसान उठाना पड़ेगा।
लेख में दावा किया गया है कि पाकिस्तान के कब्जे से गुजरने वाले चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर के मद्देनजर पीएम मोदी को ताइवान कार्ड के इस्तेमाल की सलाह दी गई। भारत 'वन चाइना' नीति के एवज में बीजिंग से 'वन इंडिया' नीति का भरोसा चाहता है।
ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक, ताइवान का निवेश भारत के 'मेक इन इंडिया' कार्यक्रम के लिए अहम है। लेकिन चीन भारत के सबसे अहम कारोबारी साझीदारों में से एक है। ऐसे सियासी झगड़ों से दोनों देशों में आर्थिक सहयोग कठिन होगा।
ताइवान के सांसदों के प्रतिनिधिमंडल के संदर्भ में आलेख में सवाल उठाया गया है। इसमें कहा गया है, भारत और ताइवान के बीच आम तौर पर उच्चस्तरीय यात्राएं नहीं होती हैं, ऐसे में भारत ने इस समय में यात्रा के लिए ताइवान के प्रतिनिधिमंडल को क्यों आमंत्रिात किया?
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