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'Zee हिन्दुस्तान' को क्यों किया गया लॉन्च, जानें 'Zee Media' के मेहराज दुबे से...
‘एक्सचेंज4मीडिया’ (exchange4media) के पिच टॉप 50 ब्रैंड्स के रंगारंग समारोह में...
समाचार4मीडिया ब्यूरो 7 years ago
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
‘एक्सचेंज4मीडिया’(exchange4media) के पिच टॉप 50 ब्रैंड्स(Pitch Top 50 Brands) के रंगारंग समारोह में 'एक्सचेंज4मीडिया' के रुहैल अमीन ने 'जी मीडिया कॉरपोरेशन लिमिटेड' के वाइस प्रेजिडेंट मेहराज दुबे से 'New League of National Channels' पर बातचीत की। मेहराज इन दिनों 'जी मीडिया कॉर्प' के मार्केटिंग डिपार्टमेंट की कमान संभाले हुए हैं।
प्रस्तुत हैं इस बातचीत के प्रमुख अंश:
आजकल मार्केट में पहले से ही बहुत सारे चैनल्स हैं और मारामारी मची हुई है। ऐसे में एक और चैनल को लॉन्च करने के पीछे क्या सोच अथवा उद्देश्य था?
आपका कहना बिल्कुल सही है। आजकल मार्केट में बहुत सारे न्यूज और टीवी चैनल्स हैं जबकि टीवी स्क्रीन एक ही है। यह स्थिति अखबार के बिल्कुल विपरीत है, जहां पर दूसरे पेज के लिए हमेशा स्कोप रहता है। नए चैनल को लॉन्च करने के पीछे यही सोच थी कि दर्शकों को अलग सेगमेंट में कुछ परोसा जाए। आजकल न्यूज चैनल्स तो बहुत सारे हैं लेकिन वे सिर्फ नेशनल न्यूज चैनल हैं। 'जी हिन्दुस्तान' को शुरू करने के पीछे यही सोच थी कि दिल्ली-मुंबई से हटकर भी कुछ देखा जाए।
'जी मीडिया' के 40 से ज्यादा न्यूज चैनल्स और अन्य न्यूज ब्रैंड्स सिर्फ स्टोरी के बारे में बताते हैं। दिल्ली और मुंबई से हटकर भी कई स्टोरी दिखाई गई है। पूरे देश से कई अच्छी स्टोरीजी आती है। 'जी हिन्दुस्तान' यह ऐसा हिंदी न्यूज चैनल है जिसकी शुरुआत में दक्षिण भारत में भी डिस्ट्रिब्यूशन किया गया है और सिर्फ एक साल के अंदर ही 50 मिलियन दर्शक हर हफ्ते ये चैनल देखते हैं।
जब आप ब्रैंड बिल्डिंग की बात करते हैं तो इसमें आपकी कंपनी के नाम का कितना योगदान रहता है और उसकी कितनी मदद मिलती है?
बिल्कुल, हमारे पास आज काफी संसाधन और मजबूती है। लेकिन यदि मैं यह कहूं कि ये सोचना 'जी' के लिए एक और चैनल लॉन्च करना बहुत आसान था, तो यह व्युअर्स की ताकत को कम करके आंकना होगा। न्यूज व्युअर्स आजकल काफी स्मार्ट हो गए हैं। उनके पास बहुत सारे विकल्प हैं। उन्हें पारदर्शिता पसंद है और वे आपके झुकाव और तटस्थता को तेजी से समझ जाते हैं। ऐसे में यह किसी के लिए आसान नहीं है।
ऐसा नहीं है। किसी भी नए चैनल के लिए मार्केट में हमेशा स्पेस रहता है और हम अपने आप में ही प्रतिस्पर्धा नहीं करते हैं। वे अलग तरह के चैनल्स हैं। शहरी मार्केट में बिना ज्यादा परेशानी के उत्तर प्रदेश समेत विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में 'जी हिन्दुस्तान' काफी अच्छा कर रहा है। यहां तक कि कई ट्रेडिशनल न्यूज चैनलों को यह कड़ी चुनौती दे रहा है।
रीजनल की बात करें तो आप इस मार्केट में किस तरह की ग्रोथ देख रहे हैं, क्या आप नितांत लोकल (Hyper Local) बनने जा रहे हैं अथवा आप सिर्फ हिंदी में काम कर रहे हैं?
अंग्रेजी न्यूज जो कि हफ्ते में 5 से 6 मिलियन दर्शक जुटाने की जद्दोजहद में लगे रहते हैं, के विपरीत रीजनल और हिंदी न्यूज चैनल्स में बहुत संभावनाएं हैं। ये सही है कि कई बार आपके नेशनल ब्रैंड्स और रीजनल ब्रैंड्स एक-दूसरे के पूरक बन जाएंगे क्योंकि ऐसा नहीं है कि रीजनल न्यूज व्युअर्स नेशनल चैनल्स अथवा नेशनल स्टोरीज नहीं देखते हैं।
हम अपनी बात करें तो हम ऐसी स्टोरी दिखाते हैं जो समय और दर्शकों के हिसाब से फिट बैठती हैं और इससे कोई समस्या नहीं रहती है। कुछ लोग सोचते हैं कि रीजनल चैनल्स नेशनल चैनल्स की कीमत पर दिखाए जाते हैं, लेकिन मैं ऐसा नहीं मानता। वहीं कुछ लोग ये भी सोचते हैं कि नेशनल न्यूज चैनल्स के लिए अब कोई जगह नहीं बची है, हालांकि मेरी राय इससे थोड़ी अलग है।
मेरा मानना है कि यदि टीवी में ग्रोथ आती है तो यह रीजनल सेगमेंट से आएगी।
आजकल डिजिटल पर भी काफी न्यूज देखी जा रही है और यह मीडियम काफी आगे बढ़ रहा है। मेरा मानना है कि यह सब ब्रैंड पर निर्भर करता है। व्युअर्स को इससे कोई ज्यादा मतलब नहीं है कि स्टोरी टीवी पर अथवा डिजिटल में देखी, उसे स्टोरी से मतलब होता है। मेरा मानना है कि हम ऐसे मार्केट में प्रवेश कर रहे हैं जहां पर स्टोरी बहुत महत्वपूर्ण है और ब्रैंड भी काफी महत्वपूर्ण है।
स्टोरी की बात करें तो उसके कई पैरामीटर होते हैं जैसे- स्टोरी किसने बताई, क्या यह विश्वसनीय थी? क्या व्युअर्स ने उसको तवज्जो दी जिसने स्टोरी दिखाई? जैसा कि मैंने पहले भी कहा है कि कंज्यूमर्स आजकल बहुत स्मार्ट हो गए हैं? वे सब जानते हैं कि आप क्या हैं और क्या दिखाना चाह रहे हैं? आजकल उनके पास ढेरों विकल्प हैं। रही बात डिजिटल की तो हमारे न्यूज बिजनेस में इसने काफी अच्छा प्रदर्शन किया है, 150 मिलियंस पेज व्यूज के साथ। हमारे ब्रैंड्स इस मार्केट में बहुत बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।
मार्केट में फिलहाल 800 से ज्यादा टीवी चैनल्स हैं। क्या आपको लगता है कि अभी भी और चैनल्स के लिए गुंजाइश है?
यह कहना बहुत ही मुश्किल है कि भविष्य में क्या होगा। मार्केट में न्यूज ऑडियंस की बहुत सारी कम्युनिटीज हैं। आप इनमें से एक, दो, तीन अथवा चार का चुनाव कर सकते हैं। मैं न्यूज चैन्लों की संख्या पर कोई टिप्पणी नहीं करूंगा, क्योंकि उनमें से कई खत्म हो जाएंगे। यह तो मार्केट में टिकने की बात है। हम तो सिर्फ स्टोरीटैलर्स हैं और हमें लोगों को ऐसी स्टोरी बतानी हैं, जिस पर लोग विश्वास करते हैं।
हां, मार्केट और कड़ा होने जा रहा है। हालांकि पहले ऐसा नहीं था। यदि 10-15 साल पहले की बात करें तो मैं एक संवाददाता हुआ करता था और हमारे पास सिर्फ 2-3 न्यूज चैनल्स ही थे। अब तो हमारे चैनल्स भिन्न-भिन्न आधार यानी A LA CARTE की तरह उपलब्ध हैं। केबल अथवा डीटीएच प्लेटफॉर्म्स के द्वारा लोग उन चैनल्स को चुनकर ले सकते हैं, जिन्हें वे देखना चाहते हैं। अब काफी पारदर्शिता हो गई है और लोगों के पास ढेरों विकल्प भी हैं।
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