होम / इंडस्ट्री ब्रीफिंग / मजीठिया वेज बोर्ड पर हाई कोर्ट ने दिया ये बड़ा फैसला...
मजीठिया वेज बोर्ड पर हाई कोर्ट ने दिया ये बड़ा फैसला...
प्रिंट मीडिया से जुड़े पत्रकारों के लिए उत्तराखंड से एक अच्छी खबर सामने आई है...
समाचार4मीडिया ब्यूरो 7 years ago
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
प्रिंट मीडिया से जुड़े पत्रकारों के लिए उत्तराखंड से एक अच्छी खबर सामने आई है। दरअसल नैनीताल हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशें लागू करने का आदेश जारी किया है। इसके साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार को यह भी आदेश दिया है कि वह श्रमजीवी पत्रकार और अन्य मीडियाकर्मियों के लिए जारी केंद्र की 11 नवंबर, 2011 की अधिसूचना का पालन कराएं।
वरिष्ठ न्यायमूर्ति राजीव शर्मा व न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा की खंडपीठ ने राज्य सरकार को आन्ध्र प्रदेश, ओडिशा की तर्ज में उत्तराखंड में भी पत्रकार कल्याण कोष के लिए नियमावली तैयार करने का आदेश दिया है। इसके अतिरिक्त खंडपीठ ने कहा कि सरकार पत्रकारों की पेंशन बढ़ाने के साथ महंगाई के मानकों को भी पूरा करे, ताकि पत्रकार निर्भीक होकर कार्य कर सकें। कोर्ट ने कहा कि पत्रकारों को दी जा रही पांच हजार रुपए प्रतिमाह की पेंशन में बढ़ोतरी करें।
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि पत्रकारों के लिए हेल्थ स्कीम, हाउसिंग स्कीम का लाभ भी दें, जिसका नियंत्रण राज्य के प्रमुख मुख्य सचिव के पास होगा। इस बीच कोर्ट ने कहा है कि कलम की ताकत तलवार से ज्यादा ताकतवर होती है।
गौरतलब है कि पत्रकार रविन्द्र देवलियाल ने हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा था जिसमें पत्रकारों को आए दिन आने वाली परेशानियों की बात कही थी। साथ ही उन्होंने इस पत्र के माध्यम से पत्रकारों को पेंशन सुविधा देने की मांग भी की थी। याचिकाकर्ता ने कोर्ट से अपील की थी कि श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, राज्य सरकार व अन्य को निर्देश जारी किए जाएं कि ये मंत्रालय पत्रकारों की सामाजिक और आर्थिक जरूरतों को पूरा कराएं। इसके बाद कोर्ट ने पत्र का संज्ञान लिया था और इस पत्र को जनहित याचिका के रूप में स्वीकार किया था।
वहीं सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि पत्रकारों के लिए विभिन्न योजनाएं लागू हैं और इसके लिए पांच करोड़ रुपए अवमुक्त किए गए हैं। सरकार ने कोर्ट को बताया कि पत्रकार की हादसे में मौत या शारीरिक नुकसान होने पर सरकार पांच लाख रुपए और विशेष परिस्थितियों पर दस लाख रुपए देती है। उन्होंने कहा कि साठ वर्ष से अधिक सात पत्रकारों को इसी मद से वृद्ध पेंशन दी जा रही है। पत्रकारों के स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के लिए 25 लाख रुपए का बजट रखा गया है। मान्यता प्राप्त पत्रकारों को उत्तराखंड रोडवेज की बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा भी दी जाती है।
पक्षों की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट की खंडपीठ ने सरकार को आदेशित किया है कि वो ‘द वर्किंग जर्नलिस्ट एंड न्यूज पेपर एम्प्लॉइज एक्ट-1955’ के तहत पत्रकारों के श्रम कानून को लागू कराएं। न्यायालय ने कहा कि सेक्शन 9 के तहत केंद्र सरकार जरूरत पड़ने पर एक वेज बोर्ड बनाए। कोर्ट ने कहा कि 11 नवंबर 2011 की अधिसूचना के तहत पत्रकारों की स्थिति में सुधार लाएं।
टैग्स पत्रकार उत्तराखंड हाई कोर्ट मजीठिया वेज बोर्ड