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अगर मिस कर गए हैं तो इस वीकेंड जरूर देखिए ये स्पेशल शो
राजनीति के चढ़ते पारे के साथ सियासी रिश्तों में घुलती नफरत के बीच ‘आजतक’ ने...
समाचार4मीडिया ब्यूरो 7 years ago
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
राजनीति के चढ़ते पारे के साथ सियासी रिश्तों में घुलती नफरत के बीच ‘आजतक’ ने हास्य से लोटपोट एक अनोखी शुरुआत की है। अनोखी इस लिहाज से कि मौजूदा वक़्त में ऐसा कुछ कहीं नज़र नहीं आ रहा, हालांकि इस शुरुआत में 90 के दशक की एक झलक ज़रूर देखने को मिलती है। खास बात ये है कि इस शो को कोई न्यूज़ एंकर या मंझा हुआ पत्रकार नहीं बल्कि कवि के रूप में अपनी एक अलग पहचान बनाकर राजनीति के समंदर में डुबकी लगाने वाले कुमार विश्वास होस्ट कर रहे हैं। शो का नाम भी कुमार विश्वास के नाम पर ‘KV सम्मेलन’ रखा गया है। इस मनहर मंच पर कुमार राजनीति, खेल से लेकर सामाजिक मुद्दों और फिल्मों पर अलग अंदाज़ में अपनी बात रखते हैं और नामी-गिरामी हस्तियों को भी शो पर आमंत्रित किया जाता है।
‘KV सम्मेलन’ में हास्य है, व्यंग्य है, मसालेदार न्यूज का पंच है। बॉलिवुड से लेकर सियासी हस्तियों का, खेल के धुरंधरों से लेकर न्यूज मेकर्स का निराले अंदाज में इंटरव्यू है। राजनीति के दांव-पेंचों को हंसी, ठहाकों और मनोरंजन के माध्यम से जनता को समझाने की कोशिश है। ‘KV सम्मेलन’ न सिर्फ दर्शकों को गुदगुदाता है बल्कि पत्रकारिता की व्यंग्य विधा को जिंदा रखता है। ये शो मौजूदा राजनीतिक हालात पर तंज भी कसता है। कुमार विश्वास की एंकरिंग दर्शकों को रोमांच से भर देती है और कविताएं मंत्रमुग्ध कर देती हैं। कुल मिलाकर ‘KV सम्मेलन’ एक ऐसा मंच है, जहां न्यूज है, म्यूजिक है, मस्ती है, हास्य है, परिहास है, ठहाकों की गूंज है और है राजनीति पर कटाक्ष। जैसा कि कुमार कहते हैं 'जब तक मस्ती ज़िंदा है, तब तक हस्ती ज़िंदा है।', वो ही इस शो की थीम भी लगती है।
‘KV सम्मेलन’ एक बार फिर दर्शकों को 90 के दशक के सुपरहिट शो ‘मूवर्स एंड शेकर्स’ की याद दिलाता है, जिसे नए कलेवर, नए रंग में एक नए मंच पर पेश किया जा रहा है। ‘KV सम्मेलन’ का एक बड़ा पॉजिटिव पॉइंट यह भी है कि मूवर्स एंड शेकर्स को समाप्त हुए एक ज़माना हो चुका है, इसलिए ज़्यादातर यूथ शायद उससे इसको रिलेट न भी कर पाएं।
1997 से 2001 तक सोनी टेलीविज़न पर प्रसारित होने वाले मूवर्स एंड शेकर्स को शेखर सुमन होस्ट करते थे। उस दौर में सियासी हलचल और सामाजिक मुद्दों पर सटीक चोट करने के लिए इस शो को पहचाना जाता था। कुमार विश्वास की अपनी एक अलग शख्सियत ज़रूर है, लेकिन लगता है कि उन्होंने शेखर सुमन को काफी अच्छी तरह से स्टडी किया है। उनका खड़े होने, बोलने का अंदाज़ और बीच-बीच में संगीत मंडली की ओर देखकर कमेंट पास करना अपने आप शेखर सुमन की याद दिला देता है। शेखर न केवल माहिर अभिनेता और होस्ट रहे हैं, बल्कि इस तरह के शो में उन्हें महारत हासिल है। लिहाजा, ये देखने वाली बात होगी कि उनके पदचिन्हों पर चलते हुए क्या कुमार विश्वास उनके जैसी कामयाबी हासिल कर सकते हैं? फ़िलहाल, तो ‘KV सम्मेलन’ का पहला एपिसोड काफी धमाकेदार गया। यहां प्रॉडक्शन टीम भी तारीफ की हक़दार है, जिसने लगभग एक जैसे कंटेंट को नए अंदाज़ में परोसने के लिए अपना सबकुछ दांव पर लगा दिया। स्वेता सिंह के नेतृत्व वाली ये टीम इस उम्दा प्रॉडक्शन और स्क्रिप्टिंग के लिए बधाई की पात्र है।
29 सितम्बर को ऑन-एयर हुए पहले एपिसोड की शुरुआत कुमार विश्वास ने अपनी उसी शायरी के साथ की, जिसने उन्हें असल मायनों में प्रसिद्धि दिलाई यानी ‘कोई दीवाना कहता है...कोई पागल समझता है’। इसके बाद उन्होंने देश-दुनिया की कुछ ख़बरों को हास्य का तड़का लगाते हुए पेश किया। विश्वास को भी कहीं न कहीं इस बात का इल्म है कि शायद उनका शो लोगों को ‘मूवर्स एंड शेकर्स’ की झलक दे जाएगा, इसलिए उन्होंने शुरुआत में ही साफ़ कर दिया कि नक़ल के दौर में असल की उम्मीद करना ही बेमानी है। शो के आगाज़ को विस्फोटक बनाने के लिए नोटबंदी, जीएसटी और रुपए की कमजोरी जैसे ज्वलंत मुद्दों को उठाया गया। आम आदमी और विपक्ष की यही शिकायत रहती है कि प्रधानमंत्री ऐसे मुद्दों पर मौन रहते हैं, लेकिन इस शो में उन्हें जवाब मिले। हालांकि ये बात अलग है कि जवाब सीधे पीएम की तरफ से नहीं बल्कि उनके गेटअप में मौजूद कलाकार सिराज खान की ओर से आए। विश्वास के सवालों पर खान ने जिस अंदाज़ में जवाब दिए, उसने दर्शकों को खूब गुदगुदाया। इसके अलावा, मोदी की विदेश यात्राओं और वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी से उनके संबंधों पर भी चुटकी ली गई।
यहां देखें विडियो-
लगभग 45 मिनट
के ‘KV सम्मेलन’ को तीन भागों में विभाजित किया गया है। इसके दूसरे भाग में कवि वेद
प्रकाश, कवयित्री मुमताज़ नसीम और कवि शंभू शिखर को
आमंत्रित किया गया। जिन्होंने कश्मीर के वर्तमान हालात के साथ-साथ राफेल डील जैसे
भारी-भरकम और पेचीदा मुद्दों को बेहद सुलझे और व्यंग्यात्मक तरीके से सबके सामने
रखा। शो के तीसरे और आखिरी भाग में उदासी के पर्वत पर हथौड़ा चलाने के लिए उस शख्स
को बुलाया गया, जिसे ‘माउंटेन मैन’ कहा
जाता है यानी अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी। इस पूरे शो के दौरान कुमार विश्वास आम
आदमी पार्टी पर भी निशाना साधते नज़र आए। कुल मिलाकर कहा जाए तो कुमार और ‘KV सम्मेलन’ के लिए शुरुआत अच्छी रही, लेकिन अमूमन देखा गया है कि एक जैसी स्क्रिप्ट ज्यादा लंबे समय तक
दर्शकों को बांधे नहीं रख पाती।
कुमार को कविता पठन के अलावा अपनी ऑरिजिनल छवि भी विकसित करनी होगी। शेखर के पास लंबा अनुभव था, राजनीतिक कटाक्ष की धार कितनी तेज़ या कुंद रहेगी, वो बेहतर समझते थे, जबकि विश्वास के लिए यह बिल्कुल नया मंच है, लिहाजा कॉपी करने के फेर में वह खुद को और चैनल को नुकसान पहुंचा बैठेंगे। वैसे, इन बातों का फैसला तो वक़्त ही करेगा, लेकिन यदि आप टीवी चैनलों पर बहस के नाम पर होने वाली बेहूदा हरकतों से आजिज़ आ चुके हैं तो ‘KV सम्मेलन’ कुछ वक़्त के लिए ही सही, मगर आपका हाजमा दुरुस्त कर देगा।
हर शनिवार रात 8 बजे और रविवार दोपहर 1 बजे देश के नंबर-1 न्यूज चैनल आजतक पर ‘KV सम्मेलन’ का प्रसारण होता है।
समाचार4मीडिया की ओर से कुमार विश्वास और आजतक को शुभकामनाएं।
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