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तो क्या मोदी को लेकर कुछ पत्रकार इसलिए कहते हैं- ‘ना-बाबा-ना’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में पत्रकारों को मिलने वाली अनौपचारिक सुविधाओं को लेकर बहस छिड़ी हुई है
समाचार4मीडिया ब्यूरो 6 years ago
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में मीडिया सशक्त हुआ है या कमजोर? यह बहस का मुद्दा हो सकता है, लेकिन फ़िलहाल बहस इस बात पर छिड़ी हुई है कि क्या प्रधानमंत्री द्वारा पत्रकारों को मिलने वाली अनौपचारिक सुविधाओं पर चलाई गई कैंची ही उनके विरोध की वजह है? दरअसल, यह बहस सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे एक विडियो के बाद शुरू हुई है। इस विडियो में ‘डीडी न्यूज़’ के वरिष्ठ पत्रकार अशोक श्रीवास्तव सहित कुछ अन्य पत्रकार भी नज़र आ रहे हैं। अशोक श्रीवास्तव ने यह विडियो इस ट्वीट के साथ अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट किया, ‘समझिए क्यों भारत को ‘असहिष्णु’ और ‘लिंचिस्तान’ बना दिया कुछ पत्रकारों और बुद्धिजीवियों ने।‘ जिसके कुछ ही देर में यह वायरल हो गया और हर तरफ चर्चाएं शुरू हो गईं कि क्या चुनिंदा पत्रकारों द्वारा मोदी सरकार की नीतियों पर लगातार सवाल उठाने का एकमात्र कारण यही है?
यह विडियो एक कार्यक्रम का है, जिसमें अशोक श्रीवास्तव ने पत्रकारों से जुड़े कई रहस्यों पर से पर्दा हटाया। उन्होंने बताया कि किस तरह पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल में विदेशों दौरों पर जाने वाले पत्रकारों को ख़ास सुविधाएं दी जाती थीं। इन सुविधाओं का आशय यही होता था कि कलम चलाते वक़्त पत्रकारों का ध्यान केवल अच्छी-अच्छी बातों पर ही जाए। बकौल श्रीवास्तव, ‘पहले प्रधानमंत्री के डेलीगेशन में 100-150 पत्रकार जाते थे। विमान में तो उनकी खातिदारी होती ही थी, लेकिन जैसे ही वो होटल पहुंचते थे, उनके कमरे में ‘ब्लैक लेबल’ की एक बोतल रखी होती थी। जिसका इंतजाम विदेश मंत्रालय की तरफ से किया जाता था। इतना ही नहीं जो 24 घंटे का मीडिया सेंटर खोला जाता था, वहां भी पत्रकारों के लिए दुनिया के बेहतरीन व्यंजन होते थे, इसके अलावा बार की सुविधा भी हर समय उपलब्ध रहती थी। मैंने खुद पत्रकारों को वहां से महंगी-महंगी शराब अपने साथ भारत लाते देखा है।‘
श्रीवास्तव ने आगे बताया कि दौरे से वापसी के समय विमान में पहुंचते ही पत्रकारों के फिर से ‘ब्लैक लेबल’ की एक-एक बोतल दी जाती थी। यह सबकुछ अटल बिहारी वाजपेयी सरकार से लेकर मनमोहन सरकार तक चला, लेकिन मोदी के सत्ता संभालने के बाद से इस पर पूरी तरह लगाम लग चुकी है। अब कोई किसी पत्रकार को ‘ब्लैक लेबल’ की बोतल नहीं देता। अब जो मीडिया सेंटर खुलता है, वहां भी केवल चाय-बिस्किट होते हैं और कुछ नहीं।
अशोक श्रीवास्तव ने यह भी बताया कि किस तरह पिछली सरकारों में पत्रकारों के पास विदेशी दौरे से वक़्त निकालकर घूमना संभव होता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है। जिसकी वजह से पत्रकारों को थोड़ी परेशानी भी उठानी पड़ती है। श्रीवास्तव ने कहा ‘अटल जी मस्तमौला व्यक्ति थे। विदेशी दौरे पर कभी-कभी वह बोल दिया करते थे कि आज मैं आराम करूंगा, तो पत्रकारों को घूमने का अवसर मिल जाया करता था और विदेश मंत्रालय की तरफ से गाड़ी की व्यवस्था भी कर दी जाती थी। मनमोहन सिंह के साथ ऐसा था कि वह सुबह प्रोग्राम करते थे और शाम खाली रहती थी, लेकिन मोदीजी के साथ बिलकुल उलट है। वह सुबह नौ बजे पहला कार्यक्रम रखते हैं और रात को 9 बजे दूसरा, ऐसे में घूमने का समय ही नहीं बचता।’
श्रीवास्तव ने पीएम के सैन फ्रांसिस्को दौरे का जिक्र करते हुए बताया कि वहां कार्यक्रम इतनी देर तक चला कि पत्रकारों को खाना भी नसीब नहीं हो सका, क्योंकि सारे रेस्टोरेंट बंद हो गए थे। मोदी और मनमोहन काल के अंतर को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि पत्रकारों को मुफ्त की यात्रायें, शराब और महंगे गिफ्ट देने का जो चलन पहले था, वो अब ख़त्म हो गया है और जो पत्रकार इससे प्रभावित हुए हैं, वही कहते हैं कि मोदी अगेन ना-बाबा-ना। उन्होंने यह भी कहा कि ‘ऐसे पत्रकार फेक नैरेटिव खड़े करने में उस्ताद हैं और आपको बरगलाते भी हैं कि देश में अघोषित आपातकाल है, लोकतंत्र खतरे में है आदि। इसलिए ऐसे लोगों से बचकर रहें’।
पूरा विडियो आप यहां देख सकते हैं-
समझिए क्यों भारत को "असहिष्णु" और "लिंचिस्तान"बना दिया कुछ पत्रकारों और बुद्धिजीवियों ने।#narendramodicensored pic.twitter.com/0mUFfdFbrn
— Ashok Shrivastav (@ashokshrivasta6) April 4, 2019
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