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क्या ‘नेशनल हेराल्ड’ होगा बेघर, मुश्किल में फंसी कंपनी!
अंग्रेजी अखबार ‘नेशनल हेराल्ड’ स्वामित्व वाली कंपनी एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड...
समाचार4मीडिया ब्यूरो 7 years ago
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
अंग्रेजी अखबार ‘नेशनल हेराल्ड’ के स्वामित्व वाली कंपनी एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) को दिल्ली हाई कोर्ट से राहत मिलती नहीं दिख रही, क्योंकि एक तरफ केंद्र ने अपने आदेश में एजेएल को ‘हेराल्ड हाउस’ खाली करने को कहा है, तो वहीं दूसरी तरफ कोर्ट ने याचिका पर तुरंत सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। हालांकि एजेएल के वकील के शीघ्र सुनवाई पर जोर देने के बाद कोर्ट ने कहा कि वह केंद्र के आदेश को चुनौती देने वाली एजेएल की याचिका पर 15 नवंबर को सुनवाई करेगा। कोर्ट पहले दिसंबर में मामले की सुनवाई की तारीख तय कर रही थी।
बता दें कि शहरी विकास मंत्रालय ने एजेएल को दिए गए 56 साल पुराने पट्टे को खत्म कर दिया है और 30 अक्टूबर को अपने आदेश में एजेएल को 15 नवंबर को ही (गुरुवार) को परिसर खाली करने को कहा है। इस आदेश में यह भी कहा गया है कि यदि ये लोग परिसर खाली करने में असफल रहे तो उनके खिलाफ सार्वजनिक परिसर (अवैध कब्जाधारियों से मुक्त कराना) अधिनियम, 1971 के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। प्रकाशक ने शहरी विकास मंत्रालय के इसी आदेश को चुनौती देते हुए मंगलवार को अदालत का रुख किया था।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सुनील गौर ने मामले से जुड़ी फाइल के अदालत में अबतक नहीं पहुंचने की बात कहते हुए सुनवाई स्थगित कर दी और कहा कि फाइल के अध्ययन के लिए समय की जरूरत है। इसलिए वे आज (मंगलवार को) मामले पर सुनवाई करने में सक्षम नहीं हैं।
एजेएल की तरफ से उपस्थित अधिवक्ता सुनील फर्नांडिस ने कहा कि मामले में बिना कोई देरी किए हुए सुनवाई की जरूरत है क्योंकि उनसे 15 नवंबर तक कब्जा सौंपने को कहा गया है और उन्हें 30 अक्टूबर को भूमि एवं विकास कार्यालय (एलएंडडीओ) का आदेश मिला था, जिसके बाद अदालत छुट्टियों के चलते बंद हो गई थी।
वहीं केंद्र सरकार के वकील राजेश गोगना ने कहा कि वे प्रक्रिया शुरू कर रहे हैं और अगर एजेएल ने परिसर का कब्जा उन्हें नहीं सौंपा तो वे दोबारा घुस जाएंगे। तभी एजेएल के वकील के शीघ्र सुनवाई पर जोर देने के बाद अदालत ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख 15 नवंबर को तय की।
अदालत ने कहा, 'कोई जल्दबाजी नहीं है। वे जबरन नहीं घुसने जा रहे हैं। फिलहाल वे सिर्फ कागज पर कब्जा लेंगे।'
याचिका में एलएंडडीओ के आदेश को इस आधार पर रद्द करने की मांग की गई है कि यह 'अवैध, असंवैधानिक, मनमाना, दुर्भावना से प्रेरित और बिना प्राधिकार और अधिकार क्षेत्र' के दिया गया है। एजेएल ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार का यह आदेश प्रथम प्रधानमंत्री जवाहलाल नेहरू की विरासत को जानबूझकर बर्बाद करने की कोशिश है। एजेएल का कहना है कि आदेश राजनीति से प्रेरित है और इसका मकसद विपक्षी पार्टियों की असंतोष की आवाज को दबाना व बर्बाद करना है।
केंद्र सरकार ने कथित तौर पर कुछ महीने पहले परिसर का निरीक्षण किया था और पाया कि एजेएल को आवंटित क्षेत्र का बीते 10 सालों से अखबार के प्रकाशन के लिए इस्तेमाल नहीं हो रहा है।
एजेएल ने बताया कि वह बीते कई दशकों से अखबार का प्रकाशन कर रहा है। हालांकि, वित्तीय संकट की वजह से थोड़े समय से इसका प्रकाशन रुका रहा, लेकिन औपचारिक अखबार व डिजिटल मीडिया का संचालन पूरी तरह से बहाल था। एजेएल ने याचिका में अदालत को यह भी अवगत कराया गया है कि निरीक्षण के लिए आई समिति के सदस्यों ने कमरों का दौरा नहीं किया, जहां पेपर के भंडार सहित प्रिंटिंग प्रेस लगी हुई है।
गौरतलब है कि सप्ताहिक नेशनल हेराल्ड ऑन संडे का प्रकाशन 24 सितंबर, 2017 से फिर से शुरू हो गया है और इसे हेराल्ड हाउस दिल्ली से प्रकाशित किया जा रहा है। एजेएल ने 14 अक्टूबर से अपने साप्ताहिक हिंदी अखबार का फिर से प्रकाशन शुरू किया।
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