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दिल्ली में दो छात्रगुटों की लड़ाईं में कई पत्रकार हुए मारपीट का शिकार
दिल्ली यूनिवर्सिटी के रामजस कॉलेज के बाहर बुधवार को वामपंथी छात्र संगठनों और संघ की छात्र इकाई एबीवीपी के बीच हिंसक भिड़ंत हो गई। इस झड़प में कई पत्रकार, छात्र, शिक्षक और पुलिसकर्मी जख्मी हो गए। हमलावरों ने रामजस कॉलेज के पास प्रदर्शनकारियों पर ईंट, पत्थर और कांच की बोतलों का इस्त
समाचार4मीडिया ब्यूरो 9 years ago
दिल्ली यूनिवर्सिटी के रामजस कॉलेज के बाहर बुधवार को वामपंथी छात्र संगठनों और संघ की छात्र इकाई एबीवीपी के बीच हिंसक भिड़ंत हो गई। इस झड़प में कई पत्रकार, छात्र, शिक्षक और पुलिसकर्मी जख्मी हो गए।
हमलावरों ने रामजस कॉलेज के पास प्रदर्शनकारियों पर ईंट, पत्थर और कांच की बोतलों का इस्तेमाल किया। हिंदी न्यूज पोर्टल ‘कैच न्यूज’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जो पत्रकारों इस मारपीट का शिकार हुए हैं, उनमें ‘कैच न्यूज’ के असोसिएट एडिटर आदित्य मेनन, ‘द क्विंट’ की रिपोर्टर तरुणि कुमार, वेबसाइट ‘न्यूज़ क्लिक’ फोटो जर्नलिस्ट अपूर्वा चौधरी, 'इंडियन राइटर्स फोरम' के रिपोर्टर सौरवदीप रॉय समेत कई पत्रकार शामिल हैं।
इस संबंध में कैच न्यूज़ में पत्रकार शाहनवाज़ मलिक की एक रिपोर्ट प्रकाशित की है, जिसमें उन्होंने घायल हुए पत्रकारों से बात की, और ये जानने की कोशिश की वे कैसे इस घटना का शिकार बने। शाहनवाज़ की यह रिपोर्ट पढ़ने से पहले हम यहां आपको बता दें कि मामला क्या था-
दरअसल यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब मंगलवार को जेएनयू के छात्र नेता उमर खालिद और शेहला राशिद को रामजस में एक सेमिनार में बुलाने का निमंत्रण दिया गया, जिस पर एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने हंगामा शुरू कर दिया। इन छात्रों
की मांग थी कि ‘देश द्रोहियों’ को बुलाने का निमंत्रण रद्द किया जाए, जिसके बाद रामजस कॉलेज प्रशासन ने 'कल्चर ऑफ प्रोटेस्ट' नाम के दो दिवसीय कार्यक्रम में दोनों का निमंत्रण रद्द कर दिया था। लेकिन बुधवार को निमंत्रण रद्द करने के मसले को लेकर वामपंथी छात्र संगठनों के विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गए। हालांकि इस बढ़ते बवाल को देखते हुए प्रशासन ने बाद में सेमिनार को ही रद्द कर दिया।
बताते चलें कि शेहला राशिद जहां जेएनयू छात्रसंघ की पूर्व उपाध्यक्ष रही हैं, वहीं उमर खालिद उन 5 स्टूडेंट्स में से एक हैं जिनपर पिछले साल राजद्रोह का केस दर्ज हुआ था।
यहां पढ़िए पत्रकार शाहनवाज़ मलिक की वो रिपोर्ट, जिसमें बताया गया है कि किन-किन पत्रकारों पर हमला हुआ है-
दिल्ली यूनिवर्सिटी में एबीवीपी, डूसू और वामपंथी छात्र संगठनों के बीच बुधवार दोपहर हुए संघर्ष के दौरान कई पत्रकार हमले का शिकार हुए। हमलावरों ने रामजस कॉलेज के पास प्रदर्शनकारियों पर ईंट, पत्थर और कांच की बोतलों का इस्तेमाल किया। अभी तक पांच ऐसे पत्रकारों के बारे में पता चल पाया है जो इस मारपीट का शिकार हुए हैं।
आदित्य मेनन के मुताबिक मारपीट तकरीबन 2 बजे शुरू हुई। जेएनयू स्टूडेंट यूनियन की पूर्व उपाध्यक्ष शहला राशिद पांच-सात हमलावरों से घिरी हुई थीं। इनमें दो लड़कियां और पांच लड़के थे और उनके बाल खींचे जा रहे थे। मैं उनके क़रीब पहुंचा तो शहला ने मुझे पहचान लिया। वो मुझे अपना फोन देने की कोशिश कर रही थीं कि तभी मुझपर पीछे से हमला हो गया। उन्होंने मेरे बाल खींचे, तीन-चार थप्पड़ मारे और चश्मा तोड़ दिया।
तरुणि कुमार ने बताया कि वो क्विंट के हैंडल पर फेसबुक लाइव कर रही थीं जो अचानक बंद हो गया। फेसबुक लाइव के दौरान ही एक महिला बीच में आ गईं और उन्होंने बाल खींचना शुरू कर दिया। मेरा सिर झुंका हुआ था और मुझे बिल्कुल अंदाज़ा नहीं कि कितने लोग मुझे पंच कर रहे थे। मुझे पुलिस ने आकर बचाया, तब तक मेरा लेपल माइक और चश्मा टूट चुका था। हमलावरों ने मेरा फोन छीन लिया था, जो मुझे महिला कांस्टेबल के ज़रिए मिला लेेकिन उसकी स्क्रीन टूटी हुई थी। इस मारपीट में मेरा चश्मा गुम हो गया।
वेबसाइट न्यूज़ क्लिक के रिपोर्टर अविनाश सौरभ ने बताया कि उनकी सहयोगी कैमरामैन अपूर्वा चौधरी भी हमले का शिकार हुईं। उनकी पिटाई हुई और कैमरे का लेंस खींचने की वजह से वह टूटकर अलग हो गया। कैच से बातचीत के दौरान अविनाश मौरिस नगर थाने में थे और हमलावरों के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज करवा रहे थे।
अविनाश ने इंडियन राइटर्स फोरम के रिपोर्टर सौरवदीप रॉय को पिटते हुए देखा। उन्होंने बताया कि पिटने की वजह से सौरवदीप के कान लाल हो गए थे और वो भी मौरिस नगर थाने में हैं।
एक बड़े अख़बार की रिपोर्टर जो अपना नाम नहीं बताना चाहती हैं, उन्होंने कहा, 'फेसबुक लाइव करते वक्त मुझे धमकाकर ऐसा करने से मना किया गया। मैंने कहा कि मैं पत्रकार हूं, उन्हें आईडी दिखाई लेकिन वो नहीं सुन रहे थे। तभी एक लड़की ने मेरा फोन छीन लिया। मैं चीखी कि मैं पत्रकार हूं, मेरा फोन वापस करो। मैंने पुलिस की मदद से अपना फोन वापस लिया।'
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