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तो इस वजह से 277 प्रकाशनों के खिलाफ सरकार करेगी कानूनी कार्रवाई...
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। सूचना-प्रसारण मंत्रालय ने उन तमाम नकली प्रकाशनों के खिलाफ कानूनी कार्रवार्इ करने का मन बना लिया है, जिन्होंने गलत तरीके से डीएवीपी से सरकारी विज्ञापन लिए थे। बता दें कि छानबीन में ऐसे 277 फर्जी प्रकाशन सामने आए हैं, जो केवल विज्ञापन लेने के
समाचार4मीडिया ब्यूरो 9 years ago
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
सूचना-प्रसारण मंत्रालय ने उन तमाम नकली प्रकाशनों के खिलाफ कानूनी कार्रवार्इ करने का मन बना लिया है, जिन्होंने गलत तरीके से डीएवीपी से सरकारी विज्ञापन लिए थे। बता दें कि छानबीन में ऐसे 277 फर्जी प्रकाशन सामने आए हैं, जो केवल विज्ञापन लेने के लिए अखबार प्रकाशित करते थे।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले एक साल में इन प्रकाशनों ने लगभग दो करोड़ रुपए का विज्ञापन लिया है और इन प्रिंटिंग प्रेस में से कुछ तो एक दिन में मात्र 70 अखबार ही प्रकाशित कर रहे थे।
मामला संज्ञान में आते ही मंत्रालय ने डीएवीपी को निर्देश दिया कि वे उन प्रकाशनों के खिलाफ एफआर्इआर दर्ज कराए, जिनके खिलाफ छानबीन में पाया गया कि उन्होंने गलत तरीके से सरकारी विज्ञापन लिए थे।
दरअसल सरकार ने अब यह भी तय किया है कि गलत तरीके से सरकारी विज्ञापन हथियाने वाले प्रकाशनों से पूरा पैसा वसूला जाए।
बता दें कि हाल ही में मंत्रालय के संज्ञान में आया था कि कुछ प्रकाशन गलत तरीके से केंद्र सरकार के विभाग डीएवीसी से विज्ञापन ले रहे हैं। इसके बाद मंत्रालय ने अपने संबंधित मंत्रालयों को इस बारे में छानबीन के आदेश दिए, जिसमें 277 फर्जी प्रकाशन सामने आए, जिनके बारे में गलत ढंग से सरकारी विज्ञापन लेने की बात सामने आई। इसके बाद डीएवीपी की तरफ से इन तमाम प्रकाशनों को बाकायदा कारण बताओ नोटिस भेजा गया, जिनमें 277 में से केवल 118 प्रकाशनों से इस नोटिस का जवाब मिला, जबकि 159 प्रकाशनों ने इस नोटिस का जवाब देना तक जरूरी नहीं समझा।
हालांकि इसके बाद डीएवीपी ने सरकार को अपनी सिफारिश भेजी कि जवाब न देने वाले प्रकाशनों को विज्ञापन के लिए बने सरकारी पैनल से बाहर किया जाए, बल्कि उनसे सरकार द्वारा दिया पैसा भी वसूला जाए। इतना ही नहीं, मंत्रालय के तहत आने वाले दो विभागों डीएवीपी और अखबारों व पत्र पत्रिकाओं का रजिस्ट्रेशन करने वाली संस्था आरएनआई ने मिलकर कुछ संस्थाओं पर छापे भी मारे।
कुल 9 प्रकाशनों पर छापेमारी की गई, जिसमें से 5 दिल्ली एनसीआर और 4 लखनऊ के थे। इन छापों व सरकार द्वारा की गर्इ छानबीन में कर्इ तरह की गड़बड़ियां सामने आईं।
उल्लेखनीय हैं कि पिछले दो सालों में इन फर्जी प्रकाशनों को खासी रकम सरकारी विज्ञापन के जरिए दी गर्इ। मंत्रालयों से मिली जानकारी के मुताबिक, जहां साल 2015-16 में ऐसे प्रकाशनों को 1,95,44, 987 रुपए के विज्ञापन दिए गए, वहीं साल 2016-17 में अब तक 1,19,36, 172 रुपए के विज्ञापन दिए जा चुके हैं।
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