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‘नई दुनिया’ ने बताया- कान में छेद के चलते गावस्कर बन गए क्रिकेटर...
हिंदी दैनिक अखबार ‘नईदुनिया’ ने महान क्रिकेटर सुनील गावस्कर को लेकर एक रिपोर्ट प्रकाशित की, जिसमें उसने एक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि सुनील गावस्कर के साथ भी किस्मत एक बार खेल खेल चुकी है और उस समय यदि उनके चाचा ने सतर्कता न दिखाई होती, तो सुनील गावस्कर महान क्रिकेटर नहीं बल्कि समंदर या नदियों में मछली पकड़ने वाल
समाचार4मीडिया ब्यूरो 8 years ago
हिंदी दैनिक अखबार ‘नईदुनिया’ ने महान क्रिकेटर सुनील गावस्कर को लेकर एक रिपोर्ट प्रकाशित की, जिसमें उसने एक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि सुनील गावस्कर के साथ भी किस्मत एक बार खेल खेल चुकी है और उस समय यदि उनके चाचा ने सतर्कता न दिखाई होती, तो सुनील गावस्कर महान क्रिकेटर नहीं बल्कि समंदर या नदियों में मछली पकड़ने वाले एक गुमनाम मछुआरे होते। पढ़िए ये रिपोर्ट-
चाचा ने न देखा होता कान का छेद तो सुनील गावस्कर बन जाते मछुआरा
किस्मत भी कमाल होती है, यदि वह वक्त पर साथ दे दे तो फिर इंसान दुनिया जीत सकता है, लेकिन अगर वह ऐन वक्त पर साथ न दे तो फिर पूरी जिंदगी का रुख बदल सकता है।
महान क्रिकेटर सुनील गावस्कर के साथ भी किस्मत ने ऐसा ही खेल खेला था। यदि ऐन वक्त पर उनके चाचा सतर्कता न रखते तो सुनील गावस्कर महान क्रिकेटर नहीं बल्कि समंदर या नदियों में मछली पकड़ने वाले एक गुमनाम मछुआरे बन जाते।
किस्सा उस दिन का है जब सुनील गावस्कर का जन्म हुआ था। मां ने उन्हें जन्म दिया और रिश्तेदार, परिजन सब देखने आने लगे। बारी-बारी सबने सुनील को देखा लेकिन उनके चाचा मौसेरकर ने उन्हें गोद में लेकर बहुत गहरे मन से निहारा। इस दौरान उन्होंने देखा कि भतीजे के कान के पास एक छोटा-सा छेद है। बस यह बात उनके मन के किसी कोने में दर्ज हो गई। यहां तक तो सब कुछ ठीक था लेकिन जब अगले दिन वे फिर अपने नन्हे भतीजे से मिलने आए और उसे गोद में उठाकर खिलाने लगे तो अचानक चौंक गए।
दरअसल, जिस बच्चे को वे पहले दिन खिला रहे थे, वह ये नहीं था। इस बच्चे के कान के पास छोटा छेद नहीं था। वे तुरंत हरकत में आए और अस्पताल प्रबंधन को सूचना दी। स्टाफ प्रबंधन पहले तो कहने लगा कि आपको कोई गलतफहमी हुई होगी, लेकिन जब चाचा ने साफ तौर पर बताया कि मैंने अच्छी तरह बच्चे के कान के पास छेद देखा था तो अस्पताल स्टाफ सनी को ढूंढने पर राजी हुआ।
थोड़ी ही देर बाद पास वाले कमरे में कान के पास छेद वाला बच्चा मिल गया। जब पड़ताल की तो पता चला कि नर्स की गलती से सनी को एक मछुआरे की पत्नी के पास सुला दिया गया था जबकि मछुआरे का बेटा सनी की मां के पास सुला दिया गया था। निश्चित रूप से दवाई देने या अन्य किसी समय यह गलती हुई थी, मगर सनी के चाचा की सतर्कता ने इस गलती को सुधार दिया। अगर सुनील गावस्कर के चाचा की नजरें पारखी नहीं होती तो सोचिए कि सुनील गावस्कर आज मछुआरे होते और भारतीय क्रिकेट का एक महान सितारा देश को मिलता ही नहीं।
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