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चुनावी सीजन में कुछ यूं जलवा दिखा रहे केबल चैनल्स
लोकसभा चुनाव के दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर राजनीतिक विज्ञापन...
समाचार4मीडिया ब्यूरो 6 years ago
समाचार4मीडिया ब्यूरो।।
लोकसभा चुनाव के दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर राजनीतिक विज्ञापन दिए जा रहे हैं। इसके साथ ही देशभर के लोकल केबल चैनल्स भी चुनावी सीजन में पीछे नहीं हैं और उन्हें काफी राजनीतिक विज्ञापन मिल रहे हैं।
इंडस्ट्री से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि यदि लोकल केबल चैनल्स को मिलने वाले राजनीतिक विज्ञापनों की बात करें तो वर्ष 2014 में हुए लोकसभा चुनाव के मुकाबले इनमें सौ प्रतिशत से ज्यादा वृद्धि हुई है। केबल चैनलों पर खरीदारी करने और मीडिया योजना में विशेषज्ञता रखने वाली एक एजेंसी 'अपडेट एडवर्टाइजिंग' के संस्थापक और प्रबंध निदेशक शरद अल्वे का कहना है कि वर्ष 2014 में जहां केबल चैनल्स पर 20 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे, इस साल यह आंकड़ा 50 करोड रुपए तक पहुंचने की उम्मीद है।
वहीं, ‘भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण’ (TRAI) के नए टैरिफ ऑर्डर का भी इन चैनलों को लाभ मिला है। ऐसे केबल चैनल्स डिस्ट्रीब्यूटर्स (केबल ऑपरेटर) के बेस पैक का हिस्सा होते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, ‘कोई भी उम्मीदवार अपने चुनावी कैंपेन के दौरान केबल चैनल्स पर पचास हजार रुपए से लेकर एक लाख रुपए तक खर्च करता है। आजकल एंटरटेनमेंट, मूवी, म्यूजिक और न्यूज जॉनर में तमाम लोकल चैनल्स है और प्रत्येक चुनाव क्षेत्र में ऐसे चैनल्स की संख्या 20-25 से ज्यादा है। इसका मतलब है कि इन चैनलों के द्वारा प्रत्येक चुनाव क्षेत्र पर लक्ष्य साधा जा सकता है। उदाहरण के लिए ऐसे न्यूज चैनलों पर स्थानीय स्तर पर राजनीतिक दलों को अपनी बात रखने का मौका मिलता है और वे अपने अच्छे कामों को बेहतर ढंग से लोगों को बता सकते हैं। अन्य चैनलों इस्तेमाल चुनाव प्रचार के लिए किया जा सकता है। इसके अलावा केबल चैनलों पर विज्ञापन देना खर्च के मामले में भी सस्ता पड़ता है, इसलिए भी राजनीतिक दल अथवा उम्मीदवार इन्हें चुनते हैं।‘
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि कई बार लोकल केबल चैनल्स अन्य मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जगह ले लेते हैं। जैसे कि छत्तीसगढ़ में पिछले विधानसभा चुनाव में राजनीतिक दलों ने वोटर्स तक पहुंचने के लिए बड़े पैमाने पर केबल चैनल्स का सहारा लिया था, क्योंकि इन क्षेत्रों में आउट़ोर विज्ञापन बड़े पैमाने पर कारगर नहीं होता है। यदि टीवी पर विज्ञापन देने की बात करें तो छोटे राजनीतिक दलों के लिए लोकल केबल चैनल्स खर्च के मामले में मुफीद रहते हैं, जबकि बड़े राजनीतिक दल इन पर इसलिए विज्ञापन देते हैं, क्योंकि ऐसे चैनल्स की स्थानीय पहुंच ज्यादा होती है।
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