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सोशल मीडिया से क्यों बना रखी है दूरी, News24 की अनुराधा प्रसाद ने बताई वजह
देश में पहली बार मीडिया और मीडिया एजुकेशन पर ‘समाचार4मीडिया’ व ‘एक्सचेंज4मीडिया’...
समाचार4मीडिया ब्यूरो 7 years ago
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
देश में पहली बार मीडिया और मीडिया एजुकेशन पर ‘समाचार4मीडिया’ व ‘एक्सचेंज4मीडिया’ द्वारा आयोजित ‘मीडिया एंड मीडिया एजुकेशन समिट’ (Media & Media Education Summit) कार्यक्रम में ‘News24’ और ‘BAG’ की चेयरपर्सन अनुराधा प्रसाद ने कहा कि आजकल हम फ्रंटफुट पर खड़े हैं और भविष्य पर नजर रखते हुए चलते हैं। यही कारण है कि हमने भी ऐप तैयार किया है। उनका कहना था, ‘हमें हमेशा आगे की ओर देखना चाहिए और नई चीजें सीखते रहना चाहिए। आजकल पत्रकारिता के छात्रों को अच्छी प्रैक्टिकल शिक्षा की जरूरत है। आजकल दुनिया बदल रही है। ऐसे में मार्केट में बने रहने के लिए पत्रकारिता के छात्रों को भी उसी के हिसाब से बदलाव करने होंगे।’
अनुराधा प्रसाद का कहना था, ‘मीडिया एक्सपर्ट को भी इसमें अहम भूमिका निभानी होगी और उन्हें छात्रों को सिखाना होगा कि सही न्यूज और फेक न्यूज में वे कैसे अंतर कर सकते हैं। यदि आज कोई मोबाइल पर फिल्म बना रहा है तो यह काफी आसान और अच्छी बात है, क्योंकि लोगों के हाथ में एक टूल है, जिसकी मदद से वे अपना काम आसानी से कर सकते हैं और उन्हें इसके लिए किसी पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है।’ अनुराधा प्रसाद का कहना था, ‘हमारे लिए मीडिया का फ्यूचर काफी अच्छा है। यह आपके ऊपर निर्भर करता है कि आप इसे कैसे देखते हैं।’
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के लोगों को हर दिन सीखते और नई खोज करते रहना चाहिए, क्योंकि मैंने जो कल सीखा था, वो तो मैंने सीख लिया और आज क्या नया होना चाहिए, इसकी सोच हमेशा रहनी चाहिए। ये उन लोगों के लिए और भी महत्वपूर्ण हो जाता है, जो पढ़ते हैं या फिर पढ़ाते हैं, क्योंकि आज जो हमने किसी और से सीखा, वो कल किसी और को सिखाएंगे, इसलिए हमें एक-दूसरे से मिलकर सीखते रहना चाहिए
अनुराधा ने आगे कहा कि ज्ञान होना चाहिए, लेकिन किताबी ज्ञान नहीं। इसलिए यह जरूर देखना चाहिए कि छात्रों को किस तरह से सिखाया जाए। उन्हें थ्योरेटिकल के साथ-साथ प्रैक्टिकल ट्रेनिंग भी दी जानी चाहिए और वहीं दूसरी तरफ, हमें कंज्यूमर की तरफ भी देखना पड़ेगा कि वे स्टोरी कैसे देख रहे हैं।
अनुराधा प्रसाद ने मीडिया से जुड़े शैक्षणिक
संस्थनों को मीडिया इंडस्ट्री के मुताबिक बदलने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जब
तक आप फ्रंटफुट पर नहीं आएंगे, तब तक आप भविष्य कभी नहीं देख सकते। हमें इसके
अनुसार अपने आप को भी बदलना होगा। जब तक हम भविष्य के साथ तालमेल नहीं बना पाएंगे, हम पीछे रह जाएंगे। मैं यह जरूर देखती
हूं कि मेरे छात्रों को सबकुछ सिखाया जाता है या नहीं, ताकि वे अपनी राय खुद विकसित
कर सकें।
उन्होंने कहा कि आज यदि कोई पत्रकारिता स्कूल या मीडिया कंपनी चला रहा है, तो उन्हें अपनी सोच बहुत स्पष्ट रखनी चाहिए। इसलिए, आप मुझे सोशल मीडिया पर नहीं पाएंगे, क्योंकि मुझे ऐसा लगता है कि कहीं न कहीं सोशल मीडिया पर रहने से दिमाग अस्थिर हो जाता है। मीडिया शिक्षकों की ये जिम्मेदारी होनी चाहिए कि पत्रकारिता की दुनिया में आने वाले छात्रों को ये सब चीजें सिखाएं।
इसके अलावा, उन्होंने नई टेक्नोलॉजी की बढ़ती जरूरतों पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा, ‘हमें नई टेक्नोलॉजी को अपनाने की जरूरत है और यह भी सुनिश्चित करने की जरूरत है कि ये हमें सही दिशा में मदद करे। यह कहना गलत होगा कि हमारा भविष्य बेरंग है। मेरे हिसाब से टेक्नोलॉजी, जर्नलिज्म और मीडिया को एक साथ मिलकर काम करने की जरूरत है।
(फोटो: सुरेश गोला)
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