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अरनब गोस्वामी का 'कथित राष्ट्रवादियों' पर करारा वार, उठाए कई सवाल
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। वरिष्ठ पत्रकार अरनब गोस्वामी ने ऐसे लोगों को आड़े हाथों लिया है जो राष्ट्रीयता के मुद्दे पर दोहरे मापदंड (double standards) अपनाते हैं। हालांकि अरनब गोस्वामी कुछ समय से टेलिविजन से दूर हैं और अपने नए वें
समाचार4मीडिया ब्यूरो 9 years ago
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वरिष्ठ पत्रकार अरनब गोस्वामी ने ऐसे लोगों को आड़े हाथों लिया है जो राष्ट्रीयता के मुद्दे पर दोहरे मापदंड (double standards) अपनाते हैं। हालांकि अरनब गोस्वामी कुछ समय से टेलिविजन से दूर हैं और अपने नए वेंचर ‘रिपब्लिक’ (Republic) को लेकर खासा व्यस्त हैं। लेकिन देश के ऐसे कथित उदारवादियों को निशाना बनाने से वह नहीं चूके। अरनब का कहना है, ‘मैं हमेशा राष्ट्रगान के समय खड़ा होऊंगा और भारतीय सेना के पक्ष में बोलूंगा तो इसका मतलब यह थोड़े ही हो गया कि मैं संघी हो जाऊंगा।’
चेन्नई में हाल ही में हुए ‘FICCI FLO’ कार्यक्रम में उन्होंने सहिष्णुता (tolerance) के मुद्दों को उठाया जिसमें पिछली साल फिल्म अभिनेता आमिर खान और उनकी पत्नी किरण राव के बयान को लेकर काफी विवाद हुआ था। अरनब ने कहा, हमारे देश में सहिष्णुता इतनी असहिष्णु (intolerant) क्यों हैं और क्या अब हम लंबे समय तक इसे सहन कर सकते हैं?
उरी में 18 सितंबर 2016 को हुई उस घटना का जिसमें 19 सैनिक शहीद हो गए थे, अरनब ने कहा कि उस घटना का आखिर क्यों विरोध नहीं हुआ। अरनब ने कहा, ‘तब कोई कैंडल मार्च नहीं हुआ, कोई याचिका नहीं डाली गई। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) शांत था। कन्हैया कुमार गायब हो गया, वह कहीं नहीं दिख रहा था। तब हक के लिए कोई आवाज नहीं उठी। पाखंड तो देखिए कि वही लॉबी जो अपनी सुविधानुसार खुद को राष्ट्रहित का ध्वजवाहक बताती है, उसने तब कोई प्रदर्शन नहीं किया जब उरी (हमला) हुआ।‘
अरनब ने पूछा, ”क्या इस गणतंत्र में उन लोगों के प्रति सहनशीलता होनी चाहिए जो देश को नीचा दिखाते हैं?’ अरनब गोस्वामी का कहना था कि देश के युवाओं को गुमराह किया गया है। उन्होंने कहा, ‘राष्ट्रगान के समय खड़ा न होना एक फैशन ट्रेंड बन चुका है।’ उन्होंने सवाल उठाया कि राष्ट्रगान के सम्मान के स्थान पर क्या याकूब मेमन को सपोर्ट करना उदारवादिता (tolerance) है? यदि यही उदारवादिता है तो यह कहना उदारवादिता क्यों नहीं है कि हम पाकिस्तान के साथ तब तक बातचीत नहीं करेंगे, जब तक कि वह हमारे जवानों की हत्या करना नहीं रोक देता है। उल्लेखनीय है कि अरनब गोस्वामी का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब दिल्ली विश्वविद्यालय में बोलने की आजादी को लेकर बहस छिड़ी हुई है और वीरेंद्र सहवाग, बबीता फोगट, जावेद अख्तर, रणदीप हुड्डा आदि जैसी हस्तियां इस बहस में कूद चुके हैं।
अरनब गोस्वामी की अंग्रेजी में दी मूल स्पीच आप नीचे विडियो के जरिए भी देख सकते हैं...
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