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...'राष्ट्रीय सहारा' के आज के खास दिन को कुछ यूं याद किया सुब्रत रॉय ने

हिंदी अखबार जगत में अपना खास मुकाम बना चुका दैनिक अखबार ‘राष्ट्रीय सहारा’ के लिए आज बेहद खास दिन है। दरअसल आज ही के दिन इस अखबार ने यूपी के लखनऊ की सरजमीं पर अपना पहला कदम रखा था। लखनऊ से ‘राष्ट्रीय सहारा’ का प्रकाशन  16 फरवरी 1992 को शुरू हुआ था, और बहुत ही कम समय इसने तमाम अखबरों के बीच अपनी एक खास जगह बना ली। इसी

समाचार4मीडिया ब्यूरो 9 years ago

हिंदी अखबार जगत में अपना खास मुकाम बना चुका दैनिक अखबार ‘राष्ट्रीय सहारा’ के लिए आज बेहद खास दिन है। दरअसल आज ही के दिन इस अखबार ने यूपी के लखनऊ की सरजमीं पर अपना पहला कदम रखा था। लखनऊ से ‘राष्ट्रीय सहारा’ का प्रकाशन  16 फरवरी 1992 को शुरू हुआ था, और बहुत ही कम समय इसने तमाम अखबरों के बीच अपनी एक खास जगह बना ली। इसी मद्देनजर अखबार के प्रमुख सुब्रत रॉय ने सहारा के डिजिटल न्यूज पोर्टल (samaylive.com) पर एक विशेष संपादकीय लिखा है, जिसे आप यहां पढ़ सकते हैं-

विशेष संपादकीय : मीडिया को निभाना होगा अपना दायित्व

हिंदी दैनिक राष्ट्रीय सहारा की सर्वप्रथम शुरुआत नयी दिल्ली से 1991 में पत्रकारिता को पुनर्परिभाषित करने के संकल्प के साथ स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त को हुई थी। इसके अगले ही वर्ष 16 फरवरी 1992 में लखनऊ से इसका प्रकाशन आरम्भ हुआ। बहुत कम समय में ही इसने प्रदेश के अखबार जगत में अपना खास स्थान बना लिया। राजधानी लखनऊ से इसके 8 संस्करण प्रकाशित हो रहे हैं। हमें इस बात पर अत्यंत हर्ष हो रहा है कि राष्ट्रीय सहारा का लखनऊ संस्करण आज अपना रजत जयंती वर्ष मना रहा है।

राष्ट्रीय सहारा, लखनऊ ने छोटी अवधि में ही पाठकों के बीच अपनी पहचान बनाने में सफलता प्राप्त की तो इसका कारण संकल्प था। संकल्प यह था कि मीडिया उद्यम को व्यावसायिक नहीं बल्कि राष्ट्रीय आकांक्षाओं की पूर्ति का उद्यम बनाएंगे। राष्ट्रीयता हमारा धर्म होगा और पूरा भारत हमारा परिवार। हम मानवीय आदशरे से संचालित होंगे और सच्चाइयों को अपने कर्तव्य का आधार बनाएंगे। हमारा संकल्प था कि देश और समाज की चुनौतियों को हम अपनी चुनौती मानेंगे और नैतिक पत्रकारिता के उसूलों द्वारा इनका डटकर मुकाबला करेंगे। नफरत, सामाजिक भेदभाव, हिंसा और आतंकवाद जैसी सामाजिक बुराइयों के विरुद्ध अपने पाठकों को सचेत करेंगे और उन्हें ऐसी पठनीय सामग्री उपलब्ध कराएंगे, जिससे न केवल वे अपने परिवेश के प्रति जागरुक बनें बल्कि जिम्मेदार नागरिक भी बनें। हमारा यह भी संकल्प था कि हम अपने समूचे पत्रकारीय दायित्व को समाज और राष्ट्र निर्माण का दायित्व समझेंगे और इसके मार्ग में आने वाली किसी भी बाधा से विचलित नहीं होंगे, उनका डटकर मुकाबला करेंगे, मगर समझौतावादी रुख नहीं अपनाएंगे।

राष्ट्रीय सहारा लखनऊ का यह संकल्प ही था, जिसके कारण इसे अपने पाठकों का भरपूर प्यार मिला और देखते ही देखते यह प्रदेश का एक महत्वपूर्ण अखबार बन गया। प्रदेश के राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक आदि क्षेत्र में इसे स्वस्थ पत्रकारिता की मान्यता मिली। हमें गर्व है कि राष्ट्रीय सहारा लखनऊ पिछले 25 वर्षों में पत्रकारिता के उच्च मानदंडों को कायम रखने में सफल रहा है। इसकी सफलता का श्रेय सभी समर्पित पत्रकारों, कार्यकर्ताओं, सहयोगियों और शुभेच्छुओं को जाता है।

इधर मीडिया की भूमिका के बारे में जो बात मैं लगातार करता रहा हूं, उसे फिर दोहराना चाहता हूं। इसमें कोई संदेह नहीं कि आज की प्रौद्योगिकी प्रधान दुनिया में मीडिया बहुत बड़ी ताकत है। इसकी पहुंच हर व्यक्ति के जीवन तक है। अपनी व्यापक पहुंच के कारण मीडिया किसी भी तरह का प्रभाव पैदा करने में सक्षम है। अगर यह प्रभाव सकारात्मक दृष्टि से प्रेरित, राष्ट्र और समाज के हित में है तो मानना चाहिए कि मीडिया अपने दायित्व का सही निर्वाह कर रहा है लेकिन इधर जो प्रवृत्ति लगातार मजबूत हो रही है, वह मीडिया पर व्यावसायिक हितों और निजी स्वाथरे के हावी होते जाने की है। इस प्रवृत्ति के कारण मीडिया का बहुत बड़ा हिस्सा अपने वास्तविक दायित्व को भूलकर नकारात्मकता के सहारे अपने व्यवसाय का संचालन कर रहा है। इससे जुड़े लोगों के लिए न राष्ट्र का हित कोई मायने रखता है, न समाज का हित। अपने स्वाथरे की पूर्ति के लिए ये झूठ को सच और सच को झूठ बनाकर प्रस्तुत करते हैं। लूट-हिंसा-बलात्कार जैसे जघन्य अपराधों की खबर को बेहद बढ़ाचढ़ा का प्रस्तुत करते हैं, सांप्रदायिक हिंसा की छोटी सी घटना को भी राष्ट्रीय घटना बना देते हैं, आतंकवाद की कोई घटना घट जाए तो इसको सबसे बड़ी खबर बना देते हैं। वे भूल जाते हैं कि आतंकवादियों का उद्देश्य आतंक का प्रसार करना होता है। जब मीडिया इसका प्रसार करता है तो वह आतंकवादियों के उद्देश्यों की ही पूर्ति करने लगता है। इसके बावजूद मीडिया सनसनी पैदा करके तात्कालिक लाभ लेना चाहता है। यह भुला दिया जाता है कि तात्कालिक लाभ के लिए पैदा की गयी यह सनसनी लोगों के दिल-दिमाग पर कितना गहरा नकारात्मक असर डालती है। इससे लोगों के मन में डर, गुस्से और नफरत की भावनाएं पैदा होती हैं, जो उन्हें असामाजिकता की ओर धकेल देती हैं।

मीडिया की गैर जिम्मेदारी सभ्य समाज पर बहुत भारी पड़ रही है। इसे इसी तरह अनियंत्रित छोड़ दिया गया तो सामाजिक विघटन के गंभीर खतरे पैदा हो सकते हैं। मीडिया के इस नकारात्मक प्रभाव के बारे में देश का बड़ा बुद्धजीवी वर्ग मेरे विचारों से सहमत है। मेरा सवाल है कि इसके लिए आखिर हम क्या कर रहे हैं? मेरा मानना है कि वे लोग जानबूझ कर मीडिया का गलत इस्तेमाल करते हैं और अपने स्वार्थ के लिए राष्ट्र विरोधी या समाज विरोधी प्रवृत्तियों का बढ़ावा देते हैं, ऐसे लोग अपराधी हैं। उनके साथ अपराधियों जैसा ही व्यवहार होना चाहिए। उन्हें दंड के दायरे में लाया जाना चाहिए। राष्ट्र विरोधी या समाज विरोधी प्रवृत्तियों को बढ़ावा देने में जिस मीडिया संचालक, मीडिया प्रबंधक या मीडियाकर्मी का जितना बड़ा हाथ हो, उसके लिए उतने ही कड़े दंड का प्रावधान होना चाहिए। कहने का आशय यह है कि मीडिया की घातक नकारात्मकता पर रोक लगनी ही चाहिए फिर चाहे इसके लिए कोई भी उपाय क्यों न करना पड़े।

मेरा यह भी मानना है कि मीडिया के दुष्प्रभाव को रोकने में प्रिंट मीडिया यानी कि अखबार बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। इन्हें रोकने का सबसे कारगर उपाय है कि लोगों को उनके क्षुद्र स्वाथरे से बाहर निकालकर उनमें राष्ट्रीय चेतना और सामाजिक चेतना पैदा करना। मीडिया से जुड़े जो लोग राष्ट्रहित की भावना से ओतप्रोत हैं और समाज हित के प्रति जागरूक हैं, वे ही सकारात्मकता का वातावरण तैयार कर सकते हैं। अगर अखबार यह संकल्प लें कि वे प्रकाशित समाचारों और विचारों के माध्यम से लोगों में राष्ट्रीयता की भावना भरेंगे, उन्हें उनके कर्तव्य के प्रति जागरुक करेंगे, उन्हें अच्छी बातों के प्रति ग्रहणशील बनाएंगे तो नकारात्मक प्रभाव स्वत: ही कम होने लगेगा। अखबारों को यह प्रचारित-प्रसारित करना होगा कि भारत हमारा विशाल परिवार है, भारतीयता हमारा धर्म है, मानवीय आदर्शवाद हमारा जीवन-दर्शन है और उनके आधार पर नकारात्मकता को पराजित करते हुए बेहतर समाज और बेहतर राष्ट्र का निर्माण हमारा कर्तव्य है।

अंत में, मैं राष्ट्रीय सहारा लखनऊ संस्करण के 25 वर्ष पूरे होने पर मीडिया से जुड़े अपने सभी साथियो को हृदय से बधाई देता हूं, जिन महानुभावों ने किसी न किसी रूप में राष्ट्रीय सहारा, लखनऊ की विकास यात्रा में सहयोग किया है, उन्हें धन्यवाद देता हूं और उन लाखों पाठकों के प्रति आभार व्यक्त करता हूं, जिन्होंने इसे इतना प्यार दिया। प्रिय पाठकों को मैं आस्त करना चाहता हूं कि राष्ट्रीय सहारा, लखनऊ अपने आगामी दौर में अपनी सकारात्मक भूमिका को और अधिक मजबूती के साथ निभाता रहेगा और भारतीयता तथा स्वस्थ सामाजिकता के निर्वहन में अपना सार्थक योगदान करता रहेगा।

(साभार: samaylive.com)

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