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...इस खास दिन पर अखबारों और टीवी चैनलों की पौ-बारह हो जाती है: डॉ. वैदिक
डॉ. वेदप्रताप वैदिक वरिष्ठ पत्रकार ।। पाकिस्तान में वेलेंटाइन डे वेलेंटाइन डे जिस तरह से भारत और पाकिस्तान में मनाया जाता है, उसका विरोध होना स
समाचार4मीडिया ब्यूरो 9 years ago
डॉ. वेदप्रताप वैदिक
वरिष्ठ पत्रकार ।।
पाकिस्तान में वेलेंटाइन डे
वेलेंटाइन डे जिस तरह से भारत और पाकिस्तान में मनाया जाता है, उसका विरोध होना स्वाभाविक ही है। इस्लामाबाद के उच्च न्यायालय ने पूरे पाकिस्तान में ‘वेलेंटाइन डे’ पर प्रतिबंध लगा दिया है। उसे इस्लाम-विरोधी कहा गया है। जैसे भारत में शिवसेना, बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद आदि इस वेलेंटाइन डे का विरोध करते हैं, बिल्कुल वैसे ही पाकिस्तान में जमाते-इस्लामी जैसे संगठन इसके विरुद्ध हर 14 फरवरी को मोर्चा लगा देते हैं।
गनीमत है कि भारत में इस पर कोई कानूनी प्रतिबंध नहीं है। यों भी इसका बुखार अब उतर चुका है। मजे की बात यह है कि वेलेंटाइन की असली कहानी को जाने बिना ही वेलेंटाइन डे का समर्थन होता है और विरोध भी होता है। इसका समर्थन पश्चिमी जगत में इसलिए होता है कि वहां के युवक-युवतियों को इसके बहाने काफी यौन-स्वतंत्रता मिल जाती है। वे एक-दूसरे से काफी छूट ले लेते हैं। जैसे होली पर हमारे यहां बहुत-से मर्द और औरत मस्तक पर गुलाल लगाने के बहाने लक्ष्मण-रेखा पार कर जाते हैं और उनका कुछ नहीं बिगड़ता।
पश्चिमी जगत में इस दिन युवक-युवतियां एक-दूसरे को भेंट देते हैं, ग्रीटिंग कार्ड भेजते हैं, दावतें करते हैं। इन गतिविधियों से एक ही दिन में करोड़ों-अरबों डालरों का धंधा होता है। अखबारों और टीवी चैनलों की पौ-बारह हो जाती है। वेलेंटाइन डे का हमारे यहां विरोध इसलिए होता है कि इसे हम भारतीय परंपरा के विरुद्ध मानते हैं जबकि भारत और पाकिस्तान में जो लोग अपने आप को आधुनिक समझते हैं, वे वास्तव में नकलची होते हैं। वे वसंतोत्सव, मदनोत्सव, वसंत पंचमी या पतंगों का त्यौहार मनाने की बजाय वसंत का स्वागत वेलेंटाइन डे के रुप में करते हैं।
यदि हम वसंत संबंधी अपनी उत्सवों को ठीक से समझ लें तो बेचारा ‘वेलेंटाइन डे’ तो उनके आगे पानी भरे। यों भी वेलेंटाइन से डरने की कोई बात नहीं है। लैला-मजनूं और हीर-रांझा के लोगों को इस वेलेंटाइन से क्यों डरना चाहिए, जिस रोम के सम्राट क्लोडियस द्वितीय को जेल में इसलिए बंद कर दिया गया था कि वह कुंवारे फौजियों की शादी करवा दिया करता था। उसने कभी अनैतिकता का प्रचार नहीं किया। सम्राट ने उसे फांसी पर लटकाया, उसके पहले उसने जेलर की बेटी को जो पत्र लिखा उसके आखिरी शब्द थे- ‘तुम्हारे वेलेंटाइन की ओर से’! यह प्रेमियों का गुरु-मंत्र बन गया। प्रेम से बड़ी ताकत दुनिया में कोई और नहीं है। वेलेंटाइन एक प्रेमी संत था। प्रेम का मसीहा था। उसका विरोध और समर्थन करते समय हम इस तथ्य को न भूलें।
(साभार: नया इंडिया)
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