होम / इंडस्ट्री ब्रीफिंग / योगी की ताजपोशी की कहानी, टीवी पत्रकार दिनेश कांडपाल की जुबानी

योगी की ताजपोशी की कहानी, टीवी पत्रकार दिनेश कांडपाल की जुबानी

दिनेश कांडपाल सीनियर प्रड्यूसर, इंडिया टीवी ।। बीजेपी ने जब यूपी के लिये चुनाव प्रचार की रणनीति तय की उसी वक्त तय हो गया कि योगी आदित्यनाथ किस भूमिका में आगे बढ़ सकते हैं। बीजेपी की मजबूरी थी कि वो कोई एक नाम आ

समाचार4मीडिया ब्यूरो 8 years ago

दिनेश कांडपाल

सीनियर प्रड्यूसर, इंडिया टीवी ।।

बीजेपी ने जब यूपी के लिये चुनाव प्रचार की रणनीति तय की उसी वक्त तय हो गया कि योगी आदित्यनाथ किस भूमिका में आगे बढ़ सकते हैं। बीजेपी की मजबूरी थी कि वो कोई एक नाम आगे नहीं कर सकती थी। बिहार से सबक ले चुके बीजेपी के रणनीतिकार यूपी के लिये कोई भी कमज़ोर कड़ी छोड़ना नहीं चाहते थे। उस वक्त भी योगी बड़ा चेहरा तो थे लेकिन विपक्ष उनको आसानी से निशाने पर ले सकता था। योगी को निशाने पर रखकर विरोधी दल इतना शोर कर सकते थे कि बीजेपी का ध्यान भटक जाता। बीजेपी ने जिस लक्ष्य के लिये पिछले दो साल से तैयारियां शुरू कर दी थीं उसके लिये कोई भी चूक इस वक्त खतरनाक हो सकती थी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सामने विरोधियों के पास कोई चेहरा नहीं था, योगी आगे आते तो तुलनाएं शुरु हो सकती थीं।

किसकी पसंद थे योगी?

ये सवाल 18 मार्च को उस वक्त उठना शुरू हुआ जब योगी ने दिल्ली से लखनऊ के लिये उड़ान भरी। लखनऊ के वीवीआईपी गेस्ट हाउस में वैंकया नायडू और योगी की मुलाकात हुई तो राजनीतिक प्रेक्षक कौतूहल से भर गये। बड़े बड़े पंडित और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में अपनी बात का भरोसा न होने पर सूत्रों का हवाला लेने वाले रिपोर्टर सकते में आ गये। ये सवाल तो अभी तक नहीं उठा कि योगी को सीएम क्यों बनाया, सबसे बड़ा सवाल तो ये खड़ा हो गया कि योगी को सीएम किसने बनाया। दरअसल लोकसभा चुनाव में बंपर जीत के बाद से ही बीजेपी के लिये ये ज़रूरी हो गया था कि वो हिंदुत्व के प्रतीकों को आगे बढ़ाने पर गहराई से सोचे। राजनीतिक क्षेत्र के साथ साथ दूसरे सामाजिक क्षेत्रों में भी। केन्द्र सरकार कुछ नियुक्तियों में परेशानी देख चुकी थी, लेकिन एजेंडे से हटने का मतलब होता जनादेश का निरादर करना। योगी आदित्यनाथ हिंदुत्व का उग्र चेहरा हैं, लेकिन पिछले 6 महीने से शांत है। उनकी बातों में गंभीरता है, किसी रैली का भाषण हो या फिर टेलिविज़न शो का संवाद। योगी संयमित हैं।

सवाल पर लौटते हैं कि योगी आखिर किसकी पसंद हैं। आरएसएस के अनुषांगिक संगठनों से जुड़े लोग बताते हैं कि ये योगी आदित्यनाथ साझा रणनीतिक पसंद हैं। योगी को सीएम बनाने का विचार नागपुर से होकर दिल्ली नहीं आया। बल्कि नागपुर से दिल्ली के केशव कुंज और 7 लोक कल्याण मार्ग से अशोक रोड तक जहां भी भविष्य को लेकर मंथन हुआ वहां योगी फिट होते चले गये। बीजेपी को यूपी में जीत दिख रही थी, ज़ाहिर है नामों पर भी हाईकमान विचार कर ही रही होगी, इसलिये जब नतीजा आया तो दिल्ली में केवल दो लोग मंथन करते दिखे एक थे अमित शाह और दूसरे केशव प्रसाद मौर्य। फैसला तो हो चुका था, जिन्हें ज़रूरत थी उन्हें बता भी दिया गया था। मीडिया और नेताओं के बीच ब्रेकिंग का खेल खेला जा रहा था, अमित शाह ने उसे खेलने दिया।

योगी को कब बताया गया?

योगी आदित्यनाथ के तेवर दो आवरण लिये हुए थे। पूरे चुनाव के दौरान योगी का एक भी बयान विवादों में नहीं आया। योगी ने सुर तीखे रखे लेकिन शब्दों को संयमित कर लिया। आवाज़ बुलंद रखी लेकिन बातों को विवादों से दूर ही रखा। जो लोग पिछले 6 महीने से योगी को कवर रह रहे हैं वो ये अनुभव कर चुके होंगे की योगी खुद किसी बड़ी योजना की तरफ चल चुके हैं। योगी ने बीजेपी के लिये बतौर स्टार प्रचारक गाज़ियाबाद से लेकर गोरखपुर तक प्रचार किया। बीजेपी के उम्मीदवारों में पीएम मोदी और अमित शाह के बाद योगी सबसे बड़ी पसंद थे, ये संकेत भी पार्टी हाईकमान को बता रहे थे कि यूपी को किसका साथ पसंद हैं। पूरे चुनाव में योगी लगभग हर जगह गये और जमकर गरजे, लेकिन मर्यादा के दायरे में। योगी आदित्यनाथ को तैयार रहने के संकेत दिये जा चुके थे, उन्हें बता दिया गया था कि जीत के लिये मेहनत कीजिये और आगे के नक्शे पर कदम बढ़ाईये।

योगी को क्यों चुना गया?

जिन लोगों ने योगी आदित्यनाथ की शपथ को ठीक से देखा या सुना है उन्होंने गौर किया होगा कि यूपी के नये सीएम का नाम थोड़ा आगे पीछे हो गया है। हम जानते हैं य़ोगी आदित्यनाथ को लेकिन शपथ के दिन हमारा परिचय हुआ आदित्यनाथ योगी से। संत परंपराओं के देश वाला कोई भी शख्स बता सकता है कि पहले योगी लगता है उसके बाद नाम। यही बड़ी वजह है योगी के चुनाव की। 45 फीसदी ओबीसी, 21 फीसदी दलित और उसके बाद अगड़ी जातियों के पेंच, योगी नाम लगते ही बीजेपी ने उस बड़ी बाधा को पार कर लिया जिस पर उसके विरोधी चारों खाने चित होकर बैठ गये हैं। योगी की कोई जात नहीं है और यूपी में बिना जात के बात नहीं होगी। योगी आदित्यनाथ हिंदुत्व का वो छाता है जिसकी छांव में सारे जाति, पंथ बाहर की धूप में खुद को सुरक्षित महसूस करते हैं। बीजेपी हाईकमान जानता था कि उसे नया वोटर मिल तो गया लेकिन उसे सहेज कर रखना ज़रूरी है, इसलिये एक बिना जात वाले को आगे कर दिया और उस बंधन से पार पा गये।

कुल मिलाकर योगी में बीजेपी बड़ा भविष्य देख रही है और कुछ उत्साही देश का भविष्य भी देखने लगे हैं।


टैग्स
सम्बंधित खबरें

BSE व NSE ने इस मामले में 'बालाजी टेलीफिल्म्स' पर लगाया जुर्माना

टीवी और फिल्म प्रोडक्शन कंपनी बालाजी टेलीफिल्म्स (Balaji Telefilms Limited) पर स्टॉक एक्सचेंज ने जुर्माना लगाया है।

1 day ago

मैडिसन मीडिया सिग्मा की CEO वनिता केसवानी ने छोड़ा पद

मीडिया इंडस्ट्री से एक बड़ी खबर सामने आई है। वनिता केसवानी ने मैडिसन मीडिया सिग्मा (Madison Media Sigma) के सीईओ पद से इस्तीफा दे दिया है।

1 day ago

वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी में शाजिया फ़ज़ल को मिली ये बड़ी जिम्मेदारी

ग्लोबल मीडिया और एंटरटेनमेंट कंपनी वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी (Warner Bros. Discovery) में शाजिया फ़ज़ल को बड़ी जिम्मेदारी मिली है

1 day ago

अब RPSG मीडिया के CEO होंगे साहिल शेट्टी, 9 मार्च को संभालेंगे जिम्मेदारी

नेटवर्क18 स्टूडियो से अलग होने के बाद साहिल शेट्टी अब आरपीएसजी मीडिया (RPSG Media) में चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर (CEO) के तौर पर जुड़ने जा रहे हैं

2 days ago

'जिनेमा मीडिया एंड एंटरटेनमेंट' की बोर्ड मीटिंग आज, 14.80 करोड़ रुपये जुटाने पर होगा फैसला

जिनेमा मीडिया एंड एंटरटेनमेंट लिमिटेड ने स्टॉक एक्सचेंज को जानकारी दी है कि कंपनी की बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक सोमवार, 2 मार्च 2026 को होने जा रही है।

2 days ago


बड़ी खबरें

दुनिया को अलविदा कह गए वरिष्ठ पत्रकार व पूर्व राज्यसभा सांसद एच.के. दुआ

वरिष्ठ पत्रकार, राजनयिक और पूर्व राज्यसभा सांसद एच.के. दुआ का बुधवार को लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया।

13 hours ago

BSE व NSE ने इस मामले में 'बालाजी टेलीफिल्म्स' पर लगाया जुर्माना

टीवी और फिल्म प्रोडक्शन कंपनी बालाजी टेलीफिल्म्स (Balaji Telefilms Limited) पर स्टॉक एक्सचेंज ने जुर्माना लगाया है।

1 day ago

मैडिसन मीडिया सिग्मा की CEO वनिता केसवानी ने छोड़ा पद

मीडिया इंडस्ट्री से एक बड़ी खबर सामने आई है। वनिता केसवानी ने मैडिसन मीडिया सिग्मा (Madison Media Sigma) के सीईओ पद से इस्तीफा दे दिया है।

1 day ago

क्या पाकिस्तान अफगानिस्तान को हरा पाएगा: रजत शर्मा

तालिबान ने कहा कि उसके हमले में 55 से ज्यादा पाकिस्तानी सैनिक मारे गए, इनमें से 23 सैनिकों की लाशें भी अफगान लड़ाके अपने साथ अफगानिस्तान ले गए।

1 day ago

वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी में शाजिया फ़ज़ल को मिली ये बड़ी जिम्मेदारी

ग्लोबल मीडिया और एंटरटेनमेंट कंपनी वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी (Warner Bros. Discovery) में शाजिया फ़ज़ल को बड़ी जिम्मेदारी मिली है

1 day ago