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#MeToo: TOI ने एडिटर के खिलाफ उठाया ये कदम, पीड़िताओं ने कहा 'नाटक'
महिला पत्रकारों से यौन दुर्व्यवहार के आरोपों में फंसे ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ के सप्लीमेंट...
समाचार4मीडिया ब्यूरो 7 years ago
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
महिला पत्रकारों से यौन दुर्व्यवहार के आरोपों में फंसे ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ के सप्लीमेंट ‘कलकत्ता टाइम्स’ के एडिटर सताद्रू ओझा को वर्तमान जिम्मेदारी से मुक्त कर दूसरे शहर में तबादला कर दिया गया है। हालांकि अखबार की ओर से यह नहीं बताया गया है कि सताद्रू को किस शहर में भेजा गया है और उन्हें कौन सी नई जिम्मेदारी दी गई है।
सताद्रू पर ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की तीन पूर्व महिला पत्रकारों नसरीन खान, अमीता घोष और देबलीना चक्रवर्ती ने यौन दुर्व्यवहार के आरोप लगाए थे। ये सभी सताद्रू के नेतृत्व में काम करती थीं। इस बारे में एचआर डिपार्टमेंट में शिकायत करने और अखबार के मेट्रो सप्लीमेंट ‘eNewsroom’ की सह संस्थापकों में शामिल नसरीन खान द्वारा #MeToo कैंपेन के तहत यह मामला उठाने के बाद यह कार्रवाई की गई है।
अंग्रेजी वेबसाइट ‘NewsClick’ में छपी खबर के अनुसार, ‘eNewsroom’ की नेशनल एडिटर द्वारा जारी नोट में कहा गया है कि एक उच्च स्तरीय कमेटी यौन दुर्व्यवहार के सभी आरोपों की जांच करेगी। वरिष्ठ महिला एग्जिक्यूटिव की अध्यक्षता में गठित इस कमेटी में अधिकांश महिलाएं शामिल हैं। कमेटी में एनजीओ के प्रतिनिधियों और कानूनविदों को भी शामिल किया गया है।
वहीं, इन दिनों एक न्यूज चैनल में काम कर रहीं घोष ने अखबार द्वारा सताद्रू ओझा का तबादला किए जाने पर कहा, ‘हालांकि अखबार ने काफी अच्छा काम किया है, जो इससे पहले नहीं हुआ, लेकिन हम इस कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हैं, जिसमें आरोपी का सिर्फ तबादला किया गया है। हम न्याय चाहते हैं और चाहते हैं कि आरोपी से इस्तीफा लिया जाए।’
गौरतलब है कि अमीता ने 11 अक्टूबर को पुलिस में सताद्रू के खिलाफ उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई थी। अमीता का कहना था कि उत्पीड़न की वजह से उसे नौकरी छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा।
वहीं, नसरीन का कहना है कि आंतरिक जांच के नाम पर तबादले का नाटक किया गया है। इससे फायदा नहीं मिलेगा, बल्कि आरोपी नई जगह भी ऐसा काम करेगा। नसरीन का कहना है, ‘अखबार ने समाज में अपनी बदनामी को देखते हुए मजबूरन यह कार्रवाई की है। सच्चाई यह है कि आरोपी को निलंबित न कर उसे छुट्टी पर भेज दिया गया है। इससे साफ है कि अखबार अभी भी आरोपी को बचा रहा है। #MeToo कैंपेन और सोशल मीडिया के दबाव में अखबार को यह एक्शन लेना पड़ा है।‘
इससे पूर्व ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया था कि विस्तृत जांच के बाद पर्याप्त साक्ष्यों के अभाव में शिकायत को खारिज कर दिया गया था। अखबार के इस बयान पर नसरीन का कहना है कि अखबार का आधिकारिक बयान उसके पूर्वाग्रह को दर्शाता है।
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