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पढ़िए, क्या हुआ जब एक पत्रकार बिना तैयारी के लेने पहुंचा एक अभिनेत्री का इंटरव्यू
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। पत्रकारिता का नियम है कि जब भी किसी का इंटरव्यू करने जाए, तो उसके बारे में पूरी रिसर्च कर लें, ताकि उससे कोई ऐसा सवाल न पूछ लें कि इंटरव्यू देने वाला सिर ही पकड़ ले, या फिर आपका मजाक बन जाए। लेकिन ऐसा ही कुछ हुआ जानी-मानी अभिनेत्री रेणुका श
समाचार4मीडिया ब्यूरो 9 years ago
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
पत्रकारिता का नियम है कि जब भी किसी का इंटरव्यू करने जाए, तो उसके बारे में पूरी रिसर्च कर लें, ताकि उससे कोई ऐसा सवाल न पूछ लें कि इंटरव्यू देने वाला सिर ही पकड़ ले, या फिर आपका मजाक बन जाए। लेकिन ऐसा ही कुछ हुआ जानी-मानी अभिनेत्री रेणुका शहाणे साथ, जब एक बड़े अखबार के पत्रकार बिना तैयारी के उनका इंटरव्यू करने लगे।
रेणुका शहाणे ने बिना उस पत्रकार का नाम लिए उससे इंटरव्यू के दौरान हुई मजेदार बातचीत को फेसबुक पर शेयर किया है। उनकी ये पोस्ट वायरल हो गई है। खैर ये बातचीत मजेदार तो है लेकिन अपने काम को गंभीरता से न करने वालों के लिए एक सीख भी है। आइए आपको पढ़ाते हैं एक पत्रकार और रेणुका शहाणे के बीच हुई मजेदार बातचीत। रेणुका ने अपनी पोस्ट में उस पत्रकार को 'जे' नाम दिया है
जे: मैंम हम आपका इंटरव्यू करना चाहते हैं, एक कॉलम के लिए जो दिग्गज टीवी एक्टर्स के बारे में हैं।
मैं : ओके
जे : जितना मुझे याद है आपने ‘सुरभी’ के अलावा ‘स्वाभिमान’ में काम किया है, सही ना?
मैं: मैंने कई सीरियल किए हैं लेकिन 'स्वाभिमान' नहीं।
जे : अरे नहीं नहीं वो ‘शांति’ था, काफी पॉपुलर सीरियल भी था...
मैं : हां लोकप्रिय तो था पर मैं उसमें नहीं थी।
जें: तो फिर आप किस सीरियल में थीं? कृप्या मुझे अपने सीरियलों के नाम बताइए?
मैं: आपने अपना होमवर्क क्यों नहीं किया?
जे : प्लीज मैम अभी मेरी मदद कर दीजिए...मैं अगली बार से होमवर्क करूंगा...केवल कुछ और सवाल।
मैं: ओक
जें: क्या फर्क है उन सीरियल्स में जो आपने पहले किए थे और आज के सीरियल में?
मैं: जिन सीरियल में मैंने काम किया वो साप्ताहिक होते थे।
जे: साप्ताहिक (वीकली)?
मैं : हमारे पास अब डेली सोप हैं उन्हें डेली सोप इसलिए कहा जाता है क्योंकि वो रोज आते हैं, मेरे सीरियल को वीकली कहा जाता था क्योंकि वो हफ्ते में एक दिन आते थे।
जें : ओहहह...हफ्त में एक दिन? आपका मतलब है कि हर हफ्ते के लिए एक स्टोरी?
मैं : नहीं...अब मैं कैसे आपको समझाऊं? देखिए, दैनिक अखबार होते हैं, साप्ताहिक पत्रिकाएं होती हैं, पाक्षिक होते हैं और मासिक भी होते हैं... कुछ तो तीन महीने में भी प्रकाशित होते हैं? ठीक है?
जे : ओहहह... तो आपके पास तो बहुत विविध चीजें थीं जैसे साप्ताहिक, पाक्षिक।
मैं: नहीं नहीं...मैरा मतलब है हमारे पास विविधता थी... लेकिन मैं तो सिर्फ एनालॉजी ड्रॉ (मिसाल दे रही थी) कर रही थी ताकि आप अपने काम के हिसाब से आप इसे समझ सकें।
पॉज...
मैं : क्या आप यहां हैं?
जें: जी मैम.. मुझे लगा आप कुछ ड्रॉ कर रही है तो मैं वेट कर रहा था।
मैं: हममम... आप कुछ नोट भी कर रहे हैं क्या?
जे : मैम मेरी याद्दाश्त काफी अच्छी है...आपने 'सुरभी' में काम किया है और आपने 'शांति' में भी काम किया था जो कि साप्ताहिक था और आपने पंद्रह दिन और तीन महीने में एक बार आने वाले सीरियलों में भी काम किया था।
मैं: आप गजब हैं.. आपको सब कुछ याद है.. क्या अब मैं जा सकती हूं ड्रॉइंग करने।। ड्रॉइंग एनालॉजी।
जे: जी मैम.. अगर आप मुझे अपनी एलर्जी की ड्रॉइंग व्हाट्स एप करेंगी तो मैं इसे आपकी हॉबीज में रखूंगा। यह एक बहुत ही अनोखा कॉन्सेप्ट है।
रेणुका शहाणे द्वारा की गई मूल पोस्ट को आप यहां भी पढ़ सकते हैं:टैग्स