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वरिष्ठ पत्रकार जयंती की कहानी: रोड ट्रिप बनाम उड़ती-उड़ती खबरें
वरिष्ठ पत्रकार जयंती की कहानी: रोड ट्रिप बनाम उड़ती-उड़ती खबरें
समाचार4मीडिया ब्यूरो
8 years ago
जयंती रंगनाथन
सीनियर फीचर एडिटर
हिन्दुस्तान ।।
सीन 1
सामने दिख रही थी हवेली,शायद दो किलोमीटर दूर, पर चढ़ाई थी। सोना हांफती हुई पत्थर पर बैठ गई। आनंदआगे निकल गया, टिन्नी का हाथ पकड़ कर। टिन्नी ने पीछे मुड़ कर उसे देखते हुए कहा भी,‘डैड, मम्मी पीछे रहगई।’
आनंद ने पता नहीं क्या जवाब दिया,पर उसकी चाल तेज हो गई। इस वक्त उसे किसी भी तरह शिरीन की चालके साथ चाल मिलाना था। सोना का चेहरा तपने लगा।
आनंद ने तो गजब कर दिया। सबके सामने फ्लर्ट कर रहा है शिरीन के साथ,साथ में पत्नी है,बच्ची है। पहचानके दूसरे लोग भी हैं। सोना को लगा,तेजी से आनंद के पीछे दौड़ लगाए और उसकी पीठ पर एक धौल जमाए। वहऐसा कर नहीं सकती थी। या शायद कर सकती थी?
शीला आंटी हांफती हुई आकर उसके पास बैठ गई। अपने झोले से पानी की बोतल निकाल कर पानी पीने लगी।सोना की ओर बोतल बढ़ाती हुई बोली,‘आनंद कहां गया? आगे चला गया क्या?’
सोना ने हां में सिर हिलाया। पानी का दो घूंट लेकर वह उठ गई। शीला आंटी ने हाथ पकड़ कर रोक लिया,‘अरेबैठ ना दो मिनट। गपशप करते हैं। इतनी जल्दी है क्या हवेली देखने की?’
उनकी कालोनी में रहती हैं शीला आंटी। उनके पति रिटायर हो गए हैं। घूमने,दुनिया देखने के महान शौकीन।शीला आंटी हर दो महीने बाद कोई ट्रिप प्लान करती हैं और सबको इकट्ठा करती हैं। जैसे ही पंद्रह-सोलह लोगजमा हो जाते हैं, वे चल पड़ती हैं रोड ट्रिप पर लग्जरी बस से। सोना के तो जैसे वे पीछे ही पड़ गई थीं, साल भरसे। आनंद को उनकी कंपनी बोर लगती थी। पर इस बार पता नहीं कैसे तैयार हो गया राजस्थान के इस पांचदिन के ट्रिप पर।
सीन 2
पंद्रहवीं शताब्दी की हवेली। भूरी ईंट सा बना। बीच में बहुत बड़ा दालान। दीवारों का नीला रंग आंखों में चुभताहुआ।
टिन्नी ने कौतुहल से पूछा,‘मम्मा, यहां कौन लोग रहते थे?’सोना कुछ कहती, शीला आंटी बोल पड़ी,‘राजा-रानीरहते थे बिटिया। आज जैसे शाहरुख खान,आमिर खान हैं ना, बड़े-बड़े घरों में रहते हैं, वैसे ही…’
सोना झिडक़ते हुए बोली,‘ये क्या कह रही हैं आंटी? टिन्नी सच समझ लेगी, उसे सही बात बताइए…’
सोना टिन्नी का हाथ पकड़ कर आगे ले गई और हवेली के बारे में समझाने लगी। शीला आंटी लगभग दौड़ते हुएउसके पास आ गई,‘अरे, रहने दे ना। स्कूल में सीख लेगी। मेरी बात सुन। सबेरे क्या देखा मैंने पता है? वोशिरीन…’
दो पल को सोना के दिल की धडक़न रुक गई। कहीं आंटी ने आनंद को शिरीन के पीछे जाते तो नहीं देख लिया?
‘…नाश्ते के बाद मैं होटल के लॉन में टहल रही थी। वहीं,ये लडक़ी जोर-जोर से किसी से फोन पर बात कर रहीथी। पता है, हमें जो पट्टी पढ़ाती है कि कितनी बड़ी कंपनी में काम करती है, सब झूठ। उसके पास तो जॉब ही नहींहै। वही तो। मैंने सुना उसे बोलते हुए कि लौटने के बाद वह नौकरी ढूंढेग़ी। मुझे देखती ही,फोन बंद करके अंदरचली गई। ’
शीला आंटी ने ऐसे देखा, जैसे उन्होंने कोई ब्रेकिंग न्यूज सुनाई हो। सोना ने धीरे से कहा, ‘जाने दो ना आंटी, हमेंक्या करना है…वो नौकरी करे या मरे…।’सोना आगे चलने लगी। शीला आंटी को शायद उसकी बात अच्छी नहींलगी।
सीन 3
टिन्नी को हलका सा बुखार था। शाम से मौसम बदल गया। हलकी-हलकी बारिश। सोना का मन नहीं था बाहरघूमने का। आनंद तैयार हो रहा था। सोना ने पूछ लिया, ‘तुम जा रहे हो?’आनंद ने उसकी तरफ देखा,‘हम यहांकमरे में बैठने तो आए नहीं हैं।’
‘टिन्नी की तबीयत ठीक नहीं है। मैं नहीं आऊंगी।’
‘डॉक्टर ने दवाई दे दी है ना। तुम बस से नीचे मत उतरना।’
‘नहीं,..’
सोना ने आनंद की तरफ देखा, जैसे पूछना चाह रही हो, एक शाम अगर घूमने नहीं गया, तो क्या हो जाएगा?
कमरे की घंटी बजी, शीला आंटी थी, ‘भई सोना,तुम आ रही हो ना?’
‘ना आंटी। आप लोग जाइए। आनंद भी जा रहे हैं।’
‘ऐसा क्या? तुम दोनों को अकेले कैसे छोड़ दें? मैं भी नहीं जाती। मुझे भी हवेली में चल-चल कर घुटने में दर्द होनेलगा है। अच्छा है, तुम और मैं मिल कर खूब गपशप करेंगे।’
वैसे तो आंटी के गपशप से डर लगता है सोना को। पर इस वक्त उनका साथ रहना भला लग रहा है। आनंद चलागया, दूसरे भी चले गए। शीला आंटी नाइटी पहन कर उसके कमरे में आ बैठी। चाय और पकौडिय़ां मंगवा लीं।टिन्नी मां की गोद में सिर रख कर सो गई। आंटी के पास गप्पों की पोटली थी।
‘वो राखी पांडे है ना,वो ही ए ब्लॉक वाली। मुझे कल ही पता चला कि सेकंड मैरिज है उसकी। वो उसकी बेटी है नानुपुर, उसके पहले हज्बैंड से है। नुपुर कल बस में मेरे बगल में बैठी थी। बेचारी बारहवीं के बाद इंजीनियरिंगकरना चाहती थी,पर मिस्टर पांडे ने मना कर दिया। बोले, इतना खर्च नहीं उठा सकते।’
‘अच्छा, फिर?’
‘मॉल में काम करती है। प्राइवेट पढ़ाई कर रही है। मुझे तो लगता है उसकी शादी में भी कोई खर्चा नहीं करेंगेमिस्टर पांडे।’
‘राखी जी और पांडे जी तो हर साल मंदिर में भंडारा करवाते हैं ना आंटी? अपनी बेटी के लिए नहीं कर सकते?’
‘राखी की कोई चलती-वलती नहीं है पांडे के सामने। बस बाहर से बन-ठन कर रहती है।’
‘मैं तो उनको बहुत दबंग समझती थी।’
‘यही ना। अब तू मिसेज सोलंकी की सुन। तीन बार आईवीएफ ट्राई कर चुकी है। पर टायं-टायं फिस्स। अबबच्चा गोद लेगी। ठसक इतनी कि लडक़ी लेगी, खुद चुनेगी…’
‘ये तो अच्छी बात है ना आंटी। एक अनाथ बच्ची को जिंदगी मिल जाएगी। सो नाइस। मैं तो उनको बहुत रूखाकिस्म का समझती थी। पर देखो, कितना अच्छा काम करने जा रही है।’
‘सो तो है। और सुनेगी कि किस्सों का पिटारा बंद करूं?’
‘चालू रखिए आंटी, सबके लौटने में देर है अभी।’
सीन 4
सुबह डाइनिंग टेबल पर सबसे पहले पहुंच गई सोना टिन्नी को ले कर। आनंद नहाने गया था, इसलिए साथ नहींआया। गर्मागर्म आलू के परांठे और ऑमलेट ब्रेड। टिन्नी ने कहा कि वह ऑमलेट खाएगी।
सोना काउंटर पर खड़ी हो कर शेफ से ऑमलेट बनवाने लगी। उसके पीछे शिरीन आ खड़ी हुई। सोना को देख करउसने गुड मार्निंग कहा। सोना ने जवाब दे दिया। लंबी नीली स्कर्ट, सफेद टीशर्ट पर रंग-बिरंगा दुपट्टा, धुले-खुलेबाल, कानों में बड़ा सा कुंडल, स्मार्ट दिख रही थी शिरीन।
सोना को अपनी घिसी जीन्स और तुड़ी-मुड़ी शर्ट पर थोड़ी सी शर्मिंदगी हुई। पर वह तो ऐसे ही रहती थी हमेशा।
शिरीन ने मुलायम आवाज में पूछा, ‘आप कल आई नहीं घूमने?’
‘बेटी की तबीयत ठीक नहीं थी,’
‘ओह, अब कैसी है?’
सोना के कुछ कहने से पहले ही टिन्नी वहां आ गई। शिरीन ने उसे देख कर कहा,‘वाह, आप तो बिलकुल ठीक लग रहे हो।’
टिन्नी टुनकी,‘हां, मैं तो अच्छी हो गई। पूरा ऑमलेट खाऊंगी।’
शिरीन हंसने लगी। ऑमलेट बन कर आया। शिरीन भी उनके साथ ही अपना नाश्ता ले कर बैठ गई। हर वक्त गंभीरता का मुखौटा ओढ़े रहने वाली शिरीन घुलमिल कर बात कर रही थी,खास कर टिन्नी के साथ।
आधे घंटे में आनंद भी आ गया। शिरीन को सोना के साथ देख कर पल भर को चौंका, फिर वो भी वहीं बैठ गया। शिरीन ने बातों-बातों में जब आनंद को भाई साहब और सोना को भाभी कहा, तो सोना को हंसी आ गई। उसनेआनंद के चेहरे का रंग उड़ते साफ देख लिया।
उनके ग्रुप में शिरीन ही थी, जो अकेली इस ट्रिप पर आई थी। वह उनकी कालोनी में नहीं रहती थी। उसकी किसी दोस्त ने शीला आंटी के ट्रिप का जिक्र किया था, उसने कभी राजस्थान देखा नहीं था, इसलिए चल पड़ी।
नाश्ते के बाद भी वह सोना के साथ बाहर निकली। बस में उसके पास बैठी। टिन्नी उसकी गोद में। सोना को संभालेगी वो। खुले दिमाग की,शालीन।
शिरीन बोलती भी कम नहीं थी। बल्कि सोना तो सिर्फ सुन रही थी।
‘सोना, पता है आज अगर तुम नहीं मिलती, तो मैं वापस जाने की सोच रही थी। मैं पिछले दो दिनों में पक गई हूं। अजीब से लोग हैं। मैं क्या कोई अजूबा हूं? अकेली आई हूं तो क्या कोई पटाऊ चीज हूं? हद है।’
सोना को लगा कहीं वह आनंद के बारे में तो नहीं कह रही? वह भी तो यही कर रहा था।
‘तुम तो सबको जानती होगी ना?’
सोना ने नहीं में सिर हिलाया,‘बहुत कम। शीला आंटी मेरे पड़ोस में रहती हैं। उनकी वजह से आई हूं। हम दोनोंवर्किंग हैं, बहुत कम लोगों से मिल पाते हैं। मंदिरा, वो जो पिंक सूट में सामने बैठी है, उससे पहचान है। हम फिल्म वगैरह साथ चले जाते हैं।’
‘वो पिंक सूट वाली, तुम्हारी फ्रेंड है? मुझे तो बहुत अक्खड़ लगी। कल शाम पार्क में घूमते समय मेरा पैर गलती से उसकी सेंडिल पर पड़ गया। उसने इतना ड्रामा किया कि पूछो मत। सेंडिल का स्ट्रेप टूट गया। उसने मुझे चुन-चुन कर गालियां दी। तभी तो मैं सोच रही थी कि मैं वापस चली जाऊं। दिल भर गया मेरा। पर तुम मिल गई, तो इरादा बदल दिया।’
सोना ने सिर हिलाया। मंदिरा के हल्ले वाली बात तो उसे पता ही नहीं चली। मंदिरा थोड़ा रूखा बोलती है, पर ऐसा करेगी, सोचा ना था। अब तो वह उसे भी कस-कस कर ताने मारेगी कि शिरीन के साथ बहुत यारी हो रही है तेरी, क्या बात है?
सोना ने सिर झटका। लोगों को समझना कितना मुश्किल है। सोचने लगी…मंदिरा के साथ शायद उसकी एकतरफा दोस्ती है। मंदिरा उसे कभी घर नहीं बुलाती, पार्टी नहीं देती। सोना ही कूद-कूद कर उसे घर बुलाती है,उसके जन्मदिन पर तोहफा देती है, उसे फिल्म ले जाती है।
अंदर कुछ कचोटने सा लगा…क्या अब वह पहले की तरह मंदिरा के साथ दोस्ती रख पाएगी? तो ऐसे टूटते हैं भ्रम, बदलती है सोच…बस देखने का एक नजरिया क्या बदला, आदमी की शक्ल ही बदल गई।
शिरीन बकबक किए जा रही थी। सोना बस सिर हिलाती रही। दिमाग में कुछ भी दर्ज नहीं हुआ।
सीन 5
सुबह बस उदयपुर से कुछ सौ किलोमीटर दूर चाय-पानी के लिए रुकी। सोना ने खिडक़ी से झांक कर देखा, अच्छा सा लगा। मौसम भी और हरियाली भी। उसकी गोद में सो रही टिन्नी भी उठ गई, ‘मम्मा, आइसक्रीम…’
उसकी आवाज से सोते से आनंद उठ गए। आनंद ने लंबी जम्हाई ली, ‘उदयपुर आ गया? अच्छी सी चाय पीनी है।’
सोना सीट से उठ गई। अधिकांश लोग अभी भी सो रहे थे। उनके पीछे ही बैठी थी शिरीन। बंद आंखें। सिर ढलकाहुआ। सीने से दुपट्टा सरका हुआ। हलकी सी सांस लेती छोटी सी नाक। अचानक सोना ने की नजर आनंद परपड़ी, उसके चेहरे पर तृप्ति के भाव थे, आंखें टिकी थीं शिरीन पर।
सोना के देखचिहुंक उठा, ‘अरे, अपनी सहेली को उठाओ। नीचे उतर कर चाय-शाय पीते हैं।’
सोना का चेहरा तमतमा गया, वह जरा जोर से बोली, ‘मेरी या तुम्हारी? घूरते तुम हो, पीछे तुम पड़े रहतेहो…नाम मेरा?’
सोना टिन्नी का हाथ पकड़ कर बस से नीचे उतर आई। उसके पीछे-पीछे कुछ और लोग आ गए। शीला आंटी उसके पास आकर धीरे से फुसफुसाई, ‘सब ठीक है ना?’
‘हां, आप किसकी बात कर रही हैं आंटी?’
‘अरे, मुझसे क्यों छिपा रही है? अभी-अभी तो झगड़ रही थी आनंद के साथ।’
सोना का चेहरा लाल हो उठा। आंटी उसे भी नहीं छोड़ेंगी। अपनी आवाज को थोड़ा कम करके वह हलके लहजे मेंबोली,‘नहीं आंटी, वो तो बस.. हम दोनों छेड़ते रहते हैं एक-दूसरे को। ऐसी कोई बात नहीं है।’
शीला आंटी ने सिर हिलाया। पर सोना को पक्का यकीन था कि वह गपोड़ी आंटी चटखारे ले कर सबको यह सुनाएगी।
अचानक उसे शीला आंटी से डर लगने लगा। वह जान कर आनंद के पास जा कर बैठ गई। शीला आंटी भी उनके पास आकर जम गई। आनंद टिन्नी के लिए दूध लाने चले गए। आंटी चाय के साथ शुरू हो गईं,‘सोना, मुझे तो कल सारी रात बस में नींद ही नहीं आई। पता नहीं, कैसा सपना देख लिया.. मारे जलन केउठी। ’
‘तबीयत तो ठीक है ना?’
‘मेरी तबीयत को क्या होना है? चंगी हूं। लगता है रात जो चिकन खाया था ना, उसी में…चल छोड़ परे। तू बता। टिन्नी की तबीयत तो ठीक है ना? तेरे से कल पूरे दिन बात नहीं हुई। वो हीरोईन तुझे छोड़ ही नहीं रही थी।’
सोना ने आंख उठा कर उनकी तरफ देखा। आंटी अपनी रौ में बोलती जा रही थीं,‘जरा संभल कर रहना उस फुलझड़ी से। इधर का उधर करती रहती है। अच्छा मेरी बात सुन। देवेंदर है ना, जो हमेशा कुर्ता पहन कर रहता है, वो तेरे पास आए पैसा मांगने तो दे मत देना।’
‘मेरे से पैसा क्यों मांगेगा?’
‘किसी गुरु का चेला है। उसी के नाम पर डोनेशन मांगता रहता है। कल दो-तीन लोग कंप्लेन कर रहे थे। उसकी बातों में मत आना। एकदम बाबाजी लोग की तरह मीठा बोलता है। हाथ-वात देखने लगता है।… मुझे तो जरा भी यकीन नहीं है। तू तो अपनी है, इसलिए तुझे आगाह कर रही हूं।’
‘थैंक्यू आंटी।’
‘थैंक्यू किस बात का? कोई दिक्कत हो तो मुझे बताना। वो मिसेज राणा है ना, वो कुछ कह रही थी शिरीन के बारेमें… ’
‘क्या?’
‘लाजपत नगर में एक मैरिड आदमी के साथ रहती है। अच्छा, देख उसे कुछ बताना मत। इधर ही आ रही है, मैं चली।’
आंटी एक सांस में चाय गटक कर उठ गईं। शिरीन आ कर उसी कुर्सी पर बैठ गई, ‘मार्निंग बड्डी। मुझे क्यों नहींउठाया? एक बात बता सोना, ये भेजा फ्राय आंटी हमेशा तुझसे क्यों चिपकी रहती है?’
सोना हंसने लगी,‘सही नाम रखा है उनका। वो तो हर किसी के साथ गॉसिपयाती रहती हैं। मुझ अकेले पर कृपानहीं करतीं।’
‘मैं तो बहुत बच कर रहती हूं उनसे। कुछ कहती नहीं। पता नहीं किसके सामने क्या बोल देंगी?’
नाश्ते के दौरान शिरीन उससे और खुल गई। अपनी जिंदगी, नौकरी के बारे में बताने लगी। कोलकता की शिरीनलगभग पांच साल से दिल्ली रहती है। आर्किटेक्ट है। अपना काम करती थी, पर अब लगता है, कहीं नौकरीकरना बेहतर है। जल्द ही वह अपने प्रेमी से शादी करने जा रही है। प्रेमी…गौरव का तलाक होने जा रहा है। एकबेटी है। वह बेटी को अपने साथ रखना चाहता है।
शिरीन ने भावुक हो कर कहा,‘उसकी बेटी कली बिलकुल टिन्नी की तरह लगती है। अपने पापा से बेहद अटैच्डहै। मुझे भी बहुत पसंद है। मैंने गौरव से कहा है कि मुझे और बच्चे नहीं चाहिए। कली को प्यार से पालेंगे। वाइफका कहीं चक्कर चल रहा है। पर वो कली की कस्टडी देने के लिए खूब ब्लैक मेल कर रही है गौरव को। आई होप,सब जल्दी से ठीक हो जाए।’
सोना शिरीन के लिए संवेदना से भर गई। शिरीन ने उसके हाथ पर हाथ रख कर मुलायम आवाज में कहा,‘तुमकिसी को बताओगी तो नहीं? मैं बहुत जल्दी किसी से खुलती नहीं हूं, पर तुममें कुछ बात है…’
सोना ने उसके हाथ पर अपनी पकड़ मजबूत करते हुए आश्वासन सा दिया,‘नहीं शिरीन, कभी नहीं। मुझे पता हैलोग बात का बतंगड़ किस तरह बनाते हैं।’शिरीन के होंठों पर बड़ी प्यारी सी मुस्कान आई।
सोना ने बात बदलते हुए कहा, ‘देखो भई, मुझे अपनी शादी में इनवाइट करना मत भूलना। वैसे तुम कभी भीगौरव और कली के साथ हमारे घर आ सकती हो। सच बड़ा मजा आएगा।’शिरीन के चेहरे पर उजास सी फैलगई।
सीन 6
लंच के बाद सब अपने कमरे में आराम करना चाहते थे। तय हुआ कि शाम की चाय के बाद सब लेक घूमनेजाएंगे।
टिन्नी को सुलाने के बाद सोना आनंद के पास आ कर बैठ गई। वापसी नजदीक थी। कल चित्तौड़ गढ़, उसकेअगले दिन पैकअप।
सोना को कुछ शॉपिंग करने का मन था। आनंद ने उसे पांच हजार निकाल कर दे दिए। बातों-बातों में शीला आंटीका जिक्र चल निकला। सोना बताने लगी कि शिरीन ने उनका बहुत मजेदार नाम रखा है-भेजा फ्राई। बात सेबात निकलती गई और सोना ने आनंद को शिरीन के बारे में सबकुछ बता दिया। कैसे वह एक शादीशुदा आदमीसे शादी करने जा रही है, जिसका पहले से एक बच्चा है, वगैरह..
आनंद के चेहरे पर अजीब सी व्यंग्यात्मक मुस्कुराहट आई। सोना ने पूछा,‘क्या हुआ?’
‘मुझे पहले ही पता था…अपने आपको बहुत तोप समझती है ना…कैरेक्टर लैस वूमन!’
सोना एक पल को ठिठकी। फिर उसे तेज गुस्सा आ गया,‘तुम उसके बारे में ऐसे कैसे बोल सकते हो? मैंने गलतीकी जो तुम्हें बता दिया। तुम और बस में दूसरे आदमी, साले लेचरस, सब उसे घूर सकते हो, उसके आगे-पीछेघूम सकते हो और कैरेक्टर लैस वो हो गई, तुम लोग नहीं। ’
आनंद खिसिया गया,‘यह मैं नहीं, सब कह रहे हैं… तुम मुझ पर क्यों भडक़ रही हो? वैसे मुझे तुम्हारी उससेदोस्ती पसंद नहीं आ रही। कहीं तुम्हें भी अपने जैसा ना बना दे।’
सोना भडक़ गई,‘अपने जैसा? क्या मतलब है तुम्हारा? कितनी ओछी सोच है तुम्हारी। उसने ऐसा क्या करदिया? शादी ही तो कर रही है? क्या तलाक के बाद सब शादी नहीं करते? उसमें हिम्मत है जो बता रही है…औरआदमी…’
आनंद पस्त होते हुए बोला‘देवी, मुझ पर क्यों बरस रही हो? पर वो जो दिखती है, वो है नहीं… मैं नहीं चाहता कि ऐसी औरतों से हमारा मेलजोल हो। ’
सोना पांव पटकती हुई कमरे से बाहर निकल गई। लॉबी में बहुत देर तक बैठी रही। शाम को सबके साथ बाहरजाने का मूड नहीं था। तैयार हो कर बस में बैठी, तो शीला आंटी लपक कर उसके पास आ गई अपने गॉसिप कापिटारा ले कर।
सोना के पास शीला आंटी को देख कर शिरीन खुद पीछे बैठने चली गई।
रात को होटल पहुंचे। हाथ-मुंह धोने के बाद शिरीन टिन्नी को ले कर डायनिंग रूम में आई। वह कुर्सी खिसकाकर बैठने वाली ही थी कि बगल की टेबल से शिरीन की आवाज आई,‘सोना, यहां आ जाओ।’
सोना ने पलट कर देखा, आनंद कुछ दूरी पर खड़ा था, सबसे बात करते हुए। उसकी निगाहें सोना पर ही टिकीथीं। सोना शिरीन के पास आ कर बैठ गई। टिन्नी खाने के लिए नखरा दिखाते हुए पापा के पास भाग गई।शिरीन की प्लेट में नूडल्स था। पर वह अनमनी सी लग रही थी।
सोना अपने लिए ढेर सा खाना डाल कर ले आई। शिरीन की तरफ देख कर पूछ लिया, ‘क्या हुआ, तबीयत तोठीक है?’
शिरीन ने सिर हिलाया, फिर धीरे से कहा, ‘सोना, तुमने मेरे बारे में किसी से बात नहीं की ना?’
सोना अचकचा गई, ‘नहीं तो। क्या हुआ?’
शिरीन धीरे से बोली, ‘मैं कुछ देर पहले रूम से बाहर निकली थी यहां आने के लिए। शीला आंटी मिल गई। मुझेदेखते ही कहा, तुम्हें एक से बढ़ कर एक लडक़े मिलेंगे, तो फिर एक मैरिड आदमी से शादी क्यों कर रही हो? कहोतो मैं कुछ हेल्प करूं?’ कहते-कहते शिरीन की आंखें भर आईं।
सोना हड़बड़ा गई। संयत हो कर बोली, ‘शिरीन, सच मानो, मैंने किसी से नहीं कहा। शीला आंटी मेरे बगल मेंबैठी जरूर थीं, पर…’
शिरीन की आंखों से आंसू बह निकले,‘मैंने तुम पर बहुत ट्रस्ट किया था सोना। मेरा ऐसा मजाक बन गया कि…’
वह अपने को रोक नहीं पाई। एकदम से उठ कर वहां से चली गई। सोना हक्की-बक्की सी बैठी रही।
सीन 7
रात देर तक सोना होटल के बरामदे में बैठी रही। शीला आंटी को शिरीन के बारे में कैसे पता चला? कहीं आनंद नेतो नहीं कह दिया? कैसे यकीं दिलाए शिरीन को कि उसने कुछ नहीं कहा है भेजा फ्राय से। सिर में दर्द सा हो रहाथा। टिन्नी आनंद के साथ कमरे में चली गई थी। सोना उठी। कमरे का दरवाजा खुला था। टिन्नी सो गई थी।आनंद कुछ पढ़ रहा था।
पर्स में टटोल कर सोना ने डिस्प्रिन खोजा। गिलास में पानी डाल कर डिस्प्रिन घोल लिया। गिलास लिए वहआनंद के पास आ गई,‘आज डिनर टेबल पर तुमने देखा, शिरीन कितना नाराज हो कर गई है? क्या शीला आंटीको तुमने बताया …उसकी मैरिड आदमी से शादी के बारे में?’
‘पागल हो गई हो तुम? ये औरतों वाली गपशप अपने पास रखो।’
सोना की आंखें डबडबा आईं,‘वो सोच रही है कि मैंने बताया है उन्हें। शीला आंटी मेरे पास जरूर बैठी थीं,पर मैंनेकुछ नहीं कहा उनसे। शिरीन बहुत नाराज है मुझसे।’
आनंद ने बस उसके हाथ पर अपना हाथ रख कर कहा, बहुत देर हो गई है, सो जाओ। सुबह देख लेंगे।’
सीन 8
सुबह चित्तौड़ गढ़ के लिए जल्दी निकलना था। नाश्ता बस में ही करना था। सब लोग होटल के बाहर जमा होगए। सोना कुछ अनमनी सी थी। उसने देखा, शिरीन कहीं नहीं दिखी।
बस पर चढऩे से पहले उसने शीला आंटी से पूछ लिया, ‘शिरीन नहीं दिख रही?’
‘अरे तू बस में चढ़। अपनी बगल वाली सीट मेरे लिए रोक ले। तुझे पूरी बात बताती हूं मिस शिरीन की।’
सोना खिडक़ी के पास वाली सीट पर बैठ गई। सबको बस में चढ़ा कर अपने थुलथुल शरीर को संभालती वो धप्पसे उसकी बगल में आ बैठीं। लंबी सांस ले कर बोलीं,‘इस बार तो ट्रिप बड़ा लंबा पड़ गया। थक गई। अंकल को भीदेख, हांफ रहे हैं। अब कुछ दिनों तक हम कहीं नहीं जाएंगे। फिर ऐसे-ऐसे लोग। एक को संभालो, तो दूसरानाराज।’
सोना ने सिर हिलाया। फिर धीरे से पूछा, ‘आपने शिरीन से कुछ कहा था क्या कल?’
आंटी की आंखें चौड़ी हो गईं, ‘मैंने? नहीं तो? ’
‘आपने उससे शादी के बारे में कुछ पूछा था ना?’
‘अरे वो? वो मुई तो हाथ ही नहीं रखने दे रही थी। वो लंबी वाली मिसेज पाटिल हैं ना वो अपने भांजे के लिएशिरीन का रिश्ता पूछ रही थीं। मैंने सोचा, चलो घेर लेते हैं लडक़ी को।’
‘आपको किसने बताया कि वह मैरिड आदमी के साथ शादी करने जा रही है?’
आंटी की आंखें आश्चर्य से फैल गईं, ‘सच है क्या? मैंने तो यूं ही तुक्का मार दिया। तुझे बताया था ना उड़ती-उड़ती खबर थी उसके बॉय फ्रेंड के बारे में। जाने दे परे। मैं तो बस ऐसे ही…’
‘तो वह है कहां? यहां तो नहीं दिख रही?’
‘वो चली गई ना…वापस… खब्ती लडक़ी है। मैं सुबह तुम्हारे अंकल के साथ कमरे से बाहर आई। नाश्ते का, बसका इंतजाम देखना था। वो यहीं खड़ी थी बस के सामने। मैंने उससे पूछा भी कि चाय पिएगी क्या? मैं नाश्ता पैककरवाने शैफ के पास जा रही थी। बीस मिनट बाद लौट कर आई, तो वह यहीं मिली, रोती हुई, बोली, मैं घर जारही हूं। मैंने पूछा क्यों? तो बोली, अंकल ने छेड़ा है। अंकल ने? तुमने तो देखा है ना सोना? ठीक से खड़े भी नहीं होपाते। लडक़ी को छेड़ेंगे? बोलने लगी कि अभी वो इसी वक्त यहां से जा रही है। वह कमरे में गई, सामान ले करनीचे आई और टैक्सी में बैठ कर चली गई। अजीब है ना? तू ही बता सोना? अंकल, छेडऩे की उम्र है उनकी? वोभी उस मुस्टंडी को?’
सोना ने पीछे मुड़ कर देखा, आनंद के पास अंकल बैठे थे उसके कान से सट कर उसे कुछ बता रहे थे। अचानकसोना के दिमाग की बत्ती बजी, जब आनंद उसे कैरेक्टर लैस मान सकते थे तो अंकल क्यों नहीं? उसे चक्कर साआ गया। शीला आंटी की गपशप जारी थी। कोहनी मारती हुई वे कुछ कह रही थीं, किसी के बारे में। बस एकव्यक्ति नहीं था उनकी बातों में…
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