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फोटो जर्नलिस्ट के काम को कुछ यूं बयां करती है ये कविता...
हरी गहलौत, वरिष्ठ छायाकार ।। फोटो जर्नलिस्ट का हर मजहब से नाता होता है... वो मंदिर भी जाता है और मस्जिद भी, फोटो जर्नलिस्ट का हर मजहब से नाता होता है। वो सुख - दुख, हंसी-उदासी हर तरह की यादें बनाता है, फोटो जर्नलिस्ट का हर इमोशन से नाता
समाचार4मीडिया ब्यूरो 8 years ago
हरी गहलौत,
वरिष्ठ छायाकार ।।
फोटो जर्नलिस्ट का हर मजहब से नाता होता है...
वो मंदिर भी जाता है
और मस्जिद भी,
फोटो जर्नलिस्ट का हर मजहब से नाता होता है।
वो सुख - दुख, हंसी-उदासी हर तरह की यादें बनाता है,
फोटो जर्नलिस्ट का हर इमोशन से नाता होता है।।
वो लेटकर, उठकर, बैठकर तो कभी टेढ़ा मेढा सा दिखता है,
फोटो जर्नलिस्ट का हर एंगल से नाता होता है।
वो अकेले के लिए भी दौड़ता है, और भीड़ के लिए भी,
फोटो जर्नलिस्ट या हर सिचुएशन से नाता होता है।।
मत पूछ मेरे भाई एक फोटो जर्नलिस्ट क्या क्या संजोता है
हर पल की यादों की छवि वो हर हाथ में दे जाता है।।
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