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महुआ विवाद पर ग्रुप एडिटर राणा यशवंत से विशेष बातचीत
<p><b>समाचार4मीडिया.कॉम ब्यूरो</b></p> <div>महुआ न्यूजलाइन कर्मियों की सभी मांगे प्रबंधन ने मान ली ह
समाचार4मीडिया ब्यूरो 10 years ago
समाचार4मीडिया.कॉम ब्यूरो
महुआ न्यूजलाइन कर्मियों की सभी मांगे प्रबंधन ने मान ली हैं। कल देर रात महुआ प्रबंधन ने महुआ न्यूज लाइन के 110 कर्मियों को दो महीने की सैलरी और एक महीने का कंपेनशेसन चेक सौंप दिया। इस पूरे वाकये पर समाचार4मीडिया ने महुआ न्यूज के ग्रुप एडिटर राणा यशवंत से बातचीत की। प्रस्तुत है एक अंश :
पिछले दो दिनों से चल रहा विवाद खत्म हो गया है. इस समय की स्थिति क्या है?
महुआ न्यूजलाइन कर्मियों की सभी मांगे प्रबंधन ने मान ली हैं। कल देर रात महुआ प्रबंधन ने महुआ न्यूज लाइन के 110 कर्मियों को दो महीने की सैलरी और एक महीने का कंपेनशेशन चेक सौंप दिया। इस समय मेरे पास अपने सहयोगियों और प्रबंधन की ओर से कई नैतिक जिम्मेदारियां हैं, उन्हें पूरा करना है। फिर भी मैं अपने सभी सहयोगियों और दर्शकों को कहना चाहूंगा कि इस समय स्थितियां विपरीत थीं इसलिए प्रबंधन को हाथ खींचने पड़े जैसे ही हालात सुधरेंगे महुआ न्यूज लाइन की शुरुआत करीब दो महीने में फिर से की जाएगी।
प्रबंधन ने अपने कर्मचारियों की मांगे शुरू में ही क्यों नहीं मांगी?
ऐसा नहीं है कि प्रबंधन कर्मचारियों की मांग मानने के पक्ष नहीं था। हां चीजों को सेटल करने में थोड़ा वक्त तो लगता ही है। मुझे खुशी है कि मेरे सहयोगी अपनी मांगो के लिए बहुत ही मर्यादित तरीके से लड़े। और इस लड़ाई में मैं हर पल उनके साथ रहा। चूंकि संपादक एडिटोरियल और प्रबंधन के बीच की खिड़की होता है। इसलिए मुझे दोहरी भूमिका निभानी थी जोकि मैंने सच्चाई के साथ निभाई। मेरे सहयोगियों ने अपने व्यवहार और वाणी से मेरा मान रखा और प्रबंधन ने मेरे सहयोगियों की मांगो उसी रूप में स्वीकार करके उनका मान रखा।
यह पूरा वाक्या क्या था. चैनल को बंद करने का फैसले की शुरुआत कैसे हुई?
मैनेजमेंट को लगा कि मौजूदा हालात में हम महुआ न्यूजलाइन (यूपी-उत्तराखंड) ठीक से नहीं चला पा रहे हैं। हालांकि जो टीम इस चैनल को देख रही थी वह एक बेहतरीन टीम थी। लेकिन वास्तविक हालात का पता तभी चलता है जब आप रिंग में उतरिए। इस समय जो हालात प्रबंधन के सामने हैं उनके मद्देनजर मैनेजमेंट ने सोचा की इतनी बेहतर टीम रोज-रोज न घुटे इससे अच्छा है कि चैनल बंद कर दिया जाए। मेरे सहयोगियों और मेरे बीच एक भरोसा का रिश्ता था और वह रिश्ता बना हुआ है। कर्मचारियों का प्रोटेस्ट केवल इस बात का था कि उन्हें उनका हिस्सा मिले। प्रबंधन ने अपना फंड देखा और वादे के मुताबिक सबकी मांगे पूरी हुईं।
चैनल से जुड़े काफी लोग कह रहे हैं कि पी के तिवारी जी चैनल चलाना चाहते थे. फिर उनकी अनुपस्थिति में चैनल बंद करने का फैसला क्यों लिया गया?
मुझे नहीं पता कि पी के तिवारी जी ने अपनी यह इच्छा किससे जताई। चूंकि इस तरह की कोई बात उन्होंने मुझसे नहीं कही थी इसलिए इस बारे में मैं कोई टिप्पणी नहीं कर सकता।
उत्तराखंड चैनल तो अच्छा परफॉरमेंस दे रहा था। फिर उसे बंद करने का फैसला क्यों लेना पड़ा?
देखिए दोनों चैनल की टीम तो लगभग एक ही थी। अगर एक चैनल चलाते हैं तो पीसीआर की टीम और सिस्टम की टीम उतनी ही बड़ी होगी। आउटपुट की टीम को भले ही थोड़ा छोटा कर सकते हैं। ऑपरेशनल सेटअप को बहुत कम नहीं कर सकते. फर्क केवल ट्रेवल डिस्ट्रीब्य़ूशन कॉस्ट का होता है. लेकिन ऑपरेशन कॉस्ट कम नहीं था. फिर भी मैं आपको दोबारा स्पष्ट कर रहा हूं कि अभी की जो मौजूदा स्थित है उसमें फिलहाल यह अस्थायी फैसला लिया गया है।
तो यह माना जाए कि स्थितियां बेहतर होने पर चैनल की दोबारा शुरुआत होगी?
बिल्कुल! जैसे ही प्रबंधन मजबूती कि स्थिति में आएगा। चैनल की शुरुआत फिर से होगी।
आपके महुआ से जुड़ने के बाद कई स्थापित संस्थानों से लोग आपके कहने पर आए थे. आपको नहीं लगता कि उनके लिए संकट पैदा हो गया है?
देखिए, भविष्य द्रष्टा तो केवल संजय ही थे। मैं खुद एक बड़े संस्थान में बड़े पद पर था। मैं यहां आया यह सोच लेकर कि अपने सहयोगियों के साथ मिलकर एक नई दुनिया खड़ा करूंगा. यह बात सही है क मेरे साथ जो टीम आई उनमें से 90 फीसदी लोग सिर्फ मेरे भरोसे आए थे। लेकिन अब उनका भविष्य संकट में है ऐसी बात नहीं है। हर दीवार से एक दरवाजा निकलता है। वे प्रतिभाशाली लोग हैं। आने वाले समय में यही लोग इंडस्ट्री के सितारे होंगे।
बिहार-झारखंड चैनल की जितनी रनिंग कॉस्ट है उससे कम ही रेवेन्यू उसे मिल रहा है फिर इस चैनल को क्यों नहीं बंद किया गया?
बिहार-झारखंड लगातार 39 हफ्ते से नंबर एक है. उस पर चलने वाली हर खबर वहां की सियासत की तकदीर तय कर रही है। दोनों ही चैनल स्थापित हैं औऱ उनकी एक विशेष पहचान है। उस चैनल में बहुत घाटा नहीं है, जो थोड़ा घाटा हो भी रहा है वह इवेंट और शोज के माध्यम से पूरा हो रहा है। यह चैनल भोजपुरी जोनर में एक बड़ा ब्रांड है। ऐसा नहीं है कि प्रबंधन न्यूजलाइन को बिना सोचे-समझे ही बंद कर दिया। अगर बंद ही करना था तो फिर चलाते ही क्यों? मैनेजमेंट की नीयत में कोई खोट नहीं है। टीम बेहद प्रतिभावान थी और मैनेजमेंट की कोशिश थी कि बिहार-झारखंड की तरह यूपी उत्तराखंड भी स्थापित चैनल हो।
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